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  • नगर निकाय चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक बदलाव बैतूल को नगर निगम बनाने की तैयारी तेज 26 पंचायतों का सर्वे शुरू

    नगर निकाय चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक बदलाव बैतूल को नगर निगम बनाने की तैयारी तेज 26 पंचायतों का सर्वे शुरू


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में अगले वर्ष प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव से पहले बैतूल को नगर निगम का दर्जा दिए जाने की तैयारी तेज हो गई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने प्रस्तावित नगर निगम की सीमा तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कलेक्टर को उन ग्राम पंचायतों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है जिन्हें नई नगर निगम सीमा में शामिल किया जाना प्रस्तावित है। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेगी।

    बैतूल को नगर निगम बनाने की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय विधायक हेमंत खंडेलवाल का विधानसभा क्षेत्र है। प्रशासनिक स्तर पर इस दिशा में गतिविधियां तेज होने के बाद इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर भी चर्चाएं बढ़ गई हैं।

    नगर निगम गठन की प्रक्रिया के तहत जनपद पंचायत बैतूल की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने प्रस्तावित ग्राम पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों का विस्तृत ब्यौरा तैयार कराया है। इसमें पंचायत सचिव रोजगार सहायक और अन्य कर्मचारियों की जानकारी एकत्र की गई है। यह रिपोर्ट संबंधित एसडीएम और राजस्व अधिकारियों के माध्यम से कलेक्टर को भेजी जा चुकी है ताकि प्रशासनिक मूल्यांकन पूरा किया जा सके।

    जानकारी के अनुसार इस विषय पर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बैठक भी आयोजित की गई है जिसमें प्रस्तावित क्षेत्रों को नगर निगम सीमा में शामिल करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसके बाद संबंधित गांवों की प्रशासनिक स्थिति आबादी और अन्य आवश्यक मानकों का परीक्षण शुरू किया गया है।

    प्रस्ताव के अनुसार कुल 26 ग्राम पंचायतों को बैतूल नगर निगम की सीमा में शामिल किया जा सकता है। इनमें कढ़ाई दनोरा बड़ोरा आरूल बाजपुर भैंसदेही खेड़ली मरामझिरी टेमनी जामठी खेड़ला डहरगांव खेड़ी सांवलीगढ़ महदगांव भड़ूस कुम्हारटेक भोगीतेड़ा रोढ़ा सूरगांव भरकावाड़ी खंडारा मलकापुर मिलानपुर बयावाड़ी ढोड़वाड़ा और खड़ला शामिल हैं। इन क्षेत्रों के शामिल होने से नगर निगम की आबादी और क्षेत्रफल दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो नगर निगम गठन से पहले कैबिनेट की स्वीकृति आवश्यक होगी। इसके बाद संबंधित ग्राम पंचायतों को पंचायत क्षेत्र से हटाकर नगर निगम सीमा में शामिल किया जाएगा। साथ ही इन क्षेत्रों के मतदाताओं के नाम पंचायत मतदाता सूची से हटाकर नगर निगम की मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी करना आवश्यक होगा ताकि अगले नगरीय निकाय चुनाव नई व्यवस्था के तहत कराए जा सकें।

    वर्तमान में मध्य प्रदेश में 16 नगर निगम हैं। इनमें भोपाल इंदौर ग्वालियर जबलपुर उज्जैन सागर रीवा सतना सिंगरौली छिंदवाड़ा रतलाम मुरैना कटनी देवास खंडवा और बुरहानपुर शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री पहले ही विदिशा को नगर निगम बनाने की घोषणा कर चुके हैं हालांकि वहां प्रक्रिया अभी अंतिम चरण तक नहीं पहुंची है। अब बैतूल को लेकर भी प्रशासनिक प्रक्रिया तेज होने से आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।

  • भारत के शहरों को आधुनिक बनाने की चुनौती, अगले दशक में 80 लाख करोड़ रुपये निवेश का अनुमान

    भारत के शहरों को आधुनिक बनाने की चुनौती, अगले दशक में 80 लाख करोड़ रुपये निवेश का अनुमान


