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  • Donald Trump on Iran: ईरान अपने ही सत्यानाश पर तुला है, झूठी खबरों और AI वीडियो को लेकर ईरान के साथ अमेरिकी मीडिया पर भी भड़के ट्रंप

    Donald Trump on Iran: ईरान अपने ही सत्यानाश पर तुला है, झूठी खबरों और AI वीडियो को लेकर ईरान के साथ अमेरिकी मीडिया पर भी भड़के ट्रंप


    नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और अपने ही देश के कुछ प्रमुख मीडिया संगठनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रंप ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AIऔर फर्जी वीडियो के सहारे झूठी खबरें फैलाकर दुनिया को गुमराह कर रहा है और ऐसा करके वह अपने ही विनाश को न्योता दे रहा है। ट्रंप ने ईरान के उन दावों का कड़ाई से खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि ईरान ने अमेरिका के पांच रीफ्यूलिंग लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ये सभी विमान पूरी तरह सुरक्षित हैं और जल्द ही अपनी अगली उड़ान भरेंगे। राष्ट्रपति ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ईरान सैन्य रूप से कमजोर है, लेकिन मीडिया मैनिपुलेशन में माहिर हो चुका है।

    इस दौरान ट्रंप का गुस्सा केवल ईरान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने अमेरिकी मीडिया, विशेषकर ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भ्रष्ट मीडिया संस्थान ईरान के झूठे दावों को बढ़ावा देकर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि ईरान इस युद्ध में जीत रहा है। ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जो भी मीडिया संगठन देश के खिलाफ ऐसी भ्रामक खबरें फैला रहे हैं, उन्हें ‘राजद्रोह’ का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में धमकी दी कि ऐसे संगठनों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं, क्योंकि वे सरकार द्वारा दी गई फ्री एयरवेव्स का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ झूठ फैलाने के लिए कर रहे हैं।

    ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जारी यह संघर्ष अब वैश्विक संकट का रूप ले चुका है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला किया था, जिसके बाद ईरान ने भी फारस की खाड़ी और पड़ोसी देशों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए। इस युद्ध के कारण दुनिया भर में विमानन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और तेल निर्यात बाधित होने से ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए तेल पर निर्भर देशों से हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा हेतु अपने युद्धपोत भेजने की अपील की है।

    मौजूदा स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि इजराइल ने रविवार को भी ईरान पर अपने हमले जारी रखे। वहीं, बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने अपने नागरिकों को मिसाइल हमलों के प्रति अलर्ट कर दिया है। ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि वे न केवल ईरान के सैन्य हमलों बल्कि उसके ‘सूचना युद्ध’ Information Warका भी पूरी ताकत से जवाब देंगे। राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर लोकप्रिय टीवी शो ‘लेट नाइट मोरन्स’ और अन्य पत्रकारों को भी चेतावनी दी कि रेटिंग और पैसे के चक्कर में देश विरोधी एजेंडा चलाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • US-Iran युद्ध की आग में सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के, शेयर बाजार में हाहाकार

    US-Iran युद्ध की आग में सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के, शेयर बाजार में हाहाकार


    नई दिल्‍ली । भारतीय शेयर बाजार पर सोमवार को अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर देखने को मिला। सेंसेक्स 2,366 अंक टूटकर 76,552 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 717 अंकों की गिरावट के साथ 23,732 पर आ गया। सभी प्रमुख स्टॉक्स लाल निशान में रहे। इंडिगो 7% से अधिक लुढ़ककर शीर्ष नुकसान में रहा। इसके अलावा टाटा स्टील 5.59%, मारुति 5.40% और इटरनल 5.19% टूटकर बंद हुए।

    शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट

    सुबह के कारोबार में भी बाजार में दबाव साफ दिखा। बीएसई सेंसेक्स 1,862 अंक की गिरावट के साथ 77,056 पर खुला, जबकि निफ्टी 582 अंक नीचे 23,868 पर आया। NSE पर केवल 249 शेयर ही हरे निशान में थे, जबकि 403 स्टॉक्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए। निफ्टी फ्यूचर्स पिछले बंद भाव से करीब 722 अंकों की गिरावट के साथ 23,824 के आसपास ट्रेड कर रहे थे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी-ईरान संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू बाजार में भारी बिकवाली हुई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जिससे वैश्विक निवेशक भी सतर्क हो गए।

    एशियाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाहाकार

    सोमवार को एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखा गया। जापान का निक्की 225 सूचकांक 6.22% गिरकर 53,000 के स्तर से नीचे चला गया, जबकि टॉपिक्स 5.27% टूट गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स पिछले सप्ताह 11% गिरने के बाद सोमवार को 8% से अधिक लुढ़का, जिसमें सैमसंग और SK हाइनिक्स जैसी कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित रहीं। गिरावट के चलते सर्किट ब्रेकर चालू किए गए और ट्रेडिंग 20 मिनट के लिए रोक दी गई। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी तेज गिरावट के साथ खुला। वॉल स्ट्रीट में भी दबाव रहा। डॉउ जोन्स फ्यूचर्स में 950 अंक तक की गिरावट आई, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 100 अंक से अधिक लुढ़के और नैस्डैक फ्यूचर्स में 400 अंकों की गिरावट दर्ज हुई।

    कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

    अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच हुर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरे और खाड़ी के तेल उत्पादकों द्वारा उत्पादन में कटौती के कारण कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड ऑयल 18.03% बढ़कर 109.40 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड फ्यूचर्स 20.23% उछलकर 109.29 डॉलर पर पहुंच गए। यह दोनों स्तर रूस के 2022 में यूक्रेन पर हमले के शुरुआती महीनों के बाद नहीं देखे गए थे। कतर के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर युद्ध के कारण खाड़ी देशों का उत्पादन बाधित हुआ, तो कच्चे तेल की कीमत $150 तक पहुंच सकती है।

  • रूस से तेल खरीदने की भारत को मिली मोहलत, ट्रंप बोले- वैश्विक दबाव कम करने का कदम

    रूस से तेल खरीदने की भारत को मिली मोहलत, ट्रंप बोले- वैश्विक दबाव कम करने का कदम


    वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बिगड़ने के बीच अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दे दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘थोड़ा दबाव कम करने’ के लिए उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला वैश्विक तेल बाजार पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। ट्रंप ने यह बयान एयर फोर्स वन में मीडिया से बातचीत के दौरान दिया।

    स्थिति जल्द सामान्य होगी: ट्रंप

    ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका वैश्विक तेल बाजार पर दबाव कम करने के और कदम उठा सकता है। उन्होंने बताया कि दुनिया में तेल की कोई कमी नहीं है और अमेरिका के पास पर्याप्त तेल उपलब्ध है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी इस बात की पुष्टि की कि यह निर्णय वैश्विक तेल आपूर्ति में अस्थायी कमी को दूर करने के लिए लिया गया है।

    खाड़ी क्षेत्र में संकट

    खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले शिपिंग मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। यह मार्ग तेल परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत अपनी लगभग 40 प्रतिशत तेल आयात मध्य पूर्व से करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। इस स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी मोहलत दी है।

    ऊर्जा बाजार पर प्रभाव और भारत की सुरक्षा

    अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बताया कि भारत को रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की मोहलत, मध्य पूर्व में तनाव के कारण वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए उठाए गए अल्पकालिक उपायों का हिस्सा है।

    भारतीय अधिकारियों के अनुसार, देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा की स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहा है और वर्तमान में पर्याप्त एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल की उपलब्धता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि ऊर्जा उपभोक्ताओं को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। भारत को विभिन्न स्रोतों से पहले से अधिक ऊर्जा आपूर्ति मिल रही है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से संभावित बाधाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

