Tag: Uttar Pradesh politics

  • मेरठ में नितिन नवीन-योगी की मौजूदगी में मिशन-2027 पर मंथन, युवाओं से बोले- आप ही विकास यात्रा के असली नायक

    मेरठ में नितिन नवीन-योगी की मौजूदगी में मिशन-2027 पर मंथन, युवाओं से बोले- आप ही विकास यात्रा के असली नायक


    मेरठ। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दो दिवसीय पश्चिमी उत्तर प्रदेश दौरे के पहले दिन सोमवार को मेरठ में संगठन और युवाओं से जुड़े कार्यक्रम हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में सुभारती विश्वविद्यालय में युवा संवाद के साथ संगठनात्मक बैठकों में बूथ से जिला स्तर तक की तैयारियों की समीक्षा की गई। नितिन नवीन ने युवाओं को विकास और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा के असली नायक युवा हैं।

    नितिन नवीन 21 और 22 सितंबर को मेरठ और सहारनपुर के दौरे पर हैं। इस दौरान वे पार्टी के पदाधिकारियों, पूर्व जनप्रतिनिधियों, शक्ति केंद्र संयोजकों और जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर रहे हैं। मेरठ में उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी कार्यक्रमों में शामिल हुए।

    युवा संवाद में रोजगार और विकास पर बात
    स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के मांगल्य कन्वेंशन सेंटर में आयोजित युवा संवाद में नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में हो रहे विकास कार्यों और बेहतर कनेक्टिविटी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी बढ़ने से विकास के साथ रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश को बड़ी अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ता बताते हुए उन्होंने युवाओं को इस बदलाव का प्रमुख हिस्सा बताया।

    उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल देश का भविष्य मानना पर्याप्त नहीं है। युवा आज की मौजूदा ताकत हैं और उनकी प्रतिभा का सही दिशा में इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण को गति दे सकता है। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमता को सकारात्मक दिशा में लगाने और देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

    मेरठ की खेल पहचान का जिक्र
    नितिन नवीन ने मेरठ को खेल नगरी बताते हुए खेल सामग्री के निर्माण में शहर की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत से निर्यात होने वाली खेल सामग्री, जिसमें क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक और बैडमिंटन से जुड़ी सामग्री शामिल है, उसमें मेरठ की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत है।

    उन्होंने 250 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में पहला सत्र शुरू हो चुका है और इससे स्थानीय स्तर की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

    युवाओं को दिलाए तीन संकल्प
    युवा संवाद के दौरान नितिन नवीन ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब युवा सोचता है तो देश आगे बढ़ता है और जब युवा संकल्प लेता है तो नए युग का निर्माण होता है। इसी क्रम में उन्होंने युवाओं को तीन प्रमुख संकल्प भी दिलाए और अपनी प्रतिभा का सही दिशा में उपयोग करने की बात कही।

    शहीद स्मारक से शुरू हुआ कार्यक्रम
    नितिन नवीन के मेरठ कार्यक्रम की शुरुआत शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। उन्होंने कारगिल स्मृति उपवन और इंडियन नेशनल आर्मी (INA) शहीद स्मारक पर पहुंचकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद युवाओं के साथ रोजगार, स्टार्टअप और विकास से जुड़े विषयों पर संवाद हुआ। कार्यक्रम में 2,000 से अधिक युवाओं की मौजूदगी रही।

    उन्होंने उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, नमो भारत (रैपिड रेल) और मेरठ मेट्रो जैसी ढांचागत परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परियोजनाओं से विकास के नए रास्ते खुलते हैं।

    संगठन की जमीनी तैयारियों पर भी मंथन
    मेरठ दौरे का दूसरा प्रमुख हिस्सा संगठनात्मक बैठकें रहीं। नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिमी यूपी के पूर्व पदाधिकारियों, सांसदों और विधायकों के साथ बैठक की। इसमें चुनावी तैयारियों के साथ बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और जिला स्तर पर संगठन की गतिविधियों की समीक्षा की गई। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद के जरिए जमीनी स्थिति की जानकारी लेने पर भी जोर रहा।

    कार्यक्रम स्थल पर नितिन नवीन के स्वागत के लिए बुलडोजर भी लगाए गए। वहीं सुरक्षा और व्यवस्थाओं के मद्देनजर कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश, निकास, पार्किंग, पेयजल और अन्य इंतजामों की समीक्षा की गई।

    छात्रों में दिखा उत्साह
    सुभारती विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नितिन नवीन के कार्यक्रम को लेकर विद्यार्थियों में भी उत्साह दिखाई दिया। युवा संवाद में शामिल होने के लिए छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। विश्वविद्यालय परिसर में पूरे दिन चहल-पहल बनी रही।

    औघड़नाथ मंदिर जाएंगे, आज मेरठ में प्रवास
    नितिन नवीन मेरठ में औघड़नाथ मंदिर में दर्शन-पूजन भी करेंगे और सोमवार रात मेरठ में प्रवास करेंगे। इसके बाद 22 सितंबर को वे सहारनपुर के लिए रवाना होंगे। वहां भाजपा के एक कार्यकर्ता के घर भोजन करने के बाद पूर्व पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों और जिलास्तरीय संगठन के पदाधिकारियों के साथ संवाद करेंगे। इसके बाद शाकंभरी देवी के दर्शन कर दिल्ली लौटने का कार्यक्रम है।

    इस तरह दो दिन के दौरे में मेरठ से सहारनपुर तक संगठन की जमीनी सक्रियता, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जुड़े मुद्दों पर पार्टी नेतृत्व की बैठकें प्रस्तावित हैं।

  • अखिलेश के ‘PDA रथ’ के भगवा रंग पर मायावती का हमला, पूछा- क्या मुस्लिम वोटरों से भरोसा उठ गया?

