अमेरिका-ईरान वार्ता फिर अटकी, फ्रीज फंड और यूरेनियम शर्तों पर गतिरोध गहराया

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर चल रही बातचीत एक बार फिर रुकती हुई नजर आ रही है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेशी बैंकों में जमा ईरान के फ्रीज फंड को जारी करने के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच गंभीर मतभेद सामने आए हैं, जिससे प्रस्तावित समझौते पर अनिश्चितता बढ़ गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका शुरुआती चरण में ही कुछ ब्लॉक की गई संपत्तियों को रिलीज करने पर सहमत नहीं होता, तब तक किसी अंतिम समझौते की संभावना कम है। ईरान का आरोप है कि बातचीत के दौरान अमेरिकी रुख कई बार बदलता रहा है और पहले बनी सहमतियों के बावजूद अहम शर्तों पर अड़चनें पैदा हुई हैं।

जानकारी के अनुसार, ईरान ने अपनी स्थिति उन देशों तक भी पहुंचाई है जो बैकचैनल कूटनीति में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। तेहरान का कहना है कि वह केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा नहीं कर सकता और उसे समझौते के तहत ठोस गारंटी चाहिए, खासकर फ्रीज किए गए धन की तत्काल रिहाई के रूप में।

दूसरी ओर, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालांकि दावा किया कि कुछ प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है, लेकिन बाद में यह भी कहा कि बातचीत अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को नियंत्रित करने जैसे प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, यूरेनियम निपटान की प्रक्रिया और भविष्य में परमाणु गतिविधियों पर प्रतिबंध की अवधि को लेकर अभी भी सहमति नहीं बन सकी है। अगर यह वार्ता विफल होती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिरता पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।