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  • थलपति विजय की TVK ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से बनाई दूरी, SIR के विरोध पर कायम पार्टी

    थलपति विजय की TVK ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से बनाई दूरी, SIR के विरोध पर कायम पार्टी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की सत्ताधारी तमिळगा वेत्री कड़गम यानी TVK ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से खुद को अलग कर लिया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं। हालांकि थलपति विजय की पार्टी ने इस मांग का समर्थन नहीं किया है।

    TVK की ओर से कहा गया है कि किसी एक व्यक्ति को पद से हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पार्टी ने इसे मुद्दे से ध्यान भटकाने वाली रणनीति बताया है। हालांकि इसके साथ ही TVK ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का विरोध जारी रखने की बात भी स्पष्ट की है।

    यह विवाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर सामने आई आपत्तियों के बाद तेज हुआ। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने पिछले 10 महीनों में SIR की प्रक्रिया को लेकर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए और उनके खिलाफ इस्तीफे के साथ कानूनी कार्रवाई की मांग भी सामने आई।

    TVK के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री ए राजमोहन ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि CEC को पद से हटाना किसी समस्या का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, किसी एक व्यक्ति को हटाने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा और पार्टी किसी भटकाने वाली रणनीति का हिस्सा नहीं बनेगी।

    हालांकि राजमोहन ने यह भी कहा कि TVK SIR का विरोध करती रहेगी। उन्होंने बताया कि पार्टी अध्यक्ष विजय ने सत्ता में आने से पहले ही SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की थी। राजमोहन के मुताबिक, SIR के दौरान चुनिंदा मतदाताओं के नाम हटाए गए और अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत और बड़ी होती।

    विजय और कांग्रेस के बीच पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं। इससे पहले TVK के नेताओं और मंत्रियों की ओर से वर्ष 2029 के लिए विजय को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताए जाने के बाद विवाद पैदा हुआ था। उस समय कांग्रेस के मंत्रियों की ओर से कैबिनेट से इस्तीफा देने की धमकी तक सामने आई थी।

    फिलहाल तमिलनाडु में कांग्रेस के पांच विधायक हैं, जिनके समर्थन से TVK ने सरकार बनाई थी। इनमें से दो विधायकों को विजय ने मंत्री भी बनाया है। ऐसे में CEC के इस्तीफे के मुद्दे पर TVK का कांग्रेस से अलग रुख गठबंधन के भीतर मतभेदों को सामने लाता है।

    दूसरी ओर, डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। डीएमके ने कहा है कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव आता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी।

    डीएमके प्रवक्ता टी के एस एलंगोवन ने कहा कि जब भी विपक्षी दल किसी मुद्दे पर बीजेपी का विरोध करेंगे, उनकी पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएमके इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाया जाता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी।

    इससे पहले 23 सितंबर को स्टालिन ने बयान जारी कर कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। इस तरह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस और डीएमके की मांग के बीच TVK ने अलग रुख अपनाया है। पार्टी ने SIR के विरोध को बरकरार रखते हुए CEC को हटाने की मांग को व्यवस्था में बदलाव का समाधान मानने से इनकार किया है।

  • मद्रास हाईकोर्ट ने मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव पर रोक से किया इनकार, इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने पर उठाए सवाल

    मद्रास हाईकोर्ट ने मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव पर रोक से किया इनकार, इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली ।
    मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव जीतने के कुछ समय बाद विधायक पद से इस्तीफा देकर उसी सीट से दूसरी पार्टी के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ने की स्थिति पर गंभीर टिप्पणी की।

    न्यायालय ने ऐसी स्थिति को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाताओं के जनादेश से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। अदालत ने कहा कि निर्वाचित विधायक का जल्द इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी के टिकट पर उसी सीट से फिर चुनाव लड़ना मतदाताओं के दिए जनादेश का अनादर है।

    चेन्नई के अधिवक्ता के सुथन की ओर से दायर जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति एसएम सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति के गोविंदराजन की पीठ ने बुधवार को सुनवाई की। याचिका में मांग की गई थी कि जिन नेताओं ने दल बदलकर दोबारा चुनाव लड़ने के लिए अपनी विधायक सीट छोड़ी है, उनसे उपचुनाव कराने का खर्च वसूला जाए।

