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  • तमिलनाडु में बदले सियासी समीकरण: DMK से अलग हुई MDMK, विजय की TVK को दिया समर्थन

    तमिलनाडु में बदले सियासी समीकरण: DMK से अलग हुई MDMK, विजय की TVK को दिया समर्थन


    चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डीएमके (DMK) की लंबे समय से सहयोगी रही मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (MDMK) ने डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) से अलग होने की घोषणा कर दी है। पार्टी ने डीएमके पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हुए गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला किया है। साथ ही अभिनेता और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय को आगामी उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों में समर्थन देने का भी ऐलान किया है।

    शनिवार को चेन्नई में आयोजित एमडीएमके की सामान्य परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया। पार्टी की ओर से पारित प्रस्ताव में कहा गया कि चुनाव पूर्व गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा, लेकिन फिलहाल एमडीएमके डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी।

    DMK पर लगाए गंभीर आरोप

    पार्टी प्रमुख वाइको ने आरोप लगाया कि डीएमके ने हिंदुत्व समर्थक ताकतों के साथ मिलकर एआईएडीएमके (AIADMK) के नेतृत्व वाली सरकार बनाने की कोशिश की थी। उनका कहना था कि यह राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रहा और इस घटनाक्रम के बाद सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस के अस्तित्व का उद्देश्य ही समाप्त हो गया।

    पार्टी के प्रस्ताव में कहा गया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए गठबंधन में बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया था, इसलिए कार्यकर्ताओं की राय के आधार पर यह निर्णय लिया गया।

    विजय की पार्टी को समर्थन

    एमडीएमके ने अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के प्रति खुला समर्थन जताया। वाइको ने कहा कि टीवीके भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे, दो-भाषा नीति और सी.एन. अन्नादुरै के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का दावा करती है। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में दोनों दलों के बीच राजनीतिक सहयोग और मजबूत हो सकता है।

    विधायकों के इस्तीफे को लेकर दावा

    वाइको ने यह भी दावा किया कि विजय ने एमडीएमके के दोनों विधायकों को इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था और उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करने की पेशकश भी की थी। हालांकि दोनों विधायकों ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।

    एमडीएमके के विधायक आर. सेंथिलसेल्वन और टी.एम. राजेंद्रन वर्ष 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके के ‘राइजिंग सन’ चुनाव चिह्न पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में एमडीएमके ने गठबंधन के तहत चार सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें दो पर जीत हासिल की थी।

    ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों पर जवाब

    विजय पर लगाए जा रहे ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों का जवाब देते हुए वाइको ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी के विधायकों को डीएमके में शामिल कराने की कोशिश होती है, तो उसे क्या कहा जाएगा।

    एमडीएमके वर्ष 2017 से डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी। हालांकि पिछले कुछ महीनों से दोनों दलों के रिश्तों में लगातार खटास देखने को मिल रही थी। विजय और वाइको की हालिया मुलाकात तथा एमडीएमके नेताओं की नाराजगी के बाद अब गठबंधन टूटने से तमिलनाडु की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।

  • तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय और संगीता के तलाक मामले में फिर टली सुनवाई, अदालत ने 7 अगस्त की नई तारीख की तय

    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय और संगीता के तलाक मामले में फिर टली सुनवाई, अदालत ने 7 अगस्त की नई तारीख की तय

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कझगम के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय तथा उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहे तलाक मामले की सुनवाई एक बार फिर आगे बढ़ा दी गई है। चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में निर्धारित सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होने के कारण अदालत ने मामले की अगली तारीख 7 अगस्त तय की है। इस घटनाक्रम के बाद यह मामला एक बार फिर सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है।

    सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान न तो मुख्यमंत्री विजय अदालत पहुंचे और न ही उनकी पत्नी संगीता ने व्यक्तिगत रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से उनके अधिवक्ता अदालत में मौजूद रहे और उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखा। अदालत ने दोनों पक्षों की गैरहाजिरी को ध्यान में रखते हुए सुनवाई को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

