Tag: UAE

  • Womens Asia Cup : श्रीलंका की बड़ी जीत, UAE को 9 विकेट से हराया… आज भारत का थाइलैंड से मुकाबला

    Womens Asia Cup : श्रीलंका की बड़ी जीत, UAE को 9 विकेट से हराया… आज भारत का थाइलैंड से मुकाबला


    दुबई।
    विमेंस एशिया कप 2026 (Womens Asia Cup 2026) का आगाज हो गया है। इस बार टूर्नामेंट की मेजबानी यूएई (UAE) कर रहा है। अभी तक खेले गए दो मुकाबलों में थाइलैंड (Thailand) और श्रीलंका (Sri Lanka) ने जीत दर्ज की है। थाइलैंड ने अपने पहले मुकाबले में हॉन्ग-कॉन्ग को हराया था, जबकि श्रीलंका ने मेजबान यूएई को 9 विकेट से धूल चटाई। यह श्रीलंका विमेंस टीम (Sri Lanka Women’s Team) की टी20 क्रिकेट में सबसे बड़ी जीत है। यूएई के खिलाफ उन्होंने मुकाबले महज 7.5 ओवर में ही खत्म कर दिया। उन्हें जीत के लिए 80 रनों का मामूली टारगेट मिला था, जिसे कप्तान चमारी अट्टापट्टू की 48 रनों की तूफानी पारी के दम पर उन्होंने आसानी से हासिल कर लिया। आज हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम इंडिया अपने अभियान का आगाज थाइलैंड के खिलाफ करने जा रही है। भारत इस टूर्नामेंट में बतौर फेवरेट उतरेगी।

    बता दें, विमेंस एशिया कप में इस बार कुल 8 टीमें हिस्सा ले रहीं हैं, जिन्हें 4-4 के दो ग्रुप में बांटा गया है।
    ग्रुप-ए- भारत, पाकिस्तान, थाइलैंड और हॉन्ग-कॉन्ग जैसी टीमें हैं।
    ग्रुप-बी- श्रीलंका, बांग्लादेश, यूएई और इंडोशनेशिया है।

    ग्रुप स्टेज में टॉप-2 में रहने वाली टीमों को सेमीफाइनल का टिकट मिलेगा। सेमीफाइनल 10 और 11 सितंबर को दुबई में खेले जाएंगे, जबकि खिताबी मुकाबला इसी मैदान पर 13 सितंबर को आयोजित होगा।

    वुमेंस एशिया कप का 10वां एडिशन है। पिछली बार इस टूर्नामेंट को श्रीलंका ने अपने घर पर जीता था। फाइनल में उन्होंने 7 बार की चैंपियन टीम इंडिया को हराया था। भारत इस टूर्नामेंट में जरूरत उनसे बदला लेना चाहेगा।

    ग्रुप-ए का पहला मैच थाइलैंड और हॉन्ग-कॉन्ग के बीच खेला गया था। इस मैच में पहले बैटिंग करते हुए थाइलैंड की टीम ने 120 रन बोर्ड पर लगाए थे, जिसके जवाब में हॉन्ग-कॉन्ग की विमेंस टीम 114 रन बना पाई थी। थाइलैंड ने यह मैच 6 रनों के अंतर से जीता। आज हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम इंडिया थाइलैंड के खिलाफ अपने अभियान का आगाज करेगी। भारत-पाकिस्तान बहुप्रतीक्षित मैच 5 सितंबर को खेला जाएगा।

    श्रीलंका ने यूएई के खिलाफ गेंदों के मामले में अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए विमेंस एशिया कप का आगाज किया। श्रीलंका ने अपना पहला मैच 73 गेंदें शेष रहते जीता। यूएई ने पहले बैटिंग करते 79 रन ही बोर्ड पर लगाए, उनकी पूरी टीम 19.5 ओवर में सिमट गई। श्रीलंका ने इस टारगेट को 7.5 ओवर में 1 विकेट के नुकसान पर आसानी से चेज कर लिया। चमीरा अट्टापट्टू ने 48 रनों की तूफानी पारी खेली।

  • अमेरिका ईरान तनाव के बीच यूएई में मिसाइल खतरे का अलर्ट, एयर डिफेंस ने कार्रवाई कर स्थिति संभाली

    अमेरिका ईरान तनाव के बीच यूएई में मिसाइल खतरे का अलर्ट, एयर डिफेंस ने कार्रवाई कर स्थिति संभाली


    नई दिल्ली । 
    पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर संयुक्त अरब अमीरात में भी देखने को मिला। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश की ओर बढ़ रहे मिसाइल खतरे का पता एयर डिफेंस सिस्टम ने लगाया। इसके बाद दुबई में लोगों के मोबाइल फोन पर पहली बार मिसाइल खतरे को लेकर इमरजेंसी अलर्ट भेजा गया। प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय आधिकारिक सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की।

    मिसाइल अलर्ट जारी होने के दौरान दुबई और आसपास के इलाकों में आसमान से तेज आवाजें सुनाई देने की जानकारी सामने आई। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन आवाजों का संबंध एयर डिफेंस सिस्टम की कार्रवाई से था। सुरक्षा प्रणाली ने देश की ओर बढ़ रहे मिसाइल खतरे का मुकाबला करने और मिसाइलों को हवा में रोकने की कोशिश की।

    यूएई सरकार ने कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखी। कुछ समय बाद एक दूसरा अलर्ट जारी किया गया, जिसमें बताया गया कि मिसाइल का खतरा समाप्त हो गया है और स्थिति सामान्य हो गई है।

    यूएई के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि ईरान की ओर से दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। मंत्रालय के अनुसार, इनमें से एक मिसाइल यूएई की समुद्री सीमा से बाहर जाकर गिरी, जबकि दूसरी मिसाइल देश की सीमा के अंदर गिरी। अधिकारियों ने लोगों को भरोसा दिलाया कि स्थिति नियंत्रण में है और सुरक्षा व्यवस्था लगातार सक्रिय है।

    मिसाइल अलर्ट के बाद यूएई में नागरिक सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ गई। मोबाइल फोन पर जारी आपात संदेश का उद्देश्य लोगों को संभावित खतरे के प्रति तत्काल सावधान करना था। प्रशासन की ओर से नागरिकों को अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक निर्देशों पर भरोसा करने की अपील की गई।

    इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने दोनों देशों के बीच तत्काल बातचीत की किसी योजना से भी इनकार किया।

    ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि समुद्री मार्ग जहाजों के लिए खुला है और पानी में बिछाई गई माइंस को हटा दिया गया है। दूसरी ओर, ईरान की ओर से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की बात सामने आने के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का प्रभाव पश्चिम एशिया से बाहर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ी है। तेल की कीमतों में लंबे समय तक मजबूती बनी रहने पर कई देशों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

    तनाव बढ़ने का असर शेयर बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ने से कई बाजारों में दबाव देखने को मिला है। इसके साथ ही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज की लागत बढ़ने की चिंता भी सामने आई है।

    फिलहाल यूएई में मिसाइल खतरा समाप्त होने की घोषणा के बाद स्थिति सामान्य बताई गई है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। आने वाले समय में दोनों देशों के सैन्य कदम, कूटनीतिक संपर्क और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

  • पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए दुबई का बड़ा दांव, रेफरल कार्यक्रम के तहत होटल, भोजन और पर्यटन सुविधाओं पर मिलेगा आकर्षक डिस्काउंट

    पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए दुबई का बड़ा दांव, रेफरल कार्यक्रम के तहत होटल, भोजन और पर्यटन सुविधाओं पर मिलेगा आकर्षक डिस्काउंट


    नई दिल्ली ।
    संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख शहर दुबई ने पर्यटन गतिविधियों को गति देने और अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से एक नई प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इस पहल के तहत दुबई में रहने वाले लोग यदि अपने दोस्तों या परिवार के सदस्यों को शहर घूमने के लिए आमंत्रित करते हैं, तो उन्हें 3,000 दिरहम से अधिक मूल्य के विशेष लाभ और छूट उपलब्ध कराई जाएगी। भारतीय मुद्रा में इन लाभों का मूल्य लगभग 80 हजार रुपये के बराबर माना जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में फिर से तेजी लाना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।

    नई योजना के तहत दुबई के निवासी ऑनलाइन पंजीकरण के माध्यम से अपने परिचितों को आमंत्रित कर सकेंगे। आमंत्रित मेहमानों को होटल में ठहरने, रेस्तरां में भोजन, प्रमुख पर्यटन स्थलों के प्रवेश टिकट तथा अन्य मनोरंजन सेवाओं पर विशेष लाभ प्रदान किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि स्थानीय निवासियों की भागीदारी से अधिक संख्या में पर्यटक दुबई पहुंचेंगे और पर्यटन उद्योग को नई गति मिलेगी।

