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  • 25 जनवरी महाकाल भस्म आरती: चंद्र अर्पण और चंदन से हुआ दिव्य श्रृंगार, अलसुबह उमड़े श्रद्धालु, घर बैठे करें बाबा महाकाल के दर्शन

    25 जनवरी महाकाल भस्म आरती: चंद्र अर्पण और चंदन से हुआ दिव्य श्रृंगार, अलसुबह उमड़े श्रद्धालु, घर बैठे करें बाबा महाकाल के दर्शन


    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रविवार को अलसुबह भव्य और दिव्य भस्म आरती का आयोजन किया गया। तड़के ठीक 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही बाबा महाकाल के जयकारों से संपूर्ण परिसर गूंज उठा। इस अवसर पर भगवान महाकाल का विशेष और मनोहारी श्रृंगार किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

    मंदिर के कपाट खुलने के बाद पुजारियों द्वारा विधि-विधान से गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। अभिषेक क्रम में दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से भगवान का अभिषेक संपन्न हुआ। मंत्रोच्चार और वैदिक विधानों के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

    अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर चंद्र अर्पित किया गया, वहीं चंदन से त्रिपुंड और त्रिनेत्र अंकित कर भांग से मनोहारी श्रृंगार रचा गया। श्रृंगार के इस अलौकिक स्वरूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम के जल का अर्पण किया गया और ध्यान मंत्रों के साथ भगवान का आवाहन किया गया।

    भस्म अर्पण की परंपरा के तहत कपूर आरती की गई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर विधि-विधान से भस्म रमाई गई। भस्म आरती के इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु अलसुबह ही मंदिर परिसर में उपस्थित रहे। भस्म रमाने के बाद बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्प अर्पित किए गए। फूलों और आभूषणों से भगवान का भव्य अलंकरण किया गया।

    भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन भी किए। परंपरा अनुसार श्रद्धालु नंदी महाराज के कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते नजर आए। श्रद्धालुओं का मानना है कि नंदी के माध्यम से कही गई प्रार्थना सीधे बाबा महाकाल तक पहुंचती है और शीघ्र फलित होती है।

    पूरे भस्म आरती आयोजन के दौरान जय श्री महाकाल हर-हर महादेव और बाबा महाकाल की जय के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। अलसुबह की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। देश-विदेश से आए भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

    जो श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर दर्शन नहीं कर सके, वे मंदिर समिति द्वारा उपलब्ध कराए गए लाइव दर्शन के माध्यम से घर बैठे बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सके। महाकाल की भस्म आरती न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह भारत की सबसे प्राचीन और अद्वितीय धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है।

  • उज्जैन के तराना में फिर भड़की हिंसा: घरों पर पथराव, बस में आग, 300 पुलिस जवान तैनात

    उज्जैन के तराना में फिर भड़की हिंसा: घरों पर पथराव, बस में आग, 300 पुलिस जवान तैनात



    नई दिल्ली। उज्जैन जिले के तराना कस्बे में गुरुवार शाम शुरू हुआ विवाद शुक्रवार को हिंसक रूप ले गया। सोहेल ठाकुर पर हमले के बाद उपद्रवियों ने कई घरों पर पत्थरबाजी की और एक बस में आग लगा दी, जिससे इलाके में भय का माहौल बन गया। पुलिस-प्रशासन ने स्थिति को गंभीर मानते हुए पूरे कस्बे को छावनी में तब्दील कर दिया है।

    सोहेल ठाकुर पर हमला, माहौल हुआ तनावपूर्ण
    पुलिस के अनुसार गुरुवार शाम तराना में कुछ युवकों के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान सोहेल ठाकुर नामक युवक पर प्राणघातक हमला किया गया।

    इस घटना के विरोध में शुक्रवार को तनाव बढ़ा और कुछ शरारती तत्वों ने उग्र होकर हिंसा की।

