Tag: Ujjain News

  • रिटायर्ड शिक्षक की एक आवाज पर उमड़ पड़ते हैं 1000 तक कौवे 8 साल से रोज मिल रहा दाना पानी श्राद्ध पक्ष में बढ़ी इनकी अहमियत

    रिटायर्ड शिक्षक की एक आवाज पर उमड़ पड़ते हैं 1000 तक कौवे 8 साल से रोज मिल रहा दाना पानी श्राद्ध पक्ष में बढ़ी इनकी अहमियत


    उज्जैन । उज्जैन में श्राद्ध पक्ष के दौरान जहां श्रद्धालु पितरों के तर्पण और श्राद्ध कर्म के बाद कौवे को भोजन कराने के लिए तलाशते नजर आते हैं वहीं शहर के इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी हिल्स में रोज शाम एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है। यहां रिटायर्ड शिक्षक अशोक कुमार दुबे की आवाज सुनते ही सैकड़ों कौवे एक जगह जमा हो जाते हैं। कई दिनों में इनकी संख्या करीब 1000 तक पहुंच जाती है। पिछले आठ वर्षों से चल रही दाना पानी की यह सेवा अब कौवों के लिए नियमित भोजन का भरोसेमंद ठिकाना बन चुकी है।

    नवोदय विद्यालय से रिटायर्ड लेक्चरर अशोक कुमार दुबे ने वर्ष 2018 में पक्षियों को दाना खिलाने की शुरुआत की थी। उस समय उनके घर के आसपास केवल पांच से सात चिड़ियां भोजन के लिए आती थीं। धीरे धीरे इस सिलसिले में कौवे भी जुड़ते गए। शुरुआत में उनकी संख्या बेहद कम थी लेकिन समय के साथ यह संख्या बढ़ती चली गई। 10 से 20 और फिर 50 कौवों से शुरू हुआ यह सिलसिला अब सैकड़ों तक पहुंच चुका है। मौसम के अनुसार संख्या में उतार चढ़ाव जरूर होता है लेकिन जुलाई अगस्त और सितंबर के दौरान कौवों की मौजूदगी काफी बढ़ जाती है।

    अशोक दुबे के घर शाम करीब छह बजे जैसे ही भोजन रखने का समय होता है आसपास उड़ते कौवे उनकी आवाज पहचानकर पहुंचने लगते हैं। देखते ही देखते घर के आसपास कौवों का बड़ा झुंड दिखाई देने लगता है। दाना और पानी लेने के बाद ये पक्षी अंधेरा होने से पहले अपने ठिकानों की ओर लौट जाते हैं। फिलहाल रोज करीब 500 से 700 कौवे यहां पहुंच रहे हैं और कुछ दिनों में यह संख्या 1000 के आसपास भी पहुंच जाती है।

    इतने बड़े झुंड के भोजन का इंतजाम भी कम नहीं है। रोज करीब 10 किलो चावल और दो किलो परमल कौवों के लिए रखा जाता है। इस सेवा पर प्रतिदिन करीब 800 से 1000 रुपये तक खर्च होने की बात बताई गई है। सालभर में यह खर्च करीब दो लाख रुपये तक पहुंच जाता है। हालांकि अब कॉलोनी के कुछ लोग भी इस पहल से जुड़ चुके हैं। शंकर राव जांगड़े और जयसिंह सहित अन्य लोग कौवों के लिए पानी की व्यवस्था में सहयोग करते हैं। इस तरह दाना और पानी की यह सेवा केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी न रहकर सामूहिक प्रयास का रूप ले चुकी है।

    श्राद्ध पक्ष में कौवों के लिए भोजन का स्वरूप भी बदल जाता है। इन दिनों उन्हें खीर पूड़ी भजिए और मीठी नुक्ती खिलाई जाती है। अशोक दुबे के अनुसार खीर और पूड़ी देखते ही कौवे तेजी से पहुंचते हैं और भोजन कुछ ही समय में खत्म हो जाता है। ज्यादा से ज्यादा कौवों तक भोजन पहुंच सके इसके लिए पूड़ी को छोटे टुकड़ों में बांटकर खिलाया जाता है।

