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  • उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म.. CM धामी ने की राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत

    उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म.. CM धामी ने की राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में बुधवार से मदरसा बोर्ड खत्म (Madrasa Board Abolished) हो गया। अब इसकी जगह राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (State Minority Education Authority) ने ले ली है। इसके तहत मुस्लिम समेत सभी 5 अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थान आएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व को अपनी ज्ञानधारा से सिंचित करने वाले उत्तराखंड की यह जिम्मेदारी है कि वह शिक्षा एवं संस्कार के मामले में एक आदर्श स्थापित करे।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने समाज के सभी वर्गों को अच्छी, संस्कार युक्त और आधुनिक शिक्षा देने के लिए पहली जुलाई से उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया गया है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल उत्तराखंड ही नहीं वरन पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी के रूप में ‘वन नेशन वन लॉ’ की तरह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के रूप में ‘वन नेशन वन एजुकेशन’ की शुरुआत भी उतराखंड से हो रही है। उत्तराखंड सरकार का संकल्प है कि राज्य में हर वर्ग, क्षेत्र और समुदाय के बच्चे को अच्छे संस्कार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।


    सपनों को मिलेगी नई उड़ान

    सीएम धामी ने कहा कि जब एक बच्चे को अच्छी शिक्षा मिलती है तो वह न केवल अपने भविष्य को बेहतर बनाता है वरन अपने परिवार, समाज और देश को बेहतर बनाने में अपना अमूल्य योगदान देता है। आज हम मात्र एक संस्था की शुरूआत नहीं कर रहे हैं वरन ऐसे भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं जिसके जरिए राज्य के हर बच्चे के सपनों को एक नई उड़ान मिलेगी।


    आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना है मकसद

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना किसी भी समुदाय की धार्मिक पहचान, परंपरा या अधिकारों को प्रभावित करने के लिए नहीं वरन समाज के सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए की गई है। हमारा मकसद आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना है। हम चाहते हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय का हर बच्चा अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा रहे और विज्ञान, गणित, कम्प्यूटर, भाषा, और आधुनिक तकनीकों में भी दक्ष बने।


    आएगा सकारात्मक बदलाव

    सीएम धामी ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं वरन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगा। सीएम धामी ने उम्मीद जताई कि प्राधिकरण आने वाले समय में हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यह गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगा।

  • हरिद्वार-देहरादून हाईवे पर बड़ा हादसा, राजस्थान से आए यात्रियों की बस पलटी, कई घायल अस्पताल में भर्ती

    हरिद्वार-देहरादून हाईवे पर बड़ा हादसा, राजस्थान से आए यात्रियों की बस पलटी, कई घायल अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और यातायात मार्गों में शामिल Dehradun–Haridwar Highway पर सोमवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसने पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। यह दुर्घटना Haridwar के नगर कोतवाली क्षेत्र में स्थित शांतिकुंज के पास हुई, जहां राजस्थान से आए श्रद्धालुओं से भरी एक बस डंपर की टक्कर के बाद अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसे में एक महिला की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक यात्री घायल बताए जा रहे हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार बस में सवार सभी यात्री Rajasthan से हरिद्वार दर्शन के लिए आए थे और धार्मिक यात्रा पूरी करने के बाद वापस लौट रहे थे। सुबह के समय बस जब सर्विस लेन से मुख्य हाईवे की ओर मुड़ रही थी, तभी रायवाला की दिशा से तेज गति में आ रहे डंपर ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का संतुलन बिगड़ गया और वह पलटकर सड़क पर जा गिरी।

    हादसे के बाद बस के भीतर मौजूद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और मौके पर भय का माहौल बन गया। कई यात्री बस के अंदर फंस गए, जिन्हें स्थानीय लोगों और पुलिस टीम की मदद से बाहर निकाला गया। घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई यात्रियों का उपचार जारी है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर के बाद डंपर भी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक ढाबे में जा घुसा, जिससे वहां मौजूद लोगों में भी दहशत फैल गई। हादसे के बाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बस और डंपर को हटाना पड़ा, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात बहाल किया जा सका।

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और हादसे की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को दुर्घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा।

    यह हादसा एक बार फिर हाईवे पर यातायात सुरक्षा व्यवस्था और भारी वाहनों की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े करता है। धार्मिक यात्राओं के दौरान बढ़ने वाले यातायात दबाव के बीच ऐसे हादसे चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा घायलों के इलाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया गया है।

  • जब पहाड़ों के लोगों ने खुद संभाली जिम्मेदारी, तब फूलों की घाटी ने बर्बादी से खूबसूरती तक का सफर तय किया

    जब पहाड़ों के लोगों ने खुद संभाली जिम्मेदारी, तब फूलों की घाटी ने बर्बादी से खूबसूरती तक का सफर तय किया

