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  • UP: बारात में डांस करते-करते दूल्हे के भाई का नया Iphone नाले में गिरा… शादी छोड़ लगा दी छलांग

    UP: बारात में डांस करते-करते दूल्हे के भाई का नया Iphone नाले में गिरा… शादी छोड़ लगा दी छलांग


    औरैया।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के औरैया जिले (Auraiya district) में बाराती (Wedding Procession) के लिए डांस के दौरान लापरवाही एक बुरे सपने में बदल गया है। भाई की शादी के लिए एक दिन पहले ही खरीदा आईफोन (iPhone 17 Pro) डांस के दौरान नाले में गिर गया। अचानक हुई घटना से युवक अवाक रह गया। उसने आव देखा न ताव, अपने नए नवेले आईफोन के लिए बारात छोड़ नाले पर कूद गया। युवक को इस तरह नाले में कूदते देख बाराती भी हैरान रह गए। एक तरफ बारात में आतिशबाजी होती रही और अन्य बाराती जश्न में डूबे रहे तो दूसरी तरफ युवक गंदे नाले में अपना फोन तलाश करता रहा। इसी दौरान कुछ लोगों ने वीडियो भी बना लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

    बताया जाता है कि कानपुर का रहने वाला युवक औरैया में अपने फूफेरे भाई की शादी में शामिल होने आया था। बारात अपने पूरे रौ पर थी और बाराती नाच-गाने में लगे हुए थे। डांस के दौरान मोबाइल से फोटोग्राफी और सेल्फी का दौर भी चल रहा था। इसी दौरान तकिया चौराहे के पास युवक के हाथ से उसका आईफोन छिटक कर बगल से गुजर रहे नाले में गिर गया।


    उसी दिन खरीदा था मोबाइल, बारात छोड़ नाले में कूदा

    युवक ने बारात में आने से एक दिन पहले ही लिए आईफोन खरीदा था। ऐसे में मोबाइल के नाले में गिरते से उसे जोर का झटका लगा। फोन गिरते ही युवक बदहवास हो गया और बिना कुछ सोचे-समझे नाले में कूद गया। वह कभी हाथों से तो कभी पैर के सहारे नाले के कीचड़ और मलबे के बीच फोन को तलाशने लगा। युवक के नाले में कूदते ही कुछ लोगों ने वीडियो भी बनाना शुरू कर दया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रहा है। कुछ देर पहले जश्न में डूबे युवक की लाचारी वीडियो में साफ देखी जा रही है।


    भीड़ जुटी, पर नहीं मिली सफलता

    युवक को नाले में मोबाइल तलाशते देख मौके पर स्थानीय लोगों और राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई। बारात में शामिल कुछ अन्य दोस्तों ने भी उसकी मदद करने की कोशिश की, लेकिन नाले की गहराई और उसमें जमा सिल्ट (गाद) के कारण मोबाइल का कहीं पता नहीं चला। काफी मशक्कत और घंटों की तलाश के बाद भी जब सफलता नहीं मिली, तो युवक हताश होकर बाहर निकल आया।

    इस घटना ने एक बार फिर सेल्फी के प्रति बढ़ते जुनून और उससे होने वाली दुर्घटनाओं की ओर ध्यान खींचा है। छोटी सी लापरवाही किस तरह से भारी पड़ जाती है, उसका भी उदाहरण देखने को मिला है।

  • UP: हरदोई में श्रीराम और माता कौशल्या पर अभद्र टिप्पणी करने वाले सपा नेता गिरफ्तार, पार्टी ने भी निकाला

    UP: हरदोई में श्रीराम और माता कौशल्या पर अभद्र टिप्पणी करने वाले सपा नेता गिरफ्तार, पार्टी ने भी निकाला


    हरदोई।
    यूपी (UP) के हरदोई जिले (Hardoi district) में सार्वजनिक सभा में भगवान श्रीराम (Lord Shri Ram) और माता कौशल्या (Mother Kaushalya) पर अभद्र टिप्पणी करते सपा के प्रदेश सचिव यदुनंदन लाल वर्मा (Yadunanand Lal Verma) का वीडियो वायरल होने पर शुक्रवार को जिले भर में हिंदूवादी संगठनों के विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। शांति व्यवस्था बिगड़ती देख हरपालपुर कोतवाली पुलिस के उप निरीक्षक विजय शुक्ल की तरफ से आनन फानन प्राथमिकी दर्ज कर यदुनंदन लाल को गिरफ्तार कर लिया गया।

    प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार पंकज ने बताया कि यदुनंदन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। सपा के प्रदेश सचिव यदुनंदन लाल वर्मा की सार्वजनिक सभा का यह वीडियो हरपालपुर क्षेत्र का है लेकिन यह कब का है, यह साफ नहीं हो सका है। इस कृत्य के लिए सपा के भीतर भी यदुनंदन लाल की कड़ी आलोचना हो रही है।

    सपा जिलाध्यक्ष शराफत अली ने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं पर यदुनंदन लाल वर्मा के ऐसे बयान से शर्म आ रही है। उन्होंने बताया कि यदुनंदन लाल वर्मा की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समाप्त कर दी गई है। वर्मा पर कार्रवाई के लिए प्रदेश संगठन को लिखा गया है। वह कई पार्टियों में रह चुके हैं और मनचले टाइप के नेता हैं। वायरल वीडियो में हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र के कनत्थूखेड़ा गांव निवासी सपा के प्रदेश सचिव यदुनंदन लाल वर्मा भगवान श्रीराम पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिख रहे हैं।


    वीडियो वायरल होते ही हिंदूवादी संगठनों में उबाल

    वीडियो में वह भगवान श्रीराम, माता कौशल्या के साथ ही हिंदू धार्मिक ग्रंथों पर भी अभद्र और भ्रामक टिप्पणी की है। हालांकि वायरल वीडियो की पुष्टि संवाद न्यूज एजेंसी नहीं करती है। वीडियो वायरल होते ही हिंदूवादी संगठनों में उबाल आ गया। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से इस मामले में कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही।


    भाजपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं यदुनंदन

    जिले भर में हिंदूवादी संगठनों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई कर वर्मा को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इससे पहले पुलिस यदुनंदन के पुत्र अनिरुद्ध मित्र लोधी को हिरासत में लेकर कोतवाली ले आई थी। यदुनंदन लाल वर्मा 2008 में हुए उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। इसके पहले वह बसपा के टिकट पर भी दो बार किस्मत आजमा चुके हैं।

  • UP: रसोई गैस सिलेंडर बुकिंग के अंतराल में बड़ा बदलाव… इन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

    UP: रसोई गैस सिलेंडर बुकिंग के अंतराल में बड़ा बदलाव… इन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत


    आगरा।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के आगरा (Agra) में रसोई गैस सिलिंडर (LPG cylinders) के बुकिंग अंतराल (Booking Interval.) में तेल कंपनियों ने मंगलवार को बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत अब उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों और सामान्य उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग की समय सीमा अलग-अलग तय कर दी गई है।

    अब 5 किलो का ‘छोटू’ सिलिंडर उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 16 दिन में, जबकि सामान्य उपभोक्ताओं को 9 दिन में मिल सकेगा। गैस की कालाबाजारी रोकने और खपत के सटीक आकलन के लिए जारी इस नई सूची का सबसे बड़ा असर जिले के 3.41 लाख उज्ज्वला लाभार्थियों पर पड़ेगा।

    नई व्यवस्था के अनुसार, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए 14.2 किलोग्राम वाले सिलिंडर की बुकिंग का अंतर बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है। वहीं, सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह सीमा 25 दिन निर्धारित की गई है। 10 किलो वाले कंपोजिट सिलिंडर 18 दिन में मिलेगा।

    दोहरे कनेक्शन वालों को 35 दिन बाद मिलेगा दूसरा सिलिंडर
    गैस सिलिंडर की किल्लत और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए तेल कंपनियों ने सॉफ्टवेयर में बड़े तकनीकी बदलाव किए हैं। अब दो सिलिंडर वाले ग्राहकों को रिफिल बुक करने के लिए कम से कम 35 दिनों का इंतजार करना होगा। वहीं, एक सिलिंडर वाले उपभोक्ताओं के लिए यह समय सीमा 25 दिन तय की गई है। जिला पूर्ति अधिकारी आनंद कुमार के मुताबिक, यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।