    पीठ ने चुनाव आयोग से कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत उपलब्ध शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इस तरह की परिस्थितियों से निपटने के लिए दिशानिर्देश तैयार किए जाने चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि इस्तीफा देकर ऐसी स्थिति पैदा करने वाले विधायकों पर उपचुनाव के वित्तीय बोझ को डालने की व्यवस्था पर विचार होना चाहिए।

    याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि एस जयकुमार, मरगथम कुमारवेल, पी सत्यभामा, इसाक्की सुबैया, सी विजयभास्कर और एमआर विजय भास्कर ने इस्तीफा देकर तमिझगा वेत्री कषगम यानी टीवीके का रुख किया था। इनमें से मदुरंतकम और धारापुरम सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की गई है, जबकि बाकी पांच सीटों पर कानूनी याचिकाएं लंबित होने के कारण चुनाव नहीं कराया गया है।

    याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि मरगथम कुमारवेल और पी सत्यभामा को टीवीके ने उन्हीं सीटों से दोबारा उम्मीदवार बनाया है, जिन्हें उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा देकर खाली किया था। याचिका में आशंका जताई गई कि यदि ऐसी स्थिति के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं बनाई गई तो भविष्य में बड़े पैमाने पर इस्तीफे हो सकते हैं और इसका अतिरिक्त वित्तीय भार सरकारी खजाने पर पड़ेगा।

    सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम ने कहा कि किसी विधायक को इस्तीफा देने से रोका नहीं जा सकता। लेकिन समस्या तब उत्पन्न होती है, जब इस्तीफा देने वाला वही व्यक्ति अपनी छोड़ी हुई सीट से फिर चुनाव लड़ता है। अदालत ने कहा कि इस असाधारण स्थिति के समाधान के लिए संसद या चुनाव आयोग को व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    महाधिवक्ता विजय नारायण ने अदालत को बताया कि मौजूदा कानून पूर्व विधायकों को दोबारा चुनाव लड़ने से नहीं रोकता। इसलिए उपचुनाव रोकने की मांग वाली याचिका स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि छह विधायकों के इस्तीफे की स्वीकृति से संबंधित याचिका पर पहली पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा है। इसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी।

    याचिका 12 सितंबर को दायर की गई थी। इसमें मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनावों पर रोक लगाने के साथ दोनों टीवीके उम्मीदवारों के नामांकन रद्द करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने असामयिक इस्तीफों से चुनाव आयोग और सरकार पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ का मुद्दा भी उठाया था।

    मूल मामले के अनुसार, अन्नाद्रमुक के बागी विधायक मरगथम कुमारवेल और सत्यभामा ने 13 मई को विधानसभा में टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद दोनों ने अपनी विधानसभा सीटों से इस्तीफा दे दिया और सीटें रिक्त घोषित की गईं। बाद में टीवीके ने उन्हें अपने गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में इन्हीं सीटों से मैदान में उतारा।

    मदुरंतकम और धारापुरम सीटों के लिए द्रमुक और अन्नाद्रमुक ने भी उम्मीदवार घोषित किए हैं। नाम तमिलर काची और वामपंथी दलों के चुनाव मैदान में उतरने के कारण इन सीटों पर कई दलों के बीच मुकाबला होने की स्थिति बनी है।

  • निवेश के लिए लंदन गए थे CM विजय या दोस्त की रेस देखने DMK के सवालों पर TVK ने दिया करारा जवाब

    निवेश के लिए लंदन गए थे CM विजय या दोस्त की रेस देखने DMK के सवालों पर TVK ने दिया करारा जवाब


    नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय इन दिनों ब्रिटेन की यात्रा पर हैं और उनकी इस विदेश यात्रा को लेकर राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। विजय की लंदन यात्रा का आधिकारिक उद्देश्य निवेशकों से मुलाकात और तमिलनाडु में निवेश लाने से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा करना बताया गया है। लेकिन इसी दौरान अभिनेता अजित के साथ उनकी मुलाकात और अभिनेत्री तृषा के साथ नजर आने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दल डीएमके ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

