Tag: Umang Singhar

  • भोपाल । MP की सियासत में UCC पर फिर संग्राम नेता प्रतिपक्ष बोले बीजेपी का काला कानून खत्म करेगी कांग्रेस सरकार

    भोपाल । MP की सियासत में UCC पर फिर संग्राम नेता प्रतिपक्ष बोले बीजेपी का काला कानून खत्म करेगी कांग्रेस सरकार


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजनीति में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। भोपाल के बुधवारा चौराहे पर आजादी के पखवाड़े के समापन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सरकार की यूसीसी नीति पर जमकर हमला बोला। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कई कांग्रेस नेता शामिल हुए। इसी मंच से उमंग सिंघार ने बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए कहा कि यदि आने वाले समय में कांग्रेस की सरकार बनती है तो यूसीसी को खत्म किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने विधानसभा में बहुमत के बल पर इस कानून को पारित कराया है।

    विधायक आरिफ मसूद की ओर से आयोजित जंग ए आजादी में उलमा की कुर्बानी कार्यक्रम के समापन समारोह में यूसीसी को लेकर कांग्रेस का रुख खुलकर सामने आया। उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की मंशा इस कानून को गांव गांव तक लागू करने की है। उन्होंने इसे काला कानून बताते हुए कहा कि बीजेपी ने अपने बहुमत का इस्तेमाल करके इसे पास करा लिया है लेकिन सत्ता परिवर्तन होने पर कांग्रेस इसे खत्म करने की दिशा में कदम उठाएगी। उनके इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की सियासत में यूसीसी को लेकर नया विवाद खड़ा होना तय माना जा रहा है।

    कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजक आरिफ मसूद की तारीफ करते हुए कहा कि मौजूदा दौर में जब समाज में नफरत का माहौल होने की बात कही जा रही है तब आजादी का पखवाड़ा आयोजित कर उन्होंने राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान के विचार को आगे बढ़ाने का काम किया है। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने बच्चों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया।

    मध्यप्रदेश में यूसीसी के प्रावधानों को लेकर सरकार की ओर से समान नागरिक व्यवस्था पर जोर दिया गया है। इसके तहत विवाह और तलाक से जुड़े नियमों को एक समान बनाने का प्रावधान है। बहुविवाह पर रोक के साथ विवाह और विवाह विच्छेद के पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा लिव इन रिलेशनशिप को लेकर भी पंजीकरण और सूचना से जुड़े नियम निर्धारित किए गए हैं। समर्थकों का तर्क है कि इन प्रावधानों से वैवाहिक अधिकारों में समानता आएगी और महिलाओं तथा बच्चों के कानूनी अधिकार मजबूत होंगे।

    उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में भी समान अधिकार का प्रावधान यूसीसी की प्रमुख विशेषताओं में बताया गया है। बेटे और बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही बच्चों के अधिकारों और भरण पोषण से जुड़े प्रावधानों को भी अधिक समान बनाने की कोशिश की गई है। कानून में विवाह और पारिवारिक संबंधों से जुड़ी कुछ पारंपरिक प्रथाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि इन प्रावधानों को लेकर अलग अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक समूहों की राय अलग रही है।

    यूसीसी के दायरे को लेकर जनजातीय समाज को विशेष छूट का प्रावधान भी चर्चा में रहा है। अनुसूचित जनजातियों की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और रीति रिवाजों को ध्यान में रखते हुए उन्हें कानून के कुछ प्रावधानों से बाहर रखने की व्यवस्था की गई है। सरकार इसे सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण से जोड़ती है जबकि कांग्रेस समेत विपक्षी दल इसके कई प्रावधानों और लागू करने के तरीके पर सवाल उठाते रहे हैं।

    भोपाल के इस कार्यक्रम के बाद यूसीसी एक बार फिर मध्यप्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। उमंग सिंघार के सरकार बनने पर कानून खत्म करने वाले बयान ने आगामी राजनीतिक बहस को और धार दे दी है। अब यह मुद्दा केवल कानूनी प्रावधानों तक सीमित न रहकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच वैचारिक और राजनीतिक टकराव का नया आधार बन सकता है।

