Tag: US Iran conflict

  • कच्चे तेल की कीमतों में तूफानी तेजी, सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमलों से बढ़ी चिंता, पेट्रोल-डीजल पर मंडराया महंगाई का खतरा

    कच्चे तेल की कीमतों में तूफानी तेजी, सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमलों से बढ़ी चिंता, पेट्रोल-डीजल पर मंडराया महंगाई का खतरा


    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत समेत दुनिया के कई तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब पर हमलों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया जबकि अमेरिकी कच्चा तेल डब्ल्यूटीआई करीब 99 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता रहा। तेल की कीमतों में आई इस तेजी का असर आने वाले दिनों में पेट्रोल डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू बाजार में ईंधन के दाम बढ़ेंगे या नहीं इसका फैसला तेल कंपनियों और सरकार की नीतियों समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव प्रमुख वजह माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के लाल सागर स्थित यनबू बंदरगाह के अलावा एक तेल क्षेत्र और हवाई अड्डे पर हमलों का दावा किया है। इन घटनाओं ने तेल उत्पादन और निर्यात से जुड़े बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। सऊदी अरब वैश्विक तेल आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में उसके तेल ठिकानों या निर्यात केंद्रों पर किसी बड़े हमले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

    इस साल अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 85 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। डीजल जैसे तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी भारी तेजी दर्ज की गई है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए तेल और गैस की आपूर्ति का अहम रास्ता है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की उपलब्धता और कीमतों पर व्यापक असर पड़ सकता है।

    कच्चे तेल की महंगाई का भारत पर सीधा असर पड़ने की आशंका इसलिए भी अधिक है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर भारत का आयात बिल बढ़ता है और इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ सकता है। परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों समेत दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल के प्रति बैरल भाव में 10 डॉलर की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को करीब छह रुपये प्रति लीटर के बराबर लागत का दबाव पड़ सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम भी स्वतः छह रुपये बढ़ जाएंगे।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में बातचीत के दौरान दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को काफी कमजोर कर दिया है। उन्होंने आगे भी कार्रवाई के संकेत दिए। इस बीच फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की आवाजाही में कुछ सुधार के बावजूद पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सीमित रहने की खबरें सामने आई हैं। रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों ने भी ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ाया है। स्थिति से निपटने के लिए कुछ सरकारें अपने रणनीतिक भंडार से ईंधन जारी कर रही हैं।

    कुल मिलाकर कच्चे तेल की कीमतों में आगे की चाल पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और प्रमुख समुद्री मार्गों से आपूर्ति सामान्य रहने पर निर्भर करेगी। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर फिलहाल किसी निश्चित बढ़ोतरी का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी लेकिन लंबे समय तक तेल महंगा बना रहा तो देश की अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं के बजट पर दबाव बढ़ सकता है।

  • ईरान के हवाई नेटवर्क की घेराबंदी में जुटा अमेरिका: 27 एयरलाइंस पर पाबंदी विमान और जरूरी सामान जुटाना होगा मुश्किल

    ईरान के हवाई नेटवर्क की घेराबंदी में जुटा अमेरिका: 27 एयरलाइंस पर पाबंदी विमान और जरूरी सामान जुटाना होगा मुश्किल


    नई दिल्ली। अमेरिका ने ईरान के एविएशन सेक्टर पर दबाव बढ़ाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान से जुड़े नेटवर्क पर नई पाबंदियों का ऐलान किया है। इस कार्रवाई में ईरान की 27 एयरलाइंस को निशाना बनाया गया है। इसके साथ ही तुर्की यूएई मलेशिया और कजाकिस्तान में काम करने वाली कुछ कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि ये कंपनियां ईरानी एयरलाइंस को विमान जरूरी सामान और दूसरी सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर रही थीं।