    गैस किल्लत के बीच बड़ा फैसला

    वहीं, आगरा में व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति को लेकर मचे घमासान के बीच जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सिलिंडर सप्लाई करने वाली ऑयल कंपनियों और जिला पूर्ति अधिकारी के साथ अहम बैठक की। बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए डीएम ने साफ कर दिया कि अब व्यावसायिक उपभोक्ताओं को उनके औसत उपभोग का केवल 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा ही आवंटित किया जाएगा।

    भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की नई गाइडलाइन का हवाला देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि उपभोक्ताओं को दो श्रेणियों में बांटा गया है। अस्पताल, रेलवे और शैक्षणिक संस्थान जैसी अति आवश्यक सेवाओं को उनके पिछले तीन माह के औसत उपभोग का 20 प्रतिशत कोटा मिलेगा।

    वहीं, होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा जैसी आवश्यक सेवाओं को केवल 10 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। बैठक में डीएम ने चेतावनी दी कि गैस सिलिंडरों की किल्लत के बीच यदि कोई एजेंसी, बिचौलिया या व्यक्ति जमाखोरी या घरेलू सिलिंडर का व्यावसायिक उपयोग में लिप्त पाया गया, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पूर्ति विभाग को निर्देश दिए कि इस नई व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए ताकि वास्तविक उपभोक्ताओं को परेशानी न हो।


    डबल सिलिंडर होने पर गैस बुकिंग अब 35 दिन बाद

    – उपभोक्ताओं की रसोई गैस से जुड़ी समस्याएं और बढ़ सकती है। अब दो सिलिंडर वाले उपभोक्ता 35 दिन बाद गैस बुकिंग करा सकेंगे।
    – उज्ज्वला कनेक्शन धारक 45 दिन बाद सिलिंडर बुक करा सकेंगे। एकल वाले 25 दिन बाद सिलिंडर बुक करा सकेंगे।
    – नए नियम शहरी-ग्रामीण सभी क्षेत्रों में लागू होंगे। तय सीमा से पहले बुकिंग पर सिस्टम स्वतः ब्लॉक कर देगा।
    – 5 किलो घरेलू सिलिंडर के लिए शहरी क्षेत्र में नौ दिन व ग्रामीण क्षेत्र में 16 दिन का अंतराल तय किया है।
    – 10 किलो कंपोजिट सिलिंडर के लिए शहरी क्षेत्र में 18 दिन व ग्रामीण क्षेत्र में 32 दिन का अंतराल तय किया गया है।

  • यूपी में गो माता पूरी तरह सुरक्षित: केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को चेताया

    यूपी में गो माता पूरी तरह सुरक्षित: केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को चेताया



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में कहीं भी गोहत्या नहीं हो रही है और किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि गो माता को खरोंच तक पहुंचा सके। उन्होंने यह बात सोमवार को वाराणसी के सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान कही। मौर्य ने कहा कि सरकार गो संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में पहले भी व्यापक आंदोलन किए गए हैं।

    यह बयान Keshav Prasad Maurya ने उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक गोहत्या होने के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए दिया, जो स्वामी Avimukteshwaranand द्वारा लगाए गए थे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी Avimukteshwaranand को कहीं भी आने-जाने और अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, और सरकार उनके सम्मान की पूरी सुरक्षा करती है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता सब समझती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिनके शासनकाल में शिव भक्तों, राम भक्तों और गो भक्तों पर अत्याचार हुए, वे आज गो रक्षा की बात कर रहे हैं।

    राज्य सरकार ने लगातार गो संरक्षण को प्राथमिकता दी है। गौशालाओं और गो रक्षा समितियों के माध्यम से गो माता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, और कानूनी प्रावधानों के तहत गोहत्या और हिंसा के मामलों पर सख्त कार्रवाई होती है। इस दिशा में सरकार ने पुलिस और वन विभाग के साथ मिलकर नियमित निगरानी प्रणाली लागू की है।