    अखिलेश के ‘PDA रथ’ के भगवा रंग पर मायावती का हमला, पूछा- क्या मुस्लिम वोटरों से भरोसा उठ गया?


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को अखिलेश यादव के प्रस्तावित ‘PDA रथ’ के रंग को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि रथ में सपा के पारंपरिक लाल रंग की तुलना में आरएसएस-भाजपा से जुड़ा भगवा रंग ज्यादा नजर आ रहा है। इसी आधार पर उन्होंने सवाल किया कि क्या सपा चुनावी लाभ के लिए अपनी पहचान और रणनीति बदल रही है या उसका मुस्लिम मतदाताओं से भरोसा कम हो गया है।

    ‘रंग बदलने’ की रणनीति पर सवाल
    मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए प्रचारित किए जा रहे PDA रथ में सपा का लाल रंग कम और भगवा रंग ज्यादा दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे चुनावी रणनीति से जोड़ते हुए सपा नेतृत्व पर निशाना साधा।

    मायावती ने यह भी दावा किया कि पिछले चुनावों में मुस्लिम समाज ने बड़े पैमाने पर सपा का समर्थन किया, लेकिन इसके बावजूद भाजपा को सत्ता में आने से नहीं रोका जा सका। उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं से सवाल किया कि वे बार-बार सपा को वोट देकर अपना वोट क्यों खराब करें। यह मायावती का राजनीतिक दावा है; इसके समर्थन में उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सपा के पिछले चुनावी प्रदर्शन और भाजपा की सरकार बनने का संदर्भ दिया।

    मुस्लिम वोट को लेकर भी साधा निशाना
    बसपा प्रमुख ने दावा किया कि मुस्लिम मतदाताओं का रुख अब बसपा की ओर बदल रहा है। उन्होंने इसकी तुलना ऊंची जातियों के ब्राह्मण मतदाताओं के पूर्व में बसपा से दूर होने से की। यह भी मायावती का चुनावी आकलन है, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य।

    उन्होंने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और विकास के मुद्दे पर भी अपनी पार्टी के शासनकाल का उल्लेख किया। मायावती ने कहा कि उनके मुताबिक बसपा सरकार के दौरान अपराध नियंत्रण, शांति-व्यवस्था, जनकल्याण और विकास के क्षेत्र में काम हुआ था।

    PDA की परिभाषा पर भी अखिलेश को घेरा
    मायावती ने सपा के PDA फॉर्मूले की व्याख्या पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी जरूरत के हिसाब से सपा ने PDA के अर्थ और सामाजिक समीकरणों को अलग-अलग तरीके से पेश किया है।

    उन्होंने कहा कि कभी इसे ‘पिछड़ा, दलित’, कभी ‘पंडित’ से जोड़कर बताया गया और बाद में खुद को अंबेडकरवादी दिखाने के प्रयास भी किए गए। मायावती ने अखिलेश यादव और सपा नेताओं के नीले रंग के कपड़ों में तस्वीरें खिंचवाने का भी जिक्र किया और दावा किया कि जनता ने इसे स्वीकार नहीं किया।

    बसपा की विचारधारा का किया जिक्र
    मायावती ने अपनी पार्टी की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि बसपा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर काम करती है। उन्होंने पार्टी को अंबेडकरवादी बताते हुए सभी वर्गों के लिए रोजगार, सम्मान और सामाजिक भागीदारी की बात कही।

    24 सितंबर से अखिलेश का PDA रथ अभियान
    इस बीच अखिलेश यादव 24 सितंबर को PDA रथ के जरिए अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करने वाले हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उनका कार्यक्रम रायबरेली में हरचंदपुर के विधायक राहुल लोधी के आवास से जुड़ा है। इसी प्रस्तावित अभियान के रथ के रंग को लेकर मायावती ने सवाल उठाए हैं।

    उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा के बीच यह बयानबाजी दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक और उदाहरण है। फिलहाल मायावती के हमले पर अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • यूपी में सपा के खिलाफ पोस्टर वार, अखिलेश के साथ आजम-अतीक-मुख्तार की तस्वीरें, लिखा- ‘यही चलाते थे सरकार’

    यूपी में सपा के खिलाफ पोस्टर वार, अखिलेश के साथ आजम-अतीक-मुख्तार की तस्वीरें, लिखा- ‘यही चलाते थे सरकार’


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव को निशाना बनाकर पोस्टर अभियान सामने आया है। सोमवार को लखनऊ समेत कई शहरों में लगाए गए पोस्टरों में अखिलेश यादव के साथ आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें लगाई गई हैं। पोस्टरों पर ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ और ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ जैसे नारे लिखे गए हैं।

    ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का नारा
    इन पोस्टरों में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का स्लोगन भी इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अवध से लेकर पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक अलग-अलग क्षेत्रों के लिए नामों की सूची वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान के अलावा कई अन्य नाम भी शामिल हैं। पोस्टरों के जरिए सपा शासनकाल की कानून-व्यवस्था और कथित माफिया प्रभाव को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की गई है।

    लखनऊ से कई जिलों तक पहुंचे पोस्टर
    लखनऊ के अलावा उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर समेत कई शहरों में ऐसे पोस्टर सामने आने की रिपोर्ट है। इस अभियान में सपा शासनकाल से जुड़े कथित माफिया नेटवर्क को मुद्दा बनाकर अखिलेश यादव को घेरने की कोशिश की गई है। हालांकि, पोस्टरों पर उन्हें लगाने वाले किसी संगठन या व्यक्ति का नाम स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन पोस्टरों के पीछे किसका हाथ है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    गोंडा में सपा कार्यकर्ताओं ने पोस्टर फाड़े
    गोंडा में अखिलेश यादव के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों को लेकर सपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखाई दी। बालपुर चौराहे पर सपा नेता लालचंद्र गौतम ने एक पोस्टर फाड़ दिया। पोस्टर में आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों के साथ वही नारे लिखे गए थे।