    अमेरिका की इस कार्रवाई का सीधा असर ईरान के एविएशन कारोबार पर पड़ सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नए प्रतिबंधों का मकसद उन रास्तों को बंद करना है जिनके जरिए ईरानी एयरलाइंस को विदेशों से पैसा विमान उपकरण और दूसरी जरूरी सुविधाएं हासिल होती हैं। प्रतिबंधों के बाद ईरानी विमानन कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करना और विदेशी कंपनियों से सेवाएं लेना ज्यादा मुश्किल हो सकता है।

    ईरान का एविएशन सेक्टर लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में रहा है। पुराने प्रतिबंधों के कारण ईरानी एयरलाइंस को नए विमान हासिल करने के साथ साथ विमान के जरूरी पुर्जे और तकनीकी सेवाएं जुटाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। अब नई कार्रवाई के बाद यह दबाव और बढ़ने की आशंका है। खास तौर पर ऐसी कंपनियां ज्यादा मुश्किल में आ सकती हैं जो ईरानी एयरलाइंस के साथ सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कारोबार करती हैं।

    अमेरिकी अधिकारियों ने वित्तीय संस्थानों और बैंकों को भी ईरानी एविएशन नेटवर्क से जुड़े लेनदेन पर नजर रखने को कहा है। इसका मतलब यह है कि ईरानी एयरलाइंस के लिए अंतरराष्ट्रीय भुगतान करना और विदेशों से जरूरी सामान खरीदना पहले की तुलना में और कठिन हो सकता है। अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि ईरान की विमानन कंपनियों को सहायता देने वाले विदेशी कारोबारी नेटवर्क भी उसकी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

    इस कार्रवाई में Mahan Air पर भी दबाव बढ़ाया गया है। अमेरिका पहले से ही इस एयरलाइन पर प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिकी आरोप है कि Mahan Air ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को सहायता पहुंचाने में भूमिका निभाई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार कुछ विदेशी कंपनियों ने Mahan Air को विमान हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में मदद की। इसी तरह की गतिविधियों के आरोप में तुर्की और मलेशिया की कुछ कंपनियों पर भी कार्रवाई की गई है।

    अमेरिका के अनुसार कुछ कंपनियों ने Mahan Air को कम से कम तीन Boeing 777 विमान हासिल करने में मदद की। इन विमानों को पहले दूसरे देशों में इस्तेमाल से हटाया गया था और बाद में ईरानी एयरलाइंस के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया गया। अमेरिका का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क प्रतिबंधों के बावजूद ईरान की विमानन क्षमता को बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

    नई पाबंदियों का असर केवल एयरलाइंस तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। टिकट बिक्री विमान आपूर्ति तकनीकी सेवाओं और दूसरे एविएशन कारोबार से जुड़ी विदेशी कंपनियों को भी जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। इससे ईरान के अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क पर दबाव बढ़ सकता है। दुबई दोहा और इस्तांबुल जैसे प्रमुख एयर कनेक्शन वाले क्षेत्रों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

    यह कार्रवाई ईरान पर अमेरिकी आर्थिक दबाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। अमेरिका पहले से ही ईरान के तेल और दूसरे आर्थिक क्षेत्रों पर प्रतिबंधों के जरिए दबाव बना रहा है। अब एविएशन सेक्टर को भी निशाना बनाकर अमेरिका ईरान तक पहुंचने वाले विदेशी पैसे सामान और तकनीकी सहायता के रास्तों को और सीमित करना चाहता है। आने वाले समय में यदि ऐसी कार्रवाई और बढ़ती है तो ईरान की एयरलाइंस के लिए विमान संचालन और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर IRGC के ठिकानों पर हमला ट्रंप बोले- पलटवार की भारी कीमत चुकानी होगी

    अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर IRGC के ठिकानों पर हमला ट्रंप बोले- पलटवार की भारी कीमत चुकानी होगी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर दौर में पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के ठिकानों को निशाना बनाकर सैन्य कार्रवाई की है। हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगर ईरान ने अमेरिकी हमले का जवाब देने की कोशिश की तो वाशिंगटन की ओर से पहले से कहीं ज्यादा जोरदार कार्रवाई की जा सकती है।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से बताया गया कि स्थानीय समय के अनुसार दोपहर करीब 12 बजे अमेरिकी बलों ने ईरान में IRGC से जुड़े ठिकानों पर हमले शुरू किए। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ IRGC की ओर से किए गए कथित हमलों के प्रयासों के बाद की गई है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। सोमवार रात दोनों पक्षों के बीच हमलों का आदान प्रदान भी हुआ था। बताया जा रहा है कि एक महीने से अधिक समय के बाद दोनों देशों के बीच फिर से इस तरह की सीधी सैन्य कार्रवाई हुई है। नए हमले ने क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका को और बढ़ा दिया है।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी अमेरिकी कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद ईरानी ठिकानों को निशाना बना रहा है। ट्रंप ने इस कार्रवाई को बड़ा और शक्तिशाली बताया। उनके मुताबिक ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइन बिछाने की कथित कोशिश और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर आठ मिसाइल दागे जाने के बाद यह कदम उठाया गया।

    दूसरी तरफ ईरान ने भी अमेरिकी हमले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। IRGC के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने कहा कि अमेरिका को ईरान पर किए गए ताजा हमले पर पछताना पड़ेगा और उसे कठोर जवाब का सामना करना होगा। ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अनबिया मुख्यालय की ओर से भी अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की गई है।

    ईरानी पक्ष ने कहा है कि अमेरिकी सेना की ओर से की जा रही कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। ईरानी बयान में अमेरिका को क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाने के खिलाफ चेतावनी दी गई है। इससे दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

    इस बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। लोगों को ज्यादा सतर्क रहने और संभावित उड़ान रद्द होने तथा हवाई क्षेत्र बंद होने जैसी परिस्थितियों के लिए तैयार रहने को कहा गया है। यात्रा में बाधा आने की आशंका के बीच क्षेत्र में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को स्थानीय परिस्थितियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी हमले और ईरान की जवाबी धमकी के बाद अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच तनाव आगे किस दिशा में जाता है। होर्मुज स्ट्रेट की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए किसी भी नए सैन्य टकराव का असर पूरे मध्य पूर्व के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

  • इजरायल-ईरान तनाव चरम पर, लेबनान और गाजा में भीषण हमले, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता

    इजरायल-ईरान तनाव चरम पर, लेबनान और गाजा में भीषण हमले, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जहां इजरायल, ईरान, अमेरिका और हिजबुल्लाह के बीच हालात और ज्यादा विस्फोटक हो गए हैं। इजरायल में एक टेस्टिंग ग्राउंड पर हुए बड़े धमाके के बाद आसमान में उठे धुएं के बाद ‘मशरूम क्लाउड’ जैसे दृश्य देखे जाने से दहशत फैल गई, हालांकि इसे एक पहले से तय परीक्षण बताया जा रहा है।

    इसी बीच इजरायल डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने दावा किया है कि उसने सीजफायर के बावजूद लेबनान में हिजबुल्लाह के करीब 100 ठिकानों पर हवाई और जमीनी हमले किए हैं। इन हमलों में आतंकी ढांचे, ऑब्जर्वेशन पोस्ट और हथियार डिपो को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, हिजबुल्लाह भी इजरायली सेना पर ड्रोन और मोर्टार हमलों के वीडियो जारी कर रहा है, जिससे तनाव और गहराता जा रहा है।

    लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, हालिया संघर्ष में अब तक लगभग 2,969 लोगों की मौत और 9,000 से अधिक घायल होने की पुष्टि हुई है। सिर्फ पिछले कुछ दिनों में दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है, जिससे स्थिति गंभीर बनी हुई है।

    गाजा पट्टी में भी हालात खराब हैं, जहां खान यूनिस से लेकर गाजा सिटी तक इजरायली सेना की भारी गोलाबारी और नौसैनिक हमले जारी हैं। शरणार्थी कैंप और रिहायशी इलाकों में भी फायरिंग से आम नागरिकों में दहशत का माहौल है।