  • एमपी विधानसभा में UCC विधेयक पेश, आज होगी चर्चा; उज्जैन जमीन विवाद पर हंगामे से कार्यवाही दो बार स्थगित

    एमपी विधानसभा में UCC विधेयक पेश, आज होगी चर्चा; उज्जैन जमीन विवाद पर हंगामे से कार्यवाही दो बार स्थगित


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिली। राज्य सरकार ने सदन में मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026 पेश कर दिया, जबकि विपक्ष ने उज्जैन जमीन खरीद मामले को लेकर जोरदार हंगामा किया। लगातार शोर-शराबे के चलते विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि UCC विधेयक पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा कराई जाएगी, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

    सत्र की शुरुआत से पहले ही कांग्रेस ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर विधानसभा पहुंचे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को समय पर खाद और बीज नहीं मिल रहे हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के बजाय दूसरे मुद्दों में उलझी हुई है।

    सदन के भीतर भी विपक्ष ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। उमंग सिंघार ने बरगी क्रूज हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और कथित रूप से अव्यवस्था से परेशान नीट परीक्षार्थियों का मुद्दा उठाते हुए विधानसभा सचिवालय पर श्रद्धांजलि सूची में नाम शामिल नहीं करने का सवाल खड़ा किया। इसके बाद उज्जैन में मुख्यमंत्री और उनके परिवार की जमीन खरीद से जुड़े मामले पर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव रखा, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस विधायकों ने तीखा विरोध किया और सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामा बढ़ने पर विधानसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

    सरकार ने इस दौरान केवल UCC विधेयक ही नहीं, बल्कि एक साथ कई महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन के पटल पर रखे। इनमें मध्य प्रदेश निरसन विधेयक, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, राजमार्ग संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, श्रम और उद्योग से जुड़े कई नए विधेयक शामिल हैं। कांग्रेस ने एक साथ इतने विधेयक पेश किए जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि इन्हें पहले कार्यसूची में शामिल नहीं किया गया था। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में इस पर चर्चा हो चुकी थी और सभी विधायकों को विधेयकों का अध्ययन करने का पर्याप्त समय मिलेगा।

    इसी बीच ओबीसी महासभा ने भी विधानसभा के बाहर 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और 13 प्रतिशत पदों को होल्ड मुक्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। संगठन के सदस्यों ने आरोप लगाया कि वर्षों से आंदोलन करने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    विधानसभा के पहले दिन की कार्यवाही ने साफ संकेत दे दिए हैं कि मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है। एक तरफ सरकार समान नागरिक संहिता समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष किसानों, आरक्षण, उज्जैन जमीन विवाद और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। अब सबकी निगाहें UCC विधेयक पर होने वाली चर्चा और उज्जैन जमीन मामले में सरकार के अगले रुख पर टिकी हैं।

  • मुरैना हत्याकांड पर उमंग सिंघार का वार बोले प्रदेश में कानून का डर खत्म

    मुरैना हत्याकांड पर उमंग सिंघार का वार बोले प्रदेश में कानून का डर खत्म


    भोपाल । मध्य प्रदेश के भोपाल में सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई जब उमंग सिंघार ने मुरैना में हुई दर्दनाक घटना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने रेत माफिया द्वारा वन विभाग के आरक्षक की हत्या को कानून व्यवस्था की बड़ी विफलता बताया

    दरअसल हाल ही में मुरैना में अवैध रेत खनन को रोकने गई टीम पर हमला हुआ था जिसमें वन विभाग के आरक्षक हरकेश गुर्जर की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी गई इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है

    इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं उन्होंने कहा कि जिस तरह दिनदहाड़े रेत माफिया ने कानून के रक्षक पर हमला कर उसकी जान ले ली वह बेहद भयावह और चिंताजनक है

