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  • कामा अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के अदम्य साहस पर आधारित सिनेमाई कहानी में स्टाफ नर्स की भूमिका निभाएंगी कंगना रनौत

    कामा अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के अदम्य साहस पर आधारित सिनेमाई कहानी में स्टाफ नर्स की भूमिका निभाएंगी कंगना रनौत

    नई दिल्ली । मुंबई में हुए 26/11 के भीषण आतंकवादी हमलों की त्रासदी के बीच मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की एक ऐसी अनसुनी गाथा अब बड़े पर्दे पर अवतरित होने जा रही है, जिसने चिकित्सा जगत के सर्वोच्च सेवा भाव को रेखांकित किया था। प्रख्यात अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ को लेकर व्यापक रूप से चर्चा में हैं। इस फिल्म के माध्यम से मुंबई आतंकी हमले के दौरान कामा अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दिखाई गई अदम्य वीरता और अप्रतिम साहस की वास्तविक कहानी को देश के सामने लाया जा रहा है।

    इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कंगना रनौत ने एक साक्षात्कार में बताया कि जब पूरा मुंबई शहर आतंकी हमलों और विस्फोटों से थर्रा रहा था, उस भयावह दौर में कामा अस्पताल के भीतर एक अलग ही संघर्ष चल रहा था। अस्पताल परिसर के ठीक बाहर और भीतर लगातार गोलियां चल रही थीं और चारों तरफ दहशत का माहौल था। ऐसी विकट और जानलेवा परिस्थितियों में भी अस्पताल की नर्सों और डॉक्टरों ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। चिकित्सा कर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए न केवल मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि उस भीषण अफरा-तफरी के बीच 20 गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी भी करवाई।

    फिल्म की मुख्य विषयवस्तु और प्रेरणा के संबंध में जानकारी देते हुए अभिनेत्री ने कहा कि संकट के समय स्वास्थ्य कर्मियों का यह समर्पण देश के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टर और नर्सें हर परिस्थिति में समाज के रक्षक बनकर सामने आते हैं। कंगना ने विशेष रूप से अस्पताल की उन नर्सों के साहस की सराहना की, जो बम धमाकों के बीच भी मरीजों की सुध लेने के लिए अस्पताल की विभिन्न मंजिलों पर दौड़ती रहीं और अपने मानवीय दायित्वों को पूरा किया।

    व्यावसायिक और रणनीतिक मोर्चे पर इस फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग हाल ही में भुवनेश्वर में आयोजित की गई थी। इस उच्च स्तरीय स्क्रीनिंग के दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव सहित कई वरिष्ठ राजनेता उपस्थित रहे। इस अवसर पर कंगना रनौत ने फिल्म को राष्ट्र निर्माण में अदृश्य भूमिका निभाने वाले मेहनतकश लोगों को समर्पित करते हुए इसे राज्य में टैक्स फ्री करने की आधिकारिक मांग की, जिस पर उन्हें राज्य सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन भी प्राप्त हुआ है।

    फिल्म के शीर्षक ‘भारत भाग्य विधाता’ के चयन के पीछे की पृष्ठभूमि को साझा करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि यह नाम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक विशेष संबोधन से प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने अपने एक भाषण के दौरान देश के श्रमिकों, कारीगरों और समाज के निचले पायदान पर काम करने वाले मेहनतकश लोगों को ‘भारत भाग्य विधाता’ कहकर सम्मानित किया था। इसी विचार को आत्मसात करते हुए फिल्म का नाम तय किया गया, जिसमें कंगना रनौत स्वयं एक साधारण स्टाफ नर्स के रूप में मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जो व्यवस्था की एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है।

    फिल्म के हालिया आधिकारिक ट्रेलर में यह स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि किस प्रकार कुछ बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले वार्ड बॉयज और नर्सों ने 26/11 के उस काले दौर में सूझबूझ का परिचय देते हुए 400 से अधिक नागरिकों की जान बचाई थी। यह फिल्म न केवल एक आतंकी हमले की पृष्ठभूमि पर बनी थ्रिलर है, बल्कि यह देश की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ माने जाने वाले ग्राउंड स्टाफ के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक गंभीर सिनेमाई प्रयास है। यह बहुप्रतीक्षित फिल्म आगामी 12 जून को देश भर के सिनेमाघरों में आधिकारिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी।

  • अटारी-वाघा बॉर्डर पर ए आर रहमान ने लाइव प्रस्तुति देकर रचा नया इतिहास, बीएसएफ जवानों को समर्पित किया ऐतिहासिक कॉन्सर्ट

    अटारी-वाघा बॉर्डर पर ए आर रहमान ने लाइव प्रस्तुति देकर रचा नया इतिहास, बीएसएफ जवानों को समर्पित किया ऐतिहासिक कॉन्सर्ट

    नई दिल्ली । देश की सीमाओं की रक्षा में मुस्तैद सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जांबाज जवानों को सम्मान देने और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुरों से सजाने के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना। महान संगीतकार और ऑस्कर विजेता ए आर रहमान ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकी पर लाइव परफॉर्मेंस देकर एक नया इतिहास रच दिया है। इस अनूठे और भव्य कॉन्सर्ट का आयोजन देश के वीर जवानों को समर्पित करने के साथ-साथ एक विशेष सिनेमाई कलाकृति के प्रचार के उद्देश्य से किया गया था।

    मशहूर फिल्ममेकर इम्तियाज अली ने अपनी बहुप्रतीक्षित आगामी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के प्रमोशन के लिए एक बेहद अनूठा और प्रभावशाली रास्ता चुना। वे फिल्म की मुख्य संगीत टीम, जिसमें दिग्गज संगीतकार ए आर रहमान और लोकप्रिय पार्श्व गायक मोहित चौहान शामिल थे, के साथ सीधे भारत-पाकिस्तान की अटारी-वाघा सीमा पर पहुंचे। इस दौरान सीमा पर तैनात जवानों का हौसला बढ़ाने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक विशेष म्यूजिकल ट्रिब्यूट का आयोजन किया गया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावविभ्वल कर दिया।

    अटारी बॉर्डर पोस्ट पर आयोजित इस लाइव कॉन्सर्ट के दौरान ए आर रहमान ने जब अपनी सुरीली और जादुई आवाज में कालजयी गीत ‘वंदे मातरम’ गाना शुरू किया, तो पूरा वातावरण देशभक्ति के नारों और सुरों से गूंज उठा। सीमाओं की रक्षा करने वाले बीएसएफ के जवानों के लिए यह एक बेहद भावुक और गौरवशाली क्षण था। इस ऐतिहासिक प्रस्तुति में गायक मोहित चौहान ने भी सुर से सुर मिलाकर समां बांध दिया, जिससे वहां उपस्थित जवानों और दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।

    फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह के प्रमोशन को एक क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है, जहां व्यावसायिक लाभ से ऊपर उठकर राष्ट्र के प्रहरियों को केंद्र में रखा गया। इम्तियाज अली और ए आर रहमान की इस जोड़ी ने हमेशा अपने संगीत और फिल्मों से दर्शकों के दिलों को छुआ है, लेकिन इस बार सरहद पर दी गई इस लाइव प्रस्तुति ने कला और राष्ट्र सेवा के मेल की एक नई मिसाल पेश की है। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों और जवानों ने इस सम्मान के लिए पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।

    यह आयोजन न केवल संगीत की दुनिया में एक मील का पत्थर साबित हुआ है, बल्कि इसने यह भी संदेश दिया है कि कला और संस्कृति देश के रक्षकों के योगदान की सदैव ऋणी रहेगी। अटारी बॉर्डर पर गूंजे ए आर रहमान के सुरों की गूंज और जवानों के चेहरों पर तैरती मुस्कान सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के मीडिया में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। देशभक्ति से ओतप्रोत यह कॉन्सर्ट आने वाले लंबे समय तक भारतीय संगीत और संस्कृति के इतिहास में याद रखा जाएगा।

  • बरगी डैम क्रूज हादसे पर बुरहानपुर में श्रद्धांजलि सभा: ताप्ती सेवा समिति ने जताया शोक, सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