    इधर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा है कि नया ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसके तहत जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाएगा और कुछ जहाजों पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि अमेरिकी दबाव और नाकेबंदी की रणनीति का जवाब दिया जाएगा।

    अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि होर्मुज क्षेत्र में तनाव के कारण कई जहाजों को वापस लौटाया गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच खाड़ी देशों पर भी दबाव बढ़ रहा है, जहां ईरान ने कुछ देशों को चेतावनी दी है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल उसके विरोधियों के लिए न होने दें। वहीं क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और बयानबाजी ने हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है।

  • ईरान-अमेरिका तनाव में भारत बन सकता है शांति का बड़ा चेहरा, रूस ने नई दिल्ली को बताया सबसे भरोसेमंद मध्यस्थ

    ईरान-अमेरिका तनाव में भारत बन सकता है शांति का बड़ा चेहरा, रूस ने नई दिल्ली को बताया सबसे भरोसेमंद मध्यस्थ



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच रूस ने भारत की भूमिका को लेकर एक बड़ा कूटनीतिक बयान दिया है। रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में India ईरान, अमेरिका और पश्चिम एशियाई देशों के बीच संवाद स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान लावरोव ने भारत की विदेश नीति की तारीफ करते हुए कहा कि भारत लंबे समय से संतुलित कूटनीति अपनाता रहा है और विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ उसके मजबूत संबंध हैं। इसी वजह से भारत को एक “भरोसेमंद मध्यस्थ” के रूप में देखा जा सकता है, जो तनाव कम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।

    रूस का कहना है कि पश्चिम एशिया में हाल के वर्षों में तनाव काफी बढ़ा है, जिसमें ईरान-अमेरिका टकराव, ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। ऐसे में किसी ऐसे देश की जरूरत है जो दोनों पक्षों के बीच विश्वास पैदा कर सके और बातचीत का रास्ता खोल सके। लावरोव के अनुसार, भारत इस भूमिका के लिए उपयुक्त है क्योंकि वह किसी एक खेमे का हिस्सा न होकर सभी प्रमुख देशों के साथ समान रूप से संबंध बनाए रखता है।

    लावरोव ने यह भी कहा कि भारत का कूटनीतिक अनुभव केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बहुपक्षीय मंचों जैसे ब्रिक्स, जी20 और शंघाई सहयोग संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। उन्होंने यह संकेत दिया कि भारत की यह वैश्विक स्वीकार्यता उसे मध्यस्थता की भूमिका के लिए और मजबूत बनाती है।

    रूस के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत केवल सुरक्षा या राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ता है। ऐसे में किसी स्थिर और भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

    लावरोव ने यह भी कहा कि कुछ पश्चिमी देशों की नीतियां इस क्षेत्र में तनाव को कम करने के बजाय बढ़ाने का काम कर रही हैं, जबकि समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान और अरब देशों के बीच दूरी बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं, जो वैश्विक स्थिरता के लिए सही नहीं है।

    भारत को लेकर रूस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री की हालिया कूटनीतिक गतिविधियों और खाड़ी देशों के साथ बढ़ते संबंधों ने भारत की भूमिका को और मजबूत किया है। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भागीदारी ने उसे एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।

    हालांकि भारत सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाता है तो वह पश्चिम एशिया में शांति स्थापना के प्रयासों का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।

    कुल मिलाकर रूस का यह बयान भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है, जहां वह अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता में योगदान देने वाला अहम देश बनता जा रहा है।

  • पाकिस्तान पर बड़ा आरोप: ईरानी विमानों को दी शरण, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच उठे दोगलेपन पर सवाल

    पाकिस्तान पर बड़ा आरोप: ईरानी विमानों को दी शरण, अमेरिका-ईरान तनाव के बीच उठे दोगलेपन पर सवाल



    नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच पाकिस्तान को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें उस पर ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर शरण देने के आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट सीबीएस न्यूज के हवाले से दावा किया गया है कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने ईरान के कुछ सैन्य और निगरानी विमानों को रावलपिंडी के पास स्थित नूर खान एयरबेस पर अस्थायी रूप से रखने की अनुमति दी थी, ताकि वे संभावित हमलों से सुरक्षित रह सकें।

    रिपोर्ट के अनुसार इन विमानों में ईरानी वायुसेना का RC-130 टोही विमान भी शामिल बताया गया है, जो निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने में इस्तेमाल होता है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह कदम उस समय उठाया गया जब क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर था और दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम की स्थिति अस्थिर बनी हुई थी।

    हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नूर खान एयरबेस पर मौजूद बताए गए विमान किसी सैन्य ऑपरेशन का हिस्सा नहीं थे, बल्कि संघर्ष विराम और कूटनीतिक वार्ताओं से जुड़े राजनयिक या प्रशासनिक विमानों की आवाजाही थी। इस्लामाबाद का कहना है कि रिपोर्ट में दिए गए दावे भ्रामक हैं और इसका उद्देश्य गलत धारणा फैलाना है।

    इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ अमेरिका और कुछ विश्लेषक पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं पाकिस्तान खुद को एक संतुलित और मध्यस्थ देश के रूप में पेश कर रहा है।

    इसी बीच क्षेत्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात के कारण देशों की रणनीतियां तेजी से बदल रही हैं, और ऐसे में हर गतिविधि को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

    कुल मिलाकर यह मामला अभी विवादों के घेरे में है और स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इसने अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक रिश्तों पर नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

  • सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप

    सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम के दावों के बीच हालात एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने सीजफायर तोड़ते हुए ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इसके बाद तेहरान ने साफ चेतावनी दी है कि अब किसी भी हमले का जवाब बेहद कड़े और सीधे सैन्य एक्शन से दिया जाएगा।

    ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने जास्क क्षेत्र के पास उस तेल टैंकर पर हमला किया, जो होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ रहा था। ईरान ने इसे युद्धविराम का खुला उल्लंघन बताया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर ईरान परमाणु समझौते पर आगे नहीं बढ़ता तो अमेरिका और भी बड़े हमले करेगा।

    ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया था, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि जवाबी कार्रवाई में ईरान की कई सैन्य नावों और ठिकानों को तबाह कर दिया गया। ट्रम्प ने दो टूक कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

    बढ़ते संघर्ष का सबसे बड़ा असर दुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक लाइन होर्मुज स्ट्रेट पर दिखाई दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO के मुताबिक, संकट के कारण खाड़ी क्षेत्र में करीब 1500 जहाज फंस गए हैं। इन जहाजों पर लगभग 20 हजार नाविक मौजूद हैं। इससे वैश्विक तेल सप्लाई, गैस कारोबार और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ने लगा है। कई देशों में ईंधन और जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    इस बीच अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच बैक चैनल बातचीत की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश 30 दिन के अस्थायी समझौते और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि जमीन पर जारी सैन्य गतिविधियां किसी स्थायी शांति की संभावना को कमजोर करती नजर आ रही हैं।

    ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ईरान का मिसाइल भंडार खत्म हो चुका है। अराघची ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह सक्रिय है और देश अपनी सुरक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बनती है, अमेरिका सैन्य कार्रवाई शुरू कर देता है।

    उधर संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइल और तीन ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। वहीं लेबनान में भी तनाव तेजी से बढ़ रहा है। इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया है और दक्षिणी लेबनान में लगातार हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं।

    भारत सरकार ने भी पश्चिम एशिया के हालात पर करीबी नजर बनाए रखी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए विशेष कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाने की तैयारी की गई है।

  • होर्मुज में हमला, दुनिया में हड़कंप! फ्रांसीसी जहाज बना निशाना, ट्रंप ने अचानक रोका ऑपरेशन,क्या बढ़ने वाला है बड़ा युद्ध?

    होर्मुज में हमला, दुनिया में हड़कंप! फ्रांसीसी जहाज बना निशाना, ट्रंप ने अचानक रोका ऑपरेशन,क्या बढ़ने वाला है बड़ा युद्ध?



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक समुद्री व्यापार को गहरे संकट में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात उस समय और बिगड़ गए, जब फ्रांस की शिपिंग कंपनी CMA CGM के एक कार्गो जहाज पर हमला कर दिया गया। बताया जा रहा है कि ‘सैन एंटोनियो’ नाम का यह जहाज जब होर्मुज से गुजर रहा था, तभी उस पर मिसाइल या ड्रोन से हमला हुआ, जिसमें कई क्रू मेंबर घायल हो गए। हालांकि कंपनी ने पुष्टि की है कि सभी घायलों को सुरक्षित निकालकर इलाज के लिए भेज दिया गया है।

    इस हमले के बाद क्षेत्र में पहले से जारी तनाव और गहरा गया है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, जहां से हर दिन सैकड़ों जहाज गुजरते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में यह संख्या बुरी तरह प्रभावित हुई है।

    इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लेते हुए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ ऑपरेशन को अचानक बंद कर दिया। यह ऑपरेशन होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन दो दिनों में महज तीन जहाजों को ही सुरक्षित निकाल पाने के बाद इसे रोक दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन को रोकने के पीछे क्षेत्रीय दबाव और बढ़ते सैन्य जोखिम बड़ी वजह माने जा रहे हैं।

    संयुक्त राष्ट्र में भी इस संकट को लेकर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका ने सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश कर ईरान से हमले रोकने, समुद्री मार्ग सुरक्षित रखने और अवरोध हटाने की मांग की है। वहीं, चीन ने भी दोनों देशों से तुरंत तनाव कम करने और युद्ध जैसे हालात खत्म करने की अपील की है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच खाड़ी क्षेत्र में हमलों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी के अनुसार, हाल के महीनों में इस क्षेत्र में 40 से ज्यादा घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 26 सीधे हमले शामिल हैं। इसके अलावा संदिग्ध गतिविधियां और जहाजों के अपहरण की घटनाएं भी सामने आई हैं।

    इस तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। तेल सप्लाई प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है, जबकि हजारों नाविक समुद्र में फंसे हुए हैं। अनुमान है कि इस इलाके में 1500 से ज्यादा जहाज और हजारों क्रू मेंबर अभी भी जोखिम के बीच मौजूद हैं।

    कुल मिलाकर, होर्मुज में बढ़ता टकराव अब सिर्फ एक क्षेत्रीय संकट नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। अब नजर इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाएंगे या हालात और बिगड़ेंगे

  • समुद्र में सियासी संग्राम ,अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान का कड़ा रुख, बोला मुंहतोड़ जवाब देंगे

    समुद्र में सियासी संग्राम ,अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान का कड़ा रुख, बोला मुंहतोड़ जवाब देंगे

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है जहां अमेरिका और ईरान के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना द्वारा एक ईरानी जहाज को जब्त किए जाने के बाद हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सीधी उकसावे वाली कार्रवाई बताया है और जवाब देने की चेतावनी दी है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना की जानकारी देते हुए बताया कि ईरान के झंडे वाला एक बड़ा कार्गो जहाज अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था। उनके अनुसार लगभग 900 फीट लंबे इस जहाज को रोकने के लिए पहले चेतावनी दी गई लेकिन जब जहाज के क्रू ने निर्देशों का पालन नहीं किया तो अमेरिकी नौसेना को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।

    बताया जा रहा है कि अमेरिकी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Spruance ने जहाज को रोकने के लिए उसके इंजन रूम को निशाना बनाया जिससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया। इसके बाद अमेरिकी मरीन ने जहाज को अपने कब्जे में ले लिया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इस जहाज पर पहले से वित्तीय प्रतिबंध लगे हुए थे और यह गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहा है।

