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  • लखनऊ में बसपा बैठक: मायावती बोलीं-जनता का जीवन मुश्किल, संगठन मजबूत करने पर जोर

    लखनऊ में बसपा बैठक: मायावती बोलीं-जनता का जीवन मुश्किल, संगठन मजबूत करने पर जोर



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    लखनऊ में मॉल एवेन्यू स्थित अपने आवास पर रविवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने राज्य स्तरीय बैठक की। इस बैठक में उन्होंने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर कार्यकर्ताओं को अहम निर्देश दिए। बैठक में आकाश आनंद और आनंद कुमार समेत प्रदेश के सभी जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

    बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में मायावती ने कहा कि मौजूदा समय में जनता विरोधी नीतियों और छलावे की राजनीति के कारण आम लोगों का आत्मसम्मान के साथ जीना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जाए और जनता तक पार्टी की नीतियों को प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए।

    मायावती ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बसपा के पक्ष में जनरुझान बढ़ रहा है और पार्टी का लक्ष्य प्रदेश में पांचवीं बार सरकार बनाना है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को “हाथी पर बटन दबाना है” के संदेश के साथ पूरी ताकत से चुनावी तैयारियों में जुटना होगा।

    उन्होंने विपक्षी दलों पर बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में जनता से किए गए वादों को भुला दिया जाता है। ऐसी राजनीति से लोगों का भला नहीं हो रहा है, इसलिए जनता को जागरूक करना जरूरी है।

    बसपा सुप्रीमो ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक दबाव और कानून व्यवस्था की समस्याओं के कारण आम जनता का जीवन कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकारों को रोजगार, रोटी, शांति और सामाजिक सौहार्द जैसे मूल मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

    मायावती ने यह भी दावा किया कि बसपा शासनकाल में सर्वजन हिताय की नीति के तहत बेहतर कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन कायम रहा था। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज समेत सभी वर्गों को उस समय सम्मान और भागीदारी मिली थी।

    बैठक में संगठनात्मक समीक्षा भी की गई और बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत करने की रणनीति तय की गई। साथ ही आगामी चुनावों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया।

  • सड़क पर नमाज विवाद: योगी सरकार के आदेश पर सियासत गरम, इकरा हसन का पलटवार

    सड़क पर नमाज विवाद: योगी सरकार के आदेश पर सियासत गरम, इकरा हसन का पलटवार



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के बयान के बाद जहां प्रशासनिक स्तर पर सख्ती देखी जा रही है, वहीं राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।

    बीजेपी नेता Nazia Ilahi Khan ने सीएम योगी के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि धार्मिक इबादत दूसरों को असुविधा में डालकर नहीं होनी चाहिए और इसे उचित स्थानों पर ही किया जाना चाहिए। उन्होंने सड़क पर नमाज को लेकर कड़ी टिप्पणी भी की।

    वहीं समाजवादी पार्टी सांसद Iqra Hasan ने सरकार के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि सड़क पर नमाज का मुद्दा जरूरत से ज्यादा तूल दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करने की कोशिश है और सभी को संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है।

    सीएम योगी ने स्पष्ट कहा है कि सड़कें सार्वजनिक आवागमन के लिए हैं, धार्मिक गतिविधियों के लिए नहीं, और ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • यूपी का ‘धुरंधर’ लउआ गांव: 32 साल तक जिस गांव के पास रही विधायकी

    यूपी का ‘धुरंधर’ लउआ गांव: 32 साल तक जिस गांव के पास रही विधायकी

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले का लउआ गांव अपनी अनोखी राजनीतिक विरासत के लिए जाना जाता है। इस गांव से निकले दो नेताओं हृदय नारायण दीक्षित और उदय राज यादव ने पुरवा विधानसभा सीट पर दशकों तक दबदबा बनाए रखा और मिलकर आठ बार जीत दर्ज की।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में उन्नाव जिले का एक छोटा-सा गांव लउआ किसी राजनीतिक ‘हॉटस्पॉट’ से कम नहीं रहा है। पुरवा विधानसभा क्षेत्र के इस गांव ने पिछले कई दशकों में ऐसी राजनीतिक कहानी लिखी है, जिसे राज्य की चुनावी इतिहास में एक अलग पहचान मिली है। वर्ष 1985 से लेकर 2012 तक इस गांव के दो नेताओं ने बारी-बारी से विधानसभा सीट पर कब्जा जमाए रखा और कुल मिलाकर 32 वर्षों तक इस क्षेत्र की राजनीति पर प्रभाव बनाए रखा।

