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  • उज्जैन में तमन्ना भाटिया की शिवभक्ति, महाकाल के दरबार में टेका माथा, भस्म आरती में हुईं शामिल

    उज्जैन में तमन्ना भाटिया की शिवभक्ति, महाकाल के दरबार में टेका माथा, भस्म आरती में हुईं शामिल


    उज्जैन। बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री तमन्ना भाटिया शनिवार सुबह उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। यहां उन्होंने भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होकर दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनकी मां और परिवार के अन्य सदस्य भी साथ मौजूद रहे। सुबह करीब 4 बजे मंदिर पहुंचीं तमन्ना पारंपरिक साड़ी में नजर आईं। उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर करीब दो घंटे तक भस्म आरती के दर्शन किए। मंदिर परिसर में अभिनेत्री पूरे श्रद्धाभाव के साथ पूजा-अर्चना करती दिखाई दीं।

    महाकाल मंदिर में होने वाली भस्म आरती देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में भक्त तड़के मंदिर पहुंचते हैं। तमन्ना भाटिया ने भी सुबह की इस विशेष आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। उनके साथ उनकी मां भी मौजूद थीं। अभिनेत्री अपनी मां को भगवान महाकाल के दर्शन कराने के लिए उज्जैन लेकर आई थीं। परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर उन्होंने धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा की और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

    नंदी हॉल में बैठकर किए दर्शन

    भस्म आरती के दौरान तमन्ना नंदी हॉल में बैठीं और करीब दो घंटे तक आरती में शामिल रहीं। इस दौरान उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना की। आरती संपन्न होने के बाद उन्होंने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना भी कही। धार्मिक मान्यता के अनुसार भक्त नंदी के कान में अपनी इच्छा या प्रार्थना कहते हैं। मान्यता है कि नंदी महाराज भक्तों की मनोकामना भगवान शिव तक पहुंचाते हैं। इसी परंपरा का पालन करते हुए तमन्ना ने भी नंदी महाराज के कान में अपनी प्रार्थना कही।

    मंदिर समिति ने किया सम्मान

    दर्शन के दौरान महाकाल मंदिर समिति की ओर से अभिनेत्री तमन्ना भाटिया और उनके परिवार का सम्मान किया गया। मंदिर में दर्शन के बाद तमन्ना ने अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि सुबह होने वाली भस्म आरती में शामिल होने का अवसर मिलना उनके लिए बेहद आनंद का अनुभव है। उन्होंने बताया कि वह अपनी मां को भी भगवान महाकाल के दर्शन कराने के लिए लेकर आई थीं। मां के साथ बाबा महाकाल के दर्शन करना उनके लिए बेहद खुशी का पल रहा।

    उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। यहां हर दिन देश और दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। फिल्म और मनोरंजन जगत की हस्तियां भी समय-समय पर बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाती रही हैं। तमन्ना भाटिया का अपनी मां और परिवार के साथ भस्म आरती में शामिल होना भी इसी आस्था से जुड़ा एक खास अवसर रहा। दर्शन के दौरान अभिनेत्री ने धार्मिक माहौल में समय बिताया और भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया।

  • सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की थाली से पूजा के फूलों तक का रोडमैप तैयार, 15 जिलों से उज्जैन पहुंचेगी उपज, सप्लाई चेन पर रहेगा फोकस

    सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की थाली से पूजा के फूलों तक का रोडमैप तैयार, 15 जिलों से उज्जैन पहुंचेगी उपज, सप्लाई चेन पर रहेगा फोकस


    उज्जैन  । उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व को लेकर तैयारियां अभी से तेज होने लगी हैं। आयोजन में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इतने बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान भोजन और पूजा सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए उद्यानिकी विभाग ने सब्जियों और फूलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए दो साल का रोडमैप तैयार किया है। योजना के तहत मध्यप्रदेश के 15 जिलों में करीब 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में उत्पादन क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और लगभग 20 हजार किसानों को इससे जोड़ने की तैयारी है।

    सिंहस्थ करीब 60 दिनों तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही रहेगी और भोजन की व्यवस्था के लिए बड़ी मात्रा में सब्जियों की जरूरत पड़ेगी। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन करीब 66 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की आवाजाही हो सकती है। यदि प्रति व्यक्ति रोजाना दो किलोग्राम सब्जी की जरूरत का मानक माना जाए तो संभावित मांग लगभग 13 हजार टन प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। हालांकि यह एक अनुमानित गणना है। वास्तविक खपत श्रद्धालुओं के ठहरने की अवधि भोजन व्यवस्था और सब्जियों के वास्तविक इस्तेमाल पर निर्भर करेगी। इतनी बड़ी संभावित जरूरत को देखते हुए विभाग का जोर स्थानीय उत्पादन बढ़ाने और दूसरे जिलों से नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है।

    योजना के तहत करीब 16 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त उत्पादन का प्रस्ताव है। इसमें आठ हजार हेक्टेयर में सब्जियां और आठ हजार हेक्टेयर में फूलों की खेती विकसित करने की तैयारी की जा रही है। क्लस्टर आधारित मॉडल में एक क्षेत्र के कई किसान मांग के अनुसार योजनाबद्ध तरीके से फसल उगाएंगे। इससे विभाग को पहले से जानकारी मिल सकेगी कि किस जिले और क्षेत्र में कौन सी फसल कितने रकबे में लगाई जा रही है और उससे कितनी उपज मिलने की संभावना है। इस तरह आयोजन के समय अचानक बढ़ने वाली मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन और आपूर्ति की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।

