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  • अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद कमोडिटी बाजार में जोरदार उछाल, सोना-चांदी की कीमतों ने छुए नए शिखर

    अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद कमोडिटी बाजार में जोरदार उछाल, सोना-चांदी की कीमतों ने छुए नए शिखर

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव में कमी आने और शांति समझौते की पुष्टि के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला है। इस घटनाक्रम का असर भारतीय कमोडिटी बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहां सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोना और चांदी की कीमतों में मजबूत तेजी दर्ज की गई। निवेशकों की बढ़ती सक्रियता और बाजार की बेहतर होती धारणा के बीच दोनों प्रमुख कीमती धातुओं ने शुरुआती कारोबार में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की।

    कमोडिटी बाजार में कारोबारी गतिविधियों की शुरुआत के साथ ही सोने की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। बाजार खुलते ही सोना अपने पिछले बंद स्तर की तुलना में हजारों रुपये की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती सत्र में कीमतें लगातार मजबूत बनी रहीं और दिन के उच्च स्तर तक पहुंच गईं। निवेशकों ने इसे वैश्विक परिस्थितियों में आए बदलाव और बाजार की स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा।

    चांदी के बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। कारोबार शुरू होते ही चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी आई और शुरुआती घंटों में ही यह तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज करने में सफल रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग और निवेशकों की नई खरीदारी ने चांदी को अतिरिक्त समर्थन प्रदान किया है। इसके चलते चांदी ने महत्वपूर्ण स्तरों को पार करते हुए नई मजबूती के संकेत दिए हैं।

    विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की पुष्टि से वैश्विक निवेशकों में विश्वास बढ़ा है। लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता कम होने से वित्तीय बाजारों में स्थिरता लौटने की उम्मीद जगी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की खबर को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय तेल और ऊर्जा व्यापार की दृष्टि से अत्यंत अहम माना जाता है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोना फिलहाल एक महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। यदि कीमतें मौजूदा प्रतिरोध क्षेत्र के ऊपर स्थिर रहने में सफल होती हैं तो निकट अवधि में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर, प्रमुख समर्थन स्तरों के नीचे फिसलने पर कीमतों में सीमित गिरावट की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल बाजार का रुख सकारात्मक बना हुआ है और निवेशक आगे के वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं।

    चांदी के संबंध में भी विशेषज्ञों का दृष्टिकोण उत्साहजनक बना हुआ है। प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार करने की स्थिति में इसमें और मजबूती देखने को मिल सकती है। हालांकि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा तेजी को बनाए रखने के लिए कीमतों का ऊंचे स्तरों पर टिके रहना आवश्यक होगा। यदि ऐसा होता है तो निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है।

    वित्तीय बाजारों के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतक, ऊर्जा बाजार की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम सोना एवं चांदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिलहाल शांति समझौते से पैदा हुए सकारात्मक माहौल ने निवेशकों को राहत दी है और कीमती धातुओं के बाजार में नई ऊर्जा का संचार किया है।

  • पेट्रोल-डीजल और LPG होंगे सस्ते…. ! ट्रंप का दावा- US-ईरान के बीच हुई डील, होर्मुज खोलने पर बनी सहमति

    पेट्रोल-डीजल और LPG होंगे सस्ते…. ! ट्रंप का दावा- US-ईरान के बीच हुई डील, होर्मुज खोलने पर बनी सहमति


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी तनाव के बीच एलपीजी (LPG), पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel) को लेकर राहत भरी खबर है। आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel) और एलपीजी के दाम (LPG Price) में कटौती देखने को मिल सकती है। बड़ी खबर यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Pakistan’s Prime Minister Shehbaz Sharif) ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से आवाजाही के लिए खोलने और सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी है।


    भारत के लिए क्यों है अहम यह शांति समझौता?

    भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। होर्मुज स्ट्रेट से भारत के लिए बड़ी मात्रा में तेल और LPG की सप्लाई होती है। अगर यह समझौता सफल रहता है तो पेट्रोल-डीजल पर दबाव कम हो सकता है। LPG कीमतों में राहत की उम्मीद बढ़ सकती है। साथ ही महंगाई पर नियंत्रण में मदद मिलेगी।


    ऑयल मार्केट में बड़ी गिरावट

    शांति समझौते की खबर आते ही ब्रेंट क्रूड 3% से ज्यादा टूटकर 84 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी 3.4% गिरकर 81.99 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज खुलने से ग्लोबल ऑयल सप्लाई सामान्य हो सकती है, जिससे ऊर्जा बाजार पर दबाव कम होगा।


    शेयर बाजार में लौटी रौनक

    इस खबर के बाद दुनिया भर के शेयर बाजारों में जोरदार तेजी आई, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। S&P 500 फ्यूचर्स में 0.8% की तेजी आई और बिटकॉइन 2.1% उछलकर 65,341 डॉलर पर पहुंच गया जबकि, एथेरियम 3.1% बढ़कर 1,721 डॉलर पर। निवेशक अब मान रहे हैं कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को राहत मिलेगी।

    – रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित समझौते में अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमला नहीं करेंगे।
    – होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी खत्म होगी।
    – ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई बातचीत शुरू होगी।
    – ईरान के तेल निर्यात पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत मिल सकती है।
    – लेबनान में सैन्य गतिविधियां रोकने पर भी सहमति बनी है।
    – समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने की संभावना बताई गई है।

    बता दें दिल्ली में पेट्रोल करीब ₹102 प्रति लीटर और डीजल ₹95 प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है। जबकि, यहां आज भी 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹942 और 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत ₹3,113.50 है। ईरान युद्ध के दौरान घरेलू एलपीजी सिलेंडर 89 रुपये महंगा हुआ है और कमर्शियल 1373 रुपये। पेट्रोल और डीजल चार बार में 7.50-7.50 रुपये महंगे हुए।

  • अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर बढ़ी वैश्विक नजरें, ट्रंप ने आज हस्ताक्षर का जताया भरोसा, तेहरान ने कहा- अंतिम सहमति में लग सकते हैं कुछ और दिन

    अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर बढ़ी वैश्विक नजरें, ट्रंप ने आज हस्ताक्षर का जताया भरोसा, तेहरान ने कहा- अंतिम सहमति में लग सकते हैं कुछ और दिन

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौता अब अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। हालांकि समझौते को लेकर दोनों पक्षों के सार्वजनिक बयानों में समयसीमा को लेकर अंतर देखने को मिला है। अमेरिका ने जहां रविवार को समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई है, वहीं ईरान ने संकेत दिया है कि दस्तावेज को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में अभी कुछ और समय लग सकता है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि समझौते पर हस्ताक्षर होते ही क्षेत्रीय समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान वार्ता का स्वरूप पूर्व की सरकारों के दौरान हुई बातचीत से अलग है और दोनों देशों के बीच इस बार अधिक व्यावहारिक तथा संतुलित समझ विकसित हुई है।

    दूसरी ओर, ईरान ने समझौते की दिशा में हुई प्रगति को स्वीकार किया है, लेकिन तत्काल हस्ताक्षर की संभावना को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन समझौता रविवार को ही अंतिम रूप ले लेगा, यह कहना जल्दबाजी होगी। उनके अनुसार आने वाले दिनों में समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दिए जाने की पूरी संभावना है।

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी समझौते के स्वरूप और प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित दस्तावेज लगभग डेढ़ से दो पृष्ठों का है, जिसमें 14 प्रमुख बिंदुओं को शामिल किया गया है। इस दस्तावेज पर पिछले दो महीनों से अधिक समय से दोनों देशों के बीच गहन वार्ताएं चल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के प्रत्येक प्रावधान की समीक्षा ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और सैन्य नेतृत्व द्वारा की गई है।