    वहीं दूसरी ओर ईरान ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गलत बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ईरानी सेना ने इसे समुद्री रास्ते में की गई डकैती करार दिया है और आरोप लगाया है कि अमेरिका ने न केवल जहाज को रोका बल्कि उसके नेविगेशन सिस्टम को भी नुकसान पहुंचाया और उस पर सैन्य कब्जा कर लिया। ईरान के सरकारी माध्यमों के जरिए जारी बयान में स्पष्ट कहा गया है कि इस कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा और जल्द ही जवाबी कदम उठाए जाएंगे।

    यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा चल रही थी। खबरों के अनुसार अमेरिका की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के इस्लामाबाद जाने वाला है जहां संभावित वार्ता हो सकती है। इस प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल बताए जा रहे हैं।

    हालांकि ईरान की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से इस बैठक की पुष्टि नहीं की गई है और वहां के मीडिया में भी इस पर संदेह जताया जा रहा है। ऐसे में यह घटना दोनों देशों के बीच संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर भी असर डाल सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान की खाड़ी जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा सकती है क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

    फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान अपनी चेतावनी को किस हद तक अमल में लाता है और क्या दोनों देश बातचीत के जरिए इस तनाव को कम करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं या यह टकराव और गंभीर रूप ले लेता है।

  • अमेरिका ईरान तनाव चरम पर ट्रंप की सख्त चेतावनी दूतावास ने कहा स्ट्रेट पहले से खुला

    अमेरिका ईरान तनाव चरम पर ट्रंप की सख्त चेतावनी दूतावास ने कहा स्ट्रेट पहले से खुला


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है जहां बयानबाजी के साथ साथ सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं भी तेज हो गई हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए साफ कर दिया है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर उसकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो बड़े पैमाने पर हमले किए जा सकते हैं।

    ट्रंप ने ईरान को सोमवार तक की मोहलत देते हुए चेतावनी दी है कि यदि मंगलवार तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह नहीं खोला गया तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बेहद सख्त लहजे में लिखा कि ईरान के लिए आने वाला दिन पावर प्लांट और ब्रिज डे जैसा साबित हो सकता है जो अभूतपूर्व होगा। यह बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका केवल कूटनीतिक दबाव तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि सैन्य विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है।

    हालांकि ईरान की ओर से इस पर तुरंत प्रतिक्रिया आई है। फिनलैंड में स्थित ईरानी दूतावास ने ट्रंप के बयान को खारिज करते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पहले से खुला हुआ है और उसके मित्र देशों के जहाजों के लिए किसी तरह की बाधा नहीं है। दूतावास ने यह भी कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देते समय संयम और तथ्यों का ध्यान रखना जरूरी है।

    ईरान की इस प्रतिक्रिया से साफ है कि वह अमेरिकी आरोपों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है और अपने रुख पर कायम है। साथ ही उसने ट्रंप के बयान के लहजे पर भी सवाल उठाते हुए अप्रत्यक्ष रूप से इसे गैर जिम्मेदाराना बताया है।

    इस बीच ट्रंप ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में भी अपने सख्त रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि अगर ईरान तय समयसीमा तक कदम नहीं उठाता है तो उसके इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान अपने पूरे देश में मौजूद पावर प्लांट्स और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाएं खो सकता है।

    ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं लेकिन नतीजा अभी तक सामने नहीं आया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं लेकिन यदि ईरान ने सहयोग नहीं किया तो अमेरिका कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

    होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल परिवहन होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

    कुल मिलाकर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है जहां एक ओर कूटनीतिक बातचीत जारी है वहीं दूसरी ओर सैन्य टकराव का खतरा भी मंडरा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में कोई समाधान निकलता है या फिर यह तनाव और ज्यादा गहरा होकर बड़े संघर्ष का रूप ले लेता है।