    सब्जियों के उत्पादन के लिए उज्जैन संभाग के उज्जैन आगर-मालवा शाजापुर देवास रतलाम नीमच और मंदसौर जिलों को प्रस्तावित क्लस्टर योजना में शामिल किया गया है। इन जिलों में हाइब्रिड सब्जियों का अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को खेती की तकनीक और फसल चयन के संबंध में प्रशिक्षण देने की तैयारी है। जरूरत के मुताबिक अलग-अलग क्षेत्रों में आलू प्याज टमाटर और हरी सब्जियों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। यदि किसी एक क्षेत्र में फसल खराब होती है तो दूसरे जिलों से आपूर्ति बढ़ाकर कमी को पूरा करने की कोशिश की जाएगी।

    सिंहस्थ में पूजा और धार्मिक गतिविधियों के कारण फूलों की मांग भी काफी बढ़ने की संभावना है। इसके लिए उज्जैन इंदौर देवास आगर-मालवा खंडवा छतरपुर मैहर और दतिया में फूलों के उत्पादन क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है। उज्जैन में करीब 4200 हेक्टेयर में गेंदा उत्पादन के लिए 25 क्लस्टर और 240 गांवों को जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा गुलाब की खेती का रकबा बढ़ाकर 250 हेक्टेयर से अधिक करने की तैयारी है। फूलों की आधुनिक खेती और बेहतर पौध सामग्री उपलब्ध कराने के लिए उज्जैन में करीब 19 एकड़ में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर फ्लोरीकल्चर विकसित करने की योजना भी है।

    हालांकि केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। खेत से निकली सब्जियों को समय पर उज्जैन तक पहुंचाने के लिए संग्रहण केंद्र ग्रेडिंग पैकिंग और जरूरत के अनुसार कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था भी जरूरी होगी। सब्जियां जल्दी खराब होती हैं इसलिए परिवहन में देरी होने पर उपज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। विभाग को मांग और उपलब्धता का रिकॉर्ड तैयार कर आपूर्ति की निगरानी भी करनी होगी। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि किस जिले से कितनी सब्जियां भेजनी हैं और किस क्षेत्र में उनकी जरूरत अधिक है।

    उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक केएस मंडलाई के मुताबिक सिंहस्थ में सब्जियों और फूलों की मांग बढ़ने को देखते हुए दो साल पहले से तैयारी की जा रही है। किसानों को चिह्नित कर प्रशिक्षण देने और विशेष क्लस्टर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। अब इस योजना की सफलता उत्पादन बढ़ाने के साथ परिवहन भंडारण और वितरण के बीच तालमेल पर निर्भर करेगी। यदि पूरी व्यवस्था समय पर तैयार हो जाती है तो सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की जरूरत पूरी करने के साथ किसानों को भी अपनी उपज के लिए बड़ा बाजार मिल सकता है।

  • दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा पर सियासी संग्राम तेज, चंदा चोरी के आरोप और बैलेट पेपर की मांग से गरमाई राजनीति, भाजपा सांसद ने उठाए सवाल

    दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा पर सियासी संग्राम तेज, चंदा चोरी के आरोप और बैलेट पेपर की मांग से गरमाई राजनीति, भाजपा सांसद ने उठाए सवाल


    उज्जैन।  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक निकाली जा रही सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के दूसरे दिन राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। बुधवार को तराना रोड स्थित श्री साईं कुंज कॉलोनी से शुरू हुई यात्रा में दिग्विजय सिंह समर्थकों के साथ पैदल चलते नजर आए। हाथ में डंडा लेकर चल रहे दिग्विजय सिंह ने चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दे उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि चंदा चोरी करने वालों को पकड़ा जाए और जेल भेजा जाए। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई।

    दिग्विजय सिंह की यह यात्रा करीब 950 किलोमीटर लंबी है और लगभग 70 दिनों में अयोध्या स्थित राम मंदिर पहुंचने का कार्यक्रम है। यात्रा के दूसरे दिन पिंगलेश्वर जोड़ नहारिया जोड़ सायराखेड़ी और देवनखेड़ी होते हुए ताजपुर जोड़ तक पहुंचने की योजना थी। इसके बाद भोजन और विश्राम के लिए रुकने तथा शाम को देवास जिले के सिंदूरिया गांव में पड़ाव डालने का कार्यक्रम प्रस्तावित था। दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा को शिव धाम से राम धाम तक की यात्रा बताया। इस दौरान उन्होंने समर्थकों के साथ बम-बम भोले का उद्घोष किया जबकि समर्थकों ने जय सियाराम के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि सनातनी परंपरा में माता सीता का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    यात्रा को लेकर मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने भी टिप्पणी की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि राम मंदिर के निर्माण के समय वैसा उत्साह दिखाई नहीं दिया जैसा अब मंदिर के चंदे पर सवाल उठाते हुए नजर आ रहा है। इस बयान पर प्रतिक्रिया पूछे जाने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें छोड़ दीजिए मैं उन्हें जानता भी नहीं। उनके इस जवाब के बाद यात्रा को लेकर चल रही बयानबाजी एक बार फिर चर्चा में आ गई।

    दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय ने यात्रा को धार्मिक आस्था और स्वाभिमान से जुड़ा अभियान बताया। उनके मुताबिक चढ़ावे की कथित चोरी और धर्म के नाम पर धोखाधड़ी जैसी घटनाओं से सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है। यात्रा के जरिए इन्हीं मुद्दों को उठाकर लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। यात्रा प्रभारी चंदर सिंह सोंधिया के अनुसार यात्रा में स्थायी रूप से शामिल होने के लिए अब तक करीब तीन हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है जबकि अलग-अलग स्थानों पर हजारों लोग इससे जुड़ रहे हैं।

    दिग्विजय सिंह ने राम जन्मभूमि के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा है कि मामले में छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई लेकिन बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। उन्होंने वोट चोरी और नोट चोरी के मुद्दे भी उठाए हैं। यात्रा के दौरान पर्चे बांटने और राष्ट्रपति के नाम रिपोर्ट पेश करने की बात भी कही गई है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी बात जनता तक पहुंचाना और न्याय की मांग करना है। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति में यात्रा से जुड़े संवाद की जिम्मेदारी अमृता राय को सौंपने की बात भी कही है।

    दूसरी ओर उज्जैन से भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया ने इस यात्रा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक नौटंकी बताया। उन्होंने कहा कि सनातन का ध्वज भगवा है लेकिन यात्रा में भगवा ध्वज दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने तिरंगे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश का मान सम्मान और अभिमान है। सांसद ने दिग्विजय सिंह को संत के बजाय राजनेता बताते हुए कांग्रेस के पुराने रुख और भगवान राम से जुड़े विवादों का भी जिक्र किया। इस तरह यात्रा के धार्मिक उद्देश्य और उसके राजनीतिक मायनों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

  • उज्जैन में विजयादशमी पर संघ का पथ संचलन, बैंड और लाठी के साथ कदमताल करते निकले स्वयंसेवक, 25 अक्टूबर तक होंगे आयोजन

    उज्जैन में विजयादशमी पर संघ का पथ संचलन, बैंड और लाठी के साथ कदमताल करते निकले स्वयंसेवक, 25 अक्टूबर तक होंगे आयोजन


    उज्जैन। विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को उज्जैन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS का पथ संचलन निकाला गया। शहर की 65 बस्तियों से स्वयंसेवक पारंपरिक वेशभूषा में अनुशासित तरीके से कदमताल करते हुए विभिन्न मार्गों से गुजरे। इस दौरान शहर में कई जगह उत्साह का माहौल देखने को मिला। स्थानीय रहवासियों ने रंगोली बनाकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। कई स्थानों पर लोगों ने फूल बरसाए और सड़क के दोनों ओर खड़े होकर संचलन में शामिल स्वयंसेवकों का अभिवादन किया। विजयादशमी पर आयोजित इस कार्यक्रम में अनुशासन और सामूहिक सहभागिता प्रमुख रूप से दिखाई दी।

    पथ संचलन की शुरुआत से पहले संबंधित बस्तियों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें संघ के गीत अमृत वचन बौद्धिक और प्रार्थना शामिल रहे। इन कार्यक्रमों के बाद स्वयंसेवक निर्धारित मार्गों पर संचलन के लिए निकले। सभी स्वयंसेवक एक साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़े। उनके साथ बैंड भी शामिल रहा और कई स्वयंसेवक हाथों में लाठी लेकर चलते दिखाई दिए। संचलन के दौरान स्वयंसेवकों ने अनुशासन बनाए रखा और निर्धारित मार्ग से होते हुए कार्यक्रम पूरा किया। इसके बाद सभी अपने अपने क्षेत्रों की बस्तियों में लौट गए।

    उज्जैन में दशहरे के अवसर पर संघ की ओर से अलग-अलग बस्तियों में पथ संचलन निकालने की परंपरा रही है। इस आयोजन के माध्यम से स्वयंसेवक एकजुट होकर निर्धारित कार्यक्रम में भाग लेते हैं। इस बार भी शहर की 65 बस्तियों में विजयादशमी के दिन संचलन आयोजित किए गए। मार्गों पर स्थानीय लोगों की मौजूदगी और स्वागत की तैयारियों ने आयोजन को खास बनाया। कई स्थानों पर रंगोली के जरिए रास्तों को सजाया गया। लोगों ने फूल बरसाकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया और उनके गुजरने के दौरान अभिवादन किया।

    संघ की ओर से पथ संचलन के आयोजन केवल विजयादशमी तक सीमित नहीं रहेंगे। जानकारी के अनुसार 20 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक शहर की अलग-अलग बस्तियों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के तहत संबंधित क्षेत्रों में स्वयंसेवक एकत्र होंगे और तय कार्यक्रम के अनुसार संचलन निकालेंगे। आयोजन की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर की जा रही है। इससे शहर की विभिन्न बस्तियों में अलग-अलग दिनों पर संघ के कार्यक्रम देखने को मिलेंगे।

    विजयादशमी पर निकले पथ संचलन के दौरान पारंपरिक वेशभूषा बैंड की धुन और एक साथ कदमताल करते स्वयंसेवक आकर्षण का केंद्र रहे। स्वागत के लिए बनाई गई रंगोलियों और फूलों की वर्षा से कई मार्गों पर उत्सवी माहौल दिखाई दिया। अब 25 अक्टूबर तक उज्जैन की अन्य बस्तियों में भी पथ संचलन और संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के जरिए संघ की स्थानीय इकाइयां अपने तय कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएंगी।

  • दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर रोजाना 30 से 50 हजार खर्च का अनुमान, बोले कौन भंडारा करा रहा मुझे नहीं पता

    दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर रोजाना 30 से 50 हजार खर्च का अनुमान, बोले कौन भंडारा करा रहा मुझे नहीं पता


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर को उज्जैन से अपनी सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत की। उज्जैन से अयोध्या तक करीब 950 किलोमीटर की इस पदयात्रा को लगभग 70 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यात्रा शुरू होने से पहले दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ पार्थिव शिवलिंग का पूजन किया। इसके बाद उन्होंने भगवान महाकाल के दर्शन कर यात्रा की शुरुआत की। इस पदयात्रा में साधु संतों सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों कांग्रेस कार्यकर्ताओं विधायकों और महिला प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों के मुताबिक पहले दिन करीब तीन हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान है जबकि आगे के पड़ावों पर रोजाना एक हजार से पंद्रह सौ लोग यात्रा से जुड़ सकते हैं।

    दिग्विजय सिंह ने यह यात्रा मंदिरों में चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू की है। उनका कहना है कि यात्रा के दौरान भोजन नाश्ते चाय और ठहरने की व्यवस्था में अलग-अलग स्थानों पर लोग स्वेच्छा से सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि कौन व्यक्ति किस स्थान पर भंडारा करा रहा है। दिग्विजय सिंह ने अपनी नर्मदा परिक्रमा का उदाहरण देते हुए बताया कि उस दौरान भी कई लोग अपने भंडारे की व्यवस्था यात्रा में शामिल कराने के लिए आग्रह करते थे। उनके अनुसार इस बार भी लोग खुद आगे आकर यात्रियों के भोजन और अन्य जरूरतों का इंतजाम कर रहे हैं।

    यात्रा की व्यवस्थाओं पर प्रतिदिन करीब 30 से 50 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। कांग्रेस विधायक महेश परमार के मुताबिक छोटे ग्रामीण पड़ावों पर खर्च लगभग 20 से 30 हजार रुपये तक रह सकता है जबकि बड़े पड़ावों पर यह राशि 50 से 60 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। करीब 70 दिन की यात्रा के लिए कुल 30 से 40 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। शुरुआती पड़ावों पर यात्रियों के रुकने भोजन चाय और नाश्ते की व्यवस्था स्थानीय लोगों के सहयोग से की गई है। आयोजकों के मुताबिक रास्ते में लगभग हर तीन किलोमीटर पर चाय और सुबह के नाश्ते के साथ दोनों समय भोजन की व्यवस्था करने के लिए लोग आगे आए हैं।

    यात्रा के दौरान प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलने की योजना है। इसकी तैयारी के लिए दिग्विजय सिंह रोज करीब आठ किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास कर रहे थे। उज्जैन से निकलने के बाद यात्रा तराना और कनासिया होते हुए शाजापुर जिले की ओर बढ़ेगी। इसके बाद यह सारंगपुर खुजनेर राजगढ़ चाचौड़ा आरोन अशोकनगर और चंदेरी सहित कई क्षेत्रों से गुजरेगी। मध्य प्रदेश के बाद यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी और तालबेहट जेरोन ओरछा चिरगांव उरई कालपी कानपुर देहात लखनऊ देहात और बाराबंकी के रास्ते अयोध्या पहुंचेगी। यात्रा का अंतिम पड़ाव राम मंदिर निर्धारित किया गया है।

    इस पदयात्रा के साथ एक विशेष रथ भी चल रहा है। इसमें भगवान राम लक्ष्मण माता सीता और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। रथ में गंगा यमुना शिप्रा कावेरी और नर्मदा नदियों के जल से भरे कलश भी रखे गए हैं। आयोजकों के अनुसार कई संतों ने यात्रा को समर्थन और आशीर्वाद दिया है। महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा सहित अन्य धार्मिक हस्तियों के इसमें शामिल होने की बात कही गई है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का भी समर्थन मिलने की जानकारी आयोजकों ने दी है।

    यात्रा में शामिल होने पहुंचीं फराह खान ने कहा कि वह अपनी इच्छा से इस पदयात्रा में शामिल हुई हैं। उन्होंने मंदिरों से सोने की चोरी और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया। फराह खान के मुताबिक वह शुरुआती पांच से छह दिन यात्रा में रहेंगी और पारिवारिक कार्यक्रम के बाद दोबारा इसमें शामिल होंगी। आयोजकों का कहना है कि रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर लोग यात्रा से जुड़ेंगे। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि करीब 950 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कब अयोध्या पहुंचती है और मंदिरों की व्यवस्था में पारदर्शिता का मुद्दा किस तरह आगे बढ़ता है।

  • सिंहस्थ से पहले अतिक्रमण पर नगर निगम का एक्शन, जयसिंहपुरा में महासिद्ध आश्रम के निर्माण ढहाए, दो नोटिस के बाद कार्रवाई

    सिंहस्थ से पहले अतिक्रमण पर नगर निगम का एक्शन, जयसिंहपुरा में महासिद्ध आश्रम के निर्माण ढहाए, दो नोटिस के बाद कार्रवाई