    यह कार्यक्रम 20 जुलाई से शुरू होकर 31 अक्टूबर तक लागू रहेगा। यह अवधि ऐसे समय को ध्यान में रखकर तय की गई है जब दुबई में भीषण गर्मी के कारण सामान्य रूप से पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रहती है। गर्मियों के दौरान तापमान कई बार 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जिससे पर्यटन गतिविधियां प्रभावित होती हैं। ऐसे में यह योजना ऑफ-सीजन के दौरान पर्यटकों की संख्या बढ़ाने का प्रयास मानी जा रही है।

    पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े क्षेत्रीय तनाव और संघर्षों का प्रभाव पर्यटन उद्योग पर भी पड़ा है। खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर बनी चिंताओं के कारण कई पर्यटकों ने अपनी यात्राएं स्थगित कर दीं या अन्य गंतव्यों का रुख किया। इसका असर होटल, रेस्तरां, परिवहन और मनोरंजन उद्योग सहित पर्यटन से जुड़े अनेक क्षेत्रों पर देखने को मिला। नई योजना के जरिए प्रशासन इस गिरावट की भरपाई करने का प्रयास कर रहा है।

    दुबई लंबे समय से दुनिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल रहा है। आधुनिक बुनियादी ढांचा, ऊंची इमारतें, लक्जरी होटल, समुद्री तट, रेगिस्तानी पर्यटन और विश्वस्तरीय मनोरंजन सुविधाएं इसे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के बीच विशेष पहचान दिलाती हैं। हर वर्ष करोड़ों पर्यटक यहां पहुंचते हैं, जिससे पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। यही कारण है कि पर्यटकों की संख्या बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रेफरल आधारित यह मॉडल पर्यटन उद्योग के लिए प्रभावी साबित हो सकता है। जब स्थानीय निवासी अपने परिचितों को व्यक्तिगत रूप से किसी स्थान पर आने के लिए प्रेरित करते हैं, तो यात्रियों का विश्वास बढ़ता है और यात्रा का निर्णय लेना आसान हो जाता है। साथ ही आकर्षक लाभ और विशेष छूट इस योजना को और अधिक उपयोगी बनाते हैं।

    दुबई प्रशासन को उम्मीद है कि यह अभियान आने वाले महीनों में होटल अधिभोग, स्थानीय व्यापार, रेस्तरां, मनोरंजन उद्योग और अन्य पर्यटन सेवाओं को सकारात्मक बढ़ावा देगा। यदि योजना को अपेक्षित सफलता मिलती है, तो भविष्य में ऐसे प्रोत्साहन कार्यक्रमों का विस्तार भी किया जा सकता है। फिलहाल यह पहल पर्यटन क्षेत्र में नई ऊर्जा लाने और वैश्विक यात्रियों को फिर से दुबई की ओर आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • ट्रंप को पाकिस्तान का बड़ा झटका, रक्षा मंत्री बोले- इजरायल से समझौता हमारी विचारधारा के खिलाफ

    ट्रंप को पाकिस्तान का बड़ा झटका, रक्षा मंत्री बोले- इजरायल से समझौता हमारी विचारधारा के खिलाफ




    नई दिल्ली। पाकिस्तान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य बनाने वाले अब्राहम समझौते का हिस्सा बनने के पक्ष में नहीं है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने कहा कि इस तरह का समझौता देश की बुनियादी विचारधारा से मेल नहीं खाता और पाकिस्तान फिलहाल इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाएगा।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब Donald Trump ने मध्य-पूर्व में चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बीच कई मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की है। अमेरिका चाहता है कि Saudi Arabia, Qatar, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश भी इजरायल के साथ संबंध सामान्य करें।

    सोमवार रात एक टीवी कार्यक्रम में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर उन्हें नहीं लगता कि पाकिस्तान को ऐसे किसी समझौते का हिस्सा बनना चाहिए जो उसकी वैचारिक और राजनीतिक नीति के खिलाफ हो। उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान का पुराना रुख आज भी कायम है और जब तक 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना नहीं होती, तब तक पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा।

    पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने इजरायल पर भरोसे का सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि जिन देशों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, उनके साथ स्थायी समझौता करना मुश्किल है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान के पासपोर्ट पर आज भी साफ लिखा होता है कि यह इजरायल की यात्रा के लिए मान्य नहीं है।

    गौरतलब है कि अब्राहम अकॉर्ड 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से शुरू हुआ था। इसके तहत United Arab Emirates और Bahrain समेत कई अरब देशों ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए थे। बाद में मोरक्को और सूडान भी इस समझौते का हिस्सा बने।

    ख्वाजा आसिफ पहले भी इजरायल के खिलाफ कड़े बयान दे चुके हैं। हाल ही में उन्होंने इजरायल को “इंसानियत के लिए अभिशाप” बताते हुए गाजा में कथित नरसंहार का आरोप लगाया था। पाकिस्तान सरकार का यह ताजा बयान संकेत देता है कि फिलहाल इस्लामाबाद अमेरिका के दबाव के बावजूद अपने पारंपरिक फिलिस्तीन समर्थक रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

  • सऊदी-इजरायल संबंध: MBS के रुख को लेकर दावे तेज, अब्राहम अकॉर्ड पर फिर बढ़ी हलचल

    सऊदी-इजरायल संबंध: MBS के रुख को लेकर दावे तेज, अब्राहम अकॉर्ड पर फिर बढ़ी हलचल




    नई दिल्ली। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) को लेकर इजरायल को मान्यता देने के दावों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी माइक इवांस के बयान के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि MBS निजी बातचीत में इजरायल को मान्यता देने की इच्छा जता चुके हैं।

    इवांस के अनुसार, क्राउन प्रिंस ने कहा था कि वह इजरायल को मान्यता देने के पक्ष में हैं, लेकिन उनके पिता यानी सऊदी किंग सलमान के कारण यह निर्णय आगे नहीं बढ़ पा रहा है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अब्राहम अकॉर्ड पर ट्रंप की सक्रियता
    पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अब्राहम अकॉर्ड को विस्तार देने की कोशिशों में जुटे हैं। उन्होंने सऊदी अरब समेत कई मुस्लिम देशों पर इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने का दबाव बढ़ाया है। ट्रंप का कहना है कि इससे मध्य-पूर्व में शांति की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।

    अब्राहम अकॉर्ड की शुरुआत 2020 में हुई थी, जब यूएई और बहरीन ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने पर सहमति जताई थी। बाद में मोरक्को, सूडान और कुछ अन्य देश भी इसमें शामिल हुए।

    सऊदी अरब का आधिकारिक रुख
    हालांकि सऊदी अरब की ओर से अब तक साफ कर दिया गया है कि जब तक फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं मिलती, तब तक वह इजरायल को मान्यता नहीं देगा। रियाद का कहना है कि फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान ही किसी भी सामान्यीकरण की पहली शर्त है।

    राजनीतिक बयान और कूटनीतिक दबाव
    माइक इवांस ने दावा किया कि उन्होंने क्राउन प्रिंस के साथ लंबी बातचीत की थी, जिसमें इजरायल को लेकर सकारात्मक संकेत मिले थे। हालांकि इन दावों को लेकर कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है।दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन और उनके सहयोगी लगातार यह तर्क दे रहे हैं कि अब्राहम अकॉर्ड का विस्तार क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग के लिए जरूरी है।

  • प्रयागराज के दशहरी-लंगड़ा आम अब यूएई और ओमान को 50 हजार टन आम निर्यात की तैयारी, किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार

    प्रयागराज के दशहरी-लंगड़ा आम अब यूएई और ओमान को 50 हजार टन आम निर्यात की तैयारी, किसानों को मिलेगा बड़ा बाजार



    प्रयागराज। प्रयागराज मंडल के मशहूर दशहरी, लंगड़ा और फजली आम की मिठास अब सिर्फ देश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह अब विदेशों तक अपनी पहचान बनाएगी। इस बार प्रयागराज मंडल से करीब 50 हजार टन आम संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान भेजने की तैयारी की जा रही है, जिससे किसानों और निर्यात कारोबार को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

    प्रयागराज मंडल के प्रयागराज, प्रतापगढ़ और कौशांबी जिलों में लगभग 2400 से 2500 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की बागवानी की जाती है। यहां से हर साल करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा निर्यात के लिए तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि प्रयागराज जिले में अकेले ही 600 से 650 हेक्टेयर में आम की खेती होती है और यहां से लगभग 10 हजार टन से अधिक उत्पादन होता है।