    बरगी डैम क्रूज हादसे पर बुरहानपुर में श्रद्धांजलि सभा: ताप्ती सेवा समिति ने जताया शोक, सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली।  मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में सामाजिक संगठनों ने जबलपुर के बरगी डैम क्रूज हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। ताप्ती सेवा समिति ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना सभा आयोजित की और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
    समिति के सदस्यों ने इस हादसे को व्यवस्थागत लापरवाही का परिणाम बताया। उनका कहना है कि दुर्घटना स्थल कोई दूरस्थ क्षेत्र नहीं था, इसके बावजूद समय पर पर्याप्त बचाव दल और संसाधन उपलब्ध नहीं हो सके, जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
    श्रद्धांजलि सभा में उस दर्दनाक दृश्य का भी जिक्र किया गया, जिसमें एक मां अपने बच्चे को सीने से लगाए हुए मृत अवस्था में मिली थी। इस घटना ने सभी उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
    ताप्ती सेवा समिति ने जल पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा मानकों की गंभीरता से समीक्षा करने की मांग की है। सदस्यों ने सवाल उठाया कि क्या लाइफ जैकेट और आपातकालीन व्यवस्थाएं सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई हैं, और आपात स्थिति में तुरंत सक्रिय होने वाली रेस्क्यू टीम क्यों मौजूद नहीं थी।
    समिति ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सभी जल पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। हर क्रूज और नाव में पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ की अनिवार्यता होनी चाहिए।
    इसके साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की कि आपात स्थिति के लिए त्वरित कार्रवाई करने वाली रेस्क्यू टीम और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। समिति ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
    इस अवसर पर कई सामाजिक कार्यकर्ता और समिति सदस्य मौजूद रहे, जिन्होंने हादसे को अत्यंत दुखद और चिंताजनक बताया।
  • आशा भोसले ने मॉरीशस जाने से पहले तलत अजीज के साथ रिकॉर्ड किया था अपना आखिरी गीत।

    आशा भोसले ने मॉरीशस जाने से पहले तलत अजीज के साथ रिकॉर्ड किया था अपना आखिरी गीत।

    नई दिल्ली:महान पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन के बाद संगीत जगत में शोक की गहरी लहर है और देशभर के कलाकार उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इसी क्रम में प्रसिद्ध गायक तलत अजीज ने एक बेहद भावुक स्मृति साझा करते हुए बताया कि मॉरीशस जाने से पहले आशा जी ने उनके लिए आखिरी बार एक गीत की पंक्ति गुनगुनाई थी, जो अब उनकी यादों में हमेशा के लिए बस गई है।

    तलत अजीज ने कहा कि आशा भोसले जैसी महान कलाकार का जाना संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने बताया कि कुछ ही समय पहले उनकी आशा जी से बातचीत हुई थी। उस दौरान जब वह मॉरीशस जाने वाले थे, तब आशा जी ने उनसे कहा था कि लौटने के बाद जरूर मिलना। इसी दौरान उन्होंने अपनी तबीयत ठीक न होने के बावजूद उनके लिए एक पंक्ति गुनगुनाई, जिसे वह अपने जीवन की सबसे अनमोल यादों में से एक मानते हैं।

    उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि आशा भोसले का स्वभाव अत्यंत स्नेहपूर्ण और सहज था। वह हर किसी से प्रेम और सम्मान के साथ पेश आती थीं। उनके साथ उनका रिश्ता बेहद खास था और वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें उनके साथ समय बिताने और उनसे जुड़ने का अवसर मिला।

    संगीत जगत के अन्य कलाकारों ने भी आशा भोसले को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व और गायकी की सराहना की। कलाकारों का कहना है कि उनकी आवाज में एक अद्भुत मिठास और गहराई थी, जो हर गीत को खास बना देती थी। उन्होंने अपने लंबे करियर में हर शैली के गीतों को नई ऊंचाई दी और अपनी बहुमुखी प्रतिभा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

    कुछ कलाकारों ने यह भी कहा कि आशा भोसले ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने जीवन में जो मुकाम हासिल किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने न केवल संगीत को जिया, बल्कि हर गीत में भावनाओं को इस तरह पिरोया कि वह सीधे लोगों के दिलों तक पहुंच गया।