    नई दिल्ली । भारत तेजी से शहरीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में देश के शहर आर्थिक विकास की सबसे बड़ी ताकत बनने वाले हैं। इसी बदलते परिदृश्य को देखते हुए एक नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत को वर्ष 2037 तक अपने शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए करीब 80 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। यह आंकड़ा देश में बढ़ती आबादी, शहरों के विस्तार और आधुनिक सुविधाओं की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

    रिपोर्ट के अनुसार आने वाले दशक में भारत की अर्थव्यवस्था में शहरी क्षेत्रों की भूमिका और अधिक मजबूत होने वाली है। अनुमान है कि वर्ष 2036 तक देश की कुल जीडीपी में लगभग 70 प्रतिशत योगदान शहरी क्षेत्रों से आएगा। यही कारण है कि अब शहरी विकास केवल निर्माण और विस्तार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों पर बढ़ता दबाव परिवहन, आवास, जल आपूर्ति, स्वच्छता, ऊर्जा और डिजिटल सुविधाओं जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की मांग करेगा। यदि समय रहते इन क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश नहीं किया गया, तो भविष्य में बड़े शहरों के सामने गंभीर अव्यवस्था और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार शहरी विकास के लिए अब पारंपरिक अनुदान आधारित मॉडल से आगे बढ़कर बाजार आधारित वित्तीय ढांचे की ओर कदम बढ़ा रही है। इसी रणनीति के तहत शहरी विकास परियोजनाओं के लिए एक विशेष फंड मॉडल तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य आने वाले वर्षों में लाखों करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना है।

    नई व्यवस्था के तहत शहरी स्थानीय निकायों को किसी भी परियोजना के लिए केंद्र की सहायता प्राप्त करने से पहले अपने स्तर पर भी वित्त जुटाना होगा। इसके लिए नगर निकायों को बैंक ऋण, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और नगरपालिका बॉन्ड जैसे विकल्पों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे शहरों में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ेगी, साथ ही निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

    हालांकि रिपोर्ट में कुछ चुनौतियों की ओर भी संकेत किया गया है। कई छोटे शहरों और नगर निकायों की वित्तीय स्थिति अभी इतनी मजबूत नहीं है कि वे बड़े स्तर पर बाजार से निवेश जुटा सकें। ऐसे में उनकी क्रेडिट रेटिंग और वित्तीय विश्वसनीयता एक बड़ी चुनौती बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नगर निकायों को मजबूत वित्तीय ढांचे और बेहतर प्रशासनिक क्षमता से नहीं जोड़ा गया, तो कई परियोजनाएं केवल योजनाओं तक सीमित रह सकती हैं।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अब तक देश में बहुत कम शहरों ने नगरपालिका बॉन्ड के जरिए निवेश जुटाने का सफल प्रयास किया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में अभी भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार द्वारा शुरू की गई नई गारंटी योजनाओं से छोटे शहरों को पहली बार ऋण लेने और निवेशकों का भरोसा जीतने में मदद मिल सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत के शहर आधुनिक, टिकाऊ और आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बन सकते हैं। शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में यह निवेश केवल विकास परियोजना नहीं होगा, बल्कि देश की आर्थिक गति को नई ऊंचाई देने का आधार भी बनेगा।

  • इंदौर को बड़ी राहत, सरवटे–गंगवाल रोड प्रोजेक्ट फिर शुरू, अब 80 नहीं बल्कि 60 फीट चौड़ी बनेगी सड़क

    इंदौर को बड़ी राहत, सरवटे–गंगवाल रोड प्रोजेक्ट फिर शुरू, अब 80 नहीं बल्कि 60 फीट चौड़ी बनेगी सड़क


    इंदौर
    शहर में लंबे समय से अटकी पड़ी एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना अब फिर से शुरू होने जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड के बीच बनने वाली यह सड़क पिछले कई महीनों से विवाद और तकनीकी कारणों के चलते अधूरी पड़ी थी, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने पर सहमति बन गई है।

    शुरुआत में इस सड़क को 80 फीट चौड़ा करने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन स्थानीय निवासियों की आपत्तियों और लगातार चल रहे विरोध के बाद इसमें बदलाव किया गया है। अब यह सड़क 60 फीट चौड़ाई के साथ विकसित की जाएगी। इस निर्णय के बाद परियोजना को मंजूरी मिल गई है और निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है।

