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  • UAE हमले पर भारत का कड़ा रुख: 3 भारतीय घायल, PM मोदी बोले- नागरिकों पर हमला बर्दाश्त नहीं

    UAE हमले पर भारत का कड़ा रुख: 3 भारतीय घायल, PM मोदी बोले- नागरिकों पर हमला बर्दाश्त नहीं



    नई दिल्ली। UAE के फुजैराह स्थित ऑयल पोर्ट और पेट्रोलियम सुविधाओं पर हुए हमले में 3 भारतीय नागरिकों के घायल होने के बाद भारत ने सख्त नाराजगी जताई है। भारत सरकार ने साफ कहा है कि आम लोगों और जरूरी ढांचों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों पर हमला किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    क्या हुआ फुजैराह में?
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, फुजैराह के इंडस्ट्रियल एरिया में ड्रोन और मिसाइल हमले के बाद पेट्रोलियम प्लांट में आग लग गई। इस घटना में तीन भारतीय घायल हो गए, जिनका इलाज जारी है।

    भारत की दो टूक
    भारत ने सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने और कूटनीति के रास्ते अपनाने की अपील की है। साथ ही होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की बात कही है, जिसे वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।

    UAE का दावा, ईरान पर आरोप
    UAE ने इस हमले के पीछे ईरान का हाथ होने का दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक, कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन हमलों को रोका गया। हालांकि ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    24 घंटे में बढ़ा तनाव, बड़े अपडेट्स
    ड्रोन प्लांट पर हमला
    फुजैराह के पेट्रोलियम प्लांट पर हमले के बाद भीषण आग लगी, 3 भारतीय घायल।

    ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ लॉन्च
    अमेरिका ने होर्मुज क्षेत्र में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नई पहल शुरू की।

    दक्षिण कोरियाई जहाज पर अटैक
    दक्षिण कोरिया के जहाज पर हमले से आग लगी, कोई हताहत नहीं।

    जब्त जहाज पाकिस्तान को सौंपा
    अमेरिका ने जब्त ईरानी जहाज पाकिस्तान को सौंपा, जिसे बाद में ईरान भेजा गया।

    ईरान में फांसी
    ईरान में जासूसी के आरोप में तीन लोगों को फांसी दी गई।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर पूरी तरह सतर्क है।

  • तेल की राजनीति में नया तूफान! UAE के फैसले पर ईरान का हमला, OPEC में बढ़ी दरार

    तेल की राजनीति में नया तूफान! UAE के फैसले पर ईरान का हमला, OPEC में बढ़ी दरार


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट की तेल राजनीति में तनाव खुलकर सामने आ गया है। Iran ने United Arab Emirates (UAE) के OPEC से बाहर निकलने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे “नकारात्मक और बदले की भावना से लिया गया कदम” बताया है।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने साफ कहा कि इस तरह का फैसला संगठन की एकजुटता को कमजोर करता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान OPEC के भीतर अपनी जिम्मेदारियों को निभाता रहेगा और वैश्विक तेल संतुलन बनाए रखने में सक्रिय भूमिका जारी रखेगा।

    तनाव यहीं नहीं रुका। ईरान ने UAE पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हालिया क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान उसने अमेरिका और इजराइल का साथ देकर “गलत रवैया” अपनाया, जिससे भरोसे पर असर पड़ा है।

    वहीं दूसरी तरफ UAE ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा। Sultan Al Jaber ने कहा कि OPEC और OPEC+ से अलग होने का फैसला किसी देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह रणनीतिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया कदम है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव सिर्फ OPEC तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे मिडिल ईस्ट की बदलती राजनीतिक समीकरण और वैश्विक ऊर्जा बाजार की प्रतिस्पर्धा भी अहम वजह हैं।

    कुल मिलाकर, UAE के इस कदम और ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में तेल बाजार के साथ-साथ क्षेत्रीय राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • ईरान ने खाड़ी में बढ़ाया तनाव, UAE को लेकर सऊदी अरब को दी कथित चेतावनी; अबू धाबी पर हमले की रणनीति का दावा

    ईरान ने खाड़ी में बढ़ाया तनाव, UAE को लेकर सऊदी अरब को दी कथित चेतावनी; अबू धाबी पर हमले की रणनीति का दावा


    नई दिल्ली। तेहरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव एक बार फिर तेज होता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने सऊदी अरब और ओमान के साथ बातचीत के दौरान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को लेकर सख्त और आक्रामक रुख अपनाया है, जिससे पूरे क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल बढ़ गई है।

    रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी मीडिया में दावा किया गया है कि ईरानी अधिकारियों ने बातचीत के दौरान संकेत दिया कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ता है तो UAE को “कड़े जवाब” का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इस बातचीत का आधिकारिक समय और पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसे खाड़ी देशों के बीच बढ़ते अविश्वास के रूप में देखा जा रहा है।

    सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने सऊदी अरब के सामने यह भी इशारा किया कि वह खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा शक्ति संतुलन को अच्छी तरह समझता है और जरूरत पड़ने पर रणनीतिक जवाब देने की क्षमता रखता है। इस बयानबाजी को रियाद और अबू धाबी के बीच पहले से मौजूद मतभेदों को और गहरा करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

    खाड़ी क्षेत्र में पहले से ही कई मोर्चों पर तनाव बना हुआ है। यमन संघर्ष में सऊदी अरब और UAE अलग-अलग पक्षों का समर्थन करते रहे हैं, जबकि सूडान और लीबिया जैसे देशों में भी दोनों देशों की नीतियां अक्सर एक-दूसरे के विपरीत रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में ईरान की हालिया बयानबाजी ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कड़ा संदेश सिर्फ सैन्य चेतावनी नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति में दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है। वहीं सऊदी अरब और UAE दोनों ही अपनी सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारियों को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। फिलहाल, इस पूरे मामले पर आधिकारिक स्तर पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन खाड़ी की राजनीति में हलचल साफ महसूस की जा रही है।

  • UAE का सख्त रुख: कर्ज वसूली के बाद अब पाकिस्तान से निवेश समेटने के संकेत

    UAE का सख्त रुख: कर्ज वसूली के बाद अब पाकिस्तान से निवेश समेटने के संकेत



    नई दिल्ली। आर्थिक मोर्चे पर जूझ रहे Pakistan के लिए एक और चिंताजनक खबर सामने आई है। United Arab Emirates की प्रमुख दूरसंचार कंपनी e& (पूर्व में एतिसलात) पाकिस्तान में अपने निवेश की समीक्षा कर रही है और टेलीकॉम सेक्टर से बाहर निकलने पर विचार कर रही है।

    जानकारी के अनुसार, e& के पास PTCL में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रबंधन नियंत्रण भी है। सूत्रों का कहना है कि कंपनी अब अपने शेयर बेचकर इस बाजार से बाहर निकलने की संभावनाएं तलाश रही है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में यूएई ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज वापस लिया है। यह कर्ज लंबे समय से रोलओवर के जरिए टाला जाता रहा था, जिससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को राहत मिलती थी। हालांकि, अचानक भुगतान की मांग ने देश की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा दिया है।

    वहीं, एतिसलात और पाकिस्तान सरकार के बीच 2005 से चला आ रहा 800 मिलियन डॉलर का विवाद भी अब तक अनसुलझा है। उस समय कंपनी ने PTCL की हिस्सेदारी 2.6 अरब डॉलर में खरीदी थी, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े विवाद के कारण रोका गया था।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति से प्रेरित नहीं है, बल्कि यूएई की व्यापक वैश्विक निवेश रणनीति का हिस्सा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और पूंजी के बेहतर उपयोग की नीति के तहत खाड़ी देश अपने निवेश पोर्टफोलियो का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।

    पाकिस्तान सरकार का कहना है कि यदि e& अपना निवेश वापस लेती है, तो वह Saudi Arabia और Qatar जैसे देशों से नए निवेश आकर्षित करने का प्रयास करेगी।

    यूएई के लगातार सख्त होते आर्थिक फैसले पाकिस्तान के लिए चेतावनी माने जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पाकिस्तान नई निवेश संभावनाएं तलाश कर पाता है या आर्थिक दबाव और बढ़ता है।

  • PM मोदी अगले माह जाएंगे यूरोप दौरे पर… रास्ते में कुछ समय UAE में रुकेंगे!

    PM मोदी अगले माह जाएंगे यूरोप दौरे पर… रास्ते में कुछ समय UAE में रुकेंगे!