    इस गांव से निकलकर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले दो प्रमुख नाम हैं—भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पद्मश्री से सम्मानित हृदय नारायण दीक्षित और समाजवादी पार्टी के नेता उदय राज यादव। दोनों नेताओं ने अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनाव लड़कर पुरवा विधानसभा में लगातार सफलता हासिल की और अपने क्षेत्र को राजनीतिक नक्शे पर खास स्थान दिलाया।

    हृदय नारायण दीक्षित ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में की और पहली ही बार में जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने 1989 में जनता दल, 1991 में जनता पार्टी और 1993 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लगातार जीत दर्ज की। इस तरह उन्होंने पुरवा विधानसभा से चार बार विधायक बनकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की। बाद में 2017 में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर भगवंतनगर सीट से भी जीत दर्ज की और विधानसभा अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचे।

    दूसरी ओर, लउआ गांव के ही उदय राज यादव ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर पुरवा विधानसभा में लगातार चार बार—1996, 2002, 2007 और 2012—जीत हासिल की। उनकी लोकप्रियता का आधार उनका मजबूत जनसंपर्क और गांव-गांव तक सीधा जुड़ाव रहा। हालांकि 2017 और 2022 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन लंबे समय तक उनका प्रभाव क्षेत्र की राजनीति में बना रहा।

    पुरवा विधानसभा का चुनावी इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1952 से 2022 तक इस सीट पर कुल 18 विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें से 8 बार जीत लउआ गांव के इन दोनों नेताओं के खाते में गई। यह आंकड़ा अपने आप में इस गांव के राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।

    इस क्षेत्र की राजनीति की खास बात यह रही है कि यहां पार्टी से ज्यादा व्यक्तिगत छवि और जनता से जुड़ाव का असर देखने को मिलता रहा है। लोधी और यादव जाति के मतदाताओं की बड़ी संख्या, साथ ही सवर्ण और मुस्लिम वोटरों की निर्णायक भूमिका ने चुनावी समीकरणों को हमेशा रोचक बनाए रखा।

    दोनों नेताओं की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनका निरंतर जनता से संपर्क और जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रही। जहां हृदय नारायण दीक्षित अपनी वैचारिक और संगठनात्मक राजनीति के लिए जाने जाते हैं, वहीं उदय राज यादव जनसंपर्क आधारित समाजवादी राजनीति के प्रतीक रहे हैं।

    लउआ गांव की यह राजनीतिक कहानी आज भी यूपी की चुनावी राजनीति में एक मिसाल के रूप में देखी जाती है, जहां एक छोटे से गांव ने दो नेताओं के दम पर दशकों तक सत्ता समीकरणों को प्रभावित किया।

  • मायावती के घर पहुंचे कांग्रेस नेताओं को लगा झटका, BSP ने नहीं दी एंट्री; कांग्रेस ने जारी किया नोटिस

    मायावती के घर पहुंचे कांग्रेस नेताओं को लगा झटका, BSP ने नहीं दी एंट्री; कांग्रेस ने जारी किया नोटिस


    नई दिल्ली। Mayawati के लखनऊ स्थित आवास पर कांग्रेस के कुछ दलित नेताओं के पहुंचने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। बिना किसी तय कार्यक्रम के पहुंचे प्रतिनिधिमंडल को मायावती से मुलाकात नहीं मिल सकी, क्योंकि उनके आवास पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

    यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब यूपी की राजनीति में विपक्षी दलों के बीच संभावित गठबंधन और समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने अपने नेताओं के इस अचानक दौरे को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें नोटिस जारी कर दिया है।

    क्या हुआ था पूरा मामला?
    कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के कुछ नेता लखनऊ में बैठक के बाद अचानक Mayawati से शिष्टाचार मुलाकात के लिए उनके आवास पहुंचे थे। हालांकि, यह मुलाकात पहले से तय नहीं थी, जिसके चलते उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।

    प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेताओं ने दावा किया कि यह केवल एक शिष्टाचार भेंट थी और इसका कोई राजनीतिक संदेश नहीं था। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम को अनुशासनहीनता मानते हुए नोटिस जारी कर दिया।

    राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे
    यह घटना ऐसे समय में हुई है जब यूपी में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज हैं। कुछ ही घंटों पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने 2027 चुनाव को लेकर कांग्रेस के साथ सहयोग के संकेत दिए थे। ऐसे में इस घटना ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।

    कांग्रेस की सफाई
    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक अचानक लिया गया शिष्टाचार निर्णय था और इसका कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी को लेकर कोई संदेश देने जैसी बात पूरी तरह गलत है।

  • बयानबाजी तेज: राजभर ने अखिलेश यादव को घेरा, राजनीतिक टकराव बढ़ा

    बयानबाजी तेज: राजभर ने अखिलेश यादव को घेरा, राजनीतिक टकराव बढ़ा


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में सुभासपा प्रमुख Om Prakash Rajbhar ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव को घेरते हुए कहा कि अगर वह इतने “ज्ञानी-महाज्ञानी” हैं, तो उन्हें बताना चाहिए कि महाराजा सुहेलदेव के इतिहास को किस साजिश के तहत दबाया गया। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है।

    महाराजा सुहेलदेव के इतिहास पर छिड़ा नया विवाद
    राजभर ने अपने पोस्ट में महाराजा सुहेलदेव को पिछड़े समाज और वंचित वर्गों के सम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने दावा किया कि बहराइच की धरती पर महाराजा सुहेलदेव ने विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर इतिहास रचा था, लेकिन उनके योगदान को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे दलों ने पिछड़े वर्ग के नायकों को इतिहास में उचित स्थान नहीं दिया और उनकी गौरवगाथा को दबाने का प्रयास किया गया।

    सपा पर 13 साल की सत्ता का सवाल
    राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी यूपी में लंबे समय तक सत्ता में रही, लेकिन इस दौरान महाराजा सुहेलदेव के सम्मान और इतिहास को स्थापित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने सपा की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए इसे “मुगलिया और अंग्रेज मानसिकता” से जोड़ दिया। उनका कहना है कि पिछड़े समाज के नायकों के योगदान को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया, जिससे सामाजिक न्याय की अवधारणा कमजोर हुई।

    2027 चुनाव से पहले बढ़ेगा राजनीतिक घमासान
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक आएंगे, यूपी में जातीय और ऐतिहासिक मुद्दों पर राजनीति और तेज होगी। राजभर के इस बयान ने एक बार फिर पिछड़ा वर्ग की राजनीति को केंद्र में ला दिया है। फिलहाल समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

  • सीएम योगी से झगड़ लूंगा, पर आपको मंत्री बनवा दूंगा,अखिलेश पर ओमप्रकाश राजभर का तीखा पलटवार

    सीएम योगी से झगड़ लूंगा, पर आपको मंत्री बनवा दूंगा,अखिलेश पर ओमप्रकाश राजभर का तीखा पलटवार



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। सुभासपा प्रमुख और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर बेहद सख्त और व्यंग्यात्मक अंदाज में हमला बोला है। यह पूरा विवाद अखिलेश यादव के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे पर सवाल उठाए थे।

    अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि यूपी में नए मंत्रियों के नाम तय होने के बाद भी उनके विभागों का बंटवारा नहीं किया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि सरकार में मंत्रालयों और विभागों के बंटवारे में देरी की वजह अंदरूनी खींचतान और कमीशन का विवाद है। अखिलेश ने यह भी कहा था कि नए मंत्री सिर्फ “दर्शक दीर्घा” में बैठे नजर आ रहे हैं और फैसलों का इंतजार कर रहे हैं।

    इसके जवाब में ओमप्रकाश राजभर ने पहले अवधी भाषा में एक तीखा पोस्ट किया और फिर उसे हिंदी में भी साझा किया। उन्होंने अखिलेश यादव पर निजी और राजनीतिक दोनों तरह के तंज कसे। राजभर ने कहा कि अखिलेश के भाई के निधन के बाद उन्हें कुछ समय तक राजनीति से दूर रहकर शोक मनाना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय वे लगातार राजनीतिक बयान दे रहे हैं।

    राजभर ने अपने पोस्ट में लिखा कि अखिलेश “परिवार में गमी” के बावजूद राजनीति कर रहे हैं और दूसरों के घर की चिंता कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश को कम से कम तेरहवीं तक राजनीति से दूरी बनाए रखनी चाहिए थी।

