Tag: Ujjain News

  • महाकाल में अब हर आरती सशुल्क! 250 रुपए पास पर मचा बवाल, भक्त बोले- आस्था पर क्यों लगा ‘टिकट’?

    महाकाल में अब हर आरती सशुल्क! 250 रुपए पास पर मचा बवाल, भक्त बोले- आस्था पर क्यों लगा ‘टिकट’?


    उज्जैन  उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में संध्या और शयन आरती के लिए 250 रुपए शुल्क लागू किए जाने के फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब श्रद्धालु इन आरतियों में शामिल तभी हो सकेंगे, जब उनके पास निर्धारित पास होगा। मंदिर समिति ने यह व्यवस्था भस्म आरती की तर्ज पर शुरू की है। समिति का अनुमान है कि इससे प्रतिदिन लगभग 6 लाख रुपए की अतिरिक्त आय होगी, यानी हर महीने करीब 1.80 करोड़ और सालाना लगभग 22 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।

    मंदिर प्रशासन का तर्क है कि इस कदम से भीड़ नियंत्रण में मदद मिलेगी और व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी। आरती की बुकिंग पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है, जिसे पारदर्शिता की दिशा में कदम बताया जा रहा है। हालांकि जिन श्रद्धालुओं को ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी नहीं है या तकनीकी दिक्कतें आती हैं, उनके लिए केवल एक हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है।

    दूसरी ओर, कई श्रद्धालुओं ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि भस्म आरती पहले से सशुल्क है, लेकिन संध्या और शयन आरती में भी शुल्क लागू करना आस्था पर आर्थिक बोझ डालना है। कुछ भक्तों का आरोप है कि 250 रुपए देने वालों को बेहतर स्थान मिलता है, जबकि अन्य श्रद्धालुओं को सीमित या चलित दर्शन तक ही सीमित कर दिया जाता है। इसे वे “आस्था में भेदभाव” बता रहे हैं।

    महाकाल से जुड़े भक्त मंडलों का कहना है कि वर्षों से नियमित रूप से आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को अचानक शुल्क व्यवस्था के कारण असुविधा हो रही है। उनका तर्क है कि मंदिर में सभी भक्त समान हैं और आर्थिक आधार पर भेद नहीं होना चाहिए।

    मंदिर के कुछ पुजारियों ने भी कहा है कि शुल्क लागू करने से पहले उनसे औपचारिक परामर्श नहीं लिया गया। उनका सुझाव है कि यदि शुल्क व्यवस्था लागू की गई है, तो कम से कम 25 प्रतिशत स्थान ऐसे श्रद्धालुओं के लिए ऑफलाइन आरक्षित किए जाएं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर पाते।

    राजनीतिक स्तर पर भी इस फैसले पर मतभेद सामने आए हैं। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि जब मंदिर की आय दान और अन्य स्रोतों से पहले ही पर्याप्त है, तो अतिरिक्त शुल्क की आवश्यकता क्यों पड़ी। वहीं महापौर ने कहा कि वे मंदिर समिति के पदेन सदस्य हैं, लेकिन इस निर्णय पर उनसे औपचारिक सहमति या चर्चा नहीं की गई।

    फिलहाल मंदिर प्रशासन अपने निर्णय पर कायम है और इसे व्यवस्था सुधार की दिशा में कदम बता रहा है। दूसरी ओर, श्रद्धालुओं और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी के चलते यह मुद्दा लगातार तूल पकड़ रहा है। अब देखना होगा कि विरोध के बाद मंदिर समिति इस व्यवस्था में कोई बदलाव करती है या नहीं।

  • मनोज बाजपेयी सहित निर्माता निर्देशक पर कार्रवाई की मांग फिल्म पर तत्काल रोक लगाने का दबाव

    मनोज बाजपेयी सहित निर्माता निर्देशक पर कार्रवाई की मांग फिल्म पर तत्काल रोक लगाने का दबाव


    उज्जैन : ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म घूसखोर पंडत का टीजर सामने आते ही विवाद गहराता जा रहा है। फिल्म के नाम और कुछ संवादों को लेकर ब्राह्मण समाज में गहरी नाराजगी है। शनिवार को अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उज्जैन के माधव नगर थाने पहुंचे और फिल्म के निर्माता निर्देशक एवं अभिनेता मनोज बाजपेयी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।