    शनिवार को सोशल मीडिया पर थलपति विजय और अभिनेता अजित का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में दोनों काफी सहज और दोस्ताना अंदाज में नजर आए। बताया जा रहा है कि अजित इन दिनों लंदन में मोटर रेसिंग से जुड़े कार्यक्रम में मौजूद हैं। विजय की उनसे मुलाकात के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने मुख्यमंत्री की विदेश यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि विजय ने लंदन जाकर निवेश लाने की बात कही थी लेकिन अब तस्वीर सामने है कि वह अपने दोस्त की कार रेस देखने भी पहुंचे हैं।

    डीएमके विधायक मार्कंडेयन ने भी विजय की लंदन यात्रा को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में किसानों और मछुआरों समेत कई वर्गों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे मौजूद हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री को पहले राज्य की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए था। उनके मुताबिक निवेशकों से मुलाकात कुछ समय के लिए टाली भी जा सकती थी लेकिन राज्य के लोगों से जुड़े मुद्दे अधिक प्राथमिकता वाले हैं।

    हालांकि विजय की पार्टी टीवीके ने डीएमके के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता नारायणन ने कहा कि मुख्यमंत्री अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं और विदेश दौरे के दौरान किसी परिचित या दोस्त से मुलाकात करना कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने कहा कि अजित केवल तमिल फिल्मों के बड़े अभिनेता ही नहीं बल्कि मोटर रेसिंग की दुनिया में भी अपनी पहचान रखते हैं। ऐसे में उनसे मुलाकात को तमिलनाडु की ब्रांड वैल्यू से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

    दरअसल थलपति विजय की लंदन यात्रा को तमिलनाडु में मोटर स्पोर्ट्स से जुड़ी बड़ी योजना से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चेन्नई में एक आधुनिक मोटर स्पोर्ट्स सिटी बनाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसी सिलसिले में ब्रिटेन में मौजूद विश्वस्तरीय मोटर स्पोर्ट्स सुविधाओं और व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी यात्रा का हिस्सा बताया जा रहा है।

    विजय के साथ अभिनेत्री तृषा के नजर आने और अजित के साथ उनकी मुलाकात के वीडियो वायरल होने के बाद मामला अब केवल फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं रहा है। मुख्यमंत्री की यात्रा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो चुकी है। एक तरफ डीएमके इसे सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने का मुद्दा बना रही है तो दूसरी तरफ टीवीके इसे मुख्यमंत्री के कामकाज और तमिलनाडु की वैश्विक पहचान से जोड़कर देख रही है। ऐसे में विजय की लंदन यात्रा आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में और चर्चा का विषय बन सकती है।

  • चेन्नई में TVK नेता कन्नन की सड़क पर हत्या, छह हमलावरों ने धारदार हथियारों से किया हमला, पुलिस ने जांच तेज की

    चेन्नई में TVK नेता कन्नन की सड़क पर हत्या, छह हमलावरों ने धारदार हथियारों से किया हमला, पुलिस ने जांच तेज की


    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में शनिवार रात एक व्यक्ति की सरेराह हत्या से सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान कन्नन के रूप में हुई है, जो हाल ही में TVK से जुड़े थे। पुलिस के मुताबिक, छह लोगों के एक समूह ने उन पर धारदार हथियारों से हमला किया। गंभीर हमले के कारण कन्नन की मौके पर ही मौत हो गई।

    घटना चेन्नई के वन्ननदुरई इलाके में हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कन्नन अपने घर से निकलकर रामास्वामी एवेन्यू स्थित अपने कार्यालय की ओर जा रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने उन्हें घेर लिया और हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों में भी दहशत का माहौल बन गया।

    बताया जा रहा है कि हमलावरों की संख्या छह थी। उन्होंने कन्नन पर धारदार हथियारों से कई वार किए। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना की पूरी वारदात आसपास लगे CCTV कैमरों में कैद होने की बात सामने आई है। पुलिस अब इन फुटेज को जांच का अहम हिस्सा मानकर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।

