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  • शिवपुरी से लापता 17 वर्षीय किशोरी उज्जैन में मिली, अपहरण के आरोपी अनस खान पर दुष्कर्म का मामला दर्ज

    शिवपुरी से लापता 17 वर्षीय किशोरी उज्जैन में मिली, अपहरण के आरोपी अनस खान पर दुष्कर्म का मामला दर्ज

    शिवपुरी जिले: में अपहरण के मामले की जांच के दौरान पुलिस ने 17 वर्षीय किशोरी को उज्जैन से सुरक्षित बरामद किया है। इस मामले में फरार चल रहे आरोपी अनस खान को भी गिरफ्तार किया गया है। किशोरी के बयान और परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

    पुलिस के अनुसार, मामला पुरानी शिवपुरी क्षेत्र का है। यहां राधारमण मंदिर के पास रहने वाली किशोरी के परिजनों ने 24 अक्टूबर को देहात थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 17 वर्षीय किशोरी को अनस खान बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की थी।

    मामले की जांच के दौरान पुलिस ने किशोरी और आरोपी की तलाश के लिए मोबाइल लोकेशन की मदद ली। तकनीकी जानकारी के आधार पर पुलिस को दोनों के उज्जैन में होने का पता चला। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उज्जैन से किशोरी को सुरक्षित बरामद कर लिया और आरोपी अनस खान को गिरफ्तार कर लिया।

    किशोरी की बरामदगी के बाद पुलिस ने उसके बयान दर्ज किए। इसके साथ ही परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर मामले की आगे जांच की गई। पुलिस के मुताबिक, बयान और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म की धाराएं भी जोड़ी गईं। इसके बाद मामले की विवेचना आगे बढ़ाई गई है।

    पुलिस ने बरामद किशोरी को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। वहीं, आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय से आदेश मिलने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। इस तरह किशोरी की बरामदगी और आरोपी की गिरफ्तारी के साथ मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है।

    यह मामला 24 अक्टूबर को दर्ज हुई अपहरण की शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश की और मोबाइल लोकेशन के आधार पर उज्जैन तक पहुंची। किशोरी की बरामदगी के बाद उसके बयानों के आधार पर मामले में दुष्कर्म से संबंधित कार्रवाई भी की गई।

    फिलहाल पुलिस मामले की विवेचना कर रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और दर्ज बयानों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नाबालिग से जुड़े मामले में उसकी पहचान और निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

  • उज्जैन में मिलने बुलाकर महिला से चलती कार में सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, दो आरोपियों पर एफआईआर दर्ज

    उज्जैन में मिलने बुलाकर महिला से चलती कार में सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, दो आरोपियों पर एफआईआर दर्ज


    इंदौर: की एक महिला ने उज्जैन में चलती कार में सामूहिक दुष्कर्म और मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है। महिला के मुताबिक, इंस्टाग्राम के जरिए उसकी दोस्ती उज्जैन के रहने वाले चक्रेश जैन से हुई थी। युवक ने उसे मिलने के लिए उज्जैन बुलाया था। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने चक्रेश जैन और एक अन्य आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। महिला ने इस घटना में कुल पांच लोगों के शामिल होने का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस ने फिलहाल दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

    महिला के अनुसार, कुछ महीने पहले इंस्टाग्राम पर उसकी पहचान चक्रेश जैन से हुई थी। इसके बाद दोनों एक-दो बार मिल भी चुके थे। सोमवार को चक्रेश ने उसे मिलने के लिए उज्जैन बुलाया। महिला बस से उज्जैन पहुंची, जहां मेघदूत होटल के पास चक्रेश अपने एक साथी के साथ कार लेकर उससे मिला। महिला का आरोप है कि इसके बाद दोनों उसे कार में घुमाते रहे और कुछ समय बाद चक्रेश के चार अन्य दोस्त भी कार में सवार हो गए।

    महिला ने आरोप लगाया है कि कार में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म और मारपीट की गई। उसने यौन हिंसा के दौरान गंभीर चोट पहुंचाने का आरोप भी लगाया है। महिला के अनुसार, आरोपियों ने उसके प्राइवेट पार्ट में लकड़ी डालकर उसे घायल किया। घटना के संबंध में महिला ने एक वीडियो जारी कर अपने साथ हुई कथित हिंसा की जानकारी दी है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    महिला ने बताया कि घटना के बाद आरोपी उसे इंदौर में अरबिंदो अस्पताल के बाहर छोड़ गए। महिला के मुंहबोले नाबालिग भाई के मुताबिक, रात करीब नौ बजे उसके पास महिला का फोन आया था। फोन पर वह रो रही थी और उसने अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। इसके बाद भाई उसे लेने अरबिंदो अस्पताल पहुंचा। वहां से महिला अपने भाई के साथ उज्जैन के नानाखेड़ा थाने पहुंची और पुलिस को शिकायत दी।