    उज्जैन । उज्जैन में आगामी सिंहस्थ को लेकर प्रशासन ने सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई तेज कर दी है। इसी अभियान के तहत रविवार तड़के नगर निगम की टीम ने जयसिंहपुरा क्षेत्र में नरसिंह घाट के पास स्थित महासिद्ध आश्रम यानी एमएस सुकृत ट्रस्ट के परिसर में बने अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की। सुबह करीब पांच बजे पहुंची टीम ने तीन पोकलैंड मशीनों की मदद से नवनिर्मित भवन के कुछ हिस्सों को ध्वस्त किया। हालांकि भवन के भीतर रखा सामान निकालने के लिए समय दिए जाने के बाद कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोक दिया गया।
    नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर के अनुसार आश्रम परिसर में सिंहस्थ के लिए सुरक्षित रखी गई भूमि पर हाल ही में तीन अलग-अलग पक्के भवनों का निर्माण किया गया था। निगम प्रशासन ने इन निर्माणों को हटाने के लिए आश्रम संचालक को पहले ही दो बार नोटिस जारी किए थे। निर्धारित समय सीमा में निर्माण नहीं हटाए जाने के बाद रविवार सुबह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई। प्रशासन का उद्देश्य सिंहस्थ क्षेत्र की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना है ताकि आयोजन के दौरान जरूरी व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध रह सके।
    कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को पता चला कि नवनिर्मित भवन के अंदर आश्रम का काफी सामान रखा हुआ है। ऐसे में सामान को बाहर निकालने के लिए समय दिया गया। इसके बाद नगर निगम की टीम ने फिलहाल कार्रवाई रोक दी और मौके से लौट गई। अधिकारियों के मुताबिक दी गई समय सीमा समाप्त होने के बाद शेष अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया फिर शुरू की जाएगी। इस तरह भवन के कुछ हिस्सों पर कार्रवाई हो चुकी है जबकि बाकी निर्माण हटाने की प्रक्रिया सामान खाली होने के बाद आगे बढ़ेगी।
    सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का अभियान पिछले कुछ समय से लगातार चलाया जा रहा है। प्रशासन का जोर उन जमीनों को खाली कराने पर है जिन्हें सिंहस्थ के आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित रखा गया है। ऐसे क्षेत्रों में पक्के निर्माण होने से भविष्य में आयोजन संबंधी सुविधाओं और आवागमन की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए नगर निगम की टीमें अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर निर्माणों की जांच कर रही हैं और नियमों के अनुसार कार्रवाई कर रही हैं।
    महासिद्ध आश्रम पर कार्रवाई से दो दिन पहले नगर निगम की टीम ने इसी क्षेत्र में स्थित हरियाणा वाले सत्यगिरि महाराज के आश्रम में किए गए अवैध निर्माण को भी पोकलैंड मशीन की मदद से ध्वस्त किया था। लगातार हो रही कार्रवाई से स्पष्ट है कि प्रशासन सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के अभियान को आगे बढ़ा रहा है। हालांकि हर मामले में संबंधित निर्माण की स्थिति और जारी नोटिस के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
    सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए भूमि और यातायात प्रबंधन महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन को अस्थायी सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त जगह की जरूरत होगी। ऐसे में अतिक्रमण हटाने की मुहिम को आयोजन की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। महासिद्ध आश्रम के मामले में फिलहाल कार्रवाई आंशिक रूप से पूरी हुई है और सामान हटाने के लिए निर्धारित समय बीतने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • उज्जैन के सती माता मंदिर में पेड़ों पर टंगी सैकड़ों तस्वीरें, शत्रुनाश साधना की मान्यता से जुड़ी अनोखी परंपरा

    उज्जैन के सती माता मंदिर में पेड़ों पर टंगी सैकड़ों तस्वीरें, शत्रुनाश साधना की मान्यता से जुड़ी अनोखी परंपरा


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन में धार्मिक आस्था और तंत्र साधना से जुड़ी मान्यताओं के बीच एक ऐसा मंदिर चर्चा में है जहां पेड़ों पर महिला और पुरुषों की तस्वीरें टंगी दिखाई देती हैं। कुछ तस्वीरों पर कीलें ठुकी हैं तो कहीं सैंडल और कपड़ों से बने पुतले भी नजर आते हैं। भैरवगढ़ क्षेत्र में विक्रांत भैरव मंदिर के पास स्थित इस स्थान को सती माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। स्थानीय स्तर पर इसे मेलडी माता मंदिर भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां शत्रुनाश से जुड़े कर्मकांड कराए जाते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर और यहां दिखाई देने वाली इन वस्तुओं को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ गई है।
    सती माता मंदिर उज्जैन के ओखलेश्वर रोड पर काल भैरव मंदिर के नजदीक स्थित है। मंदिर परिसर के आसपास पेड़ों पर तस्वीरें और दूसरी वस्तुएं टंगी दिखाई देती हैं। मौके पर पहुंची दैनिक भास्कर की टीम को आधा दर्जन से अधिक पेड़ों पर महिला और पुरुषों की तस्वीरें मिलीं। कुछ जगह कपड़े और सैंडल लटक रहे थे तो कहीं नींबू-मिर्च और कपड़ों से बनाए गए पुतले नजर आए। कुछ तस्वीरों पर कीलें भी ठुकी हुई थीं। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच इन वस्तुओं को शत्रुनाश से जुड़ी मान्यताओं के साथ देखा जाता है। हालांकि इन कर्मकांडों के पीछे हर व्यक्ति का उद्देश्य एक जैसा है या नहीं इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
    सोशल मीडिया पर भी किसी विरोधी की तस्वीर पेड़ पर टांगने को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आती रहती हैं। ऐसी सामग्री देखने के बाद कुछ लोग इस स्थान के बारे में जानने के लिए पहुंचते हैं। हालांकि तस्वीर टांगने या किसी विशेष कर्मकांड से किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इस तरह की मान्यताओं को धार्मिक विश्वास और लोक परंपरा के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी तस्वीर पर कील ठोकने या कपड़े का पुतला टांगने से किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन पर असर पड़ता है ऐसा प्रमाणित नहीं है।
    तांत्रिक भय्यू महाराज के अनुसार यहां आने वाले कुछ लोग निजी और पारिवारिक विवादों से परेशान रहते हैं। इनमें सास-बहू के झगड़े और विवाहेतर संबंधों से जुड़े विवाद जैसे मामले भी शामिल बताए जाते हैं। उनका दावा है कि कुछ लोग अपने विरोधियों से छुटकारा पाने की इच्छा लेकर यहां पूजन कराते हैं। हालांकि इन दावों की पुष्टि के लिए कोई स्वतंत्र प्रमाण या आंकड़े सामने नहीं आए हैं। इसलिए मंदिर में होने वाले प्रत्येक कर्मकांड को किसी एक उद्देश्य से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।
    भय्यू महाराज का यह भी कहना है कि मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात महाराष्ट्र और राजस्थान से भी लोग यहां पहुंचते हैं। गुजरात में कुछ तांत्रिक कर्मकांडों पर पाबंदियों के बाद वहां से आने वाले लोगों की संख्या बढ़ने का दावा भी किया गया है। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया। उज्जैन का भैरवगढ़ क्षेत्र धार्मिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यहां विक्रांत भैरव और काल भैरव मंदिर जैसे धार्मिक स्थल हैं। इसके आसपास चक्रतीर्थ और ओखलेश्वर जैसे श्मशान घाट भी स्थित हैं। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में भैरव उपासना और श्मशान से जुड़ी मान्यताओं का उल्लेख मिलता है। हालांकि इन स्थलों की निकटता अपने आप में यहां होने वाले सभी कर्मकांडों को तंत्र साधना साबित नहीं करती।
    मंदिर के नाम को लेकर भी स्थानीय स्तर पर अलग-अलग बातें सामने आती हैं। भय्यू महाराज के मुताबिक इसका मूल नाम सती माता मंदिर है और यहां सती माता की चरण पादुकाओं के साथ मेलडी माता की प्रतिमा भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले इसे मुख्य रूप से सती माता मंदिर कहा जाता था लेकिन बाद में मेलडी माता नाम का प्रचलन बढ़ा। मंदिर के नाम में यह बदलाव कब और क्यों हुआ इसकी स्पष्ट पुष्टि नहीं हो सकी है।
    गुजरात की कुछ लोक मान्यताओं में मेलडी माता से जुड़ी एक कथा भी प्रचलित है। इस कथा के अनुसार देवी पार्वती ने अमुहा नाम के राक्षस का वध करने के लिए मेलडी माता का रूप धारण किया था। कुछ परंपराओं में उन्हें मां मसान मेलडी भी कहा जाता है और मसान शब्द को श्मशान से जोड़ा जाता है। ये धार्मिक लोककथाएं और आस्थाएं हैं जिन्हें प्रमाणित ऐतिहासिक घटना नहीं माना जा सकता। उज्जैन का यह मंदिर अपनी अनोखी निशानियों और उनसे जुड़ी मान्यताओं के कारण चर्चा में बना हुआ है लेकिन शत्रुनाश के दावों को प्रमाणित तथ्य के बजाय स्थानीय विश्वास के रूप में समझना जरूरी है।

  • रावण दहन किस शास्त्र में लिखा है, उज्जैन में युवा ब्राह्मण समाज का सवाल, चार समितियों को कानूनी नोटिस

    रावण दहन किस शास्त्र में लिखा है, उज्जैन में युवा ब्राह्मण समाज का सवाल, चार समितियों को कानूनी नोटिस

     
    उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में दशहरे पर होने वाले रावण दहन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने रावण दहन आयोजित करने वाली चार समितियों को वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजकर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। समाज ने आयोजकों से सवाल किया है कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध होने का उल्लेख किस धर्मशास्त्र या पुराण में मिलता है। नोटिस में कहा गया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक प्रमाण नहीं दिया गया तो वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले के सामने आने के बाद शहर में दशहरा उत्सव से पहले धार्मिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।उज्जैन  ।

    जानकारी के मुताबिक 20 अक्टूबर को दशहरा पर्व के अवसर पर उज्जैन में विभिन्न स्थानों पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। इससे पहले अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने इस पर आपत्ति जताते हुए संबंधित आयोजक समितियों को नोटिस जारी कराया है। महाकाल मंदिर के पुजारी और संगठन के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी ने अधिवक्ता अश्विन चौधरी के माध्यम से यह नोटिस भिजवाया है। जिन चार समितियों को नोटिस भेजा गया है उनमें लाला ओम अमरनाथ खत्री दशहरा उत्सव समिति कार्तिक मेला दशहरा उत्सव समिति सिद्धवट दशहरा समिति और शास्त्री नगर दशहरा उत्सव समिति शामिल हैं।

    नोटिस में आयोजकों से कहा गया है कि वे स्पष्ट करें कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध किए जाने का उल्लेख किस धार्मिक ग्रंथ में मौजूद है। समाज ने संबंधित समितियों से इस तिथि पर रावण दहन नहीं करने का अनुरोध भी किया है। नोटिस के अनुसार सात दिन के भीतर शास्त्रीय आधार स्पष्ट नहीं किया गया तो आगे कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी गई है। इसमें संभावित कार्रवाई से जुड़े हर्जे और खर्च की जिम्मेदारी भी आयोजक समितियों पर डालने की बात कही गई है। हालांकि इस मामले में आयोजक समितियों का पक्ष सामने आने के बाद ही उनकी प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी का कहना है कि रावण दहन के नाम पर ब्राह्मण समाज का अपमान नहीं होना चाहिए। उनका आरोप है कि देश के कई हिस्सों में रावण दहन की परंपरा के दौरान ब्राह्मण समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने आयोजक समितियों से सवाल किया कि यदि रावण दहन धार्मिक परंपरा का हिस्सा है तो उसके समर्थन में शास्त्रीय प्रमाण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। महेश पुजारी का कहना है कि रावण के चरित्र और उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं पर चर्चा करते समय किसी समुदाय का अपमान नहीं किया जाना चाहिए।

    महेश पुजारी ने यह भी कहा कि अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज देश की विभिन्न संस्थाओं से रावण दहन बंद करने का अनुरोध कर रहा है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए ब्राह्मणों की शिखा और यज्ञोपवीत के अपमान की घटनाओं पर भी अपनी बात रखी। संगठन की मांग है कि धार्मिक आयोजनों में किसी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचा जाए।

    फिलहाल उज्जैन में दशहरे से पहले रावण दहन का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर आयोजन समितियों की तैयारियां जारी हैं तो दूसरी ओर युवा ब्राह्मण समाज ने शास्त्रीय प्रमाण और जवाबदेही की मांग उठाई है। अब सात दिन की समयसीमा में समितियां क्या जवाब देती हैं और इस विवाद पर प्रशासन या आयोजकों की ओर से क्या रुख सामने आता है इस पर सबकी नजर रहेगी।

  • महाकाल लोक के बाद अब गढ़कालिका लोक की तैयारी, 18.50 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार, नवरात्रि के बाद शुरू हो सकता है निर्माण

    महाकाल लोक के बाद अब गढ़कालिका लोक की तैयारी, 18.50 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार, नवरात्रि के बाद शुरू हो सकता है निर्माण


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में मां गढ़कालिका के भक्तों को जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त भव्य मंदिर परिसर की सौगात मिल सकती है। महाकाल लोक की तर्ज पर अब गढ़कालिका माता मंदिर को गढ़कालिका लोक के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। उज्जैन विकास प्राधिकरण ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 18.50 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। करीब डेढ़ हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होने वाले इस लोक के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। तकनीकी बिड खुलने और निर्माण एजेंसी का चयन होने के बाद परियोजना का काम शुरू होने की उम्मीद है। योजना का उद्देश्य मंदिर परिसर को व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान बेहतर अनुभव मिल सके।
    गढ़कालिका माता मंदिर उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। वर्तमान में मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार मुख्य सड़क पर स्थित है और यह अपेक्षाकृत संकरा है। भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं के आवागमन में परेशानी होने की आशंका रहती है। गढ़कालिका लोक परियोजना के तहत प्रवेश व्यवस्था को नए सिरे से विकसित करने की योजना बनाई गई है। इससे मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित हो सकेगी और भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
    परियोजना की खास बात यह है कि आम श्रद्धालुओं और वीआईपी आगंतुकों के लिए प्रवेश की अलग-अलग व्यवस्था प्रस्तावित है। मौजूदा मुख्य द्वार को वीआईपी प्रवेश के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है। इसके सामने वीआईपी पार्किंग भी विकसित की जाएगी। वहीं आम श्रद्धालुओं के लिए पश्चिम दिशा में ओखलेश्वर रोड की तरफ से करीब नौ मीटर दूर नया प्रवेश मार्ग प्रस्तावित है। यहां जिगजैग कतार व्यवस्था बनाई जाएगी ताकि दर्शन के लिए आने वाले लोगों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। इस व्यवस्था से एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर भी प्रवेश द्वार के आसपास भीड़ का दबाव कम करने में सहायता मिल सकती है।
    गढ़कालिका लोक के विकास के साथ आसपास की सड़कों को बेहतर बनाने की योजना भी महत्वपूर्ण है। मंदिर के सामने वाली सड़क और ओखलेश्वर श्मशान से होते हुए कालभैरव की दिशा में जाने वाली सड़क का चौड़ीकरण कर उन्हें फोरलेन बनाने का काम किया जा रहा है। सड़कें चौड़ी होने से मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से त्योहारों और विशेष धार्मिक अवसरों पर बढ़ने वाले यातायात के दबाव को संभालना भी आसान हो सकता है। हालांकि परियोजना की वास्तविक समयसीमा और सुविधाओं का अंतिम स्वरूप निर्माण एजेंसी के चयन तथा आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
    गढ़कालिका मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इसी मंदिर में मां कालिका की आराधना कर दिव्य ज्ञान प्राप्त किया था। उज्जैन में आयोजित होने वाले कालिदास समारोह की शुरुआत भी परंपरागत रूप से इस मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ होती है। मंदिर का जीर्णोद्धार छठी शताब्दी में राजा हर्षवर्धन द्वारा कराए जाने की मान्यता है जबकि इसका वर्तमान स्वरूप ग्वालियर के महाराजा से जुड़ा बताया जाता है। साधना और तांत्रिक परंपराओं में भी इस स्थान का विशेष महत्व माना जाता है।
    महाकाल लोक के विकास के बाद उज्जैन में धार्मिक पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। गढ़कालिका लोक परियोजना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि योजना के अनुसार निर्माण पूरा होता है तो मंदिर परिसर में प्रवेश व्यवस्था पार्किंग और श्रद्धालुओं की कतारों का प्रबंधन पहले से बेहतर हो सकेगा। इससे न केवल भक्तों को सुविधा मिलने की उम्मीद है बल्कि उज्जैन के धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। फिलहाल सभी की नजर टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और निर्माण कार्य शुरू होने पर है।