    सिंघार ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि यह घटना इस बात का संकेत है कि अपराधियों में अब कानून का कोई डर नहीं बचा है उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में अवैध खनन माफिया खुलेआम सक्रिय हैं और प्रशासन उन्हें रोकने में नाकाम साबित हो रहा है

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती हैं उन्होंने मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं

    मुरैना की यह घटना अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रह गई है बल्कि इसने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर व्यापक बहस छेड़ दी है आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और भी तेज होने की संभावना है

  • MP में EMI मॉडल पर सरकार, नेता प्रतिपक्ष ने उठाए मुआवजा और कर्ज पर गंभीर सवाल

    MP में EMI मॉडल पर सरकार, नेता प्रतिपक्ष ने उठाए मुआवजा और कर्ज पर गंभीर सवाल

    भोपाल: मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा हादसे के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार की मुआवजा नीति और प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिंघार ने कहा कि प्रदेश में अब तक कोई समान कंपनसेशन पॉलिसी नहीं बनाई गई। उन्होंने बताया कि सरकार घोषणाएं तो कर देती है, लेकिन पीड़ित व्यक्ति को विभागों के चक्कर लगाते रहना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को एक स्पष्ट और सरल मुआवजा नीति बनानी चाहिए, जिससे किसी दुर्घटना के पीड़ित परिवारों को तुरंत राहत मिल सके।

    सिंघार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की सभा में शामिल न होने पर छिंदवाड़ा में अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की चेतावनी देने वाले पत्र जारी किए गए। इसके अलावा उन्होंने लाड़ली बहना योजना की राशि न मिलने की धमकी भी देने का आरोप लगाया। सिंघार ने कहा कि जिन टेंडरों में कमीशन मिलता है, उनके लिए सरकार तुरंत पॉलिसी बना देती है, लेकिन गरीब और पीड़ित परिवारों के लिए कोई ठोस नीति नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार ऐसे मामलों के लिए कोई सिंगल विंडो सिस्टम बनाएगी ताकि जनता को लगातार विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ें।

    एलपीजी गैस और व्यापारियों के मुद्दे पर भी सिंघार ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने एलपीजी गैस की अल्टरनेटिव पॉलिसी नहीं बताई और न ही यह स्पष्ट किया कि रिजर्व कितना है। इसके अलावा होटल व्यवसायियों और छोटे दुकानदारों के भविष्य और उनके व्यवसाय सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने सरकार की नीति पर सवाल खड़ा किया।

    सिंघार ने पिछले पांच वर्षों के आंकड़े पेश किए और बताया कि प्रदेश में 65 हजार से ज्यादा दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 14,791 लोगों की मौत हुई। इस मामले में मध्यप्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है। उनके अनुसार यह स्थिति सीधे तौर पर सरकार की विफलता को दर्शाती है।

    नेता प्रतिपक्ष ने मध्यप्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कर्ज लेने में माहिर हैं और प्रदेश को “EMI मॉडल” पर चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में भाजपा सरकार ने विकास के नाम पर लाखों करोड़ का कर्ज लिया, लेकिन सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में हालात जस के तस हैं। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष खत्म होने तक चौथी बार 2,500 करोड़ का कर्ज लिया गया और इस साल कुल कर्ज 91,500 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सिंघार ने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने तय कर लिया है कि प्रदेश को कर्ज में डुबोकर ही छोड़ेगी।

    सिंघार ने कहा कि जनता टैक्स पर टैक्स दे रही है, महंगाई झेल रही है, लेकिन सरकार बिना किसी रोडमैप और पारदर्शिता के कर्ज ले रही है। उन्होंने पूछा कि आखिर यह कर्ज किस योजना में लगा और इसका क्या परिणाम निकला। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को इसका जवाब देना होगा।

    सिंघार के अनुसार यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। उन्होंने प्रदेश सरकार को चेताया कि अब गरीबों और पीड़ित परिवारों के हितों को प्राथमिकता दी जाए और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

  • एमपी में GST चोरी का बड़ा आरोप: गुजरात-महाराष्ट्र से बिना टैक्स का माल खपाने का दावा, नेता प्रतिपक्ष ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र

    एमपी में GST चोरी का बड़ा आरोप: गुजरात-महाराष्ट्र से बिना टैक्स का माल खपाने का दावा, नेता प्रतिपक्ष ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र



    भोपाल। उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर हो रही कथित GST चोरी को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखकर पूरे मामले की केंद्रीय स्तर पर उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    गुजरात-महाराष्ट्र से आ रहा बिना टैक्स का माल
    सिंघार ने आरोप लगाया कि Madhya Pradesh में संगठित नेटवर्क के जरिए Gujarat, Maharashtra और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों से आयरन, कंस्ट्रक्शन मटेरियल और मसालों की खेप बिना वैध टैक्स चुकाए प्रदेश के बाजारों में खपाई जा रही है।

    ऐसे किया जा रहा टैक्स में घोटाला
    नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक इस नेटवर्क में कई तरीके अपनाए जा रहे हैंफर्जी E-Way बिल: ट्रकों में माल भरा होता है, लेकिन कागजों में फर्जी या हेरफेर किए गए E-Way बिल दिखाए जाते हैं।अंडर-इनवॉइसिंग: टैक्स बचाने के लिए माल की असली कीमत और मात्रा कागजों में कम दिखाई जाती है।बिचौलियों का नेटवर्क: बॉर्डर से लेकर जिलों तक ट्रांसपोर्टरों और बिचौलियों का संगठित सिंडिकेट सक्रिय है, जो बिना टैक्स चुकाए माल को सुरक्षित बाजारों तक पहुंचाता है।

    हजारों करोड़ के नुकसान का दावा
    उमंग सिंघार ने अपने पत्र में कहा कि इस संगठित टैक्स चोरी से केंद्र और राज्य सरकार को हर साल हजारों करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है और उनके पास इसके पुख्ता प्रमाण भी हैं।

    इन अधिकारियों को भी भेजी शिकायत
    मामले की गंभीरता को देखते हुए सिंघार ने अपने पत्र की प्रतियां कई अहम अधिकारियों को भी भेजी हैं, जिनमें शामिल हैं:Central Board of Indirect Taxes and Customs के अध्यक्षमध्यप्रदेश शासन के वित्त मंत्रीवाणिज्यिक कर विभाग (मप्र) के प्रमुख सचिव
    नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि पूरे नेटवर्क की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि टैक्स चोरी के इस कथित सिंडिकेट का खुलासा हो सके।

  • विजयपुर चुनाव फैसले पर सियासी घमासान: पटवारी-सिंघार ने BJP पर साधा निशाना

    विजयपुर चुनाव फैसले पर सियासी घमासान: पटवारी-सिंघार ने BJP पर साधा निशाना


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में विजयपुर को लेकर नया विवाद उभर कर सामने आया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने साफ कहा कि विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य घोषित करने के फैसले पर कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी। पटवारी ने न्यायपालिका का सम्मान करते हुए यह भी भरोसा जताया कि अदालत में पार्टी को न्याय मिलेगा। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उसे यह स्वीकार नहीं हो रहा कि एक आदिवासी नेता चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गया।

    पटवारी ने भाजपा पर तंज कसते हुए विधायक निर्मला सप्रे के मामले का जिक्र किया और कहा कि अगर हिम्मत है तो उस मामले में भी निर्णय करवा कर दिखाएं। उनका कहना था कि भाजपा दबाव बनाकर फैसले करवाने की कोशिश कर रही है और यह पूरी तरह से राजनीतिक रोटेशन का हिस्सा लगता है।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी राज्य सूचना आयोग में लंबित पदों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति लंबे समय से नहीं हो पाई है और सरकार इसमें बेहद धीमी गति से काम कर रही है। सिंघार ने कहा कि सरकार सांप की तरह धीरे-धीरे रेंगती है जबकि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति तुरंत होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत भी की है और दो सूचना आयुक्तों की नियुक्ति करनी तय की गई है।

    सिंघार ने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा से जुड़े मामले की भी याद दिलाई। उनका कहना था कि भाजपा दबाव बनाकर फैसले करवाने की कोशिश करती है और यह संभव है कि कांग्रेस की राज्यसभा सीट प्रभावित करने के लिए ऐसा किया जा रहा हो। वहीं गैस सिलेंडर की कमी और महंगाई पर भी उन्होंने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उनका कहना था कि सरकार हर मामले में देर से निर्णय लेती है कोविड काल में भी देरी हुई थी। उन्होंने कहा कि सरकार को टैक्स में कमी कर जनता को राहत देनी चाहिए लेकिन वह केवल अपना खजाना भरने में लगी है।

    बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस पर पलटवार किया। इंदौर में उन्होंने कहा कि कांग्रेस को उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करना चाहिए और न्यायालय के फैसले पर अनावश्यक टिप्पणी करने से उनकी अज्ञानता उजागर होती है। उन्होंने जीतू पटवारी और उमंग सिंघार के बयानों को तूल देने से भी बचने की सलाह दी।

    राजनीतिक गलियारों में यह विवाद लगातार गर्माता जा रहा है। विजयपुर विधानसभा सीट और संबंधित मामलों को लेकर दोनों पार्टियों के बीच सियासी टकराव और तेज होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है जबकि बीजेपी अपने पक्ष को मजबूत रखने के लिए लगातार बयानबाजी कर रही है।

  • मध्य प्रदेश राजनीति ताजा: विजयपुर फैसला, सूचना आयोग और गैस संकट पर विपक्ष-सत्तापक्ष आमने-सामने

    मध्य प्रदेश राजनीति ताजा: विजयपुर फैसला, सूचना आयोग और गैस संकट पर विपक्ष-सत्तापक्ष आमने-सामने


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन शून्य घोषित होने के फैसले को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी और न्यायपालिका का सम्मान करते हुए विश्वास जताया कि वहां न्याय मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मामले में दबाव बनाकर निर्णय करवाना चाहती है, क्योंकि उन्हें यह स्वीकार नहीं है कि एक आदिवासी नेता चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गया।

    पटवारी ने भाजपा को चुनौती देते हुए विधायक निर्मला सप्रे के मामले का भी जिक्र किया और कहा कि अगर सरकार में हिम्मत है तो इस मामले में भी निर्णय कराए। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य में सूचना आयोग के खाली पदों पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति लंबे समय से लंबित है और सरकार इस मामले में बेहद धीमी गति से काम कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत कर दो सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की मांग भी की।

    सिंघार ने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा से जुड़े मामले और गैस सिलेंडर की कमी एवं महंगाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना था कि भाजपा हर मामले में देर से निर्णय लेती है और जनता को राहत देने के बजाय केवल खजाना भरने में लगी है।

    वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस नेताओं के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करना चाहिए और अनावश्यक टिप्पणियों से उनकी अज्ञानता उजागर होती है।

    यह राजनीतिक वार्ता मध्य प्रदेश में आगामी चुनाव और राज्यसभा सीटों को लेकर बढ़ते तनाव की झलक देती है। विपक्ष और सरकार के बीच जारी इस बहस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिक गई हैं।

    Keywords: विजयपुर फैसला, मध्य प्रदेश राजनीति, जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, भाजपा, सुप्रीम कोर्ट, निर्मला सप्रे, सूचना आयोग, नरोत्तम मिश्रा, गैस सिलेंडर, महंगाई, आदिवासी विधायक

  • आलीराजपुर भगोरिया हाट में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आमने-सामने, मंच पर आदिवासी मुद्दों पर बहस

    आलीराजपुर भगोरिया हाट में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आमने-सामने, मंच पर आदिवासी मुद्दों पर बहस



