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  • उज्जैन में धधकती चिता के सामने तांत्रिक क्रिया का वीडियो वायरल, मानव अवशेष खाने का दावा; संतों ने मांगी कार्रवाई

    उज्जैन में धधकती चिता के सामने तांत्रिक क्रिया का वीडियो वायरल, मानव अवशेष खाने का दावा; संतों ने मांगी कार्रवाई

    उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित चक्रतीर्थ श्मशान घाट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में किन्नर अखाड़े से जुड़ी किन्नर साधक काली उर्फ नंद गिरि धधकती चिता के सामने कथित रूप से तांत्रिक क्रिया करती नजर आ रही हैं। वीडियो में वह तलवार की मदद से चिता से कथित मानव अवशेष निकालकर उसे खाने का दावा करती दिखाई देती हैं। वीडियो सामने आने के बाद संत समाज ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।

    बताया गया है कि उक्त वीडियो काली उर्फ नंद गिरि ने अपने इंस्टाग्राम खाते पर साझा किया था। वीडियो में वह जलती चिता के सामने तलवार लेकर तांत्रिक क्रिया करती दिखाई देती हैं। इसके बाद वह तलवार से चिता के भीतर से कथित मानव अंग का अवशेष निकालती हैं और कैमरे के सामने उसे खाने का दावा करती हैं।

    वीडियो में किन्नर साधक यह कहते हुए भी सुनाई देती हैं कि गर्म अवस्था में मानव शरीर का हिस्सा खाना हर किसी के बस की बात नहीं है और यह उनके लिए रोजमर्रा की साधना का हिस्सा है। वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और मामले में कार्रवाई की मांग उठ रही है।

    संत समाज ने कहा है कि अघोर एवं तांत्रिक साधना की अपनी परंपराएं और मर्यादाएं होती हैं। ऐसी साधनाओं को सार्वजनिक प्रदर्शन या प्रचार का माध्यम बनाना उचित नहीं है। संतों का कहना है कि इस प्रकार के वीडियो से धार्मिक परंपराओं को लेकर समाज में गलत संदेश जाता है।

    महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरि ने कहा कि अघोर साधना की अपनी मर्यादा है और तांत्रिक क्रियाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन उचित नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, वैदिक परंपराओं के नाम पर इस तरह की गतिविधियों का प्रचार-प्रसार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि निजी प्रसिद्धि और प्रचार के लिए ऐसी गतिविधियों को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।

    इधर, अघोरी अखाड़े के पीठाधीश्वर एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़ेश्वरी अघोरी बाबा विष्णुनाथ ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि वीडियो में एक महिला जलती चिता के पास धारदार हथियार लेकर चिता की सामग्री और कथित मानव अवशेषों से छेड़छाड़ करती दिखाई दे रही है।

    शिकायतकर्ता के अनुसार, यदि वीडियो में दिखाई दे रही सामग्री वास्तव में मानव शव के अवशेष हैं और उनके साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है, तो यह भारतीय न्याय संहिता की धारा 301 के अंतर्गत अपराध के दायरे में आ सकता है। शिकायत में पुलिस से वीडियो की सत्यता की जांच कराने तथा तथ्य सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की गई है।

    वीडियो के वायरल होने के बाद चक्रतीर्थ श्मशान घाट की सुरक्षा और वहां होने वाली कथित तांत्रिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो में किए गए दावों और उसमें दिखाई दे रही सामग्री की वास्तविक प्रकृति की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में वाल्मीकि धाम आश्रम में किया छड़ी-पूजन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में वाल्मीकि धाम आश्रम में किया छड़ी-पूजन


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार सुबह उज्जैन स्थित श्री वाल्मीकि धाम सिद्धपीठ (आश्रम) पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आश्रम में अनंत श्री विभूषित 1008 स्वामी सोहनदास जी की समाधि और प्रतिमा पर पुष्पांजलि के साथ दर्शन-पूजन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाल्मीकि धाम आए जाहरवीर गोगादेव के निशान ध्वज का भी विधि-विधान से छड़ी-पूजन किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यसभा सदस्य एवं बालयोगी संत उमेशनाथ महाराज से भेंट कर उनका शुभाशीष भी प्राप्त किया। विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, संजय अग्रवाल, उज्जैन विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष मुकेश यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण भी उपस्थित थे।