    घरों पर पथराव, बस में आग
    उपद्रवियों ने मोहल्लों में घुसकर कई घरों पर पथराव किया, जिससे कई खिड़कियों के शीशे टूट गए। इसके बाद भीड़ ने एक बस में आग लगा दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    300 से ज्यादा जवान तैनात, ड्रोन और CCTV से निगरानी
    उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने खुद मोर्चा संभाला और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस ने सोहेल की शिकायत पर 6 लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला दर्ज किया है, जिनमें से 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। एक आरोपी की तलाश अभी जारी है।

    शांति बहाल करने के लिए प्रशासन ने तराना में 300 से अधिक पुलिस जवान तैनात किए हैं। साथ ही ड्रोन कैमरा और CCTV फुटेज के जरिए संदिग्धों की पहचान की जा रही है।

    सोहेल की हालत स्थिर, अस्पताल में उपचार
    हमले में घायल सोहेल ठाकुर का इलाज जारी है। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी हालत अब खतरे से बाहर है।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

  • MP: गणतंत्र दिवस पर भोपाल में राज्यपाल, उज्जैन में CM करेंगे ध्वजारोहण, जानिए इंदौर में कौन फहराएगा तिरंगा

    MP: गणतंत्र दिवस पर भोपाल में राज्यपाल, उज्जैन में CM करेंगे ध्वजारोहण, जानिए इंदौर में कौन फहराएगा तिरंगा


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में भी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस (Republic Day) बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें राज्य सरकार के अलग-अलग जनप्रतिनिधि हिस्सा लेकर झंडावंदन (Flag Hoisting) करेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस बारे में जानकारी देते हुए एक पत्र जारी किया है और बताया है कि इस साल होने वाले जिलास्तरीय आयोजनों कौन से प्रतिनिधि कहां पर राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। राज्य के सभी कलेक्टरों के नाम पर जारी इस पत्र में बताया गया है कि राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उप मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यमंत्री और कलेक्टर किन जिला मुख्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे।

    पत्र में दी गई जानकारी के अनुसार प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल (Mangubhai Patel) भोपाल में होने वाले मुख्य समारोह में ध्वज फहराएंगे, जबकि प्रदेश के मुख्मंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) अपने गृह नगर उज्जैन में होने वाले आयोजन में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। वहीं विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर जिले में ध्वज फहराएंगे और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे। पत्र के अनुसार 23 जिले ऐसे भी हैं, जहां पर स्थानीय कलेक्टर ही ध्वज फहराएंगे।


    किस जिले में कौन सा मंत्री फहराएगा ध्वज

    1. इंदौर- जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री
    2. सागर- राजेन्द्र शुक्ल, उप मुख्यमंत्री
    3. रतलाम- कुंवर विजय शाह, मंत्री
    4. रीवा- प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्री
    5. छिंदवाडा- राकेश सिंह, मंत्री
    6. सिवनी- करण सिंह वर्मा, मंत्री
    7. कटनी- उदय प्रताप सिंह, मंत्री
    8. जबलपुर- सम्पतिया उईके, मंत्री
    9. बुरहानपुर- तुलसीराम सिलावट, मंत्री
    10. दतिया- एदल सिंह कंषाना, मंत्री
    11. नीमच- निर्मला भूरिया, मंत्री
    12. गुना- गोविन्द सिंह राजपूत, मंत्री
    13. खरगोन- विश्वास सारंग, मंत्री
    14. शाजापुर- नारायण सिंह कुशवाह, मंत्री
    15. आगर-मालवा- नागर सिंह चौहान, मंत्री
    16. शिवपुरी- प्रद्युम्न सिंह तोमर, मंत्री
    17. अशोकनगर- राकेश शुक्ला, मंत्री
    18. राजगढ़- चेतन्य काश्यप, मंत्री
    19. दमोह- इंदर सिंह परमार, मंत्री
    20. सीहोर- कृष्णा गौर, राज्यमंत्री
    21. खण्डवा- धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी, राज्यमंत्री
    22. मण्डला- दिलीप जायसवाल, राज्यमंत्री
    23. बड़वानी- गौतम टेटवाल, राज्यमंत्री
    24. विदिशा- लखन सिंह पटेल, राज्यमंत्री
    25. रायसेन- नारायण सिंह पंवार, राज्यमंत्री
    26. नर्मदापुरम- नरेंद्र शिवाजी पटेल, राज्यमंत्री
    27. डिण्डौरी- प्रतिमा बागरी, राज्यमंत्री
    28. अनूपपुर- दिलीप अहिरवार, राज्यमंत्री
    29. मैहर- राधा सिंह, राज्यमंत्री