    आलीराजपुर। प्रदेश के पारंपरिक भगोरिया पर्व के समापन अवसर पर आयोजित भगोरिया हाट में सोमवार को राजनीति की हलचल देखने को मिली। मंच पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आमने-सामने नजर आए। आयोजन के दौरान आदिवासी समाज की परंपराओं और संस्कृति की चर्चा के बीच दोनों नेताओं की बयानबाजी ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया।
    मंत्री ने दी शुभकामनाएं, योजनाओं का प्रचार:
    मंत्री विजयवर्गीय ने मंच से आदिवासी समाज को भगोरिया और होली की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार आदिवासियों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही है। मंत्री ने यह भी दावा किया कि इन योजनाओं के माध्यम से एक परिवार को 30 से 50 हजार रुपए तक का लाभ मिल रहा है।

    सिंघार ने उठाए सवाल:
    वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंच से सरकार और मंत्री पर तीखे सवाल उठाए और कई मुद्दों पर आलोचना की। उनके सवालों ने आयोजन को सिर्फ सांस्कृतिक उत्सव नहीं बल्कि राजनीतिक बहस का मंच बना दिया।

    राजनीतिक टिप्पणी से परहेज:
    मंत्री विजयवर्गीय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि वे केवल भगोरिया उत्सव में शामिल होने आए हैं और किसी प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी नहीं करेंगे। उन्होंने आदिवासी समाज की परंपरा और संस्कृति की सराहना करते हुए राजनीतिक सवालों से दूरी बनाई।

    सांस्कृतिक और राजनीतिक संतुलन:
    भगोरिया पर्व आदिवासी समाज की प्रमुख सांस्कृतिक धरोहर है। इस बार का हाट आयोजन न केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भरपूर था, बल्कि इसमें राजनीतिक नेताओं की आमने-सामने की बहस ने भी उत्सव को अलग पहचान दी।

    आदिवासी कल्याण योजनाओं का जिक्र:
    मंत्री ने विभिन्न सरकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि आदिवासी परिवारों को प्रतिवर्ष आर्थिक लाभ पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुँचाने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

     समारोह की खास बातें:
    भगोरिया हाट में पारंपरिक नृत्य, गीत, और आदिवासी शिल्प का प्रदर्शन हुआ। मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच नेताओं की बयानबाजी ने आयोजन को सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों रंगों में रंग दिया।

  • मध्य प्रदेश विधानसभा बजट सत्र2026: भागीरथपुरा दूषित पानी मामले पर स्थगन प्रस्ताव पर आज चर्चा, सियासी गरमाहट जारी

    मध्य प्रदेश विधानसभा बजट सत्र2026: भागीरथपुरा दूषित पानी मामले पर स्थगन प्रस्ताव पर आज चर्चा, सियासी गरमाहट जारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा बजट सत्र दौरान आज सदन में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल और उससे हुए लोगों की मौत का मामला फिर से चर्चा में है। यह मुद्दा पहले भी बजट सत्र के दौरान उठाया जा चुका है और विपक्ष स्थगन प्रस्ताव पर विस्तृत बहस की मांग कर रहा है।

    भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने की वजह से कई लोगों को स्वास्थ्य समस्याएं हुईं और कई की मौत भी हुई जिससे स्थानीय लोग और विपक्ष दोनों ही सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत आधा दर्जन से अधिक कांग्रेस विधायक स्थगन प्रस्ताव के दौरान अपनी बात रखेंगे। इस मुद्दे पर विपक्ष ने पहले भी जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था और संसद में इसे गंभीर विषय के रूप में उठाया।

    विपक्ष का आरोप है कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की आपूर्ति से बच्चों और बड़ों समेत अनेक लोगों को एक्यूट डायरिया जैसी बीमारी हुई जिसके चलते कम से कम 22 लोगों की मौत हुई है और कई दर्जन लोग अस्पताल में भर्ती रहे। कांग्रेस ने इसे सिस्टम की विफलता बताया और इसके लिए मंत्रियों की इस्तीफा की मांग भी की।

