Tag: TVK

  • तमिलनाडु में TVK का कमाल…. लेकिन अभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे विजय….जानें इसकी वजह?

    तमिलनाडु में TVK का कमाल…. लेकिन अभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे विजय….जानें इसकी वजह?


    चेन्नई।
    सोमवार को आए तमिलनाडु विधानसभा (Tamil Nadu Assembly elections) के चुनावी नतीजों में हाल ही में बनी पार्टी टीवीके (TVK) ने कमाल कर दिया। अपने पहले ही चुनाव में टीवीके चीफ थालापति विजय (TVK Chief Thalapathy Vijay) की पार्टी ने तमिलनाडु के 108 सीटों पर जीद दर्ज की है। आज पूरे देश में नई बनी पार्टी टीवीके और थालापति विजय की चर्चा है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब थालापति विजय राजनीति में नहीं आना चाहते थे। राजनीति में आने से पहले अपने भविष्य को लेकर विजय थालापति असमंजस में रहते थे। आइए जानते हैं उन्हें किस बात का डर था और वो राजनीति में अभी क्यों नहीं आना चाहते थे।


    किस बात का था डर

    साउथ की फिल्मों में सुपरस्टार थालापति विजय बॉक्स ऑफिस पर एकदम हिट थे और प्रदेश की जनता भी उन्हें भगवान की तरह पूजती थी, लेकिन वो राजनीति में नहीं आना चाहते थे। विजय के पिता भी चाहते थे कि वो राजनीति में आएं, लेकिन उनको अपने ऊपर पूरी तरह भरोसा नहीं था। अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर थालापति विजय निश्चित नहीं थे, इसलिए वो पार्टी नहीं बनाना चाहते थे।

    थालापति विजय ने अचानक क्यों बनाई पार्टी
    थालापति के माता-पिता उन्हें साल 2009 से ही राजनीति में लाना चाहते थे, क्योंकि पूरे तमिलनाडु में उनकी लोकप्रियता और फैन फॉलोइंग बहुत ज्यादा थी। लेकिन वो राजनीति में नहीं आए। इस दौरान वो चाहते थे कि प्रदेश में ऐसा वैक्यूम बने जब एक नई राजनीतिक पार्टी की जरूरत हो। साल 2016 में जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके (AIADMK) अपनी साख खोती दिख रही थी। तमिलनाडु में मजबूत संगठन के बावजूद अपने शीर्ष नेताओं के बीच चल रही लगातार लड़ाई के कारण एआईएडीएमके ने अपनी राजनीतिक हैसियत को खत्म कर लिया। इस दौरान विजय थालापति ने एआईएडीएमके के खिलाफ बुगल फूंक दिया और बीजेपी को भी निशाने पर लिया।

    एआईएडीएमके के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और बीजेपी के खिलाफ सांप्रदायिकता का आरोप लगाकर विजय ने जमीन पर अपना काम शुरू कर दिया। इस दौरान विजय को युवाओं और महिलाओं के बीच काफी समर्थन मिला। इसी समय विजय ने पार्टी बनाने का मन बना लिया और साल 2026 के चुनावों में कमाल करते हुए पहली बार में ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर आई।

  • देश की सियासत में बड़ा उलटफेर! बंगाल में BJP का ‘जयघोष’, तमिलनाडु में विजय की एंट्री, प्रियंका चतुर्वेदी ने बताए बदलाव के संकेत

    देश की सियासत में बड़ा उलटफेर! बंगाल में BJP का ‘जयघोष’, तमिलनाडु में विजय की एंट्री, प्रियंका चतुर्वेदी ने बताए बदलाव के संकेत


    नई दिल्ली।  देशभर में चुनावी रुझानों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है और अलग-अलग राज्यों से बड़े बदलाव के संकेत सामने आ रहे हैं। इसी बीच Priyanka Chaturvedi ने इन नतीजों को भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव का इशारा बताया है।

    उनके मुताबिक, ये चुनाव सिर्फ जीत-हार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की सियासी दिशा बदलने वाले साबित हो सकते हैं। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF गठबंधन की बढ़त ने वामपंथी गढ़ को हिला दिया है, जो लंबे समय से सत्ता में बना हुआ था। इसे एंटी-इनकंबेंसी और बदलाव की चाह का नतीजा माना जा रहा है।

    वहीं तमिलनाडु में Vijay की पार्टी TVK ने जबरदस्त एंट्री करते हुए पारंपरिक दलों DMK और AIADMK को कड़ी टक्कर दी है। यह राज्य की राजनीति में नई शुरुआत और युवा नेतृत्व के उभार के तौर पर देखा जा रहा है।

    पश्चिम बंगाल में Bharatiya Janata Party की मजबूत बढ़त ने सबका ध्यान खींचा है। रुझानों में पार्टी 150 से 200 सीटों के बीच पहुंचती दिख रही है, जो राज्य की राजनीति में बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। वहीं असम और पुडुचेरी में भी बीजेपी और उसके सहयोगियों ने अपनी पकड़ बनाए रखी है।