    हिंदू परंपराओं में श्राद्ध के दौरान कौवे को भोजन कराने की विशेष मान्यता बताई जाती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार कौवे को दिया गया भोजन पितरों तक पहुंचने से जोड़ा जाता है। पंचबलि की परंपरा में भी कौवे को भोजन अर्पित करने का उल्लेख मिलता है। उज्जैन जैसे धार्मिक शहर में सिद्धवट और रामघाट समेत विभिन्न स्थानों पर श्राद्ध कर्म के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह परंपरा खास महत्व रखती है।

    अशोक दुबे के लिए हालांकि यह सेवा केवल धार्मिक मान्यता तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक लगातार दाना पानी मिलने के कारण कौवों को इस जगह पर भरोसा हो गया है। आठ साल पहले शुरू हुई छोटी सी पहल आज सैकड़ों पक्षियों के लिए रोज के भोजन का सहारा बन गई है। त्रिवेणी हिल्स में शाम होते ही कौवों का यह जमावड़ा बताता है कि नियमित दाना पानी और सुरक्षित माहौल मिलने पर पक्षी भी किसी जगह को अपने भरोसेमंद ठिकाने के रूप में अपना सकते हैं।

  • उज्जैन में LPG सिलेंडर ब्लास्ट से मचा हड़कंप, सिगरेट जलाने की कोशिश बनी हादसे की वजह, 24 साल का युवक 70 फीसदी झुलसा

    उज्जैन में LPG सिलेंडर ब्लास्ट से मचा हड़कंप, सिगरेट जलाने की कोशिश बनी हादसे की वजह, 24 साल का युवक 70 फीसदी झुलसा



    उज्जैन । उज्जैन के कानिपुरा स्थित तिरुपति धाम कॉलोनी में शनिवार सुबह LPG सिलेंडर ब्लास्ट की घटना से इलाके में हड़कंप मच गया। किराए के कमरे में अचानक हुए जोरदार धमाके में 24 वर्षीय युवक संदीप बुरी तरह झुलस गया। डॉक्टरों के अनुसार वह करीब 70 प्रतिशत तक झुलसा है और उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया है। धमाका इतना तेज था कि कमरे की एक तरफ की दीवार क्षतिग्रस्त होकर नीचे गिर गई जबकि खिड़की और दरवाजे भी टूट गए। हादसे के बाद आसपास रहने वाले लोगों में भी अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    जानकारी के मुताबिक कमरे में रातभर LPG गैस लीक होने की आशंका है। माना जा रहा है कि लगातार गैस रिसने के कारण कमरे के अंदर गैस जमा होती गई। सुबह संदीप ने सिगरेट पीने के लिए माचिस की तीली जलाई तो कमरे में पहले से जमा गैस ने आग पकड़ ली। इसके बाद अचानक जोरदार धमाका हुआ और संदीप आग की चपेट में आ गया। धमाके की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कमरे की दीवार तक गिर गई और घर के कई हिस्सों को नुकसान पहुंचा।

    हादसे के समय संदीप के साथ कमरे में उसका साथी देवीलाल भी मौजूद था। बताया गया है कि धमाका होने के समय देवीलाल बाथरूम में था। इसी वजह से वह सीधे आग और धमाके की चपेट में आने से बच गया। तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और घटनास्थल की ओर पहुंचे। स्थानीय लोगों ने घायल संदीप को कमरे से बाहर निकालने में मदद की और उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया।

    संदीप मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला बताया गया है। वह करीब 20 दिन पहले ही काम के सिलसिले में उज्जैन आया था और तिरुपति धाम कॉलोनी में किराए का कमरा लेकर रह रहा था। वह शहर की शिप्रा गैस एजेंसी में सिलेंडर डिलीवरी और फिटिंग का काम करता था। LPG सिलेंडर से जुड़े काम से जुड़े होने के बावजूद कमरे में गैस रिसाव की स्थिति कैसे बनी और रिसाव का समय पर पता क्यों नहीं चल सका इसे लेकर भी जांच की जा रही है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने कमरे में हुए नुकसान और ब्लास्ट से जुड़े हालात की जानकारी जुटाई है। फिलहाल हादसे की वास्तविक वजह और गैस रिसाव के कारणों को लेकर जांच जारी है। गंभीर रूप से घायल संदीप को जिला अस्पताल से इंदौर रेफर किया गया है जहां उसका उपचार किया जा रहा है।

    यह हादसा घरेलू LPG गैस के इस्तेमाल के दौरान छोटी सी चिंगारी के संभावित खतरे की ओर भी ध्यान दिलाता है। यदि कमरे में गैस की गंध महसूस हो तो किसी भी हालत में माचिस या लाइटर नहीं जलाना चाहिए और बिजली के स्विच को भी चालू या बंद करने से बचना चाहिए। दरवाजे और खिड़कियां खोलकर सुरक्षित तरीके से जगह को हवादार करना तथा जरूरत पड़ने पर गैस आपूर्ति बंद कर संबंधित एजेंसी या आपातकालीन सेवा से संपर्क करना जरूरी है।

  • भोर होते ही गूंजा हर-हर महादेव, भस्म आरती में दिव्य राजा रूप में सजे महाकाल, अद्भुत दर्शन से भक्त हुए निहाल

    भोर होते ही गूंजा हर-हर महादेव, भस्म आरती में दिव्य राजा रूप में सजे महाकाल, अद्भुत दर्शन से भक्त हुए निहाल


    उज्जैन। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब चार बजे मंदिर के कपाट खोले गए। जैसे ही मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन शुरू हुए श्रद्धालुओं के बीच भक्ति का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए और जयकारों के साथ बाबा का आशीर्वाद लिया।

    भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का हरि ओम जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध दही घी शक्कर शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का पूजन किया गया। अभिषेक और पूजन की धार्मिक परंपराएं पूरी होने के बाद बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया।

    इस अवसर पर भगवान महाकाल को रजत चंद्र त्रिशूल और त्रिपुंड धारण कराया गया। इसके बाद ड्रायफ्रूट से बाबा का राजा स्वरूप शृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर शेषनाग का रजत मुकुट सुशोभित किया गया। रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला से बाबा का दिव्य स्वरूप सजाया गया। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों की माला अर्पित की गई। शृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण नजर आया। नंदी हॉल में भगवान नंदी का स्नान ध्यान और पूजन किया गया। इसके बाद झांझ मंजीरे और डमरू की मंगल ध्वनि के बीच भस्म आरती की गई। आरती के दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालु बाबा महाकाल की भक्ति में लीन नजर आए। भक्तों ने भगवान के दर्शन किए और परिवार की सुख समृद्धि की कामना की।

    भगवान महाकाल की भस्म आरती को मंदिर की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में माना जाता है। इस दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

    मंगलवार की भस्म आरती में भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला। राजा स्वरूप में सजे भगवान महाकाल के दर्शन ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। रजत आभूषणों से सजा स्वरूप और पुष्पों से किया गया शृंगार मंदिर की धार्मिक आभा को और खास बना रहा था।

    महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती प्रतिदिन तड़के संपन्न होने वाली प्रमुख पूजा परंपरा है। इसमें अभिषेक पूजन शृंगार भोग और आरती की अलग-अलग धार्मिक विधियां पूरी की जाती हैं। मंगलवार को भी इन सभी परंपराओं के बीच बाबा महाकाल का विशेष राजा स्वरूप भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहा।

  • भस्म अर्पण के बाद निराकार से साकार रूप में दिखे महाकाल जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर

    भस्म अर्पण के बाद निराकार से साकार रूप में दिखे महाकाल जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर


    उज्जैन । उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई। पंडे और पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और फिर पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।

    पंचामृत अभिषेक के दौरान दूध दही घी शक्कर और फलों के रस का उपयोग किया गया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर भगवान महाकाल को हरिओम का जल अर्पित किया गया। भस्म आरती की विशेष परंपरा के तहत होने वाले पूजन के बीच गर्भगृह में मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियां जारी रहीं।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। इस दौरान बाबा महाकाल को रजत ओम और बिल्वपत्र से सजा मुकुट धारण कराया गया। इसके साथ ही रुद्राक्ष की माला और शेषनाग का रजत मुकुट भी अर्पित किया गया। भगवान के मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल सजाया गया जबकि डमरू से भी विशेष शृंगार किया गया।

    बाबा महाकाल को रजत की मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों की मालाएं भी अर्पित की गईं। विशेष शृंगार के बाद भगवान महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। भस्म आरती में शामिल होने पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।

    पूजन के दौरान भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का भी विधि विधान से पूजन किया गया। भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई और नैवेद्य चढ़ाया गया। सभी धार्मिक प्रक्रियाओं के बाद भस्म आरती की मुख्य परंपरा संपन्न हुई।

    महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के विशेष दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी बनी रही। जैसे ही पूजन और आरती की प्रक्रिया आगे बढ़ी वैसे ही पूरा परिसर भगवान महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।

    महाकाल मंदिर में होने वाली भस्म आरती प्रतिदिन की धार्मिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरती के दौरान होने वाले अभिषेक पूजन भस्म अर्पण और विशेष शृंगार के बाद भगवान महाकाल के अलग अलग स्वरूप में दर्शन होते हैं। शनिवार की भस्म आरती में भी बाबा महाकाल का रजत ओम बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष से किया गया शृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा।

  • बेटी के सामने मां के बाल खींचे और पीटा VIDEO से मचा हड़कंप महाकाल मंदिर के गार्ड्स पर गंभीर आरोप

    बेटी के सामने मां के बाल खींचे और पीटा VIDEO से मचा हड़कंप महाकाल मंदिर के गार्ड्स पर गंभीर आरोप


    उज्जैन । उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर से श्रद्धालु महिला के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। दिल्ली से आई महिला श्रद्धालु प्रेरणा गर्ग ने आरोप लगाया है कि मंदिर परिसर में सुरक्षाकर्मियों ने उनकी 13 साल की बेटी के सामने उनके साथ मारपीट की। महिला का कहना है कि विवाद के दौरान उनके बाल खींचे गए और मोबाइल से वीडियो बनाने की कोशिश करने पर फोन भी छीन लिया गया। महिला ने घटना का वीडियो जारी कर पूरी जानकारी साझा की है। मामले में पुलिस ने लिखित आवेदन मिलने की पुष्टि करते हुए जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।

    महिला के मुताबिक घटना 16 सितंबर की है। वह अपनी बेटी के साथ पंडित सूर्य नारायण व्यास धर्मशाला पहुंची थीं। यहां उन्होंने कमरे की उपलब्धता के बारे में कर्मचारियों से जानकारी मांगी। उनका कहना है कि कर्मचारियों ने कमरा खाली नहीं होने की बात कही। इसके बाद उन्होंने यह जानना चाहा कि यदि कोई कमरा चेक आउट होने के बाद खाली होता है या बुकिंग रद्द होती है तो क्या उन्हें कमरा मिल सकता है। महिला के अनुसार उन्हें इस बारे में भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

    इसके बाद प्रेरणा धर्मशाला परिसर में बैठकर ऑनलाइन दूसरे होटल की तलाश करने लगीं। उनका आरोप है कि इसी दौरान वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बाहर जाने के लिए कहा। जब उन्होंने वहां बैठने से रोकने की वजह पूछी तो कथित तौर पर उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। महिला का कहना है कि उन्होंने घटना को मोबाइल में रिकॉर्ड करने की कोशिश की जिसके बाद विवाद और बढ़ गया।

    प्रेरणा के अनुसार इसी दौरान एक गार्ड ने उन्हें धक्का दिया और उनका मोबाइल फोन छीन लिया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उनके बाल खींचे गए और उनके साथ हाथापाई की गई। घटना उनकी बेटी के सामने हुई जिससे बच्ची भी घबरा गई। महिला ने बेटी के साथ भी बदसलूकी किए जाने का आरोप लगाया है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    महिला ने बताया कि उन्हें ट्रेन पकड़नी थी इसलिए वह मंदिर समिति के सामने तत्काल लिखित शिकायत नहीं कर सकीं। बाद में उन्होंने महाकाल थाने में मारपीट और अभद्रता को लेकर लिखित आवेदन देने की बात कही। महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल के अनुसार महिला श्रद्धालु की ओर से आवेदन मिला है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं महाकाल मंदिर समिति के सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है लेकिन समिति को अभी तक प्रत्यक्ष शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि सामने आए वीडियो और अन्य तथ्यों के आधार पर मामले की जांच की जाएगी।

    महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच विवाद का यह पहला मामला नहीं है। जून 2026 में गणेश मंडपम में लाइन से जुड़े विवाद के दौरान श्रद्धालुओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच हाथापाई हुई थी। अगस्त में महाकाल लोक में महिला श्रद्धालुओं और महिला सुरक्षाकर्मी के बीच विवाद भी सामने आया था। उस घटना का वीडियो सामने आने के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई थी।

    लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बीच मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या भी बड़ी चुनौती है। हाल ही में श्रावण और भादौ के 40 दिनों में महाकाल मंदिर में 1.88 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई थी। ऐसे में दर्शन व्यवस्था के साथ सुरक्षा कर्मचारियों और श्रद्धालुओं के बीच व्यवहार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • जेन-जी से मोहन भागवत का संवाद- अहंकार देता है सब कुछ अपने नियंत्रण में होने का भ्रम, धर्म को समझने के लिए सोच बदलना जरूरी

    जेन-जी से मोहन भागवत का संवाद- अहंकार देता है सब कुछ अपने नियंत्रण में होने का भ्रम, धर्म को समझने के लिए सोच बदलना जरूरी


    नई दिल्ली। उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने युवाओं से धर्म संस्कृति और जीवन मूल्यों को लेकर संवाद किया। तीन दिवसीय युवा धर्म संसद के दूसरे दिन भागवत ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म को केवल बुढ़ापे से जोड़कर देखना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि गीता और रामायण को अक्सर लोग रिटायरमेंट के बाद पढ़ने वाली किताबों के तौर पर देखते हैं लेकिन धर्म व्यक्ति के जीवन की शुरुआत से अंत तक बना रहता है। उज्जैन में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए।

    मोहन भागवत ने अपने संबोधन में अहंकार को लेकर भी युवाओं से बात की। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अहंकार में यह मानकर काम करता है कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है और हर चीज उसकी इच्छा के अनुसार होनी चाहिए तो वह एक तरह के भ्रम में पड़ जाता है। उन्हें लगता है कि परिस्थितियां भी उनकी इच्छा के मुताबिक ही चलेंगी लेकिन ऐसा नहीं होता। भागवत ने प्रकृति के नियमों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ चीजें अपने निर्धारित नियमों के अनुसार चलती हैं। व्यक्ति उनके बारे में विश्वास करे या न करे लेकिन उनका होना और अपना काम करना जारी रहता है।

    उन्होंने युवाओं से कहा कि धर्म को समझने के लिए पहले से मन में बैठी धारणाओं पर भी विचार करना जरूरी है। भागवत ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य युवाओं के दिमाग को किसी खास विचार से भरना नहीं है। उन्होंने युवाओं से अपने स्तर पर सोचने और चर्चा करने की बात कही। उनके अनुसार धर्म को समझने की प्रक्रिया इतनी व्यापक है कि व्यक्ति पूरा जीवन इसके अर्थ को समझने में लगा सकता है।

    भागवत ने धर्म को केवल पूजा या किसी एक धार्मिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि धर्म का संबंध व्यक्ति के आचरण और कर्तव्य से भी है। जिस तरह पानी का स्वभाव बहना है और आग का स्वभाव जलना है उसी तरह व्यक्ति और समाज के लिए भी उनके स्वभाव और जिम्मेदारी के अनुरूप कर्तव्य निर्धारित होते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म का एक अर्थ कर्तव्य भी है। पुत्र का अपना कर्तव्य है तो राजा का अपना कर्तव्य होता है।

    उन्होंने महाभारत और भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि महाभारत के माध्यम से धर्म को समझने के कई प्रसंग सामने आते हैं। उनके अनुसार युधिष्ठिर ने अपने जीवन में धर्म को समझने और उसका पालन करने का प्रयास किया। भागवत ने युवाओं से कहा कि सुख और इच्छाओं की पूर्ति के लिए भी धर्म के रास्ते को छोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने डर लालच या किसी अन्य दबाव में धर्म से विचलित नहीं होने की बात कही।

