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  • यूसीसी महिलाओं और बेटियों को समाज में सुरक्षा और बराबरी का अधिकार दिलाएगा ; हेमंत खण्डेलवाल

    यूसीसी महिलाओं और बेटियों को समाज में सुरक्षा और बराबरी का अधिकार दिलाएगा ; हेमंत खण्डेलवाल


    भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने मध्यप्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने यूसीसी लागू कर इतिहास रचा दिया है। भाजपा सरकार का यह निर्णय मध्यप्रदेश के इतिहास में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को सशक्त बनाने वाला ऐतिहासिक अध्याय है। यूसीसी महिलाओं और बेटियों को समाज में सुरक्षा और बराबरी का अधिकार दिलाएगा। इस कानून से सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिरण के साथ संवैधानिक मूल्यों को नई मजबूती मिलेगी।

    मध्यप्रदेश ने समान न्याय, समान अधिकारों की भावना को साकार किया
    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि विधानसभा द्वारा यूसीसी विधेयक पारित कर मध्यप्रदेश ने समान न्याय, समान अधिकारों की भावना को साकार किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के समान न्याय और समान अधिकारों की भावना को साकार करने की दिशा में मध्यप्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। लिव-इन रिलेशनशिप का 1 महीने में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करना दण्डनीय अपराध है। हमारी सरकार ने जनजातीय समाज को यूसीसी कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा है। जनजातीय समुदाय की संस्कृति से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। मध्यप्रदेश में अब एक ही कानून चलेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, सामाजिक समरसता तथा पारदर्शी कानूनी व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में यह एक दूरगामी और प्रभावी निर्णय सिद्ध होगा।

    विधानसभा की स्वीकृति से संविधान की मूल भावना को मिली मजबूती
    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि समान नागरिक संहिता विधेयक का विधानसभा से पारित होना संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में निहित उस भावना को साकार करने वाला कदम है, जिसमें सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून की परिकल्पना की गई है। समान नागरिक संहिता समाज के सभी वर्गों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करेगी, जिससे नागरिकों के अधिकार एवं कर्तव्य किसी पंथ अथवा व्यक्तिगत परंपराओं के आधार पर अलग-अलग न होकर संविधान की भावना के अनुरूप समान रूप से लागू होंगे। यह निर्णय न्यायिक समानता, सामाजिक समरसता और सुशासन को नई मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों के कारण विशेषकर महिलाओं को न्याय प्राप्त करने में अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। समान नागरिक संहिता इन चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करते हुए महिलाओं को अधिक अधिकार-संपन्न बनाने तथा उनके हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समान नागरिक संहिता मध्यप्रदेश को अधिक समरस, न्यायपूर्ण और प्रगतिशील राज्य बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
  • MP में यूसीसी लागू करने की पूरी तैयारी…. तलाक से लेकर लिव-इन तक… जानें क्या होंगे नए नियम?

    MP में यूसीसी लागू करने की पूरी तैयारी…. तलाक से लेकर लिव-इन तक… जानें क्या होंगे नए नियम?


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code UCC) के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है। यह बिल सोमवार को विधानसभा (Assembly) के मानसून सत्र (Monsoon Session) में पेश किया गया। सरकार इसे सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार देने वाला बिल बता रही है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश भी गोवा, उत्तराखंड, गुजरात जैसे राज्यों में शामिल हो गया है।

    ऐसे में आइए जानते हैं कि समान नागरिक संहिता (UCC) क्या है? संविधान इस पर क्या कहता है? यूसीसी का इतिहास क्या है? मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी कैसे हुई? ड्राफ्ट बिल में क्या-क्या शामिल किया गया है? भारत के किन-किन राज्यों में यह लागू किया जा चुका है?


    समान नागरिक संहिता क्या है?

    समान नागरिक संहिता का अर्थ है हर नागरिक के लिए एक समान कानून, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। इसके लागू होने के बाद संबंधित राज्य में शादी, तलाक, गोद लेने और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होते हैं।

    यह मुद्दा कई दशकों से राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है। UCC केंद्र की मौजूदा सत्ताधारी भाजपा के लिए जनसंघ के जमाने से प्राथमिकता वाला एजेंडा रहा है। भाजपा सत्ता में आने पर UCC को लागू करने का वादा करने वाली पहली पार्टी थी और यह मुद्दा उसके 2019 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र का भी हिस्सा था। इसके साथ ही उसके शासन वाले राज्यों में इसे जोर-शोर से लागू भी कराया जा रहा है। मध्य प्रदेश की कैबिनेट से इसकी मंजूरी इसी कड़ी का हिस्सा है।


    संविधान इस पर क्या कहता है?

    देश में संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता को लेकर प्रावधान है। इसमें कहा गया है कि राज्य इसे लागू कर सकता है। इसका उद्देश्य धर्म के आधार पर किसी भी वर्ग विशेष के साथ होने वाले भेदभाव या पक्षपात को खत्म करना और विविध सांस्कृतिक समूहों के बीच सामंजस्य स्थापित करना था। संविधान निर्माता डॉ. बीआर आम्बेडकर ने कहा था कि UCC जरूरी है, लेकिन फिलहाल यह स्वैच्छिक रहना चाहिए।

    संविधान के मसौदे के अनुच्छेद 35 को भारत के संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 44 के रूप में राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों के हिस्से के रूप में जोड़ा गया था। इसे संविधान में इस नजरिए के रूप में शामिल किया गया था जो तब पूरा होगा जब राष्ट्र इसे स्वीकार करने के लिए तैयार होगा और UCC को सामाजिक स्वीकृति दी जा सकती है।


    इसका इतिहास क्या है?

    UCC की उत्पत्ति औपनिवेशिक भारत में हुई जब ब्रिटिश सरकार ने 1835 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में अपराधों, सबूतों और अनुबंधों से संबंधित भारतीय कानूनों की एकरूपता की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। विशेष रूप से इसमें यह सिफारिश की गई थी कि हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों (पर्सनल लॉ) को इस तरह के संहिताकरण के बाहर रखा जाए।

    ब्रिटिश सरकार को 1941 में हिंदू कानून को संहिताबद्ध करने के लिए बी एन राव समिति बनाई। समिति ने शास्त्रों के अनुसार, एक संहिताबद्ध हिंदू कानून की सिफारिश की, जो महिलाओं को समान अधिकार देगा। इसके साथ ही समिति ने हिंदुओं के लिए विवाह और उत्तराधिकार के मुद्दों में भी नागरिक संहिता की सिफारिश की।


    मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी कैसे हुई?

    मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार, राज्य में अभी विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, लिव-इन संबंध और अन्य पारिवारिक मामलों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। सरकार का कहना है कि इन सभी कानूनों का समग्र अध्ययन कर एक समान, संतुलित और व्यावहारिक कानूनी व्यवस्था तैयार करने की आवश्यकता महसूस की गई।

    इसी उद्देश्य से 27 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया। समिति में शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे।

    समिति ने राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन किया। साथ ही उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में अपनाए गए मॉडल का भी परीक्षण किया। समिति ने आम नागरिकों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से सुझाव और आपत्तियां मांगीं। महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, समानता और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सुझाव तैयार किए गए। लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और उनसे जुड़े अधिकारों एवं दायित्वों पर भी समिति ने विचार किया। साथ ही प्रस्तावित कानून के कानूनी, प्रशासनिक और क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं का अध्ययन किया, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी जटिलता न हो। समिति को 60 दिनों के भीतर ड्राफ्ट बिल और विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई।


    जनता से सुझाव कैसे लिए गए?

    – जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 22 मई 2026 को एक वेब पोर्टल शुरू किया गया।
    – इस दौरान लगभग 3.49 करोड़ एसएमएस भेजे गए।
    – वेब पोर्टल पर 9,58,675 सुझाव प्राप्त हुए।
    – जिला और राज्य स्तर पर 50 से अधिक जनपरामर्श बैठकें आयोजित की गईं।
    – इन बैठकों से 10,134 से अधिक सुझाव मिले।


    जन परामर्श में क्या सामने आया?

    – सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 93.54% लोगों ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन किया।
    – 92.20% लोगों ने कहा कि सभी समुदायों में महिला और पुरुष के लिए समान कानून होना चाहिए।
    – 91.32% लोगों ने माना कि भेदभावपूर्ण तलाक कानून समाप्त होने चाहिए।
    – 92.66% लोगों ने कहा कि महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति में समान अधिकार मिलने चाहिए।
    – 90.96% लोगों ने माना कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों से कानूनी जटिलताएं बढ़ती हैं।
    – 86.78% लोगों ने कहा कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना समान नागरिक संहिता लागू की जा सकती है।


    ड्राफ्ट बिल के प्रमुख प्रावधान क्या है?

    ड्राफ्ट बिल में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
    विवाह के बाद दूसरा विवाह तब तक नहीं किया जा सकेगा, जब तक पहला विवाह कानूनी रूप से समाप्त न हो जाए।
    केवल तलाक, तलाक, तलाक कह देने से विवाह समाप्त नहीं होगा। तलाक तभी प्रभावी होगा जब कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।
    महिलाओं और पुरुषों को उत्तराधिकार में समान अधिकार मिलेंगे।
    जिन कानूनों में महिलाओं के अधिकार कम थे, वहां भाई और बहनों को समान अधिकार दिए जाएंगे।
    सरकार के अनुसार यह कानून सभी धर्मों का सम्मान करता है और किसी धर्म को नीचा नहीं दिखाता।
    महिलाओं की गरिमा, सम्मान और नारी सशक्तिकरण को इस कानून का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।
    अनुसूचित जनजातियों और संरक्षित रूढ़िगत समूहों को इस कानून से बाहर रखा गया है।
    धार्मिक समारोह, अनुष्ठान और परंपराएं पहले की तरह जारी रहेंगी।
    विवाह का पंजीकरण पंचायत से लेकर नगरीय निकाय तक अनिवार्य होगा।
    एक जीवनसाथी के रहते दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी।
    न्यायालय के बाहर विवाह विच्छेद मान्य नहीं होगा।
    पुत्र और पुत्रियों को समान अधिकार प्राप्त होंगे।
    महिलाओं को संपत्ति में वही अधिकार मिलेंगे जो पुरुषों को प्राप्त हैं।

  • यूसीसी लागू होना बड़ी उपलब्धि, इस कानून के फायदों को जनता तक पहुंचाएं

    यूसीसी लागू होना बड़ी उपलब्धि, इस कानून के फायदों को जनता तक पहुंचाएं


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने सोमवार को भाजपा विधायक दल की बैठक को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक सदन में पेश हो गया है। उसे आगामी दिनों में चर्चा के बाद पारित कराया जाएगा। यूसीसी लागू करना बड़ी उपलब्धि है। भाजपा विधायकगण अपने-अपने क्षेत्र में यूसीसी से होने वाले लाभों की जानकारी जनता तक पहुंचाएं। जनता को बताएं कि यूसीसी सभी नागरिकों को समान अधिकार एवं कानूनी संरक्षण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आमजन को यह भी बताएं कि यूसीसी में महिला-पुरुष को संपत्ति में समान अधिकार देकर आधी आबादी के हितों का संरक्षण होगा। नए कानून में जनजातीय समाज की परंपराओं और मान्यताओं के संरक्षण के लिए उन्हें इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता लागू कर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के संकल्प को पूरा करने जा रहा है। जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में यूसीसी के प्रावधानों से जनता को अवगत कराएं, ताकि कांग्रेस और विपक्षी दलों की वोटबैंक एवं तुष्टिकरण की राजनीति की सच्चाई जनता तक पहुंचाई जा सके। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, श्री राजेन्द्र शुक्ल तथा मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय मंचासीन रहे। बैठक का संचालन विधायक श्री शैलेन्द्र जैन ने किया।

    सरकार की उपलब्धियां जनता तक और जनता का फीडबैक सरकार तक पहुंचाएं – डॉ. मोहन यादव
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यूसीसी समानता, न्याय और सशक्त समाज की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यूसीसी लागू होने पर मध्यप्रदेश में प्रत्येक नागरिक के लिए समान अधिकार एवं समान अवसर मिलने की परिकल्पना साकार होगी। यह बात जनता तक पहुंचाने का कार्य सभी विधायकों को करना है। हमने धार्मिक परंपराओं और आस्था को अलग रखा है तथा जनजातीय समुदाय को भी यूसीसी से अलग रखा गया है। इस तथय को भी हमें जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है। इसलिए हमारी सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र और मध्यप्रदेश की डबल इंजन सरकार किसानों के हितों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। देश की सबसे बड़ी टनल के माध्यम से सिंचाई का पानी विंध्य तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी परियोजना से जबलपुर, कटनी, पन्ना, सतना, मैहर एवं रीवा जिले की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। विधायकगण डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएं। साथ ही अपने विधानसभा क्षेत्र को मॉडल विधानसभा के रूप में विकसित करने के लिए विकास कार्यों को गांव-गांव तक पहुंचाएं। सरकार के पास विकास कार्यों और जनकल्याण के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को समान कानूनी व्यवस्था उपलब्ध कराना है, ताकि नागरिकों के अधिकार एवं कर्तव्य पंथ या व्यक्तिगत परंपराओं के आधार पर अलग-अलग न होकर संविधान की भावना के अनुरूप सभी पर समान रूप से लागू हों। यह निर्णय सामाजिक समरसता, न्यायिक समानता तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। इन तथयों को जनता तक पहुंचाते हुए विपक्ष के तथयहीन आरोपों का तथयों एवं प्रमाणों के साथ जवाब देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू होने पर सबसे अधिक लाभ हमारी मुस्लिम बहनों को मिलेगा। विपक्ष भ्रम फैलाने का प्रयास करेगा, लेकिन उसके भ्रामक प्रचार का हमें तथयों के साथ जवाब देकर यूसीसी के लाभ आमजन तक पहुंचाने हैं।
    निवेश के लिए नियमों का सरलीकरण कर मध्यप्रदेश नीति आयोग में प्रथम स्थान पर आया
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार जनता के समग्र कल्याण के लिए कार्य कर रही है। निवेशकों को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की अवधारणा पर सचिवालय बनाया जा रहा है। निवेशकों को आकर्षित करने और सुविधाएं प्रदान करने के लिए अनेक विभागों की नीतियों में सुधार तथा नियमों का सरलीकरण किया गया है। नीति आयोग ने भी निवेशकों के अनुकूल नियमों के सरलीकरण के मामले में मध्यप्रदेश को देश में प्रथम स्थान दिया है।
    विधायकगण सरकार के साथ संगठन की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाएं – श्री हेमंत खण्डेलवाल
    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि यूसीसी लागू होने पर मध्यप्रदेश में प्रत्येक नागरिक के लिए समान अधिकार एवं समान अवसर मिलने की परिकल्पना साकार होगी। यूसीसी में धार्मिक आस्था एवं परंपराओं का सम्मान करते हुए उन्हें यथावत रखा गया है। साथ ही महिलाओं को अधिक अधिकार-संपन्न बनाते हुए उनके हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। इन बातों को हमें जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर चलाए जा रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत व्यापक पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है। साथ ही प्रधानमंत्री जी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में आमजन की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए अपने-अपने क्षेत्र के शत-प्रतिशत बूथों पर कार्यक्रम का श्रवण कराया जाए। हम सभी कार्यकर्ताओं को सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए पर्यावरण, जल और प्रकृति के संरक्षण के लिए कार्य करना है। श्री खण्डेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने जनजातीय समाज की परंपराओं को संरक्षित रखने के लिए उन्हें यूसीसी के दायरे से बाहर रखने का सराहनीय निर्णय लिया है। भाजपा सरकार का यह निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के “विकास भी, विरासत भी” के संकल्प तथा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना को साकार करने वाला है। सभी विधायकगण यूसीसी के लाभों एवं उससे मिलने वाले अधिकारों की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के साथ-साथ संगठन की गतिविधियों को भी प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का कार्य करें।
  • सांदीपनि विद्यालयों पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा दावा, बोले- निजी स्कूल छोड़कर सरकारी विद्यालयों में बढ़ रहा विद्यार्थियों का भरोसा

    सांदीपनि विद्यालयों पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा दावा, बोले- निजी स्कूल छोड़कर सरकारी विद्यालयों में बढ़ रहा विद्यार्थियों का भरोसा

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में दो नए सांदीपनि विद्यालयों के लोकार्पण अवसर पर कहा कि प्रदेश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित सांदीपनि विद्यालयों के कारण अब विद्यार्थी निजी विद्यालयों से निकलकर शासकीय संस्थानों में प्रवेश ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर संसाधनों के माध्यम से राज्य सरकार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मैत्री भारतीय संस्कृति में समानता, आत्मीयता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में शिक्षा प्राप्त कर ज्ञान और संस्कार का महत्व स्थापित किया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश में आधुनिक सुविधाओं से युक्त सांदीपनि विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं, जहां पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षा का संतुलित समावेश किया गया है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने झिंझरी और बहोरीबंद में निर्मित दो नए सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण किया। इन विद्यालयों में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के साथ डिजिटल शिक्षा, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, साइकिलें और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उपलब्ध करा रही है। बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप तथा विद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को स्कूटी प्रदान की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ किसानों के कल्याण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर भी सरकार समान रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने स्लीमनाबाद टनल परियोजना को बघेलखंड और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे रीवा, सतना, मैहर, पन्ना और कटनी सहित कई जिलों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए लगभग 1400 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और इसका लाभ बड़ी संख्या में किसानों को मिलेगा।