    Keshav Prasad Maurya का यह बयान प्रदेश में धार्मिक और सामाजिक स्थिरता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या संगठन कानून का उल्लंघन करते हुए गो माता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    इस प्रकार के राजनीतिक और धार्मिक बयान समाज में चर्चा का विषय बनते हैं, लेकिन उपमुख्यमंत्री ने इसे संतुलित और शांतिपूर्ण तरीके से पेश किया है, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि गो माता की सुरक्षा और कानून की पालना दोनों सुनिश्चित हों।

  • UP Politics: पल्लवी पटेल के साथ अलायंस फेल, अब बसपा का मिलेगा साथ! यूपी में क्या होगी ओवैसी की पॉलिटिक्स?

    UP Politics: पल्लवी पटेल के साथ अलायंस फेल, अब बसपा का मिलेगा साथ! यूपी में क्या होगी ओवैसी की पॉलिटिक्स?

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए एक साल से भी कम का वक्त बचा है. इस बीच राज्य में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं. सपा और कांग्रेस जहां भारतीय राष्ट्रीय समावेशी विकास गठबंधन यानी इंडिया अलायंस के परचम तले चुनाव लड़ सकते हैं तो वहीं बीजेपी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और निर्बल भारतीय शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) के साथ मैदान में उतरेगी. उधर, बसपा अभी भी अकेले ही मैदान में उतरने का मूड बना रही है.

    इन सबके बीच हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी यूपी चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतरने की तैयारी कर रही है. अगर पार्टी चुनाव में उतरती है तो यह उसका चौथा चुनाव होगा.

    वर्ष 2017, 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद एआईएमआईएम ने कुछ क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर एक मोर्चा बनाया था. यह मोर्चा सपा चीफ के पीडीए फॉर्मूले के मुकाबले के तौर पर पीडीएम बनाया गया था. जिसमें पिछड़ा, दलित मुसलमान की बात की गई थी. इस मोर्चे ने 25 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे. हालांकि इसमें AIMIM का एक भी प्रत्याशी नहीं था.

    अब 2027 के चुनाव के लिए दावा है कि एआईएमआईएम, बसपा के साथ अलायंस कर सकती है. ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि राज्य में गठबंधन करने के लिए आतुर AIMIM का इस संदर्भ में पुराना इतिहास क्या रहा है? इसके साथ ही यह भी बात हो रही है कि जो एआईएमआईएम, बसपा के हाथी की सवारी कर राज्य में एंट्री की कोशिश में उसकी क्या स्थिति है?

    बता दें AIMIM ने वर्ष 2017 के यूपी विधानसभा का चुनाव 38 सीटों पर लड़ा था. 37 सीटों पर पार्टी की जमानत जब्त हो गई थी.इस चुनाव में AIMIM को 2,04,142 वोट मिले थे. AIMIM ने जिन सीटों पर चुनाव लड़ा था, वो मुख्यतौर पर पश्चिम उत्तर प्रदेश की मुस्लिम बहुल सीटें थीं. उधर, 2022 में एआईएमआईएम ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे सिर्फ .49% वोट मिले थे.

    2024 के चुनाव कितना कारगर रहा ओवैसी का अलायंस?

    2024 चुनाव में पीडीएम मोर्चा बनाने वाली एआईएमआईएम ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा लेकिन उसके साथ का फायदा अन्य दल को भी नहीं मिला. इस चुनाव में अपना दल कमेरावादी की नेता पल्लवी पटेल ने प्रत्याशी उतारे और उन्हें कुल मतदान में से सिर्फ .4 फीसदी वोट मिले और नतीजा सिफर रहा. ऐसे में यह स्पष्ट है कि एआईएमआईएम के साथ का लाभ अपना दल कमेरावादी को नहीं हुआ.

