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  • यूपी के 586 पीएम श्री स्कूलों में लर्निंग बाय डूइंग को मिलेगी नई गति, 2.34 करोड़ रुपये से खरीदी जाएगी सामग्री

    यूपी के 586 पीएम श्री स्कूलों में लर्निंग बाय डूइंग को मिलेगी नई गति, 2.34 करोड़ रुपये से खरीदी जाएगी सामग्री

    लखनऊ, 1 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के वर्ष 2024-25 के लिए चयनित 586 उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट पीएम श्री विद्यालयों में पढ़ाई को किताबों की सीमाओं से आगे ले जाकर प्रयोग, गतिविधि और अनुभव से जोड़ने की दिशा में कदम उठाया गया है। इन विद्यालयों में लर्निंग बाय डूइंग को और प्रभावी बनाया जाएगा। इसके लिए 2.34 करोड़ रुपये की धनराशि से कंज्यूमेबल्स और रॉ मैटेरियल खरीदा जाएगा। प्रत्येक चयनित विद्यालय के लिए 40 हजार रुपये की धनराशि की सीमा निर्धारित की गई है। इससे गतिविधि आधारित शिक्षण के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध होंगे और बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ प्रयोग तथा प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सीखने के अधिक अवसर मिलेंगे।

    लर्निंग बाय डूइंग के तहत विद्यार्थियों को विषयवस्तु को केवल पढ़ने के बजाय गतिविधियों, प्रयोगों और प्रत्यक्ष अनुभवों के जरिए समझने का अवसर मिलेगा। विद्यालयों को उपलब्ध कराई जाने वाली कंज्यूमेबल्स और रॉ मैटेरियल सामग्री का इस्तेमाल गतिविधि आधारित शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए किया जाएगा। इसके माध्यम से बच्चे सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बन सकेंगे। कक्षा में विषयों को देखकर, प्रयोग करके और गतिविधियों में शामिल होकर समझने से पुस्तकीय ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने में मदद मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य सीखने की प्रक्रिया को अधिक सक्रिय, अनुभवपूर्ण, सहज और रोचक बनाना है।

    बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि लर्निंग बाय डूइंग के माध्यम से बच्चों को प्रयोग और अनुभव से सीखने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि प्रयास यह है कि सीखने की प्रक्रिया रोचक, सहभागितापूर्ण और बच्चों की जिज्ञासा के अनुरूप बने। इस व्यवस्था के तहत विद्यालयों में उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री का उपयोग निर्धारित गतिविधियों के संचालन के लिए किया जाएगा, ताकि विद्यार्थी विषयवस्तु को केवल पढ़ने तक सीमित न रहें और गतिविधियों तथा प्रयोगों के माध्यम से उसे समझने का अवसर प्राप्त कर सकें।

    महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी के निर्देशानुसार चयनित 586 विद्यालयों में लर्निंग बाय डूइंग के लिए आवश्यक कंज्यूमेबल्स और रॉ मैटेरियल की खरीद की जाएगी। इसके लिए कुल 2,34,40,000 रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक चयनित विद्यालय के लिए 40 हजार रुपये की सीमा के तहत गतिविधियों के संचालन के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इस सामग्री के माध्यम से विद्यालयों में गतिविधि आधारित शिक्षण को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर जोर रहेगा।

    विद्यालयों को उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री का उचित और उद्देश्यपरक उपयोग सुनिश्चित करने के साथ गतिविधियों के संचालन और उनके अभिलेखीकरण का अनुश्रवण भी किया जाएगा। पूर्व में संचालित लर्निंग बाय डूइंग गतिविधियों के अनुभवों को आगे की गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। इस पहल के तहत विद्यार्थियों को विषयवस्तु को देखकर, प्रयोग करके और गतिविधियों में भाग लेकर समझने के अवसर मिलेंगे। इससे कक्षा-कक्ष में सीखने की प्रक्रिया को अनुभव से जोड़ने और बच्चों की सहभागिता बढ़ाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का उद्देश्यपरक इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

  • विधान परिषद चुनाव 2026: बीजेपी ने बिहार और यूपी की 10 सीटों पर घोषित किए उम्मीदवार, दरभंगा से सर्वेश कुमार और आगरा से हरि किशोर तिवारी को टिकट