    गायकों और कलाकारों के अनुसार, आशा भोसले के गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं और आने वाले समय में भी उनकी यह विरासत कायम रहेगी। उन्होंने नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए एक मानक स्थापित किया है कि किस तरह अपने अलग अंदाज और समर्पण से पहचान बनाई जाती है।

    आशा भोसले का योगदान भारतीय संगीत जगत में सदैव अमिट रहेगा और उनकी आवाज हमेशा लोगों के दिलों में गूंजती रहेगी।

  • स्वतंत्रता के महान सेनानी और निर्भीक पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी को देश ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    स्वतंत्रता के महान सेनानी और निर्भीक पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी को देश ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली: में बुधवार को महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और निर्भीक पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी की पुण्यतिथि के अवसर पर देश के कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। नेताओं ने एक स्वर में कहा कि विद्यार्थी जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, साहस और निर्भीक पत्रकारिता का अद्वितीय उदाहरण है, जो आज भी देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

    केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पंकज चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपनी लेखनी के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने आगे कहा कि उनकी लेखनी ने जनमानस में राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि विद्यार्थी जी ने अपनी लेखनी के माध्यम से ब्रिटिश शासन के अन्याय और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई। उन्होंने उन्हें भारतीय पत्रकारिता का पुरोधा और महान स्वतंत्रता सेनानी बताया। साथ ही कहा कि उनके प्रखर विचार और आदर्श जीवन सदैव युवाओं को समाज और राष्ट्र की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गणेश शंकर विद्यार्थी को निडर, नैतिक और जनपक्षधर पत्रकारिता का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा को समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जी का योगदान देश को हमेशा राष्ट्रसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उन्हें प्रखर राष्ट्रवादी विचारों और निर्भीक लेखनी के लिए याद करते हुए कहा कि उन्होंने अंग्रेजी शासन को अपनी लेखनी से चुनौती दी। उनके सिद्धांत और आदर्श जीवन आज भी सत्य, न्याय और राष्ट्रसेवा के पथ पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी और निर्भीक पत्रकारिता के अप्रतिम प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की स्वतंत्रता और जनजागरण के लिए उनका अटूट समर्पण सदैव याद रखा जाएगा। उनकी लेखनी ने समाज में चेतना का संचार किया और देश की एकता व अखंडता के प्रति उनकी निष्ठा अनुकरणीय है।

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए कहा कि वे न केवल महान स्वतंत्रता सेनानी थे बल्कि जनसेवा के लिए समर्पित एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व भी थे। उन्होंने कहा कि अन्याय, शोषण और सांप्रदायिकता के विरुद्ध उनकी निडर आवाज आज भी समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य कर रही है।

    इस प्रकार देश के विभिन्न शीर्ष नेताओं ने एक स्वर में गणेश शंकर विद्यार्थी के योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बताया।

  • फैशन जगत में शोक की लहर मनीष मल्होत्रा की मां का निधन अंतिम विदाई में उमड़े सितारे

    फैशन जगत में शोक की लहर मनीष मल्होत्रा की मां का निधन अंतिम विदाई में उमड़े सितारे

    नई दिल्ली:प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा के जीवन में एक गहरा और भावुक क्षण तब आया जब उनकी मां सुदर्शन मल्होत्रा ने 94 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म और फैशन जगत में शोक की लहर दौड़ गई और कई दिग्गज हस्तियां मनीष मल्होत्रा के आवास पर पहुंचकर उन्हें सांत्वना देने के लिए उपस्थित हुईं। यह दृश्य बेहद भावुक था जहां एक ओर दुख का माहौल था तो दूसरी ओर सितारे इस कठिन समय में परिवार के साथ मजबूती से खड़े नजर आए।

    श्रद्धांजलि देने पहुंचे प्रमुख चेहरों में कई बड़े नाम शामिल थे जिनमें ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन जैसे लोकप्रिय कलाकार भी मौजूद रहे। इसके अलावा कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा, करण जौहर, करिश्मा कपूर, रवीना टंडन, उर्मिला मातोंडकर, अनन्या पांडे, संजय कपूर और उनकी बेटी शनाया, रोनित रॉय, अलवीरा खान, वरुण धवन और नताशा दलाल, अर्जुन कपूर, सोनाली बेंद्रे और नुसरत भरूचा जैसे कई सितारे भी अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे। यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि मनीष मल्होत्रा इंडस्ट्री में कितने सम्मानित और प्रिय हैं।

    मनीष मल्होत्रा और उनकी मां के बीच गहरा और मजबूत रिश्ता रहा है। सुदर्शन मल्होत्रा हमेशा अपने बेटे के सपनों और करियर के पीछे एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़ी रहीं। मनीष ने कई बार इंटरव्यू और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी मां के प्रति अपने प्रेम और कृतज्ञता को व्यक्त किया है। मदर्स डे पर लिखे गए उनके भावुक शब्द इस रिश्ते की गहराई को दर्शाते हैं जहां उन्होंने अपनी मां को अपनी ताकत और प्रेरणा बताया था।

    अपने एक पोस्ट में मनीष ने लिखा था कि उनकी मां ने बचपन से ही उनके कपड़ों और फिल्मों के प्रति जुनून को प्रोत्साहित किया और हमेशा उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। यह रिश्ता केवल मां और बेटे का नहीं बल्कि एक मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत का भी था जिसने मनीष मल्होत्रा के करियर को आकार दिया।

    परिवार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि सुदर्शन मल्होत्रा का अंतिम संस्कार 20 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे मुंबई के सांता क्रूज़ पश्चिम स्थित हिंदू श्मशान घाट में किया जाएगा। बयान में यह भी कहा गया कि वह अपने पीछे एक लंबी और समृद्ध जीवन यात्रा, अनमोल यादें और एक मजबूत विरासत छोड़कर गई हैं जो हमेशा परिवार को मार्गदर्शन देती रहेगी।

    मनीष मल्होत्रा के लिए यह समय बेहद कठिन है और पूरी इंडस्ट्री उनके साथ खड़ी नजर आ रही है। इस दुखद घड़ी में हर कोई प्रार्थना कर रहा है कि परिवार को इस क्षति को सहने की शक्ति मिले और सुदर्शन मल्होत्रा की आत्मा को शांति प्राप्त हो।

  • बैतूल में नरोत्तम मिश्रा ने सुरभि खंडेलवाल को दी श्रद्धांजलि

    बैतूल में नरोत्तम मिश्रा ने सुरभि खंडेलवाल को दी श्रद्धांजलि


    बैतूल । बैतूल मध्यप्रदेश में गुरुवार को पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दुखद निधन के शोक में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल के निवास पर पहुंचकर उनकी पुत्री सुरभि खंडेलवाल को श्रद्धांजलि दी अर्पित की।

    मिश्रा ने खंडेलवाल परिवार से मुलाकात कर इस कठिन समय में संवेदना व्यक्त की और परिवार को ढांढस बंधाया। उन्होंने दिवंगत सुरभि के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और कुछ समय तक परिवार के साथ बैठकर शोक व्यक्त किया।

    इस दौरान उन्होंने कहा कि परिवार इस दुखद समय में अकेला नहीं है और पार्टी एवं समाज उनके साथ खड़ा है। मिश्रा की यह श्रद्धांजलि स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच एक भावनात्मक जुड़ाव का अवसर भी बनी।

    खंडेलवाल परिवार ने मिश्रा के इस दुख साझा करने के कदम की सराहना की और कहा कि उनके साथ मौजूदगी से परिवार को कुछ सांत्वना मिली।

    यह घटना बैतूल में राजनीति और समाज के बीच मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक बनकर सामने आई, जहां नेता अपने संवेदनशील दृष्टिकोण से परिवार के दुःख में साझीदार बने।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि


    भोपाल । मोहन यादव ने स्वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने सावरकर को प्रखर राष्ट्रभक्त, समाज सुधारक और दूरदर्शी चिंतक बताते हुए कहा कि उनका जीवन त्याग, समर्पण और राष्ट्रसेवा का अनुपम उदाहरण है।

    डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि मातृभूमि की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए वीर सावरकर ने जो संघर्ष किया वह भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने अदम्य साहस और अटूट संकल्प का परिचय दिया। उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज सुधार, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक चेतना के लिए सावरकर का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सावरकर के आदर्शों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

    डॉ. यादव ने अंत में कहा कि वीर सावरकर का जीवन युगों युगों तक देशवासियों विशेषकर युवाओं को प्रेरित करता रहेगा और उनका त्याग सदैव श्रद्धा के साथ याद किया जाएगा।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की 7वीं वर्षगांठ पर वायुसेना के शौर्य को किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की 7वीं वर्षगांठ पर वायुसेना के शौर्य को किया नमन


    भोपाल । मोहन यादव ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की 7वीं वर्षगांठ पर भारतीय वायुसेना के अद्वितीय साहस, शौर्य और पराक्रम को नमन किया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और स्वाभिमान की रक्षा के लिए हमारे वीर जवानों ने जिस बहादुरी और संकल्प का परिचय दिया, वह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि भारत के शूरवीर सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में भी अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए मातृभूमि की गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखा। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना का पराक्रम केवल सैन्य शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकजुटता, दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मसम्मान का भी प्रतीक है।

    उन्होंने आगे कहा कि देश के जवानों का साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है। राष्ट्र की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश को अपने वीर सपूतों पर सदैव गर्व रहेगा।

    डॉ. यादव ने इस अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान देशवासियों के लिए अमिट स्मृति है और राष्ट्र उनकी वीरता को सदैव याद रखेगा।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी श्रद्धांजलि देश सेवा, साहित्य और महिला सशक्तिकरण की अद्वितीय प्रतिष्ठा को किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती पर दी श्रद्धांजलि देश सेवा, साहित्य और महिला सशक्तिकरण की अद्वितीय प्रतिष्ठा को किया नमन


    भोपाल । मध्य प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी कवयित्री समाजसेवी और राजनीति की प्रखर हस्ती भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज उन्हें गहन श्रद्धा और सम्मान के साथ नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरोजिनी नायडू ने अपने जीवन को न केवल भारत की आजादी के संघर्ष के लिए समर्पित किया बल्कि साहित्यिक प्रतिभा और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भी अपरिमेय योगदान दिया।

    मुख्यमंत्री के अनुसार सरोजिनी नायडू न केवल एक बड़ा कवि और स्वतंत्रता सेनानी थीं बल्कि उन्होंने महिलाओं को शिक्षा नेतृत्व और सामाजिक भागीदारी के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि सरोजिनी नायडू का जीवन आज भी प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनकी कविताएँ तथा विचार सदैव राष्ट्र सेवा की भावना को उज्जवल बनाते रहेंगे।

    चर्चाओं में आज सरोजिनी नायडू का नाम भारत की कोकिला के रूप में विदित है जिन्होंने अंग्रेज़ों के शासन के विरोध में अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने कांग्रेस के कई महत्वपूर्ण अधिवेशनों में भाग लिया और 1925 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष भी बनीं। स्वतंत्रता के पश्चात् वे उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल भी रहीं और महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में याद की जाती हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से कहा कि सरोजिनी नायडू की कविताओं में देशभक्ति मानवीय संवेदनाओं और महिला अधिकारों की गूढ़ अभिव्यक्ति है जो आज भी युवाओं के हृदय में उमंग भरती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के उत्थान शिक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और सरोजिनी नायडू के आदर्शों को अपनाते हुए हर स्तर पर महिला सशक्तिकरण को और भी व्यापक बनाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरोजिनी नायडू के विचार उनकी लेखनी और मातृभूमि के प्रति उनका समर्पण हम सबके लिए प्रेरणा के अनंत स्रोत हैं। आज हम उनके बलिदान और योगदान को नमन करते हैं और आशा करते हैं कि आने वाली पीढ़ियाँ भी उनके सिद्धांतों से प्रेरित होंगी।