    यह मामला पिछले कई महीनों से फैमिली कोर्ट में विचाराधीन है। इससे पहले भी कई अवसरों पर सुनवाई निर्धारित होने के बावजूद दोनों पक्ष व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे। कानूनी प्रक्रिया के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की अनुमति को लेकर भी अदालत के समक्ष अनुरोध प्रस्तुत किए गए थे। मुख्यमंत्री पद से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण कारणों के रूप में बताया गया है।

    संगीता ने वर्ष 2025 के अंतिम महीनों में अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए वैवाहिक संबंध समाप्त करने की मांग की थी। याचिका में यह कहा गया था कि पति-पत्नी के बीच उत्पन्न मतभेद ऐसे स्तर तक पहुंच चुके हैं जहां वैवाहिक संबंधों को सामान्य रूप से आगे बढ़ाना संभव नहीं रह गया है। याचिका में वैधानिक अधिकारों से संबंधित अन्य मांगों को भी शामिल किया गया था।

    मुख्यमंत्री विजय का सार्वजनिक जीवन लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा है। फिल्म जगत में लोकप्रिय अभिनेता के रूप में पहचान बनाने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और अपनी पार्टी के माध्यम से राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक छवि पर लोगों की विशेष नजर बनी हुई है।

    इसी कारण उनके निजी जीवन से जुड़ा यह कानूनी मामला भी व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के निजी मामलों को लेकर लोगों की स्वाभाविक रुचि रहती है, हालांकि कानूनी प्रक्रिया को पूरी संवेदनशीलता और गोपनीयता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में अदालत दोनों पक्षों को पर्याप्त अवसर देती है ताकि किसी भी संभावित समाधान की संभावना को परखा जा सके। ऐसे मामलों में अदालत की प्राथमिकता कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए दोनों पक्षों के अधिकारों की रक्षा करना होती है।

    अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी। उस दिन अदालत मामले की प्रगति, पक्षकारों की उपस्थिति और आगे की कानूनी कार्यवाही को लेकर निर्णय ले सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस चर्चित मामले में आगे की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।

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  • इंडी गठबंधन की अहम बैठक से दूर रही सीएम विजय की TVK, तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन साधने की रणनीति पर चर्चा तेज

    इंडी गठबंधन की अहम बैठक से दूर रही सीएम विजय की TVK, तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन साधने की रणनीति पर चर्चा तेज

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित इंडिया ब्लॉक की बैठक के बीच तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी तमिलगा वेत्त्री कझगम की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली पार्टी के बैठक में शामिल न होने को लेकर विभिन्न तरह के राजनीतिक संकेत और संभावित रणनीतियों पर चर्चा तेज हो गई है।

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के समर्थन से सरकार बनाने वाली टीवीके फिलहाल राज्य की सत्ता में है। इसके बावजूद पार्टी ने दिल्ली में आयोजित विपक्षी गठबंधन की बैठक से दूरी बनाए रखी। इस फैसले को केवल एक औपचारिक अनुपस्थिति के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक रणनीति होने की संभावना जताई जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवीके की अनुपस्थिति का एक प्रमुख कारण उसका राष्ट्रीय संसद में प्रतिनिधित्व न होना हो सकता है। वर्तमान में पार्टी के पास लोकसभा या राज्यसभा में कोई सदस्य नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार के खिलाफ संसदीय रणनीति और संसद से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित बैठक में उसकी भूमिका सीमित मानी जा सकती है। यही कारण है कि पार्टी ने फिलहाल दूरी बनाए रखना अधिक उपयुक्त समझा हो।

    एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि टीवीके अभी तक औपचारिक रूप से इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं बनी है। तमिलनाडु में सरकार गठन के लिए कांग्रेस और अन्य दलों का समर्थन मिलने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की संरचना और सदस्यता अलग विषय मानी जाती है। ऐसे में राज्य स्तर के राजनीतिक सहयोग और राष्ट्रीय गठबंधन की सदस्यता को एक समान नहीं माना जा रहा है।

    तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और टीवीके के बीच प्रतिस्पर्धा भी इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू मानी जा रही है। डीएमके लंबे समय से इंडिया ब्लॉक की प्रमुख सहयोगी पार्टियों में शामिल रही है। विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की सत्ता से बाहर होने के बावजूद डीएमके प्रदेश में एक प्रभावशाली विपक्षी दल बनी हुई है। ऐसे में टीवीके का इंडिया ब्लॉक की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होना राज्य की राजनीति में विरोधाभासी संदेश दे सकता है।

    विश्लेषकों का यह भी मानना है कि मुख्यमंत्री विजय अपनी पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं। विधानसभा चुनावों में टीवीके ने खुद को पारंपरिक राजनीतिक दलों के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया था। यदि पार्टी जल्दबाजी में किसी राष्ट्रीय गठबंधन का औपचारिक हिस्सा बनती है, तो उसकी स्वतंत्र राजनीतिक छवि प्रभावित हो सकती है। इसलिए फिलहाल वह मुद्दों के आधार पर समर्थन और सहयोग की नीति अपनाना चाहती है।

    भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए भी टीवीके का यह रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रीय गठबंधनों में औपचारिक रूप से शामिल होने से राजनीतिक विकल्प सीमित हो सकते हैं। जबकि वर्तमान परिस्थितियों में पार्टी अपने लिए अधिक लचीलापन बनाए रखना चाहती है। इससे उसे राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है।

    तमिलनाडु में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच मुख्यमंत्री विजय की पार्टी का यह कदम आने वाले समय की रणनीति का संकेत माना जा रहा है। फिलहाल टीवीके सत्ता संचालन, संगठन विस्तार और अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत करने पर ध्यान देती दिखाई दे रही है। ऐसे में इंडिया ब्लॉक की बैठक से दूरी को केवल एक अनुपस्थिति नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

  • सीएम विजय ने एमके स्टालिन पर वार, कहा- आपके अपने लोग ही आपकी राजनीति खत्म करेंगे

    सीएम विजय ने एमके स्टालिन पर वार, कहा- आपके अपने लोग ही आपकी राजनीति खत्म करेंगे

    नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर करारा हमला बोला है। टीवीके ने स्पष्ट किया कि स्टालिन को सबसे बड़ा राजनीतिक झटका उनके विरोधियों से नहीं, बल्कि उनके अपने करीबी सहयोगियों और आसपास सक्रिय लोगों से मिलेगा।

    टीवीके की आईटी विंग ने डीएमके (DMK) पर आरोप लगाया कि पार्टी परिवारवाद और सत्ता को केवल अपने ही परिवार तक सीमित रखती है। टीवीके ने कहा कि उनकी पार्टी गठबंधन और जनता के समर्थन के माध्यम से सत्ता में आई है, जबकि डीएमके केवल अपने परिवार और करीबी लोगों के लिए सत्ता संरक्षित रखता है।

    सीएम विजय ने स्टालिन को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि उनके इर्द-गिर्द मौजूद लोग उन्हें वास्तविक परिस्थितियों और जमीनी सच्चाई से दूर रख रहे हैं। टीवीके ने तंज कसते हुए कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो स्टालिन को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, जैसा कि उन्होंने कोलाथुर सीट और सत्ता खोने के समय देखा था।

    टीवीके ने अपने बयान में यह भी कहा कि पार्टी केवल राजनीतिक फायदा उठाने वाली स्वार्थी ताकत नहीं है और वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने में विश्वास रखती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि स्टालिन का राजनीतिक अंत उनके विरोधियों से नहीं, बल्कि उनके आसपास सक्रिय चापलूसों के समूह से होगा।

    टीवीके के इस बयान पर अभी तक DMK की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान आगामी विधानसभा और स्थानीय चुनावों को लेकर तमिलनाडु में बढ़ते तनाव को दर्शाता है।

