Tag: Uttar Pradesh politics

  • नई दिल्ली में महिला आरक्षण को लेकर बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन, सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा निशाना

    नई दिल्ली में महिला आरक्षण को लेकर बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन, सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा निशाना


    नई दिल्ली।
    दिल्ली से जुड़े व्यापक राजनीतिक माहौल के बीच लखनऊ में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर एक विशाल जन आक्रोश महिला पदयात्रा आयोजित की गई। इस कार्यक्रम ने राजनीतिक स्तर पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन प्रस्तुत किया, जिसमें हजारों महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर विधानसभा तक पैदल मार्च किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ इस पदयात्रा में शामिल हुए और पूरे समय जनता के बीच सक्रिय रूप से मौजूद रहे। लगभग एक दशमलव सात पांच किलोमीटर लंबी इस यात्रा ने राजनीतिक वातावरण को और अधिक गरमा दिया।

    विधानसभा के बाहर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा विषय है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अपनी संकीर्ण सोच के कारण इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और लगातार इस दिशा में कार्य कर रही है।

    उन्होंने यह भी कहा कि समाज में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और उन्हें राजनीति एवं निर्णय प्रक्रिया में अधिक अवसर देने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश के विकास में महिला, युवा, गरीब और किसान चार प्रमुख आधार हैं जिनमें महिलाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

    उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी करने वाले राजनीतिक दलों को जनता भविष्य में जवाब देगी। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू होने तक यह संघर्ष जारी रहेगा। वहीं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस प्रदर्शन को महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और शक्ति का प्रतीक बताया।

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बैठकों को चुनावी रणनीति से जोड़ा जा रहा है

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बैठकों को चुनावी रणनीति से जोड़ा जा रहा है


    नई दिल्ली:
    उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर तेजी से चुनावी मोड़ की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है, जहां आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बड़े बदलावों की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी चुनावी रणनीति को और मजबूत करने के लिए अपने ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव कर सकती है, जिससे जमीनी स्तर पर संगठन की पकड़ और अधिक प्रभावी बनाई जा सके।

    राज्य के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ हालिया बैठकों को इस संभावित बदलाव की दिशा में अहम संकेत माना जा रहा है। इन बैठकों को केवल औपचारिक संवाद नहीं बल्कि आगामी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। चर्चा है कि इन मुलाकातों में संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की भूमिका और सरकार की कार्यशैली को और प्रभावी बनाने पर मंथन किया गया है।

    सूत्रों के अनुसार पार्टी संगठन में जल्द ही नई नियुक्तियों और जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण की संभावना है, जिसका उद्देश्य चुनावी तैयारियों को बूथ स्तर तक मजबूत करना बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि संगठन में नए और सक्रिय चेहरों को आगे लाकर चुनावी अभियान को और तेज किया जाएगा, ताकि हर क्षेत्र में पार्टी की पकड़ मजबूत हो सके।

    इसके साथ ही मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में लगातार बढ़ रही हैं। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले प्रशासनिक टीम को और अधिक प्रभावी और संतुलित बनाने के लिए कुछ नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है, जबकि कुछ मौजूदा जिम्मेदारियों में बदलाव की संभावना भी बनी हुई है। हालांकि अंतिम निर्णय राजनीतिक परिस्थितियों और शीर्ष नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगा।

    राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस तरह के बदलाव केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं होते, बल्कि इनका सीधा संबंध चुनावी समीकरणों और सामाजिक संतुलन से भी होता है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए ही संगठन और सरकार में संतुलन साधने की कोशिश की जाती है, ताकि चुनावी मैदान में मजबूत स्थिति बनाई जा सके।

    पार्टी का पूरा ध्यान इस समय अपने विकास कार्यों, नेतृत्व की छवि और संगठन की मजबूती को एक साथ जोड़कर जनता के बीच प्रस्तुत करने पर है। इसके साथ ही यह रणनीति भी देखी जा रही है कि सरकार की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने के लिए संगठन को अधिक सक्रिय भूमिका दी जाए।

    आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि ये संभावित बदलाव किस रूप में सामने आते हैं और उनका प्रभाव राज्य की राजनीति और चुनावी माहौल पर कितना पड़ता है। फिलहाल राजनीतिक गतिविधियों और बैठकों के बढ़ते दौर ने यह संकेत दे दिया है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियां अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी हैं।

  • राहुल गांधी का दो दिवसीय रायबरेली मेठी दौरा आज से, दिशा बैठक और जनता दर्शन कार्यक्रम

    राहुल गांधी का दो दिवसीय रायबरेली मेठी दौरा आज से, दिशा बैठक और जनता दर्शन कार्यक्रम


    अमेठी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज से दो दिवसीय दौरे पर रायबरेली और अमेठी पहुंच रहे हैं। इस दौरान वे कई कार्यक्रमों में भाग लेने केसाथ पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। उनके दौरे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने व्यापक तैयारियां कर ली हैं और स्थानीय स्तर पर उत्साह का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार राहुल गांधी सबसे पहले फुरसतगंज एयरपोर्ट पहुंचेंगे। यहां से वे जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा की बैठक में शामिल होंगे। इस बैठक में रायबरेली जिले में चल रहे विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की समीक्षाकी जाएगी। साथ ही अधिकारियों के साथ विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा भी की जाएगी। बैठक के बाद राहुल गांधी रायबरेली में ही रुकेंगे और शाम को भुएमऊ गेस्ट हाउसमें रात्रि प्रवास करेंगे।

    अपने दौरे के दूसरे दिन वे अमेठी पहुंचेंगे। यहां नैना रिसॉर्ट मेंकांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में आगामी चुनावों की रणनीति और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसमें पार्टी के विभिन्न फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारी, ब्लॉक और जिला स्तर के नेता तथा वरिष्ठ कार्यकर्ता शामिल होंगे।दौरे के दौरान राहुल गांधी जनता दर्शनकार्यक्रम में भी भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में वे आम लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे और उन्हें समाधान का भरोसा देंगे।

    कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप सिंघल ने बताया कि राहुल गांधी के दौरे को लेकर पार्टीकार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है और पार्टी स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राहुल गांधी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की रणनीति पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

  • उज्जैन पहुंचे यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बाबा महाकाल के दर्शन कर शयन आरती में हुए शामिल

    उज्जैन पहुंचे यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, बाबा महाकाल के दर्शन कर शयन आरती में हुए शामिल


    उज्जैन । उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य गुरुवार को मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन पहुंचे। उज्जैन पहुंचने के बाद उन्होंने सबसे पहले विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन किए। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी, बेटा और अन्य सहयोगी भी मौजूद रहे। मंदिर पहुंचने पर महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से उनका स्वागत और सम्मान किया गया।

    मंदिर परिसर में पहुंचकर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने नंदी हॉल में बैठकर कुछ समय ध्यान लगाया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन दिखाई दिए। इस दौरान मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं और पुजारियों ने भी उनका स्वागत किया। भगवान महाकाल के दर्शन के बाद उन्होंने मंदिर में आयोजित शयन आरती में भी भाग लिया और विधि विधान से पूजा अर्चना की।

    दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि बाबा महाकाल के दरबार में आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें बाबा महाकाल की संध्या और शयन आरती में शामिल होने का अवसर मिला। उन्होंने भगवान महाकाल से प्रार्थना करते हुए कहा कि वे उन्हें और देश के सभी लोगों को सेवा का अवसर देते रहें और इसी तरह अपने दरबार में बुलाते रहें।

    इस दौरान उन्होंने विकास के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। डिप्टी सीएम ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार मध्य प्रदेश के साथ साथ उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी तेजी से विकास कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। देशभर के प्रमुख तीर्थ स्थलों का तेजी से विकास किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। खासतौर पर महाकाल की भस्म आरती और शयन आरती में शामिल होना श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का यह दौरा भी धार्मिक आस्था से जुड़ा रहा, जिसमें उन्होंने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेकर प्रदेश और देश की खुशहाली की कामना की।

  • कांग्रेस छोड़ने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सपा में एंट्री तय? सियासत में हलचल तेज

    कांग्रेस छोड़ने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सपा में एंट्री तय? सियासत में हलचल तेज

    नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस से हाल ही में इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब नई राजनीतिक पारी की तैयारी में बताए जा रहे हैं। चर्चाओं के मुताबिक, वह 15 फरवरी को समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्यता ले सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका और सपा के लिए अहम सियासी संदेश माना जाएगा।

    अखिलेश यादव करा सकते हैं सदस्यता
    सूत्रों के अनुसार, सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी की सदस्यता दिला सकते हैं। बताया जा रहा है कि उनके साथ कुछ पूर्व विधायक और क्षेत्रीय नेता भी सपा में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में यह केवल एक व्यक्ति का दल बदल नहीं, बल्कि एक छोटे राजनीतिक समूह का पुनर्संयोजन भी हो सकता है।

    कांग्रेस से अलग होने के बाद सिद्दीकी के अगले कदम को लेकर अटकलें तेज थीं। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन अब सपा में संभावित एंट्री की खबरों ने यूपी की राजनीतिक फिजा बदल दी है।

    बसपा से कांग्रेस और अब सपा की ओर
    नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वे कभी बहुजन समाज पार्टी का बड़ा चेहरा रहे और पार्टी प्रमुख मायावती के करीबी सहयोगी माने जाते थे। 2017 में बसपा से निष्कासन के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा था।

    हालांकि कांग्रेस में उनकी पारी लंबी नहीं चली। 24 जनवरी को उन्होंने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। उनके इस फैसले ने कांग्रेस संगठन में भी हलचल मचा दी थी। अब सपा में संभावित शामिल होने की चर्चा ने इसे और ज्यादा सियासी रंग दे दिया है।

    इस्तीफे के पीछे क्या वजह?
    सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़ते समय संकेत दिए थे कि वह पार्टी की कार्यप्रणाली और अंदरूनी माहौल से संतुष्ट नहीं थे। चर्चा यह भी रही कि उन्हें अपेक्षित सम्मान और भूमिका नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में उनका असंतोष धीरे-धीरे सार्वजनिक फैसले में बदल गया।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम अहम साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक और पारंपरिक समीकरणों को लेकर दलों की रणनीति पहले से ही तेज है। ऐसे में सिद्दीकी जैसे अनुभवी नेता का सपा के साथ जाना विपक्षी राजनीति में नए समीकरण बना सकता है।

    बदलते सियासी समीकरण
    यूपी की राजनीति में दल-बदल नई बात नहीं है, लेकिन चुनाव से पहले बड़े चेहरों की हलचल हमेशा संकेत देती है कि जमीन पर तैयारी शुरू हो चुकी है। यदि 15 फरवरी को सिद्दीकी की सपा में औपचारिक एंट्री होती है, तो यह आने वाले महीनों में और राजनीतिक पुनर्संयोजन का रास्ता खोल सकती है।

  • यूपी पंचायत चुनाव टल सकते हैं? पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने दिया अपडेट, क्या बोले

    यूपी पंचायत चुनाव टल सकते हैं? पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने दिया अपडेट, क्या बोले


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी संशय के बाद अब कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने चुनाव टलने की सभी चर्चाओं को केवल एक भ्रम करार दिया है। राजभर ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए जमीनी स्तर पर काम चल रहा है। चुनावों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी यानी मतपत्रों की छपाई का काम पूरा हो चुका है। यही नहीं, ये मतपत्र अब विभिन्न जिलों में पहुंचाए भी जा रहे हैं।

    भारत समाचार चैनल से बातचीत में ओपी राजभर ने कहा कि मतदाता सूची का काम अपने अंतिम चरण में है और 28 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन भी कर दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार दोनों ही चुनाव को समय पर संपन्न कराने के लिए कटिबद्ध हैं। चुनाव टलने जैसी कोई संभावना अभी नहीं दिखती है।

    भ्रम के पीछे का कारण

    चुनाव टलने की खबरों पर सफाई देते हुए राजभर ने कहा कि लोग अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार राग अलाप रहे हैं। भ्रम का मुख्य कारण यह है कि वर्तमान में कर्मचारी एसआईआर  के काम में व्यस्त हैं। इसके अलावा, आगामी जनगणना और बोर्ड परीक्षाओं को लेकर भी लोग कयास लगा रहे हैं कि चुनाव टल सकते हैं। राजभर ने जोर देकर कहा कि सरकार और निर्वाचन आयोग अपना काम कर रहे हैं।

    पिछड़ा वर्ग आरक्षण और पिछड़ा आयोग का गठन
    ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर मंत्री ने जानकारी दी कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में पिछड़ा आयोग के गठन की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही इसका गठन होगा, वह पिछड़ों के आरक्षण को लेकर अपना काम शुरू कर देगा। भाजपा से गठबंधन और पिछड़ों-वंचितों को टिकट पर उन्होंने अपनी चिरपरिचित शैली में कहा, जिसकी जितनी हिस्सेदारी है, उसको उतना हिस्सा दिया जाएगा।

    कब होगी तारीखों की घोषणा?

    चुनाव की सटीक तारीख के सवाल पर पंचायती राज मंत्री ने कहा कि यह निर्णय निर्वाचन आयोग और सरकार के बीच संयुक्त बैठक के बाद लिया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि सही समय आने पर तारीखों का ऐलान हो जाएगा। लेकिन फिलहाल सभी का ध्यान तैयारियों को अंतिम रूप देने पर है। मंत्री के इस बयान के बाद उन भावी प्रत्याशियों ने राहत की सांस ली है जो पिछले काफी समय से गांवों में चुनाव प्रचार और जनसंपर्क में जुटे हुए हैं।

  • UP SIR के इन आंकड़ों ने बढ़ाई अखिलेश यादव की टेंशन! इस वजह से अब कर रहे फॉर्म 7 का जिक्र

    UP SIR के इन आंकड़ों ने बढ़ाई अखिलेश यादव की टेंशन! इस वजह से अब कर रहे फॉर्म 7 का जिक्र


    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के प्रमुख और कन्नौज के सांसद अखिलेश यादव ने चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR के दौरान फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया है. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि उन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे गैर-कानूनी तरीके से वोटरों के नाम हटाने के लिए आवेदन कर रहे हैं.

    1 फरवरी और 2 फरवरी को जारी बयानों में कन्नौज सांसद ने आरोप लगाया कि PDA और अल्पसंख्यक वोटरों के नाम हटाने के लिए नकली दस्तखत के साथ फॉर्म-7 के आवेदन जमा किए जा रहे हैं. उन्होंने इस मुद्दे को एक बड़ा धोखा बताया, न्यायिक संज्ञान लेने की मांग की और वोटर्स से मतदाता लिस्ट में अपने नाम वेरिफाई करने को कहा. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों से भी संदिग्ध मामलों में कानूनी कार्रवाई करने की अपील की.अखिलेश ने कहा कि नामों को गलत तरीके से हटाने में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए. लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी को इस मुद्दे पर मिला अखिलेश यादव का साथ, जमकर हुआ हंगामा

    किस ओर इशारा कर रहे यूपी एसआईआर के आंकड़े?

    इन आरोपों के बीच, 6 जनवरी से 31 जनवरी 2026 के बीच फॉर्म-7 जमा करने का दिन-वार डेटा दिखाता है कि पूरे महीने में नाम हटाने और आपत्ति के आवेदनों में कैसे बढ़ोतरी हुई. 6, 7, और 8 जनवरी को कोई फॉर्म दर्ज नहीं किया गया. 9 जनवरी को 175 आवेदनों के साथ शुरू हुई, जबकि 10 जनवरी को कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं हुई. 11 जनवरी को 2,236 नए आवेदनों के साथ इसमें अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसके बाद 12 जनवरी (677), 13 जनवरी (734), 14 जनवरी (736), 15 जनवरी (889), और 16 जनवरी (906) फॉर्म जमा हुए.

    महीने के दूसरे आधे हिस्से में यह गति और तेज हो गई. 17 जनवरी को 1,970 नए आवेदन दाखिल किए गए, इसके बाद 18 जनवरी को 3,865 आवेदन आए. 19 जनवरी से रोज़ाना के आंकड़े ज़्यादा रहे: 19 जनवरी (2,674), 20 जनवरी (2,670), 21 जनवरी (2,848), 22 जनवरी (2,787), 23 जनवरी (2,318), 24 जनवरी (2,861), 25 जनवरी (2,797), और 26 जनवरी (2,947). आखिरी दिनों में और बढ़ोतरी देखी गई-27 जनवरी (3,317), 28 जनवरी (3,424), 29 जनवरी (3,551), 30 जनवरी (4,288), और 31 जनवरी (8,503), जो एक दिन में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी थी. 31 जनवरी तक कुल मिलाकर 57,173 फॉर्म-7 एप्लीकेशन जमा हो चुके थे.

    क्या है फॉर्म 7?

    फॉर्म 7 भारत के चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराया गया आवेदन पत्र है जिसका इस्तेमाल वोटर लिस्ट से किसी का नाम हटाने या वोटर लिस्ट में किसी का नाम शामिल करने पर आपत्ति जताने के लिए किया जाता है. इसे तब भरा जाता है जब अमुक लगता है कि किसी मतदाता का नाम लिस्ट में नहीं होना चाहिए. ऐसा तब हो सकता है जब मतदाता की मौत हो गई हो, वह हमेशा के लिए दूसरी जगह चला गया हो, उसका नाम दो बार दर्ज हो, या वह किसी और वजह से बतौर मतदाता पंजीकृत होने के योग्य न हो. कोई मतदाता, सूची से अपना नाम हटवाने के लिए भी फॉर्म 7 का इस्तेमाल कर सकता है.

  • यूपी में मायावती-अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ाएंगे रामदास आठवले? इस दावे से तेज हुई सियासी हलचल UP Politics: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने यूपी में एंट्री की तैयारी कर ली है. सोमवार को उन्होंने यूपी पार्टी कार्यकर्ताओं

    यूपी में मायावती-अखिलेश यादव की मुश्किलें बढ़ाएंगे रामदास आठवले? इस दावे से तेज हुई सियासी हलचल UP Politics: केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने यूपी में एंट्री की तैयारी कर ली है. सोमवार को उन्होंने यूपी पार्टी कार्यकर्ताओं


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार में एनडीए की सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी उत्तर प्रदेश में एंट्री करने की तैयारी कर रही हैं. जिससे आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने दावा किया कि वो यूपी में डीपीए यानी दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक के साथ मिलकर बदलाव लाएंगे. रामदास आठवले ने दावा किया कि यूपी के 75 जिलों में से 62 जिलों में रिपब्लिकन पार्टी की कार्यकारिणी बन चुकी है. पार्टी अगले साल 5 अप्रैल 2026 को लखनऊ में एक बड़ी रैली करेगी, जिसमें 1 लाख से लोगों के शामिल होने का अनुमान है. उन्होंने कहा कि अब बसपा की जगह रिपब्लिकन पार्टी ने ली है. दलितों और गरीब को न्याय दिलाने वाली पार्टी रिपब्लिकन पार्टी रहेगी.

    यूपी में सपा-बसपा की मुश्किल बढ़ाएंगे आठवले
    आठवले ने बसपा प्रमुख मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके सत्ता में इतने लंबे समय तक रहने के बावजूद दलितों, शोषितों, वंचितों, गरीबों और महिलाओं के लिए शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में कोई खास सुधार नहीं हुआ. अखिलेश यादव द्वारा दिया गया पीडीए पिछड़ा वर्ग, दलित, अल्पसंख्यक का नारा सिर्फ एक चुनावी वादा बनकर रह गया है.

    पीडीए के जवाब में यूपी डीपीए की लड़ाई!

    आरपीआई आठवले अब डीपीए दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक की अवधारणा को जमीन पर मजबूती से लागू करेगी और असली बदलाव लाएगी. आठवले ने सोमवार को इस संबंध में उत्तर प्रदेश कार्यकारी समिति की समीक्षा बैठक की. इस बैठक में प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, दलित, शोषित और वंचित समुदायों की समस्याओं एवं पार्टी के संगठन के विस्तार पर विस्तार से चर्चा हुई. आठवले ने कहा कि आरपीआई इन मुद्दों पर सिर्फ नारे नहीं लगाती बल्कि जमीन पर प्रभावी ढंग से काम कर रही है. अखिलेश यादव द्वारा दिया गया पीडीए का नारा केवल चुनावी घोषणा बनकर रह गया. पार्टी अब डीपीए की अवधारणा को लेकर जमीन पर मजबूती से उतरेगी और वास्तविक बदलाव लाएगी.