    यह सड़क निर्माण कार्य स्मार्ट सिटी योजना के तहत शुरू किया गया था, लेकिन बीच में फंडिंग और तकनीकी अड़चनों के कारण काम रुक गया। इसके अलावा बाधक निर्माणों को हटाने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी, जिससे परियोजना लंबे समय तक अधर में लटकी रही।

    स्थानीय स्तर पर इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए गए और बजट की व्यवस्था भी की गई, लेकिन निर्माण कार्य फिर भी शुरू नहीं हो सका। अब नए वर्क ऑर्डर और संशोधित चौड़ाई के साथ इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

    चौड़ाई कम करने के फैसले के बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच सहमति बन गई है, जिससे अब विवाद की स्थिति समाप्त हो गई है। माना जा रहा है कि इस सड़क के बनने से क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और रोजमर्रा की आवाजाही आसान हो जाएगी।

    यह परियोजना पूरी होने के बाद सरवटे से गंगवाल बस स्टैंड के बीच का इलाका अधिक व्यवस्थित और सुगम बन सकेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सालभर से रुकी यह योजना कितनी तेजी से पूरी होती है और लोगों को इसका वास्तविक लाभ कब तक मिलता है।

  • भारत मंडपम में अमृत मित्र महोत्सव: महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास का संगम

    भारत मंडपम में अमृत मित्र महोत्सव: महिला सशक्तिकरण और शहरी विकास का संगम


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में 13 मार्च को आयोजित होने वाले अमृत मित्र महोत्सव में देशभर से स्व-सहायता समूह की महिलाएँ शामिल होंगी। मध्यप्रदेश की लगभग 300 महिलाएँ इस राष्ट्रीय मंच पर अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए भाग लेंगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि राज्य के 55 नगरीय निकायों में 312 स्व-सहायता समूहों की 1 028 महिलाओं को अमृत मित्र के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन महिलाओं ने जल गुणवत्ता परीक्षण सार्वजनिक उद्यानों के रख-रखाव और केंद्र सरकार के पेड़ों के लिए महिलाएं कार्यक्रम के तहत पौधरोपण एवं सुरक्षा के कार्यों को सफलतापूर्वक निभाया है।

    यह महोत्सव भारत मंडपम नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है और इसमें उत्तर प्रदेश हरियाणा महाराष्ट्र राजस्थान सहित देश के अन्य राज्यों से भी अमृत मित्र महिलाएँ सम्मिलित होंगी। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं की उत्कृष्ट उपलब्धियों को मान्यता देना और शहरी विकास में उनके योगदान को रेखांकित करना है।

    केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर इस अवसर पर जल संरक्षण स्वच्छता और शहरी प्रबंधन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को सम्मानित करेंगे। यह न केवल महिलाओं की उपलब्धियों को पहचान देगा बल्कि महिला नेतृत्व के माध्यम से सतत शहरी विकास की संकल्पना को भी सुदृढ़ करेगा।

    आयुक्त संकेत भोंडवे ने नई दिल्ली जा रही सभी अमृत मित्र महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल शहरी विकास में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्यप्रदेश की महिलाएँ इस राष्ट्रीय मंच पर राज्य के नवाचारों और उत्कृष्ट कार्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगी।

    अमृत मित्र पहल के तहत महिलाएँ केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय मंच पर भी शहरी विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभा रही हैं। यह पहल महिला सशक्तिकरण और शहरी प्रबंधन के संगम का प्रतीक बनकर सामने आई है। आयोजन में सहभागिता से महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा और शहरी क्षेत्रों में सतत विकास के लिए उनका नेतृत्व और अधिक सशक्त होगा।

  • भोपाल संभाग में डेवलपमेंट प्लान पर एसीएस की बैठक: पानी की समस्या और नगरीय विकास पर जोर, विधायकों ने ग्रीष्मकालीन पानी संकट उजागर किया

    भोपाल संभाग में डेवलपमेंट प्लान पर एसीएस की बैठक: पानी की समस्या और नगरीय विकास पर जोर, विधायकों ने ग्रीष्मकालीन पानी संकट उजागर किया