    टीवीके का दावा है कि उनकी पार्टी जनता के व्यापक समर्थन के साथ सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है। इसके जरिए वह यह संदेश देना चाहती है कि लोकतांत्रिक सहयोग और जनता की आवाज पर आधारित राजनीति ही टिकाऊ है।

    विश्लेषकों का कहना है कि सीएम विजय का यह हमला केवल पूर्व सीएम स्टालिन पर निशाना नहीं है, बल्कि यह DMK के भीतर सत्ता संघर्ष और नेतृत्व विवाद को उजागर करने की कोशिश भी है। आगामी महीनों में तमिलनाडु की राजनीतिक तस्वीर में इसके असर दिख सकते हैं।

    टीवीके ने अपने बयान के अंत में यह भी आगाह किया कि स्टालिन को सही तस्वीर और वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी नहीं दी जा रही है। अगर यही स्थिति जारी रही, तो यह उनके लिए गंभीर राजनीतिक परिणाम ला सकता है।

    इस बयान से साफ है कि तमिलनाडु की राजनीति में टीवीके और DMK के बीच टकराव अब और बढ़ सकता है, और आने वाले समय में दोनों पार्टियों की रणनीतियों और गठबंधनों पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

  • INDIA ब्लॉक में बढ़ा सियासी तनाव: थलापति विजय की TVK को समर्थन पर चिदंबरम का बड़ा दावा, DMK को पहले ही दी थी जानकारी

    INDIA ब्लॉक में बढ़ा सियासी तनाव: थलापति विजय की TVK को समर्थन पर चिदंबरम का बड़ा दावा, DMK को पहले ही दी थी जानकारी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में थलापति विजय की पार्टी टीवीके को लेकर बने नए राजनीतिक समीकरणों के बीच INDIA ब्लॉक के भीतर मतभेद गहराते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने दावा किया है कि उनकी पार्टी ने टीवीके को समर्थन देने के फैसले की जानकारी पहले ही DMK और अन्य सहयोगी दलों को दे दी थी।

    चिदंबरम ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि कांग्रेस ने अपने गठबंधन सहयोगियों को विश्वास में लेकर ही यह निर्णय लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीपीआई, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे दलों को भी इस फैसले की जानकारी दी गई थी। उनके अनुसार, केवल घोषणा के समय में एक दिन का अंतर था, लेकिन निर्णय की जानकारी पहले साझा कर दी गई थी।

    उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य राजनीतिक अस्थिरता को रोकना और किसी भी स्थिति में दोबारा चुनाव की संभावना को टालना था। चिदंबरम के अनुसार, गठबंधन के भीतर भी यह व्यापक सहमति थी कि यदि टीवीके बहुमत से थोड़ा पीछे रह जाती है, तो ऐसी स्थिति में समर्थन देकर स्थिर सरकार बनाने की कोशिश की जाए।

    वहीं, DMK ने कांग्रेस के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के युवा संगठन ने इस निर्णय को गठबंधन के साथ विश्वासघात करार दिया है। DMK नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने बिना पूरी सहमति के यह समर्थन देकर गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़ा किया है।

    इस विवाद के बाद INDIA ब्लॉक के भीतर राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। तमिलनाडु में पहले से ही गठबंधन की राजनीति जटिल मानी जाती है, और अब टीवीके को समर्थन देने के फैसले ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

    चुनावी नतीजों के अनुसार, अभिनेता-राजनेता थलापति विजय के नेतृत्व वाली टीवीके ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई, लेकिन वह बहुमत के लिए आवश्यक 118 सीटों से पीछे रह गई। इसके बाद उसे सरकार गठन के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता पड़ी।

    कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के समर्थन की घोषणा कर टीवीके को समर्थन दिया, जिससे उसके सरकार बनाने की संभावनाएं मजबूत हुईं। इसके बाद वीसीके, भाकपा और माकपा जैसे दलों ने भी समर्थन दिया, जिनके पास सीमित संख्या में विधायक थे। इन समर्थन के बाद टीवीके बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में सफल रही और सरकार गठन का दावा पेश कर सकी।

    हालांकि, इस राजनीतिक कदम ने INDIA ब्लॉक के भीतर मतभेदों को उजागर कर दिया है। DMK का आरोप है कि इस तरह का निर्णय गठबंधन की सामूहिक रणनीति के खिलाफ है और इससे मतदाताओं के विश्वास पर असर पड़ा है।

    चिदंबरम का दावा है कि यह निर्णय राजनीतिक स्थिरता को ध्यान में रखकर लिया गया था, जबकि विरोधी दल इसे गठबंधन अनुशासन के खिलाफ मान रहे हैं। इस मुद्दे ने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और INDIA ब्लॉक के भीतर भविष्य की एकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    फिलहाल, इस विवाद पर दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और आने वाले दिनों में यह मामला और राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।

  • तमिलनाडु में तेज हुई सियासी हलचल: AIADMK में टूट के संकेत, तीन विधायकों के इस्तीफे से बदले राजनीतिक समीकरण

    तमिलनाडु में तेज हुई सियासी हलचल: AIADMK में टूट के संकेत, तीन विधायकों के इस्तीफे से बदले राजनीतिक समीकरण

    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में सोमवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब विधानसभा चुनाव परिणाम आने के महज 21 दिनों के भीतर AIADMK के तीन विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। खास बात यह रही कि इस्तीफा देने के तुरंत बाद तीनों नेताओं ने TVK का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित बदलावों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।

    बताया जा रहा है कि इस्तीफा देने वाले तीनों विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाले नेता माने जाते हैं और पार्टी के भीतर एक खास गुट से जुड़े हुए थे। उनके अचानक लिए गए फैसले ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। चुनाव के इतने कम समय बाद पार्टी छोड़ना केवल सामान्य राजनीतिक घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संगठन के भीतर चल रहे असंतोष और आंतरिक खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, तीनों विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद नई राजनीतिक दिशा चुनने का फैसला लिया। इसके तुरंत बाद वे TVK नेतृत्व के संपर्क में आए और पार्टी में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम ने राज्य की सत्तारूढ़ और विपक्षी राजनीति दोनों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आने वाले समय में कुछ और नेता भी इसी राह पर चल सकते हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम AIADMK के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी के भीतर विभिन्न विचारधाराओं और नेतृत्व को लेकर मतभेदों की चर्चा पहले से चल रही थी। ऐसे में तीन विधायकों का पार्टी छोड़ना संगठनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है। इससे पार्टी के अंदर मौजूद गुटबाजी की चर्चाओं को भी और बल मिला है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावनाओं को बढ़ा दिया है। चुनाव परिणामों के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर लगातार बदलती दिखाई दे रही है और दलों के बीच समर्थन तथा रणनीति को लेकर नए समीकरण उभरते नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बदलाव का असर राज्य की राजनीति पर कितना व्यापक पड़ता है और क्या यह राजनीतिक फेरबदल किसी बड़े बदलाव की शुरुआत साबित होता है।

  • तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल: विजय की TVK को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा तेज, मलेशियाई पीएम ने बताया ऐतिहासिक बदलाव

    तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल: विजय की TVK को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा तेज, मलेशियाई पीएम ने बताया ऐतिहासिक बदलाव



    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) के प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में बड़ी चर्चा देखने को मिल रही है, हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस तरह की चुनावी जीत और सरकार गठन से जुड़ी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि निर्वाचन आयोग या अधिकृत नतीजों से ही मानी जाती है। फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय राजनीतिक परिदृश्य के अनुसार टीवीके का उदय राज्य की पारंपरिक DMK और AIADMK राजनीति के बीच एक नए विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसके सीटों और सरकार बनाने जैसे दावों पर अलग-अलग स्रोतों में स्पष्टता नहीं है।

