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  • भोपाल । MP की सियासत में UCC पर फिर संग्राम नेता प्रतिपक्ष बोले बीजेपी का काला कानून खत्म करेगी कांग्रेस सरकार

    भोपाल । MP की सियासत में UCC पर फिर संग्राम नेता प्रतिपक्ष बोले बीजेपी का काला कानून खत्म करेगी कांग्रेस सरकार


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजनीति में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। भोपाल के बुधवारा चौराहे पर आजादी के पखवाड़े के समापन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सरकार की यूसीसी नीति पर जमकर हमला बोला। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई कांग्रेस नेता शामिल हुए। इसी मंच से उमंग सिंघार ने बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए कहा कि यदि आने वाले समय में कांग्रेस की सरकार बनती है तो यूसीसी को खत्म किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने विधानसभा में बहुमत के बल पर इस कानून को पारित कराया है।

    विधायक आरिफ मसूद की ओर से आयोजित जंग ए आजादी में उलमा की कुर्बानी कार्यक्रम के समापन समारोह में यूसीसी को लेकर कांग्रेस का रुख खुलकर सामने आया। उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की मंशा इस कानून को गांव गांव तक लागू करने की है। उन्होंने इसे काला कानून बताते हुए कहा कि बीजेपी ने अपने बहुमत का इस्तेमाल करके इसे पास करा लिया है लेकिन सत्ता परिवर्तन होने पर कांग्रेस इसे खत्म करने की दिशा में कदम उठाएगी। उनके इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की सियासत में यूसीसी को लेकर नया विवाद खड़ा होना तय माना जा रहा है।

    कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजक आरिफ मसूद की तारीफ करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में जब समाज में नफरत का माहौल होने की बात कही जा रही है तब आजादी का पखवाड़ा आयोजित कर उन्होंने राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान के विचार को आगे बढ़ाने का काम किया है। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने बच्चों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया।

    मध्यप्रदेश में यूसीसी के प्रावधानों को लेकर सरकार की ओर से समान नागरिक व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इसके तहत विवाह और तलाक से जुड़े नियमों को एक समान बनाने का प्रावधान है। बहुविवाह पर रोक के साथ विवाह और विवाह विच्छेद के पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा लिव इन रिलेशनशिप को लेकर भी पंजीकरण और सूचना से जुड़े नियम निर्धारित किए गए हैं। समर्थकों का तर्क है कि इन प्रावधानों से वैवाहिक अधिकारों में समानता आएगी और महिलाओं तथा बच्चों के कानूनी अधिकार मजबूत होंगे।

    उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में भी समान अधिकार का प्रावधान यूसीसी की प्रमुख विशेषताओं में बताया गया है। बेटे और बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही बच्चों के अधिकारों और भरण पोषण से जुड़े प्रावधानों को भी अधिक समान बनाने की कोशिश की गई है। कानून में विवाह और पारिवारिक संबंधों से जुड़ी कुछ पारंपरिक प्रथाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि इन प्रावधानों को लेकर अलग अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक समूहों की राय अलग रही है।

    यूसीसी के दायरे को लेकर जनजातीय समाज को विशेष छूट का प्रावधान भी चर्चा में रहा है। अनुसूचित जनजातियों की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और रीति रिवाजों को ध्यान में रखते हुए उन्हें कानून के कुछ प्रावधानों से बाहर रखने की व्यवस्था की गई है। सरकार इसे सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण से जोड़ती है जबकि कांग्रेस समेत विपक्षी दल इसके कई प्रावधानों और लागू करने के तरीके पर सवाल उठाते रहे हैं।

    भोपाल के इस कार्यक्रम के बाद यूसीसी एक बार फिर मध्यप्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। उमंग सिंघार के सरकार बनने पर कानून खत्म करने वाले बयान ने आगामी राजनीतिक बहस को और धार दे दी है। अब यह मुद्दा केवल कानूनी प्रावधानों तक सीमित न रहकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच वैचारिक और राजनीतिक टकराव का नया आधार बन सकता है।

  • MP में UCC को जबरदस्त समर्थन: 93% लोगों ने कहा हां, मुस्लिम महिलाओं ने भी दिखाई सहमति

    MP में UCC को जबरदस्त समर्थन: 93% लोगों ने कहा हां, मुस्लिम महिलाओं ने भी दिखाई सहमति


    नई दिल्ली ।मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा आम जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए थे और अब सामने आए आंकड़ों ने इस मुद्दे को नई दिशा दे दी है। सरकार के अनुसार प्रदेश भर से 9.5 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए जिनमें से करीब 8.9 लाख लोगों ने यूसीसी के समर्थन में अपनी राय दी। यह कुल सुझावों का लगभग 93 प्रतिशत है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं का समर्थन पुरुषों की तुलना में अधिक रहा। लगभग 4 लाख महिलाओं में से 3.8 लाख यानी 95 प्रतिशत ने यूसीसी के पक्ष में राय दी। वहीं 5.5 लाख पुरुषों में से 5.1 लाख यानी 92 प्रतिशत ने इसका समर्थन किया। हिंदू समुदाय में समर्थन का प्रतिशत और भी अधिक रहा जहां पुरुषों में 95 प्रतिशत तथा महिलाओं में 97 प्रतिशत लोगों ने यूसीसी के पक्ष में अपनी राय रखी।

    सबसे अधिक चर्चा मुस्लिम समुदाय से मिले सुझावों को लेकर हो रही है। आंकड़ों के अनुसार मुस्लिम समुदाय के 29 हजार पुरुषों में से लगभग 38 प्रतिशत ने यूसीसी का समर्थन किया जबकि 15 हजार मुस्लिम महिलाओं में से 71 प्रतिशत महिलाओं ने इसके पक्ष में राय दी। इन आंकड़ों को सरकार सामाजिक बदलाव और महिलाओं के अधिकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता का संकेत मान रही है।

    सरकार को करीब दो हजार संस्थागत सुझाव भी प्राप्त हुए हैं जिनका परीक्षण और विश्लेषण किया जा रहा है। प्राप्त सभी सुझावों को 30 जून तक अंतिम मसौदे में शामिल करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यूसीसी पर जनमत जुटाने के लिए राज्य सरकार ने 3.5 करोड़ से अधिक एसएमएस भी भेजे थे। बताया जा रहा है कि 5 जुलाई तक उच्च स्तरीय समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है जिसके बाद जुलाई में होने वाले विधानसभा सत्र में यूसीसी विधेयक पेश किया जा सकता है।

    भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने यूसीसी को महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा कानून बताते हुए कहा कि यह समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम महिलाओं का समर्थन इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है और इससे उन्हें अपने अधिकारों के साथ सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।

    हालांकि विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने सरकार के दावों को भ्रामक बताते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को साथ लेकर व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी। वहीं हाजी मोहम्मद हारून ने भी सरकार के समर्थन संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यूसीसी जैसे संवेदनशील विषय पर सभी समुदायों की सहमति आवश्यक है।

    अब सबकी निगाहें जुलाई विधानसभा सत्र पर टिकी हैं जहां मध्य प्रदेश सरकार यूसीसी विधेयक पेश कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने वाला देश का प्रमुख राज्य बन सकता है।

  • दलित आदिवासी और OBC के मुद्दे पर सरकार घिरी UCC पर नेता प्रतिपक्ष का बड़ा बयान

    दलित आदिवासी और OBC के मुद्दे पर सरकार घिरी UCC पर नेता प्रतिपक्ष का बड़ा बयान

    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासी माहौल गर्माता जा रहा है सरकार जहां इस कानून को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है वहीं विपक्ष ने इस पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की मंशा और प्रक्रिया दोनों पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है

    उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि UCC को सर्वसम्मति से लागू किया जाएगा या इसे जबरन थोपा जाएगा उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान और लोकतंत्र की भावना के विपरीत काम कर रही है सिंघार ने खास तौर पर दलित और आदिवासी समुदायों को लेकर चिंता जताई और पूछा कि क्या इन वर्गों को UCC के दायरे में शामिल किया जाएगा या नहीं

    उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सात सदस्यों की कमेटी आखिर कैसे तय करेगी कि किन लोगों को इस कानून में शामिल किया जाना चाहिए और किन्हें नहीं उनके अनुसार इतने महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय लेने से पहले प्रदेश की जनता से व्यापक राय लेना जरूरी है उन्होंने सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे पर पारदर्शिता बरते और जनता के साथ संवाद स्थापित करे

    इस दौरान सिंघार ने असलम चमड़ा मामले को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा उन्होंने आरोप लगाया कि असलम हो या अन्य आरोपी उन्हें सत्ता पक्ष का संरक्षण मिल रहा है उन्होंने कहा कि इन मामलों में नगर निगम और विभागीय स्तर पर कनेक्शन सामने आ रहे हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि विपक्ष ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मुद्दों को उठाया लेकिन सत्ता पक्ष ने आरोपियों को बचाने का काम किया उन्होंने सरकार से जवाब मांगा कि आखिर इन मामलों में सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही

    इसके अलावा सिंघार ने OBC आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीर नहीं है और केवल राजनीतिक लाभ के लिए OBC वर्ग का इस्तेमाल कर रही है उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार बार मामले को कोर्ट के पाले में डाल रही है और खुद जिम्मेदारी लेने से बच रही है

    सिंघार ने यह भी कहा कि सरकार अपने लोगों को लाभ पहुंचाने में ज्यादा रुचि दिखा रही है जबकि आम जनता के मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक OBC आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर निर्णय टलता रहेगा

    कुल मिलाकर UCC OBC आरक्षण और अन्य मामलों को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है जहां एक ओर सरकार इसे सुधार की दिशा में कदम बता रही है वहीं विपक्ष इसे जनता के हितों के खिलाफ बताते हुए लगातार हमलावर बना हुआ है आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है और प्रदेश की राजनीति को प्रभावित कर सकता है