    प्रस्तावित समझौते के पहले चरण में क्षेत्रीय संघर्षों को समाप्त करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर चल रहे संघर्षों के औपचारिक अंत की रूपरेखा तय की गई है। साथ ही दोनों पक्षों द्वारा भविष्य में किसी नए सैन्य टकराव की शुरुआत नहीं करने की प्रतिबद्धता भी शामिल है। इसके अतिरिक्त ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाने तथा ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करने के लिए एक ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया है।

    समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन को लेकर भी विशेष व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इसके तहत 60 दिनों की एक संक्रमणकालीन अवधि निर्धारित की जा सकती है, जिसके दौरान समुद्री यातायात और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को स्थिर किया जाएगा। यह कदम वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दूसरे चरण में अगले 60 दिनों तक व्यापक वार्ताओं का दौर जारी रखने की योजना बनाई गई है। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम संवर्धन और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर स्थायी समाधान तलाशना होगा। साथ ही दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी प्रश्नों पर भी चर्चा की जाएगी।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो इससे न केवल पश्चिम एशिया में तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों पक्ष अंतिम सहमति तक कब पहुंचते हैं और औपचारिक हस्ताक्षर की प्रक्रिया कब पूरी होती है।

  • इजरायल-ईरान से तुरंत हमले रोकने की अपील, ट्रंप बोले– “अब गोलीबारी बंद होनी चाहिए, बातचीत की मेज पर लौटें”

    इजरायल-ईरान से तुरंत हमले रोकने की अपील, ट्रंप बोले– “अब गोलीबारी बंद होनी चाहिए, बातचीत की मेज पर लौटें”

    नई दिल्ली । मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और ईरान से तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है। उन्होंने दोनों देशों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब “गोलीबारी बंद” कर देनी चाहिए और स्थिति को और आगे बढ़ाने के बजाय बातचीत के रास्ते पर लौटना चाहिए।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और इजरायल के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। हाल ही में ईरान की ओर से इजरायल पर मिसाइल दागे जाने की खबर सामने आई, जिसके जवाब में इजरायल ने भी तेहरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया। इन जवाबी कार्रवाइयों ने क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की आशंका को और बढ़ा दिया है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए बेहद संक्षिप्त लेकिन सख्त संदेश जारी करते हुए दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को अपने-अपने हमले रोक देने चाहिए क्योंकि आगे टकराव बढ़ाने से केवल स्थिति और गंभीर होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब समय संघर्ष नहीं बल्कि कूटनीति का है।

    इससे पहले भी ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में ईरान से अपील करते हुए कहा था कि मिसाइल हमलों को रोककर उसे वार्ता की मेज पर लौटना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और ईरान किसी समझौते के बेहद करीब थे, लेकिन हालिया घटनाओं ने उस प्रक्रिया को प्रभावित किया है। ट्रंप के अनुसार, अगर हालात शांत रहते तो आने वाले दिनों में समझौता संभव था।

    एक अन्य बयान में ट्रंप ने यह भी कहा कि वह इजरायल के प्रधानमंत्री से सीधे बात करेंगे और उनसे जवाबी कार्रवाई को रोकने का आग्रह करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमला कर दिया है और अब आगे की कार्रवाई से बचना चाहिए। उनका कहना था कि क्षेत्र को और अधिक अस्थिर होने से बचाने के लिए तत्काल कदम जरूरी हैं।

    इस बीच क्षेत्र में लगातार बढ़ते सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। मिसाइल हमलों, ड्रोन स्ट्राइक और जवाबी कार्रवाइयों के कारण स्थिति तेजी से अस्थिर होती जा रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है।

    इजरायली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से दिए गए बयान में कहा गया है कि यह स्थिति पहले के हमलों और गतिविधियों का परिणाम है, जिससे तनाव और अधिक गहरा गया है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इस टकराव को रोका जा सकेगा या हालात और बिगड़ेंगे।

  • US: ट्रंप को बड़ा झटका…. संसद में ईरान युद्ध रोकने का प्रस्ताव मंजूर

    US: ट्रंप को बड़ा झटका…. संसद में ईरान युद्ध रोकने का प्रस्ताव मंजूर


    नई दिल्ली।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अपनी ही संसद (Parliament) में बड़े झटके का सामना करना पड़ा है. अमेरिकी संसद (American Parliament) के निचले सदन ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ ने ईरान के खिलाफ युद्ध रोकने के एक प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है।

    डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व में लाए गए इस प्रस्ताव का मकसद बिना संसद (कांग्रेस) की अनुमति के ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के युद्ध पर रोक लगाना था. इस दौरान वोटिंग से साफ हो गया है कि ईरान के साथ युद्ध की आशंका को लेकर अमेरिकी सांसदों में चिंता काफी बढ़ गई है. खास बात ये है कि राष्ट्रपति ट्रंप की अपनी पार्टी यानी रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने भी ईरान जंग पर पाला बदल लिया।


    7 वोटों से पास हुआ प्रस्ताव

    सदन में ‘वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन’ पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला. प्रस्ताव के पक्ष में 215 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 208 सांसदों ने मतदान किया. हालांकि दोनों सदनों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास मामूली बहुमत है, लेकिन इसके बावजूद ट्रंप इस प्रस्ताव को रोकने में नाकाम रहे. इस वोटिंग के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने अपनी ही पार्टी के रुख के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट्स के पक्ष में वोट डाला. कांग्रेस में ट्रंप के लिए ये किसी बड़े झटके से कम नहीं है।


    अब ट्रंप के पास क्या विकल्प?

    संसद के जानकारों का कहना है कि ये वोटिंग फिलहाल काफी हद तक प्रतीकात्मक है. इस प्रस्ताव को कानूनी रूप से प्रभावी बनाने के लिए अभी इसे अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन ‘सीनेट’ से भी पास कराना होगा. इसके बाद, अगर ट्रंप इस प्रस्ताव पर वीटो लगा देते हैं, तो उस वीटो को बेअसर करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जो कि बहुत मुश्किल है।

    हालांकि, ये फैसला काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि संसद में युद्ध के अधिकारों को सीमित करने वाले तीन प्रस्ताव पेश किए गए थे. लेकिन वो बेहद कम अंतर से नाकाम हो गए थे. इसके अलावा, पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने भी एक प्रक्रियात्मक वोटिंग के दौरान इसी तरह के एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था. सीनेट में भी ये सात बार की नाकाम कोशिशों के बाद कामयाब हुई थी।

  • ईरान-US के बीच अगले सप्ताह तक हो सकती है डील, ट्रंप ने दिए होर्मुज खुलने के संकेत

    ईरान-US के बीच अगले सप्ताह तक हो सकती है डील, ट्रंप ने दिए होर्मुज खुलने के संकेत


    वॉशिंगटन।
    ईरान (Iran) के साथ बहुप्रतीक्षित समझौते को लेकर डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि संभव है कि अगले सप्ताह समझौता हो जाए और इसके बाद होर्मुज (Hormuz) भी खुल जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि छोटी सी एक समस्या सामने आ रही है लेकिन अगले सप्ताह तक उसे सुलझा लिया जाएगा। उनका मतलब लेबनान पर इजरायली हमले से था जिसको लेकर ईरान काफी नाराज है।


    युद्ध में जीत से बड़ा होगा समझौता

    डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, मैंने हिजबुल्लाह से बात की और कहा कि अब कोई गोलीबारी नहीं होनी चाहिए। इसके बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) से बात की और गोलीबारी, बमबारी रोकने को कहा। इसके बाद दोनों तरफ से हमले बंद हो गए हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ साथ समझौता किसी सैन्य विजय से ज्यादा अच्छा हो सकता है। उन्होंने कहा कि हम एक बड़े देश के हित में काम कर रहे हैं इसलिए काम भी उसी हिसाब से करना होगा।