    विदेशी बाजारों में यहां के आमों की मांग लगातार बढ़ रही है। दशहरी, लंगड़ा और फजली किस्मों को उनकी मिठास, सुगंध और गुणवत्ता के कारण खाड़ी देशों में काफी पसंद किया जा रहा है। इसी कारण हर साल लगभग 50 हजार टन आम यूएई और ओमान जैसे देशों में निर्यात किया जाता है।

    इसके साथ ही किसानों का रुझान अब नई प्रजातियों की ओर भी बढ़ रहा है। उद्यान विभाग के अनुसार अंबिका, अरुणिका, मल्लिका और बॉम्बे ग्रीन जैसी नई किस्में कम समय में तैयार होने और बेहतर उत्पादन के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इन किस्मों की मांग न सिर्फ घरेलू बाजार में बल्कि विदेशों में भी बढ़ रही है।

    निर्यात को बढ़ावा देने के लिए पैकिंग, ग्रेडिंग और कोल्ड स्टोरेज व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। किसानों को बेहतर गुणवत्ता बनाए रखने और सुरक्षित पैकिंग के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जो खुसरो बाग सहित विभिन्न केंद्रों पर आयोजित किया जाता है।

    कुल मिलाकर, प्रयागराज मंडल के आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।

  • भारत में LPG की किल्लत होगी दूर…. PM मोदी जा रहे UAE, दो अहम मुद्दों पर हो सकती है बड़ी डील

    भारत में LPG की किल्लत होगी दूर…. PM मोदी जा रहे UAE, दो अहम मुद्दों पर हो सकती है बड़ी डील


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) 15-20 मई 2026 तक पांच देशों के दौरे पर जा रहे हैं जिसकी शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.-UAE) की यात्रा से हो रही है. पीएम मोदी यूएई में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान (President Sheikh Mohammed bin Zayed Al Nahyan) से मुलाकात करेंगे. ईरान जंग के बीच जहां दुनिया तेल-गैस की किल्लत से जूझ रही है, माना जा रहा है कि मुलाकात के दौरान दोनों नेता ऊर्जा सुरक्षा पर प्रमुखता से बात करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़े दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

    यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में UAE ने तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ढांचे से बाहर निकलने का फैसला किया है. ऐसे में दोनों देशों के लिए प्रत्यक्ष द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी और भी अहम हो गई है, खासकर लंबे समय के लिए एनर्जी सप्लाई और उसके भंडारण में सहयोग के क्षेत्र में।

    भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, दोनों नेता द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिसमें खास तौर पर ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श शामिल होगा।


    फ्यूल क्राइसिस के बीच भारत की उम्मीद बन सकते हैं ये पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स

    मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष भारत-UAE कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे. यह साझेदारी मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और लोगों के बीच गहरे संबंधों पर आधारित है. बयान में कहा गया कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने में मदद करेगी।

    भारत और UAE ने पिछले कुछ सालों में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ाया है. इसमें कच्चे तेल की आपूर्ति व्यवस्था, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में निवेश और पेट्रोलियम इंफ्रास्ट्रक्चर के डाउनस्ट्रीम सेक्टर में सहयोग शामिल है। UAE फिलहाल भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और पिछले 25 सालों में भारत में सबसे ज्यादा निवेश करने वाले देशों में सातवें स्थान पर है।

    इस यात्रा के दौरान UAE में रहने वाले 45 लाख से अधिक भारतीय समुदाय के कल्याण पर भी खास ध्यान दिए जाने की उम्मीद है. खाड़ी क्षेत्र में भारतीय प्रवासी समुदाय सबसे बड़े विदेशी समुदायों में से एक माना जाता है।


    यूएई के अलावा और किन देशों के दौरे पर जा रहे हैं पीएम

    पीएम मोदी के पांच देशों के दौरे का मुख्य फोकस ऊर्जा सहयोग है जिसमें वो नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर भी बात होगी. प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे में शामिल पांच देश हैं- यूएई और यूरोप के चार देश नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली. यूरोपीय देशों के दौरे का मकसद ग्रीन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करना और भारत-यूरोपीय संघ के रिश्तों को मजबूती देना है।

  • ईरान-यूएई तनाव पर बड़ा खुलासा: रिफाइनरी हमले में गुप्त भूमिका के दावे से मिडिल ईस्ट में हलचल

    ईरान-यूएई तनाव पर बड़ा खुलासा: रिफाइनरी हमले में गुप्त भूमिका के दावे से मिडिल ईस्ट में हलचल




    नई दिल्ली। मिडिल-ईस्ट में ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच तनाव लंबे समय से जारी है, लेकिन हाल ही में कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के बाद यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अप्रैल की शुरुआत में ईरान के लावान द्वीप स्थित एक तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ था, जिसमें कुछ सूत्रों ने यूएई की संभावित भूमिका की बात कही है।

    रिपोर्ट के अनुसार यह हमला उस समय हुआ जब क्षेत्र में ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर था। हालांकि यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस पूरे मामले में किसी भी देश ने आधिकारिक रूप से सीधे तौर पर हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।

    यूएई की तरफ से पहले दिए गए बयानों में कहा गया है कि उसे अपनी सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई का अधिकार है, खासकर तब जब क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में हो। वहीं ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कई बार यूएई और अन्य खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के आरोप लगाए हैं, जिनसे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा है।

    अमेरिका की भूमिका को लेकर भी रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उसने खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए कुछ सैन्य कार्रवाइयों पर सख्त रुख नहीं अपनाया, हालांकि इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा क्षेत्र पहले से ही ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक मार्गों को लेकर संवेदनशील स्थिति में है, जहां किसी भी छोटे सैन्य टकराव का वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर, यूएई की कथित भूमिका को लेकर जो रिपोर्ट सामने आई है, वह अभी तक पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है और यह मामला फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और राजनीतिक चर्चाओं के घेरे में है।

    मिडिल-ईस्ट में ईरान और क्षेत्रीय देशों के बीच तनाव लंबे समय से जारी है, लेकिन हाल ही में कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के बाद यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अप्रैल की शुरुआत में ईरान के लावान द्वीप स्थित एक तेल रिफाइनरी पर हमला हुआ था, जिसमें कुछ सूत्रों ने यूएई की संभावित भूमिका की बात कही है।

    रिपोर्ट के अनुसार यह हमला उस समय हुआ जब क्षेत्र में ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर था। हालांकि यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस पूरे मामले में किसी भी देश ने आधिकारिक रूप से सीधे तौर पर हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।

    यूएई की तरफ से पहले दिए गए बयानों में कहा गया है कि उसे अपनी सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई का अधिकार है, खासकर तब जब क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में हो। वहीं ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कई बार यूएई और अन्य खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के आरोप लगाए हैं, जिनसे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा है।

    अमेरिका की भूमिका को लेकर भी रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उसने खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए कुछ सैन्य कार्रवाइयों पर सख्त रुख नहीं अपनाया, हालांकि इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा क्षेत्र पहले से ही ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक मार्गों को लेकर संवेदनशील स्थिति में है, जहां किसी भी छोटे सैन्य टकराव का वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर, यूएई की कथित भूमिका को लेकर जो रिपोर्ट सामने आई है, वह अभी तक पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है और यह मामला फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और राजनीतिक चर्चाओं के घेरे में है।

  • मध्य-पूर्व में बड़ा खुलासा: UAE पर ईरान हमले का आरोप, अमेरिका-ईरान तनाव और तेल संकट ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

    मध्य-पूर्व में बड़ा खुलासा: UAE पर ईरान हमले का आरोप, अमेरिका-ईरान तनाव और तेल संकट ने बढ़ाई वैश्विक चिंता




    नई दिल्ली। ईरान और मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसमें दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान पर गुप्त सैन्य कार्रवाई की थी। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल महीने में ईरान के लावान द्वीप स्थित ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया था। इस हमले के बाद रिफाइनरी में भीषण आग लग गई थी और उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहा।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि यह हमला अप्रैल की शुरुआत में हुआ था, उसी समय जब अमेरिका युद्धविराम की घोषणा कर रहा था। ईरान ने उस दौरान दावा किया था कि उसकी रिफाइनरी पर दुश्मन देश ने हमला किया है। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में ईरान ने UAE और कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया था। हालांकि UAE ने कभी भी इस हमले की आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन उसके विदेश मंत्रालय ने यह जरूर कहा कि देश को किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने का अधिकार है, जिसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।

    इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों पर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी नेतृत्व को लेकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें “बेईमान” बताया है। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि ईरान बातचीत को लंबा खींचता है और बार-बार अपने रुख बदलता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन दस्तावेजों को कुछ मिनटों में पहुंचना चाहिए, उन्हें ईरान कई दिनों तक रोककर रखता है, जिससे बातचीत की प्रक्रिया बाधित होती है।

    दूसरी ओर, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता कई विवादित मुद्दों में उलझी हुई है। इनमें होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा, ईरानी जहाजों पर अमेरिकी प्रतिबंध, परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम प्रमुख हैं। इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गहरी असहमति बनी हुई है।

    हाल के 24 घंटों में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रम्प ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। अमेरिका ने मांग की है कि ईरान कम से कम 12 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने पास मौजूद 60% एनरिच्ड यूरेनियम भी सौंप दे। इसके जवाब में तनाव और बढ़ गया है।

    इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में संभावित बाधा और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव ने बाजार को अस्थिर कर दिया है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है।

    ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ चल रहा युद्धविराम अब “बहुत कमजोर स्थिति” में पहुंच चुका है और उन्होंने ईरानी प्रस्ताव को “कूड़ा” बताते हुए अमेरिका के लिए “पूर्ण जीत” की बात कही है। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि फ्रांस और ब्रिटेन के युद्धपोत होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश करते हैं तो उसे जवाब दिया जाएगा। इससे समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच लेबनान सीमा पर भी तनाव तेज हो गया है। हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच संघर्ष में तेजी देखी गई है। दक्षिणी लेबनान में इजराइली एयरस्ट्राइक में 6 लोगों की मौत और 7 के घायल होने की खबर है। वहीं हिजबुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है, जिससे सीमा क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

    इसी बीच एक और रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने संघर्ष के दौरान ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर अस्थायी रूप से जगह दी थी, ताकि उन्हें संभावित हमलों से बचाया जा सके। हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि नूर खान एयरबेस पर बड़े पैमाने पर विमानों को छिपाना संभव नहीं है।

    कुल मिलाकर ईरान, अमेरिका और मध्य-पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं और हर दिन नए तनाव और नए खुलासे सामने आ रहे हैं, जिससे वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार दोनों पर गहरा असर पड़ रहा है।

  • मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: UAE पर ईरान का मिसाइल-ड्रोन हमला, अमेरिका की जवाबी बमबारी से हालात और बिगड़े

    मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: UAE पर ईरान का मिसाइल-ड्रोन हमला, अमेरिका की जवाबी बमबारी से हालात और बिगड़े


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया है कि ईरान ने उसके क्षेत्र पर 2 बैलिस्टिक मिसाइल और 3 ड्रोन दागे। UAE रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया, हालांकि इस हमले में 3 लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। अभी तक ईरान की तरफ से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने सीजफायर के बावजूद ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिका का कहना है कि ईरानी सेना ने उसके जंगी जहाजों पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से हमला किया था, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान किसी डील पर नहीं पहुंचता, तो आगे और भी बड़े हमले किए जाएंगे। वहीं ईरान ने पलटवार करते हुए दावा किया है कि अमेरिकी हमले में सैन्य ठिकानों की बजाय नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया है। ईरान ने यह भी कहा है कि उसने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट और चाबहार पोर्ट के पास मौजूद अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाया। इसके साथ ही ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमले ओमान की खाड़ी में उसके तेल टैंकरों पर भी किए गए।

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि CIA की इंटेलिजेंस गलत है और ईरान की मिसाइल क्षमता खत्म नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि देश का मिसाइल रिजर्व अभी भी मजबूत स्थिति में है और ईरान किसी भी हालात में अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। अराघची ने यह भी कहा कि जब भी कूटनीतिक समाधान की संभावना बनती है, अमेरिका सैन्य रास्ता अपना लेता है, लेकिन ईरान दबाव में झुकने वाला नहीं है।

    इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं, जहां करीब 1500 जहाज फंसे होने की जानकारी सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसी के अनुसार, इस संकट का असर तेल, गैस और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहा है, जिससे कई देशों में आर्थिक और खाद्य संकट की आशंका बढ़ गई है।

    मध्य पूर्व में इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष भी तेज हो गया है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमलों का दावा कर रहे हैं। साथ ही अमेरिका ने ईरान से जुड़े नेटवर्क पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है।