    उन्होंने आगे कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना तथा पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना भी प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने और कृषि उत्पादन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश के कई जिलों में खेती की स्थिति बेहतर होगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी विधानसभा सत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार समान नागरिक संहिता के प्रारूप को मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र से पहले जगदीशपुर में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित कर इस संबंध में आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है।

    अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों में 1500 रुपये की राशि हस्तांतरित की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा, सिंचाई, सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत विकास से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • एमपी में यूसीसी पर कैबिनेट की मुहर के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक, मंत्रियों के सामने होगा प्रेजेंटेशन

    एमपी में यूसीसी पर कैबिनेट की मुहर के बाद विधानसभा में आएगा विधेयक, मंत्रियों के सामने होगा प्रेजेंटेशन


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को मानसून सत्र में विधानसभा में पेश करने की तैयारी में है। इससे पहले 19 जुलाई को भोपाल के निकट स्थित जगदीशपुर में आयोजित होने वाली कैबिनेट बैठक में विधेयक के प्रमुख प्रावधानों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा, ताकि सभी मंत्री इसके विभिन्न पहलुओं से पूरी तरह अवगत हो सकें।

    सरकार का उद्देश्य है कि विधानसभा में विधेयक पेश होने से पहले मंत्रियों की सभी जिज्ञासाओं का समाधान हो जाए और वे सदन में प्रस्तावित कानून के प्रावधानों पर तथ्यात्मक रूप से अपना पक्ष रख सकें।

    कांग्रेस के विरोध की तैयारी
    सूत्रों के अनुसार, विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस यूसीसी विधेयक का विरोध कर सकती है। इसे देखते हुए सरकार पहले ही कैबिनेट के समक्ष इसके प्रावधानों की विस्तृत जानकारी साझा करेगी, ताकि चर्चा के दौरान मंत्री प्रभावी ढंग से सरकार का पक्ष रख सकें।

    आदिवासी समुदाय रहेगा दायरे से बाहर
    प्रस्तावित यूसीसी विधेयक में आदिवासी, घुमंतु, अर्द्धघुमंतु और मतांतरित आदिवासी समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अनिवार्य पंजीयन, उत्तराधिकार से जुड़े प्रावधान और विवाह एवं विवाह विच्छेद (तलाक) के मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू करने का प्रस्ताव शामिल किया गया है।

    साढ़े नौ लाख सुझावों के आधार पर तैयार हुआ मसौदा
    यूसीसी का मसौदा तैयार करने के दौरान समिति को करीब साढ़े नौ लाख सुझाव प्राप्त हुए थे। इन्हीं सुझावों और विभिन्न पक्षों पर विचार-विमर्श के बाद विधेयक को अंतिम रूप दिया गया है।

    मानसून सत्र में आएंगे 14 विधेयक
    20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार कुल 14 विधेयक प्रस्तुत करने की तैयारी में है। इनमें केंद्र सरकार द्वारा संशोधित श्रम कानूनों को प्रदेश में लागू करने संबंधी विधेयक, कोचिंग संस्थानों के विनियमन का कानून, फायर सेफ्टी, कॉलोनाइजर एक्ट, माल एवं सेवा कर (जीएसटी), पंचायतराज, नागरिक सुरक्षा संहिता तथा प्रथम अनुपूरक बजट से संबंधित विनियोग विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल हैं।

  • मध्य प्रदेश में UCC की दिशा में बड़ा कदम, उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपी अंतिम रिपोर्ट, अब विधेयक की तैयारी तेज

    मध्य प्रदेश में UCC की दिशा में बड़ा कदम, उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपी अंतिम रिपोर्ट, अब विधेयक की तैयारी तेज

    मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपना अंतिम प्रतिवेदन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दिया है। मुख्यमंत्री ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर समिति के अध्यक्ष और सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही राज्य में यूसीसी को लेकर आगे की विधायी प्रक्रिया शुरू होने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है। सरकार ने रिपोर्ट को विधि विभाग को भेज दिया है, जहां आवश्यक परीक्षण और संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    समिति द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन तीन अलग-अलग खंडों में तैयार किया गया है। पहले खंड में समिति की सिफारिशें शामिल हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर लागू विभिन्न कानूनों, परंपराओं और व्यवस्थाओं का अध्ययन कर सुझाव दिए गए हैं। इस भाग में कुल दस अध्याय शामिल किए गए हैं, जिनमें विभिन्न कानूनी और सामाजिक पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

    रिपोर्ट का दूसरा खंड प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप से संबंधित है। समिति ने मध्य प्रदेश में लागू कानूनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए विधेयक का मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित प्रारूप में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं। इसका उद्देश्य राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप समान नागरिक संहिता का व्यावहारिक और कानूनी ढांचा तैयार करना है।

