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  • ईरान वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, कई दिनों तक चल सकती है बातचीत

    ईरान वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, कई दिनों तक चल सकती है बातचीत


    नई दिल्ली । अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ अगले चरण की महत्वपूर्ण कूटनीतिक वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हो गए हैं। इस दौरे को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।

    जेडी वेंस ने जॉइंट बेस एंड्रयूज से रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान के साथ होने वाली इस बैठक से परमाणु मुद्दे पर ठोस प्रगति होगी। साथ ही उन्होंने लेबनान में लागू नाजुक संघर्ष विराम को बनाए रखने पर भी जोर दिया।

    सूत्रों के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है और दोनों पक्षों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत पहले से ही शुरू हो चुकी है। यह वार्ता ल्यूसर्न के पास किसी डिप्लोमैटिक स्थल पर होने की संभावना है और इसमें कई दिनों तक चर्चा चल सकती है।

    वेंस ने बताया कि इस बातचीत का शुरुआती लक्ष्य एक स्पष्ट ढांचा तैयार करना और आगे की वार्ता के लिए मजबूत आधार बनाना होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे स्वयं इस दौरे पर एक-दो दिन ही रह सकते हैं, लेकिन पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर फोकस रहेगा।

    मिडिल ईस्ट में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी तनाव ने पहले से ही शांति प्रयासों को प्रभावित किया है। ऐसे में अमेरिका इस वार्ता को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देख रहा है।

    वेंस ने कहा कि हालांकि हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है। उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग और डिप्लोमैटिक टीम के प्रयासों की भी सराहना की, साथ ही स्वीकार किया कि संघर्ष विराम को बनाए रखना लगातार निगरानी और प्रयास की मांग करता है।

    फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस वार्ता पर टिकी हुई है, क्योंकि इसके नतीजे न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों को प्रभावित करेंगे, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है।

  • अमेरिका-ईरान वार्ता फिर अटकी, फ्रीज फंड और यूरेनियम शर्तों पर गतिरोध गहराया

    अमेरिका-ईरान वार्ता फिर अटकी, फ्रीज फंड और यूरेनियम शर्तों पर गतिरोध गहराया

    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर चल रही बातचीत एक बार फिर रुकती हुई नजर आ रही है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेशी बैंकों में जमा ईरान के फ्रीज फंड को जारी करने के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच गंभीर मतभेद सामने आए हैं, जिससे प्रस्तावित समझौते पर अनिश्चितता बढ़ गई है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका शुरुआती चरण में ही कुछ ब्लॉक की गई संपत्तियों को रिलीज करने पर सहमत नहीं होता, तब तक किसी अंतिम समझौते की संभावना कम है। ईरान का आरोप है कि बातचीत के दौरान अमेरिकी रुख कई बार बदलता रहा है और पहले बनी सहमतियों के बावजूद अहम शर्तों पर अड़चनें पैदा हुई हैं।

    जानकारी के अनुसार, ईरान ने अपनी स्थिति उन देशों तक भी पहुंचाई है जो बैकचैनल कूटनीति में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। तेहरान का कहना है कि वह केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा नहीं कर सकता और उसे समझौते के तहत ठोस गारंटी चाहिए, खासकर फ्रीज किए गए धन की तत्काल रिहाई के रूप में।

    दूसरी ओर, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि दावा किया कि कुछ प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है, लेकिन बाद में यह भी कहा कि बातचीत अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

    प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को नियंत्रित करने जैसे प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, यूरेनियम निपटान की प्रक्रिया और भविष्य में परमाणु गतिविधियों पर प्रतिबंध की अवधि को लेकर अभी भी सहमति नहीं बन सकी है। अगर यह वार्ता विफल होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिरता पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • ईरान-US वार्ता में नया तनाव, शांति प्रस्ताव के जवाब में अमेरिका ने रखी ये 5 कड़ी शर्तें

    ईरान-US वार्ता में नया तनाव, शांति प्रस्ताव के जवाब में अमेरिका ने रखी ये 5 कड़ी शर्तें



    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और शांति वार्ता के प्रयासों के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के हालिया शांति प्रस्ताव के जवाब में पांच कड़ी शर्तें रखी हैं। इन शर्तों के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है।

    हालांकि, अब तक न तो वॉशिंगटन और न ही तेहरान की ओर से इन शर्तों पर कोई आधिकारिक बयान आया है, लेकिन माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच सुलह की संभावनाओं को झटका लगा है।

    अमेरिका की 5 शर्तें

    ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव के जवाब में ये प्रमुख शर्तें रखी हैं:-

    मुआवजे से इनकार: अमेरिका ने किसी भी प्रकार के युद्ध हर्जाने या मुआवजे देने से साफ इनकार कर दिया है।
    यूरेनियम ट्रांसफर की शर्त: ईरान को अपने पास मौजूद 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा।
    परमाणु गतिविधियों पर सीमा: ईरान में केवल एक परमाणु संयंत्र को संचालन की अनुमति दी जाएगी।
    फ्रीज संपत्तियों पर रोक: विदेशों में जब्त ईरानी संपत्तियों और फंड्स को जारी करने से अमेरिका ने इनकार किया है।
    सीजफायर की शर्त: युद्धविराम तभी आगे बढ़ेगा जब दोनों पक्षों के बीच औपचारिक वार्ता शुरू होगी।

    ईरान की प्रतिक्रिया
    ईरानी विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका का यह रुख समाधान की बजाय राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास है। उनका आरोप है कि वॉशिंगटन बातचीत की आड़ में ऐसे लक्ष्य हासिल करना चाहता है जो वह सैन्य रूप से हासिल नहीं कर सका।

    ईरान की ओर से भी प्रस्ताव
    इससे पहले ईरान ने भी अमेरिका के सामने पांच शर्तें रखी थीं, जिनमें सभी मोर्चों पर दुश्मनी खत्म करना, प्रतिबंध हटाना, फ्रीज संपत्तियों को जारी करना, युद्ध हर्जाना देना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता स्वीकार करना शामिल था।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को हुए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा था और करीब 40 दिनों तक संघर्ष की स्थिति रही। इसके बाद 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी। 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई शुरुआती वार्ता भी बिना नतीजे के खत्म हो गई थी। इसके बाद से पाकिस्तान के माध्यम से दोनों देशों के बीच ड्राफ्ट प्रस्तावों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन नई अमेरिकी शर्तों के बाद बातचीत और अधिक जटिल हो गई है।

  • US-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में नरमी….

    US-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में नरमी….


    तेहरान।
    यूएस-इजरायल और ईरान (US-Israel and Iran) के बीच चल रही जंग में एक बार फ‍िर से समझौते की कोश‍िश की जा रही है. शांत‍ि की उम्‍मीद में शुक्रवार को 110 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंचने वाले क्रूड ऑयल के दाम (Crude Oil Price) में ग‍िरावट देखी जा रही है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi) के उच्‍च स्‍तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच रुकी हुई बातचीत फिर से शुरू होने की उम्‍मीद की जा रही है. इससे बाजार को मजबूती म‍िली है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का यह दूसरा दौर हो सकता है. हालांकि, ईरान ने शांति वार्ता में सीधा ह‍िस्‍सा लेने से साफ मना क‍िया है।

    शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान क्रूड ऑयल का दाम चढ़कर 106 डॉलर प्रत‍ि बैरल के करीब पहुंच गया था. लेक‍िन शाम होते-होते ईरान के प्रत‍िन‍िध‍िमंडल के पाक‍िस्‍तान पहुंचने के बाद इसमें ग‍िरावट देखी गई. WTI क्रूड का दाम ग‍िरकर 94.40 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड के दाम में भी नरमी देखी जा रही है और यह 105 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. 28 फरवरी को इजरायल की तरफ से ईरान पर हमला क‍िये जाने के बाद क्रूड के दाम में उठा-पटक बनी हुई है।


    तेल की कीमत में उठा-पटक बनी रहेगी

    होर्मुज बंद होने से तेल की ग्‍लोबल लेवल पर सप्‍लाई चेन टूट चुकी है. इससे आने वाले समय में भी तेल की कीमत में उठा-पटक बनी रहेगी. इससे पहले गुरुवार को भी तेल की कीमत 3% से ज्यादा बढ़ गई थीं. क्रूड ऑयल के दाम में प‍िछले पांच द‍िन से तेजी देखी जा रही थी. अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नहीं बनी तो लड़ाई फिर से शुरू हो सकती है और तेल के दाम और ज्यादा बढ़ सकते हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है क‍ि यद‍ि स्थिति और बिगड़ी तो दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं।


    भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

    सोशल मीडिया पर जारी क‍िये जा रहे दावों को खारिज करते हुए पेट्रोलियम म‍िन‍िस्‍टर ने कहा है कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम में इजाफा करने का फिलहाल कोई प्‍लान नहीं है. मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी करते हुए कहा गया कि फिलहाल इसे लेकर कोई योजना नहीं है. उन्होंने उन रिपोर्ट्स को फेक करार दिया, जिसमें दावे किए जा रहे हैं कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम में 25 से 28 रुपये की बढ़ोतरी कर सकती है.

    आज द‍िल्‍ली में पेट्रोल-डीजल के रेट

    – दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.71

    – मुंबईमें पेट्रोल ₹103.54, डीजल ₹90.01

    – कोलकाता में पेट्रोल ₹105.45, डीजल ₹91.81

    – चेन्नई में पेट्रोल ₹100.84, डीजल ₹92.38

  • अमेरिका-ईरान वार्ता फिर शुरू कराने में जुटा पाकिस्तान, शहबाज-मुनीर ने तेज की कूटनीतिक पहल

    अमेरिका-ईरान वार्ता फिर शुरू कराने में जुटा पाकिस्तान, शहबाज-मुनीर ने तेज की कूटनीतिक पहल

    नई दिल्ली। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शुरुआती बातचीत बेनतीजा रहने के बाद पाकिस्तान ने दोनों देशों को फिर से वार्ता की मेज पर लाने के लिए अपनी कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। यह दावा पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल ने सरकारी सूत्रों के हवाले से किया है।

    पहले दौर की बातचीत नहीं दे सकी ठोस नतीजा
    रिपोर्ट के मुताबिक, प्रारंभिक वार्ता में कोई औपचारिक समझौता नहीं हो पाया, हालांकि दोनों पक्षों ने अपने-अपने रुख स्पष्ट रूप से सामने रखे। इसके बावजूद पाकिस्तान को उम्मीद है कि आगे बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में प्रगति हो सकती है।

    वॉशिंगटन और तेहरान से लगातार संपर्क
    पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान दोनों के संपर्क में बना हुआ है और जल्द से जल्द दूसरे दौर की बातचीत शुरू करने की कोशिश कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, 22 अप्रैल के आसपास समाप्त होने वाले संभावित सीजफायर से पहले किसी ठोस नतीजे तक पहुंचना प्राथमिक लक्ष्य है, ताकि क्षेत्र में तनाव दोबारा न बढ़े।

    डेडलाइन से पहले समाधान की कोशिश
    एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि तय समयसीमा के भीतर इस मुद्दे को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, इसी अवधि में दूसरे दौर की वार्ता आयोजित कराने की दिशा में भी लगातार प्रयास जारी हैं।

    शहबाज शरीफ के निर्देश पर चल रही पहल
    यह पूरी कूटनीतिक कवायद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निर्देश पर की जा रही है, जिससे स्पष्ट है कि इस्लामाबाद इस मामले को काफी अहम मान रहा है।

    डार और मुनीर कर रहे नेतृत्व
    पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इसहाक डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर इस प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं। पाकिस्तान दोनों देशों तक वार्ता फिर से शुरू करने का संदेश पहुंचा चुका है और अब उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि जल्द ही सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी, जिससे तनावपूर्ण स्थिति को नियंत्रित किया जा सके और सीमित समय में कूटनीतिक समाधान निकाला जा सके।

  • इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच होगी अहम वार्ता, पाकिस्तान मेजबान, इजरायली हमलों ने बढ़ाई चिंता

    इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच होगी अहम वार्ता, पाकिस्तान मेजबान, इजरायली हमलों ने बढ़ाई चिंता


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की मेजबानी पाकिस्तान करने जा रहा है। शुक्रवार को इस्लामाबाद में होने वाली इस अहम बैठक से पहले पाकिस्तान ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी है। हालांकि, क्षेत्रीय हालात और इजरायल के हालिया हमलों को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

    ईरान की कड़ी चेतावनी से बढ़ी चिंता

    वार्ता से ठीक पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने चेतावनी दी है कि लेबनान पर इजरायल के हमले शुरुआती युद्धविराम का उल्लंघन हैं और इससे बातचीत पर गंभीर असर पड़ सकता है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि ऐसे कदम शांति प्रक्रिया को “निरर्थक” बना सकते हैं। लेबनान में हुए हालिया हमलों में भारी जनहानि की रिपोर्ट के बाद तेहरान का रुख और सख्त हो गया है, और उसने संकेत दिया है कि वह अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ खड़ा रहेगा।

    इस्लामाबाद में हाई-लेवल डिप्लोमैसी की तैयारी

    पाकिस्तान इस पूरी वार्ता प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख के बीच क्षेत्रीय शांति प्रयासों की समीक्षा भी की गई है। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को भरोसा दिलाया है कि सभी विदेशी प्रतिनिधिमंडलों को “पूर्ण सुरक्षा” प्रदान की जाएगी और बातचीत को सफल बनाने के लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा।

    ईरानी पक्ष में अब भी संशय बरकरार
    पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघादम ने स्पष्ट किया है कि इजरायली हमलों के चलते शांति वार्ता को लेकर गंभीर संदेह बना हुआ है। इसके बावजूद ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहा है और प्रस्तावित 10-बिंदु एजेंडे पर बातचीत करेगा।

    सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी

    वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें वरिष्ठ अमेरिकी नेतृत्व के साथ प्रमुख रणनीतिक सलाहकार भी मौजूद हो सकते हैं। पाकिस्तान ने अमेरिकी पक्ष को आश्वासन दिया है कि उनकी यात्रा के दौरान अभेद्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इस बीच सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा के लिए एक विशेष टीम पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुकी है।

    शांति समझौते पर वैश्विक नजरें
    इस वार्ता में मुख्य ध्यान दीर्घकालिक शांति ढांचे पर रहेगा, जिसमें प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा गारंटी और ईरान के परमाणु व मिसाइल कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बातचीत सफल होती है या असफल, इसका सीधा असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ेगा।

  • ओमान में बातचीत खत्म होते ही अमेरिका का ईरान पर नए तेल प्रतिबंधों का ऐलान, तेहरान सकते में

    ओमान में बातचीत खत्म होते ही अमेरिका का ईरान पर नए तेल प्रतिबंधों का ऐलान, तेहरान सकते में


    वॉशिंगटन। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में हुई अप्रत्यक्ष बातचीत खत्म होने के तुरंत बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए तेल प्रतिबंधों की घोषणा कर दी। इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान के तेल निर्यात को और सीमित करना बताया गया है, और इसके बाद तेहरान सकते में है।

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अवैध तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात को रोकने के लिए अधिकतम दबाव की नीति पर कायम हैं। अमेरिका ने 14 जहाजों को निशाना बनाया है, जिन पर ईरानी तेल ढोने का आरोप है। इनमें तुर्की, भारत और यूएई के झंडे वाले जहाज भी शामिल हैं। इसके अलावा 15 कंपनियों और 2 व्यक्तियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। अब इन जहाजों और संस्थाओं से जुड़े कोई भी लेन-देन अमेरिका में अवैध माना जाएगा।

    ट्रंप नीति जारी
    अमेरिका पहले भी ईरान पर इसी तरह के प्रतिबंध लगाता रहा है। इनका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाकर उसे अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों में बदलाव के लिए मजबूर करना है। दिलचस्प बात यह है कि यह घोषणा ऐसे समय हुई जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ओमान में बातचीत का माहौल सकारात्मक था। बावजूद इसके अमेरिका ने दबाव की नीति में कोई ढील नहीं दी।

    तनाव की पृष्ठभूमि
    ओमान में बातचीत के समय ईरान में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी जन-आंदोलन जैसी घटनाओं को सरकार ने बलपूर्वक दबाया है। अमेरिका ने ईरान के तटों के पास अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ाई है और राष्ट्रपति ट्रंप ने बल प्रयोग की चेतावनी दी है। विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका की रणनीति साफ संकेत देती है कि वह कूटनीतिक बातचीत जारी रखते हुए आर्थिक और सैन्य दबाव के जरिए ईरान को झुकाने की कोशिश कर रहा है।