    दुबई।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अगले महीने संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.- UAE) की एक संक्षिप्त यात्रा कर सकते हैं। अपनी आगामी यूरोप यात्रा (Europe trip) के दौरान पीएम मोदी बीच रास्ते में कुछ समय के लिए यूएई में रुकेंगे, जहां उनकी यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (President Sheikh Mohammed bin Zayed Al Nahyan.- MBZ) के साथ द्विपक्षीय वार्ता होने की उम्मीद है। वर्तमान में इस यात्रा की रूपरेखा तैयार की जा रही है और अभी तक इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।


    यूरोप दौरे के बीच यूएई में पड़ाव

    प्रधानमंत्री मोदी 15 से 20 मई तक चार यूरोपीय देशों- नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड और इटली की अहम यात्रा पर रहेंगे। इस दौरे का मुख्य आकर्षण ओस्लो (नॉर्वे) में होने वाला ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ होगा। इस साल की शुरुआत में यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिए जाने के बाद पीएम मोदी की यह पहली यूरोप यात्रा होगी।


    संकट के बीच निरंतर उच्च-स्तरीय वार्ताएं

    पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बावजूद दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय दौरों का सिलसिला लगातार जारी है। अगर पीएम मोदी यूएई पहुंचते हैं, तो यह इसी कड़ी का नवीनतम हिस्सा होगा। इससे पहले यूएई के राष्ट्रपति (MBZ) एक दिवसीय यात्रा पर भारत आए थे, जहां उन्होंने पीएम मोदी के साथ वार्ता की।

    मार्च में ईरान युद्ध के बीच, यूएई की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम अल-हाशिमी ने भारत का दौरा किया। अप्रैल (11-12) में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूएई का दौरा किया। उन्होंने राष्ट्रपति MBZ से मुलाकात कर पीएम मोदी का एक निजी संदेश उन्हें सौंपा। इसके अलावा, उन्होंने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा की।

    पिछले सप्ताह ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने यूएई जाकर राष्ट्रपति MBZ से मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों पर अहम चर्चा हुई।


    तेजी से बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक संबंध

    पिछले एक दशक में भारत और यूएई के संबंधों में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। दोनों देशों ने आर्थिक, सुरक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी साझेदारी को काफी मजबूत किया है। वर्ष 2021 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ा दिया था। यूएई भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में से एक है। 2025 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों देशों का लक्ष्य 2032 तक इस व्यापार को दोगुना करना है। यूएई ऊर्जा, बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत में सबसे बड़े विदेशी निवेशकों में से एक बन गया है।


    ऊर्जा क्षेत्र में गहराता सहयोग (एलएनजी और ओपेक)

    ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से दोनों देशों के बीच हाल ही में कई बड़े कदम उठाए गए हैं। जनवरी में यूएई के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान 10 साल का तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आपूर्ति समझौता हुआ था। इसके तहत, यूएई 2028 से शुरू होकर अगले 10 वर्षों तक भारत को $3 बिलियन तक की एलएनजी की आपूर्ति करेगा।

    यूएई ने तेल निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) से बाहर निकलने का फैसला किया है। इसके बाद यह उम्मीद की जा रही है कि यूएई अपने तेल उत्पादन में भारी वृद्धि करेगा, जिससे भारत और यूएई के बीच ऊर्जा संबंध और अधिक मजबूत होंगे। संक्षेप में कहें तो, पीएम मोदी की यह संभावित यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश न केवल व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं, बल्कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक-दूसरे के मजबूत रणनीतिक साझेदार भी बने हुए हैं।

  • UAE ने मांगा अरबों का कर्ज, पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव; सऊदी अरब से बढ़ी उम्मीदें

    UAE ने मांगा अरबों का कर्ज, पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव; सऊदी अरब से बढ़ी उम्मीदें

    इस्लामाबाद। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए नया संकट खड़ा हो गया है। संयुक्त अरब अमीरात द्वारा अरबों डॉलर का कर्ज वापस मांगे जाने के बीच अब सऊदी अरब एक बार फिर उसके लिए ‘संकटमोचक’ के रूप में उभरता नजर आ रहा है।

    इसी कड़ी में सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान का इस्लामाबाद दौरा काफी अहम माना जा रहा है। इसे पाकिस्तान को संभावित आर्थिक राहत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सऊदी सहयोग ने देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    UAE का कर्ज लौटाने से बढ़ेगी मुश्किलें
    जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान 2018 में लिए गए 3 अरब डॉलर से अधिक के कर्ज को UAE को लौटाने की प्रक्रिया में है। यह राशि उसके विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 18 प्रतिशत है। ऐसे में भुगतान से देश की आर्थिक स्थिति पर सीधा दबाव पड़ना तय माना जा रहा है।

    स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के अनुसार, मार्च के अंत तक देश के पास करीब 16.4 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, जो लगभग तीन महीने के आयात के लिए पर्याप्त माना जाता है।

    खाड़ी देशों के बदलते समीकरण
    विशेषज्ञों का मानना है कि UAE द्वारा कर्ज रोलओवर से इनकार केवल आर्थिक नहीं, बल्कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का भी संकेत हो सकता है। खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालात के बीच यह कदम अहम माना जा रहा है। हालांकि पाकिस्तान ने इसे सामान्य वित्तीय प्रक्रिया बताया है।

    सऊदी-पाकिस्तान रक्षा सहयोग भी मजबूत
    इस बीच सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी भी गहरी होती दिख रही है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तानी वायुसेना का एक दल पूर्वी क्षेत्र स्थित किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर तैनात किया गया है। इसमें लड़ाकू और सहायक विमान शामिल हैं, जिनका उद्देश्य सैन्य समन्वय और ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करना है।

    IMF और कर्ज भुगतान की दोहरी चुनौती
    पाकिस्तान पर इस महीने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को 1.3 अरब डॉलर के बॉन्ड का भुगतान भी करना है। साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 1.2 अरब डॉलर की अगली किस्त का इंतजार कर रहा है।

    आर्थिक जानकारों का कहना है कि UAE के अचानक रुख ने पाकिस्तान की वित्तीय योजना को झटका दिया है। अब देश को विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट से बचने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए सऊदी अरब सहित अन्य सहयोगी देशों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में पाकिस्तान के लिए आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ती दिख रही हैं, और उसकी नजरें एक बार फिर सऊदी समर्थन पर टिकी हैं।

  • भारत की मेजबानी में आमने-सामने होंगे UAE और ईरान, BRICS बैठक से पश्चिम एशिया पर नजर

    भारत की मेजबानी में आमने-सामने होंगे UAE और ईरान, BRICS बैठक से पश्चिम एशिया पर नजर


    नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में होने जा रही ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक कूटनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। खास बात यह है कि मौजूदा तनाव के बावजूद ईरान और संयुक्त अरब अमीरात एक ही मंच पर बैठेंगे।
    यह बैठक 14 और 15 मई को नई दिल्ली में आयोजित होगी, जिसकी अध्यक्षता भारत करेगा।

    भारत ने इस बैठक के लिए रूस, ईरान, यूएई, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका को निमंत्रण भेजा है। माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यह बैठक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर साबित हो सकती है, जहां टकराव की स्थिति में रहे देश भी एक साथ चर्चा करेंगे।

    ब्रिक्स समूह की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से हुई थी। 2024 में इसका विस्तार कर मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी इसमें जुड़ गया।

    ब्रिक्स देशों की कुल आबादी करीब 3.9 अरब बताई जाती है, जो वैश्विक जनसंख्या का लगभग 48 प्रतिशत है।

    रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने रूसी मीडिया को बताया कि सर्गेई लावरोव बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आएंगे। इससे बैठक का महत्व और बढ़ गया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान ने भारत से अपील की है कि अध्यक्ष के तौर पर वह एक औपचारिक बयान जारी कर अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों की निंदा करे।

    हालांकि, समूह के कुछ सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं और भारत के अमेरिका व इजरायल के साथ करीबी संबंधों को देखते हुए साझा रुख तैयार करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

    इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष पर ब्रिक्स देशों के बीच एकमत होना आसान नहीं है। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि कुछ सदस्य सीधे इस संघर्ष से जुड़े हैं, जिसके कारण साझा बयान तैयार करना कठिन हो गया है।

    भारत फिलहाल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अलग-अलग विचार रखने वाले देशों के बीच संतुलन बनाते हुए किसी साझा रुख पर सहमति बनाई जाए।

  • इजरायल, मध्य पूर्व, रियाद बैठक, इस्लामिक देश, कतर, UAE, अंतरराष्ट्रीय कानून, सैन्य तनाव, वैश्विक राजनीति

    इजरायल, मध्य पूर्व, रियाद बैठक, इस्लामिक देश, कतर, UAE, अंतरराष्ट्रीय कानून, सैन्य तनाव, वैश्विक राजनीति


    नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच जारी तनावपूर्ण संघर्ष अब पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। इसी बीच 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से हमले तुरंत रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील की है।

    सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में इन देशों ने ईरान की सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की। बयान जारी करने वाले देशों में अजरबैजान बहरीन मिस्र जॉर्डन कुवैत लेबनान पाकिस्तान कतर सऊदी अरब सीरिया तुर्किए और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

    विदेश मंत्रियों ने आरोप लगाया कि ईरान ने रिहायशी इलाकों तेल सुविधाओं एयरपोर्ट डीसेलिनेशन प्लांट और राजनयिक परिसरों को निशाना बनाया जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता जताई और कहा कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

    संयुक्त बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान ने कतर और यूएई के ऊर्जा ढांचे पर हमला किया। कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाए जाने के बाद वहां आग लगने की खबरें सामने आईं जबकि सऊदी अरब में बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया।

    कतर ने इस हमले को अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया और कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को “पर्सोना नॉन ग्राटा” घोषित कर दिया। उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया गया। कतर ने कहा कि यह कदम उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक था।

    संयुक्त बयान में यह भी चेतावनी दी गई कि ईरान के साथ भविष्य के संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि वह अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है या नहीं। विदेश मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और सैन्य दबाव की नीति स्वीकार नहीं की जाएगी।

    इस बीच ईरानी मीडिया ने अमेरिका और इजरायल पर उसके तेल और गैस उत्पादन केंद्रों पर हमले का आरोप लगाया है जिससे हालात और अधिक जटिल हो गए हैं। कुल मिलाकर मध्य पूर्व में बढ़ता यह तनाव अब क्षेत्रीय संघर्ष का रूप लेता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार शांति और संयम की अपील कर रहा है।

  • UAE में भ्रामक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में 35 लोग गिरफ्तार… 19 भारतीय भी शामिल

    UAE में भ्रामक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में 35 लोग गिरफ्तार… 19 भारतीय भी शामिल


    दुबई।
    संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.- UAE) में सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी वीडियो (Misleading and Fake Videos) पोस्ट करने के आरोप में 35 लोगों की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया है। इन आरोपियों में 19 भारतीय नागरिक (19 Indian Citizens) भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन लोगों ने क्षेत्रीय तनाव के बीच इंटरनेट पर ऐसी सामग्री साझा की जिससे लोगों में भ्रम और डर फैल सकता था।

    यूएई की आधिकारिक समाचार एजेंसी WAM के अनुसार, सभी आरोपियों को तेज सुनवाई (फास्ट-ट्रैक ट्रायल) के लिए अदालत में पेश किया जाएगा।


    डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी के बाद कार्रवाई

    यूएई के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्सी ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की सख्त निगरानी के दौरान यह सामने आया कि कुछ लोग झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाकर सार्वजनिक व्यवस्था और देश की स्थिरता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। जांच में पाया गया कि आरोपी तीन अलग-अलग समूहों में काम कर रहे थे और उन्होंने अलग-अलग तरीकों से भ्रामक सामग्री पोस्ट की।


    पहला समूह: असली वीडियो के साथ भ्रामक दावे

    पहले समूह के 10 लोगों ने वास्तविक वीडियो क्लिप पोस्ट किए, जिनमें देश के हवाई क्षेत्र में मिसाइलों के गुजरने या उन्हें रोकने के दृश्य दिखाए गए थे। इन वीडियो के साथ ऐसे कमेंट और साउंड इफेक्ट जोड़े गए जिससे यह लगे कि देश पर हमला हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार इससे लोगों में डर और घबराहट फैल सकती थी। इस समूह में 5 भारतीय, 1 पाकिस्तानी, 1 नेपाली, 2 फिलीपीन नागरिक और 1 मिस्र का नागरिक शामिल है।


    दूसरा समूह: एआई से बनाए गए फर्जी वीडियो

    दूसरे समूह के 7 लोगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके विस्फोट, मिसाइल हमलों और आग लगने जैसे नकली दृश्य तैयार किए। इन वीडियो में राष्ट्रीय झंडे और तारीखें भी जोड़ी गईं ताकि लोग इन्हें असली समझ लें। कई वीडियो ऐसे थे जिन्हें दूसरे देशों की घटनाओं से जोड़कर यूएई का बताया गया। इस समूह में पांच भारतीय, एक नेपाली और एक बांग्लादेशी शामिल हैं।


    तीसरा समूह: दूसरे देश की सैन्य कार्रवाई का प्रचार

    तीसरे समूह के 6 लोगों पर एक ऐसे देश की सैन्य कार्रवाई और नेतृत्व की तारीफ करते हुए सामग्री साझा करने का आरोप है जिसे यूएई ने शत्रुतापूर्ण राज्य बताया है। इस समूह में पांच भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल है। इसके अलावा दो और भारतीयों पर भी इसी तरह के आरोप लगाए गए हैं।


    पहले भी 10 लोगों की गिरफ्तारी का आदेश

    इससे पहले शनिवार को भी 10 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, जिनमें दो भारतीय शामिल थे। अभियोजन पक्ष ने सभी आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और उन्हें हिरासत में भेज दिया गया है।


    सख्त सजा का प्रावधान

    यूएई के कानून के अनुसार, इस तरह के अपराधों में कम से कम एक साल की जेल और एक लाख दिरहम (लगभग 22 लाख रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अटॉर्नी जनरल अल शम्सी ने कहा कि हालिया क्षेत्रीय तनाव का फायदा उठाकर झूठी जानकारी फैलाने की कोशिश की गई, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को खतरा हो सकता था।

  • मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच CBSE ने GCC देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किया

    मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच CBSE ने GCC देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किया


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल अमेरिका के हालिया संघर्ष के चलते तनावपूर्ण स्थिति बढ़ने के बीच भारतीय दूतावासों ने छात्रों और अभिभावकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इस अपडेट में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को बहरीन ईरान कुवैत ओमान कतर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रद्द करने की घोषणा की है। यह निर्णय छात्रों की सुरक्षा और शिक्षण गतिविधियों पर पड़ रहे प्रभावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    ओमान में भारतीय दूतावास ने बताया कि यह एडवाइजरी पहले जारी 01.03.2026 03.03.2026 05.03.2026 07.03.2026 और 09.03.2026 के सर्कुलरों का अपडेशन है। इन सर्कुलरों के माध्यम से प्रभावित देशों में स्कूलों और संबंधित अधिकारियों से मिले इनपुट और अपील के आधार पर बोर्ड ने 12वीं क्लास की परीक्षाओं की समीक्षा की। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि 16 मार्च से लेकर 10 मार्च तक निर्धारित सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। इसके साथ ही पहले स्थगित की गई परीक्षाओं की तारीखें भी पूरी तरह रद्द होंगी।

    इस निर्णय का उद्देश्य न केवल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि उनके परिणाम सही समय पर घोषित किए जाएं। एडवाइजरी में यह भी कहा गया कि परीक्षा स्थगित होने के बाद रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया और तरीका बाद में अलग से बताया जाएगा। इससे पहले दूतावास ने कहा था कि सीबीएसई 10 मार्च को स्थिति की पुनः समीक्षा करेगा और 12 मार्च से होने वाली परीक्षाओं के लिए सही निर्णय लेगा।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण ओमान में भारतीय दूतावास ने पहले भी 9 10 और 11 मार्च को होने वाली 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को फिलहाल टालने की जानकारी साझा की थी। यह कदम ईरान इजरायल युद्ध और वहां की सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर छात्रों और उनके परिवारों के हित में उठाया गया। दूतावास ने यह भी बताया कि सभी संबंधित स्कूलों और अधिकारियों को बोर्ड ने सीधे निर्देश दिए हैं कि परीक्षा स्थगित होने की जानकारी तुरंत छात्रों तक पहुँचाई जाए।

    इस स्थिति से प्रभावित छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत की बात यह है कि बोर्ड ने पहले से ही स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षाओं के परिणामों को घोषित करने की प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। इस बीच छात्रों को आवश्यकतानुसार ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सकता है ताकि उनका अकादमिक नुकसान कम से कम हो।

    इस निर्णय से यह भी साफ हो जाता है कि वैश्विक तनाव और सुरक्षा स्थिति सीधे तौर पर शिक्षा पर प्रभाव डाल सकती है। सीबीएसई का यह कदम छात्रों की सुरक्षा मानसिक शांति और शिक्षण गतिविधियों की निरंतरता को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।