MP में UCC को जबरदस्त समर्थन: 93% लोगों ने कहा हां, मुस्लिम महिलाओं ने भी दिखाई सहमति


नई दिल्ली ।मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा आम जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए थे और अब सामने आए आंकड़ों ने इस मुद्दे को नई दिशा दे दी है। सरकार के अनुसार प्रदेश भर से 9.5 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए जिनमें से करीब 8.9 लाख लोगों ने यूसीसी के समर्थन में अपनी राय दी। यह कुल सुझावों का लगभग 93 प्रतिशत है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं का समर्थन पुरुषों की तुलना में अधिक रहा। लगभग 4 लाख महिलाओं में से 3.8 लाख यानी 95 प्रतिशत ने यूसीसी के पक्ष में राय दी। वहीं 5.5 लाख पुरुषों में से 5.1 लाख यानी 92 प्रतिशत ने इसका समर्थन किया। हिंदू समुदाय में समर्थन का प्रतिशत और भी अधिक रहा जहां पुरुषों में 95 प्रतिशत तथा महिलाओं में 97 प्रतिशत लोगों ने यूसीसी के पक्ष में अपनी राय रखी।

सबसे अधिक चर्चा मुस्लिम समुदाय से मिले सुझावों को लेकर हो रही है। आंकड़ों के अनुसार मुस्लिम समुदाय के 29 हजार पुरुषों में से लगभग 38 प्रतिशत ने यूसीसी का समर्थन किया जबकि 15 हजार मुस्लिम महिलाओं में से 71 प्रतिशत महिलाओं ने इसके पक्ष में राय दी। इन आंकड़ों को सरकार सामाजिक बदलाव और महिलाओं के अधिकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता का संकेत मान रही है।

सरकार को करीब दो हजार संस्थागत सुझाव भी प्राप्त हुए हैं जिनका परीक्षण और विश्लेषण किया जा रहा है। प्राप्त सभी सुझावों को 30 जून तक अंतिम मसौदे में शामिल करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यूसीसी पर जनमत जुटाने के लिए राज्य सरकार ने 3.5 करोड़ से अधिक एसएमएस भी भेजे थे। बताया जा रहा है कि 5 जुलाई तक उच्च स्तरीय समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है जिसके बाद जुलाई में होने वाले विधानसभा सत्र में यूसीसी विधेयक पेश किया जा सकता है।

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने यूसीसी को महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा कानून बताते हुए कहा कि यह समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम महिलाओं का समर्थन इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है और इससे उन्हें अपने अधिकारों के साथ सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।

हालांकि विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने सरकार के दावों को भ्रामक बताते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को साथ लेकर व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी। वहीं हाजी मोहम्मद हारून ने भी सरकार के समर्थन संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यूसीसी जैसे संवेदनशील विषय पर सभी समुदायों की सहमति आवश्यक है।

अब सबकी निगाहें जुलाई विधानसभा सत्र पर टिकी हैं जहां मध्य प्रदेश सरकार यूसीसी विधेयक पेश कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने वाला देश का प्रमुख राज्य बन सकता है।