    मीडिया प्रतिनिधियों से की चर्चा
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री वाल्मीकि धाम सिद्धपीठ आश्रम में दर्शन-पूजन के बाद कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। वर्तमान समय में यह जरूरी है कि हम साधु-संतों के आशीर्वाद से अपने अतीत के गौरव को पुनः स्थापित करें। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सदस्य महंत उमेश नाथ महाराज ने अनेक वर्षों से उज्जैन के वाल्मीकि धाम आश्रम को चैतन्य बनाया है। वाल्मीकि जी के आदर्श और कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए बाबा जाहरवीर गोगा महाराज ने अपना सर्वस्व नौछावर कर दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हम सबके लिए सौभाग्य का विषय है कि बाबा महाकाल की नगरी में बाबा गोगा महाराज के ध्वज चिह्न निकलेंगे। इससे सामाजिक समरसता और एकात्मता का अद्भुत संदेश देशभर में पहुंचेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी प्रदेशवासियों को भुजरिया पर्व, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गोगा नवमी की भी शुभकामनाएं दीं।

  • रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी, 2 फीट की विशेष राखी पहनाई, लड्डुओं का लगाया महाभोग

    रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी, 2 फीट की विशेष राखी पहनाई, लड्डुओं का लगाया महाभोग


    उज्जैन। रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत धार्मिक नगरी उज्जैन में भगवान महाकाल के दरबार से हुई। शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे हुई भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को 2 फीट लंबी विशेष राखी अर्पित की। इसके साथ ही भगवान को सवा लाख शुद्ध देसी घी के लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। इसे देश में सबसे पहले भगवान को राखी अर्पित करने की परंपरा के रूप में देखा जाता है।

    भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल को रक्षासूत्र बांधकर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि सनातन परंपरा के प्रमुख पर्वों का शुभारंभ राजाधिराज महाकाल के आंगन से होता है।

    राखी बांधने के लिए पुजारी ओम गुरु और राजेश शर्मा के परिवार की महिलाएं रात करीब 2 बजे ही मंदिर पहुंच गई थीं। भस्म आरती में बाबा महाकाल को भस्म अर्पित किए जाने के बाद 2 फीट लंबी विशेष राखी भगवान के स्वरूप पर समर्पित की गई। पूरे सावन व्रत रखने वाली महिलाओं ने महाकाल का प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोला और बाद में भाइयों की कलाई पर राखी बांधी।

    सवा लाख लड्डुओं का लगाया भोग

    रक्षाबंधन और श्रावणी पूर्णिमा के मौके पर बाबा महाकाल को सवा लाख शुद्ध देसी घी के लड्डुओं का महाभोग लगाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूरे सावन उपवास रखने वाले श्रद्धालु पूर्णिमा पर महाकाल के लड्डू प्रसाद को ग्रहण करने के बाद व्रत पूर्ण करते हैं। भक्तों में प्रसाद वितरण के लिए मंदिर समिति और पुजारियों की ओर से बड़े पैमाने पर लड्डू तैयार कराए गए।

    एक सप्ताह में तैयार हुई विशेष राखी

    पुजारी आकाश गुरु के मुताबिक, करीब 2 फीट लंबी यह विशेष राखी पुजारी परिवार की महिलाओं ने लगभग एक सप्ताह की मेहनत से तैयार की। राखी बनाते समय महिलाएं लगातार ‘जय महाकाल’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करती रहीं।

    राखी को रेशमी वस्त्र, रेशमी धागों, कांच वर्क और आभूषणों से सजाया गया। इसमें भगवान महाकाल के प्रिय त्रिनेत्र, ‘ॐ’, त्रिपुंड और रुद्राक्ष को शामिल किया गया। भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख और गौ माता के प्रतीक चिन्ह भी राखी में लगाए गए।

  • MP: उज्जैन में UCC कानून का विरोध…. बुर्का-हिजाब पहन सड़क पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं

    MP: उज्जैन में UCC कानून का विरोध…. बुर्का-हिजाब पहन सड़क पर उतरीं मुस्लिम महिलाएं