    लेबनान पर इजरायली हमला आ रहा आड़े

    इजरायली सेना ने लेबनान में अपने जमीनी अभियान का विस्तार कर दिया है और नयी सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका की मंजूरी भी मांगी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ व्यापक शांति समझौते की दिशा में क्षेत्रीय तनाव कम करने का प्रयास कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लेबनान में युद्धविराम भी अमेरिका-ईरान वार्ता के व्यापक ढांचे का हिस्सा है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 48 घंटों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग-अलग बातचीत कर युद्धविराम बहाल करने की कोशिश की। प्रस्ताव के तहत हिज्बुल्ला को इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले रोकने थे, जबकि इजरायल को लेबनान में आगे सैन्य कार्रवाई से बचना था।

    रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि राष्ट्रपति आउन इस पहल के पक्ष में थे और उन्होंने संसद अध्यक्ष नबीह बेरी से हिज्बुल्ला पर दबाव बनाने को कहा। शअरी बेरी की प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं रही और उन्होंने पहले इजरायल से हमले रोकने की बात कही।

    इस बीच, इजरायली और लेबनानी सैन्य अधिकारियों ने शुक्रवार को पेंटागन में संभावित युद्धविराम, इजरायली सैनिकों की वापसी, दक्षिणी लेबनान में लेबनानी सेना की तैनाती और हिज्बुल्ला के निरस्त्रीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देशों के राजनयिकों के बीच इस सप्ताह एक और बैठक होने की संभावना है।

    डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ बातचीत तीव्र गति से जारी है। तेहरान द्वारा नए सिरे से हमले किए जाने से संघर्षविराम कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच नाममात्र का संघर्षविराम ऐसे जवाबी हमलों और पलटवारों से बार-बार परखा जा रहा है जबकि दोनों देशों के अधिकारी युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

  • ट्रंप ने फिर दी धमकी…. बोले- डील नहीं हुई तो पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा अमेरिका

    ट्रंप ने फिर दी धमकी…. बोले- डील नहीं हुई तो पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा अमेरिका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) के साथ जारी शांति वार्ता (Peace talks) के बीच डील को लेकर बड़ी धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि ईरान (Iran) के साथ या तो बड़ी और बेहतर परिणामों वाली डील होगी या फिर कोई भी डील नहीं होगी। इतना ही नहीं ट्रंप ने डील न होने की स्थिति में फिर से युद्ध शुरू करने की भी धमकी दी।

    उन्होंने कहा कि अब अगर डील नहीं होती है, तो अमेरिका पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा। इसके साथ ही ट्रंप ने अरब देशों से अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने की अपील की, जिसमें कुछ देश पहले से शामिल हैं। बता दें, ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय में सामने आई है, जब ईरान और अमेरिका के बीच हो रही शांति वार्ता लगातार लंबी खिंचती जा रही है। ईरान और अमेरिका दोनों ही तरफ से अच्छे संकेत दिए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

    ईरान के साथ लंबी खिंचती बातचीत के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कोई भी नहीं चाहता कि पश्चिम एशिया का युद्ध फिर से शुरू हो। इसलिए बेहतर है कि डील हो जाए। सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने शनिवार को मध्य-पूर्व के राष्ट्राध्यक्षों के साथ हुई अपनी बातचीतों का ब्यौरा भी साझा किया। उन्होंने बताया खाड़ी देशों के नेताओं, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगान के साथ मिलकर इस संकट को सुलझाने के लिए बातचीत की है। उम्मीद है कि यह जल्दी ही सुलझ जाएगा, लेकिन इसके साथ ही ट्रंप ने अपील की यह सभी देश अब्राहम अकॉर्ड पर भी हस्ताक्षर करें। इतना ही नहीं ट्रंप ने कहा कि अगर ऐसा होता है, तो ईरान भी अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर कर सकता है।


    एक-दो देशों को छोड़कर बाकी देशों को समस्या नहीं होनी चाहिए: ट्रंप

    सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने इस्लामिक देशों के अब्राहम अकॉर्ड को स्वीकार न करने के डर को भी महत्व दिया। उन्होंने कहा, “संभव है कि एक या दो देशों के बाद ऐसा न करने का कारण हो, हम उसे स्वीकार भी करेंगे। लेकिन अधिकांश देशों को इसके लिए तैयार होना होगा। इससे ईरान के साथ होने वाला समझौता और भी ज्यादा ऐतिहासिक हो जाएगा। यह समझौता संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को, सूडान और कजाकस्तान के लिए वित्तीय, आर्थिक और सामाजिक बूम साबित हुआ है। इस संघर्ष के दौर में भी इन देशों को इसका फायदा मिला है।”


    क्या हैं अब्राहम अकॉर्ड्स?