    तीसरे खंड में व्यापक जन-परामर्श का विवरण दिया गया है। समिति ने जिला स्तर, राज्य स्तर और ऑनलाइन माध्यमों से सुझाव आमंत्रित किए थे। इस प्रक्रिया में 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। रिपोर्ट में इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण भी शामिल किया गया है। समिति ने अपनी सिफारिशों में अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा भी की है।

    राज्य सरकार ने समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कानूनों का अध्ययन कर मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप सुझाव तैयार करने का दायित्व सौंपा था। समिति ने अपने प्रतिवेदन में लैंगिक समानता, संवैधानिक मूल्यों, प्रचलित परंपराओं और सामाजिक विविधता के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि विभिन्न समुदायों की परंपरागत धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाएं अनावश्यक रूप से प्रभावित न हों।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई सहित अन्य सदस्यों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब रिपोर्ट विधि विभाग के पास है, जहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे वरिष्ठ सचिव समिति और मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद सरकार इसे विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में विधेयक के रूप में प्रस्तुत करने पर विचार कर सकती है।

    मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों से भी स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे विषय पर सभी पक्षों को अपने विचार स्पष्ट रूप से रखने चाहिए। सरकार का कहना है कि व्यापक जन-परामर्श और कानूनी अध्ययन के आधार पर तैयार यह प्रतिवेदन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार दस्तावेज के रूप में काम करेगा।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले में निष्पक्ष जांच की मांग, मनीष तिवारी बोले- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है पूरा मामला

    राम मंदिर चढ़ावा मामले में निष्पक्ष जांच की मांग, मनीष तिवारी बोले- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है पूरा मामला

    नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले, यूनिफॉर्म सिविल कोड और सिंधु जल संधि सहित कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना आवश्यक है, क्योंकि यह मामला करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है।

    राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के बयान के बाद प्रतिक्रिया देते हुए तिवारी ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनके अनुसार यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और धार्मिक संस्थाओं की गरिमा पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे।

    उन्होंने कहा कि अयोध्या स्थित रामलला का मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस प्रकार के किसी भी विवाद का निष्पक्ष समाधान आवश्यक है। उनका कहना था कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के संदेह की स्थिति समाप्त हो सके और तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आएं।

    महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में ड्राफ्टिंग कमेटी गठित किए जाने के निर्णय पर भी मनीष तिवारी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड का उल्लेख किया गया है, न कि कॉमन सिविल कोड का। उनके अनुसार दोनों अवधारणाओं को एक समान मानना उचित नहीं है और इस विषय पर संवैधानिक प्रावधानों को सही संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।

    तिवारी ने यह भी कहा कि पहले जब इस विषय पर चर्चा हुई थी, तब यह स्पष्ट किया गया था कि कुछ विशेष समुदायों और अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखने का विचार सामने आया था। उनका तर्क था कि यदि विभिन्न समुदायों के पारंपरिक और प्रथागत कानूनों को अलग रखा जाता है तो फिर इसे वास्तविक अर्थों में समान नागरिक संहिता कहना कठिन होगा। उन्होंने इस विषय पर व्यापक संवाद और संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

    सिंधु जल संधि और पाकिस्तान के साथ संबंधों पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में कांग्रेस सांसद ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर देश की नीति लंबे समय से स्पष्ट रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई के मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति मौजूद है और इस दिशा में सरकार को प्रभावी ढंग से अपनी नीति लागू करनी चाहिए।

    तिवारी ने कहा कि आतंकवाद और सामान्य संबंध साथ-साथ नहीं चल सकते। उनके अनुसार भारत की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं तथा सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के विरुद्ध सख्त रुख बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर देश के भीतर व्यापक सहमति बनी हुई है और सरकार को उसी भावना के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए।

    राम मंदिर विवाद, यूनिफॉर्म सिविल कोड और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दों पर दिए गए मनीष तिवारी के बयान ऐसे समय सामने आए हैं जब ये तीनों विषय राष्ट्रीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में बने हुए हैं। उनके बयान को विपक्ष के दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जबकि इन मुद्दों पर आगे भी राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।

  • महाराष्ट्र में भी लागू होगा UCC…. ड्राफ्ट तैयार करने के सरकार बनाएगी कमेटी

    महाराष्ट्र में भी लागू होगा UCC…. ड्राफ्ट तैयार करने के सरकार बनाएगी कमेटी


    मुंबई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) में यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code- UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है. जानकारी के मुताबिक कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए जल्द ही एक कमेटी का गठन किया जाएगा.

    अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि महाराष्ट्र सरकार (Government of Maharashtra) यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार करने हेतु दो हफ्ते के भीतर एक कमेटी बना सकती है. उन्होंने जानकारी दी कि कमेटी के गठन और इसके काम करने के दायरे को अभी फाइनल किया जाना बाकी है।

    जानकारी के मुताबिक एक अधिकारी ने जानकारी दी कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी बनाने का प्रोसेस चल रहा है और अगले दो हफ्तों के भीतर इसका गठन कर दिया जाएगा।

    बता दें कि पिछले हफ्ते ही गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने विधानसभा में जानकारी दी थी कि महाराष्ट्र में यूसीसी लागू किया जाएगा और इस कानून का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अगुवाई में कमेटी बनाई जाएगी.

    यूनिफॉर्म सिविल कोड एक संवैधानिक निर्देश है, जिसका मकसद सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, विरासत और एडॉप्शन जैसे मामलों में एक समान कानून लागू करना है. कानून की नजर में सब एक समान होते हैं. शादी, तलाक, एडॉप्शन, उत्तराधिकार, विरासत लेकिन सबसे बढ़कर लैंगिक समानता वो कारण है, जिस वजह से यूनिफार्म सिविल कोड की जरूरत महसूस की जाती रही है।

    यूसीसी का मतलब है कि शादी, तलाक, बच्चा गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे मामलों में सभी नागरिकों पर एक समान कानून लागू हो, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो. जिस राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होगी, वहां इन मामलों में सभी धर्मों के लोगों के लिए एक ही कानूनी व्यवस्था लागू होगी।

  • मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज शादी लिव इन और तलाक के लिए बनेंगे एक समान कानून गुजरात मॉडल पर तैयार ड्राफ्ट

    मध्यप्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी तेज शादी लिव इन और तलाक के लिए बनेंगे एक समान कानून गुजरात मॉडल पर तैयार ड्राफ्ट


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ा दिया है। राज्य के लिए यूसीसी का प्रारूप तैयार हो चुका है और इसे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के समक्ष प्रस्तुत भी किया गया है। मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए सुझावों को शामिल करने के बाद समिति अंतिम ड्राफ्ट सरकार को सौंपेगी। माना जा रहा है कि यह कानून लागू होने के बाद शादी तलाक लिव इन रिलेशनशिप उत्तराधिकार और वसीयत जैसे पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करेगा।

    सूत्रों के अनुसार मध्यप्रदेश का प्रस्तावित यूसीसी काफी हद तक गुजरात में लागू समान नागरिक संहिता के मॉडल पर आधारित है। बताया जा रहा है कि ड्राफ्ट के अधिकांश प्रावधान गुजरात कानून से प्रेरित हैं। सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह है कि धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासी भी इस कानून के दायरे में आएंगे जबकि अपनी पारंपरिक जनजातीय रीति रिवाजों का पालन करने वाले आदिवासियों को इससे बाहर रखा जाएगा।

    प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार धार्मिक परंपराओं में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। सभी समुदाय अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार विवाह कर सकेंगे। हिंदू विवाह के फेरे मुस्लिम निकाह सिख आनंद कारज ईसाई चर्च विवाह और अन्य मान्य पद्धतियां पहले की तरह जारी रहेंगी। अंतर केवल इतना होगा कि विवाह से जुड़े कानूनी अधिकार और जिम्मेदारियां सभी नागरिकों के लिए समान होंगी।

    ड्राफ्ट में प्रत्येक विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान रखा गया है। विवाह होने के 60 दिन के भीतर उसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यदि निर्धारित समय में पंजीकरण नहीं हो पाता है तो बाद में तय प्रक्रिया के तहत इसे कराया जा सकेगा। हालांकि केवल रजिस्ट्रेशन न होने से विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा लेकिन नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई संभव होगी। नई शादियों के साथ पहले से हुए विवाह और तलाक का भी सरकारी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य में दस्तावेजों और कानूनी विवादों में पारदर्शिता बनी रहे।

    यूसीसी के तहत पति पत्नी और बच्चों के अधिकारों को लेकर भी समान नियम प्रस्तावित किए गए हैं। भरण पोषण की परिभाषा केवल भोजन और आवास तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि शिक्षा स्वास्थ्य वस्त्र और अन्य आवश्यक जरूरतें भी इसमें शामिल होंगी। अदालत परिस्थितियों के अनुसार स्थायी गुजारा भत्ता तय कर सकेगी। बच्चों की अभिरक्षा और देखभाल से जुड़े मामलों में भी समान कानूनी प्रावधान लागू होंगे।

    संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में भी एक समान नियम लागू करने की तैयारी है। यदि कोई व्यक्ति बिना वसीयत के निधन करता है तो उसकी संपत्ति का बंटवारा तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगा। गर्भ में पल रहे बच्चे के अधिकारों को भी मान्यता दी जाएगी। वहीं यदि कोई व्यक्ति मृतक की हत्या का दोषी पाया जाता है तो उसे संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा। बीमारी या शारीरिक दिव्यांगता के आधार पर किसी भी उत्तराधिकारी के अधिकार समाप्त नहीं किए जा सकेंगे।

    ड्राफ्ट में वसीयत तैयार करने उसे संशोधित करने या निरस्त करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है। यदि किसी वसीयत के पीछे दबाव धोखाधड़ी या जबरदस्ती साबित होती है तो उसे अमान्य माना जाएगा। संपत्ति विवाद की स्थिति में अदालत संपत्ति की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा सकेगी और जरूरत पड़ने पर संरक्षक नियुक्त कर सकेगी।

    प्रस्तावित कानून के तहत शादी तलाक और अन्य पारिवारिक मामलों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए रजिस्ट्रार जनरल और रजिस्ट्रार की नियुक्ति होगी। यदि किसी व्यक्ति का आवेदन अस्वीकार किया जाता है तो उसे अपील का अधिकार भी मिलेगा। रिकॉर्ड में छेड़छाड़ झूठी जानकारी देने या फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर दंड का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से पारिवारिक मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी नागरिकों को समान कानूनी संरक्षण मिल सकेगा।

  • बंगाल: शुभेंदु अधिकारी का धर्मांतरण विरोधी कानून, UCC और NRC लागू करने का ऐलान, विपक्ष ने साधा निशाना

    बंगाल: शुभेंदु अधिकारी का धर्मांतरण विरोधी कानून, UCC और NRC लागू करने का ऐलान, विपक्ष ने साधा निशाना


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए कहा कि राज्य सरकार जल्द ही धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून लाएगी। इसके साथ ही उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उनके इस बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने भाजपा सरकार पर विपक्ष को डराने और दमनकारी कानून लाने का आरोप लगाया।

    रवींद्र सदन में ‘वंदे मातरम्’ गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ राज्य की जनसांख्यिकी में बदलाव और कथित “लव जिहाद” जैसी समस्याओं का प्रमुख कारण है।

    उन्होंने कहा, “हमें थोड़ा समय दीजिए। बंगाल में धर्मांतरण विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता (UCC) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) निश्चित रूप से लागू किए जाएंगे। जो लोग अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर देश की संस्कृति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं, उन्हें वापस भेजा जाएगा।”

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत नागरिकता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 1975 के आपातकाल का विरोध करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को 9 अगस्त को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र भवानीपुर में भाजपा के नए कार्यालय का उद्घाटन भी किया।

    महुआ मोइत्रा का जवाब
    मुख्यमंत्री के बयान और विधानसभा में प्रस्तावित विधेयकों को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर हुई बैठक के बाद सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराने की कोशिश कर रही है, लेकिन जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

    महुआ मोइत्रा ने प्रस्तावित **बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026** को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को केवल संदेह के आधार पर बिना न्यायिक सुनवाई के एक वर्ष तक हिरासत में रखा जा सकता है।

    उन्होंने दावा किया कि यह प्रस्तावित कानून आपातकाल के दौरान लागू रहे मीसा (MISA) और मौजूदा यूएपीए (UAPA) से भी अधिक कठोर है तथा इसमें पर्याप्त न्यायिक सुरक्षा प्रावधान नहीं हैं।

    भाजपा ने किया पलटवार
    टीएमसी के आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि विपक्ष सत्ता खोने के बाद जनता के बीच भ्रम और भय का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। भाजपा का कहना है कि प्रस्तावित **एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026** का उद्देश्य गुजरात और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर संगठित अपराध, सिंडिकेट राज, जबरन वसूली और राजनीतिक हिंसा पर प्रभावी नियंत्रण करना है। भाजपा के अनुसार, प्रस्तावित कानून में दंगों और हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सरकारी एवं निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों से क्षति की भरपाई कराने का भी प्रावधान किया गया है।