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में यूसीसी कानून (UCC Law) के विरोध में सैंकड़ों की संख्या में बुर्का और हिजाब पहन कर मुस्लिम महिलाएं (Muslim Women) सड़क पर उतर गई हैं। इन दौरान मुस्लिम महिलाएं हाथों में तख्तियां लेकर प्रशासन को ज्ञापन देने पहुंची। इन तख्तियों पर लिखा,काला कानून वापस लो,धर्म निरपेक्षता जिंदाबाद,शरीयत में छेड़छाड़ बर्दास्त नहीं कि जाएगी। इस दौरान महिलाओं ने सरकार को चेताया की मुस्लिम लॉ के तहत निकाह हमारा, फैसला हमारा,शरीयत में दखल मंजूर नही करेंगे। UGC को लेकर महिलाओं के समर्थन देने पर मुस्लिम महिलाओं ने कहा कि हम उनको बताना चाहते हैं कि ये स्पष्ठ नही है। कुछ बाते जानने की जरूरत है। इस दौरान तीन थानों के थाना प्रभारी सहित एसडीएम, सीएसपी ओर पुलिस के जवान तैनात रहे।

    उज्जैन के खाराकुआं स्थित जामा मस्जिद में रविवार सेकड़ों की संख्या में मुस्लिम महिलाए सड़कों पर उतरीं और मस्जिद के अंदर हिन्दुस्तान जिंदाबाद के बैनर लगाकर UGC द्वारा बनाए कानून को मानने से इंकार किया। उन्होंने आरोप लगाए की यह कानून तीन तलाक,विवाह सहित कई मामलों में स्पष्ठ नहीं है।इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं शामिल हुईं। मंच पर महिला प्रतिनिधि मौजूद थीं, जबकि सामने एकत्रित महिलाओं के हाथों में तख्तियां और तिरंगे झंडे देखे गए। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी समुदाय या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि विधेयक के उन प्रावधानों को लेकर है, जिन्हें वे अपने धार्मिक और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा मानती हैं। डॉक्टर फौजिया अंजुम ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को केवल समानता के नाम पर विधेयक का समर्थन करने के बजाय उसके प्रावधानों को गहराई से समझना चाहिए।


    राष्ट्रपति को ज्ञापन में पुर्नविचार की मांग

    बताया जा रहा है कि 23 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपकर उज्जैन की मुस्लिम नुमाइंदा कमेटी ने मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक- 2026 को लेकर विधेयक के प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग की है। कमेटी ने राष्ट्रपति से चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 को मौजूदा स्वरूप में वापस लेने या उस पर पुनर्विचार करना शामिल है। इसके अलावा, धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा, सभी प्रभावित समुदायों से व्यापक परामर्श और मुस्लिम या अन्य धर्म-निर्देशित समुदायों को कानून में अलग-अलग श्रेणियों में रखने के बजाय समान दृष्टिकोण अपनाने की मांग की गई है।

    प्रदर्शन में शामिल शाइस्ता परवीन शेख ने कहा कि महिलाएं संविधान और अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हुई हैं। प्रसासनिक अधिकारों ज्ञापन में संविधान के मौलिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का हवाला दिया गया है। कमेटी ने अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल है, जबकि धार्मिक स्वतंत्रता मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।

    पार्षद नाजिया कुरैशी ने बताया कि यह प्रदर्शन मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और शरीयत से जुड़े मामलों को लेकर है। उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं द्वारा UCC के समर्थन की बात कही जा रही है।

  • उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में हैदराबाद के ओहरी परिवार ने 50 लाख की चांदी दान कर नई जलाधारी स्थापित कराई

    उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में हैदराबाद के ओहरी परिवार ने 50 लाख की चांदी दान कर नई जलाधारी स्थापित कराई

    नई दिल्ली । धर्मनगरी उज्जैन स्थित प्राचीन श्री मंगलनाथ मंदिर में श्रद्धा और आस्था से जुड़ा विशेष अवसर सामने आया है। हैदराबाद के ओहरी परिवार ने भगवान मंगलनाथ को करीब 20 किलो चांदी दान की है। इस चांदी की अनुमानित कीमत लगभग 50 लाख रुपये बताई गई है। भक्त परिवार की इस भेंट से मंदिर में धार्मिक परंपरा के साथ एक नई सौगात जुड़ी है।

    दान की गई चांदी से भगवान मंगलनाथ के लिए नई जलाधारी तैयार कराई गई है। निर्धारित विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर में पुरानी जलाधारी को हटाकर नई जलाधारी स्थापित की गई। नई जलाधारी धारण करने के बाद भगवान मंगलनाथ अब भक्तों को इसी स्वरूप में दर्शन दे रहे हैं।