    बसपा के साथ कितना फिट होंगे ओवैसी?
    वहीं बसपा की बात करें तो लोकसभा चुनाव में उसे कुल वोट का 9.46 फीसदी मत मिले थे. हालांकि लोकसभा में उसका खाता नहीं खुला था. विधानसभा में भी बसपा का सिर्फ 1 ही विधायक है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगर एआईएमआईएम और बसपा साथ आते भी हैं तब भी किसी बड़े जादू की उम्मीद फिलहाल नहीं है.

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यूपी में एआईएमआईएम की आगामी रणनीति क्या होगी और वह धरातल पर कितनी मजबूती के साथ उतरेगी.

  • हम दो-हमारे दो दर्जन, AIMIM यूपी अध्यक्ष शौकत अली बोले- ज्यादा जनसंख्या देश की ताकत

    हम दो-हमारे दो दर्जन, AIMIM यूपी अध्यक्ष शौकत अली बोले- ज्यादा जनसंख्या देश की ताकत


    नई दिल्ली । एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने एक बार फिर विवादित राग छेड़ा है। जनसंख्या नियंत्रण की सरकारी नीतियों और सामाजिक विमर्श के उलट, उन्होंने आबादी बढ़ाने को देश की मजबूती से जोड़कर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली अपने बयानों के चलते एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। सोमवार को मुरादाबाद के रामपुर दोराहा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने जनसंख्या वृद्धि को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। शौकत अली ने मुसलमानों से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील करते हुए नारा दिया कि “हम दो, हमारे दो नहीं, बल्कि हमारे दो दर्जन होने चाहिए।
    शौकत अली ने अपने संबोधन में जनसंख्या नियंत्रण के वैश्विक और राष्ट्रीय तर्कों को दरकिनार करते हुए दावा किया कि किसी भी देश की असली मजबूती उसकी बड़ी आबादी में निहित होती है। उन्होंने धार्मिक भावनाओं को जोड़ते हुए कहा, “जब अल्लाह बच्चों की नेमत दे रहा है, तो उसे पूरी खुशी के साथ स्वीकार करना चाहिए। बच्चे ऊपर वाले की देन हैं और उन्हें रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने तर्क दिया कि आबादी बढ़ने से देश कमजोर नहीं बल्कि और अधिक ताकतवर होकर उभरेगा।
    कुंवारे नेताओं पर कसा तंज
    जनसंख्या नियंत्रण की वकालत करने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए शौकत अली ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद शादी नहीं करते या जिनका अपना परिवार नहीं है, वही दूसरों को जनसंख्या नियंत्रण का ज्ञान बांटते फिर रहे हैं। उनका यह इशारा सीधे तौर पर सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं की ओर माना जा रहा है। साथ ही, उन्होंने मुरादाबाद के मदरसों का जिक्र करते हुए नाराजगी जताई कि यहाँ मदरसों का विस्तार शिक्षा के लिए किया गया है, लेकिन कुछ लोग इन्हें जानबूझकर ‘आतंकवाद का अड्डा’ बताकर बदनाम करने की कोशिश करते हैं।
    सपा और बी टीम के आरोपों पर पलटवार
    जनसभा के दौरान शौकत अली केवल जनसंख्या तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी जमकर भड़ास निकाली। सपा के एक विधायक द्वारा एआईएमआईएम को भाजपा की बी टीम बताए जाने पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि सपा खुद अपनी जमीन खो रही है और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए मजलिस पर झूठे आरोप मढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का सच्चा रहनुमा वही है जो उनके हक की बात डंके की चोट पर करे, न कि वह जो केवल वोट बैंक की राजनीति करे।
    बयान पर छिड़ा सियासी घमासान
    शौकत अली के इस ‘दो दर्जन’ वाले बयान के बाद भाजपा और अन्य दलों ने उन पर कड़ा प्रहार किया है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देते हैं और विकास के मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाते हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

  • नियमित जांच से कैंसर पर शुरुआती दौर में लगाया जा सकता है ब्रेक..

    नियमित जांच से कैंसर पर शुरुआती दौर में लगाया जा सकता है ब्रेक..