    जानकारी के मुताबिक, महिला रात करीब 12 बजे थाने पहुंची थी। पुलिस ने उसका बयान दर्ज करने के बाद मेडिकल जांच के लिए भेजा। मामले में सीएसपी श्वेता गुप्ता और थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने महिला से पूछताछ की। महिला के लिखित आवेदन के आधार पर चक्रेश जैन और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    सीएसपी श्वेता गुप्ता के मुताबिक, महिला अपनी मर्जी से बस में सवार होकर उज्जैन आई थी। पुलिस ने उसकी शिकायत पर दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस मामले में महिला की ओर से बताए गए आरोपियों की संख्या और दर्ज एफआईआर में नामजद आरोपियों की संख्या अलग-अलग है। महिला ने वीडियो में चार से पांच लोगों के शामिल होने का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस ने फिलहाल दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। मामले की जांच में आरोपों और घटना से जुड़े तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा।

  • उज्जैन सिंहस्थ 2028 में 40 करोड़ श्रद्धालुओं के भोजन की तैयारी, 15 जिलों में होगी सब्जियों और फूलों की खेती

    उज्जैन सिंहस्थ 2028 में 40 करोड़ श्रद्धालुओं के भोजन की तैयारी, 15 जिलों में होगी सब्जियों और फूलों की खेती


    मध्य प्रदेश: के उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 60 दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने से भोजन, सब्जियों और पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाले फूलों की मांग भी काफी बढ़ने की संभावना है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए उद्यानिकी विभाग ने दो साल का रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत प्रदेश के 15 जिलों में क्लस्टर मॉडल के माध्यम से सब्जियों और फूलों का अतिरिक्त उत्पादन किया जाएगा।

    योजना के अनुसार, करीब 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 8 हजार हेक्टेयर में सब्जियां और 8 हजार हेक्टेयर में फूल उगाए जाएंगे। इस पहल से लगभग 20 हजार किसानों को जोड़ने की योजना है। इसका उद्देश्य आयोजन के दौरान मांग के अनुरूप उत्पादन सुनिश्चित करना और श्रद्धालुओं की जरूरतों के लिए पर्याप्त कृषि उपज उपलब्ध कराना है।

    क्लस्टर मॉडल के तहत एक क्षेत्र के कई किसान आपसी समन्वय से निर्धारित मांग के अनुसार फसलें उगाएंगे। इससे विभाग को पहले से जानकारी मिल सकेगी कि किस इलाके में कौन-सी फसल कितने क्षेत्र में लगाई गई है और उससे कितनी पैदावार मिलने की संभावना है। सामान्य तौर पर किसान स्थानीय बाजार और अपनी सुविधा के अनुसार फसल चुनते हैं, लेकिन इस योजना में सिंहस्थ के दौरान होने वाली मांग को ध्यान में रखकर उत्पादन पर जोर दिया जाएगा।

    सब्जियों के अतिरिक्त उत्पादन के लिए उज्जैन संभाग के सात जिलों को शामिल किया गया है। इनमें उज्जैन, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, रतलाम, नीमच और मंदसौर शामिल हैं। इन जिलों में दो साल के भीतर 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में हाइब्रिड सब्जियों की खेती विकसित करने की योजना है। इसके लिए किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने और उपयुक्त फसल का चयन करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    फूलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आठ जिलों में उत्पादन बढ़ाया जाएगा। इनमें उज्जैन, इंदौर, देवास, आगर-मालवा, खंडवा, छतरपुर, मैहर और दतिया शामिल हैं। सिंहस्थ के दौरान मंदिरों, अखाड़ों, आश्रमों और पूजा-पाठ के लिए फूलों की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए इन जिलों में 8 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में फूलों की खेती विकसित की जाएगी।

    उज्जैन में गेंदे और गुलाब की खेती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गेंदा उत्पादन के लिए लगभग 4,200 हेक्टेयर क्षेत्र में 25 क्लस्टर बनाने की योजना है, जिनसे 240 गांव जुड़ेंगे। वहीं, गुलाब की खेती का क्षेत्र बढ़ाकर 250 हेक्टेयर से अधिक करने का लक्ष्य है। इसके अलावा उज्जैन में करीब 19 एकड़ जमीन पर फूलों की खेती के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। यहां किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले पौधे, नई तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की योजना है। इससे फूलों के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता और परिवहन खर्च कम करने में मदद मिल सकती है।