    मंदिर में पहले करीब 15 वर्ष पुरानी जलाधारी स्थापित थी। समय बीतने के बाद उसे बदलने की आवश्यकता महसूस की गई। इसके बाद ओहरी परिवार की ओर से चांदी दान किए जाने पर नई जलाधारी तैयार कराई गई। धार्मिक अनुष्ठान के साथ इसकी स्थापना पूरी की गई।

    नई जलाधारी की स्थापना के बाद मंदिर में दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। भगवान मंगलनाथ के नए स्वरूप को देखने के लिए भक्तों में उत्सुकता बनी हुई है। मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालु इसे भगवान के प्रति अपनी आस्था और धार्मिक समर्पण से जोड़कर देख रहे हैं।

    उज्जैन का मंगलनाथ मंदिर धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह मंदिर भगवान मंगल ग्रह को समर्पित प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु भगवान मंगलनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

    मान्यता के अनुसार मंगलनाथ मंदिर में मंगल दोष की शांति के लिए विशेष पूजा और भात पूजा कराई जाती है। श्रद्धालु जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना के साथ यहां धार्मिक अनुष्ठान कराते हैं। इसी कारण मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है।

    मंदिर में नई चांदी की जलाधारी स्थापित होने से धार्मिक वातावरण में भी विशेष आकर्षण देखने को मिल रहा है। चांदी से निर्मित जलाधारी भगवान मंगलनाथ के गर्भगृह की धार्मिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भक्तों के लिए यह केवल नया स्वरूप नहीं, बल्कि श्रद्धा से जुड़ा एक विशेष अवसर भी है।

    हैदराबाद के ओहरी परिवार की ओर से दी गई करीब 20 किलो चांदी की यह भेंट मंदिर के प्रति उनकी धार्मिक आस्था को दर्शाती है। करीब 50 लाख रुपये मूल्य की इस चांदी से तैयार जलाधारी अब भगवान मंगलनाथ को अर्पित की जा चुकी है।

    नई जलाधारी की स्थापना के बाद मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भगवान मंगलनाथ के दर्शन कर रहे हैं। धार्मिक अनुष्ठान के बाद नई व्यवस्था के साथ दर्शन शुरू होने से मंदिर परिसर में भक्तों के बीच उत्साह का माहौल बना हुआ है। उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह धार्मिक अवसर आकर्षण का नया केंद्र बन गया है।

  • महाकाल परिसर के नागचंद्रेश्वर मंदिर में अचानक मची अफरातफरी, दो श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती, स्थिति संभालने में जुटा प्रशासन

    महाकाल परिसर के नागचंद्रेश्वर मंदिर में अचानक मची अफरातफरी, दो श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती, स्थिति संभालने में जुटा प्रशासन

    मध्य प्रदेश। के उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में सोमवार को श्रद्धालुओं के बीच अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया और कई श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लोगों के बीच फैली अफवाह को इस स्थिति की वजह बताया जा रहा है।

    घटना महाकाल परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में उस समय हुई, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए मौजूद थे। अचानक कुछ लोगों के बीच अफवाह फैलने के बाद भीड़ में हलचल बढ़ गई। देखते ही देखते श्रद्धालुओं में आगे निकलने और सुरक्षित स्थान की ओर जाने की कोशिश शुरू हो गई, जिससे स्थिति बिगड़ गई।

    भगदड़ जैसी स्थिति बनने के दौरान कई श्रद्धालु गिर गए और उन्हें चोटें आईं। मौके पर मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलते ही मंदिर प्रबंधन और प्रशासन भी सक्रिय हो गया तथा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई।

    उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि महाकालेश्वर नागचंद्रेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बनने के बाद लोगों के घायल होने की खबर है। उन्होंने बताया कि दो लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस और प्रशासन की ओर से घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    प्रारंभिक तौर पर अफवाह को घटना की वजह माना जा रहा है, हालांकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है। भीड़ के बीच किसी भी तरह की अफवाह तेजी से फैलने पर ऐसी परिस्थितियां गंभीर रूप ले सकती हैं। इसी वजह से मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं को संयम बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था के निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया जा रहा है।

    घटना के बाद महाकाल परिसर में प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सतर्कता बढ़ा दी है। भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों की प्राथमिकता घायलों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ परिसर में सामान्य स्थिति बनाए रखना है।

    नागचंद्रेश्वर मंदिर उज्जैन के महाकाल परिसर का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही के दौरान भीड़ प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी भी अफवाह या अचानक पैदा हुई स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और सुरक्षा कर्मचारियों को लगातार निगरानी रखनी पड़ती है।

    फिलहाल घटना में घायल श्रद्धालुओं की स्थिति और घायलों की कुल संख्या को लेकर विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है। प्रशासन की ओर से घटना के कारणों और पूरे घटनाक्रम को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। जैसे-जैसे आधिकारिक स्तर पर और तथ्य सामने आएंगे, घटना की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

    इस घटना ने धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और अफवाहों पर तत्काल नियंत्रण की आवश्यकता को एक बार फिर सामने ला दिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की ओर से परिसर में निगरानी और व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • मध्य प्रदेश में सिंहस्थ परियोजनाओं की लेटलतीफी पर शिकायतें तेज, MPIDC की कार्यप्रणाली को लेकर उठे गंभीर सवाल

    मध्य प्रदेश में सिंहस्थ परियोजनाओं की लेटलतीफी पर शिकायतें तेज, MPIDC की कार्यप्रणाली को लेकर उठे गंभीर सवाल

    मध्य प्रदेश: में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ की तैयारियों के बीच उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी विकास परियोजनाओं में कथित प्रशासनिक देरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम से जुड़ी कुछ परियोजनाओं में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद तकनीकी स्वीकृति, सीमांकन और भुगतान जैसी प्रक्रियाएं लंबे समय तक अटकी रहीं। इस देरी को लेकर निर्माण एजेंसियों ने उच्च स्तर पर शिकायत की है।

    बताया गया है कि नीमच के चीताखेड़ा औद्योगिक पार्क और मंदसौर के बसई औद्योगिक पार्क से संबंधित परियोजनाओं में टेंडर आवंटन के बाद भी काम आगे बढ़ाने की जरूरी प्रक्रियाओं में देरी हुई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में छह महीने से एक वर्ष तक सीमांकन और अन्य स्वीकृतियां लंबित रहीं। इसके चलते निर्माण एजेंसियों के काम की गति प्रभावित हुई और साइट पर गतिविधियां रुकने की स्थिति बनी।

    मामले में विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपों में यह भी कहा गया है कि कथित अवैध राशि या कमीशन की मांग पूरी नहीं होने के कारण कुछ फाइलों को आगे बढ़ाने में देरी की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के स्तर पर होना बाकी है।

    निर्माण एजेंसियों की ओर से यह मामला मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव कार्यालय तक पहुंचाया गया है। शिकायत में टेंडर आवंटन के बाद काम से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को रोके जाने और रनिंग बिलों के भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया गया है। एजेंसियों का कहना है कि भुगतान अटकने से उनकी कार्यशील पूंजी प्रभावित हुई और परियोजनाओं की प्रगति पर सीधा असर पड़ा।

    मामला सामने आने के बाद MPIDC के प्रबंध निदेशक चंद्रमौली शुक्ला की ओर से दो अटकी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है, लेकिन पहले हो चुकी देरी के कारण निर्धारित समयसीमा पर सवाल बने हुए हैं।

    सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास से जुड़े काम किए जा रहे हैं। ऐसे में किसी भी परियोजना में लंबे समय तक देरी होने का असर आगे की समयसीमा पर पड़ सकता है। निर्माण कार्यों में देरी के कारण लागत बढ़ने की आशंका भी रहती है, जिसका प्रभाव अंततः परियोजना के बजट पर पड़ सकता है।

    शिकायत में पर्यावरण से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है। निर्माण और पौधरोपण जैसे कार्यों के लिए उपयुक्त मौसम निकल जाने की स्थिति में संबंधित गतिविधियों की समयसीमा प्रभावित हो सकती है। मानसून के दौरान किए जाने वाले कार्यों में देरी होने पर आगे की योजना और संसाधन प्रबंधन पर भी दबाव बढ़ सकता है।

    अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच को लेकर है। यदि जांच में प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर देरी, नियमों की अनदेखी या किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। दूसरी ओर, यदि देरी प्रक्रिया संबंधी कारणों से हुई है तो विभाग को उसका स्पष्ट कारण सामने रखना होगा।

