Tag: Uttar Pradesh politics

  • आजम खां के बाद अब परिवार पर ईडी का शिकंजा, पत्नी तजीन फातिमा और दोनों बेटों समेत बहन की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    आजम खां के बाद अब परिवार पर ईडी का शिकंजा, पत्नी तजीन फातिमा और दोनों बेटों समेत बहन की बढ़ सकती हैं मुश्किलें


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की कार्रवाई अब उनके परिवार तक पहुंच सकती है। उनकी पत्नी तजीन फातिमा और दोनों बेटों के साथ बहन निकहत अफलाक की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की आशंका जताई जा रही है। इसकी वजह मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट है जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय का निर्माण कराया गया था। इस ट्रस्ट में आजम खां के परिवार के कई सदस्य अलग-अलग पदों पर रहे हैं। ईडी ने इस मामले में आजम खां को रामपुर जेल से बाहर आते ही गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उन्हें गाजियाबाद में पेश करने के बाद डासना जेल भेज दिया गया। अब जांच का दायरा बढ़ने के साथ परिवार के अन्य सदस्यों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।

    ईडी की ओर से 13 अक्टूबर को रामपुर के अजीम नगर थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में जौहर ट्रस्ट को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में 426 करोड़ रुपये से अधिक की ब्लैक मनी का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा 80 करोड़ रुपये से ज्यादा सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन के इस्तेमाल और कथित तौर पर फर्जी फर्मों के माध्यम से चंदा जुटाने जैसे मामलों की जांच की जा रही है। इन सभी वित्तीय गतिविधियों में जौहर ट्रस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी वजह से ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों की भूमिका की भी पड़ताल की जा सकती है।

    दरअसल आजम खां ने वर्ष 1990 में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का गठन किया था। वह खुद इसके संस्थापक अध्यक्ष बने थे। उनकी पत्नी तजीन फातिमा को सचिव और बहन निकहत अफलाक को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं उनके दोनों बेटे अदीब और अब्दुल्ला भी ट्रस्ट के सदस्य बनाए गए थे। इनके अलावा मुश्ताक अहमद सिद्दीकी को उपाध्यक्ष और चमरौवा से सपा विधायक नसीर अहमद खां को संयुक्त सचिव बनाया गया था। इस तरह ट्रस्ट की शुरुआती कार्यकारिणी में आजम खां के परिवार की अहम भागीदारी रही थी।

    हालांकि दो जन्म प्रमाणपत्र के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद आजम खां ने ट्रस्ट से अपना नाम हटवा लिया था। उनकी पत्नी और छोटे बेटे का नाम भी ट्रस्ट से हटाया गया। इसके बाद नई कार्यकारिणी में उनकी बहन निकहत अफलाक को अध्यक्ष और बड़े बेटे अदीब को सचिव बनाया गया। नई टीम में मुश्ताक अहमद सिद्दीकी और नसीर अहमद खां के अलावा जावेद उर रहमान खान मुमताज बी और शहरेयार सलीम को भी शामिल किया गया। अब ईडी की प्राथमिकी में ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन और विश्वविद्यालय निर्माण में कथित गड़बड़ियों का जिक्र होने के बाद पुराने और नए पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच का विषय बन सकती है।

    ईडी की जांच में विश्वविद्यालय निर्माण के लिए खर्च की गई रकम सरकारी धन के इस्तेमाल और कथित कमीशनखोरी से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि निर्माण कार्य में बिना उचित हिसाब के बड़ी रकम खर्च की गई। ऐसे में ट्रस्ट के पदों पर रहे लोगों से पूछताछ और दस्तावेजों के आधार पर उनकी जिम्मेदारी तय करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि पत्नी बेटों और बहन के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अभी अंतिम निर्णय या किसी की दोषसिद्धि सामने नहीं आई है।

    इस बीच आजम खां से जुड़े दो मामलों में 2 नवंबर को रामपुर की अदालत में सुनवाई होनी है। इनमें भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में कस्टडी रिमांड की मांग महत्वपूर्ण है। विवेचक सीओ टांडा पंकज पंत ने 29 अक्टूबर को अदालत में आजम खां के खिलाफ रिमांड वारंट जारी करने का अनुरोध किया था। अब अदालत के फैसले पर आगे की कानूनी कार्रवाई निर्भर करेगी। जौहर विश्वविद्यालय प्रकरण में ईडी की जांच और अदालत की सुनवाई के चलते आजम खां के साथ उनके परिवार और ट्रस्ट से जुड़े लोगों की भूमिका भी चर्चा में आ गई है।

  • आजम खान के समर्थन में उतरे अखिलेश यादव, जेल में मुलाकात के बाद दिया बड़ा बयान, पत्रकारों के सवाल पर दिखे नाराज

    आजम खान के समर्थन में उतरे अखिलेश यादव, जेल में मुलाकात के बाद दिया बड़ा बयान, पत्रकारों के सवाल पर दिखे नाराज


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को रामपुर जेल पहुंचकर पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने आजम खान के समर्थन में बयान देते हुए कहा कि आजम खान पहले भी आजम थे आज भी आजम हैं और आगे भी आजम रहेंगे। उन्होंने कहा कि फर्जी मुकदमों में इतनी ताकत नहीं है कि आजम खान को लंबे समय तक जेल में रखा जा सके। अखिलेश के इस बयान को आजम खान के प्रति पार्टी के समर्थन और राजनीतिक एकजुटता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    जेल से बाहर निकलने के बाद अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने आजम खान के साथ अपनी मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया दी। हालांकि जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि आजम खान से मिलने आने में करीब 11 महीने का समय क्यों लग गया तो वह सवाल पर नाराज होते दिखाई दिए। इस दौरान बातचीत का वीडियो भी सामने आया है। मुलाकात के बाद उनके बयान और सवाल पर उनकी प्रतिक्रिया राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई।

    आजम खान समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और रामपुर की राजनीति में उनका लंबे समय से प्रभाव रहा है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों और जेल में रहने को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार बहस होती रही है। समाजवादी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देखती रही है जबकि आरोपों और कानूनी मामलों का फैसला अदालतों की प्रक्रिया के तहत होता है। अखिलेश यादव का ताजा बयान इसी राजनीतिक संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

    अखिलेश यादव ने अपने बयान में आजम खान के राजनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्हें फर्जी मुकदमों के जरिए दबाया नहीं जा सकता। समाजवादी पार्टी लंबे समय से आजम खान और उनके परिवार से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कानूनी कार्रवाई के नाम पर उनके वरिष्ठ नेता को निशाना बनाया गया है। हालांकि किसी मुकदमे को फर्जी या सही मानने का अंतिम फैसला संबंधित अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है।

    रामपुर जेल में हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खास तौर पर इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि अखिलेश यादव ने लंबे अंतराल के बाद आजम खान से मुलाकात की। पत्रकारों ने इसी अवधि को लेकर सवाल किया था। सवाल के जवाब में अखिलेश की नाराजगी ने इस मुलाकात को और चर्चा में ला दिया। हालांकि उपलब्ध जानकारी में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का विस्तृत ब्यौरा सामने नहीं आया है।

    आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख मुस्लिम नेता के रूप में पहचाने जाते हैं और रामपुर से उनका गहरा राजनीतिक जुड़ाव रहा है। उनके जेल में रहने और कानूनी मामलों को लेकर समाजवादी पार्टी के समर्थक लगातार प्रतिक्रिया देते रहे हैं। अखिलेश यादव का यह दौरा पार्टी के भीतर आजम खान के महत्व को दोहराने वाला कदम माना जा रहा है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी नेतृत्व अपने वरिष्ठ नेता के साथ खड़े होने का संदेश देना चाहता है।

    फिलहाल इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव के बयान और पत्रकारों के सवाल पर उनकी प्रतिक्रिया चर्चा में है। आजम खान से मिलने के बाद उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आजम खान का राजनीतिक प्रभाव खत्म नहीं हुआ है। वहीं मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई और आगे पार्टी इस मामले को लेकर क्या रणनीति अपनाएगी इस पर अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

  • यूपी विधान परिषद चुनाव में फर्जी वोटिंग के आरोपों से गरमाया माहौल, दोपहर 12 बजे तक 24 फीसदी मतदान

    यूपी विधान परिषद चुनाव में फर्जी वोटिंग के आरोपों से गरमाया माहौल, दोपहर 12 बजे तक 24 फीसदी मतदान


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर हो रहे चुनाव के दौरान शुक्रवार को कई जगह हंगामे और मारपीट की घटनाएं सामने आईं। मुजफ्फरनगर में राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल के सामने समाजवादी पार्टी और भाजपा के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। फतेहपुर में दोनों दलों के समर्थकों के बीच जमकर मारपीट हुई। वहीं गोरखपुर में सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के साथ धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप लगा है। चुनाव के दौरान फर्जी वोटिंग और मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी को लेकर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले।

    मुजफ्फरनगर में विवाद उस समय बढ़ गया जब राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल के सामने सपा और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी मारपीट में बदल गई। सपा समर्थकों का आरोप था कि मंत्री वोट डालने के दौरान कई लोगों को लेकर मतदान केंद्र के अंदर गए। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    फतेहपुर में खागा तहसील क्षेत्र के विजयीपुर ब्लॉक परिसर के बाहर शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे हंगामा हुआ। सपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा नेताओं पर फर्जी वोटिंग कराने का आरोप लगाया। इसके बाद दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे को दौड़ाकर पीटने लगे। करीब आधे घंटे तक चले विवाद के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को शांत कराया। इस घटना ने चुनाव के दौरान सुरक्षा और मतदान केंद्रों के आसपास व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

    गोरखपुर में सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के साथ धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप सामने आया। बताया गया कि वह मतदान केंद्र के बाहर मीडिया को बयान दे रहे थे। इसी दौरान उनके साथ विवाद हुआ। उधर अलीगढ़ में राज्यमंत्री सुरेंद्र दिलेर के मतदान केंद्र के अंदर जाने को लेकर सपा समर्थकों और एजेंटों ने आपत्ति जताई। यहां भाजपा प्रत्याशी के एजेंट बनकर पहुंचे दो युवकों को पकड़े जाने की भी जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं को लेकर संबंधित पक्षों के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    वाराणसी में मछलीशहर से सपा विधायक रागिनी सोनकर ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक यानी डीआईओएस पर धमकी देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि स्कूलों की मान्यता रद्द करने और शिक्षकों की नौकरी खत्म करने जैसी बातें कही जा रही हैं। दूसरी ओर इटावा के सैफई में सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने अपनी पत्नी सरला यादव के साथ मतदान किया। उन्होंने मतदाता सूची में गड़बड़ी और कुछ मतदाताओं के वोट नहीं पड़ पाने का मुद्दा उठाया। शिवपाल ने कहा कि जहां भी अनियमितता हुई है वहां जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी के बयान को भी अनुशासनहीनता के दायरे में बताया और कहा कि इस पर फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष करेंगे।

    उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक खंड की छह और स्नातक खंड की पांच सीटों पर कुल 152 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इन सीटों के लिए 14.28 लाख मतदाता पंजीकृत हैं और मतदान कराने के लिए 2697 केंद्र बनाए गए हैं। शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक 24.09 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। बरेली-मुरादाबाद क्षेत्र में मतदान का स्तर अपेक्षाकृत अधिक बताया गया जबकि लखनऊ और वाराणसी समेत कई क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत इससे कम रहा। मतदान शाम चार बजे तक निर्धारित है और मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। कानपुर कानपुर देहात और उन्नाव में इस चरण में मतदान नहीं हो रहा है। इन क्षेत्रों में चुनाव वर्ष 2029 में प्रस्तावित है। चुनावी प्रक्रिया के बीच सामने आए विवादों के कारण अब प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है।

  • रामपुर जेल में एक घंटे तक अखिलेश-आजम की मुलाकात, भाजपा पर बरसे सपा प्रमुख, बोले- आजम के परिवार के साथ हुआ अन्याय

    रामपुर जेल में एक घंटे तक अखिलेश-आजम की मुलाकात, भाजपा पर बरसे सपा प्रमुख, बोले- आजम के परिवार के साथ हुआ अन्याय


    नई दिल्ली। रामपुर जेल में गुरुवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने इसे राजनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक रिश्ता बताया। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा कि आजम खान उनके दिल से जुड़े हुए हैं और उनके साथ उनका जुड़ाव केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। इस मुलाकात को लेकर सियासी हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने इस दौरान आजम खान के परिवार पर कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर निशाना साधा और कई गंभीर आरोप लगाए।

    अखिलेश यादव गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे रामपुर पहुंचे। उनका हेलीकॉप्टर जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बने हेलीपैड पर उतरा। यहां से वह कार के जरिए सीधे रामपुर जेल पहुंचे। उनके साथ आजम खान के बड़े बेटे अदीब भी कार में मौजूद थे लेकिन वह जेल के अंदर मुलाकात के लिए नहीं गए। जेल प्रशासन की व्यवस्था के बीच अखिलेश यादव और आजम खान की बातचीत करीब एक घंटे तक चली। जानकारी के मुताबिक अखिलेश यादव दोपहर करीब 1 बजकर 42 मिनट पर जेल के अंदर दाखिल हुए और 2 बजकर 51 मिनट के आसपास बाहर निकले। एक साल के भीतर अखिलेश यादव की आजम खान से यह तीसरी मुलाकात बताई जा रही है।

    जेल से बाहर आने के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान के परिवार ने जितना अन्याय झेला है वैसा किसी राजनीतिक परिवार के साथ नहीं हुआ होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का पढ़ाई लिखाई और शिक्षा से कोई विशेष जुड़ाव नहीं है। जौहर विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस विश्वविद्यालय के सपने को पूरा करने के लिए लगातार प्रयासरत है। अखिलेश यादव के इस बयान को आजम खान के प्रति पार्टी के समर्थन और उनके परिवार के साथ खड़े रहने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पैन कार्ड से जुड़े मामले में रामपुर जेल में बंद हैं। इस मामले में एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट ने दोनों को सात सात साल की सजा सुनाई थी। आजम खान ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है। ऐसे में उनकी कानूनी लड़ाई और परिवार से जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार जारी हैं। अखिलेश यादव पहले भी आजम खान के समर्थन में बयान देते रहे हैं और अब जेल में मुलाकात के बाद उन्होंने एक बार फिर उनके प्रति भावनात्मक जुड़ाव जाहिर किया।

    मुलाकात के दौरान और उसके बाद अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी पहले दिन से चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत की बात कहती रही है और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर वोट चोरी के आरोप भी लगाए। हालांकि ये आरोप अखिलेश यादव के राजनीतिक बयान हैं और इनकी पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों तथा आधिकारिक प्रतिक्रियाओं को अलग से देखना जरूरी है।

    अखिलेश यादव के रामपुर पहुंचने पर जौहर विश्वविद्यालय के हेलीपैड के पास आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा उनके बड़े बेटे अदीब और अन्य समर्थक मौजूद रहे। सपा के स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी उनका स्वागत किया। इस दौरान अदीब जेल के बाहर ही रहे। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बयान पार्टी और आजम खान के समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल इस मुलाकात का मुख्य संदेश आजम खान के प्रति अखिलेश यादव का भावनात्मक समर्थन रहा जबकि भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर उनके आरोपों ने राजनीतिक बहस को भी हवा दी है। 

  • यूपी में सपा ने बदले दो MLC प्रत्याशी: आगरा से आकाश अग्रवाल, गोरखपुर-फैजाबाद से संजयन त्रिपाठी

    यूपी में सपा ने बदले दो MLC प्रत्याशी: आगरा से आकाश अग्रवाल, गोरखपुर-फैजाबाद से संजयन त्रिपाठी


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपने दो प्रत्याशियों को बदल दिया है। पार्टी ने आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से मौजूदा एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल और गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजयन त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है।

    सपा ने इससे पहले आगरा खंड शिक्षक सीट से प्रकाश चंद्र गुप्ता और गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक सीट से कमलेश यादव को प्रत्याशी घोषित किया था। अब दोनों नामों को बदलकर नए उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि यह बदलाव पहले घोषित प्रत्याशियों की सहमति से किया गया है।

    भाजपा से टिकट नहीं मिला तो संजयन ने दाखिल किया था नामांकन

    गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक सीट पर डॉ. संजयन त्रिपाठी का नाम पहले भाजपा के संभावित दावेदारों में था। भाजपा ने इस सीट से मौजूदा एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को अपना प्रत्याशी बनाया। इसके बाद संजयन त्रिपाठी ने अलग से चुनाव लड़ने का ऐलान किया था और 2 अक्टूबर को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भी दाखिल किया था।

    अब सपा ने उन्हें अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस घटनाक्रम से गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट का चुनावी मुकाबला भी बदल गया है। ध्रुव कुमार त्रिपाठी को भाजपा ने 29 सितंबर को प्रत्याशी घोषित किया था। वह इस सीट से तीन बार एमएलसी रह चुके हैं।

    आकाश अग्रवाल की भी बदली राजनीतिक भूमिका

    आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. आकाश अग्रवाल मौजूदा निर्दलीय एमएलसी हैं। 2020 के चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की थी। इस बार भाजपा से टिकट की दावेदारी के बीच अब वह सपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरेंगे।

    सपा ने पहले इसी सीट से प्रकाश चंद्र गुप्ता को प्रत्याशी बनाया था। वहीं आगरा खंड स्नातक सीट अलग निर्वाचन क्षेत्र है, जहां पार्टी ने पहले शशांक यादव को प्रत्याशी घोषित किया था।

    23 अक्टूबर को मतदान, 27 को मतगणना

    उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की 11 सीटों के लिए चुनाव होना है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकते हैं, 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।

    अखिलेश बोले- नई पीढ़ी भाजपा से नाराज

    प्रत्याशियों के बदलाव के साथ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2024 में समाजवादी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने भाजपा को हराया था और इस बार पीडीए की ताकत के सामने भाजपा नहीं टिक पाएगी।

    अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी के पीडीए में प्रेम, दया और अपनापन है। पार्टी हर दुखी, पीड़ित और अपमानित व्यक्ति के साथ खड़ी है। उन्होंने भाजपा पर समाज के विभिन्न तबकों के शोषण और उन्हें धोखा देने का आरोप लगाया।

    उन्होंने बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि नई पीढ़ी और जेन-जी के पास नौकरी और रोजगार नहीं है तथा बेरोजगारी बढ़ रही है। उनके मुताबिक, नई पीढ़ी भाजपा से नाराज है। अखिलेश ने यह भी कहा कि भाजपा समाजवादी पार्टी के विकास कार्यों का मुकाबला नहीं कर सकती।

  • राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार पर केशव मौर्य का बड़ा बयान, बोले- नौवां प्रत्याशी उतारेगी भाजपा

    राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार पर केशव मौर्य का बड़ा बयान, बोले- नौवां प्रत्याशी उतारेगी भाजपा

    उत्तर प्रदेश: के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो भाजपा नौवां प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। उन्होंने विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी।

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को लखनऊ में राज्यसभा चुनाव की तैयारियों और विपक्षी दलों की रणनीति को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अगर राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो भाजपा की ओर से नौवां प्रत्याशी उतारा जाएगा।

    केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भाजपा राज्यसभा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवार मैदान में उतारे जा सकते हैं। अगर समाजवादी पार्टी तीसरे उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारती है तो भाजपा भी नौवां प्रत्याशी उतार सकती है। इस बयान के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों पक्षों के बीच मुकाबले की चर्चा तेज हो गई है।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में सीटों के गणित के बीच उम्मीदवारों की संख्या महत्वपूर्ण हो गई है। समाजवादी पार्टी की ओर से तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की संभावना पर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में भाजपा की ओर से नौवां उम्मीदवार उतारने की बात सामने आने से चुनावी समीकरण और अधिक चर्चा में आ गए हैं।

    केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल साथ मिलकर चुनाव लड़ें या अलग-अलग, भाजपा वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने विपक्षी दलों की एकजुटता और चुनावी रणनीति को लेकर भी अपनी बात रखी।

    चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी केशव प्रसाद मौर्य ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनावी परिस्थितियों के अनुसार चुनाव व्यवस्था को लेकर अपना रुख बदलते हैं। उनके अनुसार, जब इन दलों को चुनाव में सफलता मिलती है तो उन्हें चुनाव व्यवस्था ठीक दिखाई देती है, जबकि भाजपा या एनडीए को सफलता मिलने पर वही व्यवस्था सवालों के घेरे में बताई जाती है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने चुनाव परिणामों को अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी सुविधा के अनुसार परिभाषित किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने वर्ष 2004 और 2009 में केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बनने का उल्लेख किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन के प्रदर्शन का भी जिक्र किया।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में, जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, भाजपा गठबंधन ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 73 सीटें जीती थीं। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 325 सीटें हासिल की थीं, जबकि समाजवादी पार्टी 47 सीटों तक सीमित रह गई थी। मौर्य ने कहा कि चुनावी परिणामों को अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग तरीके से देखना उचित नहीं है।

    विपक्षी दलों की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि ये दल अपनी सुविधा के अनुसार चुनाव परिणामों की व्याख्या करते हैं। उन्होंने इसके लिए “मीठा-मीठा गप-गप और तीखा-तीखा थू-थू” वाली टिप्पणी का इस्तेमाल किया।

    केशव प्रसाद मौर्य ने अपने राजनीतिक और वैचारिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए राम, कृष्ण और विश्वनाथ से जुड़े विषयों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीरामलला का भव्य मंदिर बन चुका है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विश्वनाथ से जुड़े विषय अभी शेष हैं। तेलंगाना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बयानों से भाजपा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और पार्टी संगठन के विस्तार तथा जनसेवा के संकल्प के साथ काम कर रही है।

  • अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर हमला, बोले- यूपी चुनाव 2027 ज्ञानेश कुमार की देखरेख में न हों

    अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर हमला, बोले- यूपी चुनाव 2027 ज्ञानेश कुमार की देखरेख में न हों


    लखनऊ। चुनाव आयोग में कथित तौर पर सामने आई अंदरूनी असहमति की रिपोर्ट के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की देखरेख में नहीं कराए जाएं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का मौजूदा रवैया लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    दरअसल, द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

    अखिलेश बोले- यूपी चुनाव की निगरानी पर उठ रहे सवाल
    अखिलेश यादव ने कहा कि जब आयोग के भीतर ही फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं तो आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की निगरानी को लेकर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव ऐसे माहौल में नहीं होना चाहिए, जहां चुनाव आयोग की भूमिका पर ही राजनीतिक दल सवाल उठा रहे हों।

    उन्होंने 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। अखिलेश का आरोप है कि जिन इलाकों में समाजवादी पार्टी के समर्थक मतदाता थे, वहां वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इस संबंध में एफिडेविट के साथ शिकायत भी की थी, लेकिन किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

    उपचुनावों को लेकर भी लगाए आरोप
    सपा अध्यक्ष ने यूपी में हुए उपचुनावों का जिक्र करते हुए भी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इन चुनावों के दौरान भी उनकी पार्टी ने अनियमितताओं की शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

    अखिलेश ने दावा किया कि कुछ लोगों के हस्ताक्षर तक बनाए गए और उनके आधार पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे गए। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    ‘सत्ता की कठपुतली बनकर काम कर रहा आयोग’
    अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर सत्ता के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सत्ता की कठपुतली बनकर काम कर रहे हैं, ताकि सत्ता में बैठे लोगों का प्रभाव बना रहे। उनके मुताबिक, यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है और आने वाले समय में जनता भी इसका जवाब देगी। अखिलेश ने कहा कि यूपी के चुनाव और उपचुनाव में पार्टी ने जिन मुद्दों को उठाया, उन पर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।

    आयोग ने रिपोर्ट पर दिया अलग पक्ष
    इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग के सूत्रों ने द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सामने आए मतभेद के दावे को खारिज किया है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

    वहीं, रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

  • मायावती ने भतीजे ईशान आनंद को बनाया बसपा का राष्ट्रीय संयोजक, लखनऊ की बैठक में किया ऐलान

    मायावती ने भतीजे ईशान आनंद को बनाया बसपा का राष्ट्रीय संयोजक, लखनऊ की बैठक में किया ऐलान


    लखनऊ।
    बहुजन समाज पार्टी में संगठन स्तर पर एक और बड़ा बदलाव हुआ है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को लखनऊ में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाने का ऐलान किया। बैठक में ईशान आनंद ने मायावती के पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया।

    ईशान आनंद को यह जिम्मेदारी उनके बड़े भाई आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से हटाए जाने के बाद मिली है। मायावती ने कुछ दिन पहले ही ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देने की बात कही थी। इसके बाद से ही उनकी नई भूमिका को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। बुधवार को बैठक में इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त करने की घोषणा कर दी।

    संगठन और चुनावी तैयारियों पर हुआ मंथन

    लखनऊ में आयोजित इस बैठक में बसपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ सभी राज्यों के पार्टी अध्यक्ष भी शामिल हुए। बैठक में संगठन को मजबूत करने के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। मायावती ने चुनाव की जमीनी तैयारियों और प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी पार्टी नेताओं से जानकारी ली।

    इसके अलावा विभिन्न राज्यों में संगठन से जुड़े कामकाज की प्रगति रिपोर्ट भी ली गई। राज्यों से मिली रिपोर्ट के आधार पर संगठन को लेकर आगे की रणनीति और आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। बैठक में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भी पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा की गई और उन्हें संगठनात्मक स्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए।

    ईशान को मिली अहम जिम्मेदारी

    ईशान आनंद, मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। उन्होंने एलएलएम और कानून की पढ़ाई की है। हाल के दिनों में बसपा के भीतर हुए संगठनात्मक बदलावों के बीच उनका नाम लगातार चर्चा में था। मायावती ने पहले ही संकेत दिया था कि वह ईशान को पार्टी में आगे बढ़ाएंगी। अब उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी देकर संगठन में उनकी भूमिका औपचारिक रूप से तय कर दी गई है।

    पार्टी की बैठक के दौरान ईशान आनंद के नई जिम्मेदारी संभालने को लेकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह भी देखने को मिला। बसपा अब आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • UP में एक और बड़ा चुनाव: 5 स्नातक और 6 शिक्षक सीटों पर होगा मतदान, 27 अक्टूबर को आएगा MLC चुनाव का रिजल्ट

    UP में एक और बड़ा चुनाव: 5 स्नातक और 6 शिक्षक सीटों पर होगा मतदान, 27 अक्टूबर को आएगा MLC चुनाव का रिजल्ट


    उत्तर प्रदेश  । उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक और महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य की 11 विधान परिषद सीटों के लिए अक्टूबर में चुनाव होना है। इन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की तैयारियां तेज हो गई हैं। भाजपा पांच सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम पहले ही घोषित कर चुकी है जबकि छह सीटों पर उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया जारी है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी सभी 11 सीटों के लिए अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। विधान परिषद की इन सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होगा जबकि 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार विधान परिषद की पांच खंड स्नातक और छह खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव कराया जाएगा। इन निर्वाचन क्षेत्रों से निर्वाचित मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर को पूरा हो रहा है। चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी और उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर निर्धारित की गई है। इसके बाद 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।

    जिन 11 सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है उनमें लखनऊ खंड स्नातक से अवनीश कुमार सिंह वाराणसी से आशुतोष सिन्हा आगरा से डॉक्टर मानवेंद्र प्रताप सिंह मेरठ से दिनेश कुमार गोयल और इलाहाबाद झांसी से डॉक्टर मान सिंह यादव शामिल हैं। इनके अलावा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से उमेश द्विवेदी लाल बिहारी यादव डॉक्टर आकाश अग्रवाल श्रीचंद शर्मा हरि सिंह ढिल्लों और ध्रुव कुमार त्रिपाठी का कार्यकाल भी समाप्त होने जा रहा है।

    भाजपा ने फिलहाल पांच सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा की है। पार्टी ने लखनऊ सीतापुर स्नातक सीट से अवनीश कुमार सिंह लखनऊ सीतापुर शिक्षक सीट से उमेश द्विवेदी बरेली मुरादाबाद सीट से हरि सिंह ढिल्लों आगरा स्नातक सीट से डॉक्टर मानवेंद्र सिंह और मेरठ सहारनपुर सीट से श्रीचंद शर्मा को फिर मौका दिया है। बाकी छह सीटों पर उम्मीदवारों के नाम सामने आने बाकी हैं। पार्टी स्तर पर इन सीटों को लेकर कई दौर की चर्चा हो चुकी है और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन जारी है।

    भाजपा को गोरखपुर शिक्षक सीट इलाहाबाद स्नातक सीट वाराणसी शिक्षक और स्नातक सीट आगरा शिक्षक सीट तथा मेरठ स्नातक सीट पर उम्मीदवार घोषित करने हैं। संभावित नामों को लेकर राजनीतिक और शिक्षक संगठनों से जुड़े कई चेहरे चर्चा में हैं। गोरखपुर शिक्षक सीट से ध्रुव कुमार त्रिपाठी और प्रयागराज स्नातक सीट से सुरेश त्रिपाठी के नाम की चर्चा है। वहीं आगरा स्नातक सीट पर पिछले चुनाव में निर्दलीय जीत हासिल करने वाले आकाश अग्रवाल और कर्मचारी नेता हरिकिशोर तिवारी भी दावेदारी से जुड़े बताए जा रहे हैं।

    दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने सभी 11 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। ऐसे में अब दोनों प्रमुख दलों की चुनावी तैयारियां तेज हो गई हैं। विधान परिषद की इन सीटों का चुनाव विधानसभा चुनाव से अलग निर्वाचन प्रक्रिया के तहत होगा और इसमें संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता मतदान करेंगे।

    चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही प्रदेश के अधिकांश जिलों में आदर्श आचार संहिता के प्रावधान लागू हो गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार कानपुर कानपुर देहात और उन्नाव को छोड़कर उत्तर प्रदेश के बाकी जिलों में विधान परिषद निर्वाचन के संबंध में आचार संहिता के संबंधित प्रावधान प्रभावी हैं। अब 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होगी और अक्टूबर के अंत तक सभी 11 सीटों पर नए सदस्यों की तस्वीर साफ हो जाएगी।

  • यूपी के चार हिस्सों में बंटने का ओपी राजभर का दावा, बोले- पूर्वांचल बना तो राजभर समाज का बेटा होगा पहला CM

    यूपी के चार हिस्सों में बंटने का ओपी राजभर का दावा, बोले- पूर्वांचल बना तो राजभर समाज का बेटा होगा पहला CM

    अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के विभाजन और अलग पूर्वांचल राज्य की मांग को लेकर कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने बड़ा राजनीतिक दावा किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का भविष्य में चार हिस्सों में बंटना तय है और यदि पूर्वांचल अलग राज्य बनता है तो वहां पहला मुख्यमंत्री राजभर समाज से होगा। राजभर ने यह भी कहा कि जिस राजनीतिक दल के साथ उनका गठबंधन होगा, पूर्वांचल में मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी रहेगी।

    चार अलग क्षेत्रों की मांग का किया जिक्र
    अंबेडकरनगर में बातचीत के दौरान राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसकी विशाल आबादी को देखते हुए भविष्य में इसका पुनर्गठन होना तय है। उन्होंने बुंदेलखंड में अलग राज्य की मांग, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हरित प्रदेश की मांग के साथ मध्यांचल और पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की मांग का भी उल्लेख किया।

    राजभर के मुताबिक, पूर्वांचल के छह मंडलों में राजभर समाज की बड़ी आबादी है। उनका कहना है कि यदि पूर्वांचल को अलग राज्य का दर्जा मिलता है तो वहां के राजनीतिक समीकरणों में राजभर समाज की भूमिका महत्वपूर्ण होगी और गठबंधन की स्थिति में मुख्यमंत्री पद पर समाज की दावेदारी मजबूत रहेगी।

    सपा पर माफिया संरक्षण का आरोप
    राजभर ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। सपा के खिलाफ सामने आए उन पोस्टरों का जिक्र करते हुए, जिनमें अखिलेश यादव के साथ अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरें दिखाई गई हैं, उन्होंने पोस्टरों में लगाए गए आरोपों का समर्थन किया।

    उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के कार्यकाल में अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे अपराधियों को संरक्षण मिला। राजभर ने इसी आधार पर सपा सरकार की पहचान को अपराध और माफियाराज से जोड़ने का दावा किया। साथ ही उन्होंने सपा के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के राजनीतिक नारे पर भी कटाक्ष किया।

    अखिलेश-ओवैसी गठबंधन पर भी टिप्पणी
    असदुद्दीन ओवैसी और अखिलेश यादव के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी राजभर ने अपनी राय रखी। उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी खुद को मुस्लिम समाज का राजनीतिक नेतृत्व करने वाला मानते हैं, जबकि ओवैसी चाहते हैं कि मुस्लिम समाज से कोई नेता मुख्यमंत्री बने।

    राजभर के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर दोनों पक्षों की सोच अलग है, इसलिए अखिलेश यादव और ओवैसी के बीच गठबंधन होना मुश्किल है। यह राजभर का राजनीतिक आकलन है; ओवैसी की ओर से गठबंधन को लेकर हालिया बयान में 2 अक्टूबर तक इंतजार करने की बात सामने आई है।

    पहले भी उठा है यूपी के पुनर्गठन का मुद्दा
    उत्तर प्रदेश को अलग-अलग राज्यों में बांटने की मांग पहले भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रही है। राजभर के ताजा बयान में चार हिस्सों के रूप में पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी क्षेत्र की मांग का संदर्भ सामने आया है। हालांकि, फिलहाल उत्तर प्रदेश के चार राज्यों में विभाजन को लेकर कोई प्रशासनिक फैसला नहीं हुआ है। राजभर का बयान राजनीतिक मांग और भविष्य की संभावित स्थिति को लेकर उनका दावा है।