    ब्राह्मण समाज का आरोप है कि फिल्म के टाइटल घूसखोर पंडत और इसमें प्रयुक्त संवाद ब्राह्मण लंगोट का ढीला होता है समाज की छवि को अपमानित करने वाले हैं। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र चतुर्वेदी ने कहा कि पंडितों को घूसखोर बताना पूरे समाज का अपमान है जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    उन्होंने कहा कि फिल्म के संवाद जानबूझकर ब्राह्मण समाज को बदनाम करने के उद्देश्य से डाले गए हैं। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं बल्कि एक पूरे वर्ग को नीचा दिखाने की कोशिश है। चतुर्वेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में इस फिल्म को लेकर एफआईआर दर्ज हो चुकी है तो उज्जैन में कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।

    प्रदर्शन के दौरान अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। युवा ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष महेश शर्मा ने कहा कि भले ही फिल्म निर्माताओं ने कहीं माफी मांगी हो लेकिन समाज उन्हें माफ करने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज की मान प्रतिष्ठा से खिलवाड़ करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। ऐसी फिल्मों के जरिए समाज को बदनाम करने की साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि फिल्म के टाइटल में तुरंत बदलाव किया जाए। फिल्म से विवादित संवाद हटाए जाएं और यदि अन्य आपत्तिजनक दृश्य या बयान हैं तो उन्हें भी हटाया जाए। साथ ही फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की गई।जानकारी के अनुसार फिल्म में मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं और वह एक पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में उन्हें पंडित नाम से संबोधित किया गया है जिस पर समाज को विशेष आपत्ति है।

    माधव नगर थाना प्रभारी राकेश भारती ने बताया कि अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र चतुर्वेदी द्वारा शिकायत दी गई है। मामले की जांच की जा रही है और विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।फिल्म को लेकर देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में यह विवाद अब कानूनी और सामाजिक दोनों मोर्चों पर तूल पकड़ता नजर आ रहा है।

  • उज्जैन महाकाल भस्म आरती: फाल्गुन कृष्ण द्वितीया पर 4 बजे खुले कपाट, दिव्य श्रृंगार और भस्म अर्पण से मंदिर गूंजा

    उज्जैन महाकाल भस्म आरती: फाल्गुन कृष्ण द्वितीया पर 4 बजे खुले कपाट, दिव्य श्रृंगार और भस्म अर्पण से मंदिर गूंजा


    उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि मंगलवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खुले और भस्म आरती का भव्य श्रृंगार आरंभ हुआ। इस विशेष अवसर पर महाकाल का दिव्य श्रृंगार मनोहारी रूप में किया गया, जिससे पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल छा गया।

    कपाट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक कर भव्य पूजा-अर्चना की गई। भगवान महाकाल का चंदन का त्रिपुंड, त्रिनेत्र और भांग से राजा स्वरूप में मनमोहक श्रृंगार किया गया, जिससे दर्शनार्थियों की श्रद्धा और बढ़ गई।

    भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म रमाई गई। उसके बाद शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की माला अर्पित की गई। आभूषणों से सुगंधित पुष्पों से भगवान का अलंकरण किया गया, जिससे मंदिर में भक्तों का आस्था का रंग और भी गहरा हो गया।

    अल सुबह भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। भक्तों ने नंदी महाराज का दर्शन कर उनके कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल की जयकारे लगाते रहे और पूरा मंदिर “जय महाकाल” के नारे से गूंज उठा।

  • केन्द्रीय रेल एवं जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने किए बाबा महाकाल के दर्शन, भस्म आरती में हुए शामिल

    केन्द्रीय रेल एवं जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने किए बाबा महाकाल के दर्शन, भस्म आरती में हुए शामिल


    उज्जैन। केन्द्रीय रेल एवं जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना शुक्रवार तड़के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। उन्होंने बाबा महाकाल की सुप्रसिद्ध भस्म आरती में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ लिया और देश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

    विधि-विधान से की पूजा-अर्चना

    सुबह होने वाली भस्म आरती के दौरान केन्द्रीय मंत्री सोमन्ना मंदिर के नंदी हॉल में मौजूद रहे। आरती के पश्चात उन्होंने गर्भगृह की दहलीज से भगवान महाकालेश्वर का पूजन-अभिषेक किया। मंदिर के पुजारियों ने उन्हें विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई और बाबा महाकाल का आशीर्वाद स्वरूप प्रसाद व स्मृति चिह्न भेंट किया।

    उज्जैन आगमन और दर्शन

    केन्द्रीय मंत्री वी. सोमन्ना अपनी धार्मिक यात्रा के तहत उज्जैन पहुंचे थे। दर्शन के बाद उन्होंने मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और वहां चल रहे विकास कार्यों की भी सराहना की। गौरतलब है कि उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु और विशिष्ट अतिथि दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

  • महाकाल मंदिर में VIP एंट्री पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: याचिका खारिज, CJI बोले- सब कुछ कोर्ट तय नहीं कर सकता

    महाकाल मंदिर में VIP एंट्री पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: याचिका खारिज, CJI बोले- सब कुछ कोर्ट तय नहीं कर सकता


    नई दिल्ली। उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध भगवान महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब शांत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में दायर याचिका पर विचार करने से साफ इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मंदिर परिसर के भीतर किसे प्रवेश दिया जाए और किसे नहीं, यह तय करना पूरी तरह से मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के विवेक का विषय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इन प्रबंधकीय कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

    समानता के अधिकार की दलील खारिज याचिकाकर्ता दर्पण सिंह अवस्थी की ओर से पेश हुए प्रसिद्ध अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने संविधान के अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि या तो सभी श्रद्धालुओं को जलाभिषेक के लिए गर्भगृह में जाने दिया जाए या फिर किसी को भी नहीं। उन्होंने दलील दी कि कलेक्टर की सिफारिश पर ‘वीआईपी’ को प्रवेश देना आम भक्तों के अधिकारों का हनन है। हालांकि, CJI सूर्यकांत ने इस तर्क को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यदि मंदिर के भीतर मौलिक अधिकारों को इस तरह लागू किया गया, तो व्यवस्था संभालना नामुमकिन हो जाएगा।

    कोर्ट की तल्ख टिप्पणी सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ऐसी याचिकाएं श्रद्धा से प्रेरित नहीं लगतीं, बल्कि इनके पीछे कुछ और ही उद्देश्य प्रतीत होता है। बेंच ने चेतावनी दी कि अगर आज गर्भगृह में प्रवेश को समानता के अधिकार से जोड़ा गया, तो कल लोग वहां जाकर अपनी पसंद के मंत्रोच्चार करने या अन्य गतिविधियों के लिए अनुच्छेद 19 वाक् स्वतंत्रता का दावा करने लगेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मंदिर प्रशासन को सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ विवेकपूर्ण निर्णय लेने का अधिकार है।

    हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी वापस ले ली। इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने भी इसी तरह का फैसला सुनाया था, जिसे अब शीर्ष अदालत ने भी सही माना है। इस फैसले से साफ है कि महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के नियम यथावत रहेंगे और मंदिर समिति के दिशा-निर्देशों का ही पालन होगा।

  • महाकाल के मस्तक पर सजा त्रिशूल: माघ शुक्ल नवमी पर बाबा का दिव्य भांग श्रृंगार, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

    महाकाल के मस्तक पर सजा त्रिशूल: माघ शुक्ल नवमी पर बाबा का दिव्य भांग श्रृंगार, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब


    उज्जैन । धर्म और आस्था की नगरी उज्जैन में आज माघ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मंगलवार तड़के ठीक 4 बजे जब मंदिर के कपाट खोले गए, तो पूरा परिसर ‘जय महाकाल’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, जिसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा को दिव्य स्नान कराया गया।

    आज की भस्म आरती विशेष थी क्योंकि बाबा महाकाल के मस्तक पर चंदन का त्रिपुंड और भांग से त्रिनेत्र बनाया गया, साथ ही त्रिशूल अर्पित कर उनका मनमोहक श्रृंगार किया गया। भस्म अर्पण की प्रक्रिया से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और विशेष मंत्रोच्चार के बीच भगवान का आह्वान हुआ। कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को सूती वस्त्र से ढांककर भस्म रमाई गई, जो श्रद्धालुओं के लिए किसी साक्षात ईश्वरीय अनुभव से कम नहीं था।

    श्रृंगार के अगले चरण में बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट, मुण्डमाल और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से सुसज्जित महाकाल के इस रूप को देख भक्त भाव-विभोर हो उठे। मंदिर के नंदी हॉल में विराजमान नंदी महाराज के कानों में अपनी मनोकामनाएं कहते श्रद्धालु आशीर्वाद मांगते नजर आए। भस्म आरती के दौरान उमड़े इस जनसैलाब ने यह सिद्ध कर दिया कि अवंतिका नगरी में महाकाल की महिमा अपरंपार है। इस भव्य आरती के साथ ही मंदिर में मंगलवार के अन्य विशेष अनुष्ठानों की शुरुआत हुई।

  • तराना में नमाज के बाद हंगामा: CCTV में कैद हुआ उपद्रव, 6 उपद्रवियों पर नामजद FIR दर्ज

    तराना में नमाज के बाद हंगामा: CCTV में कैद हुआ उपद्रव, 6 उपद्रवियों पर नामजद FIR दर्ज


    उज्जैन/तराना। मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के तराना शहर में शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद माहौल गरमा गया। शहर के नई बाखल क्षेत्र में कुछ असामाजिक तत्वों ने जमकर उपद्रव मचाया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। हालांकि उपद्रवियों की यह पूरी करतूत पास ही लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है। घटना से आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने एकजुट होकर थाने का घेराव किया और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 6 मुख्य आरोपियों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है।

    घटना का विवरण और पुलिस की कार्रवाई

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को नमाज के बाद अचानक कुछ युवकों ने क्षेत्र में हुड़दंग शुरू कर दिया।नामजद FIR पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयान के आधार पर 6 लोगों को नामजद किया है। इसके अलावा कई अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।पहचान की प्रक्रिया: पुलिस वीडियो फुटेज को खंगाल रही है ताकि भीड़ में शामिल अन्य उपद्रवियों के चेहरों की पहचान कर उन्हें भी सलाखों के पीछे भेजा जा सके।वर्तमान स्थिति: घटना के बाद क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन तनाव को देखते हुए पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।

    स्थानीय निवासियों में रोष

    नई बाखल के निवासियों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ केवल कागजी कार्रवाई न हो बल्कि कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में शांति भंग न हो सके। पुलिस ने जनता को आश्वस्त किया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

    एक अन्य दुखद घटना: कुएं में मिली मां-बेटे की लाश

    तराना में मचे उपद्रव के बीच जिले से एक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। एक महिला और उसके 3 माह के मासूम बच्चे की लाश कुएं में तैरती मिली है। जांच जारी: पुलिस इस मामले में उलझी हुई है कि यह आत्महत्या है, कोई दुखद हादसा या फिर सोची-समझी हत्या। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मर्ग कायम कर लिया गया है।

  • उज्जैन प्रवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव बृहस्पति महादेव के दर्शन आमजन से संवाद और विकास कार्यों का लिया जायजा

    उज्जैन प्रवास पर मुख्यमंत्री मोहन यादव बृहस्पति महादेव के दर्शन आमजन से संवाद और विकास कार्यों का लिया जायजा


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को उज्जैन प्रवास के दौरान धार्मिक सामाजिक और विकास से जुड़े कार्यक्रमों में पूरी तरह सक्रिय नजर आए। महाकाल उत्सव के समापन के अगले ही दिन मुख्यमंत्री का यह दौरा आस्था, संवाद और विकास-तीनों आयामों को एक साथ समेटे रहा। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उन्होंने दिन की शुरुआत गोलामंडी क्षेत्र स्थित प्राचीन बृहस्पति महादेव मंदिर में दर्शन-पूजन से की और प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

    मुख्यमंत्री अपनी पत्नी सीमा यादव के साथ मंदिर पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से अभिषेक और आरती की गई। पूजा के बाद उन्होंने कहा कि बृहस्पति महादेव मंदिर से उनका पुराना और भावनात्मक जुड़ाव रहा है। सार्वजनिक जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव पर वे यहां आशीर्वाद लेने आते रहे हैं। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद यह उनका पहला बृहस्पतिवार दर्शन था, जिसे उन्होंने अपने लिए विशेष और भावुक क्षण बताया।पूजन के उपरांत मुख्यमंत्री ने उज्जैन के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि उज्जैन केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों को लेकर उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार पूरी गंभीरता और योजना के साथ काम कर रही है। सड़क, पेयजल, स्वच्छता, यात्री सुविधाएं और आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आने वाले वर्षों में उज्जैन वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत कर सके।

    धार्मिक कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री का अंदाज पूरी तरह बदला नजर आया, जब वे शहर के बीच एक साधारण सी चाय की दुकान पर पहुंचे। यहां उन्होंने आम नागरिकों के साथ बैठकर चाय पी और अनौपचारिक बातचीत की। लोगों ने मुख्यमंत्री के सामने शहर की समस्याएं, रोजमर्रा की जरूरतें और विकास से जुड़ी अपेक्षाएं रखीं। मुख्यमंत्री ने न सिर्फ ध्यान से उनकी बातें सुनीं, बल्कि समाधान का भरोसा भी दिया। जब चाय का भुगतान करने की बारी आई और दुकानदार ने पैसे लेने से मना किया, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कराते हुए स्वयं भुगतान किया। इस सरल व्यवहार ने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।

    इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासकीय माधव विज्ञान महाविद्यालय के समीप निर्माणाधीन गीता भवन का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि यह भवन जी प्लस टू संरचना में तैयार किया जा रहा है और अप्रैल 2026 तक इसके पूर्ण होने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने निर्माण की गुणवत्ता, प्रगति और समय-सीमा की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और भवन तय समय में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा होना चाहिए।मुख्यमंत्री का यह उज्जैन दौरा साफ संकेत देता है कि उनकी प्राथमिकताओं में आस्था जनता से सीधा संवाद और विकास कार्यों की निगरानी-तीनों समान रूप से शामिल हैं।

  • महाकाल दर्शन जा रहे 3 दोस्तों की दर्दनाक मौत, तेलंगाना से उज्जैन-अयोध्या की यात्रा में हादसा

    महाकाल दर्शन जा रहे 3 दोस्तों की दर्दनाक मौत, तेलंगाना से उज्जैन-अयोध्या की यात्रा में हादसा


    उज्जैन । उज्जैन के देवास रोड स्थित चंदेसरा इलाके में मंगलवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हुआ। तेलंगाना से महाकाल मंदिर और अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए आ रहे युवकों की टेंपो ट्रक्स (क्रमांक KA36N0688) ट्राले से जा टकराई। हादसा सुबह करीब चार बजे हुआ, जिसमें तीन युवकों की मौत हो गई।

    तेलंगाना के फरीदपुर, मेहबूबनगर निवासी बी. नरसिम्हा (20 वर्ष) अपने सात दोस्तों के साथ यात्रा कर रहे थे। दुर्घटना के समय ट्राले में पाइप भरे हुए थे।

    ट्राले के चालक ने अचानक ब्रेक लगाने के कारण ट्रक्स ट्राले में जा घुसी।

    हादसे में घायल सभी को तुरंत चरक अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने नरसिम्हा पिता बालचंद्रणा (20 वर्ष) और जगन्नाथ पिता बेंकेंटेस (26 वर्ष) को मृत घोषित किया। गंभीर रूप से घायल शिवा कुमार पिता एलप्पा (25 वर्ष) को इंदौर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

    अन्य घायल युवकों में के.बी. नरसिम्हा, रामप्पा, मलेन पिता नरसप्पा, अरतिद पिता लक्ष्मण (11 वर्ष), वाहन चालक बाल मंद्रप्पा, चिन्ना कुंधाकुंटा, जिया कुमार पिता एलव्या और काशष्या पिता चित्रा रामुनु शामिल हैं। सभी को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

    एडिशनल एसपी गुरु प्रसाद पराशर ने बताया कि यह हादसा धार्मिक यात्रा पर जा रहे युवकों के लिए दर्दनाक साबित हुआ। पुलिस ने ट्राले को जब्त कर चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

    यह हादसा न केवल परिवार और दोस्तों के लिए त्रासदी है, बल्कि सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के पालन पर भी सवाल खड़ा करता है।

  • उज्जैन में आस्था का महासैलाब: साल के आखिरी रविवार महाकाल दरबार पहुंचे डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु

    उज्जैन में आस्था का महासैलाब: साल के आखिरी रविवार महाकाल दरबार पहुंचे डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु


    उज्जैन।साल के अंतिम रविवार को धार्मिक नगरी उज्जैन में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ पड़ी। सर्दियों की छुट्टियां शुरू होते ही देशभर से भक्त उज्जैन पहुंचने लगे हैं। इसी क्रम में रविवार को करीब डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर साल के अंतिम दिनों को आध्यात्मिक रूप से सार्थक बनाया। सुबह तड़के भस्म आरती के बाद से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की लंबी कतारें लग गई थीं। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन को दर्शन व्यवस्था में कई बदलाव करने पड़े। सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ होते हुए त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया गया।

    शीघ्र दर्शन के लिए खोला गया सम्राट अशोक सेतु

    शनिवार को सुरक्षा कारणों से बंद किया गया सम्राट अशोक सेतु रविवार को पुनः खोला गया, लेकिन इसे केवल 250 रुपये के शीघ्र दर्शन टिकट वाले श्रद्धालुओं के लिए आरक्षित रखा गया। इसके चलते सामान्य और शीघ्र दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की अलग-अलग व्यवस्थाएं बनाई गईं, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।महाकाल मंदिर में श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद से सप्ताहांत और विशेष अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। साल का आखिरी रविवार भी इसका साक्षी बना, जब सुबह से देर रात तक मंदिर परिसर में भक्तों का सैलाब उमड़ता रहा।

    प्रशासन को करना पड़ा इंतजामों में बदलाव

    शनिवार से ही श्रद्धालुओं का उज्जैन पहुंचना शुरू हो गया था। जनदबाव बढ़ने के कारण जिला प्रशासन और मंदिर समिति को अपनी व्यवस्थाओं में बदलाव करना पड़ा। रविवार को उत्तर और पूर्व दिशा के सभी द्वार बंद रखे गए जबकि केवल पश्चिम दिशा से श्री महाकाल लोक और सम्राट अशोक सेतु के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया।भीड़ को देखते हुए 31 दिसंबर और 1 जनवरी के लिए भी प्रशासन ने अतिरिक्त तैयारियां शुरू कर दी हैं। चारधाम पार्किंग में जिगजैग बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जा रही है, ताकि कतारों को सुव्यवस्थित रखा जा सके। इसके अलावा, पेयजल, चिकित्सा और सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त इंतजाम भी किए जा रहे हैं।

    अन्य मंदिरों में भी उमड़ी श्रद्धा

    महाकाल मंदिर के अलावा उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। काल भैरव मंदिर में रविवार को 75 हजार से अधिक भक्तों ने दर्शन किए। भीड़ के चलते काल भैरव मंदिर में प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था अस्थायी रूप से स्थगित रही और जिला प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार ही दर्शन कराए गए।इसके अलावा मंगलनाथ मंदिर, अंगारेश्वर महादेव मंदिर और चिंतामन गणेश मंदिर में भी दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहा। सभी मंदिरों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया।

    अव्यवस्थाओं पर उठे सवाल

    भारी भीड़ के बावजूद महाकाल मंदिर के बाहर अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। आसपास की गलियों और शहनाई गेट के सामने अवैध पार्किंग से यातायात बाधित रहा। वहीं, मुख्य द्वार के पास फूल-माला और पूजन सामग्री की दुकानों के अतिक्रमण के कारण श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। भीड़ के बीच इस अव्यवस्था पर नियंत्रण को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    आगे और बढ़ सकती है भीड़
    प्रशासन का अनुमान है कि नववर्ष के अवसर पर उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ सकती है। होटल, धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस लगभग पूरी तरह भर चुके हैं। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और धैर्य बनाए रखें, ताकि सभी को सुगम दर्शन का अवसर मिल सके।