    प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि इन नतीजों से साफ है कि देश में पुराने राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं और नई ताकतें उभर रही हैं। जहां एक तरफ पारंपरिक गढ़ कमजोर पड़ते दिख रहे हैं, वहीं नए नेतृत्व और नई पार्टियां तेजी से जगह बना रही हैं।

    कुल मिलाकर, 2026 के चुनावी रुझान भारतीय राजनीति के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं जहां हर राज्य अपनी अलग कहानी लिख रहा है और आने वाले समय में सियासी तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।

  • तमिलनाडु राजनीति: विजय की टीवीके ने NDA से गठबंधन की अटकलें खारिज कीं, कहा भाजपा हमारी वैचारिक प्रतिद्वंद्वी

    तमिलनाडु राजनीति: विजय की टीवीके ने NDA से गठबंधन की अटकलें खारिज कीं, कहा भाजपा हमारी वैचारिक प्रतिद्वंद्वी


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में हाल के दिनों में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्ट्री कझगम और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों पर शनिवार को पार्टी ने साफ तौर पर विराम लगा दिया। टीवीके के नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी का एनडीए के साथ किसी भी प्रकार का चुनावी गठबंधन करने का कोई इरादा नहीं है और इस तरह की खबरें पूरी तरह से अफवाह हैं।

    पार्टी के संयुक्त महासचिव सी. टी. आर. निर्मल कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एनडीए के साथ गठबंधन की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी उनकी पार्टी की वैचारिक प्रतिद्वंद्वी है और टीवीके पहले भी यह विषय पर अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मीडिया और सोशल मीडिया पर टीवीके को लेकर कई तरह की अटकलें और खबरें प्रसारित की जा रही हैं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

    निर्मल कुमार ने बताया कि 13 मार्च को पार्टी के जिला सचिवों के साथ एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक का उद्देश्य आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी की संगठनात्मक ताकत का आकलन करना और संभावित चुनावी रणनीतियों पर चर्चा करना था। हालांकि, इस बैठक को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि टीवीके एनडीए के साथ गठबंधन पर विचार कर रही है। उन्होंने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बैठक का गठबंधन से कोई संबंध नहीं था।

    उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें। निर्मल कुमार ने कहा कि टीवीके के बारे में अटकलों पर आधारित कई खबरें रोजाना प्रसारित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना है।

    इधर, तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने भी इस मुद्दे पर सीधे तौर पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की। पत्रकारों द्वारा टीवीके के साथ संभावित गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि मीडिया गठबंधन को लेकर ज्यादा चिंतित है, जबकि उनका ध्यान राज्य के वास्तविक मुद्दों पर है। नागेंद्रन ने कहा कि तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था की स्थिति और महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण हैं और इन्हीं विषयों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के सक्रिय राजनीति में आने के बाद तमिलनाडु की राजनीतिक तस्वीर में नई हलचल देखने को मिल रही है। ऐसे में विभिन्न दलों के साथ संभावित गठबंधनों को लेकर समय-समय पर अटकलें लगना स्वाभाविक है। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि फिलहाल एनडीए के साथ किसी भी तरह की चुनावी साझेदारी का सवाल ही नहीं उठता। इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में चल रही अटकलों पर काफी हद तक विराम लग गया है और टीवीके ने यह संकेत दे दिया है कि वह अपनी राजनीतिक रणनीति स्वतंत्र रूप से तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • विधानसभा चुनावों से पहले DMK से तकरार और TVK से इकरार? 32 पर कांग्रेस नहीं तैयार

    विधानसभा चुनावों से पहले DMK से तकरार और TVK से इकरार? 32 पर कांग्रेस नहीं तैयार


    चैन्‍नई।
    तमिलनाडु में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले वहां सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की अगुवाई वाली सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने सहयोगी पार्टी कांग्रेस को 234 सदस्यों वाली विधानसभा में मात्र 32 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है। इससे कांग्रेस नाराज हो गई है। कांग्रेस नेता अब अन्य विकल्पों की तलाश में जुट गए हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेता शीर्ष नेतृत्व खासकर राहुल गांधी से आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके से गठबंधन की संभानवाएं तलाशने का अनुरोध करने की तैयारी में हैं।

    यह स्थिति सीएम स्टालिन के लिए टेंशन दे सकती है।

    दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने अपने आंतरिक सर्वे के हिसाब से 40 सीटों का टारगेट सेट किया था लेकिन DMK ने उसे महज 32 सीटें ऑफर की हैं। अब ऐसी तनातनी के बाद कांग्रेस 38 सीटों तक पहुंच पाई है लेकिन स्टालिन की पार्टी टस से मस नहीं हो रही। लिहाजा, कांग्रेस ने दूसरे विकल्पों की तलाश तेज कर दी है। इसी कड़ी में कांग्रेस के कुछ नेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) से संभावित गठबंधन का मुद्दा पार्टी नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी के सामने रखने की तैयारी में हैं।
    सत्ता में हिस्सेदारी की भी मांग