    घटना की सूचना मिलते ही शास्त्री नगर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ पुलिस ने आसपास के इलाकों से भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। मामले में हत्या का केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। CCTV फुटेज के अलावा पुलिस घटना से जुड़े अन्य संभावित साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। अधिकारियों की कोशिश है कि हमले में शामिल सभी लोगों की पहचान जल्द की जाए और उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जाए।

    अब तक पांच संदिग्धों से पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, पूछताछ के आधार पर किसी आरोपी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

    जांच में मृतक कन्नन की आपराधिक पृष्ठभूमि भी सामने आई है। बताया गया है कि करीब आठ वर्ष पहले इसी इलाके में शिवा और वेलु नाम के दो लोगों की हत्या से जुड़े एक मामले में कन्नन के खिलाफ मुकदमा चल रहा था। पुलिस अब इस पुराने मामले और मौजूदा हत्या के बीच किसी संभावित संबंध की भी जांच कर सकती है।

    कन्नन के हाल ही में TVK में शामिल होने की जानकारी के बाद मामले का राजनीतिक पहलू भी चर्चा में है। हालांकि, फिलहाल पुलिस ने हत्या के पीछे राजनीतिक कारण होने की पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसियां सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही हैं।

    इस घटना ने चेन्नई में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। सरेराह हुई हत्या के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है।

    फिलहाल मामले में हत्या का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। पुलिस CCTV फुटेज, संदिग्धों से पूछताछ और मृतक की पृष्ठभूमि से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के बाद हत्या की परिस्थितियों और इसके पीछे की वजह को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • तमिलनाडु में बदले सियासी समीकरण: DMK से अलग हुई MDMK, विजय की TVK को दिया समर्थन

    तमिलनाडु में बदले सियासी समीकरण: DMK से अलग हुई MDMK, विजय की TVK को दिया समर्थन


    चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डीएमके (DMK) की लंबे समय से सहयोगी रही मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (MDMK) ने डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) से अलग होने की घोषणा कर दी है। पार्टी ने डीएमके पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हुए गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला किया है। साथ ही अभिनेता और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय को आगामी उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों में समर्थन देने का भी ऐलान किया है।

    शनिवार को चेन्नई में आयोजित एमडीएमके की सामान्य परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया। पार्टी की ओर से पारित प्रस्ताव में कहा गया कि चुनाव पूर्व गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा, लेकिन फिलहाल एमडीएमके डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी।

    DMK पर लगाए गंभीर आरोप

    पार्टी प्रमुख वाइको ने आरोप लगाया कि डीएमके ने हिंदुत्व समर्थक ताकतों के साथ मिलकर एआईएडीएमके (AIADMK) के नेतृत्व वाली सरकार बनाने की कोशिश की थी। उनका कहना था कि यह राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रहा और इस घटनाक्रम के बाद सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस के अस्तित्व का उद्देश्य ही समाप्त हो गया।

    पार्टी के प्रस्ताव में कहा गया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए गठबंधन में बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया था, इसलिए कार्यकर्ताओं की राय के आधार पर यह निर्णय लिया गया।

    विजय की पार्टी को समर्थन

    एमडीएमके ने अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के प्रति खुला समर्थन जताया। वाइको ने कहा कि टीवीके भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे, दो-भाषा नीति और सी.एन. अन्नादुरै के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का दावा करती है। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में दोनों दलों के बीच राजनीतिक सहयोग और मजबूत हो सकता है।

    विधायकों के इस्तीफे को लेकर दावा

    वाइको ने यह भी दावा किया कि विजय ने एमडीएमके के दोनों विधायकों को इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था और उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करने की पेशकश भी की थी। हालांकि दोनों विधायकों ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।

    एमडीएमके के विधायक आर. सेंथिलसेल्वन और टी.एम. राजेंद्रन वर्ष 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके के ‘राइजिंग सन’ चुनाव चिह्न पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में एमडीएमके ने गठबंधन के तहत चार सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें दो पर जीत हासिल की थी।

    ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों पर जवाब

    विजय पर लगाए जा रहे ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों का जवाब देते हुए वाइको ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी के विधायकों को डीएमके में शामिल कराने की कोशिश होती है, तो उसे क्या कहा जाएगा।

    एमडीएमके वर्ष 2017 से डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी। हालांकि पिछले कुछ महीनों से दोनों दलों के रिश्तों में लगातार खटास देखने को मिल रही थी। विजय और वाइको की हालिया मुलाकात तथा एमडीएमके नेताओं की नाराजगी के बाद अब गठबंधन टूटने से तमिलनाडु की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।

  • तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय और संगीता के तलाक मामले में फिर टली सुनवाई, अदालत ने 7 अगस्त की नई तारीख की तय

    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय और संगीता के तलाक मामले में फिर टली सुनवाई, अदालत ने 7 अगस्त की नई तारीख की तय

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कझगम के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय तथा उनकी पत्नी संगीता के बीच चल रहे तलाक मामले की सुनवाई एक बार फिर आगे बढ़ा दी गई है। चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में निर्धारित सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होने के कारण अदालत ने मामले की अगली तारीख 7 अगस्त तय की है। इस घटनाक्रम के बाद यह मामला एक बार फिर सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है।

    सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान न तो मुख्यमंत्री विजय अदालत पहुंचे और न ही उनकी पत्नी संगीता ने व्यक्तिगत रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से उनके अधिवक्ता अदालत में मौजूद रहे और उन्होंने कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखा। अदालत ने दोनों पक्षों की गैरहाजिरी को ध्यान में रखते हुए सुनवाई को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

    यह मामला पिछले कई महीनों से फैमिली कोर्ट में विचाराधीन है। इससे पहले भी कई अवसरों पर सुनवाई निर्धारित होने के बावजूद दोनों पक्ष व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे। कानूनी प्रक्रिया के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की अनुमति को लेकर भी अदालत के समक्ष अनुरोध प्रस्तुत किए गए थे। मुख्यमंत्री पद से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण कारणों के रूप में बताया गया है।

    संगीता ने वर्ष 2025 के अंतिम महीनों में अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए वैवाहिक संबंध समाप्त करने की मांग की थी। याचिका में यह कहा गया था कि पति-पत्नी के बीच उत्पन्न मतभेद ऐसे स्तर तक पहुंच चुके हैं जहां वैवाहिक संबंधों को सामान्य रूप से आगे बढ़ाना संभव नहीं रह गया है। याचिका में वैधानिक अधिकारों से संबंधित अन्य मांगों को भी शामिल किया गया था।

    मुख्यमंत्री विजय का सार्वजनिक जीवन लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा है। फिल्म जगत में लोकप्रिय अभिनेता के रूप में पहचान बनाने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और अपनी पार्टी के माध्यम से राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक छवि पर लोगों की विशेष नजर बनी हुई है।

    इसी कारण उनके निजी जीवन से जुड़ा यह कानूनी मामला भी व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के निजी मामलों को लेकर लोगों की स्वाभाविक रुचि रहती है, हालांकि कानूनी प्रक्रिया को पूरी संवेदनशीलता और गोपनीयता के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में अदालत दोनों पक्षों को पर्याप्त अवसर देती है ताकि किसी भी संभावित समाधान की संभावना को परखा जा सके। ऐसे मामलों में अदालत की प्राथमिकता कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए दोनों पक्षों के अधिकारों की रक्षा करना होती है।

    अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी। उस दिन अदालत मामले की प्रगति, पक्षकारों की उपस्थिति और आगे की कानूनी कार्यवाही को लेकर निर्णय ले सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस चर्चित मामले में आगे की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है।

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  • इंडी गठबंधन की अहम बैठक से दूर रही सीएम विजय की TVK, तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन साधने की रणनीति पर चर्चा तेज

    इंडी गठबंधन की अहम बैठक से दूर रही सीएम विजय की TVK, तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन साधने की रणनीति पर चर्चा तेज

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित इंडिया ब्लॉक की बैठक के बीच तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी तमिलगा वेत्त्री कझगम की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली पार्टी के बैठक में शामिल न होने को लेकर विभिन्न तरह के राजनीतिक संकेत और संभावित रणनीतियों पर चर्चा तेज हो गई है।