    खेती बढ़ाने के साथ खेतों से ताजी सब्जियां समय पर उज्जैन पहुंचाना भी बड़ी चुनौती होगी। सब्जियां जल्दी खराब होती हैं, इसलिए योजना में खेतों के पास संग्रह केंद्र, छंटाई, श्रेणीकरण, पैकिंग और जरूरत के अनुसार शीतगृह विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है। रोजाना की मांग और आपूर्ति का डिजिटल रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

    उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक के.एस. मंडलोई के अनुसार, आयोजन से दो साल पहले ही किसानों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही 15 जिलों को जोड़कर ऐसी आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने की योजना है, जिससे किसी एक क्षेत्र में मौसम, बीमारी या कीट के कारण फसल खराब होने पर दूसरे जिले से आपूर्ति बढ़ाई जा सके। इस तरह सिंहस्थ के दौरान सब्जियों और फूलों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए उत्पादन से लेकर परिवहन तक की तैयारी की जा रही है।

  • उज्जैन में 48 दिनों से टेंट में विराजमान खड़े हनुमान जी, 450 आवेदन मिलने के बाद अब 25 अक्टूबर की बैठक पर नजर

    उज्जैन में 48 दिनों से टेंट में विराजमान खड़े हनुमान जी, 450 आवेदन मिलने के बाद अब 25 अक्टूबर की बैठक पर नजर

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर का विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है। छत्री चौक क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के दौरान प्राचीन मंदिर को हटाए जाने के बाद हनुमान जी की प्रतिमा पिछले 48 दिनों से टेंट में विराजमान है। श्रद्धालु लगातार मांग कर रहे हैं कि प्रतिमा को मंदिर में स्थापित किया जाए। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई प्रस्ताव नहीं आया है। अब 25 अक्टूबर के आसपास प्रशासन और संबंधित कमेटी के बीच संभावित बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं।

    उज्जैन में कंठल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी दौरान खड़े हनुमान जी के प्राचीन मंदिर को हटाया गया था, लेकिन प्रतिमा अब भी उसी स्थान पर टेंट के नीचे रखी हुई है। रोजाना श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर को लेकर भक्तों की मांग है कि प्रतिमा को उचित स्थान और मंदिर में स्थापित किया जाए, ताकि पूजा-अर्चना पहले की तरह हो सके।

    इस मुद्दे को लेकर श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। भक्तों का कहना है कि भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में विराजमान होने के बाद उनके परम भक्त हनुमान जी को भी मंदिर में स्थान मिलना चाहिए। उनका मानना है कि प्रतिमा का लंबे समय तक टेंट में रहना उनकी आस्था को प्रभावित कर रहा है। इसी मांग को लेकर क्षेत्र में हवन, यज्ञ और सुंदरकांड जैसे धार्मिक आयोजन भी किए गए। इनमें श्रद्धालुओं के साथ साधु-संत और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजनों के दौरान प्रतिमा को मौजूदा स्थान पर ही बनाए रखने की मांग उठाई गई।

    विश्व हिंदू परिषद के उज्जैन जिलाध्यक्ष राजेश आंजना के मुताबिक, मामले की स्थिति अब भी पहले दिन जैसी बनी हुई है। उनका कहना है कि प्रशासन की तरफ से अब तक कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। संगठन को इस मुद्दे पर अब तक 450 आवेदन प्राप्त हुए हैं। आंजना के अनुसार, इन आवेदनों के साथ करीब 45 हजार हस्ताक्षर होने की बात कही गई है। इसके अलावा 150 पंचायतों, व्यापारियों और 50 समाजों की ओर से भी प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग की गई है। ये आंकड़े संगठन की ओर से बताए गए हैं।

    मंदिर के आकार और निर्माण को लेकर भी चर्चा हो रही है। आंजना ने कहा कि शासन-प्रशासन को मंदिर के लिए स्पष्ट मापदंड तय करने चाहिए। उन्होंने मंदिर के लिए उपलब्ध जगह और उसके निर्माण से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई। हालांकि, अब तक प्रशासन की ओर से किसी प्रस्ताव या अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

    इस बीच खड़े हनुमान जी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी है। पुजारी महेश बैरागी के अनुसार, रोजाना लगभग पांच से दस हजार लोग दर्शन करने आते हैं। उनके मुताबिक, इस सप्ताह झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, मिजोरम और पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु पहुंचे हैं। इस तरह मंदिर से जुड़ा मामला स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा और दूर-दराज से लोग दर्शन के लिए उज्जैन आ रहे हैं।