    इन 23 जिलों में कलेक्टर फहराएंगे ध्वज व पढ़ेंगे CM का संदेश

    1. देवास, 2. धार, 3. झाबुआ, 4. अलीराजपुर, 5. मुरैना, 6. मन्दसौर, 7. श्योपुर, 8. भिण्ड, 9. सीधी, 10. सतना, 11. मऊगंज, 12. शहडोल, 13. उमरिया, 14. पन्ना, 15. छतरपुर, 16. टीकमगढ़, 17. निवाड़ी, 18. बैतूल, 19. हरदा, 20. सिंगरौली, 21. नरसिंहपुर, 22. बालाघाट, 23. पांढुर्णा

  • सर्वार्थसिद्धि योग में माघी गुप्त नवरात्र आरंभ, नौ दिनों में बनेंगे छह शुभ योग

    सर्वार्थसिद्धि योग में माघी गुप्त नवरात्र आरंभ, नौ दिनों में बनेंगे छह शुभ योग


    उज्जैन । साधना, तंत्र और मंत्र आराधना के लिए विशेष माने जाने वाले माघी गुप्त नवरात्र का शुभारंभ इस वर्ष सर्वार्थसिद्धि योग में हुआ है। सोमवार से प्रारंभ हुए इन गुप्त नवरात्रों में पूरे नौ दिनों तक देवी उपासना का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस बार ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अत्यंत शुभ मानी जा रही है, जिसके कारण साधकों को मनवांछित फल मिलने की प्रबल संभावना है।

    माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक चलने वाले इन गुप्त नवरात्रों का उल्लेख श्रीमद् देवी भागवत महापुराण में भी मिलता है। शास्त्रों के अनुसार वर्षभर में चार नवरात्र होते हैं, जिनमें चैत्र और अश्विन मास के नवरात्र प्राकट्य नवरात्र कहलाते हैं, जबकि माघ और आषाढ़ मास के नवरात्र गुप्त नवरात्र माने गए हैं। गुप्त नवरात्र विशेष रूप से तांत्रिक साधना, मंत्र-सिद्धि और यंत्र आराधना के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, जिन्हें साधक सामान्य जन से गुप्त रूप से करते हैं।

    इस बार पंचांग की गणना के अनुसार 19 जनवरी, सोमवार को प्रतिपदा तिथि पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग और मकर राशि में चंद्रमा की साक्षी में माघी गुप्त नवरात्र का शुभारंभ हुआ। नवरात्र के दौरान कुल छह शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो साधना को और अधिक प्रभावशाली बना रहा है। साथ ही सूर्य का उत्तरायण काल भी इसी समय चल रहा है, जिसे शास्त्रों में शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

    शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में नवरात्र को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर सहित उज्जैन के अन्य देवी मंदिरों में प्रतिदिन माता का नित्य नए स्वरूप में श्रृंगार किया जाएगा। हरसिद्धि मंदिर में संध्या आरती के समय दीपमालिका प्रज्वलन का विशेष आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। मंदिर परिसर में पूरे नौ दिनों तक भक्तिमय वातावरण बना रहेगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्र के दौरान की गई साधना अत्यंत शीघ्र फल देने वाली होती है। साधक इस अवधि में शक्ति उपासना के साथ-साथ अपने आत्मिक और आध्यात्मिक विकास के लिए भी विशेष अनुष्ठान करते हैं। माना जाता है कि इन दिनों मां दुर्गा अपने साधकों की गुप्त तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें सिद्धि, सफलता और बाधाओं से मुक्ति का वरदान देती हैं। इस प्रकार सर्वार्थसिद्धि योग और अनेक शुभ ग्रह संयोगों के बीच प्रारंभ हुए माघी गुप्त नवरात्र श्रद्धालुओं और साधकों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर लेकर आए हैं।