    बात यहीं नहीं रुकी। ओमप्रकाश राजभर ने आगे व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव को मंत्री पद की इतनी इच्छा है, तो वे सुभासपा जॉइन कर लें। उन्होंने दावा किया कि वह खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी झगड़ लेंगे, लेकिन अखिलेश को किसी न किसी विभाग का मंत्री जरूर बनवा देंगे।

    उन्होंने यह भी कहा कि बेगाने मंत्रिमंडल में अखिलेश “दीवाने” बन रहे हैं और बिना वजह सरकार के फैसलों पर टिप्पणी कर रहे हैं।

    इस पूरे विवाद ने यूपी की सियासत में एक बार फिर गरमाहट बढ़ा दी है। जहां अखिलेश यादव सरकार पर निशाना साध रहे हैं, वहीं ओमप्रकाश राजभर उनके बयानों का कड़ा और चुटीला जवाब दे रहे हैं।

  • प्रतीक यादव की अस्थियां लेकर हरिद्वार रवाना हुआ परिवार, अपर्णा यादव चार्टर्ड प्लेन से पहुंचीं गंगा घाट

    प्रतीक यादव की अस्थियां लेकर हरिद्वार रवाना हुआ परिवार, अपर्णा यादव चार्टर्ड प्लेन से पहुंचीं गंगा घाट



    लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की अस्थियां आज हरिद्वार में गंगा में विसर्जित की जाएंगी। इसके लिए पत्नी अपर्णा यादव चार्टर्ड प्लेन से अस्थि कलश लेकर परिवार के साथ लखनऊ से रवाना हुईं। इस दौरान उनके साथ शिवपाल यादव के सांसद पुत्र आदित्य यादव, बेटियां प्रथमा और पद्मजा, पिता अरविंद बिष्ट और भाई अमन भी मौजूद रहे।

    अमौसी एयरपोर्ट से लेकर जॉलीग्रांट एयरपोर्ट तक पूरे सफर में परिवार के सदस्य अस्थि कलश के साथ रहे। इसके बाद सड़क मार्ग से हरिद्वार पहुंचकर जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर और स्वामी अवधेशानंद गिरि की मौजूदगी में गंगा तट पर विधिवत अस्थि विसर्जन किया जाएगा। सुरक्षा और निजीता को देखते हुए पूरा कार्यक्रम बेहद सीमित और वीवीआईपी स्तर पर आयोजित किया गया है।

    निजी जीवन और अंतिम विदाई की प्रक्रिया
    प्रतीक यादव का 13 मई को 38 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था, जिसके बाद 14 मई को लखनऊ में उनका अंतिम संस्कार किया गया था। उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने मुखाग्नि दी थी। प्रतीक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र थे और राजनीति से दूर रहते हुए रियल एस्टेट और फिटनेस व्यवसाय से जुड़े थे।

    पत्नी अपर्णा यादव, जो वर्तमान में भाजपा नेता और यूपी राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं, पूरे परिवार के साथ इस अंतिम यात्रा का हिस्सा बनीं। अपर्णा के पैतृक गांव उत्तराखंड में भी शोक का माहौल है, जहां लोग दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

  • कन्नौज हादसे पर अखिलेश यादव ने जताया शोक और आर्थिक मदद का किया ऐलान..

    कन्नौज हादसे पर अखिलेश यादव ने जताया शोक और आर्थिक मदद का किया ऐलान..


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के कन्नौज में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को शोक में डाल दिया है। इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद जहां स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू किया गया, वहीं राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।

    समाजवादी पार्टी के प्रमुख Akhilesh Yadav ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि ऐसे हादसे समाज को झकझोर कर रख देते हैं और पीड़ित परिवारों के लिए यह अपूरणीय क्षति होती है।

    उन्होंने अपने स्तर पर सहायता की घोषणा करते हुए कहा कि मृतकों के परिजनों को पार्टी की ओर से एक एक लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि प्रत्येक मृतक के परिवार को कम से कम दस लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि इस कठिन समय में उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार यह हादसा उस समय हुआ जब कोयले से लदा एक ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गया। बताया जा रहा है कि चालक ने सामने आ रहे वाहन को बचाने का प्रयास किया, जिसके कारण संतुलन बिगड़ गया और ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे की चपेट में आने से आसपास मौजूद लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए।

    घटना में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और घायलों को उपचार के लिए भर्ती कराया। सभी घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ओवरलोडिंग और यातायात नियमों की अनदेखी जैसी समस्याएं अक्सर इस तरह की घटनाओं का कारण बनती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त नियमों का पालन और प्रभावी निगरानी से ही ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