    अब 25 अक्टूबर के आसपास प्रशासन और कमेटी के बीच संभावित बैठक को अहम माना जा रहा है। विश्व हिंदू परिषद इस मामले में प्रशासन से बातचीत कर समाधान चाहता है। फिलहाल प्रतिमा टेंट में ही विराजमान है और श्रद्धालुओं की प्रमुख मांग यही है कि खड़े हनुमान जी को उनके स्थान पर मंदिर में स्थापित किया जाए। बैठक में कोई सहमति बनती है या नहीं, इस पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।

  • उज्जैन से दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा शुरू, पत्नी संग दर्शन के बाद 70 दिन पैदल चलेंगे

    उज्जैन से दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा शुरू, पत्नी संग दर्शन के बाद 70 दिन पैदल चलेंगे

    मध्य प्रदेश: के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा 20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू हो गई। मंदिरों में चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर निकाली जा रही यह यात्रा लगभग 950 किलोमीटर की दूरी तय करके अयोध्या स्थित राम मंदिर पहुंचेगी। इसे करीब 70 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे।

    यात्रा शुरू करने से पहले दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया। उन्होंने सबसे पहले चिंतामन गणेश मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद नृसिंह घाट के पास बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। महाकाल मंदिर में दर्शन करने के बाद यात्रा आगे बढ़ी।

    यात्रा के पहले दिन लगभग तीन हजार लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई। आगे के पड़ावों पर प्रतिदिन एक हजार से 1,500 लोगों के जुड़ने का अनुमान है। इसमें साधु-संतों, सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों, कांग्रेस कार्यकर्ताओं, विधायकों और महिलाओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है। यात्रा के माध्यम से मंदिरों में आने वाले चढ़ावे और धार्मिक स्थलों के संचालन से संबंधित व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की मांग उठाई जा रही है।

    दिग्विजय सिंह ने यात्रा के दौरान भोजन, नाश्ते, चाय और ठहरने की व्यवस्था को लेकर भी बात कही है। अलग-अलग पड़ावों पर सहयोग करने वाले लोग इन व्यवस्थाओं में मदद करेंगे। उनका कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि यात्रा के दौरान भोजन और भंडारों का खर्च कौन उठा रहा है। यात्रा का उद्देश्य धार्मिक स्थलों से जुड़ी व्यवस्थाओं और चढ़ावे के उपयोग में स्पष्टता की मांग को सामने लाना है।

    यात्रा का पहला पड़ाव उज्जैन के कानीपुरा में रखा गया है। शहर में यात्रा पटनी बाजार, गोपाल मंदिर, कमरी मार्ग चौराहा, टंकी चौराहा, मिर्जा नईम बेग मार्ग, तेलीवाड़ा चौराहा, कंठाल चौराहा, निजातपुरा और कोयला फाटक सहित कई इलाकों से होकर गुजरेगी। इसके बाद नगर निगम के सामने, गाड़ी अड्डा चौराहा, दरगाह मंडी और कानीपुरा रोड से आगे बढ़ेगी। तराना रोड स्थित श्री साईं कुंज कॉलोनी में रात के भोजन और विश्राम की व्यवस्था रखी गई है।

    कानीपुरा से आगे यात्रा सिंदुरिया, तराना और कनासिया होते हुए शाजापुर जिले की ओर जाएगी। मध्य प्रदेश में इसका प्रस्तावित मार्ग सारंगपुर, खुजनेर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर और चंदेरी से होकर गुजरेगा। इसके बाद यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी। वहां तालबेहट, जेरोन और ओरछा के बाद चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी होते हुए अयोध्या पहुंचने की योजना है। यात्रा का अंतिम पड़ाव राम मंदिर होगा।

    यात्रा के साथ एक विशेष रथ भी चल रहा है। इसमें भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। रथ में गंगा, यमुना, शिप्रा, कावेरी और नर्मदा नदियों के जल से भरे कलश भी रखे गए हैं। इस रथ का निर्माण भरत पोरवाल के निर्देशन में महावीर जैन और सतीश शर्मा ने किया है।

    करीब 70 दिनों में यात्रा पूरी करने के लिए दिग्विजय सिंह ने पैदल चलने की तैयारी पहले से की थी। इसके लिए वह प्रतिदिन लगभग आठ किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास कर रहे थे। अब उज्जैन से शुरू हुई यह यात्रा निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते हुए अयोध्या में समाप्त होगी।

  • MP में दो सड़क हादसे: उज्जैन में बस खाई में गिरी, दो बाइक सवारों की मौत, मैहर में ट्रक चालक ने तोड़ा दम

    MP में दो सड़क हादसे: उज्जैन में बस खाई में गिरी, दो बाइक सवारों की मौत, मैहर में ट्रक चालक ने तोड़ा दम


    उज्जैन। मध्य प्रदेश में शुक्रवार को दो अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई। उज्जैन के पास माकड़ोन फंटे पर बाइक सवारों को बचाने के प्रयास में शर्मा ट्रैवल्स की बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में उतर गई। हादसे में दो बाइक सवारों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। बस में सवार चार महिलाएं और तीन पुरुष भी घायल हुए हैं। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    वहीं, मैहर जिले में शुक्रवार शाम करीब 6:30 बजे एक ट्रक चालक की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इससे ट्रक बेकाबू होकर सड़क किनारे खड़ी बस से टकरा गया। हादसे में चालक की मौत हो गई।

    उज्जैन में बाइक सवारों को बचाने में खाई में उतरी बस
    जानकारी के अनुसार, बस क्रमांक MP-70-P-0161 आगर से उज्जैन आ रही थी। बस माकड़ोन फंटे के पास पहुंची, तभी उज्जैन से माकड़ोन की ओर जा रहे एक बाइक सवार ने अचानक मोड़ ले लिया। उसे बचाने के प्रयास में बस बाइक से टकरा गई और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। इसके बाद बस सड़क किनारे खाई में जा गिरी। इस दौरान एक अन्य बाइक सवार भी बस की चपेट में आ गया।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही घोंसला क्षेत्र के ग्रामीण और राघवी थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। स्थानीय लोगों और पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। घायलों को एंबुलेंस की मदद से घट्टिया अस्पताल पहुंचाया गया।

    दो बाइक सवारों की मौके पर मौत, कई यात्री घायल
    हादसे में जान गंवाने वाले बाइक सवारों की पहचान महेश, पिता बापू, और मोहन, पिता मांगीलाल, के रूप में हुई है। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, गोपाल सिंह नाम का एक अन्य बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हुआ है। बस में सवार चार महिलाएं और तीन पुरुष भी घायल हुए हैं। सभी घायलों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। राघवी थाना पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।

    मैहर में चालक की तबीयत बिगड़ी, खड़ी बस से टकराया ट्रक
    दूसरा हादसा शुक्रवार शाम मैहर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र में हुआ। सीमेंट फैक्ट्री से क्लिंकर लेकर उत्तर प्रदेश के रायबरेली जा रहा ट्रक रामवन पथ गमन रोड पर उमरी पैला के पास पहुंचा था। इसी दौरान चालक नीरज सिंह (33) की अचानक तबीयत बिगड़ गई। इससे वाहन पर से उसका नियंत्रण हट गया और ट्रक सड़क किनारे खड़ी बस से जा टकराया। हादसे में ट्रक चालक की मौत हो गई। मृतक उत्तर प्रदेश के रायबरेली का निवासी था।

    टायर पंचर होने के कारण सड़क किनारे खड़ी थी बस
    जानकारी के मुताबिक, बस डिंडौरी की ओर जा रही थी। उसमें सवार यात्री चित्रकूट से आंखों का इलाज कराकर लौट रहे थे। रास्ते में बस का टायर पंचर हो गया था, जिसके कारण चालक ने उसे सड़क किनारे रोक दिया था। टायर बदले जाने के दौरान ही बेकाबू ट्रक बस से टकरा गया।

    दोनों हादसों में पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की। उज्जैन में बस हादसे के कारणों की जांच की जा रही है, जबकि मैहर में ट्रक चालक की तबीयत अचानक बिगड़ने को दुर्घटना की वजह बताया जा रहा है।

  • मध्य प्रदेश में दो साल में 32 पटवारी रिश्वत लेते पकड़े गए, इंदौर-उज्जैन संभाग में जमीन संबंधी मामलों में कार्रवाई

    मध्य प्रदेश में दो साल में 32 पटवारी रिश्वत लेते पकड़े गए, इंदौर-उज्जैन संभाग में जमीन संबंधी मामलों में कार्रवाई


    मध्य प्रदेश:
    में जमीन से जुड़े कामकाज में रिश्वतखोरी के मामलों और स्वामित्व योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री कराने में आ रही दिक्कतों को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती बनी हुई है। पिछले दो वर्षों में इंदौर और उज्जैन संभाग के 16 जिलों में 32 पटवारी रिश्वत लेते हुए पकड़े गए हैं। इन मामलों में जमीन का नामांतरण, सीमांकन, ऋण पुस्तिका तैयार करने और सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने जैसे काम शामिल हैं। दूसरी ओर, स्वामित्व योजना के तहत शिविर लगाकर मुफ्त रजिस्ट्री कराने के निर्देशों पर भी पटवारियों की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।

    स्वामित्व योजना के अंतर्गत मुफ्त रजिस्ट्री कराने को लेकर पटवारियों की अनिच्छा प्रशासन के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। संबंधित पटवारियों का कहना है कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया में यदि कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो उनकी नौकरी पर भी संकट आ सकता है। उन्हें आशंका है कि भविष्य में जिले के अधिकारियों के बदलने पर उन्हें किसी तरह का संरक्षण नहीं मिलेगा। इसी वजह से वे इस काम को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं और निर्देशों के बावजूद प्रक्रिया में शामिल होने से बच रहे हैं।

    इस स्थिति को लेकर जिलों के कलेक्टर कई बार पटवारियों को फटकार लगा चुके हैं। उन्हें काम में सहयोग नहीं करने पर नौकरी से बर्खास्त करने की चेतावनी भी दी गई है। प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने भी कलेक्टरों के सामने इस मामले पर नाराजगी जाहिर की है। इसके बावजूद पटवारियों के रवैये में बदलाव नहीं आने की बात सामने आई है। प्रशासन की ओर से निर्देश दिए जाने के बाद भी योजना के तहत मुफ्त रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया में बाधाएं बनी हुई हैं।

    इसी बीच लोकायुक्त की कार्रवाई ने जमीन से जुड़े कामों में रिश्वत मांगने के मामलों को सामने रखा है। पिछले दो साल में इंदौर और उज्जैन संभाग के 16 जिलों में 32 पटवारी रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े गए। इन मामलों में रिश्वत की रकम दो हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक बताई गई। अलग-अलग मामलों में पटवारियों पर जमीन का नामांतरण करने, ऋण पुस्तिका बनवाने और सरकारी अभिलेखों में नाम दर्ज करने के बदले पैसे मांगने के आरोप सामने आए। सभी मामले जमीन से संबंधित कामकाज से जुड़े थे।

    इंदौर संभाग में अकेले 15 मामले दर्ज किए गए। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. राजेश सहाय के अनुसार, इन मामलों में शिकायत करने वाले लोग गरीब किसान और आदिवासी थे। उनसे जमीन का बंटान कराने, सीमांकन करवाने, ऋण पुस्तिका बनवाने और सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के बदले रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत मिलने के बाद संबंधित मामलों की जांच और सत्यापन किया गया। इसके बाद कार्रवाई करते हुए आरोपित पटवारियों को पकड़ा गया।

    कुछ मामलों में रिश्वत की रकम और काम की प्रकृति भी सामने आई। 29 सितंबर को पटवारी खूबसिंह धारवे और कुलदीप यादव को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने का मामला सामने आया। आरोप के मुताबिक, वे पट्टेदारों को रजिस्ट्री कराने से मना कर रहे थे और किसान का नामांतरण करने के लिए दो लाख रुपये मांग रहे थे। पैसे के बिना काम नहीं करने पर किसान ने शिकायत की थी।

    एक अन्य मामले में पटवारी दिनेश जगताप ने 450 वर्ग फीट के प्लॉट का नामांतरण करने के लिए तीन हजार रुपये मांगे थे। कार्रवाई के बाद उसे पकड़ा गया। अदालत से सजा मिलने पर उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। वहीं पटवारी कला भट्ट पर जमीन के कांकड़ का सीमांकन करने के लिए किसान से दस हजार रुपये मांगने का आरोप लगा। किसान के पैसे देने से इनकार करने पर काम रोक दिया गया था। बाद में लोकायुक्त की कार्रवाई में उसे दस हजार रुपये लेते हुए पकड़ा गया।

  • उज्जैन शाही मस्जिद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई, केवल तीन फीट हिस्सा हटाने और टीडीआर-एफएआर आश्वासनों के पालन की मांग

    उज्जैन शाही मस्जिद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई, केवल तीन फीट हिस्सा हटाने और टीडीआर-एफएआर आश्वासनों के पालन की मांग

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन में सिंहस्थ मेले की तैयारियों के तहत मास्टर प्लान के अनुसार सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी योजना के तहत सड़क की सीमा में बाधा बन रहे निर्माणों को हटाने की कार्रवाई नगर निगम की ओर से की जा रही है। शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने का मामला भी इसी कार्रवाई से जुड़ा है। इस मामले में दायर रिट अपील पर सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

    मस्जिद के निर्माण से जुड़े विवाद में पहले 9 सितंबर को एक याचिका दायर की गई थी। मास्टर प्लान की सड़क का हवाला देते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद एडवोकेट अशहर वारसी की ओर से अदालत के फैसले के खिलाफ रिट अपील दायर की गई। सोमवार को इसी अपील पर सुनवाई के दौरान मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने और नगर निगम की ओर से पहले दिए गए आश्वासनों के पालन का मुद्दा उठाया गया।

    सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि शाही मस्जिद का केवल तीन फीट हिस्सा ही हटाया जाए। बताया गया कि इस सीमित हिस्से को हटाने को लेकर पहले भी चर्चा हो चुकी थी। अपीलकर्ता की ओर से मांग रखी गई कि मस्जिद के बाकी हिस्से के संबंध में पहले हुई बातचीत और दिए गए आश्वासनों को ध्यान में रखा जाए।

    इसके साथ ही नगर निगम की ओर से पूर्व में दिए गए टीडीआर और एफएआर से संबंधित आश्वासनों का पूरी तरह पालन कराने की मांग भी अदालत के सामने रखी गई। अपीलकर्ता ने अदालत से इन आश्वासनों के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आदेश देने का अनुरोध किया। सुनवाई के दौरान मामला मुख्य रूप से मस्जिद के कितने हिस्से को हटाया जाना है और नगर निगम के पूर्व आश्वासनों का पालन किस तरह सुनिश्चित होगा, इन मुद्दों पर केंद्रित रहा।

    इसी सुनवाई के दौरान नई कमिटी की ओर से भी एक अलग याचिका दायर की गई थी। हालांकि, प्रशासन के साथ बातचीत होने के बाद कमिटी ने अपनी याचिका वापस ले ली। इस तरह नई कमिटी की ओर से दायर याचिका पर आगे कार्यवाही नहीं की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, याचिका वापस लेने का फैसला प्रशासन के साथ हुई बातचीत के बाद लिया गया।

    उज्जैन में सिंहस्थ मेले को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान की सड़क चौड़ीकरण योजना पर काम जारी है। इस योजना के तहत सड़क के विस्तार में बाधा बन रहे निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। शाही मस्जिद का मामला भी इसी प्रक्रिया के दौरान सामने आया है और अब इससे संबंधित विवाद हाईकोर्ट में पहुंच चुका है।

    इससे पहले इसी मास्टर प्लान के तहत सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पैतृक घर का बाधक हिस्सा भी हटाया गया था। यह कार्रवाई रविवार को हुई थी। शाही मस्जिद मामले में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने तीन फीट हिस्सा हटाने और टीडीआर-एफएआर से जुड़े आश्वासनों के पालन की मांग रखी। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया अदालत में जारी है।

  • उज्जैन में शाही मस्जिद पर कार्रवाई से पहले पथराव, पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी, महिला थाना प्रभारी घायल हुईं

    उज्जैन में शाही मस्जिद पर कार्रवाई से पहले पथराव, पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी, महिला थाना प्रभारी घायल हुईं


    मध्यप्रदेश: 
    के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण को लेकर सोमवार को तनाव की स्थिति बन गई। शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने के लिए प्रशासन की टीम कार्रवाई के लिए पहुंची थी। इसी दौरान विरोध कर रही भीड़ और पुलिस के बीच स्थिति बिगड़ गई। कुछ लोगों की ओर से पथराव किए जाने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े।

    शाही मस्जिद का हिस्सा सड़क चौड़ीकरण की योजना की जद में आ रहा है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी क्रम में प्रशासन की टीम शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची थी।

    कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। विरोध के दौरान टंकी चौराहे के आसपास स्थिति तनावपूर्ण हो गई। करीब 100 लोगों की भीड़ की ओर से मस्जिद परिसर में जाने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई। पुलिस ने लोगों को रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।

    स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बावजूद कुछ लोगों की ओर से पथराव जारी रहने की जानकारी सामने आई। इस दौरान पुलिस और प्रशासन की टीम को मौके पर स्थिति संभालने में मशक्कत करनी पड़ी।

    पथराव की घटना में क्राइम ब्रांच की थाना प्रभारी पुष्पा पांचाल घायल हो गईं। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ा दी गई। बड़ी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया है, ताकि किसी भी तरह की स्थिति को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

    शाही मस्जिद को लेकर पिछले कुछ समय से विरोध की स्थिति बनी हुई थी। सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के तहत मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का विरोध मुस्लिम समुदाय की ओर से किया जा रहा था। सोमवार को प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान यह विरोध पथराव तक पहुंच गया।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस लगातार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रही है। पुलिस की ओर से कहा गया है कि लोगों को घबराने या डरने की जरूरत नहीं है। किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल मौके पर मौजूद है।

    प्रशासन और पुलिस की टीम ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था संभाल रखी है। अधिकारियों की प्राथमिकता स्थिति को नियंत्रित रखना और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकना है। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और माहौल खराब करने वाली गतिविधियों से दूर रहने की अपील की है।

    सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी प्रक्रिया में शाही मस्जिद का प्रभावित हिस्सा हटाने को लेकर विरोध सामने आया है। सोमवार को कार्रवाई के दौरान हुए पथराव और उसके बाद आंसू गैस के इस्तेमाल से इलाके में तनाव बढ़ गया। फिलहाल मौके पर पुलिस बल तैनात है और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए निगरानी की जा रही है।

  • उज्जैन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए नया कदम, CM मोहन यादव ने महाकाल लोक थाने का किया लोकार्पण

    उज्जैन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए नया कदम, CM मोहन यादव ने महाकाल लोक थाने का किया लोकार्पण

    उज्जैन: में श्रद्धालुओं और शहरवासियों के लिए सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को बढ़ाने की दिशा में नई शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को महाकाल लोक स्थित अन्नक्षेत्र पार्किंग परिसर से पीएम ई-बस सेवा और उज्जैन दर्शन सेवा का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने शक्ति पथ से बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम के दौरान वेदपाठी बटुकों ने वैदिक मंत्रों का वाचन किया और डमरू वादन भी हुआ।

    उज्जैन में शुरू की गई यह सेवा श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को शहर के प्रमुख धार्मिक एवं दर्शनीय स्थलों तक पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित की जाएगी। पहले चरण में धार्मिक पर्यटन के लिए 10 इलेक्ट्रिक बसों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन बसों के जरिए यात्रियों को एक ही निर्धारित मार्ग पर उज्जैन के कई प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन में सार्वजनिक परिवहन की जरूरत को पूरा करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि करीब 21 साल पहले राज्य परिवहन निगम की बसें संचालित होती थीं, लेकिन बाद में सार्वजनिक बस सेवा बंद हो गई थी। अब इस कमी को दूर करने के लिए परिवहन व्यवस्था को दोबारा विस्तार दिया जा रहा है।

    नई व्यवस्था के तहत शहर के भीतर नगरीय बस सेवाओं के साथ दूसरे शहरों और राज्यों तक बस कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना भी बताई गई है। उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को ध्यान में रखते हुए 10 बसों से शुरुआत की गई है। आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार के साथ यात्रियों को अन्य मार्गों पर भी सुविधा मिल सकती है। प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा के जरिए आधुनिक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को बढ़ाया जा रहा है।

    उज्जैन दर्शन सेवा का निर्धारित मार्ग मेघदूत वन पार्किंग से शुरू होगा। यहां से बस महाकाल लोक पहुंचेगी। इसके बाद यात्रियों को हरसिद्धि मंदिर, क्षिप्रा नदी, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, भर्तृहरि गुफा, गढ़ कालिका माता मंदिर, काल भैरव मंदिर और सिद्धवट मंदिर तक ले जाया जाएगा।

    इसके बाद मार्ग में अंगारेश्वर मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, भूखी माता मंदिर, चिंतामण गणेश मंदिर, अष्ट विनायक मंदिर, शनि नवग्रह मंदिर, इस्कॉन मंदिर, बस स्टैंड और उज्जैन रेलवे स्टेशन शामिल होंगे। यात्रा पूरी होने के बाद बस दोबारा मेघदूत वन पार्किंग पहुंचकर निर्धारित चक्र पूरा करेगी।

    उज्जैन दर्शन सेवा के लिए यात्रियों को 200 रुपये शुल्क देना होगा। भुगतान के लिए यूपीआई की सुविधा उपलब्ध रहेगी। बसों को इलेक्ट्रिक तकनीक पर आधारित रखा गया है, जिससे इनके संचालन के दौरान सीधे तौर पर ईंधन आधारित उत्सर्जन नहीं होगा। इससे धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया है।

    उज्जैन में पहले चरण में 10 ई-बसों से सेवा शुरू की गई है। शहर के लिए कुल 100 इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था की जा रही है और इनके लिए मक्सी रोड स्थित पुराने डिपो में चार्जिंग से जुड़ा बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। आने वाले समय में बसों की संख्या बढ़ने के साथ शहर के अन्य निर्धारित मार्गों पर भी ई-बस सेवा का विस्तार किया जाना है।

    इस नई सेवा से उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को एक ही बस रूट के जरिए कई प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा। वहीं स्थानीय नागरिकों के लिए भी शहर में सार्वजनिक परिवहन का एक आधुनिक माध्यम उपलब्ध होगा। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से धार्मिक पर्यटन और शहरी परिवहन व्यवस्था को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।