    युवा धर्म संसद का आयोजन उज्जैन में 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार इसमें 24 राज्यों से 1500 से अधिक युवा शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम में धर्म संस्कृति शिक्षा तकनीक परिवार मानवीय मूल्य और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर संवाद हो रहा है। 19 सितंबर को होने वाले समापन कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

  • महाकाल के दरबार में दिखी अद्भुत भक्ति: भस्म आरती में हुआ भव्य श्रृंगार रजत मुकुट त्रिशूल और आभूषणों से सजे बाबा

    महाकाल के दरबार में दिखी अद्भुत भक्ति: भस्म आरती में हुआ भव्य श्रृंगार रजत मुकुट त्रिशूल और आभूषणों से सजे बाबा


    उज्जैन । उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के भस्म आरती के दौरान भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। अलसुबह मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही बाबा महाकाल की विशेष पूजा और श्रृंगार की प्रक्रिया शुरू हुई। भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और सुख समृद्धि की कामना के साथ उनका आशीर्वाद लिया। पूरे मंदिर परिसर में जय महाकाल के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

    मंदिर के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले सभा मंडप में वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन किया गया। इसके बाद घंटी बजाकर भगवान से पूजा की आज्ञा ली गई। सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए और फिर गर्भगृह के कपाट खोले गए। गर्भगृह में प्रवेश के बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल का पुराना श्रृंगार उतारा। इसके बाद विधि विधान के साथ पंचामृत पूजन किया गया। पूजा के बाद कर्पूर आरती की गई।

    भस्म आरती की परंपरा में भगवान महाकाल के पूजन के साथ नंदी जी की आराधना का भी विशेष महत्व माना जाता है। नंदी हाल में नंदी जी का स्नान कराया गया। इसके बाद ध्यान और पूजन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का जल से अभिषेक हुआ। अभिषेक के दौरान दूध दही घी शक्कर शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का पूजन किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तरह के पूजन से भगवान महाकाल के प्रति भक्तों की श्रद्धा और समर्पण प्रकट होता है।

    पंचामृत पूजन के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भगवान को रजत चंद्र त्रिशूल मुकुट और विभिन्न आभूषण अर्पित किए गए। बाबा महाकाल ने शेषनाग का रजत मुकुट धारण किया। इसके साथ ही रजत की मुंडमाला रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से बनी माला से उनका श्रृंगार किया गया। भांग चंदन ड्रायफ्रूट और भस्म भी अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

    भस्म आरती के दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। उज्जैन में होने वाली भस्म आरती बाबा महाकाल की विशेष आराधना के रूप में जानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के चलते भस्म आरती के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

    शुक्रवार की भस्म आरती में बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में किया गया श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। रजत मुकुट त्रिशूल मुंडमाला और पुष्पमाला से सजे बाबा महाकाल की छवि ने भक्तों को भावविभोर कर दिया। आरती के दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।

  • बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन से गूंजा मंदिर परिसर भस्म आरती में रजत आभूषणों से सजे भगवान

    बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन से गूंजा मंदिर परिसर भस्म आरती में रजत आभूषणों से सजे भगवान


    उज्जैन । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती विधि विधान के साथ संपन्न हुई। भोर होते ही मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों और मंत्रोच्चार से गूंज उठा। भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आरती के दौरान भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया जिसमें उन्हें राजा स्वरूप प्रदान किया गया।

    भस्म आरती की परंपरा के अनुसार मंदिर के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम किया गया। इसके बाद स्वस्ति वाचन हुआ और अनुमति लेकर चांदी का द्वार खोला गया। गर्भगृह के पट खुलने के बाद पुजारियों ने बाबा महाकाल का पूर्व श्रृंगार उतारा। इसके बाद भगवान का पंचामृत पूजन किया गया। पंचामृत पूजन के दौरान दूध दही घी शक्कर शहद और फलों के रस से भगवान का अभिषेक किया गया। धार्मिक विधियों के बाद कर्पूर आरती भी संपन्न हुई।