    भोपाल। भोपाल संभाग की विकास योजनाओं और शासकीय नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपर मुख्य सचिव (एसीएस) संजय कुमार शुक्ला ने बुधवार को कमिश्नर ऑफिस में अहम बैठक की। बैठक में संभाग के विभिन्न जिलों से जुड़े कलेक्टर, जिपं सीईओ और विधायकों ने हिस्सा लिया। मुख्य चर्चा का केंद्र पानी से जुड़े मुद्दे, पेयजल आपूर्ति, अधोसंरचना विकास और स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग रहा।

    बैठक में भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधायक भगवानदास सबनानी, सांची विधायक प्रभुराम चौधरी, शमशाबाद विधायक सूर्यप्रकाश मीणा, नरसिंहगढ़ विधायक मोहन शर्मा और बैरसिया विधायक विष्णु खत्री उपस्थित रहे। अन्य जिलों के विधायक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

    एसीएस शुक्ला ने पानी आपूर्ति, नल-जल योजना और जल जीवन मिशन की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में नागरिकों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि समूह पेयजल योजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण करना प्राथमिकता होनी चाहिए। शुक्ला ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों और विधायकों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखें और उनके द्वारा उठाए गए स्थानीय मुद्दों का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।

    स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देते हुए शुक्ला ने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों और आंगनवाड़ियों की संचालन मॉनिटरिंग नियमित रूप से की जाए। किसी भी कमी या अनियमितता पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

    अधोसंरचना और नगरीय विकास के तहत, उन्होंने अमृत-2.0 योजना के निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि कार्य पूर्ण होने के बाद सड़कों और सार्वजनिक ढांचों को जीर्ण-शीर्ण अवस्था में न छोड़ा जाए। शहरों की बाहरी सीमाओं पर बहुद्देश्यीय विकास परियोजनाओं का निर्माण समयबद्ध तरीके से किया जाए ताकि शहरी विकास नियोजित रूप में हो।

    बैठक में दोहरा प्रभार वाले अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए कि वे संबंधित कार्यस्थलों पर नियमित समीक्षा के लिए उपस्थित रहें और किसी प्रकार की बाधा रोकें। साथ ही, बांधों और अधिग्रहीत भूमि का शीघ्र नामांतरण संबंधित विभागों के नाम करने के निर्देश भी दिए गए।

    एसीएस शुक्ला ने स्पष्ट किया कि शहरों के विकास और नागरिक सुविधाओं के सुचारू संचालन के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय अनिवार्य है। बैठक में सभी प्रतिनिधियों ने गर्मी के मौसम में पेयजल संकट और योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • मध्यप्रदेश ने जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 को दी अंतिम रूप, अमृत मित्र संभालेंगे जल संरक्षण की कमान

    मध्यप्रदेश ने जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 को दी अंतिम रूप, अमृत मित्र संभालेंगे जल संरक्षण की कमान


    भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रदेश की जल संपदा को संरक्षित करने और नगरीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 की व्यापक कार्य योजना को अंतिम रूप दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दिशा निर्देशों के अनुरूप तैयार यह योजना पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित है।

    अभियान के तहत सभी नगरीय निकायों को नदियों तालाबों बावडियों और नालों के किनारे किए गए अतिक्रमण को चिह्नित कर तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे न केवल जल संरचनाओं का प्राकृतिक स्वरूप लौटेगा बल्कि वर्षा जल के प्रवाह से भू जल स्तर में भी वृद्धि होगी।

    अभियान में बुनियादी ढांचे और स्वच्छता कार्यों के लिए वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। अमृत 2.0 के तहत 112 जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जाएगा जिनका क्षेत्रफल लगभग 3315 एकड़ है और इस पर 67 करोड़ रुपये का निवेश होगा। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत 100 प्रमुख नालों के शुद्धिकरण पर 664 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। भविष्य में 1000 जल ग्रहण संरचनाओं का वैज्ञानिक संवर्धन और 5000 नाले नालियों की सघन सफाई एवं सौंदर्यीकरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में 5000 नई रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणालियां स्थापित की जाएंगी।

    नागरिक सुविधाओं के विस्तार में प्रमुख बाजारों बस स्टैंडों और सार्वजनिक चौराहों पर सुव्यवस्थित प्याऊ स्थापित किए जाएंगे जिससे ग्रीष्मकाल में राहगीरों और आमजन को शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा। पर्यावरण संरक्षण के हिस्से के रूप में अमृत 2.0 के तहत 116 निकायों में 300 एकड़ क्षेत्र को हरित क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा जिस पर लगभग 29 करोड़ रुपये खर्च होंगे। आगामी मानसून सत्र में 1 करोड़ पौधों का रोपण भी किया जाएगा।

    युवा सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए 5000 युवाओं को अमृत मित्र के रूप में MY Bharat पोर्टल पर पंजीकृत किया जाएगा। ये युवा जल संरक्षण के प्रति जन जागरूकता फैलाने और अभियान को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। इस एकीकृत कार्य योजना से प्रदेश की जल धरोहर संरक्षित होगी और स्वच्छ हरित मध्यप्रदेश के संकल्प को साकार करने में मदद मिलेगी।

  • बीआरटीएस मार्ग पर बदलेगा ट्रैफिक का चेहरा, इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण की फिर से हुई शुरुआत

    बीआरटीएस मार्ग पर बदलेगा ट्रैफिक का चेहरा, इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण की फिर से हुई शुरुआत


    इंदौर शहर में लंबे समय से प्रतीक्षित एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट आखिरकार जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है। बीआरटीएस मार्ग पर बनने वाले इस बहुप्रतीक्षित कॉरिडोर का काम फिर से शुरू हो गया है और मशीनों की गूंज के साथ मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। करीब चार साल पहले गुजरात की कंपनी राजकमल बिल्डर्स को इस प्रोजेक्ट का ठेका दिया गया था, लेकिन विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से यह योजना अधर में लटक गई थी। अब एक बार फिर निर्माण की कवायद तेज हो गई है।

    करीब पंद्रह साल पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी। हालांकि बाद में एबी रोड पर बीआरटीएस निर्माण हो जाने के कारण एलिवेटेड कॉरिडोर की आवश्यकता और व्यवहारिकता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। लंबे विचार-विमर्श और समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही परियोजना को दोबारा हरी झंडी दी गई और अब कॉरिडोर मार्ग पर बेरिकेडिंग कर काम शुरू कर दिया गया है।

    फिलहाल एलआईजी गुरुद्वारा के पास मिट्टी परीक्षण किया जा रहा है। इससे पहले ट्रैफिक सर्वे, प्लानिंग और प्रारंभिक मिट्टी परीक्षण पर ही पांच करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। अब दोबारा परीक्षण कर निर्माण की औपचारिक प्रक्रिया को गति दी जा रही है। छह किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर एलआईजी से नवलखा चौराहे तक बनेगा और इसे पूरा करने में लगभग तीन वर्ष का समय लगने का अनुमान है।

    यह प्रोजेक्ट वर्ष 2021 में राजकमल बिल्डर्स को सौंपा गया था और 2024 तक इसके पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन ट्रैफिक लोड अपेक्षित 4 प्रतिशत तक नहीं पहुंचने के कारण मामला अटक गया। अनुबंध की शर्तों के अनुसार यदि लोक निर्माण विभाग परियोजना रद्द करता तो सरकार को कंपनी को 30 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता। इसी कारण दो माह पहले दोबारा समीक्षा कर प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया गया और अब निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

    इस महत्वाकांक्षी योजना पर 300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा है। हाल ही में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में यह तय किया गया कि तीन प्रमुख चौराहों पर भुजाएं उतारी जाएंगी और ट्रैफिक सुगमता के लिए रोटरी भी बनाई जाएगी।

    एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से बीआरटीएस मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और शहर की यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। लंबे समय से अटकी इस परियोजना के फिर से शुरू होने से शहरवासियों में उम्मीद जगी है कि इंदौर का यातायात ढांचा और मजबूत होगा तथा विकास की रफ्तार और तेज होगी।

  • मप्र विधानसभा में ₹19,287 करोड़ का तीसरा अनुपूरक बजट पेश, राजस्व और पूंजीगत मद में बड़ा प्रावधान

    मप्र विधानसभा में ₹19,287 करोड़ का तीसरा अनुपूरक बजट पेश, राजस्व और पूंजीगत मद में बड़ा प्रावधान


    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्तीय वर्ष 2024-25 का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया। यह अनुपूरक बजट 19,287 करोड़ 32 लाख रुपये का है। इसके साथ ही आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 भी सदन के पटल पर रखा गया। प्रस्तुत अनुपूरक बजट में राजस्व मद में 8,934.03 करोड़ रुपये और पूंजीगत मद में 10,353.29 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    प्रमुख विभागों को आवंटन

    सामान्य प्रशासन विभाग ₹100 करोड़

    राजस्व विभाग ₹100 करोड़

    वन विभाग ₹161 करोड़

    औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन विभाग ₹1,250 करोड़

    वित्त विभाग ₹1,650 करोड़

    वाणिज्यिक कर विभाग ₹1,388 करोड़

    खनिज विभाग माइनिंग फंड ₹321 करोड़

    रक्षित निधि अंतरण योजना ₹140 करोड़

    ऊर्जा विभाग ₹2,630 करोड़

    श्रम विभाग ₹615 करोड़

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग ₹2,569 करोड़ स्थानीय निकाय  ₹248 करोड़  मिलियन शहर

    नर्मदा घाटी विकास विभाग ₹4,700 करोड़

    जल संसाधन विभाग ₹300 करोड़

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ₹300 करोड़

    तकनीकी शिक्षा विभाग ₹720 करोड़

    एमएसएमई विभाग ₹213 करोड़

    सरकार के अनुसार यह अनुपूरक बजट विकास योजनाओं, अधोसंरचना विस्तार और विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लाया गया है।

  • अब और चमकेगी राजधानी दिल्ली,मोती नगर में 135 करोड़ की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास

    अब और चमकेगी राजधानी दिल्ली,मोती नगर में 135 करोड़ की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास


    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मोती नगर विधानसभा क्षेत्र में 135 करोड़ रुपये से अधिक की बहुप्रतीक्षित विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। यह कार्यक्रम दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मदनलाल खुराना जी की कर्मभूमि पर आयोजित हुआ, जिसे राजधानी के शहरी विकास की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

    इस मौके पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद बांसुरी स्वराज, कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और मोती नगर विधायक हरीश खुराना मौजूद रहे।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की सहभागिता देखने को मिली।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इन विकास कार्यों से मोती नगर और आसपास के इलाकों में रहने वाले 2 लाख से अधिक नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं है, बल्कि नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं, सुरक्षित यातायात और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना है।

    https://twitter.com/HarishKhuranna/status/2012187038662156399

    मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि परियोजनाओं के तहत कीर्ति नगर क्षेत्र में एक आधुनिक फुट ओवरब्रिज का निर्माण किया जाएगा, जिससे पैदल यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही सुदर्शन पार्क और करमपुरा में नजफगढ़ ड्रेन पर दो लेन के नए पुल बनाए जाएंगे, जिससे वर्षों से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या में बड़ी राहत मिलेगी।

    इस विकास पैकेज में कुल 67 नई सीवर पाइपलाइन परियोजनाएं और 72 सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। इनसे जल निकासी व्यवस्था मजबूत होगी और बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या से निजात मिलेगी। सड़कों के चौड़ीकरण और पुनर्निर्माण से यातायात व्यवस्था सुचारु होगी और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि मजबूत सड़कें, बेहतर सीवर सिस्टम और हरित पार्क किसी भी शहरी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए जरूरी हैं। ये सुविधाएं न केवल जीवन को आसान बनाती हैं, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि यह पहल स्वर्गीय मदनलाल खुराना जी के “स्वच्छ दिल्ली, सुंदर दिल्ली” के सपने को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। उनके विजन को ध्यान में रखते हुए इन परियोजनाओं की योजना बनाई गई है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी इसका दीर्घकालिक लाभ मिल सके।

    सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि मोती नगर में शुरू हुए ये विकास कार्य दिल्ली की प्रगति में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी परियोजनाओं को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा। वहीं विधायक हरीश खुराना ने कहा कि क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग अब पूरी हो रही है, जिससे स्थानीय नागरिकों में उत्साह है।

    स्थानीय लोगों ने भी इन परियोजनाओं का स्वागत करते हुए कहा कि बेहतर सड़कें, पुल और सीवर व्यवस्था न केवल रोजमर्रा की समस्याओं को कम करेंगी, बल्कि क्षेत्र की कनेक्टिविटी, सुरक्षा और संपत्ति मूल्य में भी वृद्धि करेंगी।

    मोती नगर विधानसभा में 135 करोड़ रुपये की इन विकास परियोजनाओं का शिलान्यास यह साफ दर्शाता है कि सही योजना और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए दिल्ली को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और रहने योग्य राजधानी बनाया जा सकता है। आने वाले समय में ये परियोजनाएं दिल्ली के शहरी विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी।

  • विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से जुड़ी हों शहरी विकास परियोजनाएं: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से जुड़ी हों शहरी विकास परियोजनाएं: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    मध्य प्रदेश। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में नगरीय विकास परियोजनाओं को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए क्रियान्वित किया जाए। नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति को सुधारने, नगरीय क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ाने, नागरिक सेवा में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों के अधिकाधिक उपयोग, अर्बन मोबिलिटी तथा ई-वाहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। ‘नमामि गंगा अभियान’ के समान ही ‘नमामि नर्मदे परियोजना’ पर कार्य आरंभ कर नर्मदा नदी तट की नगरीय बसाहटों के ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय सुधार और उपचारित जल के पुन:
    उपयोग के लिए कार्य योजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी नगरीय निकायों में जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्थाओं के प्रति विशेष रूप से सजगता और सतर्कता बरती जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड के संचालक मंडल की 11वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन तथा संचालक मंडल के पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में कंपनी के प्रबंधकीय, वित्तीय और लेखा परीक्षा तथा अंकेक्षण संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श कर आवश्यक निर्णय लिए गए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश में शहरी विकास के लिए म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी में 4 स्वतंत्र व्यावसायिक प्रभागों के गठन के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गई। इसमें परिसंपत्ति प्रबंधन और पीपीपी मोड, सूचना प्रौद्योगिकी, शहरी गतिशीलता और नमामि नर्मदे तथा हरित एवं नदी संरक्षण के लिए प्रभागों का गठन प्रस्तावित है। परिसंपत्ति प्रबंधन और पीपीपी प्रभाग के अंतर्गत नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने, जन हित कार्यों में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने, वित्तीय अनुशासन, नीति आयोग तथा अन्य संबद्ध विभागों से समन्वय तथा मेट्रोपोलिटन एरिया डेवलपमेंट प्लानिंग को प्राथमिकता से लिया जाएगा। इसमें सोलर प्रोजेक्ट्स, हरित बांड, अप्रयुक्त परिसंपत्तियों के वैकल्पिक उपयोग जैसे नवाचार भी प्रस्तावित हैं। सूचना प्रौद्योगिकी प्रभाग के अंतर्गत ई-नगर पालिका प्रणाली, सीसीटीवी-जीआईएस आधारित निगरानी व्यवस्था, नागरिक सेवा प्लेटफार्म के उन्नयन, टोल संग्रह ई-पोर्टल एवं ऑनलाइन राजस्व संग्रहण जैसी स्मार्ट सिटी प्रणालियां संचालित की जाएंगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के नगरीय निकायों के आस-पास के क्षेत्रों के नियोजित विकास के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने नर्मदा और तापी नदी के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए नदियों के समग्र और सर्वांगीण विकास के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि ‘नमामि गंगे’ के समान ‘नमामि नर्मदे परियोजना’ का क्रियान्वयन सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से करें। इसमें नगरीय विकास एवं आवास विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विभाग, उद्योग विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है।

    बैठक में बताया गया कि शहरी गतिशीलता प्रभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश ईवी पॉलिसी क्रियान्वयन, मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, रोपवे, मल्टी लेवल पार्किंग, सार्वजनिक साइकिल सेवा, सिटी मोबिलिटी प्लान तथा ई-वाहन चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा।बैठक में अपर मुख्‍य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री संजय दुबे, श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्री सुखबीर सिंह, श्री पी. नरहरि, आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं आवास श्री संकेत भोंडवे तथा कंपनी के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।