    अब्राहम अकॉर्ड्स अमेरिका द्वारा बनाए गए समझौतों की एक लिस्ट है। इसका प्रमुख उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच के राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाना है। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान शुरू हुए इस समझौते पर सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और मोरक्को ने हस्ताक्षर किए थे। सूडान ने भी इसको सहमति दी है, लेकिन अभी तक उसकी संसद ने इस पर हामी नहीं भरी है। वहीं, अमेरिका का करीबी माने जाने वाला सऊदी अरब भी अभी तक इस समझौते से दूरी बनाए हुए है। हालांकि, सऊदी क्राउन प्रिंस ने इस समझौते में शामिल होने के लिए एक शर्त रखी थी। उन्होंने कहा था कि वह इसमें शामिल होने के लिए तैयार हैं, बशर्ते इसमें दो-राष्ट्र समाधान को लेकर स्पष्टता हो।

    दरअसल, अरब देशों और इस्लामिक देशों की दुनिया में अब्राहम अकॉर्ड्स को फिलिस्तीन के साथ धोखे के तौर पर देखा जाता है। इसलिए ज्यादातर देश इससे कन्नी काटते हुए नजर आते हैं। इस समझौते के बाद देशों को इजरायल के साथ सामान्य संबंधों पर राजी होना पड़ता है, जिससे उनकी जनता इस पर नाराज हो सकती है। पाकिस्तान जैसे देश के लिए तो यह समझौता और भी ज्यादा परेशानी पैदा करने वाला है, क्योंकि वह तो इजरायल को देश के रूप में मान्यता ही नहीं देते हैं।

  • ईरान-अमेरिका बातचीत में नरमी के संकेत, लेकिन समझौता अभी अधर में; कुछ अहम मुद्दों पर जारी है गतिरोध

    ईरान-अमेरिका बातचीत में नरमी के संकेत, लेकिन समझौता अभी अधर में; कुछ अहम मुद्दों पर जारी है गतिरोध



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत में हल्की नरमी के संकेत जरूर दिख रहे हैं, लेकिन किसी अंतिम समझौते पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि बातचीत में प्रगति हो रही है और जल्द कुछ सकारात्मक जानकारी सामने आ सकती है।

    वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी माना है कि पिछले एक सप्ताह में दोनों देशों के रुख में नजदीकी आई है, लेकिन अहम मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ बातचीत में सुधार का मतलब यह नहीं है कि समझौता तय हो चुका है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी अपने प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी समझौते में जल्दबाज़ी न की जाए और बातचीत को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाए।

    ईरानी सरकारी मीडिया का दावा है कि समझौता अमेरिका की पाबंदियों की वजह से अभी अटका हुआ है, जबकि दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि एक-दो मुद्दों पर अब भी गंभीर मतभेद कायम हैं।

    ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने इस बातचीत का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि किसी ऐसे समझौते पर सहमति बने जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट ढांचा तय हो।फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अंतिम फैसला अभी दूर माना जा रहा है।

  • ट्रंप को बड़ा झटका… ईरान के सुप्रीम लीडर बोले- विदेश नहीं भेजेंगे देश का यूरेनियम भंडार

    ट्रंप को बड़ा झटका… ईरान के सुप्रीम लीडर बोले- विदेश नहीं भेजेंगे देश का यूरेनियम भंडार