    जलाभिषेक और पंचामृत पूजन के बाद बाबा महाकाल को ड्रायफ्रूट फल और मिठाई का भोग लगाया गया। इसके बाद भस्म अर्पित करने की विशेष परंपरा निभाई गई। भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल का स्वरूप और भी आकर्षक हो गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी परंपरा के तहत भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया।

    भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को भांग चंदन और सिंदूर से सजाया गया। इसके साथ ही विभिन्न आभूषण धारण कराए गए। भगवान के मस्तक पर शेषनाग का रजत मुकुट सजाया गया जबकि रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला ने उनके स्वरूप की दिव्यता बढ़ा दी। सुगंधित फूलों से बनी माला भी भगवान को अर्पित की गई। राजा स्वरूप में बाबा महाकाल के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए।

    मंदिर के नंदी हॉल में भी विशेष पूजा अर्चना की गई। नंदी जी का स्नान कराया गया और इसके बाद ध्यान तथा पूजन की प्रक्रिया पूरी की गई। भस्म आरती के दौरान मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुसार अलग अलग पूजन विधियां संपन्न होती रहीं।

    इस विशेष आरती में महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। उज्जैन के महाकाल मंदिर में भस्म आरती को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। देश के अलग अलग हिस्सों से श्रद्धालु इस आरती में शामिल होने और बाबा महाकाल के भस्म स्वरूप के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।

    बुधवार को भी आरती के दौरान मंदिर में भक्तिमय माहौल बना रहा। भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल के राजा स्वरूप के दर्शन ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। रजत मुकुट रजत मुंडमाल रुद्राक्ष माला और फूलों से सजे बाबा महाकाल के दर्शन भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव रहे।

  • मंदिर का हिस्सा टूटा लेकिन टस से मस नहीं हुए खड़े हनुमान जी! श्रद्धालुओं ने माना चमत्कार प्रशासन ने अब कहा प्रतिमा हटाने की कोई कोशिश नहीं हुई

    मंदिर का हिस्सा टूटा लेकिन टस से मस नहीं हुए खड़े हनुमान जी! श्रद्धालुओं ने माना चमत्कार प्रशासन ने अब कहा प्रतिमा हटाने की कोई कोशिश नहीं हुई


    उज्जैन । उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण को लेकर खड़े हनुमान मंदिर का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। कंठाल चौराहे से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग तक सड़क को चौड़ा करने का काम चल रहा है। इसी दौरान करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर का भवन सड़क की जद में आया जिसके बाद मंदिर की चाहरदीवारी और भवन के कुछ हिस्से को हटाया गया। इसके बाद मंदिर में विराजमान खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की चर्चा सामने आई। दावा किया गया कि प्रतिमा को हटाने के लिए कई प्रयास किए गए लेकिन बजरंगबली की प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद श्रद्धालुओं के बीच इसे हनुमान जी का दैवीय चमत्कार बताया जाने लगा।

    मामला तेजी से बढ़ा तो मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। संत समाज भी इस मुद्दे पर सामने आया और प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की गई। संतों का कहना था कि यदि प्रतिमा को हटाने की कोशिश के बाद भी वह अपनी जगह पर बनी हुई है तो इसे आस्था से जुड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। मंदिर में बटुकों की मंडली ने हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी किया। श्रद्धालुओं के बीच मंदिर को लेकर उत्सुकता बढ़ती गई और दर्शन करने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ।

    इस बीच कांग्रेस भी इस मामले को लेकर मैदान में उतर आई। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भगवा ध्वज लेकर मंदिर पहुंचकर प्रतिमा को हटाए जाने की कथित योजना का विरोध किया। वहां रामधुन गाई गई और हनुमान चालीसा का पाठ कर पूजा अर्चना की गई। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग की।

    अब इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से सामने आया बयान चर्चा का नया विषय बन गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने का अभी तक कोई प्रयास नहीं किया गया है। यानी जिस प्रतिमा को हटाने की कोशिश और उसके अपनी जगह से नहीं हिलने की चर्चा पिछले दिनों से चल रही थी उस पर प्रशासन ने अलग तस्वीर पेश की है। इस बयान के बाद पूरे मामले में प्रशासन के रुख को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    मंदिर की प्रतिमा को फिलहाल टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर लंबे समय से आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर से लोगों का भावनात्मक जुड़ाव भी काफी गहरा है। चाहरदीवारी का हिस्सा हटने के बाद भी श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है।

    मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू प्रतिमा की प्राचीनता से जुड़ा है। बताया गया है कि पुरातत्व विभाग प्रतिमा की उम्र और ऐतिहासिक महत्व को लेकर जांच कर रहा है। शुरुआती स्तर पर इसके करीब 1000 साल पुराने होने की संभावना जताई गई है हालांकि इसकी वास्तविक उम्र को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़े स्तर पर विकास कार्य चल रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ धार्मिक भावनाओं का सम्मान बनाए रखने की चुनौती भी है। फिलहाल संत समाज संवाद से समाधान चाहता है जबकि श्रद्धालु प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर प्रशासन आगे क्या फैसला करता है।

  • बछ बारस पर उज्जैन में दिखा कृष्ण का बाल रूप: 10 फीट ऊपर बंधी माखन मटकी फूटी, भक्तों में बंटा प्रसाद

    बछ बारस पर उज्जैन में दिखा कृष्ण का बाल रूप: 10 फीट ऊपर बंधी माखन मटकी फूटी, भक्तों में बंटा प्रसाद


    उज्जैन । उज्जैन शहर के मध्य स्थित सिंधिया ट्रस्ट के द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में बछ बारस के अवसर पर मंगलवार को पारंपरिक मटकी फोड़ आयोजन किया गया। जन्माष्टमी के चार दिन बाद होने वाले इस आयोजन में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। मंदिर के मुख्य द्वार पर करीब 10 फीट की ऊंचाई पर माखन से भरी मटकी बांधी गई थी। दोपहर करीब 12 बजे कृष्ण के रूप में सजे एक छोटे बालक को मंदिर से बाहर लाया गया। बाल कृष्ण ने लाठी की मदद से ऊंचाई पर बंधी मटकी फोड़ी। मटकी टूटते ही पूरा मंदिर परिसर नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की के जयकारों से गूंज उठा।

    मटकी फूटने के बाद उसमें रखा माखन श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में बांटा गया। भक्तों को माखन के साथ मिश्री और धानी का प्रसाद भी वितरित किया गया। आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। इस दौरान धार्मिक उत्साह और भक्ति का माहौल नजर आया। मटकी फोड़ने की परंपरा के बाद भगवान द्वारकाधीश की चांदी की पादुकाओं का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद दोपहर करीब एक बजे मंदिर में दिन के समय शयन आरती संपन्न हुई।

    मंदिर से जुड़े श्रद्धालु संजय मालिया के अनुसार यह आयोजन वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। जन्माष्टमी के बाद चार दिनों तक भगवान की रात में शयन आरती नहीं की जाती। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में भगवान के सोने और जागने का कोई निश्चित समय नहीं माना जाता। बछ बारस के दिन मटकी फोड़ने के बाद भगवान के शयन की परंपरा निभाई जाती है। इसी कारण साल में एक बार दिन के समय शयन आरती की जाती है।

    इस आयोजन की एक खास बात यह भी रही कि बच्चों को राधा और कृष्ण के रूप में सजाया गया। मंदिर के व्यवस्थापक और पुजारी परिवार के सदस्य मुख्य द्वार पर पहुंचे और परंपरागत तरीके से मटकी फोड़ कार्यक्रम संपन्न कराया। बाल कृष्ण के रूप में सजे बच्चे को देखकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दिया। मटकी फूटने के बाद भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया और भगवान द्वारकाधीश के दर्शन किए।

    गोपाल मंदिर में बछ बारस का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ उज्जैन की समृद्ध कृष्ण भक्ति परंपरा को भी दर्शाता है। जन्माष्टमी के उत्सव के बाद होने वाला यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। बाल कृष्ण के हाथों माखन की मटकी फूटने के साथ मंदिर परिसर में उमड़ा उल्लास पूरे आयोजन का सबसे आकर्षक दृश्य रहा।