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के समर्थन से सरकार बनाने वाली टीवीके फिलहाल राज्य की सत्ता में है। इसके बावजूद पार्टी ने दिल्ली में आयोजित विपक्षी गठबंधन की बैठक से दूरी बनाए रखी। इस फैसले को केवल एक औपचारिक अनुपस्थिति के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक रणनीति होने की संभावना जताई जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवीके की अनुपस्थिति का एक प्रमुख कारण उसका राष्ट्रीय संसद में प्रतिनिधित्व न होना हो सकता है। वर्तमान में पार्टी के पास लोकसभा या राज्यसभा में कोई सदस्य नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार के खिलाफ संसदीय रणनीति और संसद से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित बैठक में उसकी भूमिका सीमित मानी जा सकती है। यही कारण है कि पार्टी ने फिलहाल दूरी बनाए रखना अधिक उपयुक्त समझा हो।

    एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि टीवीके अभी तक औपचारिक रूप से इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं बनी है। तमिलनाडु में सरकार गठन के लिए कांग्रेस और अन्य दलों का समर्थन मिलने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की संरचना और सदस्यता अलग विषय मानी जाती है। ऐसे में राज्य स्तर के राजनीतिक सहयोग और राष्ट्रीय गठबंधन की सदस्यता को एक समान नहीं माना जा रहा है।

    तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और टीवीके के बीच प्रतिस्पर्धा भी इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू मानी जा रही है। डीएमके लंबे समय से इंडिया ब्लॉक की प्रमुख सहयोगी पार्टियों में शामिल रही है। विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की सत्ता से बाहर होने के बावजूद डीएमके प्रदेश में एक प्रभावशाली विपक्षी दल बनी हुई है। ऐसे में टीवीके का इंडिया ब्लॉक की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होना राज्य की राजनीति में विरोधाभासी संदेश दे सकता है।

    विश्लेषकों का यह भी मानना है कि मुख्यमंत्री विजय अपनी पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं। विधानसभा चुनावों में टीवीके ने खुद को पारंपरिक राजनीतिक दलों के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया था। यदि पार्टी जल्दबाजी में किसी राष्ट्रीय गठबंधन का औपचारिक हिस्सा बनती है, तो उसकी स्वतंत्र राजनीतिक छवि प्रभावित हो सकती है। इसलिए फिलहाल वह मुद्दों के आधार पर समर्थन और सहयोग की नीति अपनाना चाहती है।

    भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए भी टीवीके का यह रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रीय गठबंधनों में औपचारिक रूप से शामिल होने से राजनीतिक विकल्प सीमित हो सकते हैं। जबकि वर्तमान परिस्थितियों में पार्टी अपने लिए अधिक लचीलापन बनाए रखना चाहती है। इससे उसे राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है।

    तमिलनाडु में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच मुख्यमंत्री विजय की पार्टी का यह कदम आने वाले समय की रणनीति का संकेत माना जा रहा है। फिलहाल टीवीके सत्ता संचालन, संगठन विस्तार और अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत करने पर ध्यान देती दिखाई दे रही है। ऐसे में इंडिया ब्लॉक की बैठक से दूरी को केवल एक अनुपस्थिति नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

  • सीएम विजय ने एमके स्टालिन पर वार, कहा- आपके अपने लोग ही आपकी राजनीति खत्म करेंगे

    सीएम विजय ने एमके स्टालिन पर वार, कहा- आपके अपने लोग ही आपकी राजनीति खत्म करेंगे

    नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर करारा हमला बोला है। टीवीके ने स्पष्ट किया कि स्टालिन को सबसे बड़ा राजनीतिक झटका उनके विरोधियों से नहीं, बल्कि उनके अपने करीबी सहयोगियों और आसपास सक्रिय लोगों से मिलेगा।

    टीवीके की आईटी विंग ने डीएमके (DMK) पर आरोप लगाया कि पार्टी परिवारवाद और सत्ता को केवल अपने ही परिवार तक सीमित रखती है। टीवीके ने कहा कि उनकी पार्टी गठबंधन और जनता के समर्थन के माध्यम से सत्ता में आई है, जबकि डीएमके केवल अपने परिवार और करीबी लोगों के लिए सत्ता संरक्षित रखता है।