  • उज्जैन में पहली बार विंध्य हर्बल वन मेला, 12 से 16 फरवरी तक दशहरा मैदान में आयोजित

    उज्जैन में पहली बार विंध्य हर्बल वन मेला, 12 से 16 फरवरी तक दशहरा मैदान में आयोजित


    उज्जैन । महाकाल की नगरी उज्जैन में पहली बार विंध्य हर्बल वन मेला आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार यह पांच दिवसीय मेला 12 से 16 फरवरी 2026 तक दशहरा मैदान में चलेगा। मेले का शुभारंभ 12 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कर कमलों द्वारा होने की संभावना है। वन विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस मेले का उद्देश्य आमजन को वन, पर्यावरण, वन्यजीव संरक्षण, आयुर्वेद एवं पारंपरिक ज्ञान, वनोपज आधारित हर्बल उत्पादों, आयुष, स्वास्थ्य, जैव विविधता और जनजातीय संस्कृति से जोड़ना है। मेले में प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों से हर्बल उत्पाद, आयुर्वेदिक औषधियां, वनोपज आधारित हस्तशिल्प कृतियां और आंचलिक व्यंजन प्रदर्शित किए जाएंगे।

    मेला केवल उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता को भी बढ़ावा मिलेगा। इस दौरान आमजन को विभिन्न जड़ी-बूटियों और वनोपज के बारे में जानकारी दी जाएगी और उन्हें खरीदने का अवसर भी मिलेगा। मेले में आने वाले पर्यटक और नागरिक वन और पर्यावरण से जुड़े कार्यशालाओं और लाइव डेमोंस्ट्रेशन में भाग लेकर नई जानकारियां हासिल कर सकेंगे। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मेले में देशभर से हर्बल उत्पाद और पारंपरिक ज्ञान की विविधता पेश की जाएगी। यह मेला न केवल व्यापारियों और कारीगरों के लिए अवसर प्रदान करेगा, बल्कि आमजन के लिए भी वन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने का एक अनूठा मंच बनेगा। साथ ही, इस मेले में युवा और छात्र पर्यावरणीय शिक्षा और आयुर्वेदिक ज्ञान के महत्व को समझने का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

    उज्जैन की यह पहल महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर आयोजित की जा रही है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य पर केंद्रित गतिविधियों का भी संयोजन होगा। अधिकारियों का कहना है कि इस मेला से जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। पांच दिवसीय मेले में आने वाले नागरिक हर्बल उत्पादों की खरीदारी के साथ-साथ आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा पर आधारित कार्यशालाओं में भाग लेकर अपनी स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ा सकेंगे। वन और पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह मेला एक विशेष अनुभव प्रदान करेगा, जो वन्य जीवन और जैव विविधता के महत्व को सीधे तौर पर समझने का अवसर देगा।

  • महाकाल की शरण में टीम इंडिया: निर्णायक मैच से पहले विराट कोहली और कुलदीप यादव ने की भस्म आरती , बाबा महाकाल से मांगी जीत की कामना

    महाकाल की शरण में टीम इंडिया: निर्णायक मैच से पहले विराट कोहली और कुलदीप यादव ने की भस्म आरती , बाबा महाकाल से मांगी जीत की कामना


    उज्जैन । न्यूजीलैंड के खिलाफ इंदौर में होने वाले निर्णायक वनडे मुकाबले से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के सितारे आध्यात्मिक ऊर्जा लेने उज्जैन पहुंचे। टीम इंडिया के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली और स्पिनर कुलदीप यादव ने शुक्रवार तड़के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव के दर्शन किए और अलौकिक मानी जाने वाली भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। दोनों खिलाड़ी सुबह करीब 4 बजे मंदिर पहुंचे और लगभग दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर ध्यान और आराधना में लीन रहे। भस्म आरती के दौरान विराट कोहली पूरी तरह पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। उनके मस्तक पर त्रिपुण्ड सुशोभित था और वे पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते दिखाई दिए। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं की नजरें भी एक पल के लिए विराट और कुलदीप पर ठहर गईं। हालांकि दोनों खिलाड़ियों ने पूरी सादगी और श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल के दर्शन किए और किसी तरह की औपचारिकता से दूर रहे।

    दर्शन के बाद कुलदीप यादव ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि उन्होंने खेल और जीवन दोनों में सफलता के लिए भगवान महाकाल से आशीर्वाद मांगा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की आध्यात्मिक अनुभूति खिलाड़ियों को मानसिक शांति और आत्मविश्वास देती है जो मैदान पर बेहतर प्रदर्शन में मददगार होती है। विराट कोहली ने भले ही कोई बयान नहीं दिया लेकिन उनका शांत और ध्यानमग्न चेहरा यह साफ बयां कर रहा था कि वे इस निर्णायक मुकाबले को लेकर पूरी तरह केंद्रित हैं।गौरतलब है कि इससे पहले भी भारतीय टीम के कई खिलाड़ी बड़े मुकाबलों से पहले महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाते रहे हैं। हाल ही में टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर और विकेटकीपर बल्लेबाज केएल राहुल भी उज्जैन पहुंचकर बाबा महाकाल के दर्शन कर चुके हैं। क्रिकेट और आस्था का यह संगम उज्जैन में अक्सर देखने को मिलता है जहां खिलाड़ी मैदान पर उतरने से पहले आध्यात्मिक बल लेने आते हैं।

    इंदौर में खेला जाने वाला यह एकदिवसीय मुकाबला भारत और न्यूजीलैंड के बीच चल रही वनडे सीरीज का आखिरी और निर्णायक मैच है। दोनों टीमें अब तक एक-एक मैच जीतकर बराबरी पर हैं ऐसे में यह मुकाबला सीरीज का फैसला करेगा। भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को टीम इंडिया से जीत की पूरी उम्मीद है वहीं विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ी से एक बड़ी पारी की आस भी लगाई जा रही है।अब सबकी नजरें रविवार को होने वाले इस हाई-वोल्टेज मुकाबले पर टिकी हैं। महाकाल के आशीर्वाद के साथ टीम इंडिया मैदान में उतरेगी और करोड़ों प्रशंसक दुआ कर रहे हैं कि बाबा महाकाल की कृपा से जीत भारतीय टीम के हिस्से आए और देशभर में एक बार फिर जश्न का माहौल बने।

  • मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव आज उज्जैन में करेंगे श्रीमहाकाल महोत्सव का शुभारंभ

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव आज उज्जैन में करेंगे श्रीमहाकाल महोत्सव का शुभारंभ


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 जनवरी को श्रीमहाकाल महालोक उज्जैन में पाँच दिवसीय ‘श्रीमहाकाल महोत्सव’ का शुभारंभ करेंगे। 18 जनवरी 2026 तक चलने वाला यह महोत्सव श्रीमहाकाल महालोक और त्रिवेणी संग्रहालय के प्रांगण में कला, संगीत और वैचारिक विमर्श का अनूठा संगम होगा। वीर भारत न्यास और श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त तत्वावधान में यह महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन एक बार फिर भारतीय संस्कृति, कला और अटूट श्रद्धा के महोत्सव की साक्षी बनने जा रही है।

    5 दिनों तक बहेगी संगीत सरिता

    महोत्सव की मुख्य सभाओं में देश के ख्यातिलब्ध कलाकार भगवान शिव की आराधना अपनी स्वर-लहरियों से करेंगे। 14 जनवरी: महोत्सव के पहले दिन सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक शंकर महादेवन अपने पुत्रों सिद्धार्थ और शिवम् के साथ ‘शिवोऽहम्’ की संगीतमय प्रस्तुति देंगे। 15 जनवरी: मुम्बई का प्रसिद्ध ‘द ग्रेट इंडियन क्वायर’ ‘शिवा’ थीम पर प्रस्तुति देगा। 16 जनवरी: सुप्रसिद्ध गायिका सोना महापात्रा अपनी संगीत यात्रा से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी। 17 जनवरी: इंदौर के श्रेयश शुक्ला एवं मुम्बई के विपिन अनेजा व उनके बैंड द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति होगी। 18 जनवरी: महोत्सव का समापन इंडोनेशिया (कोकोरदा पुत्रा) और श्रीलंका (अरियारन्ने कालूराच्ची) के दलों द्वारा प्रस्तुत ‘शिव केंद्रित नृत्य नाटिका’ से होगा, जो महोत्सव के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को दर्शाएगा।

    त्रिवेणी संग्रहालय में प्रतिदिन जनजातीय संस्कृति के होंगे दर्शन

    महोत्सव में प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक त्रिवेणी संग्रहालय में मध्यप्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति के दर्शन होंगे। इसमें छिंदवाड़ा का भड़म, बैतूल का ठाट्या, धार का भगोरिया और सागर का बरेदी जैसे पारंपरिक नृत्यों का प्रदर्शन होगा। प्रतिदिन निकलने वाली ‘कला यात्रा’ शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए श्रीमहाकाल लोक पहुँचेगी। इसमें शिव बारात, डमरू वादन और मलखंब के रोमांचक प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र होंगे।

    15 जनवरी को होगा बौद्धिक विमर्श

    सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ, 15 जनवरी को प्रातः 10:30 बजे एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसका विषय ‘शिव तत्त्व और महाकाल: पुरातिहास, साहित्य और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में’ रखा गया है, जहाँ विद्वान शिव तत्व की दार्शनिक गहराईयों पर प्रकाश डालेंगे। आमजन को इस भक्तिमय उत्सव में सहभागी होने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है।

  • उज्जैन महाकाल की शरण में शिल्पा और शमिता शेट्टी: शयन आरती में हुईं शामिल, कहा- बाबा का बुलावा आया और हम दौड़े आए

    उज्जैन महाकाल की शरण में शिल्पा और शमिता शेट्टी: शयन आरती में हुईं शामिल, कहा- बाबा का बुलावा आया और हम दौड़े आए


    उज्जैन । फिल्म इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्रियां शिल्पा शेट्टी और शमिता शेट्टी ने हाल ही में उज्जैन में स्थित भगवान महाकालेश्वर के मंदिर में दर्शन किए। दोनों बहनें महाकाल की दिव्य शयन आरती में शिरकत करने के लिए मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने भगवान महाकाल से आशीर्वाद प्राप्त किया।

    आरती के बाद शिल्पा शेट्टी ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उनके लिए यह अवसर बहुत खास था। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है जैसे बाबा ने हमें खुद बुलाया है, इसलिए हम सब कुछ छोड़कर दौड़े चले आए। यहाँ की ऊर्जा और शांति अद्भुत है। आज पहली बार शाम की आरती में शामिल होकर मुझे अपार शांति और संतोष मिला है।

    मंदिर प्रबंध समिति ने अभिनेत्रियों का स्वागत किया

    शिल्पा शेट्टी ने महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए मंदिर प्रबंधन का धन्यवाद किया और कहा कि वह जल्द ही फिर से यहां आना चाहेंगी। मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक ने दोनों बहनों का स्वागत किया और उनका सत्कार भी किया।

  • उज्जैन सिंहस्थ 2028: मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 20 हजार करोड़ का विशेष पैकेज मांगा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए अधोसंरचना का विकास होगा

    उज्जैन सिंहस्थ 2028: मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 20 हजार करोड़ का विशेष पैकेज मांगा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए अधोसंरचना का विकास होगा


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने आगामी 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ के लिए केंद्र सरकार से 20 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मांगा है। इस मांग को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ शनिवार को नई दिल्ली में हुई एक बैठक में उठाया गया। बैठक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों की प्री-बजट मीटिंग का हिस्सा थी, जिसमें मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इस मुद्दे को केंद्र के सामने रखा।सिंहस्थ महाकुंभ, जो हर 12 साल में उज्जैन में आयोजित होता है, में लगभग 50 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है।
    ऐसे में श्रद्धालुओं के सुचारु दर्शन और अन्य सुविधाओं के लिए राज्य सरकार ने कई अहम योजनाओं पर काम करना शुरू कर दिया है। इसमें प्रमुख रूप से सड़कें, पुल-पुलिया, क्षिप्रा नदी पर पक्के घाट, ठहरने के स्थल, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा।मध्य प्रदेश सरकार ने कहा है कि केंद्र से 20 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मिलने से इन कार्यों को तेज़ी से और बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि सिंहस्थ महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    4500 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेने की संभावना

    मध्यप्रदेश सरकार ने यह भी जानकारी दी कि 15वें वित्त आयोग द्वारा राज्य का जीएसडीपी 16.94 लाख करोड़ रुपये के रूप में आंका गया है, जबकि केंद्र सरकार इसे 15.44 लाख करोड़ रुपये मानती है। यदि राज्य सरकार के आंकड़ों को माना जाता है, तो मध्य प्रदेश को अतिरिक्त 4500 करोड़ रुपये तक कर्ज लेने का अवसर मिल सकता है, जिसका उपयोग राज्य के विकास कार्यों में किया जाएगा।

    अधोसंरचना के विकास के लिए केंद्र से मिलने वाली सहायता से न केवल सिंहस्थ महाकुंभ के आयोजन में मदद मिलेगी, बल्कि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी बुनियादी ढांचे का विकास संभव होगा। उज्जैन सिंहस्थ 2028 को लेकर सरकार की योजना काफी विस्तृत है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं मिलें।

  • 10 जनवरी महाकाल आरती: कण-कण में महादेव, मस्तक पर चंद्र अर्पित कर बाबा का भव्य श्रृंगार

    10 जनवरी महाकाल आरती: कण-कण में महादेव, मस्तक पर चंद्र अर्पित कर बाबा का भव्य श्रृंगार


    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 10 जनवरी को माघ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर भव्य भस्म आरती का आयोजन हुआ। तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए और विशेष श्रृंगार के साथ भगवान महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। इस अवसर पर महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया जिसे देखने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।मंदिर के पट खुलने के बाद, पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक पूजन किया गया जिसमें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया। विशेष ध्यान बाबा महाकाल के मस्तक पर चंद्र अर्पित करने पर दिया गया, जो इस दिव्य श्रृंगार का अहम हिस्सा था।

    भस्म आरती की विशेषताएँ

    भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई और ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। फिर शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। भगवान महाकाल को आभूषणों से सजाया गया और सुगंधित पुष्पों से उनका अलंकरण किया गया।

    श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
    इस भव्य आरती का दृश्य अत्यधिक श्रद्धा और भक्तिभाव से परिपूर्ण था। भस्म आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। कई श्रद्धालु नंदी महाराज के पास गए और उनके कान के पास जाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मांगा। मंदिर में बाबा महाकाल की जयकारे गूंज रहे थे, जिससे पूरा परिसर महाकाल की भक्ति से भरा हुआ था। इस दिन के आयोजन में श्रद्धालुओं ने अपने पूरे मन से बाबा महाकाल को नमन किया और उन्हें खुशहाल जीवन की कामना की। महाकाल मंदिर का वातावरण भव्यता और आस्था से ओत-प्रोत था, जो श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।