    रूसी तेल का बढ़ता हिस्सा

    भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता लाई है। 2022 में रूस भारत के कुल कच्चे तेल आयात का केवल 0.2 प्रतिशत था, लेकिन फरवरी 2026 में यह लगभग 20 प्रतिशत यानी करीब 1.04 मिलियन बैरल प्रति दिन पहुंच गया।

    ईरान पर सैन्य अभियान: ट्रंप का दावा

    ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के पूरे नेतृत्व का सफाया कर दिया है और इसे पृथ्वी से एक बड़े ‘कैंसर’ को हटाने जैसा बताया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सैन्य अभियान ईरान में कुछ समय तक जारी रहेगा। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसेना के 44 जहाजों, सभी विमान और अधिकांश मिसाइलों को नष्ट कर दिया है। साथ ही मिसाइल निर्माण के क्षेत्रों को भारी नुकसान पहुंचाने के कारण उनकी ड्रोन क्षमता में कमी आई है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व के लगभग हर स्तर पर सफाया कर दिया गया है।

  • रूस ईरान को खुफिया जानकारी दे रहा! ट्रंप बोले- इससे कोई खास फायदा नहीं

    रूस ईरान को खुफिया जानकारी दे रहा! ट्रंप बोले- इससे कोई खास फायदा नहीं



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने शनिवार को उन रिपोर्टों को कम महत्व दिया, जिनमें कहा गया कि रूस ने ईरान को अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों पर हमले के लिए खुफिया जानकारी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ऐसा हुआ भी है, तो इससे ईरान को कोई खास लाभ नहीं हो रहा। यह टिप्पणी उन्होंने एयर फोर्स वन से मियामी के लिए रवाना होते समय की।

    अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा तनाव

    ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। युद्ध शुरू होने के एक दिन बाद कुवैत में ड्रोन हमले में अमेरिकी सेना के छह रिजर्व सैनिक मारे गए।

    राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर पुष्टि नहीं की कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को रूस द्वारा ईरान को लक्ष्य संबंधी जानकारी देने के ठोस सबूत मिले हैं या नहीं, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे युद्ध की दिशा पर बड़ा असर नहीं पड़ा है।

    रूस और अमेरिका संबंधों पर सवाल टाले

    जब ट्रंप से पूछा गया कि अगर रूस ईरान की मदद कर रहा है तो अमेरिका-रूस संबंधों पर क्या असर पड़ेगा, तो उन्होंने सवाल टालते हुए कहा कि “हम भी उनके खिलाफ वैसा ही कर सकते हैं।” उन्होंने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों से अमेरिका यूक्रेन को खुफिया सहायता दे रहा है ताकि वह रूस के हमलों से बच सके।

    तेल बाजार पर युद्ध का असर

    पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के साथ ही तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। फारस की खाड़ी के प्रवेश द्वार Hormuz Strait से रोजाना लगभग दो करोड़ बैरल तेल ले जाने वाले जहाज गुजरते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उनके आवागमन में रुकावट आई है। ईरान के जवाबी हमलों और क्षेत्र की ऊर्जा सुविधाओं को हुए नुकसान के कारण वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा, जिससे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।

    रणनीतिक तेल भंडार पर ट्रंप का रुख

    तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कदम उठाने को तैयार हैं, लेकिन फिलहाल अमेरिका के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी रणनीतिक तेल भंडार में पिछले महीने के अंत तक लगभग 41.5 करोड़ बैरल तेल था, जबकि इसकी कुल क्षमता 70 करोड़ बैरल से अधिक है। ट्रंप ने कहा कि देश में पर्याप्त तेल है और बाजार में आपूर्ति जल्दी सामान्य हो सकती है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव में रूस की एंट्री! ईरान को दी अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी

    मिडिल ईस्ट तनाव में रूस की एंट्री! ईरान को दी अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच रूस अब खुलकर ईरान के समर्थन में सामने आता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने ईरान को ऐसी खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई है, जिससे उसे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, युद्धपोतों और विमानों को निशाना बनाने में मदद मिल सकती है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, दो अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि रूस ने तेहरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और संपत्तियों से जुड़ी अहम जानकारी साझा की है। इससे ईरान को अमेरिका की सैन्य तैनाती को समझने और संभावित हमले की रणनीति बनाने में मदद मिल सकती है। माना जा रहा है कि यह पहला संकेत है कि मॉस्को उस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने की कोशिश कर रहा है, जिसे अमेरिका और इजरायल ने हाल ही में ईरान के खिलाफ शुरू किया है।

    दरअसल, रूस और ईरान के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में और मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को मिसाइलों और ड्रोन की जरूरत पड़ी, जिसके चलते दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ा। वहीं ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हिज्बुल्लाह, हमास और हूती जैसे समूहों के समर्थन के कारण लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है, ऐसे में रूस का समर्थन उसके लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

    पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से की बातचीत
    इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत भी की। इस दौरान उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और हमलों में आम नागरिकों की जान जाने पर दुख जताया। युद्ध शुरू होने के बाद क्रेमलिन की ओर से ईरान को किया गया यह पहला आधिकारिक फोन कॉल था।

    पुतिन ने बातचीत में तनाव खत्म करने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट से जुड़े मुद्दों को सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

    अमेरिका की प्रतिक्रिया
    रूस द्वारा ईरान को खुफिया जानकारी दिए जाने की खबरों पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इससे उनके सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन जारी रहेंगे और अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल किया जाएगा।

    ईरान के लगातार हमले
    वहीं, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और इजरायल जहां ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और मिडिल ईस्ट के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अब तक इजरायल समेत करीब 12 देशों में सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इनमें यूएई, कतर, बहरीन, जॉर्डन, इराक, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब, साइप्रस, सीरिया और अजरबैजान शामिल हैं। इन हमलों में ईरान ने खोर्रमशहर-4, खेबर और फतेह जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। यह भी बताया जा रहा है कि इजरायल पर दागी गई कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों में क्लस्टर बम लगे थे।

    हालांकि, अब बड़ा सवाल यह है कि बढ़ते दबाव और हमलों के बीच ईरान अपने रुख में नरमी दिखाएगा या टकराव और बढ़ेगा। फिलहाल ईरान के रुख से ऐसा संकेत नहीं मिल रहा कि वह पीछे हटने को तैयार है।

  • US-Iran संघर्ष के बीच PM मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से चर्चा, जानें किन मुद्दों पर हुई बात

    US-Iran संघर्ष के बीच PM मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से चर्चा, जानें किन मुद्दों पर हुई बात


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तेजी से बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष (US-Iran conflict) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (French President Emmanuel Macron) से टेलीफोन पर बातचीत की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर भारत और फ्रांस की साझा चिंताओं पर विस्तार से चर्चा हुई, साथ ही संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक पश्चिम एशिया के कई नेताओं से बात की है। भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता की बहाली के लिए कूटनीतिक प्रयासों को मजबूती से समर्थन दे रहा है, ताकि यह संघर्ष और व्यापक न हो सके।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज मैंने अपने मित्र राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की। हमने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर अपनी साझा चिंताओं और संवाद एवं कूटनीति की ओर लौटने की आवश्यकता पर चर्चा की। हम क्षेत्र में शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए घनिष्ठ रूप से जुड़े रहेंगे और प्रयासों का समन्वय करेंगे।

    दरअसल, यह फोन कॉल ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व का संघर्ष तेजी से फैल रहा है और अब यह भारत के निकटवर्ती क्षेत्रों तक पहुंच गया है। बुधवार को श्रीलंका के तट से कुछ दूर अंतरराष्ट्रीय जल में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना को टॉरपीडो से नष्ट कर दिया। इस हमले में कम से कम 80 से अधिक नाविकों की मौत हो गई, जबकि श्रीलंका की नौसेना ने 32 लोगों को बचाया। जहाज में कुल 180 लोग सवार थे। बता दें कि यह ईरानी फ्रिगेट कुछ दिन पहले ही भारत में हुए अंतरराष्ट्रीय नौसेना अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद लौट रहा था।