    कांग्रेस सांसद माणिक्कम टैगोर ने सोमवार को साफ कहा कि पार्टी सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अगर गठबंधन सत्ता में आता है तो सरकार में हिस्सेदारी भी चाहती है। उनके इस बयान को पार्टी कार्यकर्ताओं के दबाव और चुनाव से पहले रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

    TVK ने कांग्रेस को बताया ‘स्वाभाविक सहयोगी’

    टैगोर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK ने कांग्रेस को अपना ‘प्राकृतिक सहयोगी’ बताया है। इससे तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज़ हो गई है। TVK के प्रवक्ता फेलिक्स जेराल्ड ने कहा कि विजय और राहुल गांधी के बीच दोस्ताना संबंध हैं और कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना काफ़ी अधिक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु कांग्रेस के अंदरूनी हितों के कारण बातचीत में देरी हो सकती है।

    फैसला विजय करेंगे

    इस बीच TVK नेता निर्मल कुमार ने कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख विजय ही करेंगे। उन्होंने कहा, “हमारे नेता सभी से सलाह-मशविरा कर गठबंधन को लेकर घोषणा करेंगे। चुनाव में अभी करीब दो महीने का समय है।” कुल मिलाकर, डीएमके के साथ सीट बंटवारे को लेकर असमंजस, सत्ता में हिस्सेदारी की मांग और TVK के साथ संभावित गठबंधन,इन सबने तमिलनाडु की राजनीति को चुनाव से पहले और दिलचस्प बना दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कांग्रेस किस रास्ते पर आगे बढ़ती है।

  • जनसभा में भड़कीं ‘लेडी सिंघम’ IPS ईशा सिंह, करूर कांड पर TVK नेता को लगाई जोरदार फटकार

    जनसभा में भड़कीं ‘लेडी सिंघम’ IPS ईशा सिंह, करूर कांड पर TVK नेता को लगाई जोरदार फटकार


    नई दिल्ली । TVK यानी तमिलगा वेत्री (tamilga vetri)कषगम प्रमुख विजय ने मंगलवार को पुडुचेरी (Puducherry)में अपनी पहली जनसभा की। इस दौरान उनकी पार्टी के नेताओं और एक महिला आईपीएस(IPS) के बीच बहस का वीडियो सामने आया है। वीडियो में नजर आ रहा है कि अधिकारी करूर रैली(Karur Rally) में हुई मौतों का जिक्र कर नेताओं पर निशाना साध रही हैं। मामले का वीडियो वायरल हो रहा है।

    क्या था मामला
    मामला टीवीके की उप्पालम पोर्ट ग्राउंड में हुई जनसभा का है। एक वायरल वीडियो में पुडुचेरी पुलिस अधीक्षक ईशा सिंह को नाराज होते हुए देखा जा सकता है। वह कह रही हैं, ‘तुम पर इतने लोगों का खून है। तुम मुझे पूछ रहे हो कि मैं क्या कर रही हूं। तुम क्या कर रहे हो। 40 लोग मर गए थे। तुम क्या कर रहे।’ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें टीवीके महासचिव बस्सी आनंद के हाथों से माइक छीनते हुए भी देखा गया।

    खबर है कि एसपी ईशा सिंह ने अपने विजय के रोड शो को अनुमति देने के पहले ही अपने सीनियर्स को चेताया था। इसके बाद उन्हें रैली की देखरेख का काम सौंपा गया। खास बात है कि करूर में हुए कांड के बाद विजय की यह पहली बड़ी रैली थी। उस रैली में 41 लोगों की मौत हो गई थी।

    कौन हैं आईपीएस ईशा सिंह
    साल 1998 में मुंबई में जन्मीं ईशा सिंह के पिता योगेश प्रताप सिंह भी 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। कहा जाता है कि भ्रष्टाचार उजागर करने के चलते बार-बार सजा के तौर पर मिल रही पोस्टिंग के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। सिंह की मां आभा सिंह भारतीय डाक सेवा में कार्यरत थीं, लेकिन बाद में उन्होंने कानून का रास्ता चुना और वकालत की और जनहित के मामलों में रहीं। इनमें सलमान खान हिट एंड रन केस भी शामिल है।

    इंडिया टुडे के अनुसार, ईशा सिंह भी पुलिस अधिकारी बनने से पहले वकालत में समय गुजार चुकी हैं। उन्होंने नेशनल लॉ स्कूल से शिक्षा हासिल की थी। साल 2010 में उन्होंने सैप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जान गंवाने वाले कर्मियों की विधवाओं को 10 लाख रुपये मुआवजा दिलवाया था।