    तेहरान।
    अमेरिका (America) के साथ यूरेनियम (Uranium) को लेकर चल रही तीखी तकरार के बीच ईरान (Iran) ने बड़ा फैसला लिया है। दो वरिष्ठ ईरानी सूत्रों के मुताबिक, देश के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाखा मोजतबा मेनेई (Supreme Leader Ayatollah Mojtaba Menei) ने निर्देश जारी कर दिया है कि ईरान का लगभग हथियार-योग्य समृद्ध यूरेनियम भंडार विदेश नहीं भेजा जाएगा। इससे अमेरिका की प्रमुख मांग पर तेहरान का रुख और सख्त हो गया है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इजरायल के साथ मिलकर चल रही शांति वार्ता अब और जटिल हो सकती है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप ने इजरायल को आश्वासन दिया था कि ईरान का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार देश से बाहर भेज दिया जाएगा और किसी भी शांति समझौते में इसे अनिवार्य शर्त बनाया जाएगा। नाम न छापने की शर्त पर बात करने वाले ईरानी सूत्रों ने बताया कि सर्वोच्च नेता का यह निर्देश और सत्ता के अंदरूनी हलकों में आम सहमति है कि समृद्ध यूरेनियम को देश से बाहर नहीं जाना चाहिए। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा करने से ईरान भविष्य में अमेरिका-इजरायल हमलों के प्रति और अधिक कमजोर हो जाएगा।


    नेतन्याहू की सख्ती

    दूसरी ओर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि जब तक ईरान से समृद्ध यूरेनियम हटाया नहीं जाता, उसके प्रॉक्सी मिलिशिया समर्थन बंद नहीं होते और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता समाप्त नहीं की जाती, तब तक युद्ध समाप्त नहीं माना जाएगा।


    ईरान को विश्वास नहीं

    28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों से शुरू हुए युद्ध के बाद अस्थिर युद्धविराम लागू है। इस दौरान ईरान ने खाड़ी राज्यों में अमेरिकी ठिकानों पर गोलीबारी की और लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ लड़ाई तेज हुई। हालांकि शांति प्रयास अभी तक नाकाम रहे हैं। ईरानी सूत्रों ने कहा कि तेहरान को आशंका है कि युद्धविराम वाशिंगटन का सिर्फ रणनीतिक धोखा है, ताकि नए हमलों की तैयारी की जा सके। ईरान के शीर्ष शांति वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने बुधवार को कहा कि दुश्मन की गतिविधियां नए हमलों की तैयारी का संकेत दे रही हैं।


    अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

    ट्रंप ने बुधवार को कहा कि यदि ईरान शांति समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ तो अमेरिका नए हमलों के लिए तैयार है, हालांकि उन्होंने कुछ दिनों का इंतजार करने का भी संकेत दिया। दोनों पक्षों ने कुछ मुद्दों पर समझौता शुरू कर दिया है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर गहरे मतभेद बरकरार हैं, खासकर समृद्ध यूरेनियम के भविष्य और संवर्धन अधिकार पर।


    ईरान का रुख सख्त

    ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि उनकी प्राथमिकता युद्ध का स्थायी समाधान और अमेरिका-इजरायल से कोई हमला न होने की विश्वसनीय गारंटी है। इसके बाद ही वे परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत बातचीत के लिए तैयार होंगे। ईरान लंबे समय से परमाणु बम बनाने से इनकार करता रहा है। युद्ध से पहले ईरान ने अपने 60% समृद्ध यूरेनियम भंडार का आधा हिस्सा बाहर भेजने पर सहमति जताई थी, लेकिन ट्रंप की लगातार धमकियों के बाद यह रुख बदल गया, जिसका परिणाम अब सबके सामने है।


    क्या कह रहे आईएईए के आंकड़े?

    अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, जून 2025 के हमलों के समय ईरान के पास 440.9 किलोग्राम 60% समृद्ध यूरेनियम था। हमलों के बाद बचा हुआ भंडार मुख्य रूप से इस्फहान और नतांज के परमाणु केंद्रों में सुरक्षित है। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि उसे चिकित्सा और अनुसंधान रिएक्टर के लिए सीमित मात्रा में अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम की जरूरत है।

  • ट्रंप बोले… इजराइल में मेरी लोकप्रियता की रेटिंग 99%…. दो साल बाद वहां जाकर लडूंगा PM चुनाव

    ट्रंप बोले… इजराइल में मेरी लोकप्रियता की रेटिंग 99%…. दो साल बाद वहां जाकर लडूंगा PM चुनाव


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने मंगलवार को फिर एक ऐसा दावा किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय जगत में हलचल पैदा हो गई है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि इज़रायल (Israel) में उनकी लोकप्रियता 99 प्रतिशत है और मजाकिया अंदाज में कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल पूरा होने के बाद (2028 में) वह वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव (Prime Minister’s post, election) लड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें एक ताज़ा सर्वेक्षण में बेहद ऊंची रेटिंग मिली है। उन्होंने कहा, “तो शायद यह काम पूरा करने के बाद, मैं इज़रायल जाऊंगा और प्रधानमंत्री पद का चुनाव (Prime Minister’s post, election) लड़ूंगा। आज सुबह ही एक जनमत सर्वेक्षण आया है, जिसमें मेरी रेटिंग 99% है।”

    जब पत्रकारों ने उनसे ईरान पर संभावित हमले के बारे में पूछा, तो ट्रंप ने कहा कि इस्लामिक गणराज्य के साथ किसी समझौते पर पहुंचने की उन्हें “कोई जल्दी नहीं है।” उन्होंने कहा, “हमें होर्मुज समुद्री मार्ग को खोलना होगा, वह तुरंत खुल जाएगा, इसलिए हम इसे एक मौका देंगे। मुझे कोई जल्दी नहीं है। हर कोई कह रहा है, ‘ओह, मध्यावधि चुनाव आ रहे हैं।’ आदर्श रूप से, मैं चाहूंगा कि कम से कम लोग मारे जाएं, न कि बहुत ज़्यादा।”


    नेतन्याहू बहुत अच्छे इंसान

    पत्रकार लगातार ट्रंप से पूछते रहे कि उन्होंने इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से इस हमले के बारे में क्या कहा है? इस पर रिपब्लिकन नेता ने जवाब दिया, “वह बहुत अच्छे इंसान हैं; वह वही करेंगे जो मैं उनसे करवाना चाहूंगा। और वह एक बेहतरीन व्यक्ति हैं… यह मत भूलिए कि वह युद्धकालीन प्रधानमंत्री रह चुके हैं।” उन्होंने यह दावा भी किया कि इज़रायल में नेतन्याहू के साथ “सही बर्ताव नहीं किया जाता है। ट्रंप ने कल ही ईरान को एक नई चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि “एक और बड़ा हमला” हो सकता है, क्योंकि दोनों देश एक स्थायी शांति समझौते की शर्तों को लेकर एक गंभीर गतिरोध पर पहुंच गए हैं।


    ट्रंप और नेतन्याहू पर 58 मिलियन डॉलर का इनाम?

    इस बीच, खबरों के अनुसार ईरान, ट्रंप और नेतन्याहू पर 58 मिलियन डॉलर का इनाम रखने पर विचार-विमर्श कर रहा है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अज़ीज़ी ने घोषणा की है कि यह समिति “इस्लामिक गणराज्य के सैन्य और सुरक्षा बलों द्वारा जवाबी कार्रवाई” नामक एक विधेयक तैयार कर रही है। ईरान वायर और द टेलीग्राफ यूके की रिपोर्टों के अनुसार, इस विधेयक के माध्यम से किसी भी ऐसे व्यक्ति या संस्था को 50 मिलियन यूरो (लगभग 58.23 मिलियन डॉलर) की राशि का भुगतान औपचारिक रूप से सुनिश्चित किया जाएगा, जो अमेरिका और इज़रायल के इन नेताओं की हत्या करेगा। ईरानी संसद 28 फरवरी को तेहरान पर हुए हमलों के लिए,जिनमें तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई मारे गए थे,ट्रंप और नेतन्याहू की हत्या के लिए इनाम देने वाले एक बिल पर मतदान करने वाली है।