    इसी बीच मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम का एक सोशल मीडिया बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने विजय को बधाई देते हुए तमिलनाडु की राजनीति में बदलाव की बात कही है। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि तमिल समुदाय के साथ मलेशिया के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध गहरे रहे हैं और वह उम्मीद करते हैं कि नया नेतृत्व इस रिश्ते को और मजबूत करेगा। उन्होंने विजय के चुनावी नारे “ओरु विरल पुरची” (एक उंगली क्रांति) का उल्लेख करते हुए इसे बदलाव की भावना से जोड़ा।

    अनवर इब्राहिम ने अपने संदेश में यह भी कहा कि विजय लंबे समय तक फिल्मों में भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए दिखे हैं और अब जनता ने उन्हें वास्तविक जीवन में नेतृत्व की जिम्मेदारी दी है। उन्होंने इसे तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में वर्णित किया।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से DMK और AIADMK के प्रभाव में रही है, और किसी नए राजनीतिक विकल्प का उभरना अपने आप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन वास्तविक राजनीतिक स्थिति, सीटों का बंटवारा और सत्ता परिवर्तन को लेकर अंतिम और आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग के प्रमाणित परिणामों पर ही निर्भर करती है।

    कुल मिलाकर यह मामला अभी राजनीतिक चर्चा और दावों के स्तर पर ज्यादा है, जबकि जमीनी राजनीतिक तस्वीर आधिकारिक नतीजों और पुष्टि के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

  • तमिलनाडु में विजय का सियासी विस्फोट! पाकिस्तान तक गूंजी TVK की जीत, दिग्गजों की हिली कुर्सी

    तमिलनाडु में विजय का सियासी विस्फोट! पाकिस्तान तक गूंजी TVK की जीत, दिग्गजों की हिली कुर्सी


    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने Vijay Thalapathy ने ऐसा राजनीतिक धमाका किया है, जिसकी चर्चा अब भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान तक में हो रही है। हाल ही में आए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नतीजों में विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की राजनीति के पुराने समीकरण हिला दिए। सिर्फ दो साल पहले राजनीति में उतरी पार्टी ने 234 में से 108 सीटें जीतकर खुद को राज्य की सबसे ताकतवर राजनीतिक ताकतों में शामिल कर लिया। हालांकि पार्टी बहुमत के आंकड़े से कुछ सीटें पीछे रह गई, लेकिन पहली बार चुनाव लड़कर इतना बड़ा प्रदर्शन करना अपने आप में ऐतिहासिक माना जा रहा है।

    विजय की इस सफलता ने पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी सुर्खियां बटोरी हैं। पाकिस्तान के चर्चित पत्रकार Rauf Klasra ने एक टीवी चर्चा के दौरान विजय की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि फिल्मी दुनिया के सुपरस्टार विजय ने राजनीति में आकर उन नेताओं को चुनौती दे दी, जिनके परिवार दशकों से सत्ता में बने हुए थे। रऊफ कलासरा ने खास तौर पर यह कहा कि सिर्फ दो साल में इतना बड़ा जनसमर्थन हासिल करना बेहद बड़ी बात है।

    उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin और उनके राजनीतिक परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि विजय ने ऐसे नेताओं को कड़ी टक्कर दी जिनके पिता और दादा तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पाकिस्तानी पत्रकार ने यह भी कहा कि विजय का नाम लोगों को तेजी से जोड़ता है और उनकी लोकप्रियता किसी बड़े राष्ट्रीय नेता जैसी बनती जा रही है।

    चुनाव परिणामों में TVK ने कई बड़े राजनीतिक दलों को झटका दिया। सत्तारूढ़ DMK को 59 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि AIADMK को 47 सीटें मिलीं। वहीं विजय खुद अपनी दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता, युवा वोटरों का समर्थन और भ्रष्टाचार विरोधी छवि ने TVK को तेजी से मजबूत बनाया।

    फिल्मों में सुपरस्टार की पहचान रखने वाले विजय अब तमिलनाडु की राजनीति में भी बड़े चेहरे के तौर पर उभर चुके हैं। दक्षिण भारत की राजनीति में यह बदलाव आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है।