    सिंहस्थ 2028 मध्य प्रदेश के लिए धार्मिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बड़ा आयोजन है। इसलिए इससे जुड़ी परियोजनाओं में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही महत्वपूर्ण है। फिलहाल शिकायतों के बाद अटकी परियोजनाओं को गति देने के प्रयास शुरू हुए हैं और आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।

  • उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह, गौतम टेटवाल ने फहराया तिरंगा और शहीद परिवारों को किया सम्मानित

    उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह, गौतम टेटवाल ने फहराया तिरंगा और शहीद परिवारों को किया सम्मानित


    मध्य प्रदेश:
    के उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह दशहरा मैदान पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम के साथ हुई। इसके बाद प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने ध्वजारोहण किया। तिरंगा फहराए जाने के बाद राष्ट्रगान हुआ और परेड का आयोजन किया गया।

    ध्वजारोहण के बाद प्रभारी मंत्री ने परेड की सलामी ली। समारोह में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, स्कूली विद्यार्थी और शहर के नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में देशभक्ति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का विशेष आयोजन किया गया।

    दशहरा मैदान पर ध्वजारोहण के दौरान संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन सिंह, एसपी प्रदीप शर्मा, डीआईजी नवनीत भसीन, विधायक अनिल जैन कालूखेड़ा और सांसद अनिल फिरोजिया सहित अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और उनके परिजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

    ध्वजारोहण के बाद समारोह में परेड निरीक्षण और मार्च पास्ट हुआ। इसके साथ ही परेड कमांडरों से परिचय कराया गया। कार्यक्रम में हर्ष फायर के बाद राष्ट्रगान और मध्य प्रदेश गान भी हुआ। स्वतंत्रता दिवस समारोह की निर्धारित गतिविधियों के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

    समारोह में स्कूली विद्यार्थियों ने पीटी का प्रदर्शन किया। इसके बाद बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। देशभक्ति गीतों पर विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति का संदेश दिया।

    कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया गया। इसके अलावा कारगिल शहीदों के परिवारों को भी सम्मानित किया गया। देहदान करने वाले लोगों के परिजनों का भी समारोह में सम्मान किया गया।

    सम्मान समारोह स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। शहीद परिवारों और अन्य सम्मानित लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन्हें मंच पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम और देश के लिए योगदान देने वाले लोगों को याद किया गया।

    समारोह के दौरान मुख्यमंत्री के संदेश का प्रसारण भी किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय भावना, देश के लिए बलिदान और सामाजिक योगदान से जुड़े विषय प्रमुख रहे।

    दशहरा मैदान पर आयोजित समारोह में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में शहरवासी भी शामिल हुए। विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और परेड के कारण कार्यक्रम में विविध गतिविधियां देखने को मिलीं।

    उज्जैन के मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण, परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान समारोह को एक साथ शामिल किया गया। प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने तिरंगा फहराकर कार्यक्रम की शुरुआत की और परेड की सलामी ली। इसके बाद विभिन्न प्रस्तुतियों और सम्मान कार्यक्रमों के साथ समारोह आगे बढ़ा।

    इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, लोकतंत्र सेनानियों और कारगिल शहीदों के परिवारों का सम्मान कर उनके योगदान को याद किया गया। स्कूली बच्चों ने पीटी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए समारोह में भागीदारी की। बड़ी संख्या में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की मौजूदगी में उज्जैन का मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह संपन्न हुआ।

  • उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस की सुबह बदला बाबा महाकाल का स्वरूप, तिरंगे रंगों में हुए विशेष श्रृंगार के दर्शन

    उज्जैन में स्वतंत्रता दिवस की सुबह बदला बाबा महाकाल का स्वरूप, तिरंगे रंगों में हुए विशेष श्रृंगार के दर्शन

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बाबा महाकाल का विशेष तिरंगा श्रृंगार किया गया। शनिवार तड़के हुई भस्म आरती में भगवान महाकाल को केसरिया, सफेद और हरे रंगों से सजाया गया। इस विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

    सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मंदिर के कपाट तड़के 2.30 बजे खोले गए। कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और पंचामृत से अभिषेक की प्रक्रिया संपन्न हुई।

    पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया। अभिषेक और पूजन के बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार शुरू हुआ। इस दौरान भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों के साथ भगवान का अलंकरण किया गया।

    स्वतंत्रता दिवस के कारण इस बार श्रृंगार में तिरंगे के रंगों को प्रमुखता दी गई। बाबा महाकाल के मस्तक पर केसरिया, सफेद और हरे रंग का तिरंगा त्रिपुंड लगाया गया। इसके साथ रजत मुकुट पर भारत के तिरंगे का प्रतीक भी सजाया गया।

    श्रृंगार के दौरान भगवान के दोनों ओर हाथी के आभूषण लगाए गए। इसके अलावा रंग-बिरंगी पुष्प मालाओं से भी बाबा महाकाल का अलंकरण किया गया। भस्म आरती की धार्मिक परंपराओं के अनुसार विभिन्न पूजन और श्रृंगार की प्रक्रियाएं पूरी की गईं।

    भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंककर भस्म अर्पित की गई।

    भस्म अर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाबा महाकाल को विभिन्न रजत आभूषणों से सजाया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। इसके साथ पुष्प मालाओं और सुगंधित फूलों से भी भगवान का श्रृंगार किया गया।

    भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया और फल-मिष्ठान का भोग लगाया गया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुए इस विशेष श्रृंगार में धार्मिक परंपरा के साथ तिरंगे रंगों की झलक देखने को मिली।

    मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी धार्मिक परंपरा के बीच श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में बाबा महाकाल के विशेष स्वरूप के दर्शन किए।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन के साथ नंदी महाराज के भी दर्शन किए। कई श्रद्धालुओं ने नंदी के कान के समीप अपनी मनोकामना व्यक्त की और आशीर्वाद मांगा।

    आरती के दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल के जयकारे लगाते रहे। जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे रंगों में सजे बाबा महाकाल के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए इस दिन के धार्मिक आयोजन की खास झलक रहे।

  • नागपंचमी पर सांपों को दूध पिलाने से बचाएं जान, उज्जैन में भगतजी संस्थान चलाएगा विशेष जागरूकता अभियान

    नागपंचमी पर सांपों को दूध पिलाने से बचाएं जान, उज्जैन में भगतजी संस्थान चलाएगा विशेष जागरूकता अभियान

    उज्जैन धार्मिक नगरी उज्जैन में नागपंचमी के पावन अवसर पर जीवों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक अनोखा जागरूकता अभियान आयोजित किया जाएगा। अक्सर नागपंचमी के दौरान परंपराओं के नाम पर सांपों को दूध पिलाने का चलन देखा जाता है। हालांकि, जीव विशेषज्ञों के अनुसार जबरन तरल पदार्थ या दूध पिलाने से सांपों के फेफड़ों में संक्रमण हो सकता है, जिससे उनकी मृत्यु की आशंका अत्यधिक बढ़ जाती है। इसी भ्रम को दूर करने और लोगों में संवेदनशीलता जगाने के उद्देश्य से भगतजी सेवा संस्थान द्वारा एक विशेष कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है।

    संस्थान द्वारा यह आयोजन पर्यावरण बचाओ – सरीसृप मुस्कुराओ थीम के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को सांपों के प्रति पारंपरिक भ्रांतियों से दूर करना और उन्हें जीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना है। आयोजन में विशेषज्ञों की उपस्थिति रहेगी जो लोगों को विभिन्न प्रजातियों के सांपों को पहचानने, उनसे दूरी बनाए रखने, और दुर्भाग्यवश सर्पदंश की स्थिति में अपनाए जाने वाले प्राथमिक उपचार एवं बचाव के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी देंगे।

    इस जागरूकता कार्यक्रम को आकर्षक और जन-सामान्य से जोड़ने के लिए एक अनूठी प्रतियोगिता का भी समावेशन किया गया है। सुबह के समय नियमित भ्रमण और व्यायाम करने वाले नागरिकों के लिए नागिन धुन पर एरोबिक्स एक्सरसाइज की स्पर्धा आयोजित की जाएगी। इस अनूठे प्रदर्शन के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले व्यायाम प्रेमियों को आयोजकों की ओर से सम्मानित भी किया जाएगा।

    पर्यावरणविदों और वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि सांप पारिस्थितिकी तंत्र का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और चूहों को नियंत्रित रखकर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। अंधविश्वास और अज्ञानता के कारण हर साल कई बेजुबान जीवों की जान चली जाती है। ऐसे में इस प्रकार के नवाचार और जागरूकता कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और बेजुबान जीवों की रक्षा करने में अत्यंत प्रभावकारी सिद्ध हो सकते हैं।