    स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर नाराजगी देखी गई है और उन्होंने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

  • पीएम मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का किया उद्घाटन, सपा पर बोला हमला, कहा- नोएडा को लूट का माध्यम बना दिया था

    पीएम मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का किया उद्घाटन, सपा पर बोला हमला, कहा- नोएडा को लूट का माध्यम बना दिया था


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले सपा सरकार में नोएडा को लूट का माध्यम बना दिया गया था लेकिन अब भाजपा शासन में यही नोएडा उत्तर प्रदेश के विकास का मजबूत आधार बन रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जेवर एयरपोर्ट से हर दो मिनट में एक विमान उड़ान भरेगा। प्रधानमंत्री ने युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश के नौजवान समझते हैं कि इस तरह की परियोजनाएं उनके भविष्य को नई दिशा और अवसर देने वाली हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा।

    पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज विकसित यूपी विकसित भारत अभियान के तहत एक नए दौर की शुरुआत हो रही है। उन्होंने वैश्विक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय दुनिया के कई हिस्सों में संकट की स्थिति बनी हुई है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते कई देशों में खाद्य सामग्री ईंधन और अन्य जरूरी संसाधनों की कमी देखने को मिल रही है। ऐसे समय में भारत भी मजबूती से इन चुनौतियों का सामना कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल भवन का निरीक्षण भी किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

    एयरपोर्ट से बढ़ती है तरक्की

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी देश में एयरपोर्ट केवल सुविधा नहीं बल्कि विकास को गति देने का माध्यम होते हैं। उन्होंने बताया कि साल 2014 से पहले देश में केवल 74 एयरपोर्ट थे जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि अब हवाई कनेक्टिविटी सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही बल्कि छोटे शहरों और कस्बों तक भी तेजी से पहुंच रही है।

  • विपक्ष ने देश को गहरी चोट पहुंचाई, लेकिन मोदी सरकार ने भारत को मजबूत बनाया: केशव प्रसाद मौर्य

    विपक्ष ने देश को गहरी चोट पहुंचाई, लेकिन मोदी सरकार ने भारत को मजबूत बनाया: केशव प्रसाद मौर्य

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्रीकेशव प्रसाद मौर्य ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्होंने देश को गहरी चोट पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन मुद्दों पर विपक्ष को देश के साथ खड़ा होना चाहिए वहां वह लगातार सरकार पर आरोप लगाने और भ्रम फैलाने का काम करता रहा है।

    वाराणसी के सर्किट हाउस में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान मौर्य ने कहा कि देश ने कई चुनौतियों का सामना किया है लेकिन विपक्ष ने हमेशा सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय सरकार को घेरने की राजनीति की है। उन्होंने कहा कि चीन द्वारा भारत की जमीन पर कब्जा करने और कश्मीर के एक हिस्से पर पाकिस्तान के नियंत्रण जैसे गंभीर मुद्दों के बावजूद विपक्ष सरकार पर आरोप लगाने से बाज नहीं आता।

    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि देशहित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर राजनीति करने से बचना चाहिए लेकिन दुर्भाग्य से विपक्षी दलों ने इन मुद्दों को भी राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि इससे देश की छवि और एकता को नुकसान पहुंचता है।

    मौर्य ने विशेष रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस भाषा और शैली में वे सरकार की आलोचना करते हैं वह किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल को शोभा नहीं देती। उनका कहना था कि लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार सभी को है लेकिन आलोचना तथ्यों और मर्यादा के साथ होनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश ने सुरक्षा विकास और वैश्विक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में भारत आज पहले से अधिक मजबूत और सुरक्षित हुआ है।

    मौर्य ने कहा कि मोदी सरकार ने देश की सीमाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया गया है। साथ ही सरकार ने विकास को भी समान महत्व देते हुए बुनियादी ढांचे रोजगार निवेश और जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से देश को आगे बढ़ाने का काम किया है।

    उन्होंने कहा कि आज भारत वैश्विक मंच पर एक मजबूत और प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। दुनिया के कई देश भारत के साथ साझेदारी बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं और यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और नीतियों का परिणाम है। उपमुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भी देश इसी तरह तेजी से प्रगति करेगा और भारत दुनिया की अग्रणी शक्तियों में शामिल होगा।