  • उज्जैन में मां दुर्गा के स्वागत की तैयारी तेज, मिट्टी की प्रतिमाओं से सजेंगे पंडाल, 1000 स्थानों पर स्थापना को लेकर प्रशासन अलर्ट

    उज्जैन में मां दुर्गा के स्वागत की तैयारी तेज, मिट्टी की प्रतिमाओं से सजेंगे पंडाल, 1000 स्थानों पर स्थापना को लेकर प्रशासन अलर्ट


    उज्जैन । उज्जैन में नवरात्रि पर्व को लेकर उत्साह बढ़ने लगा है और शहर से लेकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में दुर्गा उत्सव की तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। दुर्गा पंडालों को सजाने के साथ ही आयोजक माता की प्रतिमाओं की स्थापना के लिए व्यवस्थाएं जुटा रहे हैं। मूर्ति निर्माण करने वाले कलाकार भी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। इस बार उज्जैन में 4 फीट से लेकर 16 फीट तक की दुर्गा प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। अलग-अलग आकार और स्वरूपों में बनाई गई इन प्रतिमाओं के जरिए श्रद्धालुओं को मां दुर्गा के पारंपरिक और आकर्षक रूपों के दर्शन होंगे।
    मूर्ति कलाकार विजय पाल के अनुसार बंगाल और कोलकाता से आए कारीगर प्रतिमा निर्माण में जुटे हैं। यहां पारंपरिक स्वरूपों के साथ पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाई गई प्रतिमाएं भी तैयार की जा रही हैं। महिषासुर मर्दिनी के रूप में मां दुर्गा की प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। कलाकारों को एक प्रतिमा तैयार करने में करीब चार से पांच दिन का समय लगता है। प्रतिमा की ऊंचाई डिजाइन और बारीक कारीगरी के अनुसार निर्माण में लगने वाला समय अलग-अलग हो सकता है।
    इस बार प्रतिमा निर्माण की लागत बढ़ने का असर कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। कलाकारों के मुताबिक कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण दुर्गा प्रतिमाओं के दाम लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इससे आयोजक समितियों को अपने बजट के अनुसार प्रतिमाओं का चयन करना पड़ रहा है। इसके बावजूद नवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं और आयोजन समितियों में उत्साह बना हुआ है। कई स्थानों पर पंडालों की सजावट और अन्य तैयारियां भी साथ-साथ की जा रही हैं।
    इस बार प्रतिमाओं के निर्माण में पर्यावरण का ध्यान रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। कलाकारों के अनुसार प्रतिमाओं के लिए कोलकाता से मिट्टी मंगाई जाती है। इन प्रतिमाओं को पूरी तरह मिट्टी से तैयार किया जा रहा है और इनमें प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी पीओपी का इस्तेमाल नहीं किया जाता। प्रतिमाओं को रंगने के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। इससे पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। मिट्टी से बनी प्रतिमाएं पारंपरिक शिल्पकला और धार्मिक आस्था से भी जुड़ी हुई हैं।
    उज्जैन जिले में इस बार नवरात्रि के दौरान एक हजार से अधिक स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की तैयारी है। शहर के विभिन्न इलाकों और आसपास के क्षेत्रों में आयोजन समितियां पंडालों की व्यवस्था करने में जुटी हैं। प्रतिमाओं की स्थापना के साथ ही श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं बनाना भी आयोजकों के लिए जरूरी होगा। नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पंडालों तक पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने भी समितियों से सावधानी बरतने की अपील की है।
    पुलिस और प्रशासन ने दुर्गा उत्सव समितियों को पंडालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और निगरानी की व्यवस्था मजबूत रखने के लिए कहा है। इसके साथ ही देर रात तेज आवाज में डीजे नहीं बजाने की अपील भी की गई है। इसका उद्देश्य धार्मिक आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाए रखना और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी से बचाना है। आयोजकों को सुरक्षा और अनुशासन से जुड़े निर्देशों का पालन करने की जरूरत होगी।
    कुल मिलाकर उज्जैन में नवरात्रि के स्वागत की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। एक हजार से अधिक स्थानों पर प्रतिमा स्थापना की तैयारी और 16 फीट तक की भव्य प्रतिमाएं इस बार के उत्सव को खास बना सकती हैं। पारंपरिक शिल्पकला के साथ पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं पर जोर और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की अपील से नवरात्रि आयोजन को व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है।