    अंबेडकरनगर में तीन जगह होर्डिंग
    अंबेडकरनगर के अकबरपुर में शिव बाबा धाम के आसपास तीन स्थानों पर रात में विवादित होर्डिंग लगाए गए। इनमें अखिलेश यादव के साथ अतीक अहमद, आजम खान, मुख्तार अंसारी, गुलशन यादव, मित्रसेन यादव और रिजवान जहीर की तस्वीरें लगाई गई थीं। होर्डिंग पर ‘माफियाराज और अखिलेश, लूट लिया था पूरा प्रदेश’ लिखा गया था। सुबह जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सपा कार्यकर्ताओं ने इन्हें हटाया। पुलिस और एलआईयू ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की, लेकिन पोस्टर लगाने वालों का पता नहीं चल सका।

    अयोध्या में राम मंदिर मार्ग पर भी पोस्टर
    अयोध्या में राम मंदिर जाने वाले प्रमुख मार्ग टेढ़ी बाजार ओवरब्रिज पर भी सपा के खिलाफ पोस्टर लगाया गया। इसमें अतीक अहमद, आजम खान और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों के साथ ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ और ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ जैसे नारे लिखे थे। पोस्टर की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने शहर के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए पोस्टर-बैनर हटवाए। लगाने वालों की पहचान अभी सामने नहीं आई है।

    चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था पर सियासी घेराबंदी
    2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए इस पोस्टर अभियान में सपा के पिछले शासनकाल की कानून-व्यवस्था और अपराध से जुड़े मुद्दों को चुनावी बहस के केंद्र में लाने की कोशिश दिखाई दे रही है। दूसरी ओर, पोस्टर लगाने वाले की पहचान और उसके पीछे किसी राजनीतिक संगठन की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए पोस्टरों में लगाए गए आरोपों को संबंधित पोस्टर के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में इस अभियान पर सपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया और प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि इन पोस्टरों के पीछे कौन है।

  • मायावती का सपा-कांग्रेस पर तीखा हमला, बोलीं- नीला रंग पहनने से नहीं बदलेगी जातिवादी सोच

    मायावती का सपा-कांग्रेस पर तीखा हमला, बोलीं- नीला रंग पहनने से नहीं बदलेगी जातिवादी सोच

    लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बीएसपी के नीले रंग को अपनाने और मंचों व कपड़ों में इसका इस्तेमाल करने से विपक्षी दलों की सोच नहीं बदल जाएगी। बहुजन समाज के हित की बात करने से पहले इन दलों को अपना दिल और दिमाग साफ करना चाहिए। मायावती ने सपा के पीडीए और कांग्रेस की राजनीति पर भी सवाल उठाए।

    मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सपा, कांग्रेस और अन्य विरोधी दल बीएसपी के नीले रंग को अपनाकर उसे कपड़ों और मंचों पर इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इससे गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अन्य उपेक्षित वर्गों के प्रति उनकी वर्षों पुरानी सोच नहीं बदल सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों की सोच जातिवादी, संकीर्ण, सामंती और पूंजीवादी रही है।

    उन्होंने कहा कि केवल नीला रंग अपनाने से कोई दिल से अंबेडकरवादी नहीं बन सकता। बहुजन समाज के वास्तविक हित और कल्याण के लिए पहले इन दलों को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा। मायावती ने आरोप लगाया कि ये दल इन वर्गों के मुद्दों पर “गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं” और कहते कुछ हैं, जबकि करते उसके विपरीत हैं।

    पीडीए को लेकर सपा पर निशाना
    मायावती ने सपा के पीडीए को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के मुद्दे पर सपा की सोच, चाल, चरित्र और चेहरा अलग-अलग रहा है। उन्होंने दावा किया कि बहुजन समाज के हितों की वास्तविक लड़ाई केवल बीएसपी ही लड़ती रही है।

    उन्होंने बीएसपी से निष्कासित नेताओं को लेकर भी विरोधी दलों पर हमला बोला। मायावती ने कहा कि अनुशासनहीनता समेत विभिन्न कारणों से पार्टी से निकाले गए कई लोग बाद में दूसरी पार्टियों में चले गए और कुछ ने छोटे संगठन या राजनीतिक दल भी बना लिए। उनके मुताबिक, ऐसे लोग व्यक्तिगत स्वार्थ और अवसरवाद की राजनीति करते हैं और बहुजन समाज के सामूहिक हित के लिए काम नहीं कर सकते।

    कांग्रेस को बताया ‘डूबता जहाज’
    मायावती ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जिन लोगों को बीएसपी से निकाले जाने के बाद अपने साथ लेने की बात कर रही है, वह खुद “डूबते जहाज” जैसी स्थिति में है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी पार्टी में शामिल होकर कोई अपना राजनीतिक भविष्य अंधकार में क्यों डालेगा।

    मायावती ने अपने बयान में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवनकाल में बहुजन समाज के लोगों को कांग्रेस से सावधान रहने की चेतावनी दी थी।

    अशोक सिद्धार्थ के इस्तीफे पर भी बोला हमला
    मायावती ने बीएसपी से जुड़े रहे और आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की ओर से राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दिए जाने के बाद अशोक सिद्धार्थ ने तत्काल घोषणा नहीं की। मायावती के मुताबिक, उन्होंने पूरी रात इसे रोकने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए और अगले दिन सुबह करीब 6:30 बजे मजबूरी में अपने राजनीतिक संन्यास की घोषणा की।

    मायावती ने कहा कि सही समय आने पर पार्टी के लोगों को इस मामले में और भी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बीएसपी कार्यकर्ताओं से मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को समझने और पार्टी व आंदोलन के हित में सतर्क रहने की अपील की।

  • मायावती की शर्त- अशोक सिद्धार्थ लें राजनीति से संन्यास, तभी आकाश आनंद की वापसी पर होगा विचार

    मायावती की शर्त- अशोक सिद्धार्थ लें राजनीति से संन्यास, तभी आकाश आनंद की वापसी पर होगा विचार

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही बहुजन समाज पार्टी ने संगठन और नेतृत्व को लेकर अपना रुख साफ करना शुरू कर दिया है। बसपा प्रमुख मायावती की ओर से जारी बयान में पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को लेकर कड़ा संदेश दिया गया है। पार्टी ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ के पास अब भी राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेकर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा छोड़ने का विकल्प है। ऐसा होने पर उनके दामाद आकाश आनंद के पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम करने और उन्हें पुरानी जिम्मेदारियां सौंपने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है।

    अशोक सिद्धार्थ पर निजी स्वार्थ का आरोप

    बसपा ने आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ को पार्टी की ओर से खुद में सुधार करने के कई मौके दिए गए, लेकिन उन्होंने बहुजन मिशन की अपेक्षा निजी और पारिवारिक हितों को प्राथमिकता दी। पार्टी का कहना है कि इसका असर न केवल अशोक सिद्धार्थ पर पड़ा, बल्कि उनके दामाद आकाश आनंद को भी इसका नुकसान उठाना पड़ा।

    बयान में दावा किया गया कि अशोक सिद्धार्थ ने अपने निजी स्वार्थ के चलते आकाश आनंद और बसपा मूवमेंट के हितों को भी पर्याप्त महत्व नहीं दिया। पार्टी के अनुसार, उनसे अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा त्याग, तपस्या और कुर्बानी की उम्मीद थी, लेकिन वे उस कसौटी पर खरे नहीं उतरे।

    तीन राज्यों के चुनाव पर नजर

    मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव करीब हैं और ये तीनों राज्य बहुजन समाज तथा बहुजन आंदोलन के लिए विशेष महत्व रखते हैं। पार्टी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी, समर्थक और शुभचिंतक इन राज्यों में सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ पूरी ताकत से जुटे हुए हैं।
    मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव करीब हैं और ये तीनों राज्य बहुजन समाज तथा बहुजन आंदोलन के लिए विशेष महत्व रखते हैं। पार्टी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी, समर्थक और शुभचिंतक इन राज्यों में सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ पूरी ताकत से जुटे हुए हैं।

    बसपा के मुताबिक, मौजूदा समय में पार्टी और बहुजन समाज के सामने विरोधी दलों के साथ-साथ जातिवादी तत्वों की भी कई चुनौतियां हैं। पार्टी ने सर्वसमाज के लोगों से सहयोग की अपील की है। साथ ही दलित समाज सहित बहुजन समाज के सभी वर्गों से निजी या पारिवारिक हित में ऐसा कोई कदम नहीं उठाने को कहा गया है, जिससे आंदोलन के हित प्रभावित हों।

    अनुशासन पर मायावती का सख्त संदेश

    मायावती ने कहा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ऐसे लोगों को संगठन में दोबारा जगह दे रहा है, जो अपने आचार-व्यवहार को सुधारते हैं। वहीं, संगठन और मिशन के रास्ते में बाधा बनने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा रही है। बसपा ने अशोक सिद्धार्थ के मामले को इसी नीति का प्रमुख उदाहरण बताया है।

    आकाश आनंद की वापसी पर संकेत

    बसपा के बयान में आकाश आनंद की भविष्य की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दिया गया है। पार्टी के मुताबिक, अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास लेकर निजी हित और राजनीतिक महत्वाकांक्षा से ऊपर उठते हैं, तो आकाश आनंद के लिए संगठन में स्वतंत्र रूप से काम करने का रास्ता साफ हो सकता है।

    ऐसी स्थिति में बसपा आकाश आनंद को उनकी पुरानी जिम्मेदारियां वापस सौंपने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकती है। इससे आकाश आनंद के एक बार फिर संगठन में सक्रिय भूमिका में लौटने की संभावना बन सकती है।

  • अखिलेश का योगी सरकार पर हमला, बोले- विपक्ष को बदनाम करने AI वीडियो बनाकर वायरल कर रही सरकार

    अखिलेश का योगी सरकार पर हमला, बोले- विपक्ष को बदनाम करने AI वीडियो बनाकर वायरल कर रही सरकार

    लखनऊ। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्षी नेताओं को बदनाम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से वीडियो तैयार कराकर वायरल कर रही है। अखिलेश ने कहा, ‘सरकार हमें बदनाम करने के लिए बच्चों के खेल न खेले। AI में हम उनसे काफी आगे हैं।’

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर बनाया गया एक AI वीडियो भी दिखाया गया। इसमें प्रदेश की कानून-व्यवस्था समेत कई मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए गए। अखिलेश ने कहा कि सरकार अगर AI का इस्तेमाल विपक्ष को बदनाम करने के लिए करेगी तो वे भी इस तकनीक में उसे पीछे छोड़ देंगे। उन्होंने सरकार को ऐसी गतिविधियों से बचने की नसीहत दी।

    ‘यूपी में बड़े पैमाने पर लूट, सबसे ज्यादा भ्रष्ट सरकार’
    सपा प्रमुख ने प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा, ‘प्रदेश में इस समय बड़े पैमाने पर लूट हो रही है। यह अब तक यूपी की सबसे ज्यादा भ्रष्ट सरकार है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्कूल बंद करवा रही है। अखिलेश ने कहा कि सपा बंद किए गए स्कूलों में जाकर कार्यक्रम करेगी और लोगों को सरकार के कामकाज की जानकारी देगी।

    एक्सप्रेसवे में गड्ढों को लेकर सरकार पर सवाल
    अखिलेश ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए एक्सप्रेसवे में गड्ढे हो गए हैं। अब इसके डिजाइन में गड़बड़ी की बात कही जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि अगर डिजाइन में गलती हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित एक एक्सप्रेसवे की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उसमें भी गड्ढे हो गए हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि पीडब्ल्यूडी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है।

    ‘कुंभ से अब तक एक लाख करोड़ से ज्यादा खर्च, विकास कहां हुआ?’
    अखिलेश ने प्रयागराज में हुए खर्च को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कुंभ से लेकर अब तक प्रयागराज में एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो चुका है। इसके बावजूद सवाल यह है कि वास्तव में कितना विकास हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है और पूरा राज्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है।

    जयंत चौधरी पर बोले अखिलेश- ‘भाजपा 61 सीटें दे तो सम्मान होगा’
    अखिलेश यादव ने केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा अगर जयंत चौधरी को 61 सीटें देती है तो इसे उनका सम्मान माना जाएगा। इससे कम सीटें मिलने पर यह उनका अपमान होगा।

  • सपा के साथ आए तो चमकी सहयोगियों की किस्मत? कांग्रेस से बसपा और जयंत-राजभर तक, 4 चुनावों के आंकड़ों से समझिए समीकरण

    सपा के साथ आए तो चमकी सहयोगियों की किस्मत? कांग्रेस से बसपा और जयंत-राजभर तक, 4 चुनावों के आंकड़ों से समझिए समीकरण


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के चवन्नी को रुपया बनाने वाले बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में गठबंधन की राजनीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है। अखिलेश यादव ने 16 अगस्त को सहयोगी दलों पर तंज कसते हुए कहा था कि उनकी पार्टी ने कई ऐसे गठबंधन किए जिनमें छोटे दलों को साथ लेकर उन्हें राजनीतिक ताकत दी लेकिन बाद में वही सहयोगी उन्हें छोड़कर चले गए। उनके इस बयान पर राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख जयंत चौधरी के समर्थकों और बसपा प्रमुख मायावती की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चुनावी आंकड़े भी अखिलेश के दावे को मजबूती देते हैं और सपा के साथ गठबंधन करने वाले दलों को वास्तव में राजनीतिक फायदा मिला।

    अगर 2024 के लोकसभा चुनाव से शुरुआत करें तो तस्वीर काफी दिलचस्प नजर आती है। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 62 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और 37 सीटों पर जीत दर्ज की। यह उसके लिए बड़ी वापसी थी क्योंकि इससे पहले लगातार दो लोकसभा चुनाव में पार्टी महज पांच पांच सीटों पर सिमट गई थी। इसी चुनाव में कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन में 17 सीटों पर मैदान में उतरी और छह सीटें जीतने में सफल रही। 2019 में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक सीट मिली थी। इस लिहाज से सपा के साथ गठबंधन के बाद उसके प्रदर्शन में बड़ा सुधार हुआ।

    2024 में जन अधिकार पार्टी को भी सपा के साथ गठबंधन का फायदा मिला। पार्टी के प्रमुख बाबू सिंह कुशवाहा को जौनपुर सीट से सपा के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतारा गया और उन्होंने जीत दर्ज कर पहली बार लोकसभा का रास्ता तय किया। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी ललितेश पति त्रिपाठी भदोही से चुनाव हार गए और पार्टी का खाता नहीं खुल सका।

    अब 2019 के लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो सपा और बसपा ने लंबे अंतराल के बाद साथ चुनाव लड़ा था। बसपा ने 38 और सपा ने 37 सीटों पर चुनाव लड़ा। बसपा ने 10 सीटें जीतीं जबकि सपा के खाते में सिर्फ पांच सीटें आईं। खास बात यह थी कि 2014 में बसपा एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत पाई थी। इस लिहाज से 2019 में उसका प्रदर्शन बड़ी वापसी माना गया। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद दोनों दलों का गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं चला और बसपा ने सपा से दूरी बना ली।

    2022 के विधानसभा चुनाव में भी सपा ने कई छोटे दलों को अपने साथ जोड़ा। जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल ने 33 सीटों पर चुनाव लड़कर आठ सीटें जीतीं। 2017 में रालोद के खाते में सिर्फ एक सीट आई थी। इसी तरह ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने 19 सीटों पर चुनाव लड़कर छह सीटें जीतीं। हालांकि अपना दल कमेरावादी की पल्लवी पटेल को सिराथू से बड़ी जीत मिली लेकिन पार्टी का प्रदर्शन सीमित रहा। दूसरी ओर महान दल और जनवादी पार्टी समाजवादी गठबंधन के बावजूद कोई सीट नहीं जीत सके।

    2017 में सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था लेकिन दोनों दलों को बड़ा फायदा नहीं मिला। सपा 298 सीटों पर चुनाव लड़कर सिर्फ 47 सीटें जीत सकी जबकि कांग्रेस 105 सीटों पर लड़कर सात सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 2012 की तुलना में 21 सीटों का नुकसान हुआ था।