    नई दिल्ली। कैंसर आज भी दुनिया की सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में शामिल है। हालांकि मेडिकल साइंस में लगातार प्रगति हो रही है, लेकिन समय पर पहचान न होने के कारण यह बीमारी लाखों लोगों की जान ले लेती है। भारत में कैंसर के अधिकांश मामलों का पता तीसरे या चौथे स्टेज में चलता है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है और मृत्यु दर बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही समय पर जरूरी हेल्थ चेकअप कराए जाएं, तो कैंसर को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है।

    GLOBOCAN 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 14.1 लाख नए कैंसर मामले सामने आए, जबकि लगभग 9.2 लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह लेट डायग्नोसिस है। शुरुआती स्टेज में कैंसर अक्सर बिना लक्षणों के बढ़ता रहता है, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

    लेट डायग्नोसिस क्यों है खतरनाक
    जब कैंसर तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंच जाता है, तब यह शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका होता है। इस स्थिति में इलाज न केवल महंगा होता है बल्कि सफल होने की संभावना भी कम हो जाती है। यही कारण है कि डॉक्टर शुरुआती पहचान को कैंसर से लड़ाई का सबसे मजबूत हथियार मानते हैं।

    एक्सपर्ट द्वारा बताए गए 6 जरूरी हेल्थ चेकअप
    ब्लड टेस्ट
    सामान्य ब्लड जांच से शरीर में असामान्य बदलाव, संक्रमण या ट्यूमर मार्कर के संकेत मिल सकते हैं। यह शुरुआती चेतावनी का काम करता है।

    मैमोग्राफी
    महिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर की पहचान में यह जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित मैमोग्राफी की सलाह दी जाती है।

    पैप स्मीयर टेस्ट
    यह सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान में सहायक होता है। समय पर जांच से इस कैंसर को पूरी तरह रोका जा सकता है।

    अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन
    पेट, लिवर, किडनी और अन्य अंगों में होने वाले ट्यूमर की पहचान के लिए यह जांच महत्वपूर्ण होती है।

    कोलोनोस्कोपी
    यह जांच आंतों और कोलन कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगाने में मदद करती है, खासकर 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए।

    ओरल स्क्रीनिंग
    तंबाकू, गुटखा या धूम्रपान करने वालों के लिए मुंह और गले की नियमित जांच बेहद जरूरी होती है, जिससे ओरल कैंसर की समय रहते पहचान हो सके।विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का डर पालने की बजाय जागरूकता और नियमित जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। संतुलित आहार, व्यायाम और समय-समय पर मेडिकल चेकअप से कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।समय रहते पहचान न केवल इलाज को आसान बनाती है बल्कि जीवन को भी बचा सकती है।

  • चार बच्चों को बाइक पर कहां लो गया सचिन, वीडियो वायरल, सीमा हैदर ने पूछा….

    चार बच्चों को बाइक पर कहां लो गया सचिन, वीडियो वायरल, सीमा हैदर ने पूछा….

    नोयडा। पाकिस्तान से भारत आए सीमा हैदर को कई साल हो गए, लेकिन अब भी समय-समय पर सुर्खियों में बनी रहती हैं। उसके पति सचिन और सीमा, दोनों ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक्टिव हैं और फैंस के लिए वीडियोज, रील्स बनाते रहते हैं। हाल ही में सीमा हैदर ने एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें सचिन अपने चार बच्चों को बाइक पर बैठाए हुए नजर आ रहा है। वह सीमा और अपने चार बच्चों को बाइक पर बैठाता है फिर उसे स्टार्ट करके बच्चों की यूनिफॉर्म लेने के लिए निकल पड़ता है।

    वीडियो डालकर सीमा ने पूछा है कि आखिर सचिन चार बच्चों को लेकर कहां जा रहा है। वीडियो में सचिन चार बच्चों के बाइक पर दिखाई दे रहा है। एक बच्चा आगे बैठा है, जबकि तीन सचिन के पीछे बैठे हुए हैं। वहीं , पीछे मुड़कर सचिन सीमा और बाकियों से बाय-बाय भी कहता है। सचिन चारों बच्चों को बाइक पर बैठाकर स्कूल की ड्रेस दिलाने ले जा रहा है।

    वीडियो में सचिन कहता है, ”दोस्तों आज बच्चों को यूनिफॉर्म दिलाने के लिए जा रहे हैं, क्योंकि बच्चे पहले गए थे ट्यूशन, जिसकी वजह लेट हो गए। बच्चों को क्या दिलाकर लाते हैं, यह बच्चे ही बोलेंगे। इस पर बच्चे कहते हैं कि यूनिफॉर्म। इतना कहकर सचिन बाइक स्टार्ट करके बच्चों को यूनिफॉर्म दिलाने निकल पड़ता है।

    इंस्टाग्राम पर सचिन और बच्चों का यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है। सीमा हैदर ने लिखा है कि सारे बच्चे लेकर सचिन कहां जा रहा है। लोग तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं। मालूम हो कि सीमा हैदर इस समय प्रेग्नेंट हैं और जल्द ही छठे बच्चे की मां बनने वाली हैं। पिछले दिनों सीमा डॉक्टर के यहां से चेकअप भी करवाने गई थीं।

    कुछ साल पहले पब्जी गेम खेलते हुए सचिन मीणा और सीमा हैदर को प्यार हो गया था। सीमा पाकिस्तान में रहती थी, लेकिन सचिन के प्यार में उसने अपने पति को छोड़ दिया और नेपाल के रास्ते भारत चली आई। नेपाल में दोनों ने शादी भी की। सचिन सीमा के साथ ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा गांव में रहता है। यहां सीमा हैदर ने एक और बच्चे को जन्म दिया, जिसके बाद कुल पांच बच्चे हैं। चार बच्चे वह पाकिस्तान से लाई। अब फिर से सीमा हैदर प्रेग्नेंट है, जिसके बाद माना जा रहा है कि जल्द ही सचिन और सीमा के परिवार में खुशखबरी आ सकती है।

  • यूपी में शराब पीने वालों के लिए बड़ी खबर नई आबकारी नीति लागू होते ही महंगी हो जाएगी बोतल

    यूपी में शराब पीने वालों के लिए बड़ी खबर नई आबकारी नीति लागू होते ही महंगी हो जाएगी बोतल

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    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में एक अप्रैल से नई आबकारी नीति लागू होने जा रही है और इसके साथ ही शराब पीने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है. प्रस्तावित नीति के तहत अंग्रेजी शराब की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है. विभागीय सूत्रों के अनुसार लाइसेंस शुल्क में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का मसौदा तैयार कर मुख्यालय से लखनऊ भेज दिया गया है. इस प्रस्ताव को जनवरी महीने में मंजूरी मिलने की उम्मीद है.

    नई नीति में इस बार भी शराब दुकानों के नवीनीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. यानी मौजूदा लाइसेंसधारकों को राहत देते हुए टेंडर प्रक्रिया नहीं कराई जाएगी. इससे व्यापारियों को निरंतरता मिलेगी लेकिन बढ़ी हुई लाइसेंस फीस का असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. विभाग का मानना है कि शुल्क बढ़ोतरी से राजस्व में इजाफा होगा.

    पिछली नीति से अलग होगा असर

    गौरतलब है कि पिछले वर्ष लागू की गई आबकारी नीति में शराब की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी. लेकिन इस बार हालात अलग हैं. लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव के चलते शराब के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है. आबकारी विभाग की बैठकों में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई है.

    शराब की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी

    अनुमान लगाया जा रहा है कि नई नीति लागू होने के बाद अंग्रेजी शराब के क्वार्टर की कीमत में 15 से 20 रुपये तक का इजाफा हो सकता है. वहीं हाफ बोतल करीब 50 रुपये और फुल बोतल 100 रुपये तक महंगी हो सकती है. हालांकि अंतिम फैसला शासन की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा.

    राजस्व बढ़ेगा उपभोक्ता पर असर

    आबकारी विभाग का कहना है कि बढ़े हुए शुल्क से राज्य के राजस्व को मजबूती मिलेगी. वहीं आम उपभोक्ताओं के लिए यह नीति खर्च बढ़ाने वाली साबित हो सकती है. अब सभी की निगाहें जनवरी में होने वाले फैसले पर टिकी हैं.