    बता दें कि ईरान इजरायल और अमेरिका संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलों से हुई, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर जवाबी हमलों की शुरूआत की, जिससे स्थिति और भयावह हो गई। पिछले कुछ दिनों में दोनों पक्षों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का दौर जारी है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने श्रीलंका तट पर हुए हमले की कड़ी निंदा की और इसे ‘बिना किसी चेतावनी के अत्याचार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस मिसाल पर गहरा अफसोस होगा।

  • सऊदी से रक्षा समझौते के बाद भी खामोश पाकिस्तान, ईरानी हमलों पर नहीं दिखी सैन्य प्रतिक्रिया

    सऊदी से रक्षा समझौते के बाद भी खामोश पाकिस्तान, ईरानी हमलों पर नहीं दिखी सैन्य प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुआ संघर्ष अब कई देशों को प्रभावित करता नजर आ रहा है। इसी बीच आशंका जताई जा रही है कि इसका असर पाकिस्तान तक भी पहुंच सकता है। इसकी वजह पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुआ सुरक्षा समझौता है, जिसके मुताबिक किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। हालांकि हालिया हालात में पाकिस्तान इस समझौते के अनुरूप कदम उठाता नजर नहीं आ रहा है। ईरान पहले ही सऊदी अरब के कई इलाकों पर हमले कर चुका है।

    क्या है समझौते की शर्तें
    सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता (SMDA) हुआ था, जिसने दोनों देशों के सुरक्षा सहयोग को औपचारिक रूप दिया। समझौते के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया था कि किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और दोनों मिलकर उसका जवाब देंगे।

    रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते में यह भी प्रावधान है कि यदि किसी तीसरे देश द्वारा पाकिस्तान पर हमला होता है, तो उसे सऊदी अरब पर हमला माना जाएगा और सऊदी अरब को भी जवाब देने का अधिकार होगा।

    ईरान के हमले, लेकिन पाकिस्तान की चुप्पी
    हाल के समय में ईरान ने सऊदी अरब के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। सऊदी अरब की रिफाइनरी को भी निशाना बनाया गया। इसके बावजूद पाकिस्तान की ओर से समझौते के तहत किसी तरह की सैन्य कार्रवाई या जवाबी कदम सामने नहीं आए हैं।

    अपने ही समझौते में उलझा पाकिस्तान?
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन हमलों की निंदा करते हुए सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई है। हालांकि उन्होंने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने या ईरान के खिलाफ कार्रवाई की कोई घोषणा नहीं की। इससे यह संदेश जा रहा है कि पाकिस्तान फिलहाल इस समझौते को पूरी तरह लागू करने से बच रहा है।

    विदेश मंत्री ने क्या कहा
    पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने मंगलवार को कहा कि संघर्ष शुरू होने के समय वह सऊदी अरब और ईरान के नेताओं के संपर्क में थे। उन्होंने इस्लामाबाद में मीडिया को बताया कि उस समय वह इस्लामी सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेने के लिए सऊदी अरब में मौजूद थे और उन्होंने सऊदी अरब तथा ईरान के विदेश मंत्रियों से बातचीत की।

    डार के मुताबिक उन्होंने अपने ईरानी समकक्ष को बताया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ पारस्परिक रक्षा समझौता है। इस पर ईरानी पक्ष ने उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा कि सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न हो।

    उन्होंने दावा किया कि इस बातचीत के बाद सऊदी अरब पर युद्ध का प्रभाव बेहद सीमित रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस संघर्ष को खत्म करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

    विदेश मंत्री ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से उन्होंने तुर्की, बांग्लादेश, फिलिस्तीन, ईरान, उज्बेकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, ओमान, इराक, बहरीन और अजरबैजान के विदेश मंत्रियों के अलावा यूरोपीय संघ के उपाध्यक्ष और संयुक्त अरब अमीरात के उपप्रधानमंत्री से भी फोन पर बातचीत की है।