    इन आंकड़ों को देखें तो 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव तथा 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन करने वाले कई बड़े दलों के प्रदर्शन में सुधार जरूर दिखाई देता है। हालांकि हर सहयोगी को समान सफलता नहीं मिली। कुछ दलों को सीटें मिलीं तो कुछ गठबंधन के बावजूद चुनावी जमीन मजबूत नहीं कर सके। यही वजह है कि अखिलेश के बयान को लेकर राजनीतिक बहस आंकड़ों के साथ साथ गठबंधन की रणनीति और सीट बंटवारे तक पहुंच गई है। आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा और उसके संभावित सहयोगियों के बीच यह सियासी रिश्ता किस दिशा में जाता है।

  • UP : मुरादाबाद मंडल में सियासी विरासत का दबदबा, 6 मौजूदा विधायकों के पिता भी रह चुके हैं MP-MLA

    UP : मुरादाबाद मंडल में सियासी विरासत का दबदबा, 6 मौजूदा विधायकों के पिता भी रह चुके हैं MP-MLA

    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल की राजनीति में सियासी विरासत का असर साफ दिखाई देता है। मंडल के मौजूदा छह विधायक ऐसे हैं, जिनके पिता भी राजनीति में सक्रिय रहे और विधायक या सांसद के रूप में सदन तक पहुंचे। इनमें संभल के दो, जबकि मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा और बिजनौर के एक-एक विधायक शामिल हैं। खास बात यह है कि इन छह विधायकों में तीन समाजवादी पार्टी और तीन भारतीय जनता पार्टी से हैं।

    मंडल के कई राजनीतिक परिवारों में पिता के बाद बेटों ने राजनीति की कमान संभाली। इनमें कुछ नेताओं ने अपनी अलग पहचान बना ली है और लगातार चुनाव जीतकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जबकि कुछ की राजनीतिक पारी ज्यादा लंबी नहीं चल सकी।

    छह मौजूदा विधायकों की सियासी विरासत
    वर्तमान में भाजपा की ओर से सुशांत सिंह, आकाश सक्सेना और राजीव तरारा विधायक हैं। वहीं सपा से इकबाल महमूद, पिंकी यादव और मोहम्मद फहीम विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इन सभी के पिता भी राजनीति में सक्रिय रहे और विधायक या सांसद रह चुके हैं।

    इनमें इकबाल महमूद सबसे अनुभवी हैं और सातवीं बार विधानसभा पहुंचकर संभल सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वहीं रामपुर के विधायक आकाश सक्सेना पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं। पिंकी यादव और मोहम्मद फहीम तीसरी बार, जबकि सुशांत सिंह और राजीव तरारा दूसरी बार विधायक बने हैं।

    इकबाल महमूद: पिता भी तीन बार रहे विधायक
    संभल विधानसभा सीट से सपा विधायक इकबाल महमूद सातवीं बार सदन में पहुंचे हैं। मंडल के प्रमुख सपा नेताओं में उनकी गिनती होती है। उनके पिता महमूद हसन खान भी संभल सीट से तीन बार विधायक रह चुके थे। इकबाल महमूद ने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

    मोहम्मद फहीम: पिता के निधन के बाद उपचुनाव से शुरुआत
    मुरादाबाद की बिलारी सीट से सपा विधायक मोहम्मद फहीम तीसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं। उनके पिता हाजी इरफान 2012 में बिलारी से विधायक चुने गए थे। सड़क हादसे में उनकी मौत के बाद मोहम्मद फहीम ने उपचुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।

    सुशांत सिंह: पिता पांच बार विधायक, एक बार सांसद
    बिजनौर की बढ़ापुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक सुशांत सिंह लगातार दूसरी बार चुनाव जीत चुके हैं। वह पूर्व सांसद सर्वेश सिंह के बेटे हैं। सर्वेश सिंह ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से पांच बार विधायक और मुरादाबाद लोकसभा सीट से एक बार सांसद रहे थे। सुशांत अब अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

    राजीव तरारा: पिता भी रह चुके विधायक
    अमरोहा जिले की मंडी धनौरा सीट से भाजपा विधायक राजीव तरारा भी लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं। उनके पिता तोताराम वर्ष 1996 में गंगेश्वरी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। राजीव ने भी पिता के बाद राजनीति में अपनी जगह बनाई और लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने में सफल रहे।

    पिंकी यादव: पिता सांसद और तीन बार विधायक
    असमोली सीट से सपा विधायक पिंकी यादव लगातार तीसरी बार विधानसभा पहुंची हैं। उनके पिता बिजेंद्र पाल सिंह यादव तीन बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं। पिंकी यादव ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए असमोली में अपनी पकड़ कायम रखी है।

    आकाश सक्सेना: आजम खां की सीट से पहुंचे विधानसभा
    रामपुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने उपचुनाव में जीत दर्ज की थी। यह वही सीट है, जहां लंबे समय तक आजम खां का राजनीतिक प्रभाव रहा। आकाश सक्सेना के पिता शिव बहादुर सक्सेना रामपुर की स्वार सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं। इस तरह आकाश भी राजनीतिक परिवार की दूसरी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं।

    इन नेताओं के बेटे भी रह चुके विधायक
    मुरादाबाद मंडल में राजनीतिक परिवारों की सूची सिर्फ मौजूदा छह विधायकों तक सीमित नहीं है। कई अन्य नेताओं की संतानों ने भी चुनावी राजनीति में कदम रखा है।

    – पूर्व विधायक चौधरी नौनिहाल सिंह के बेटे राजेश सिंह चुन्नू कांठ से विधायक रह चुके हैं।
    – पूर्व विधायक रिजवानुल हक के बेटे मोहम्मद उस्मान मुरादाबाद देहात से विधायक रह चुके हैं।
    – आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम रामपुर की स्वार सीट से विधायक रह चुके हैं।
    – पूर्व विधायक रियासत हुसैन के बेटे सौलत अली मुरादाबाद देहात से विधायक रह चुके हैं।
    – अमरोहा विधायक महबूब अली के बेटे परवेज अली पूर्व एमएलसी रह चुके हैं।
    – अमरोहा सांसद कंवर सिंह तंवर के बेटे ललित तंवर वर्तमान में अमरोहा के जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।

    2027 में भी दिखेगा राजनीतिक परिवारों का असर
    2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुरादाबाद मंडल में कुछ और राजनीतिक परिवार अपने अगली पीढ़ी के नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी में हैं। एक सांसद अपने बेटे को कुंदरकी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। वहीं मुरादाबाद देहात सीट से एक पूर्व विधायक के बेटे के भी चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद मंडल की सियासत में राजनीतिक विरासत बनाम नई नेतृत्वकारी पीढ़ी का मुकाबला भी देखने को मिल सकता है।

  • यूपी में ब्राह्मण वोट पर सियासी घमासान, अखिलेश-मायावती की नजर, क्या भाजपा का समीकरण बिगड़ेगा?

    यूपी में ब्राह्मण वोट पर सियासी घमासान, अखिलेश-मायावती की नजर, क्या भाजपा का समीकरण बिगड़ेगा?


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच ब्राह्मण मतदाता एक बार फिर सियासी दलों के केंद्र में आते दिख रहे हैं। पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के गठजोड़ यानी पीडीए की राजनीति करने वाले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव अब ब्राह्मणों को साधने की कोशिश में जुटे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और सपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित प्रबुद्ध सम्मेलन में अखिलेश ने पीडीए के ‘पीडी’ का अर्थ ‘पंडित’ बताया।

    अखिलेश ने विकास दुबे एनकाउंटर और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विजन व उनकी स्मृतियों की कथित उपेक्षा जैसे मुद्दों के जरिए भाजपा पर निशाना साधा। सियासी जानकारों की नजर में यह कोशिश इसलिए अहम है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी करीब 12 से 14 प्रतिशत मानी जाती है और करीब 115 से 120 विधानसभा सीटों पर उनका प्रभाव माना जाता है। पूर्वांचल के कुछ क्षेत्रों में यह हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक बताई जाती है।

    राम मंदिर आंदोलन के बाद बदला ब्राह्मणों का रुख
    90 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर कांग्रेस की नीतियों से नाराज ब्राह्मणों का बड़ा हिस्सा भाजपा की ओर चला गया। इसके पीछे सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दों के प्रति समुदाय का झुकाव भी एक प्रमुख कारण माना गया। इसी दौर में मुस्लिम मतदाता भी कांग्रेस से दूर हुए।

    1990 में अयोध्या जा रहे कारसेवकों की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को मुस्लिम समुदाय का मजबूत समर्थन मिला। यादव और मुस्लिम मतों के समीकरण ने मुलायम की राजनीतिक जमीन को मजबूती दी। वहीं, ब्राह्मणों के भाजपा के साथ आने से 1991 में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।

    1993 में सपा और बसपा के गठबंधन ने पिछड़ा, दलित और मुस्लिम समीकरण के सहारे सत्ता हासिल की। हालांकि यह गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं चला और बाद में भाजपा और सपा के बीच मुख्य राजनीतिक मुकाबला बन गया।

    मायावती ने भी आजमाया था ब्राह्मण कार्ड
    2003 में भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने ब्राह्मणों को अपने साथ जोड़ने की रणनीति अपनाई। उन्होंने दलित और ब्राह्मणों के बीच राजनीतिक समीकरण बनाने के लिए अभियान चलाया। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 86 ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट दिया, जिनमें 41 चुनाव जीते। इसके बाद मायावती पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफल रहीं।

    इस दौरान बसपा के नारे भी बदले और पार्टी ने ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ की राजनीति को आगे बढ़ाया। सतीश मिश्र और रामवीर उपाध्याय जैसे ब्राह्मण नेताओं को पार्टी में प्रमुख भूमिका मिली। हालांकि सरकार बनने के कुछ समय बाद दलित और ब्राह्मण कैडर के बीच मतभेद की खबरें सामने आने लगीं।

    2012 में सपा ने भी साधे ब्राह्मण
    2012 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने भी ब्राह्मणों को साधने की कोशिश की। मुलायम सिंह यादव ने 45 ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट दिया, जिनमें 21 चुनाव जीतने में सफल रहे। इसके बाद अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी।

    हालांकि सरकार के कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था, सांप्रदायिक घटनाओं और हिंदू धार्मिक आयोजनों को लेकर उठे सवालों ने ब्राह्मणों के एक वर्ग को सपा से दूर कर दिया। इसके बाद 2017 में भाजपा की प्रचंड जीत के साथ ब्राह्मण मतदाताओं का बड़ा हिस्सा फिर भाजपा के साथ दिखाई दिया।

    भाजपा के साथ क्यों जुड़ा ब्राह्मण वोट?
    2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 68 ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जिनमें 46 जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2022 के चुनाव में भी भाजपा के 46 ब्राह्मण विधायक निर्वाचित हुए।

    योगी आदित्यनाथ की हिंदुत्ववादी राजनीति, कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख और सनातन से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की नीति को भाजपा के साथ ब्राह्मणों के जुड़ाव की वजहों में गिना जाता है। हालांकि, पिछले कुछ समय से यूजीसी गाइडलाइन, ट्रांसफर-पोस्टिंग और संगठन में प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर ब्राह्मणों की कथित नाराजगी की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं।

    पिछले वर्ष दिसंबर में भाजपा विधायक पीएन पाठक के घर ब्राह्मण विधायकों की बैठक और इस पर पार्टी अध्यक्ष पंकज चौधरी की सार्वजनिक नाराजगी के बाद यह मुद्दा और चर्चा में आया।

    अखिलेश के सामने बड़ी चुनौती
    अखिलेश यादव अब इन्हीं संभावित असंतोष के बीच भाजपा के ब्राह्मण वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। जनेश्वर मिश्र की जयंती पर प्रबुद्ध सम्मेलन और अयोध्या से पूर्व मंत्री पवन पांडेय को पहला प्रत्याशी घोषित करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अखिलेश के लिए यह राह आसान नहीं होगी। 2022 से पहले भी सपा ने परशुराम और विष्णु मंदिर बनाने तथा ब्राह्मणों को सम्मान देने जैसे वादों के जरिए इसी तरह की कोशिश की थी, लेकिन उसका चुनावी असर सीमित रहा।

    इसके अलावा सपा का पारंपरिक यादव वोट बैंक और ब्राह्मण मतदाताओं के बीच राजनीतिक तालमेल बनाना भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, अखिलेश के सामने मुस्लिम मतदाताओं को अपने साथ बनाए रखने और ब्राह्मणों को आकर्षित करने के बीच संतुलन साधने की चुनौती भी होगी।

    मायावती भी पीछे नहीं
    ब्राह्मण वोटों को लेकर बसपा प्रमुख मायावती भी सक्रिय हैं। उन्होंने अपने घोषित उम्मीदवारों में ब्राह्मणों को अच्छी संख्या में जगह दी है। जालौन के माधौगढ़ से आशीष पांडेय को उम्मीदवार घोषित कर उन्होंने ब्राह्मण समुदाय को संदेश देने की कोशिश की है। मायावती पहले भी ब्राह्मण-दलित समीकरण के जरिए सत्ता हासिल कर चुकी हैं। 2007 में उनका प्रयोग सफल रहा था। इस बार भी वह दलित, ब्राह्मण, मुस्लिम और पिछड़े वर्गों के बीच सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रही हैं।

    किसके पाले में जाएगा ब्राह्मण वोट?
    2027 के चुनाव में सपा और बसपा दोनों ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि भाजपा के सामने अपने पुराने सामाजिक समीकरण को मजबूत बनाए रखने की चुनौती है। अखिलेश के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह ब्राह्मणों को आकर्षित करते हुए अपने पारंपरिक यादव-मुस्लिम आधार को किस तरह साथ रख पाएंगे। वहीं मायावती के सामने 2007 वाला सामाजिक समीकरण दोहराने की चुनौती है। ऐसे में यूपी की सियासत में ब्राह्मण वोट किस दल के पक्ष में कितना झुकता है, इसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव के कई सीटों के समीकरण पर पड़ सकता है।

  • आज प्रयागराज से राहुल गांधी का यूपी में चुनावी शंखनाद, 2 लाख छात्रों से करेंगे संवाद

    आज प्रयागराज से राहुल गांधी का यूपी में चुनावी शंखनाद, 2 लाख छात्रों से करेंगे संवाद

    प्रयागराज। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज से उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान का आगाज करेंगे। वह केपी इंटर कॉलेज मैदान में करीब दो घंटे तक छात्रों से सीधा संवाद करेंगे। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम के जरिए पूर्वांचल के युवाओं तक पहुंच बनाने की रणनीति तैयार की है। कार्यक्रम में प्रदेश के करीब 25 जिलों के शहर और जिला अध्यक्षों के साथ कांग्रेस के सभी छह सांसद और कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।

    राहुल गांधी शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक छात्रों से संवाद करेंगे। इस दौरान नीट, आरओ/आरआरओ समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षाओं में देरी, भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। कांग्रेस के मुताबिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए करीब दो लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

    स्वराज भवन में नेताओं के साथ करेंगे मंथन
    छात्र संवाद कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी अपने पैतृक आवास स्वराज भवन पहुंचेंगे। यहां वह करीब ढाई घंटे रुकेंगे। इस दौरान पार्टी के सांसदों, विधायकों, प्रदेश प्रभारी, सहप्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा करेंगे। कांग्रेस ने प्रयागराज को चुनने के पीछे यहां मौजूद बड़ी छात्र आबादी को भी अहम वजह माना है। राजस्थान और उत्तराखंड के बाद राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तहत प्रयागराज में यह आयोजन किया जा रहा है।

    प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बड़ा केंद्र है प्रयागराज
    प्रयागराज में करीब दो लाख छात्र अलग-अलग डेलीगेसियों और हॉस्टलों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इनमें आधे से ज्यादा युवा पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आते हैं। ऐसे में कांग्रेस की नजर इस बड़े युवा वर्ग पर है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय लंबे समय से देश की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसके अलावा मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे प्रमुख संस्थानों में भी देशभर से छात्र पढ़ने आते हैं।

    पॉप सिंगर लश्करी और MC अल्ताफ देंगे प्रस्तुति
    कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक और सांगीतिक प्रस्तुतियों से होगी। जेन-जी की पसंद को ध्यान में रखते हुए पॉप सिंगर लश्करी और एमसी अल्ताफ को प्रस्तुति के लिए बुलाया गया है। आयोजकों के मुताबिक कार्यक्रम में किसी तरह का राजनीतिक भाषण नहीं होगा। राहुल गांधी सीधे छात्रों से संवाद करेंगे और उनके सामने रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।