    सांसदों ने कहा कि दूषित पानी मामले को विस आवाज़ में उठाने के लिए स्थगन प्रस्ताव जरूरी है ताकि पूरे मुद्दे पर विस्तार से बहस हो और जवाबदेही तय की जा सके। विपक्ष ने तर्क दिया कि सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया और पीड़ितों को दी गई मुआवजे की राशि अपर्याप्त है जबकि जिम्मेदार अधिकारियों और प्रतिनिधियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

    सरकार की ओर से जवाब में कहा गया है कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। स्वास्थ्य और नगर प्रशासन विभागों ने घटनास्थल पर कार्यवाही की है और दोषी अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मामला राजनीति से ऊपर है और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने सहित राहत कार्य किये जा रहे हैं।

    सदन में इस मुद्दे को लेकर कई बार कार्यवाही स्थगित भी हुई क्योंकि विपक्ष ने इसे व्यापक रूप से उठाने की मांग की है। कांग्रेस ने दावा किया कि दूषित पानी से मरने वालों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज़्यादा हो सकती है और सरकार की जवाबदेही तय किये बिना इस मुद्दे पर आगे नहीं बढ़ा जाये।

    राज्यसभा में नेताओं ने जोर देकर कहा है कि सदी में स्वच्छ भारत की बात करते हुए यदि नागरिकों को सुरक्षित पीने का पानी न मिल रहा हो तो यह गंभीर समस्या है जिसे जल्द ही नीति स्तर पर भी संबोधित किया जाना चाहिए। स्थगन प्रस्ताव पर आज होने वाली चर्चा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • MP बजट सत्र: इंदौर भागीरथपुरा कांड पर विपक्ष का हंगामा, डिप्टी सीएम और मंत्री विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग

    MP बजट सत्र: इंदौर भागीरथपुरा कांड पर विपक्ष का हंगामा, डिप्टी सीएम और मंत्री विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग


    भोपाल । मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार को चौथे दिन भी हंगामेदार रहा। कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने थाली बजाकर विरोध प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बजट को आम जनता के लिए “ख्याली पुलाव” बताया और सदन में जोरदार हंगामा किया।

    सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने इंदौर भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर आक्रोश जताया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे हादसा नहीं बल्कि हत्या बताया और संबंधित मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, इंदौर सांसद शंकर लालवानी और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के इस्तीफे की मांग की। इसके बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

    डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि 21 से 29 दिसंबर के बीच डायरिया फैलने के बाद स्थिति गंभीर हुई थी और 22 मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए की राहत दी गई। इसके बावजूद विपक्ष ने मृतकों की संख्या 35 बताते हुए सभी परिवारों को मुआवजा देने और मंत्रियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार की गंभीर कार्रवाई का उल्लेख किया और आईएएस अधिकारी के निलंबन की जानकारी दी।

    सदन में अन्य मुद्दों पर भी हंगामा हुआ। अनूपपुर में फीस के दुरुपयोग का मामला उठाया गया। विपक्ष के विरोध के बीच डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने सरकार का पक्ष रखा।

    बजट सत्र के पहले तीन दिन भी विवादों और हंगामेदार घटनाओं से भरे रहे। पहले दिन राज्यपाल मंगु भाई पटेल का अभिभाषण और वंदे मातरम् के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया। दूसरे दिन वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया, जिसकी चर्चा 23 फरवरी को होगी। तीसरे दिन 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपए के बजट पर भाषण हुआ, जिसमें 8वीं तक टेट्रा पैक दूध फ्री और 15,000 शिक्षकों की भर्ती जैसे ऐलान शामिल थे।

    बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा। इस दौरान कुल 3,478 प्रश्न, 236 ध्यानाकर्षण, 10 स्थगन प्रस्ताव, 41 अशासकीय संकल्प और शून्य काल में 83 सवाल विधानसभा में रखे जाएंगे।