    सीएम विजय ने स्टालिन को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि उनके इर्द-गिर्द मौजूद लोग उन्हें वास्तविक परिस्थितियों और जमीनी सच्चाई से दूर रख रहे हैं। टीवीके ने तंज कसते हुए कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो स्टालिन को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, जैसा कि उन्होंने कोलाथुर सीट और सत्ता खोने के समय देखा था।

    टीवीके ने अपने बयान में यह भी कहा कि पार्टी केवल राजनीतिक फायदा उठाने वाली स्वार्थी ताकत नहीं है और वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने में विश्वास रखती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि स्टालिन का राजनीतिक अंत उनके विरोधियों से नहीं, बल्कि उनके आसपास सक्रिय चापलूसों के समूह से होगा।

    टीवीके के इस बयान पर अभी तक DMK की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान आगामी विधानसभा और स्थानीय चुनावों को लेकर तमिलनाडु में बढ़ते तनाव को दर्शाता है।

    टीवीके का दावा है कि उनकी पार्टी जनता के व्यापक समर्थन के साथ सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है। इसके जरिए वह यह संदेश देना चाहती है कि लोकतांत्रिक सहयोग और जनता की आवाज पर आधारित राजनीति ही टिकाऊ है।

    विश्लेषकों का कहना है कि सीएम विजय का यह हमला केवल पूर्व सीएम स्टालिन पर निशाना नहीं है, बल्कि यह DMK के भीतर सत्ता संघर्ष और नेतृत्व विवाद को उजागर करने की कोशिश भी है। आगामी महीनों में तमिलनाडु की राजनीतिक तस्वीर में इसके असर दिख सकते हैं।

    टीवीके ने अपने बयान के अंत में यह भी आगाह किया कि स्टालिन को सही तस्वीर और वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी नहीं दी जा रही है। अगर यही स्थिति जारी रही, तो यह उनके लिए गंभीर राजनीतिक परिणाम ला सकता है।

    इस बयान से साफ है कि तमिलनाडु की राजनीति में टीवीके और DMK के बीच टकराव अब और बढ़ सकता है, और आने वाले समय में दोनों पार्टियों की रणनीतियों और गठबंधनों पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

  • INDIA ब्लॉक में बढ़ा सियासी तनाव: थलापति विजय की TVK को समर्थन पर चिदंबरम का बड़ा दावा, DMK को पहले ही दी थी जानकारी

    INDIA ब्लॉक में बढ़ा सियासी तनाव: थलापति विजय की TVK को समर्थन पर चिदंबरम का बड़ा दावा, DMK को पहले ही दी थी जानकारी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में थलापति विजय की पार्टी टीवीके को लेकर बने नए राजनीतिक समीकरणों के बीच INDIA ब्लॉक के भीतर मतभेद गहराते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने दावा किया है कि उनकी पार्टी ने टीवीके को समर्थन देने के फैसले की जानकारी पहले ही DMK और अन्य सहयोगी दलों को दे दी थी।

    चिदंबरम ने एक मीडिया बातचीत में कहा कि कांग्रेस ने अपने गठबंधन सहयोगियों को विश्वास में लेकर ही यह निर्णय लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीपीआई, वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे दलों को भी इस फैसले की जानकारी दी गई थी। उनके अनुसार, केवल घोषणा के समय में एक दिन का अंतर था, लेकिन निर्णय की जानकारी पहले साझा कर दी गई थी।

    उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य राजनीतिक अस्थिरता को रोकना और किसी भी स्थिति में दोबारा चुनाव की संभावना को टालना था। चिदंबरम के अनुसार, गठबंधन के भीतर भी यह व्यापक सहमति थी कि यदि टीवीके बहुमत से थोड़ा पीछे रह जाती है, तो ऐसी स्थिति में समर्थन देकर स्थिर सरकार बनाने की कोशिश की जाए।

    वहीं, DMK ने कांग्रेस के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के युवा संगठन ने इस निर्णय को गठबंधन के साथ विश्वासघात करार दिया है। DMK नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने बिना पूरी सहमति के यह समर्थन देकर गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़ा किया है।

    इस विवाद के बाद INDIA ब्लॉक के भीतर राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। तमिलनाडु में पहले से ही गठबंधन की राजनीति जटिल मानी जाती है, और अब टीवीके को समर्थन देने के फैसले ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

    चुनावी नतीजों के अनुसार, अभिनेता-राजनेता थलापति विजय के नेतृत्व वाली टीवीके ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई, लेकिन वह बहुमत के लिए आवश्यक 118 सीटों से पीछे रह गई। इसके बाद उसे सरकार गठन के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता पड़ी।

    कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के समर्थन की घोषणा कर टीवीके को समर्थन दिया, जिससे उसके सरकार बनाने की संभावनाएं मजबूत हुईं। इसके बाद वीसीके, भाकपा और माकपा जैसे दलों ने भी समर्थन दिया, जिनके पास सीमित संख्या में विधायक थे। इन समर्थन के बाद टीवीके बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में सफल रही और सरकार गठन का दावा पेश कर सकी।

    हालांकि, इस राजनीतिक कदम ने INDIA ब्लॉक के भीतर मतभेदों को उजागर कर दिया है। DMK का आरोप है कि इस तरह का निर्णय गठबंधन की सामूहिक रणनीति के खिलाफ है और इससे मतदाताओं के विश्वास पर असर पड़ा है।

    चिदंबरम का दावा है कि यह निर्णय राजनीतिक स्थिरता को ध्यान में रखकर लिया गया था, जबकि विरोधी दल इसे गठबंधन अनुशासन के खिलाफ मान रहे हैं। इस मुद्दे ने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और INDIA ब्लॉक के भीतर भविष्य की एकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    फिलहाल, इस विवाद पर दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और आने वाले दिनों में यह मामला और राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।

  • तमिलनाडु में तेज हुई सियासी हलचल: AIADMK में टूट के संकेत, तीन विधायकों के इस्तीफे से बदले राजनीतिक समीकरण

    तमिलनाडु में तेज हुई सियासी हलचल: AIADMK में टूट के संकेत, तीन विधायकों के इस्तीफे से बदले राजनीतिक समीकरण

    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में सोमवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब विधानसभा चुनाव परिणाम आने के महज 21 दिनों के भीतर AIADMK के तीन विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। खास बात यह रही कि इस्तीफा देने के तुरंत बाद तीनों नेताओं ने TVK का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित बदलावों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।

    बताया जा रहा है कि इस्तीफा देने वाले तीनों विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाले नेता माने जाते हैं और पार्टी के भीतर एक खास गुट से जुड़े हुए थे। उनके अचानक लिए गए फैसले ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। चुनाव के इतने कम समय बाद पार्टी छोड़ना केवल सामान्य राजनीतिक घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संगठन के भीतर चल रहे असंतोष और आंतरिक खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, तीनों विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद नई राजनीतिक दिशा चुनने का फैसला लिया। इसके तुरंत बाद वे TVK नेतृत्व के संपर्क में आए और पार्टी में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम ने राज्य की सत्तारूढ़ और विपक्षी राजनीति दोनों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आने वाले समय में कुछ और नेता भी इसी राह पर चल सकते हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम AIADMK के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी के भीतर विभिन्न विचारधाराओं और नेतृत्व को लेकर मतभेदों की चर्चा पहले से चल रही थी। ऐसे में तीन विधायकों का पार्टी छोड़ना संगठनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है। इससे पार्टी के अंदर मौजूद गुटबाजी की चर्चाओं को भी और बल मिला है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावनाओं को बढ़ा दिया है। चुनाव परिणामों के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर लगातार बदलती दिखाई दे रही है और दलों के बीच समर्थन तथा रणनीति को लेकर नए समीकरण उभरते नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बदलाव का असर राज्य की राजनीति पर कितना व्यापक पड़ता है और क्या यह राजनीतिक फेरबदल किसी बड़े बदलाव की शुरुआत साबित होता है।