    विधान परिषद चुनाव 2026: बीजेपी ने बिहार और यूपी की 10 सीटों पर घोषित किए उम्मीदवार, दरभंगा से सर्वेश कुमार और आगरा से हरि किशोर तिवारी को टिकट


    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने बिहार और उत्तर प्रदेश में होने वाले विधान परिषद चुनाव 2026 के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने दोनों राज्यों की कुल 10 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है। इनमें बिहार की चार और उत्तर प्रदेश की छह सीटें शामिल हैं। बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के नामों को स्वीकृति प्रदान की है। घोषित सूची में दरभंगा स्नातक सीट से सर्वेश कुमार, आगरा शिक्षक सीट से इंजीनियर हरि किशोर तिवारी, पटना शिक्षक सीट से नवल किशोर यादव और वाराणसी स्नातक सीट से केदार नाथ सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी ने अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के लिए स्नातक और शिक्षक वर्ग से जुड़े प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा है।

    बिहार में विधान परिषद की चार सीटों पर चुनाव होना है। बीजेपी ने कोशी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. एन.के. यादव को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। दरभंगा स्नातक सीट से सर्वेश कुमार को टिकट दिया गया है। वहीं, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नवल किशोर यादव और तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से नरेंद्र प्रसाद सिंह को प्रत्याशी बनाया गया है। इस तरह बिहार की चारों सीटों के लिए पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। सूची में दो स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इन सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए बीजेपी ने अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया है।

    उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की छह सीटों के लिए बीजेपी ने उम्मीदवार घोषित किए हैं। पार्टी ने वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. प्रमोद मिश्रा को टिकट दिया है, जबकि आगरा शिक्षक सीट से इंजीनियर हरि किशोर तिवारी चुनाव लड़ेंगे। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से ध्रुव त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया गया है। इसके अलावा वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से केदार नाथ सिंह, मेरठ स्नातक सीट से दिनेश गोयल और इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अशोक कुमार राठौर को उम्मीदवार घोषित किया गया है। उत्तर प्रदेश की छह सीटों में तीन शिक्षक और तीन स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। बीजेपी ने सभी सीटों के लिए प्रत्याशियों के नामों को अंतिम रूप देते हुए सूची जारी कर दी है।

    बिहार और उत्तर प्रदेश में होने वाले इन चुनावों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं। विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही दोनों राज्यों में इन सीटों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में राज्य में हो रहे विधान परिषद चुनाव को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी ने अपनी सूची में दोनों राज्यों की सभी 10 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। बिहार में कोशी, दरभंगा, पटना और तिरहुत निर्वाचन क्षेत्रों से उम्मीदवार उतारे गए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में वाराणसी, आगरा, गोरखपुर-फैजाबाद, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी के स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा की गई है।

  • यूपी में सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे पर पेच, दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर नहीं बन रही सहमति

    यूपी में सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे पर पेच, दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर नहीं बन रही सहमति


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत तेज हो गई है, लेकिन दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर अभी सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस 100 से ज्यादा सीटों पर दावा कर रही है, जबकि सपा का जोर सीटों की संख्या के बजाय उम्मीदवार की मजबूती और संबंधित सीट पर जीत की संभावनाओं पर है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक सपा करीब 60 से 70 सीटों के विकल्प पर विचार कर रही है, जबकि कांग्रेस करीब 105 सीटों की मांग कर रही है।

    2017 के फॉर्मूले को आधार बना रही कांग्रेस

    कांग्रेस की दलील है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन के तहत उसने 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसी आधार पर पार्टी इस बार भी 100 से अधिक सीटों की हिस्सेदारी चाह रही है। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी जुलाई में गठबंधन में ‘बराबरी और सम्मान’ की बात कही थी।

    हालांकि, 2017 के मुकाबले मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। 2022 में सपा ने 111 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ दो सीटों पर सिमट गई थी। यही वजह है कि सीटों के बंटवारे में पिछली बार के आंकड़े के बजाय मौजूदा संगठन और उम्मीदवारों की स्थिति को भी महत्व दिया जा रहा है।

    सपा का फोकस ‘कितनी सीटें’ नहीं, ‘कौन जीत सकता है’

    अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि गठबंधन में मुद्दा सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जीतने की क्षमता है। सपा के भीतर सीटवार राजनीतिक स्थिति और संभावित उम्मीदवारों के आधार पर हिस्सेदारी तय करने की बात कही जा रही है।

    ताजा रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस से उन सीटों पर संभावित उम्मीदवारों की जानकारी भी मांगी जा रही है, जिन पर वह दावा कर रही है। इसके बाद स्थानीय राजनीतिक समीकरण, संगठन की स्थिति और उम्मीदवार की जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर सीटों पर फैसला किए जाने की बात सामने आई है।

    रायबरेली-अमेठी समेत कई सीटों पर खींचतान

    सीटों की कुल संख्या के अलावा कुछ खास विधानसभा क्षेत्रों को लेकर भी दोनों दलों के बीच मतभेद की खबरें हैं। रिपोर्टों में रायबरेली और अमेठी का नाम प्रमुखता से सामने आया है। अंतिम फॉर्मूला तय होने से पहले सीटवार दावों पर बातचीत जारी है।

    कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की छह सीटें जीती थीं, जबकि सपा ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी। दोनों दलों ने मिलकर राज्य की 80 लोकसभा सीटों में 43 सीटें जीती थीं।

    2022 में अलग-अलग लड़े थे दोनों दल

    2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे थे। सपा ने 111 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें मिली थीं। सपा के साथ तब राष्ट्रीय लोक दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी जैसे दल भी गठबंधन में थे। बाद में दोनों दल सपा से अलग हो गए।

    अब 2027 के चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस फिर साथ आने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में दोनों दलों के सामने सीटों की संख्या के साथ-साथ यह सवाल भी है कि किन क्षेत्रों में किस पार्टी का संगठन और उम्मीदवार गठबंधन के लिए ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

    राजभर-निषाद को लेकर भी सपा ने रुख स्पष्ट किया

    इसी बीच सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद को लेकर भी राजनीतिक अटकलें चलती रही हैं। दोनों नेता उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री हैं और उनके दल एनडीए का हिस्सा हैं।

    आपकी मूल कॉपी में सपा के एक रणनीतिकार के हवाले से दावा किया गया है कि पार्टी ने पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सुभासपा या निषाद पार्टी से गठजोड़ का प्रस्ताव लाने पर संगठनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती, इसलिए इसे सपा सूत्र/रणनीतिकार के दावे के रूप में ही प्रकाशित करना सुरक्षित होगा।

    फिलहाल सपा-कांग्रेस के बीच बातचीत का अंतिम नतीजा सामने नहीं आया है। सीटों की संख्या के साथ-साथ विधानसभा क्षेत्रवार दावों और संभावित उम्मीदवारों पर सहमति बनने के बाद ही गठबंधन का वास्तविक फॉर्मूला स्पष्ट होगा।

  • कासगंज के विशाल मेगा मार्ट में भीषण आग, 9 दमकल गाड़ियां जुटीं, आसपास के घर खाली कराए, बाजार बंद

    कासगंज के विशाल मेगा मार्ट में भीषण आग, 9 दमकल गाड़ियां जुटीं, आसपास के घर खाली कराए, बाजार बंद


    कासगंज।
    शहर के विशाल मेगा मार्ट में बुधवार दोपहर करीब 1 बजे अचानक आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। जिलाधिकारी प्रणय सिंह और पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह ने घटनास्थल का जायजा लिया, जबकि आग पर काबू पाने के लिए कासगंज के अलावा एटा और हाथरस से दमकल की गाड़ियां बुलाई गईं।

    आग बुझाने के लिए कुल नौ दमकल गाड़ियां लगातार पानी की बौछार कर रही हैं। घटना को करीब दो घंटे बीत चुके हैं, लेकिन दमकलकर्मियों की कोशिशें अब भी जारी हैं। फिलहाल उनका पूरा ध्यान आग को विशाल मेगा मार्ट के भीतर सीमित रखने और उसे पूरी तरह बुझाने पर है।

    पीछे के घरों से लोगों को सुरक्षित निकाला
    प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल आग विशाल मेगा मार्ट के अंदर ही लगी हुई है। आग आसपास के घरों तक न पहुंचे, इसके लिए पुलिस ने एहतियाती कदम उठाते हुए मार्ट के पीछे स्थित घरों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है।

    सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए आसपास का बाजार भी बंद करा दिया गया है। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं और स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं। राहत की बात यह है कि अभी तक आग की इस घटना में किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    DM बोले- लगातार जारी है आग बुझाने का काम
    जिलाधिकारी प्रणय सिंह ने मौके पर पहुंचकर आग की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और दमकल की टीमें मौके पर काम कर रही हैं।

    उन्होंने कहा कि आग किस वजह से लगी, इसकी जांच कराई जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता आग को पूरी तरह बुझाने और आसपास के इलाके में किसी तरह की जनहानि रोकने की है।

  • यूपी में पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ेगा, ₹6 हजार से बढ़ाकर ₹9 हजार करने का ऐलान

    यूपी में पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ेगा, ₹6 हजार से बढ़ाकर ₹9 हजार करने का ऐलान

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत सहायकों के मानदेय को लेकर सरकार ने बड़ा ऐलान किया है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि पंचायत सहायकों को अब ₹6 हजार के बजाय ₹9 हजार मासिक मानदेय दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मानदेय की राशि अब सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।

    मंत्री राजभर ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने उसी सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मुद्दे पर चर्चा की है। उन्होंने धरने पर बैठे पंचायत सहायकों की मांगों को जायज बताते हुए उनके पक्ष में कई घोषणाएं कीं।

    डीएम की कमेटी की जांच के बाद ही हटाया जा सकेगा
    ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अब पंचायत सहायकों को ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव अपनी मर्जी से नहीं हटा सकेंगे। किसी पंचायत सहायक को हटाने के लिए डीएम के नेतृत्व में गठित कमेटी की जांच जरूरी होगी। जांच के बाद ही इस संबंध में कार्रवाई की जा सकेगी।

    मंत्री के मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य पंचायत सहायकों की नौकरी से जुड़े फैसलों में मनमानी पर रोक लगाना है। मानदेय सीधे खाते में पहुंचने से भुगतान की प्रक्रिया में भी बदलाव आएगा।

    संजय निषाद के बयान पर बोले राजभर- चुनाव से पहले सभी अपना दांव आजमा रहे
    कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के बयान पर भी ओम प्रकाश राजभर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संजय निषाद जितनी सीटें हारेंगे, उतनी सीटें राजभर एनडीए को जिताएगा। राजभर ने कहा कि चुनाव नजदीक आने के साथ हर नेता अपने-अपने राजनीतिक दांव आजमा रहा है।

    दरअसल, संजय निषाद ने दावा किया था कि निषाद पार्टी की वजह से भाजपा कई सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही थी। इसी बयान को लेकर राजभर से सवाल किया गया था।

    गोंडा हत्याकांड और सपा पर भी साधा निशाना
    अखिलेश यादव के सरकार से बाहर निकलने को लेकर दिए गए तंज के संदर्भ में राजभर ने गोंडा के व्यापारी हत्याकांड का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार ने कानूनी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया और सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।

    राजभर ने आरोप लगाया कि 80% घटनाएं सपा से जुड़े लोगों द्वारा की जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीडीए की बैठकों में दलितों को बैठने तक की जगह नहीं मिलती।

    बोले- 2027 में जनता देगी जवाब
    सपा सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जनता उसके कार्यकाल के कारनामों को अभी भूली नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के चुनाव में जनता इसका जवाब देगी।

    राजभर ने कहा कि सिर्फ बयानबाजी के आधार पर सरकार नहीं बनाई जा सकती। चुनावी राजनीति में नेताओं के दावों और बयानों के बीच उन्होंने अपने सहयोगी दल के नेताओं की टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी।

  • 11 हजार की नौकरी, 5 मकान और SUV का मालिक! PNB के 17.29 करोड़ के जाली नोट कांड में संविदा कर्मचारी पर शक

    11 हजार की नौकरी, 5 मकान और SUV का मालिक! PNB के 17.29 करोड़ के जाली नोट कांड में संविदा कर्मचारी पर शक

    सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट से मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए सवाल सामने आ रहे हैं। अब बैंक का एक संविदा कर्मचारी जांच एजेंसियों के रडार पर है। महज 11 हजार रुपये मासिक वेतन पर ड्राइवर-लोडर के तौर पर काम करने वाले इस कर्मचारी की संपत्तियों ने जांच अधिकारियों का ध्यान खींचा है।

    जांच में सामने आया है कि कर्मचारी के पास पांच मकान, SUV और अपना ड्राइवर तक है। इसी वजह से उसकी आय और संपत्ति के बीच के अंतर को लेकर एजेंसियां पड़ताल कर रही हैं। इस मामले में करेंसी चेस्ट के निलंबित मैनेजर अमित कुमार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) चंडीगढ़ से गिरफ्तार कर चुकी है।

    मैनेजर का PA बनकर करता था काम?

    सहारनपुर पुलिस और NIA की संयुक्त जांच में पता चला है कि संविदा कर्मचारी का आधिकारिक काम कैश वैन चलाने तथा कैश की लोडिंग-अनलोडिंग तक सीमित था। हालांकि, जांच एजेंसियों के मुताबिक वह करेंसी चेस्ट के भीतर मैनेजर अमित कुमार के पर्सनल असिस्टेंट (PA) की तरह काम करता था।

    बताया जा रहा है कि उसे मुख्य चेस्ट एरिया में बेरोकटोक आने-जाने की सुविधा हासिल थी। यही वजह है कि एजेंसियां अब उसकी भूमिका की बारीकी से जांच कर रही हैं।

    असली नोटों की जगह जाली करेंसी रखने का शक

    जांच का एक प्रमुख बिंदु यह है कि क्या करेंसी चेस्ट में रखे असली नोटों के बंडलों से रकम निकालकर उनकी जगह जाली नोट रखे गए थे। एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि यदि असली रकम चेस्ट से बाहर निकाली गई तो उसे ठिकाने लगाने में संविदा कर्मचारी की कोई भूमिका थी या नहीं।

    फिलहाल जांच एजेंसियां उसके खिलाफ मिले संपत्ति संबंधी इनपुट और करेंसी चेस्ट में उसकी पहुंच के बीच संबंध तलाश रही हैं।

    जाली नोटों का नेटवर्क कितना बड़ा?

    NIA अब इस सवाल का भी जवाब तलाश रही है कि करेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी मात्रा में 500 रुपये के उच्च गुणवत्ता वाले जाली नोट आखिर कहां से पहुंचे। जांच एजेंसी इस संभावना को भी देख रही है कि कहीं इस पूरे मामले के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट या विदेशी नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

    नेपाल सीमा से जुड़े किसी नेटवर्क की संभावित भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है। हालांकि, इस दिशा में जांच अभी जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना बाकी है।

    बैंक शाखाओं और ATM तक तो नहीं पहुंचे नकली नोट?

    NIA और SIT के साथ RBI की संयुक्त ऑडिट टीम भी करेंसी चेस्ट से जुड़े रिकॉर्ड और नकदी के प्रवाह की जांच कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बरामद जाली नोटों में से कोई हिस्सा पहले ही बैंक की दूसरी शाखाओं, ATM या बाजार में तो नहीं पहुंच गया।

    17.29 करोड़ रुपये की जाली करेंसी की बरामदगी के बाद अब जांच का फोकस सिर्फ करेंसी चेस्ट तक सीमित नहीं है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं और असली रकम तथा जाली नोटों की अदला-बदली किस तरीके से की गई।

  • UP के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में 7 हजार रुपए तक बढ़ोतरी, बीमा कवर भी

    UP के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में 7 हजार रुपए तक बढ़ोतरी, बीमा कवर भी

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने उनकी सैलरी में 7 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकोस) की वेबसाइट और लोगो लॉन्च किया। इस दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों को चेक भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।

    सरकार के मुताबिक, आउटसोर्स कर्मचारियों को 50 लाख रुपए तक का बीमा कवर दिया जाएगा। इसके अलावा आकस्मिक दवा के लिए 5 लाख रुपए और एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान किया गया है।

    एक ही पोर्टल पर होगा सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का रिकॉर्ड
    यूपीकोस के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। अभी कर्मचारियों से संबंधित जानकारी अलग-अलग विभागों और आउटसोर्स एजेंसियों के स्तर पर रखी जाती है। नई व्यवस्था में इन सभी रिकॉर्ड को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध हो सकेगी।

    भर्ती से लेकर भुगतान तक की जानकारी पोर्टल पर दर्ज होगी
    यूपीकोस के पोर्टल पर कर्मचारी की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति और भुगतान से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किस विभाग में कितने आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं और उन्हें कितना भुगतान किया जा रहा है। कर्मचारियों की सेवा से संबंधित रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। जरूरत पड़ने पर किसी कर्मचारी की तैनाती, भुगतान या सेवा रिकॉर्ड की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म से देखी जा सकेगी।

    एजेंसियों की प्रक्रिया पर भी होगी निगरानी
    नई व्यवस्था लागू होने के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती और भुगतान की प्रक्रिया पर निगरानी आसान होने की उम्मीद है। अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से होने वाली प्रक्रिया में रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़ी गड़बड़ियों की गुंजाइश कम करने में भी मदद मिलेगी। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे हैं। नई व्यवस्था का सीधा असर इन कर्मचारियों की भर्ती, सेवा शर्तों और भुगतान व्यवस्था से जुड़े प्रबंधन पर पड़ेगा।

  • UP : ₹17 करोड़ की जाली करेंसी का खुला राज, PNB के करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोट, 3 अधिकारी सस्पेंड

    UP : ₹17 करोड़ की जाली करेंसी का खुला राज, PNB के करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोट, 3 अधिकारी सस्पेंड

    सहारनपुर। सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये मूल्य के जाली नोट मिलने से हड़कंप मच गया है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी का खुलासा महज 4.30 लाख रुपये की कमी से हुआ। आरबीआई के जयपुर कार्यालय भेजी गई रकम की जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद बैंक की टीम ने करेंसी चेस्ट की जांच शुरू की, जिसमें एक-एक नोट की पड़ताल के दौरान नकली नोटों का बड़ा जखीरा सामने आया।

    11.50 करोड़ रुपये भेजे गए थे जयपुर

    सहारनपुर में पीएनबी की करीब 72 शाखाएं हैं और दो करेंसी चेस्ट संचालित होते हैं। इनमें एक घंटाघर के पास सोफिया मार्केट और दूसरा गंगोह में है। 5 अगस्त से सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट से 11.50 करोड़ रुपये आरबीआई के जयपुर कार्यालय भेजे गए थे। इसमें सड़े-गले और कटे-फटे नोट भी शामिल थे।

    जयपुर में जमा रकम की जांच के दौरान अधिकारियों को 4,30,900 रुपये की कमी मिली। इसकी जानकारी मेरठ कार्यालय को दी गई। इसके बाद बैंक मुख्यालय से टीम सहारनपुर पहुंची और करेंसी चेस्ट में रखी रकम की जांच शुरू की गई।

    पहले मिले ₹7.40 करोड़ के नकली नोट

    जांच टीम ने करेंसी चेस्ट में रखे नोटों की बारीकी से जांच शुरू की। शुरुआती पड़ताल में करीब 7.40 करोड़ रुपये मूल्य के जाली नोट मिलने की जानकारी सामने आई। जांच आगे बढ़ी तो नकली नोटों की संख्या और रकम भी बढ़ती गई।

    बैंक की टीम के मुताबिक, सोमवार देर रात तक करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने का दावा किया गया है। जांच अभी जारी है, इसलिए रकम और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    4-5 दिन से चल रही नोटों की जांच

    करेंसी चेस्ट में रखे नोटों की जांच पिछले चार-पांच दिनों से चल रही है। मेरठ और दिल्ली स्थित बैंक मुख्यालय से पहुंची टीमें एक-एक नोट की पड़ताल कर रही हैं। इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी मिलने के बाद बैंक के स्थानीय अधिकारियों से लेकर मुख्यालय तक हड़कंप मचा हुआ है।

    करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे नकली नोट?

    इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नकली करेंसी बैंक के करेंसी चेस्ट तक पहुंची कैसे। बैंक में रकम जमा होने से पहले नोटों की जांच की जाती है। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि असली नोटों के बंडलों में नकली नोट किस स्तर पर शामिल हुए और वे करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे।

    बड़े नेटवर्क की आशंका भी

    करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के बाद किसी बड़े नेटवर्क की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली नोट कहां तैयार किए गए, इनमें किस तरह के कागज और स्याही का इस्तेमाल हुआ और इन्हें असली नोटों के बीच किस स्तर पर मिलाया गया।

    तीन अधिकारी निलंबित, हाउसकीपर हटाया

    पीएनबी की मुख्य बैंक प्रबंधक निशा सिंह के मुताबिक, करेंसी चेस्ट में जाली नोट मिलने के बाद मुख्यालय से टीम भेजी गई है और जांच जारी है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि पार्ट टाइम हाउसकीपर को हटा दिया गया है।

    जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे और इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है।

  • UP: हरिद्वार तक पहुंचेगा गंगा एक्सप्रेसवे, बिजनौर से होकर बनेगा करीब 30 किमी नया लिंक

    UP: हरिद्वार तक पहुंचेगा गंगा एक्सप्रेसवे, बिजनौर से होकर बनेगा करीब 30 किमी नया लिंक

    मेरठ। गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार से जोड़ने की परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के बीच इस परियोजना को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) हो चुका है। समझौते में दोनों राज्यों की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे बिजनौर के रास्ते हरिद्वार तक पहुंचेगा और इसकी लंबाई करीब 30 किलोमीटर होगी।

    गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पास रहेगी। दोनों राज्यों के बीच इस परियोजना को लेकर पिछले महीने सहमति बनी थी।

    उत्तराखंड पर नहीं आएगा निर्माण का खर्च
    एमओयू के अनुसार हरिद्वार तक एक्सप्रेसवे के निर्माण में होने वाला वित्तीय खर्च उत्तराखंड सरकार को नहीं उठाना होगा। हालांकि, उत्तराखंड की ओर से भूमि अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग में सहयोग किया जाएगा। शासन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार परियोजना से संबंधित दोनों एमओयू पिछले महीने ही अंतिम रूप ले चुके थे। समझौते को कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है।

    बिजनौर के रास्ते हरिद्वार तक करीब 30 किमी का लिंक
    हरिद्वार को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए तैयार किए जा रहे प्रस्तावित मार्ग का एक हिस्सा बिजनौर से होकर गुजरेगा। करीब 30 किलोमीटर के इस लिंक से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सड़क संपर्क पहले से बेहतर होने की उम्मीद है। परियोजना को लेकर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच कई चरणों में बैठकें हो चुकी हैं। अब निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को तेजी मिलने की संभावना है।

    धार्मिक पर्यटन से लेकर कारोबार तक को फायदा
    गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। देश के अलग-अलग हिस्सों से हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवागमन आसान होगा।

    इसके अलावा बेहतर कनेक्टिविटी का असर औद्योगिक निवेश और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। परियोजना के जरिए क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच लोगों और सामान की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी।

  • घुमंतू समाज के विकास के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, CM बोले- अब नहीं खानी पड़ेगी दर-दर की ठोकरें

    घुमंतू समाज के विकास के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, CM बोले- अब नहीं खानी पड़ेगी दर-दर की ठोकरें

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घुमंतू और विमुक्त समुदायों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब उन्हें दर-दर भटकने और उपेक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने घुमंतू विकास बोर्ड का गठन कर इन समुदायों को सम्मानजनक जीवन, सरकारी योजनाओं का लाभ और विकास के समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम उठाया है।

    गुरुवार को बोर्ड के गठन के बाद आयोजित आभार एवं अभिनंदन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बोर्ड केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि वर्षों से उपेक्षित घुमंतू और विमुक्त समाज को न्याय, सम्मान और मुख्यधारा से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए सरकार बिना किसी भेदभाव के समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर पात्र व्यक्ति को सभी जनकल्याणकारी योजनाओं से शत-प्रतिशत जोड़ना है।

    योगी आदित्यनाथ ने बताया कि डबल इंजन सरकार ने वनटांगिया, मुसहर, थारू, गौड़, चेरो, बुक्सा, कोल और सहरिया जैसे वंचित समुदायों को राशन कार्ड, भूमि के पट्टे, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास, आयुष्मान भारत कार्ड, निःशुल्क बिजली व गैस कनेक्शन तथा विभिन्न पेंशन योजनाओं से जोड़ा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए जनता केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि ‘जनार्दन’ है। इसी सोच के साथ अनुसूचित जाति-जनजाति के बच्चों के लिए आश्रम पद्धति विद्यालय और श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जहां शिक्षा, आवास और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था उपलब्ध है।

    उन्होंने कहा कि अब किसी भी घुमंतू या विमुक्त समुदाय को ‘क्रिमिनल ट्राइब’ कहकर नहीं पुकारा जा सकता। ये वे समुदाय हैं जिन्होंने देश की आजादी के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अब उन्हें उनका उचित सम्मान दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। घुमंतू विकास बोर्ड इन समुदायों की पहचान कर उन्हें शासन की सभी योजनाओं से जोड़ने का कार्य करेगा।

    मुख्यमंत्री ने सपेरा समाज का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह समुदाय गुरु गोरखनाथ की परंपरा का अनुयायी रहा है और प्राचीन काल में समाज को जागरूक करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार घुमंतू समुदायों के सम्मानजनक पुनर्वास और समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।