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  • वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका की नजर, ट्रंप बोले- यह दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील

    वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका की नजर, ट्रंप बोले- यह दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ एक ऐसा समझौता किया है, जिसके तहत करीब 65 अरब बैरल तेल भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस समझौते की जानकारी दी और इसे दुनिया की सबसे बड़ी तेल डील बताया।

    ट्रंप के अनुसार, यह समझौता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के बीच हुई बातचीत के बाद हुआ। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “संयुक्त राज्य अमेरिका ने अभी-अभी वेनेजुएला देश के साथ एक समझौता किया है- जो दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील है!”

    मादुरो की गिरफ्तारी के बीच हुआ ऐलान

    अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका लाने का ऑपरेशन चलाया था। इसके बाद मादुरो पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी से जुड़े संघीय आरोप लगाए जाने की बात कही गई थी।

    इस बीच अमेरिका में गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर ट्रंप प्रशासन पर दबाव भी बढ़ रहा है। ईरान में करीब छह महीने से युद्ध जारी है और फिलहाल इसके खत्म होने के संकेत नहीं हैं। ऐसे हालात में अमेरिका ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का इस्तेमाल किया है। अगस्त की शुरुआत तक इस भंडार में 30 करोड़ बैरल से भी कम तेल बचा था।

    मादुरो को हटाने के बाद वेनेजुएला पर बढ़ा फोकस

    जनवरी में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के बाद ट्रंप ने अमेरिकी तेल कंपनियों को दोबारा वेनेजुएला भेजने और वहां मौजूद तेल भंडार का इस्तेमाल करने की बात कही थी।

    ट्रंप का आरोप रहा है कि वेनेजुएला ने अमेरिका का तेल चुराया था। उनका तर्क था कि वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने दशकों पहले सैकड़ों विदेशी संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया था, जिनमें अमेरिकी तेल कंपनियों की संपत्तियां भी शामिल थीं।

    303 अरब बैरल का भंडार, फिर भी उत्पादन सिर्फ 1%

    वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है। अनुमान के मुताबिक देश की जमीन के नीचे करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक यह दुनिया के कुल तेल भंडार का करीब 17% है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया के कई हिस्सों में बिना इस्तेमाल हुए तेल की खोज अभी भी जारी रहती है, जबकि वेनेजुएला के भूमिगत तेल भंडार का बड़ा हिस्सा पहले ही चिन्हित किया जा चुका है और उसके बारे में जानकारी उपलब्ध है।

    हालांकि, कमजोर बुनियादी ढांचे और अन्य समस्याओं के कारण इतना बड़ा भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला दुनिया के कुल तेल उत्पादन का सिर्फ 1% ही उत्पादन कर पाता है।

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ट्रंप ने बताया ‘अमेरिकी इलाका’, ईरान ने कहा- रुख नहीं बदला तो बंद रहेगा

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ट्रंप ने बताया ‘अमेरिकी इलाका’, ईरान ने कहा- रुख नहीं बदला तो बंद रहेगा


    नई दिल्ली। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ट्रूथ सोशल पर एक मैप शेयर करते हुए होर्मुज को फिर ‘अमेरिकी इलाका’ बताया। दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि जब तक वॉशिंगटन अपना रुख नहीं बदलता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का सवाल नहीं है।

    पहले भी कर चुके हैं होर्मुज को लेकर दावा
    ट्रंप इससे पहले भी होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताए जाने की बात कह चुके हैं। उन्होंने 18 अगस्त को भी इसी तरह का मैप शेयर किया था और कहा था कि जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी इलाका घोषित किया जाएगा। इससे पहले 14 अगस्त को लॉन्ग आइलैंड में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज को अपना क्षेत्र घोषित करेगा।

    ईरान ने ट्रंप के इस दावे को खारिज किया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसिन रेज़ाई ने अमेरिकी दावे पर तंज कसते हुए कहा था कि होर्मुज को दोबारा खोल पाने में अमेरिका की नाकामी और उस पर मालिकाना हक जताने के दावे के बीच की दूरी, वॉशिंगटन और होर्मुज के बीच की दूरी से भी ज्यादा है।

    ईरान पर नए प्रतिबंधों की तैयारी
    ट्रंप का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों की घोषणा कर सकते हैं। उन्होंने चीन से भी तेहरान के तेल निर्यात को लेकर अमेरिका का सहयोग करने की अपील की है।

    चीन ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है। ऐसे में नए अमेरिकी प्रतिबंधों का असर सिर्फ ईरान तक सीमित रहने के बजाय उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भी पड़ सकता है।

    ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को बताया गैरकानूनी
    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना की है। उनका आरोप है कि अमेरिका अपनी सीमाओं से बाहर भी अपने अधिकार थोपने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सेकेंडरी प्रतिबंधों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है।

    मोहसिन रेज़ाई ने पड़ोसी देशों को भी अमेरिकी आर्थिक अभियान का समर्थन नहीं करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जो देश अमेरिका के आर्थिक युद्ध में शामिल होंगे, ईरान उन्हें दुश्मन मानेगा।

    ट्रंप-ईरान के बीच नहीं थमा तनाव
    ट्रंप लगातार दूसरे देशों से ईरान को आर्थिक मदद या व्यापारिक रास्ता उपलब्ध नहीं कराने की अपील कर रहे हैं। उनका जोर इस बात पर है कि तेहरान को अमेरिका के मुताबिक समझौते की शर्तें स्वीकार करनी चाहिए।

    वहीं, ईरान भी अपने रुख पर कायम है। हालांकि, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने टकराव खत्म करने के लिए कूटनीतिक समाधान की बात कही है। उनका कहना है कि ईरान अपनी ताकत और सम्मान बनाए रखते हुए संघर्ष को खत्म करने का रास्ता तलाशना चाहता है।

    होर्मुज को लेकर दोनों देशों के सख्त रुख के बीच अब तनाव और बढ़ने की आशंका है। खासकर नए अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरानी तेल व्यापार पर दबाव बढ़ने से यह विवाद आर्थिक मोर्चे पर भी गंभीर रूप ले सकता है।

  • ट्रंप की सबसे बड़े विरोधी से फिर यारी! कभी कोर्ट में खिलाफ गवाही देने वाले कोहेन के शो में पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति

    ट्रंप की सबसे बड़े विरोधी से फिर यारी! कभी कोर्ट में खिलाफ गवाही देने वाले कोहेन के शो में पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके पूर्व करीबी सहयोगी माइकल कोहेन के बीच सालों पुरानी कड़वाहट अब कम होती नजर आ रही है। कभी ट्रंप के खिलाफ अदालत में अहम गवाही देने वाले कोहेन के रेडियो शो में ट्रंप पहुंचे। बातचीत के दौरान दोनों के बीच पुरानी तल्खी की जगह दोस्ताना अंदाज दिखाई दिया। कोहेन ने पुराने दिनों को याद करते हुए ट्रंप को फिर ‘बॉस’ कहकर संबोधित किया।

    कभी ट्रंप के लिए सबकुछ करने को तैयार थे कोहेन

    माइकल कोहेन लंबे समय तक ट्रंप के बेहद करीबी माने जाते थे। करीब 15 साल तक दोनों साथ रहे। उस दौर में कोहेन खुद को ट्रंप का बेहद वफादार बताते थे। लेकिन 2018 में दोनों के रिश्तों में बड़ी दरार आ गई।

    जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद कोहेन ने ट्रंप के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 2019 में अमेरिकी कांग्रेस के सामने भी गवाही दी और ट्रंप से जुड़े कई मामलों पर अपनी बात रखी।

    हश-मनी केस में ट्रंप के खिलाफ गवाही

    2024 में कोहेन ट्रंप के हश-मनी मामले में अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाह बने। उन्होंने दावा किया कि 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले ऐसी जानकारियों को सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश की गई थी, जो ट्रंप के चुनाव अभियान के लिए नुकसानदेह हो सकती थीं।

    इस मुकदमे में ट्रंप को 34 मामलों में दोषी ठहराया गया। कोहेन की गवाही केस की अहम कड़ी रही। दूसरी तरफ कोहेन खुद भी कानूनी मामलों में फंसे और कई आरोपों में दोष स्वीकार करने के बाद उन्हें तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई।

    किताब में ट्रंप पर लगाए थे गंभीर आरोप

    कोहेन ने 2020 में प्रकाशित अपनी किताब में ट्रंप पर तीखे आरोप लगाए थे। उन्होंने ट्रंप को बेहद चालाक और लोगों को प्रभावित करने वाला व्यक्ति बताया था। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने संकेत दिया था कि पुराने रिश्ते और भावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई थीं।

    बाद में कोहेन ने अपने रुख में बदलाव करते हुए दावा किया कि ट्रंप के खिलाफ गवाही देने के दौरान जांच एजेंसियों ने उन पर दबाव बनाया था। ट्रंप ने भी कोहेन के इन बयानों को सोशल मीडिया पर साझा किया था।

    एक साल से फिर हो रही थी बातचीत

    कोहेन ने बताया कि पिछले करीब एक साल से दोनों के बीच कई बार बातचीत हुई है। उनका कहना है कि दोनों ने पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि माफी का मतलब अतीत को मिटा देना नहीं है, बल्कि आगे बढ़ना है।

    रेडियो शो का माहौल भी दोनों के बदले रिश्ते की झलक दे रहा था। कार्यक्रम में दोस्ती और दोबारा साथ आने की थीम वाले गाने बजाए गए।

    कोहेन ने फिर मांगी सजा में राहत

    कोहेन ने यह भी बताया कि उन्होंने व्हाइट हाउस में अपनी सजा माफी की अर्जी दोबारा भेजी है। पहले उनकी अर्जी खारिज हो चुकी है। अब उन्होंने नए सिरे से राहत की मांग की है और जल्द ही इस संबंध में फिर संपर्क करने की बात कही है।

    कभी ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले कोहेन और उनके ‘बॉस’ का दोबारा दोस्ताना अंदाज अमेरिकी राजनीति में रिश्तों के बदलते समीकरण की नई तस्वीर पेश कर रहा है।

  • ट्रंप के फैसले से शांति की उम्मीद, लेकिन सुरक्षा पर भी सवाल, दक्षिण कोरिया ने अमेरिका-उत्तर कोरिया में फिर बातचीत की जताई उम्मीद

    ट्रंप के फैसले से शांति की उम्मीद, लेकिन सुरक्षा पर भी सवाल, दक्षिण कोरिया ने अमेरिका-उत्तर कोरिया में फिर बातचीत की जताई उम्मीद


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास में कटौती के फैसले से कोरियाई प्रायद्वीप में एक ओर अमेरिका-उत्तर कोरिया के बीच बातचीत की उम्मीद जगी है, तो दूसरी ओर दक्षिण कोरिया में सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ी है। ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे रिश्तों का हवाला देते हुए सैन्य अभ्यास कम करने का आदेश दिया है। माना जा रहा है कि यह कदम किम के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने की कोशिश का हिस्सा है।

    दरअसल, किम जोंग उन अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यासों को उत्तर कोरिया पर संभावित हमले की तैयारी के तौर पर देखते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते परमाणु हथियारों और रूस के साथ सैन्य सहयोग के चलते उत्तर कोरिया अब पहले से अधिक आत्मविश्वास में है। ऐसे में अमेरिका से बड़ी रियायतें मिले बिना किम के बातचीत की मेज पर लौटने की संभावना कम मानी जा रही है।

    11 दिन का सैन्य अभ्यास शुरू, कटौती पर स्थिति साफ नहीं
    दक्षिण कोरिया और अमेरिका का 11 दिवसीय उल्ची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास सोमवार सुबह तय कार्यक्रम के मुताबिक शुरू हो गया। हालांकि, अभ्यास के किन हिस्सों में कटौती की जाएगी, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ट्रंप के ऐलान से दक्षिण कोरिया में हैरानी है, क्योंकि उत्तर कोरिया के परमाणु खतरे के बीच अमेरिका उसका प्रमुख सुरक्षा सहयोगी है।

    ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सैन्य अभ्यास महंगा होने के साथ उत्तर कोरिया को गलत और आक्रामक संकेत भी देता है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में उत्तर कोरिया ने कोई खतरा पैदा नहीं किया और सम्मानजनक रवैया अपनाया। ट्रंप ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को अभ्यास में बड़ी कटौती करने का निर्देश दिया है।

    दक्षिण कोरिया को बातचीत से शांति की उम्मीद
    दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि ट्रंप और किम के बीच दोस्ताना बातचीत अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच सार्थक संवाद की शुरुआत कर सकती है। इससे कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता को लेकर बातचीत आगे बढ़ सकती है। दक्षिण कोरिया ने कहा कि वह इसके लिए जरूरी कूटनीतिक प्रयास करेगा।

    राष्ट्रपति ली जे म्युंग उत्तर कोरिया के साथ रिश्ते सुधारने के पक्षधर हैं। सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने सीमा पर लगाए गए लाउडस्पीकर बंद करने समेत कई कदम उठाए हैं। इन लाउडस्पीकरों से पहले पॉप गाने और अंतरराष्ट्रीय खबरें प्रसारित की जाती थीं।

    परमाणु हथियार और रूस से बढ़ता सहयोग चिंता का कारण
    विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु हथियार और रूस के साथ मजबूत होते सैन्य संबंध उसकी रणनीतिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। ऐसे में केवल सैन्य अभ्यासों में कटौती से किम जोंग उन को बातचीत के लिए तैयार करना आसान नहीं होगा।

    दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया और अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल करने को लेकर सैन्य सहयोग पर भी बातचीत कर रहे हैं। इससे साफ है कि ट्रंप के फैसले के बावजूद दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

  • ईरान पर ट्रंप का बदला रुख! सैन्य कार्रवाई से पीछे हटे अमेरिका, अब आर्थिक दबाव की रणनीति

    ईरान पर ट्रंप का बदला रुख! सैन्य कार्रवाई से पीछे हटे अमेरिका, अब आर्थिक दबाव की रणनीति


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ किसी नए बड़े सैन्य अभियान की संभावना से फिलहाल दूरी बनाने के संकेत दिए हैं। अमेरिका अब तेहरान पर सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ता दिख रहा है। रविवार को ‘एक्सियोस’ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान को लेकर अपेक्षाकृत संयमित रुख अपनाया।

    ट्रंप ने किसी नई सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देने के बजाय कहा कि उनका प्रशासन फिलहाल कम आक्रामक रुख अपना रहा है। उन्होंने ईरान की खराब होती अर्थव्यवस्था और वहां बढ़ती महंगाई पर नजर रखने की बात कही।

    ट्रंप बोले- ईरान से आंशिक बातचीत जारी
    ट्रंप ने कहा कि ईरान में भारी महंगाई है और उसके पास पर्याप्त धन नहीं है। ऐसे में अमेरिका फिलहाल स्थिति को शांत रखते हुए तेहरान के साथ आंशिक बातचीत कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की आर्थिक हालत बेहद खराब है और उसके पास अपने सैनिकों को वेतन देने तक के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने भी ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है।

    खाड़ी देशों ने सैन्य कार्रवाई से बचने की दी सलाह
    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके खाड़ी सहयोगियों ने उन्हें बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने के बजाय आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बनाए रखने की सलाह दी थी। इसके अलावा अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत करीब 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। इससे वाशिंगटन को तत्काल सैन्य कार्रवाई किए बिना ईरान पर दबाव बनाए रखने का अवसर मिल रहा है। ट्रंप ने पूरे घटनाक्रम की तुलना शतरंज के खेल से की और कहा कि मामला अंततः सुलझ ही जाता है।

    होर्मुज समझौते पर नई शर्तों से अटका मामला
    इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित समझौते पर भी पेच फंस गया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहम्मद बागेर जोलकद्र ने शनिवार को मांग रखी कि अमेरिका युद्ध को पूरी तरह समाप्त करे, नौसैनिक नाकेबंदी हटाए और अपनी सेना वापस बुलाए।

    उन्होंने प्रतिबंध हटाने, फ्रीज की गई संपत्तियां बहाल करने और युद्ध क्षतिपूर्ति देने की भी मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोकने और अमेरिकी धमकियों तथा ईरान के कथित अपमान को बंद करने की मांग रखी। वहीं, अमेरिका ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को खारिज किया है। इसमें वाणिज्यिक जहाजों से टोल वसूलने की किसी भी कोशिश का विरोध शामिल है।

    होर्मुज जलमार्ग खोलना बन सकता है ट्रंप की प्राथमिकता
    ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल कर देता है, तो ट्रंप नया परमाणु समझौता किए बिना भी पीछे हटने के लिए तैयार हो सकते हैं। ऐसा हुआ तो यह अमेरिकी रणनीति में बड़ा बदलाव होगा। परमाणु मुद्दा पिछले कई महीनों से वाशिंगटन की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत लगातार मुश्किल बनी हुई है।

    ट्रंप का मानना है कि ईरान के परमाणु ठिकानों के नष्ट होने के बाद उसके लिए परमाणु क्षमताओं को दोबारा खड़ा करना बेहद कठिन होगा। अमेरिका का यह भी मानना है कि उसकी खुफिया एजेंसियां ईरान की किसी गुप्त परमाणु गतिविधि का पता लगाने में सक्षम होंगी।

    ईरान के यूरेनियम भंडार पर ट्रंप ने चिंता को किया खारिज
    राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के जमीन के नीचे मौजूद यूरेनियम भंडार को लेकर उठ रही चिंताओं को भी कमतर बताया। जुलाई में नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) के शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा था कि परमाणु सामग्री जमीन के बहुत नीचे है और दूसरे देशों के लिए उसे हासिल करना संभव नहीं होगा। ऐसे में मौजूदा हालात में ट्रंप प्रशासन व्यापक परमाणु समझौते की तुलना में होर्मुज जलमार्ग को दोबारा खोलने और ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने को प्राथमिकता दे सकता है।

  • ट्रंप के बयान से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर से नीचे

    ट्रंप के बयान से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर से नीचे


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर दिए गए बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ट्रंप ने संकेत दिए कि वह अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले रोकने का निर्देश देंगे और मध्य पूर्व में संघर्ष समाप्त करने की दिशा में समझौता करीब है। इसके बाद वैश्विक तेल बाजार में राहत देखने को मिली।

    ब्रेंट और अमेरिकी क्रूड दोनों सस्ते
    रविवार रात कारोबार के दौरान अमेरिकी WTI क्रूड करीब 5 प्रतिशत गिरकर 80.79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड भी लगभग 5 प्रतिशत लुढ़ककर 83.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 84 डॉलर के स्तर से नीचे है। हालांकि, मौजूदा कीमतें अब भी संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक बनी हुई हैं।

    संघर्ष से बाजार में बना रहा उतार-चढ़ाव
    फरवरी के अंत में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से तेल बाजार में लगातार अस्थिरता बनी हुई है। इस दौरान कई बार कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार भी पहुंच गई थीं।

    संघर्ष थमने से सप्लाई सुधरने की उम्मीद
    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव कम होता है, तो फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति सामान्य हो सकेगी। पिछले कई महीनों से संघर्ष के कारण तेल और अन्य सामान लेकर चलने वाले कई टैंकर प्रभावित हुए थे, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बना रहा।

    महंगाई पर भी पड़ा था असर
    तेल की ऊंची कीमतों का असर दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (ATF) की लागत पर पड़ा। कई देशों में ईंधन महंगा होने से परिवहन खर्च बढ़ा, हवाई किराए महंगे हुए और कुछ जगहों पर ईंधन की कमी के चलते राशनिंग जैसी व्यवस्था भी लागू करनी पड़ी।

    तेल कंपनियों को मिला फायदा
    ऊंची कीमतों के दौर में तेल और गैस कंपनियों को अच्छा मुनाफा हुआ। सप्लाई बाधित होने और परिवहन लागत बढ़ने से ईंधन की कीमतों में तेजी आई, जिसका लाभ ऊर्जा कंपनियों को मिला।

    भारत में तुरंत नहीं घटते पेट्रोल-डीजल के दाम
    विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने का असर भारत में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर तुरंत नहीं दिखता। यहां ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव, रुपये-डॉलर विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत और केंद्र व राज्यों के टैक्स जैसे कई कारकों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं। इसलिए वैश्विक बाजार में आई गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

  • ट्रंप ने ईरान को लेकर दिया सकारात्मक संकेत, लेकिन समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई की भी दी चेतावनी

    ट्रंप ने ईरान को लेकर दिया सकारात्मक संकेत, लेकिन समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई की भी दी चेतावनी


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी कूटनीतिक बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन साथ ही साफ किया है कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपना सकता है। ट्रंप के इस बयान के बीच पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच “बेहद दोस्ताना बातचीत” चल रही है और उन्हें समझौते की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका फिर वही कदम उठाएगा, जो कुछ दिन पहले सैन्य मोर्चे पर उठा रहा था।

    चुनावी रैली में दिखाया सख्त रुख

    मिशिगन में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने ईरान के प्रति और कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ईरान को “रिश्वत देकर नहीं, बल्कि हराकर” ही रोका जा सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की नौसेना, वायुसेना, सैन्य नेतृत्व, एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन-मिसाइल निर्माण क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका ने सख्त रुख नहीं अपनाया होता तो ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आता। ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना की सराहना करते हुए दावा किया कि ईरान की समुद्री गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण बनाया गया है।

    क्षेत्रीय तनाव फिर बढ़ा

    ट्रंप के बयान ऐसे समय आए हैं जब सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक ने ड्रोन हमलों की घटनाओं की जानकारी दी है। इन घटनाओं ने क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका दिया है। हालांकि अमेरिका ने हाल ही में करीब दो सप्ताह से जारी ईरान के खिलाफ हवाई अभियान को फिलहाल रोक दिया था।

    क्यों रोका गया हवाई अभियान?

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सैन्य कमांडरों ने राष्ट्रपति को बताया था कि लगातार हवाई हमलों के बाद संभावित सैन्य लक्ष्य सीमित रह गए हैं। साथ ही हमलों में इस्तेमाल होने वाले हथियारों और गोला-बारूद के भंडार को लेकर भी चिंता जताई गई थी। हालांकि ट्रंप ने हथियारों की कमी की बात को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना तेजी से अपने भंडार को फिर से मजबूत कर रही है और आधुनिक हथियार प्रणालियों पर काम जारी है।

    ईरान ने बातचीत की मांग से किया इनकार

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि मध्यस्थों के जरिए दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन तेहरान ने अमेरिका से बातचीत की कोई औपचारिक पहल नहीं की है। उन्होंने ऐसी खबरों को निराधार बताया। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि घोषित युद्धविराम प्रभावी रहता है तो ईरान भी अपने हमले रोक सकता है।

    सऊदी और हूती फिर आमने-सामने

    सऊदी अरब ने दावा किया कि उसने तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले कई ड्रोन हमलों को विफल कर दिया। रियाद ने इन हमलों के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित समूहों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे सऊदी सैन्य गतिविधियों का जवाब बताया।

    होर्मुज जलडमरूमध्य बना केंद्र

    इस बीच ईरान ने अमेरिका पर अपने समुद्री क्षेत्र में जहाजों और तेल टैंकरों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। तेहरान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण बरकरार है और यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बिना अनुमति गुजरने की कोशिश करने वाले छह जहाजों को सोमवार को वापस लौटा दिया गया।

  • ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, बोला- हमारा तेल रुका तो दुनिया की सप्लाई भी ठप होगी

    ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, बोला- हमारा तेल रुका तो दुनिया की सप्लाई भी ठप होगी


    नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के बाद ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के प्रमुख वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि यदि ईरान को अपना तेल निर्यात करने से रोका गया, तो क्षेत्र में कोई भी देश आसानी से तेल नहीं बेच पाएगा। साथ ही उन्होंने दोहराया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) में हालात अब युद्ध से पहले जैसे नहीं होंगे।

    ‘या सब बेचेंगे, या कोई नहीं’
    मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मौजूदा हालात का संदेश बिल्कुल साफ है—”या तो सभी तेल बेचेंगे या फिर कोई नहीं।” उन्होंने कहा कि यदि ईरान की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो क्षेत्र के अन्य देशों की तेल आपूर्ति भी सुरक्षित नहीं रह पाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान की सुरक्षा खतरे में होगी तो किसी अन्य देश का महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा भी सुरक्षित नहीं रहेगा। गालिबाफ ने यह भी दोहराया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा अमेरिकी सैन्य मौजूदगी के बिना ही संभव है और यह समुद्री मार्ग अब पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा।

    ट्रंप ने दी थी सख्त चेतावनी
    इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन, रॉकेट या अन्य हथियार से हमला किया गया, तो अमेरिका ईरान के अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा।

    ट्रंप ने लिखा कि यदि ईरान समुद्री मार्ग में जहाजों पर हमला करता है, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में पुलों, बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे हमलों के दायरे में तेहरान के आसपास स्थित महत्वपूर्ण ठिकाने भी आ सकते हैं।

    तनाव का सबसे बड़ा केंद्र बना हॉर्मुज स्ट्रेट
    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है। शुरुआती युद्धविराम समझौता टूटने के बाद दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का दौर जारी है। अमेरिका कई बार ईरानी ठिकानों पर कार्रवाई कर चुका है, जबकि ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाब दिया है।

    दुनिया की तेल सप्लाई पर पड़ सकता है असर
    हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के कुल तेल निर्यात का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान इस क्षेत्र को अपनी रणनीतिक सुरक्षा का हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग बताते हुए निर्बाध आवाजाही बनाए रखने की वकालत करता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर डाल सकता है।

  • ट्रंप का खामेनेई के जनाजे पर पहुंचे ईरानी नेताओं पर बड़ा दावा, कहा- “चाहते तो एक ही वार में सबको मार सकते थे”

    ट्रंप का खामेनेई के जनाजे पर पहुंचे ईरानी नेताओं पर बड़ा दावा, कहा- “चाहते तो एक ही वार में सबको मार सकते थे”


    नई दिल्‍ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बड़ा दावा किया है. ट्रंप का कहना है कि ‘अमेरिका चाहता तो एक ही वार में ईरान के सभी बड़े नेताओं को हमेशा के लिए खत्म कर सकता था, जो अली खामेनेई के जनाजे में शामिल होने पहुंचे थे’. हालांकि, उन्होंने ऐसा नहीं किया, क्योंकि वो ईरान के साथ परमाणु बातचीत को आगे बढ़ाना चाहते हैं. यह हैरान करने वाली बात ट्रंप ने अपने एक इंटरव्यू कही.

    दरअसल, ट्रंप ने शनिवार को एक्सिओस (Axios) के साथ एक संक्षिप्त फोन इंटरव्यू में यह बयान दिया. इस दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा, ‘एक ही वार में हम सबको खत्म कर सकते थे, लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि फिर हमारे पास बातचीत करने के लिए कोई नहीं बचेगा’. उन्होंने आगे दावा किया कि ईरान इस समय समझौता करने के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी तरह बातचीत शुरू करना चाहता है. ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका की प्राथमिकता सिर्फ सैन्य कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ईरान के साथ परमाणु मुद्दे पर बातचीत की संभावना को भी बनाए रखना है.

    फिलहाल दोनों पक्षों ने कुछ दिनों के लिए बातचीत को रोकने पर सहमति जताई है. इसकी वजह यह है कि पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाजे की रस्में अभी पूरी होनी बाकी हैं. इसी बातचीत में उन्होंने अपने उस पुराने दावे को फिर से दोहराया कि खामेनेई तो युद्ध के पहले ही दिन अमेरिका और इजरायल के एक साझा मिलिट्री ऑपरेशन में मारे गए थे.

    भीड़ देखकर हैरान हुए ट्रंप
    ईरान के इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह अली खामेनेई के जनाजे में जुटी भीड़ को देखकर हैरान रह गए. उनके मुताबिक उन्हें लगता था कि वहां के लोग खामेनेई से नफरत करते हैं, इसलिए इतनी बड़ी भीड़ देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ. ट्रंप ने यह भी कहा कि हो सकता है कि वहां मौजूद लोगों के आंसू सच्चे न हों.

  • कांग्रेस विधायक का विवादित बयान, कहा- ट्रंप पर गोली चलनी ही थी, भारत में भी जनता का मूड ऐसा है

    कांग्रेस विधायक का विवादित बयान, कहा- ट्रंप पर गोली चलनी ही थी, भारत में भी जनता का मूड ऐसा है


    नई दिल्‍ली । अमेरिका में वाइट हाउस संवाददाताओं (WHCA) के वार्षिक रात्रिभोज कार्यक्रम में गोलीबारी की चर्चाएं दुनियाभर में हैं। इधर, भारत में कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने विवादित बयान दे दिया है। उनका कहना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गोलियां चलनी ही थीं। साथ ही कहा है कि भारत में भी लोगों की यही भावना है। हमले में ट्रंप सुरक्षित हैं।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वडेट्टीवार ने कहा, ‘ट्रंप दुनिया में दबदबना बनाना चाहते थे और दूसरे देशों को अस्थिर करना चाहते थे। जैसी करनी वैसी भरनी…। चूंकि चीजें ऐसी नहीं हुईं, जैसी उन्होंने उम्मीद की थी तो ये होना ही था।’ उन्होंने कहा कि भारत में भी जनता का मूड कुछ अलग नहीं है। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा, ‘चूंकि यहां लोग बाहर नहीं आ रहे हैं, तो भ्रम बना हुआ है कि सब ठीक है। लेकिन लोगों की भावना वैसी ही है कि भारत को तबाह किया जा रहा है।’

    कांग्रेस विधायक ने घटना की निंदा की। उन्होंने कहा, ‘इतने उच्च पद पर बैठे व्यक्ति के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था, लेकिन जनता की प्रतिक्रिया आमतौर पर दिखाती है कि नेतृत्व कैसा है।’

    वाइट हाउस में गोलीबारी
    यह घटना शनिवार रात करीब 8:34 बजे की है, जब मेहमानों को रात्रिभोज परोसा जा रहा था। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप, एसोसिएशन की अध्यक्ष वेइजिया जियांग और ‘मेंटलिस्ट’ ओज पर्लमैन के साथ बातचीत करते नजर आ रहे थे। पर्लमैन वॉशिंगटन हिल्टन में आयोजित इस मुख्य कार्यक्रम में अपना शो पेश करने वाले थे। खुफिया सेवा के अधिकारियों और अन्य सुरक्षाकर्मियों ने राष्ट्रपति, प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप, उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और द्वितीय महिला उषा वेंस को सुरक्षा घेरा बना कक्ष से बाहर ले गए।

    कुछ घंटों बाद, ट्रंप ने वाइट हाउस में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और घोषणा की कि सुरक्षाकर्मियों ने कैलिफोर्निया के एक व्यक्ति को पकड़ लिया है। ट्रंप ने रविवार को कहा कि रात्रिभोज में हथियारों के साथ घुसने की कोशिश करने वाला आरोपी प्रशासन के अधिकारियों को निशाना बनाना चाहता था और उसके परिवार ने पहले ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष इसे लेकर चिंता जताई थी।

    हमलावर की हुई पहचान
    अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध की पहचान कैलिफोर्निया निवासी 31 वर्षीय कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे सोमवार को अमेरिका के न्याय विभाग की ओर से आपराधिक आरोपों का सामना करना पड़ सकता है। न्याय विभाग के कार्यवाहक प्रमुख टोड ब्लैंच ने बताया कि आरोपी ट्रेन से कैलिफोर्निया से वाशिंगटन आया था और कार्यक्रम से कुछ दिन पहले ही उस होटल में ठहरा था, जहां यह समारोह आयोजित किया गया था।