  • डीके शिवकुमार ने राज्यपाल के फैसले पर जताई आपत्ति, बोले- ‘TVK को बहुमत साबित करने का मौका न मिलना गलत’

    डीके शिवकुमार ने राज्यपाल के फैसले पर जताई आपत्ति, बोले- ‘TVK को बहुमत साबित करने का मौका न मिलना गलत’

    बंगलूरू। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के उस कथित फैसले की आलोचना की है, जिसमें अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) को सरकार बनाने और विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर नहीं दिए जाने की बात कही गई है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया।

    विधान सौधा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डीके शिवकुमार ने कहा कि यदि किसी दल के पास बहुमत का दावा है तो राज्यपाल उसे सरकार गठन से नहीं रोक सकते। उनके अनुसार, राज्यपाल को विजय के नेतृत्व वाली पार्टी को सदन में बहुमत साबित करने का अवसर देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का यह रवैया उचित नहीं माना जा सकता और लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपनी संख्या साबित करने का मौका मिलना चाहिए।

    शिवकुमार ने अपने तर्क के समर्थन में कर्नाटक और राष्ट्रीय राजनीति के कई पुराने उदाहरण भी गिनाए। उन्होंने कहा कि पहले भी राज्यपालों और राष्ट्रपतियों ने सबसे बड़े दलों या गठबंधनों को सरकार बनाने का अवसर दिया है, ताकि वे सदन में विश्वास मत हासिल कर सकें।

    उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा का उदाहरण देते हुए कहा कि कर्नाटक में भी उन्हें सरकार बनाने का मौका दिया गया था। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन और एपीजे अब्दुल कलाम के कार्यकाल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उस समय भी संवैधानिक परंपराओं का पालन करते हुए बहुमत परीक्षण को प्राथमिकता दी गई थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण भी दिया, जिन्हें सदन में बहुमत साबित करने का अवसर मिला था।

    डीके शिवकुमार ने कहा कि TVK को भी इसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपना बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में एक वोट भी बहुमत और अल्पमत तय कर सकता है। यदि कोई दल बहुमत साबित नहीं कर पाता, तब अगला संवैधानिक विकल्प अपनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की जनता के जनादेश और भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र जनता की इच्छा से ही चलता है।

  • तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन

    तमिलनाडु में सत्ता संग्राम तेज: विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, कांग्रेस ने DMK छोड़ TVK को दिया समर्थन


    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है, जहां विजय ने चुनाव नतीजों के बाद सरकार गठन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख विजय का यह कदम राज्य की सियासत को नए मोड़ पर ले गया है।

    इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए दशकों पुराना गठबंधन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से तोड़ दिया और विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने टीवीके प्रमुख से मुलाकात कर औपचारिक रूप से समर्थन पत्र भी सौंपा, जिसके बाद पार्टी मुख्यालय में जश्न का माहौल देखने को मिला।

    कांग्रेस के इस फैसले को तमिलनाडु की राजनीति में गेमचेंजर माना जा रहा है। पार्टी के प्रभारी गिरीश चोडानकर ने कहा कि विजय के समर्थन मांगने के बाद यह निर्णय लिया गया और शीर्ष नेतृत्व ने भी इसे मंजूरी दी है। कांग्रेस को उम्मीद है कि राज्यपाल विजय को जल्द ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।

    हालांकि, आंकड़ों पर नजर डालें तो अभी भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। टीवीके ने चुनाव में 108 सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस के 5 विधायक हैं। इस तरह दोनों का कुल आंकड़ा 113 तक पहुंचता है, जो बहुमत से अभी भी 5 सीट कम है। ऐसे में विजय को सरकार बनाने के लिए अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना होगा।

    तमिलनाडु की सियासत में यह घटनाक्रम बेहद अहम माना जा रहा है, जहां एक तरफ नए समीकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने गठबंधन टूटते नजर आ रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विजय बहुमत का आंकड़ा हासिल कर पाते हैं या राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी।