Tag: US President Donald Trump

  • जबलपुर में शिया समुदाय का जोरदार प्रदर्शन: खामेनेई के समर्थन में नारे, अमेरिका-इजराइल पर गुस्सा, प्रधानमंत्री से तुरंत हस्तक्षेप की मांग

    जबलपुर में शिया समुदाय का जोरदार प्रदर्शन: खामेनेई के समर्थन में नारे, अमेरिका-इजराइल पर गुस्सा, प्रधानमंत्री से तुरंत हस्तक्षेप की मांग


    जबलपुर। सोमवार देर रात जबलपुर की सड़कों पर सैकड़ों शिया समुदाय के लोग अयातुल्ला अली खामेनेई के समर्थन में प्रदर्शन करते नजर आए। लोग हाथों में खामेनेई की तस्वीरें और मोमबत्तियां लेकर “तुम कितने खामेनेई मारोगे, हर घर से अब खामेनेई निकलेगा, शिया-सुन्नी भाई-भाई, अल्लाह हू अकबर” जैसे नारे लगा रहे थे। यह रैली बेलबाग और फूटाताल चौराहे से मुमताज बिल्डिंग तक करीब दो किलोमीटर लंबी रही।

    प्रदर्शन में शामिल लोगों ने इजराइल और अमेरिका के प्रति गहरी नाराजगी जताई। शिया समुदाय ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को युद्ध का जिम्मेदार बताया। अंजुमन निदा-ए-इस्लाम के बैनर तले आयोजित इस रैली में लोगों ने देश की राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि खामेनेई की शहादत ने पूरे मुस्लिम समुदाय को गहरा झकझोर दिया है।

    जबलपुर के जव्वार हुसैन जैदी ने कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा की गई युद्ध कार्रवाई पूरी तरह से गलत है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाकर युद्ध रोकवाए क्योंकि युद्ध में हमेशा आम जनता का ही नुकसान होता है।

    प्रदर्शनकारी सकीना फातिमा ने कहा कि वे फिलिस्तीन और ईरान के प्रति दुखी हैं और खामेनेई का बदला चाहते हैं। उनका कहना था कि खामेनेई ने शिया और सुन्नी समुदाय को भाई-भाई बताते हुए मुस्लिम एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि खामेनेई के हत्यारे को कड़ी सजा मिले और अमेरिकी नेतृत्व को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

    सैयद उरोज अली ने कहा कि खामेनेई किसी एक मुसलमान के नहीं बल्कि पूरे मुस्लिम समुदाय के नेता थे। उन्होंने बताया कि समुदाय उनकी मिशन को आगे बढ़ाएगा और अन्याय के खिलाफ खड़ा रहेगा, चाहे वह शिया हो या सुन्नी, हिंदी मुसलमान हो या देवबंदी। प्रदर्शनकारी प्रशासन के प्रति आभार जताते हुए कह रहे थे कि उन्होंने शांतिपूर्ण जुलूस निकालने की अनुमति दी।

    शिया समुदाय ने प्रधानमंत्री से भी आग्रह किया कि अमेरिका और इजराइल पर दबाव बनाएं। उनका कहना था कि देश का 36 करोड़ मुसलमान प्रधानमंत्री के फैसले की ओर देख रहा है और उन्हें अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने शांति बहाली और मध्य-पूर्व में जारी युद्ध रोकने की भी मांग की।

  • अमेरिका-भारत व्यापार संबंध: ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत

    अमेरिका-भारत व्यापार संबंध: ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत


    नई दिल्‍ली । अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक अहम और सकारात्मक मोड़ देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का बड़ा फैसला लिया है। इस निर्णय को भारत में न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों की मजबूती के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

    इस फैसले का भारत सरकार ने खुले दिल से स्वागत किया है। केंद्रीय रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के सहयोगी हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों की ताकतें एक-दूसरे की पूरक हैं और यही कारण है कि मिलकर काम करने से शांति, विकास और नवाचार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

    अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के पास मिलकर ऐसी अत्याधुनिक तकनीकों को विकसित करने की अपार क्षमता है, जिनसे न केवल दोनों देशों को बल्कि पूरे विश्व को लाभ मिल सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यापार केवल आर्थिक लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वास, साझेदारी और साझा भविष्य की नींव भी रखता है। भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित और विकसित हो रहा व्यापार समझौता इसी दिशा में एक मजबूत कदम है, जो दोनों देशों के उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाएगा।

    केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी होगा। इससे भारत और अमेरिका के नागरिकों, उद्योगों, स्टार्टअप्स और तकनीकी क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलने की संभावना है। टैरिफ में कटौती से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हुई टेलीफोन बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि अपने प्रिय मित्र राष्ट्रपति ट्रंप से बात करके उन्हें अत्यंत खुशी हुई और यह जानकर विशेष संतोष मिला कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने इस निर्णय के लिए भारत की 140 करोड़ जनता की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त किया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और सबसे बड़े लोकतंत्र मिलकर काम करते हैं, तो उसका सीधा लाभ आम लोगों तक पहुंचता है। इससे न केवल व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ते हैं, बल्कि पारस्परिक सहयोग के नए आयाम भी खुलते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कदम भारत-अमेरिका साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाएगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के संदर्भ में भी राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की भूमिका इन क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण है और भारत शांति के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों का पूरा समर्थन करता है। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे भविष्य में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मिलकर काम करने और भारत-अमेरिका संबंधों को अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

    गौरतलब है कि इस महत्वपूर्ण फैसले से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर विस्तृत बातचीत हुई थी। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश और द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बातचीत की जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों देशों के नेता आपसी संबंधों को और मजबूत करने के लिए निरंतर संपर्क में हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ में कटौती का यह फैसला भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को नई गति देगा। इससे न केवल व्यापारिक रिश्ते बेहतर होंगे, बल्कि दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग की भावना भी और गहरी होगी। कुल मिलाकर, यह कदम भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग का एक मजबूत संकेत है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा।