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  • UP के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में 7 हजार रुपए तक बढ़ोतरी, बीमा कवर भी

    UP के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में 7 हजार रुपए तक बढ़ोतरी, बीमा कवर भी

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने उनकी सैलरी में 7 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकोस) की वेबसाइट और लोगो लॉन्च किया। इस दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों को चेक भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।

    सरकार के मुताबिक, आउटसोर्स कर्मचारियों को 50 लाख रुपए तक का बीमा कवर दिया जाएगा। इसके अलावा आकस्मिक दवा के लिए 5 लाख रुपए और एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान किया गया है।

    एक ही पोर्टल पर होगा सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का रिकॉर्ड
    यूपीकोस के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। अभी कर्मचारियों से संबंधित जानकारी अलग-अलग विभागों और आउटसोर्स एजेंसियों के स्तर पर रखी जाती है। नई व्यवस्था में इन सभी रिकॉर्ड को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध हो सकेगी।

    भर्ती से लेकर भुगतान तक की जानकारी पोर्टल पर दर्ज होगी
    यूपीकोस के पोर्टल पर कर्मचारी की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति और भुगतान से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किस विभाग में कितने आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं और उन्हें कितना भुगतान किया जा रहा है। कर्मचारियों की सेवा से संबंधित रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। जरूरत पड़ने पर किसी कर्मचारी की तैनाती, भुगतान या सेवा रिकॉर्ड की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म से देखी जा सकेगी।

    एजेंसियों की प्रक्रिया पर भी होगी निगरानी
    नई व्यवस्था लागू होने के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती और भुगतान की प्रक्रिया पर निगरानी आसान होने की उम्मीद है। अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से होने वाली प्रक्रिया में रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़ी गड़बड़ियों की गुंजाइश कम करने में भी मदद मिलेगी। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे हैं। नई व्यवस्था का सीधा असर इन कर्मचारियों की भर्ती, सेवा शर्तों और भुगतान व्यवस्था से जुड़े प्रबंधन पर पड़ेगा।

  • UP : ₹17 करोड़ की जाली करेंसी का खुला राज, PNB के करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोट, 3 अधिकारी सस्पेंड

    UP : ₹17 करोड़ की जाली करेंसी का खुला राज, PNB के करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोट, 3 अधिकारी सस्पेंड

    सहारनपुर। सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये मूल्य के जाली नोट मिलने से हड़कंप मच गया है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी का खुलासा महज 4.30 लाख रुपये की कमी से हुआ। आरबीआई के जयपुर कार्यालय भेजी गई रकम की जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद बैंक की टीम ने करेंसी चेस्ट की जांच शुरू की, जिसमें एक-एक नोट की पड़ताल के दौरान नकली नोटों का बड़ा जखीरा सामने आया।

    11.50 करोड़ रुपये भेजे गए थे जयपुर

    सहारनपुर में पीएनबी की करीब 72 शाखाएं हैं और दो करेंसी चेस्ट संचालित होते हैं। इनमें एक घंटाघर के पास सोफिया मार्केट और दूसरा गंगोह में है। 5 अगस्त से सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट से 11.50 करोड़ रुपये आरबीआई के जयपुर कार्यालय भेजे गए थे। इसमें सड़े-गले और कटे-फटे नोट भी शामिल थे।

    जयपुर में जमा रकम की जांच के दौरान अधिकारियों को 4,30,900 रुपये की कमी मिली। इसकी जानकारी मेरठ कार्यालय को दी गई। इसके बाद बैंक मुख्यालय से टीम सहारनपुर पहुंची और करेंसी चेस्ट में रखी रकम की जांच शुरू की गई।

    पहले मिले ₹7.40 करोड़ के नकली नोट

    जांच टीम ने करेंसी चेस्ट में रखे नोटों की बारीकी से जांच शुरू की। शुरुआती पड़ताल में करीब 7.40 करोड़ रुपये मूल्य के जाली नोट मिलने की जानकारी सामने आई। जांच आगे बढ़ी तो नकली नोटों की संख्या और रकम भी बढ़ती गई।

    बैंक की टीम के मुताबिक, सोमवार देर रात तक करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने का दावा किया गया है। जांच अभी जारी है, इसलिए रकम और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    4-5 दिन से चल रही नोटों की जांच

    करेंसी चेस्ट में रखे नोटों की जांच पिछले चार-पांच दिनों से चल रही है। मेरठ और दिल्ली स्थित बैंक मुख्यालय से पहुंची टीमें एक-एक नोट की पड़ताल कर रही हैं। इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी मिलने के बाद बैंक के स्थानीय अधिकारियों से लेकर मुख्यालय तक हड़कंप मचा हुआ है।

    करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे नकली नोट?

    इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नकली करेंसी बैंक के करेंसी चेस्ट तक पहुंची कैसे। बैंक में रकम जमा होने से पहले नोटों की जांच की जाती है। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि असली नोटों के बंडलों में नकली नोट किस स्तर पर शामिल हुए और वे करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे।

    बड़े नेटवर्क की आशंका भी

    करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के बाद किसी बड़े नेटवर्क की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली नोट कहां तैयार किए गए, इनमें किस तरह के कागज और स्याही का इस्तेमाल हुआ और इन्हें असली नोटों के बीच किस स्तर पर मिलाया गया।

    तीन अधिकारी निलंबित, हाउसकीपर हटाया

    पीएनबी की मुख्य बैंक प्रबंधक निशा सिंह के मुताबिक, करेंसी चेस्ट में जाली नोट मिलने के बाद मुख्यालय से टीम भेजी गई है और जांच जारी है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि पार्ट टाइम हाउसकीपर को हटा दिया गया है।

    जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे और इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है।

  • UP: हरिद्वार तक पहुंचेगा गंगा एक्सप्रेसवे, बिजनौर से होकर बनेगा करीब 30 किमी नया लिंक

    UP: हरिद्वार तक पहुंचेगा गंगा एक्सप्रेसवे, बिजनौर से होकर बनेगा करीब 30 किमी नया लिंक

    मेरठ। गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार से जोड़ने की परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के बीच इस परियोजना को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) हो चुका है। समझौते में दोनों राज्यों की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे बिजनौर के रास्ते हरिद्वार तक पहुंचेगा और इसकी लंबाई करीब 30 किलोमीटर होगी।

    गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पास रहेगी। दोनों राज्यों के बीच इस परियोजना को लेकर पिछले महीने सहमति बनी थी।

    उत्तराखंड पर नहीं आएगा निर्माण का खर्च
    एमओयू के अनुसार हरिद्वार तक एक्सप्रेसवे के निर्माण में होने वाला वित्तीय खर्च उत्तराखंड सरकार को नहीं उठाना होगा। हालांकि, उत्तराखंड की ओर से भूमि अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग में सहयोग किया जाएगा। शासन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार परियोजना से संबंधित दोनों एमओयू पिछले महीने ही अंतिम रूप ले चुके थे। समझौते को कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है।

    बिजनौर के रास्ते हरिद्वार तक करीब 30 किमी का लिंक
    हरिद्वार को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए तैयार किए जा रहे प्रस्तावित मार्ग का एक हिस्सा बिजनौर से होकर गुजरेगा। करीब 30 किलोमीटर के इस लिंक से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सड़क संपर्क पहले से बेहतर होने की उम्मीद है। परियोजना को लेकर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच कई चरणों में बैठकें हो चुकी हैं। अब निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को तेजी मिलने की संभावना है।

    धार्मिक पर्यटन से लेकर कारोबार तक को फायदा
    गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। देश के अलग-अलग हिस्सों से हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवागमन आसान होगा।

    इसके अलावा बेहतर कनेक्टिविटी का असर औद्योगिक निवेश और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। परियोजना के जरिए क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच लोगों और सामान की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी।

  • घुमंतू समाज के विकास के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, CM बोले- अब नहीं खानी पड़ेगी दर-दर की ठोकरें

    घुमंतू समाज के विकास के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, CM बोले- अब नहीं खानी पड़ेगी दर-दर की ठोकरें

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घुमंतू और विमुक्त समुदायों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब उन्हें दर-दर भटकने और उपेक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने घुमंतू विकास बोर्ड का गठन कर इन समुदायों को सम्मानजनक जीवन, सरकारी योजनाओं का लाभ और विकास के समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम उठाया है।

    गुरुवार को बोर्ड के गठन के बाद आयोजित आभार एवं अभिनंदन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बोर्ड केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि वर्षों से उपेक्षित घुमंतू और विमुक्त समाज को न्याय, सम्मान और मुख्यधारा से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए सरकार बिना किसी भेदभाव के समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर पात्र व्यक्ति को सभी जनकल्याणकारी योजनाओं से शत-प्रतिशत जोड़ना है।

    योगी आदित्यनाथ ने बताया कि डबल इंजन सरकार ने वनटांगिया, मुसहर, थारू, गौड़, चेरो, बुक्सा, कोल और सहरिया जैसे वंचित समुदायों को राशन कार्ड, भूमि के पट्टे, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास, आयुष्मान भारत कार्ड, निःशुल्क बिजली व गैस कनेक्शन तथा विभिन्न पेंशन योजनाओं से जोड़ा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए जनता केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि ‘जनार्दन’ है। इसी सोच के साथ अनुसूचित जाति-जनजाति के बच्चों के लिए आश्रम पद्धति विद्यालय और श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जहां शिक्षा, आवास और भोजन की निःशुल्क व्यवस्था उपलब्ध है।

    उन्होंने कहा कि अब किसी भी घुमंतू या विमुक्त समुदाय को ‘क्रिमिनल ट्राइब’ कहकर नहीं पुकारा जा सकता। ये वे समुदाय हैं जिन्होंने देश की आजादी के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अब उन्हें उनका उचित सम्मान दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। घुमंतू विकास बोर्ड इन समुदायों की पहचान कर उन्हें शासन की सभी योजनाओं से जोड़ने का कार्य करेगा।

    मुख्यमंत्री ने सपेरा समाज का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह समुदाय गुरु गोरखनाथ की परंपरा का अनुयायी रहा है और प्राचीन काल में समाज को जागरूक करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार घुमंतू समुदायों के सम्मानजनक पुनर्वास और समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

  • यूपी भाजपा में टिकट की दौड़ तेज, देहात सीट पर बढ़े दावेदार, अगस्त-सितंबर में होगा चौथा सर्वे

    यूपी भाजपा में टिकट की दौड़ तेज, देहात सीट पर बढ़े दावेदार, अगस्त-सितंबर में होगा चौथा सर्वे


    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी में टिकट की दावेदारी तेज होती जा रही है। पार्टी अब तक तीन चरणों का सर्वे पूरा कर चुकी है, जिसके बाद कई विधानसभा सीटों पर नए दावेदारों के नाम सामने आने लगे हैं। खासतौर पर मुरादाबाद देहात विधानसभा सीट पर दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पार्टी का अगला यानी चौथा सर्वे अगस्त-सितंबर में प्रस्तावित है।

    भाजपा ने प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के तहत जनवरी, मार्च और जून में तीन सर्वे कराए थे। इन सर्वेक्षणों के आधार पर जिले की छह विधानसभा सीटों पर करीब 20 नाम प्रमुख दावेदारों के रूप में चर्चा में रहे। नगर, देहात, कुंदरकी और ठाकुरद्वारा सीटों पर तीन-तीन, जबकि कांठ और बिलारी सीट पर चार-चार संभावित उम्मीदवारों के नाम सामने आए थे। इनमें मौजूदा विधायक, पूर्व पदाधिकारी और ब्लॉक प्रमुख जैसे कई नेता शामिल हैं।

    देहात सीट पर बढ़ी दावेदारों की संख्या
    तीन सर्वे में मुरादाबाद देहात सीट से डॉ. केके मिश्रा, पूर्व महानगर महामंत्री श्याम बिहारी मिश्रा और अनुसूचित मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष रजनीकांत जाटव के नाम प्रमुखता से सामने आए थे। अब इनके अलावा कई अन्य नेताओं ने भी दावेदारी की चर्चा तेज कर दी है।

    नए चर्चित नामों में पूर्व महानगर अध्यक्ष धर्मेंद्रनाथ मिश्रा, पूर्व महानगर मंत्री शशि किरण जाटव, महानगर मंत्री सुनीता शर्मा और वनीता मेहरोत्रा समेत कई अन्य भाजपा पदाधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

    अन्य सीटों पर भी नए चेहरे चर्चा में
    कांठ विधानसभा सीट से धर्मपाल सिंह और जयवर्द्धन सिंह, बिलारी सीट से विश्वास यादव लवली और नरेश यादव, जबकि ठाकुरद्वारा सीट से गौरव चौहान और भानु प्रताप सिंह के नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल होकर चर्चा में हैं। फिलहाल मुरादाबाद नगर और कुंदरकी सीटों पर कोई नया नाम प्रमुख रूप से सामने नहीं आया है।

    तीसरे सर्वे में इन नामों की रही थी चर्चा
    मुरादाबाद नगर: विधायक रितेश गुप्ता, पूर्व महानगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता, महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला।
    मुरादाबाद देहात: डॉ. केके मिश्रा, श्याम बिहारी मिश्रा, रजनीकांत जाटव।
    कांठ: पूर्व विधायक राजेश कुमार सिंह चुन्नू, ब्लॉक प्रमुख पूनम चौधरी, जिला पंचायत सदस्य विनोद सैनी और राजपाल सिंह।
    ठाकुरद्वारा: पूर्व जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह चौहान, अजय प्रताप सिंह और पूर्व सांसद सर्वेश सिंह की पत्नी साधना सिंह।
    बिलारी: परमेश्वर लाल सैनी, पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश सैनी, नगर पालिका चेयरमैन रघुराज सिंह यादव और ऋषिपाल चौधरी।
    कुंदरकी: विधायक रामवीर सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह और किसान मोर्चा के क्षेत्रीय महामंत्री दिनेश ठाकुर।

    जिलाध्यक्ष ने क्या कहा?
    भाजपा जिलाध्यक्ष आकाश पाल ने कहा कि पार्टी में टिकट मांगने का अधिकार सभी कार्यकर्ताओं को है। फिलहाल संगठन स्तर पर दावेदारी के लिए आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों के चयन का अंतिम निर्णय प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।

  • उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा ऐलान, ग्रेजुएट छात्राओं के लिए स्कूटी योजना; 400 करोड़ का बजट स्वीकृत

    उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा ऐलान, ग्रेजुएट छात्राओं के लिए स्कूटी योजना; 400 करोड़ का बजट स्वीकृत


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश सरकार ने छात्राओं के सशक्तिकरण और प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना सहित कुल 18 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ग्रेजुएशन करने वाली मेधावी छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। इसके अलावा सरकार ने दो नए एक्सप्रेस-वे के निर्माण, इलेक्ट्रिक बसों की खरीद और कई विकास परियोजनाओं को भी मंजूरी प्रदान की।

    उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है। योजना का लाभ उन छात्राओं को मिलेगा जिनके परिवार की वार्षिक आय 10 लाख रुपए तक है। हालांकि दिव्यांग छात्राओं, शहीद परिवारों की बेटियों और निराश्रित परिवारों की छात्राओं के लिए आय सीमा लागू नहीं होगी।

    योजना के तहत प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेज की टॉप 5 प्रतिशत छात्राओं को पेट्रोल स्कूटी दी जाएगी। सरकार स्कूटी के साथ उसका रजिस्ट्रेशन, बीमा, हेलमेट, आवश्यक एक्सेसरीज और 4 लीटर पेट्रोल भी उपलब्ध कराएगी। हालांकि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की जिम्मेदारी छात्राओं की होगी।

    कैबिनेट बैठक में प्रदेश के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए दो बड़े एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। पहला 333 किलोमीटर लंबा विंध्य एक्सप्रेस-वे प्रयागराज से सोनभद्र तक बनेगा। इसकी अनुमानित लागत 26,315 करोड़ रुपए होगी। यह एक्सप्रेस-वे प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी, चंदौली और सोनभद्र को जोड़ते हुए बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमाओं तक बेहतर संपर्क उपलब्ध कराएगा। इसके बनने से प्रयागराज से सोनभद्र की यात्रा लगभग साढ़े छह घंटे से घटकर करीब सवा तीन घंटे रह जाएगी।

    दूसरी परियोजना 117 किलोमीटर लंबा विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेस-वे है, जिसकी लागत करीब 9,039 करोड़ रुपए होगी। यह पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को विंध्य एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा और पूर्वी उत्तर प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई मजबूती देगा।

    कैबिनेट ने परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 220 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को भी मंजूरी दी है, जिस पर लगभग 400 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वहीं वाराणसी में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए नए छात्रावासों के निर्माण, सहकारी ग्राम विकास बैंक को वित्तीय सहायता, महिला कल्याण विभाग की सेवा नियमावली में बदलाव और अन्य प्रशासनिक प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई।

    सरकार ने यह भी घोषणा की कि उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 3 से 6 अगस्त तक आयोजित होगा। इसी सत्र में संभल दंगों की जांच रिपोर्ट सदन में रखी जाएगी और अनुपूरक बजट भी पेश किया जाएगा।

    सरकार का कहना है कि इन फैसलों से शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, परिवहन और आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिलेगी। वहीं विपक्ष इन योजनाओं के क्रियान्वयन और बजटीय प्रबंधन पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।

  • यूपी में बारिश का कहर, सड़कों पर दिखे मगरमच्छ; घरों में घुसा पानी, 66 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    यूपी में बारिश का कहर, सड़कों पर दिखे मगरमच्छ; घरों में घुसा पानी, 66 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। मंगलवार सुबह से लखनऊ, कानपुर, बाराबंकी, प्रयागराज, वाराणसी समेत करीब 20 शहरों में रुक-रुककर तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश की संभावना जताई है, जबकि 66 जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

    सबसे चिंताजनक स्थिति लखीमपुर खीरी में देखने को मिली, जहां शारदा नदी का पानी गांवों में घुस गया। बाढ़ के साथ मगरमच्छ भी आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच गए। खेतों, सड़कों और गांवों में मगरमच्छों के दिखाई देने से लोगों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है और प्रशासन प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

    प्रयागराज में बीते 24 घंटों के दौरान हुई मूसलाधार बारिश ने शहर की रफ्तार थाम दी। कई सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और अंडरपास में करीब दो फीट तक पानी भर जाने से यातायात रोकना पड़ा। जलभराव के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लगा और लोगों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। वहीं कौशांबी में घरों के भीतर पानी भर जाने से सोफा, कुर्सियां और अन्य घरेलू सामान पानी में तैरते नजर आए। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।

    वाराणसी और प्रयागराज में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों की कई सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। काशी में करीब 50 छोटे मंदिरों तक नदी का पानी पहुंच गया है। उन्नाव और फिरोजाबाद के सरकारी अस्पतालों में भी घुटनों तक पानी भर गया, जिससे मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शामली में नहर टूटने से करीब 10 फीट सड़क धंस गई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।

    खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम भी उठाए हैं। पीलीभीत और बहराइच में सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम और सक्रिय मानसूनी ट्रफ के कारण प्रदेश में 24 जुलाई तक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद भी कई इलाकों में अगले तीन से चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी।

    लगातार हो रही बारिश और आकाशीय बिजली की घटनाओं ने भी जनहानि बढ़ाई है। पिछले तीन दिनों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बारिश और बिजली गिरने की घटनाओं में 10 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। राहत एवं बचाव दल भी संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

  • आगरा में फ्रिज की बर्फ में दिखी शिवलिंग जैसी आकृति, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, लोग कर रहे पूजा-अर्चना

    आगरा में फ्रिज की बर्फ में दिखी शिवलिंग जैसी आकृति, दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, लोग कर रहे पूजा-अर्चना


    आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में एक घर के फ्रिज के फ्रीजर में जमी बर्फ की शिवलिंग जैसी दिखाई देने वाली आकृति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। आकृति की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग घर पहुंचने लगे और कई श्रद्धालुओं ने इसे भगवान शिव का प्रतीक मानते हुए पूजा-अर्चना शुरू कर दी। घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं।

    यह मामला आगरा के खेरिया मोड़ स्थित नगला भुजा क्षेत्र का बताया जा रहा है। जहां एक ओर कई लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे बर्फ के प्राकृतिक जमाव का परिणाम मान रहे हैं।

    फ्रीजर में नजर आई शिवलिंग जैसी आकृति
    परिवार के सदस्यों के अनुसार, जब उन्होंने फ्रिज खोला तो फ्रीजर में जमी बर्फ के बीच एक ऐसी आकृति दिखाई दी, जो देखने में शिवलिंग जैसी प्रतीत हो रही थी। इसकी सूचना पड़ोसियों और परिचितों तक पहुंची तो लोगों का वहां आना शुरू हो गया।

    देखते ही देखते घर के बाहर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। कई लोगों ने हाथ जोड़कर भगवान शिव का स्मरण किया, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने जल, फूल और बेलपत्र अर्पित कर पूजा की। पूरे इलाके में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे भी सुनाई दिए। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह से शाम तक बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते रहे।

    अमरनाथ हिमलिंग से की जा रही तुलना
    घटना के बाद कुछ श्रद्धालुओं ने इस आकृति की तुलना जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा में बनने वाले प्राकृतिक हिमलिंग से की। इसी दौरान मोहल्ले के एक बाबा भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने उपस्थित लोगों को अमरनाथ गुफा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं तथा वहां रहने वाले कबूतरों के जोड़े की कथा सुनाई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग वहां मौजूद रहे।

    पूजा-अर्चना और चढ़ावा भी शुरू
    स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना की जानकारी फैलने के बाद श्रद्धालुओं ने मौके पर पूजा-पाठ शुरू कर दिया। कई लोगों ने जलाभिषेक किया, फूल और प्रसाद अर्पित किए। बताया जा रहा है कि श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ावा भी चढ़ाया जा रहा है। हालांकि यह पूरी गतिविधि स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था के आधार पर हो रही है।

    वैज्ञानिक नजरिए से क्या है वजह?
    विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रिज या फ्रीजर के भीतर तापमान, नमी, हवा के प्रवाह और पानी के जमने की प्रक्रिया के कारण बर्फ कई तरह की आकृतियां बना सकती है। कई बार ये आकृतियां किसी परिचित वस्तु, चेहरे या धार्मिक प्रतीक जैसी दिखाई देती हैं।

    मनोविज्ञान में इस प्रवृत्ति को ‘पैरेडोलिया (Pareidolia)’ कहा जाता है, जिसमें मानव मस्तिष्क अनियमित आकृतियों में परिचित चेहरे, आकृतियां या धार्मिक प्रतीकों जैसी छवि पहचान लेता है। वैज्ञानिक दृष्टि से ऐसी आकृतियों का बनना असामान्य नहीं माना जाता।

    सोशल मीडिया पर दो राय
    घटना के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर बहस छिड़ गई है। एक वर्ग इसे भगवान शिव से जुड़ा चमत्कार मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम बता रहा है। कई लोगों ने धार्मिक आस्था का सम्मान करने की बात कही है, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे मामलों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझना जरूरी है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी सुझाव दिया कि यदि यह केवल बर्फ का प्राकृतिक जमाव है, तो समय के साथ उसके पिघलने से स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।

  • लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, कल से दौड़ेंगे वाहन, 35-45 मिनट में पूरा होगा सफर

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, कल से दौड़ेंगे वाहन, 35-45 मिनट में पूरा होगा सफर

    लखनऊ। लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए मंगलवार, 14 जुलाई से सफर आसान होने जा रहा है। करीब 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को आम वाहनों के लिए खोल दिया जाएगा। लगभग 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह छह-लेन एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की प्रमुख हाई-स्पीड सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना का लोकार्पण सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया।

    उन्नाव में हुआ लोकार्पण, तकनीकी प्रदर्शनी भी देखी
    उन्नाव के झाऊखेड़ा गांव में आयोजित कार्यक्रम में एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया गया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। कार्यक्रम से पहले अतिथियों ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा लगाई गई तकनीकी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। एनएचएआई अधिकारियों ने एक्सप्रेसवे के निर्माण में उपयोग की गई आधुनिक तकनीक, सुरक्षा मानकों और भविष्य की विस्तार योजनाओं की जानकारी भी दी।

    टोल वसूली शुरू, इन वाहनों के प्रवेश पर रोक
    एक्सप्रेसवे पर मंगलवार से टोल वसूली भी शुरू हो गई है। चूंकि यह एक नियंत्रित (कंट्रोल्ड एक्सेस) हाई-स्पीड कॉरिडोर है, इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल कार, जीप, बस, ट्रक और अन्य मोटर चालित वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई है। वहीं बाइक, स्कूटर, ऑटो, विक्रम, साइकिल, ट्रैक्टर, ई-रिक्शा, पशु चालित वाहन और अन्य धीमी गति वाले वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है।

    डेढ़-दो घंटे की जगह 35 से 45 मिनट में पहुंचेगा सफर
    अब तक लखनऊ और कानपुर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर ट्रैफिक और जाम के कारण यात्रा में करीब डेढ़ से दो घंटे का समय लग जाता था। नए एक्सप्रेसवे के शुरू होने से यही दूरी अब महज 35 से 45 मिनट में तय की जा सकेगी। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर यातायात का दबाव कम होगा और उन्नाव सहित आसपास के क्षेत्रों में लगने वाले जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

    उन्नाव को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ
    एक्सप्रेसवे को उन्नाव-लालगंज मार्ग और कानपुर-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ा गया है। इसके अलावा गंगाघाट, करेर पतारी, कोरारी और अमरसस के पास इंटरचेंज बनाए गए हैं, जिससे उन्नाव, रायबरेली, कानपुर और लखनऊ के बीच आवागमन अधिक सुगम होगा।

    उद्योग और व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार
    यह एक्सप्रेसवे कानपुर के औद्योगिक क्षेत्र और लखनऊ के प्रशासनिक व आईटी केंद्र के बीच तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा। इससे माल ढुलाई की लागत और समय दोनों में कमी आएगी, जिससे उद्योगों और व्यापार को लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही शिक्षा, चिकित्सा और नौकरी के लिए रोजाना आने-जाने वाले लोगों को भी समय और ईंधन की बचत का सीधा फायदा मिलेगा।

    एक्सप्रेसवे की प्रमुख विशेषताएं
    लंबाई: 63 किलोमीटर का छह-लेन एक्सप्रेसवे।
    लागत: लगभग 4,200 करोड़ रुपये।
    यात्रा समय: लखनऊ से कानपुर की दूरी अब 35 से 45 मिनट में पूरी होगी।
    बेहतर कनेक्टिविटी: उन्नाव, रायबरेली, कानपुर और लखनऊ को आधुनिक इंटरचेंज से जोड़ा गया।
    सुरक्षा नियम: बाइक, ऑटो, ट्रैक्टर, साइकिल और ई-रिक्शा सहित धीमी गति वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध।

  • 'लखनऊ अब सिर्फ तहजीब का नहीं, मिसाइल निर्माण का भी शहर', दीक्षांत समारोह में बोले डिप्टी CM ब्रजेश पाठक

    'लखनऊ अब सिर्फ तहजीब का नहीं, मिसाइल निर्माण का भी शहर', दीक्षांत समारोह में बोले डिप्टी CM ब्रजेश पाठक

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि लखनऊ अब केवल अपनी तहजीब और मुस्कुराहट के लिए ही नहीं, बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रयासों से शहर में मिसाइलों का निर्माण हो रहा है, जिससे देश की रक्षा क्षमता को मजबूती मिल रही है।

    किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा, “पहले कहा जाता था, मुस्कुराइए, आप लखनऊ में हैं। अब यहां मिसाइलें बन रही हैं। जो गड़बड़ी करेगा, उसे मुस्कुराने का मौका नहीं मिलेगा।” उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक की मदद से सटीक लक्ष्य भेदा जा सकता है।

    1701 छात्रों को मिली उपाधि, 54 मेधावियों का सम्मान
    अटल बिहारी वाजपेयी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने समारोह में 1701 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं, जिनमें 975 छात्र और 726 छात्राएं शामिल रहीं। इसके अलावा विभिन्न पाठ्यक्रमों के 20 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 54 पदकों से सम्मानित किया गया।

    KGMU के नाम को लेकर भ्रम की बात
    समारोह में स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के नाम को लेकर लोगों में अक्सर भ्रम रहता है, जबकि इसके निर्माण में किंग जॉर्ज का कोई आर्थिक योगदान नहीं था।

    डॉ. एम. श्रीनिवास को मानद डीएससी
    इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास को चिकित्सा प्रशासन और स्वास्थ्य नीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डीएससी (Doctor of Science) की उपाधि प्रदान की गई। वहीं विश्वविद्यालय के कई चिकित्सकों को कुलपति एवं फैकल्टी अप्रिसिएशन अवार्ड से सम्मानित किया गया।

    दीप्ति शर्मा ने जीते सबसे अधिक पदक
    एमबीबीएस की छात्रा दीप्ति शर्मा समारोह की सबसे सफल छात्रा रहीं। उन्होंने 16 पदक अपने नाम किए। उनके अलावा निधि सिंह, अभिलाषा घोष, अनिकेत चंद्रा सहित कुल 20 मेधावी विद्यार्थियों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया।