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  • राजीव गांधी की जयंती पर वीर भूमि पहुंचे सोनिया, राहुल और प्रियंका, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

    राजीव गांधी की जयंती पर वीर भूमि पहुंचे सोनिया, राहुल और प्रियंका, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली ।भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर गुरुवार को देशभर में उन्हें याद किया गया। 20 अगस्त को मनाए जाने वाले इस अवसर को सद्भावना दिवस के रूप में भी जाना जाता है। दिल्ली स्थित वीर भूमि पर राजीव गांधी की समाधि पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वीर भूमि पहुंचकर राजीव गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री के राजनीतिक जीवन, विचारों और देश के विकास में उनके योगदान को याद किया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राजीव गांधी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के जरिए पूर्व प्रधानमंत्री को याद करते हुए उनके योगदान को नमन किया। इसके अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित अन्य नेताओं ने भी राजीव गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था। वह देश के ऐसे प्रधानमंत्री रहे, जिन्होंने अपेक्षाकृत कम उम्र में यह जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने देश की बागडोर संभाली और 40 वर्ष की उम्र में भारत के प्रधानमंत्री बने। वह 1984 से 1989 तक इस पद पर रहे।

    राजीव गांधी के कार्यकाल को भारत में तकनीक, संचार, शिक्षा और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए भी याद किया जाता है। उनके समर्थक उन्हें युवा भारत की बदलती जरूरतों और तकनीकी विकास के साथ देश को आगे बढ़ाने वाले नेताओं में शामिल करते हैं। उनके राजनीतिक विचारों में युवाओं की भागीदारी और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर रहा।

    कांग्रेस नेताओं ने जयंती के अवसर पर राजीव गांधी की उस विरासत को भी रेखांकित किया, जिसमें युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने और देश में आधुनिक तकनीकी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया था। मतदान की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष करने का संवैधानिक बदलाव भी उनके प्रधानमंत्रित्व काल की महत्वपूर्ण पहलों में गिना जाता है। इससे बड़ी संख्या में युवाओं को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिला।

    राजीव गांधी का राजनीतिक जीवन हालांकि उपलब्धियों के साथ-साथ कई विवादों और चुनौतियों से भी जुड़ा रहा। प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद भी वह राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी सभा के दौरान आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी।

    राजीव गांधी की जयंती पर होने वाले कार्यक्रम हर वर्ष उनकी सार्वजनिक और राजनीतिक विरासत को याद करने का अवसर बनते हैं। वीर भूमि पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे नेताओं ने उनके योगदान को स्मरण करते हुए देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, तकनीकी प्रगति और युवाओं की भूमिका से जुड़े उनके विचारों को रेखांकित किया। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का एक साथ पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देना उनके राष्ट्रीय राजनीतिक जीवन की व्यापक पहचान को भी दर्शाता है।

  • उज्जैन पहुंचे CM मोहन यादव, पूर्व मंत्री पारस जैन को दी श्रद्धांजलि; परिवार से मिलकर जताया दुख

    उज्जैन पहुंचे CM मोहन यादव, पूर्व मंत्री पारस जैन को दी श्रद्धांजलि; परिवार से मिलकर जताया दुख

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सोमवार को उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री पारस जैन के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री हेलीपैड से सीधे पारस जैन के निवास पहुंचे और उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए दिवंगत नेता के योगदान को याद किया।

    मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में पूर्व मंत्री पारस जैन के निधन के बाद शोक का माहौल है। लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे पारस जैन का निधन होने की खबर सामने आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में दुख की लहर फैल गई। उनके निधन को पार्टी के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के उज्जैन पहुंचने पर हेलीपैड पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री बिना किसी अन्य कार्यक्रम के सीधे पारस जैन के निवास पहुंचे। वहां उन्होंने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी और परिवार के लोगों से मिलकर संवेदना व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व मंत्री और उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक पारस जैन का निधन अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि पारस जैन ने अपने राजनीतिक जीवन में जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाई और लंबे समय तक समाज एवं संगठन के लिए कार्य किया।

    मुख्यमंत्री ने दिवंगत नेता को याद करते हुए कहा कि पारस जैन का योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से भी पारस जैन को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्री और कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल सहित अन्य नेताओं ने भी पारस जैन को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

    पारस जैन उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके थे और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे। भाजपा संगठन में उनकी पहचान एक अनुभवी और जमीन से जुड़े नेता के रूप में रही। लंबे राजनीतिक सफर के दौरान उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई थी।

    उनके निधन के बाद उज्जैन सहित पूरे प्रदेश में भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने दुख व्यक्त किया है। अंतिम यात्रा से पहले मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके निवास पहुंचकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। पारस जैन के राजनीतिक योगदान और सामाजिक जुड़ाव को याद करते हुए लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं

  • कारगिल विजय दिवस पर देश ने याद किया वीरों का शौर्य, जयशंकर और राजनाथ सिंह ने बलिदान को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

    कारगिल विजय दिवस पर देश ने याद किया वीरों का शौर्य, जयशंकर और राजनाथ सिंह ने बलिदान को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली । देश ने रविवार को 27वां कारगिल विजय दिवस पूरे सम्मान और गर्व के साथ मनाया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के अदम्य साहस और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उनका शौर्य आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

    विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि यह दिन उन बहादुर सैनिकों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति को याद करने का अवसर है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों की सेवा और त्याग को देश हमेशा सम्मान और गर्व के साथ याद रखेगा। उनके अनुसार कारगिल के वीरों की गाथा केवल सैन्य इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प और आत्मविश्वास की पहचान भी है।

    कारगिल विजय दिवस भारत की उस ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है, जब वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए दुश्मन के कब्जे से रणनीतिक चोटियों को दोबारा अपने नियंत्रण में लिया था। बर्फ से ढकी ऊंची पहाड़ियों, प्रतिकूल मौसम और लगातार हो रही गोलाबारी के बीच भारतीय जवानों ने अद्वितीय साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। 26 जुलाई को मिली इस विजय ने भारतीय सेना की क्षमता और राष्ट्र की एकजुटता का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया।

    कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल युद्ध स्मारक पहुंचकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ध्वजारोहण समारोह में भाग लिया और शौर्य विजय यात्रा के समापन कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भारतीय सेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि कारगिल युद्ध स्मारक पर लहराता तिरंगा उन वीर सैनिकों के अद्वितीय बलिदान का प्रतीक है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 1999 में भारतीय सीमा पर हुई घुसपैठ का भारतीय सेना ने अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दुश्मन ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ उठाने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने असाधारण वीरता का परिचय देते हुए सभी चुनौतियों को परास्त कर दिया। उन्होंने कहा कि कारगिल के योद्धाओं ने केवल ऊंची चोटियां ही नहीं जीतीं, बल्कि पूरे देश का विश्वास और सम्मान भी मजबूत किया।

    राजनाथ सिंह ने कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज पांडे सहित अनेक वीर सैनिकों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी वीरगाथाएं आज भी देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा, कर्तव्य और त्याग का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का स्मरण नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक को देश के प्रति अपने दायित्वों का एहसास कराने वाला अवसर भी है। उनके अनुसार सेवा, समर्पण और बलिदान जैसे मूल्य ही किसी भी मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सशस्त्र बल लगातार देश की सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर मोर्चे पर सजग हैं। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूरे देश ने वीर शहीदों के अद्वितीय योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। यह दिवस एक बार फिर देशवासियों को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और वीर सैनिकों के बलिदान से प्रेरणा लेने का संदेश देता है।

  • देशभर में चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने याद किया अमर बलिदान और राष्ट्रसेवा

    देशभर में चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने याद किया अमर बलिदान और राष्ट्रसेवा

    नई दिल्ली । महान क्रांतिकारी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर गुरुवार को पूरे देश में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनके साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को याद करते हुए उन्हें नमन किया। नेताओं ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का जीवन आज भी देशवासियों, विशेषकर युवाओं के लिए राष्ट्रसेवा, स्वाभिमान और समर्पण का प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

    नई दिल्ली से जारी अपने संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद के निडर साहस और अटूट देशभक्ति का गौरवपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि आजाद ने अनगिनत युवा भारतीयों को देश के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा दी और उनका संकल्प आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के लिए उनका संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया और भारतीयों के मन में स्वाभिमान, आत्मविश्वास तथा राष्ट्रचेतना का संचार किया। उन्होंने कहा कि आजाद ने अपने अदम्य साहस, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की तथा युवाओं के हृदय में मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना जगाई। उनका बलिदानी जीवन देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

    केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए आजाद ने त्याग, संघर्ष और बलिदान की जो अमर गाथा लिखी, वह आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने उन्हें भारत माता का अनन्य उपासक और महान क्रांतिकारी बताते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।

    देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने संदेशों में चंद्रशेखर आजाद के जीवन और योगदान को याद किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके प्रसिद्ध उद्घोष का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्रहित में कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उनके साहस, स्वाभिमान और सर्वोच्च बलिदान को प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चंद्रशेखर आजाद को प्रदेश की माटी का गौरव बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पण से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा दी। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि उनका त्याग, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति देशवासियों को हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देते रहेंगे। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी उनके बलिदान और क्रांतिकारी जीवन को नमन करते हुए कहा कि उनका संघर्ष और राष्ट्रप्रेम आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।

    चंद्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन महान सेनानियों में शामिल हैं जिन्होंने अपने अदम्य साहस, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से देश की आजादी की लड़ाई को नई गति दी। उनका जीवन केवल इतिहास का गौरवशाली अध्याय नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और देश के प्रति समर्पण का ऐसा संदेश है, जो आज भी देश के युवाओं को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देता है।

  • क्रिकेट जगत ने महान ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स को किया नमन, लॉर्ड्स वनडे से पहले रखा गया मौन

    क्रिकेट जगत ने महान ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स को किया नमन, लॉर्ड्स वनडे से पहले रखा गया मौन


    नई दिल्ली । क्रिकेट इतिहास के महानतम ऑलराउंडरों में शुमार सर गारफील्ड गैरी सोबर्स को रविवार को लंदन के ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले से पहले दोनों टीमों के खिलाड़ियों, मैच अधिकारियों और मैदान पर मौजूद हजारों दर्शकों ने एक मिनट का मौन रखकर महान क्रिकेटर को अंतिम सम्मान दिया। पूरे मुकाबले के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ी काली पट्टी बांधकर मैदान पर उतरे।

    89 वर्ष की आयु में शुक्रवार को सर गैरी सोबर्स के निधन से पूरे क्रिकेट जगत में शोक की लहर है। वेस्टइंडीज क्रिकेट के स्वर्णिम दौर के सबसे बड़े सितारों में शामिल सोबर्स ने अपने खेल से जिस तरह दुनिया को प्रभावित किया, उसकी छाप आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में कायम है। लॉर्ड्स में दी गई यह श्रद्धांजलि उनके इसी असाधारण योगदान का सम्मान थी।

    इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने सोबर्स को याद करते हुए कहा कि वे वेस्टइंडीज क्रिकेट समुदाय के लिए एक महान प्रेरणा थे और अब तक के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों में गिने जाते हैं। आर्चर ने बताया कि कुछ महीने पहले बारबाडोस में उनकी सोबर्स से मुलाकात हुई थी और उस दौरान भी वे बेहद उत्साही और सकारात्मक नजर आए थे। उनके निधन की खबर ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से गहरा दुख पहुंचाया।

    इंग्लैंड के युवा बल्लेबाज जैकब बेथेल ने भी सर गैरी सोबर्स को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें एक असाधारण व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि सोबर्स केवल महान क्रिकेटर ही नहीं बल्कि बेहद विनम्र इंसान भी थे। उनके साथ बिताया गया हर पल सीख और प्रेरणा से भरा रहता था। बेथेल ने कहा कि जहां भी सोबर्स मौजूद रहते थे वहां का माहौल अपने आप जीवंत हो जाता था।

    28 जुलाई 1936 को बारबाडोस के ब्रिजटाउन में जन्मे सर गैरी सोबर्स ने 1954 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। बाएं हाथ के बल्लेबाज और बहुमुखी गेंदबाज के रूप में उन्होंने दो दशकों तक वेस्टइंडीज क्रिकेट का नेतृत्व किया। 93 टेस्ट मैचों में उन्होंने 8032 रन बनाए, जिसमें 26 शतक और 30 अर्धशतक शामिल रहे। उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर नाबाद 365 रन रहा, जो लंबे समय तक विश्व रिकॉर्ड भी रहा। गेंदबाजी में उन्होंने 235 टेस्ट विकेट भी अपने नाम किए और अपने हरफनमौला प्रदर्शन से क्रिकेट इतिहास में अमिट पहचान बनाई।

    सर गैरी सोबर्स प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ओवर में लगातार छह छक्के लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज भी थे। उन्होंने यह ऐतिहासिक उपलब्धि 1968 में हासिल की थी। टेस्ट क्रिकेट में 8000 से अधिक रन और 200 से ज्यादा विकेट लेने वाले चुनिंदा महान ऑलराउंडरों में उनका नाम आज भी सम्मान के साथ लिया जाता है।

    लॉर्ड्स में भारत और इंग्लैंड के खिलाड़ियों द्वारा दी गई श्रद्धांजलि ने यह साबित कर दिया कि सर गैरी सोबर्स केवल वेस्टइंडीज ही नहीं बल्कि पूरी क्रिकेट दुनिया की अमूल्य धरोहर थे। उनका योगदान और विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

  • टीवी होस्ट मनीष पॉल की मां उर्मिल पॉल का निधन, भावुक श्रद्धांजलि से छलका दर्द, फिल्म और टीवी जगत ने जताई संवेदना

    टीवी होस्ट मनीष पॉल की मां उर्मिल पॉल का निधन, भावुक श्रद्धांजलि से छलका दर्द, फिल्म और टीवी जगत ने जताई संवेदना

    नई दिल्ली । अभिनेता और लोकप्रिय टीवी होस्ट मनीष पॉल की मां उर्मिल पॉल का 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। इस दुखद समाचार की जानकारी स्वयं मनीष पॉल ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा कर दी। उन्होंने अपनी मां को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साथ बिताए जीवन के अनमोल पलों को याद किया और उनके जाने को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी व्यक्तिगत क्षति बताया। इस खबर के सामने आने के बाद फिल्म और टेलीविजन जगत से जुड़े कई कलाकारों ने उनके प्रति संवेदना व्यक्त की।

    मनीष पॉल ने अपने संदेश में लिखा कि उनकी मां केवल परिवार की सदस्य नहीं थीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी ताकत, प्रेरणा और जीवन का सबसे सुरक्षित सहारा थीं। उन्होंने कहा कि मां के जाने के बाद जीवन में ऐसा खालीपन आ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी लिखा कि अब उनके पास मां की सीख, स्नेह, साहस और संस्कार ही ऐसी अमूल्य विरासत हैं, जो हमेशा उनके जीवन का मार्गदर्शन करती रहेंगी।

    अपने भावुक संदेश में मनीष ने मां के प्रति आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिस निस्वार्थ प्रेम और अपनापन उन्हें अपनी मां से मिला, उसके लिए वह जीवनभर कृतज्ञ रहेंगे। उन्होंने उनकी आत्मा की शांति की कामना करते हुए विश्वास जताया कि एक दिन फिर उनसे मुलाकात होगी। इस भावनात्मक संदेश ने उनके प्रशंसकों और शुभचिंतकों को भी भावुक कर दिया।

    मां के निधन की खबर सामने आने के बाद मनोरंजन जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से मनीष पॉल और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं। कई कलाकारों ने उन्हें इस कठिन समय में मजबूत बने रहने की शुभकामनाएं दीं और दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही अनेक प्रशंसकों ने भी शोक संदेश साझा करते हुए परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

    मनीष पॉल लंबे समय से भारतीय टेलीविजन और मनोरंजन उद्योग का चर्चित चेहरा रहे हैं। अपने सहज अंदाज, हास्य शैली और प्रभावशाली मंच संचालन के कारण उन्होंने दर्शकों के बीच विशेष पहचान बनाई है। ऐसे समय में उनके निजी जीवन में आई इस अपूरणीय क्षति पर उनके प्रशंसकों ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है।

    परिवार के लिए किसी प्रिय सदस्य का निधन अत्यंत कठिन और भावनात्मक क्षण होता है। ऐसे समय में मिलने वाला सामाजिक सहयोग और संवेदनाएं परिवार को मानसिक संबल प्रदान करती हैं। मनीष पॉल के संदेश में भी मां के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जिसने अनेक लोगों को भावुक कर दिया।

    उर्मिल पॉल के निधन के बाद उनके परिवार में शोक का माहौल है। अंतिम संस्कार और अन्य पारिवारिक कार्यक्रमों से संबंधित विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की गई है। फिलहाल मनोरंजन जगत, मित्रों और प्रशंसकों की ओर से लगातार शोक संदेश सामने आ रहे हैं। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए मनीष पॉल और उनके परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति मिलने की कामना की है।

  • कामा अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के अदम्य साहस पर आधारित सिनेमाई कहानी में स्टाफ नर्स की भूमिका निभाएंगी कंगना रनौत

    कामा अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के अदम्य साहस पर आधारित सिनेमाई कहानी में स्टाफ नर्स की भूमिका निभाएंगी कंगना रनौत

    नई दिल्ली । मुंबई में हुए 26/11 के भीषण आतंकवादी हमलों की त्रासदी के बीच मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की एक ऐसी अनसुनी गाथा अब बड़े पर्दे पर अवतरित होने जा रही है, जिसने चिकित्सा जगत के सर्वोच्च सेवा भाव को रेखांकित किया था। प्रख्यात अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ को लेकर व्यापक रूप से चर्चा में हैं। इस फिल्म के माध्यम से मुंबई आतंकी हमले के दौरान कामा अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दिखाई गई अदम्य वीरता और अप्रतिम साहस की वास्तविक कहानी को देश के सामने लाया जा रहा है।

    इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कंगना रनौत ने एक साक्षात्कार में बताया कि जब पूरा मुंबई शहर आतंकी हमलों और विस्फोटों से थर्रा रहा था, उस भयावह दौर में कामा अस्पताल के भीतर एक अलग ही संघर्ष चल रहा था। अस्पताल परिसर के ठीक बाहर और भीतर लगातार गोलियां चल रही थीं और चारों तरफ दहशत का माहौल था। ऐसी विकट और जानलेवा परिस्थितियों में भी अस्पताल की नर्सों और डॉक्टरों ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। चिकित्सा कर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए न केवल मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि उस भीषण अफरा-तफरी के बीच 20 गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी भी करवाई।

    फिल्म की मुख्य विषयवस्तु और प्रेरणा के संबंध में जानकारी देते हुए अभिनेत्री ने कहा कि संकट के समय स्वास्थ्य कर्मियों का यह समर्पण देश के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टर और नर्सें हर परिस्थिति में समाज के रक्षक बनकर सामने आते हैं। कंगना ने विशेष रूप से अस्पताल की उन नर्सों के साहस की सराहना की, जो बम धमाकों के बीच भी मरीजों की सुध लेने के लिए अस्पताल की विभिन्न मंजिलों पर दौड़ती रहीं और अपने मानवीय दायित्वों को पूरा किया।

    व्यावसायिक और रणनीतिक मोर्चे पर इस फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग हाल ही में भुवनेश्वर में आयोजित की गई थी। इस उच्च स्तरीय स्क्रीनिंग के दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव सहित कई वरिष्ठ राजनेता उपस्थित रहे। इस अवसर पर कंगना रनौत ने फिल्म को राष्ट्र निर्माण में अदृश्य भूमिका निभाने वाले मेहनतकश लोगों को समर्पित करते हुए इसे राज्य में टैक्स फ्री करने की आधिकारिक मांग की, जिस पर उन्हें राज्य सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन भी प्राप्त हुआ है।

    फिल्म के शीर्षक ‘भारत भाग्य विधाता’ के चयन के पीछे की पृष्ठभूमि को साझा करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि यह नाम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक विशेष संबोधन से प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने अपने एक भाषण के दौरान देश के श्रमिकों, कारीगरों और समाज के निचले पायदान पर काम करने वाले मेहनतकश लोगों को ‘भारत भाग्य विधाता’ कहकर सम्मानित किया था। इसी विचार को आत्मसात करते हुए फिल्म का नाम तय किया गया, जिसमें कंगना रनौत स्वयं एक साधारण स्टाफ नर्स के रूप में मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जो व्यवस्था की एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है।

    फिल्म के हालिया आधिकारिक ट्रेलर में यह स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि किस प्रकार कुछ बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले वार्ड बॉयज और नर्सों ने 26/11 के उस काले दौर में सूझबूझ का परिचय देते हुए 400 से अधिक नागरिकों की जान बचाई थी। यह फिल्म न केवल एक आतंकी हमले की पृष्ठभूमि पर बनी थ्रिलर है, बल्कि यह देश की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ माने जाने वाले ग्राउंड स्टाफ के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक गंभीर सिनेमाई प्रयास है। यह बहुप्रतीक्षित फिल्म आगामी 12 जून को देश भर के सिनेमाघरों में आधिकारिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी।

  • अटारी-वाघा बॉर्डर पर ए आर रहमान ने लाइव प्रस्तुति देकर रचा नया इतिहास, बीएसएफ जवानों को समर्पित किया ऐतिहासिक कॉन्सर्ट

    अटारी-वाघा बॉर्डर पर ए आर रहमान ने लाइव प्रस्तुति देकर रचा नया इतिहास, बीएसएफ जवानों को समर्पित किया ऐतिहासिक कॉन्सर्ट

    नई दिल्ली । देश की सीमाओं की रक्षा में मुस्तैद सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जांबाज जवानों को सम्मान देने और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुरों से सजाने के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना। महान संगीतकार और ऑस्कर विजेता ए आर रहमान ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकी पर लाइव परफॉर्मेंस देकर एक नया इतिहास रच दिया है। इस अनूठे और भव्य कॉन्सर्ट का आयोजन देश के वीर जवानों को समर्पित करने के साथ-साथ एक विशेष सिनेमाई कलाकृति के प्रचार के उद्देश्य से किया गया था।

    मशहूर फिल्ममेकर इम्तियाज अली ने अपनी बहुप्रतीक्षित आगामी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के प्रमोशन के लिए एक बेहद अनूठा और प्रभावशाली रास्ता चुना। वे फिल्म की मुख्य संगीत टीम, जिसमें दिग्गज संगीतकार ए आर रहमान और लोकप्रिय पार्श्व गायक मोहित चौहान शामिल थे, के साथ सीधे भारत-पाकिस्तान की अटारी-वाघा सीमा पर पहुंचे। इस दौरान सीमा पर तैनात जवानों का हौसला बढ़ाने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक विशेष म्यूजिकल ट्रिब्यूट का आयोजन किया गया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावविभ्वल कर दिया।

    अटारी बॉर्डर पोस्ट पर आयोजित इस लाइव कॉन्सर्ट के दौरान ए आर रहमान ने जब अपनी सुरीली और जादुई आवाज में कालजयी गीत ‘वंदे मातरम’ गाना शुरू किया, तो पूरा वातावरण देशभक्ति के नारों और सुरों से गूंज उठा। सीमाओं की रक्षा करने वाले बीएसएफ के जवानों के लिए यह एक बेहद भावुक और गौरवशाली क्षण था। इस ऐतिहासिक प्रस्तुति में गायक मोहित चौहान ने भी सुर से सुर मिलाकर समां बांध दिया, जिससे वहां उपस्थित जवानों और दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।

    फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह के प्रमोशन को एक क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है, जहां व्यावसायिक लाभ से ऊपर उठकर राष्ट्र के प्रहरियों को केंद्र में रखा गया। इम्तियाज अली और ए आर रहमान की इस जोड़ी ने हमेशा अपने संगीत और फिल्मों से दर्शकों के दिलों को छुआ है, लेकिन इस बार सरहद पर दी गई इस लाइव प्रस्तुति ने कला और राष्ट्र सेवा के मेल की एक नई मिसाल पेश की है। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों और जवानों ने इस सम्मान के लिए पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।

    यह आयोजन न केवल संगीत की दुनिया में एक मील का पत्थर साबित हुआ है, बल्कि इसने यह भी संदेश दिया है कि कला और संस्कृति देश के रक्षकों के योगदान की सदैव ऋणी रहेगी। अटारी बॉर्डर पर गूंजे ए आर रहमान के सुरों की गूंज और जवानों के चेहरों पर तैरती मुस्कान सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के मीडिया में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। देशभक्ति से ओतप्रोत यह कॉन्सर्ट आने वाले लंबे समय तक भारतीय संगीत और संस्कृति के इतिहास में याद रखा जाएगा।

  • बरगी डैम क्रूज हादसे पर बुरहानपुर में श्रद्धांजलि सभा: ताप्ती सेवा समिति ने जताया शोक, सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

    बरगी डैम क्रूज हादसे पर बुरहानपुर में श्रद्धांजलि सभा: ताप्ती सेवा समिति ने जताया शोक, सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली।  मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में सामाजिक संगठनों ने जबलपुर के बरगी डैम क्रूज हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। ताप्ती सेवा समिति ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना सभा आयोजित की और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
    समिति के सदस्यों ने इस हादसे को व्यवस्थागत लापरवाही का परिणाम बताया। उनका कहना है कि दुर्घटना स्थल कोई दूरस्थ क्षेत्र नहीं था, इसके बावजूद समय पर पर्याप्त बचाव दल और संसाधन उपलब्ध नहीं हो सके, जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
    श्रद्धांजलि सभा में उस दर्दनाक दृश्य का भी जिक्र किया गया, जिसमें एक मां अपने बच्चे को सीने से लगाए हुए मृत अवस्था में मिली थी। इस घटना ने सभी उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
    ताप्ती सेवा समिति ने जल पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा मानकों की गंभीरता से समीक्षा करने की मांग की है। सदस्यों ने सवाल उठाया कि क्या लाइफ जैकेट और आपातकालीन व्यवस्थाएं सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई हैं, और आपात स्थिति में तुरंत सक्रिय होने वाली रेस्क्यू टीम क्यों मौजूद नहीं थी।
    समिति ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सभी जल पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। हर क्रूज और नाव में पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ की अनिवार्यता होनी चाहिए।
    इसके साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की कि आपात स्थिति के लिए त्वरित कार्रवाई करने वाली रेस्क्यू टीम और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। समिति ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
    इस अवसर पर कई सामाजिक कार्यकर्ता और समिति सदस्य मौजूद रहे, जिन्होंने हादसे को अत्यंत दुखद और चिंताजनक बताया।
  • आशा भोसले ने मॉरीशस जाने से पहले तलत अजीज के साथ रिकॉर्ड किया था अपना आखिरी गीत।

    आशा भोसले ने मॉरीशस जाने से पहले तलत अजीज के साथ रिकॉर्ड किया था अपना आखिरी गीत।

    नई दिल्ली:महान पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन के बाद संगीत जगत में शोक की गहरी लहर है और देशभर के कलाकार उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इसी क्रम में प्रसिद्ध गायक तलत अजीज ने एक बेहद भावुक स्मृति साझा करते हुए बताया कि मॉरीशस जाने से पहले आशा जी ने उनके लिए आखिरी बार एक गीत की पंक्ति गुनगुनाई थी, जो अब उनकी यादों में हमेशा के लिए बस गई है।

    तलत अजीज ने कहा कि आशा भोसले जैसी महान कलाकार का जाना संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने बताया कि कुछ ही समय पहले उनकी आशा जी से बातचीत हुई थी। उस दौरान जब वह मॉरीशस जाने वाले थे, तब आशा जी ने उनसे कहा था कि लौटने के बाद जरूर मिलना। इसी दौरान उन्होंने अपनी तबीयत ठीक न होने के बावजूद उनके लिए एक पंक्ति गुनगुनाई, जिसे वह अपने जीवन की सबसे अनमोल यादों में से एक मानते हैं।

    उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि आशा भोसले का स्वभाव अत्यंत स्नेहपूर्ण और सहज था। वह हर किसी से प्रेम और सम्मान के साथ पेश आती थीं। उनके साथ उनका रिश्ता बेहद खास था और वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें उनके साथ समय बिताने और उनसे जुड़ने का अवसर मिला।

    संगीत जगत के अन्य कलाकारों ने भी आशा भोसले को याद करते हुए उनके व्यक्तित्व और गायकी की सराहना की। कलाकारों का कहना है कि उनकी आवाज में एक अद्भुत मिठास और गहराई थी, जो हर गीत को खास बना देती थी। उन्होंने अपने लंबे करियर में हर शैली के गीतों को नई ऊंचाई दी और अपनी बहुमुखी प्रतिभा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

    कुछ कलाकारों ने यह भी कहा कि आशा भोसले ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने जीवन में जो मुकाम हासिल किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने न केवल संगीत को जिया, बल्कि हर गीत में भावनाओं को इस तरह पिरोया कि वह सीधे लोगों के दिलों तक पहुंच गया।

    गायकों और कलाकारों के अनुसार, आशा भोसले के गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं और आने वाले समय में भी उनकी यह विरासत कायम रहेगी। उन्होंने नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए एक मानक स्थापित किया है कि किस तरह अपने अलग अंदाज और समर्पण से पहचान बनाई जाती है।

    आशा भोसले का योगदान भारतीय संगीत जगत में सदैव अमिट रहेगा और उनकी आवाज हमेशा लोगों के दिलों में गूंजती रहेगी।