    नई दिल्ली । उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऊंचे पहाड़ों और मनमोहक घाटियों के लिए पूरी दुनिया में पहचान रखता है, लेकिन इसी खूबसूरत राज्य की एक प्रसिद्ध घाटी कभी पर्यावरणीय संकट के ऐसे दौर से गुजर रही थी, जहां उसकी पहचान और अस्तित्व दोनों खतरे में पड़ने लगे थे। दुनिया भर में अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर फूलों की घाटी एक समय भारी मात्रा में प्लास्टिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे के बोझ तले दब चुकी थी। लगातार बढ़ते पर्यटन और श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण यहां हालात इतने गंभीर हो गए थे कि घाटी का संवेदनशील पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने लगा था। हालांकि इसके बाद जो हुआ उसने केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सामने एक नई मिसाल पेश कर दी।

    कई वर्षों तक इस क्षेत्र में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ती रही, लेकिन कचरे के प्रबंधन की कोई प्रभावी व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी। नतीजा यह हुआ कि वर्षों तक प्लास्टिक और अन्य हानिकारक कचरा घाटी में जमा होता गया। धीरे-धीरे यह स्थिति एक बड़े पर्यावरणीय संकट में बदलने लगी। प्राकृतिक रूप से बेहद संवेदनशील इस हिमालयी क्षेत्र पर बढ़ते दबाव ने चिंता बढ़ा दी थी और लगने लगा था कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इसकी खूबसूरती हमेशा के लिए प्रभावित हो सकती है।

    इसके बाद स्थानीय लोगों ने बदलाव की जिम्मेदारी खुद अपने हाथों में लेने का फैसला किया। गांवों के लोगों, सामाजिक समूहों और स्थानीय संस्थाओं ने मिलकर एक बड़े सफाई अभियान की शुरुआत की। यह केवल सरकारी प्रयास नहीं था बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई। लोगों ने घर-घर जाकर जागरूकता फैलाई और घाटी को दोबारा स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया। कुछ ही वर्षों में वर्षों से जमा भारी मात्रा में प्लास्टिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा हटाया गया।

    सबसे खास और प्रेरणादायक पहलू यह रहा कि लोगों ने केवल सफाई तक खुद को सीमित नहीं रखा। स्थानीय समुदाय ने अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ भी पहल की और बड़ी संख्या में अस्थायी ढांचों और दुकानों को हटाने का फैसला लिया। यह काम आसान नहीं था क्योंकि इसमें आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां भी जुड़ी हुई थीं, लेकिन पर्यावरण को प्राथमिकता देते हुए लोगों ने कठिन फैसले लिए और घाटी को दोबारा संतुलित करने की दिशा में काम किया।

    सफाई अभियान के दौरान कचरे को घाटी से बाहर निकालना भी बड़ी चुनौती था। कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच लोगों ने निरंतर मेहनत की और कचरे को नीचे तक पहुंचाने के लिए पारंपरिक संसाधनों का इस्तेमाल किया। इस सामूहिक प्रयास ने यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर समाज ठान ले तो असंभव दिखने वाले काम भी संभव हो सकते हैं।

    आज जब दुनिया के कई पर्यटन स्थल प्लास्टिक प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट से जूझ रहे हैं, तब उत्तराखंड की यह कहानी एक मजबूत संदेश देती है। यह सिर्फ एक घाटी की सफाई की कहानी नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी की ऐसी मिसाल है जिसने दुनिया को यह दिखाया कि बदलाव केवल नीतियों से नहीं बल्कि लोगों की इच्छा शक्ति से भी आता है।

  • उत्तराखंड के पहाड़ों तक सफर होगा और आसान, नया बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे दिल्ली और लखनऊ को देगा सीधी रफ्तार

    उत्तराखंड के पहाड़ों तक सफर होगा और आसान, नया बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे दिल्ली और लखनऊ को देगा सीधी रफ्तार

    नई दिल्ली ।उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों तक यात्रा को और तेज, आसान और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाला नया बरेली-हल्द्वानी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे आने वाले समय में यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल पहाड़ों का सफर आसान होगा बल्कि दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से आने वाले यात्रियों को भी लंबी दूरी और ट्रैफिक जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

    यह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे पूरी तरह ग्रीनफील्ड परियोजना के रूप में तैयार किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि पुराने मार्गों का विस्तार करने के बजाय एक बिल्कुल नए मार्ग का निर्माण किया जाएगा। इससे यात्रा अधिक सुगम होगी और स्थानीय ट्रैफिक की बाधाओं से भी बचा जा सकेगा। प्रस्तावित मार्ग को नियंत्रित एक्सेस प्रणाली के तहत विकसित किया जाएगा, जिससे वाहन बिना किसी रुकावट के तेज गति से सफर कर सकेंगे।

    बताया जा रहा है कि यह एक्सप्रेसवे लगभग 100 किलोमीटर लंबा होगा और चार लेन की आधुनिक सड़क सुविधा से लैस रहेगा। इसके निर्माण के बाद बरेली से हल्द्वानी के बीच यात्रा करने वाले लोगों को बड़े शहरों और कस्बों में लगने वाले जाम से छुटकारा मिलेगा। अभी इस मार्ग पर कई ऐसे इलाके पड़ते हैं जहां अक्सर भारी ट्रैफिक देखने को मिलता है, जिसके कारण यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और यात्रा का समय भी बढ़ जाता है।

    नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद बरेली से हल्द्वानी तक पहुंचने का समय कम होने की संभावना जताई जा रही है। यात्रा के दौरान एक से डेढ़ घंटे तक की बचत हो सकती है, जो विशेष रूप से पर्यटन सीजन और छुट्टियों के दौरान बड़ी राहत साबित हो सकती है। हल्द्वानी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है और यहीं से नैनीताल समेत कई प्रसिद्ध पहाड़ी पर्यटन स्थलों की शुरुआत होती है।

    इस परियोजना का लाभ केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों के यात्रियों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा। वर्तमान में इन क्षेत्रों से उत्तराखंड की ओर जाने वाले मार्गों पर अक्सर भारी ट्रैफिक और जाम की स्थिति बनी रहती है। नए एक्सप्रेसवे को बड़े राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है, जिससे यात्रा और अधिक सरल हो सकेगी।

    आधुनिक सड़क परियोजनाएं केवल दूरी कम करने तक सीमित नहीं होतीं बल्कि वे क्षेत्रीय विकास, पर्यटन, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देती हैं। ऐसे में बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे को भविष्य की एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में लाखों लोगों के सफर को नई रफ्तार दे सकती है।

  • देहरादून में दर्दनाक हादसा, पैनेसिया अस्पताल की ICU यूनिट में आग; धुएं से एक की मौत, कई मरीज प्रभावित

    देहरादून में दर्दनाक हादसा, पैनेसिया अस्पताल की ICU यूनिट में आग; धुएं से एक की मौत, कई मरीज प्रभावित

    नई दिल्ली । देहरादून से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक हादसे की खबर सामने आई है, जहां शहर के एक प्रमुख अस्पताल पैनेसिया में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। यह घटना अस्पताल के आईसीयू वार्ड में हुई, जहां अचानक एयर कंडीशनर में विस्फोट होने के बाद आग तेजी से फैल गई और पूरे वार्ड में घना धुआं भर गया। इस हादसे में एक मरीज की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य मरीजों के प्रभावित होने और घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। धुएं की वजह से आईसीयू में भर्ती मरीजों को सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई, जिससे स्थिति और भी अधिक भयावह हो गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।

    हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर या अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया ताकि उनकी देखभाल में किसी तरह की कमी न रहे। प्रशासन ने तुरंत स्थिति को नियंत्रण में लेते हुए पूरे परिसर को खाली करवा लिया और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया।

    इस घटना के बाद गढ़वाल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह आग ICU में लगे एयर कंडीशनर के फटने के कारण लगी, लेकिन वास्तविक कारणों की जांच अभी जारी है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल का संचालन एक निजी ग्रुप द्वारा लीज पर किया जा रहा था, इसलिए फायर सेफ्टी मानकों और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जांच की जाएगी।

    प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं और ऐसी भयावह घटना कैसे हुई। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आपात स्थिति में अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया कितनी प्रभावी थी।

    यह हादसा न केवल अस्पताल प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा करता है। फिलहाल राहत कार्य पूरा कर लिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।

  • उत्तराखंड के चंपावत में 16 साल की किशोरी से गैंगरेप…. भाजपा नेता, एक अग्निवीर समेत 3 पर केस

    उत्तराखंड के चंपावत में 16 साल की किशोरी से गैंगरेप…. भाजपा नेता, एक अग्निवीर समेत 3 पर केस


    चंपावत।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) के चम्पावत (Champawat) में दोस्त संग शादी में गई 16 वर्षीय किशोरी (16-Year-old Teenager) दरिंदगी का शिकार हो गई। उसके दोस्त, भाजपा नेता समेत तीन लोगों ने चाकू नोक पर उसके साथ गैंगरेप किया। पीड़िता एक सुनसान घर में निर्वस्त्र मिली। उसके हाथ-पैर भी बंधे हुए थे। पुलिस ने तीनों आरोपियों पर केस दर्ज कर लिया है। फिलहाल तीनों फरार हैं। आरोपियों में एक अग्निवीर बताया जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार, पीड़ित के पिता ने तहरीर देकर बताया कि उनकी बेटी चम्पावत की एक दुकान में काम करती है। पांच मई की शाम को वह घर नहीं लौटी। फोन करने पर उसने बताया कि सल्ली निवासी उसका दोस्त विनोद सिंह रावत उसे एक शादी समारोह में ले गया है। लेकिन, देर रात तक वह घर नहीं लौटी। रात करीब डेढ़ बजे बेटी ने पिता को फोन किया, लेकिन तुरंत कट गया और फिर मोबाइल ऑफ हो गया। पिता ने इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी। बुधवार तड़के चार बजे पुलिस और ग्रामीणों को किशोरी सल्ली गांव में एक बंद कमरे में रस्सी से बंधी मिली।


    चाकू की नोंक पर दरिंदगी

    किशोरी ने बताया कि सल्ली निवासी 20 वर्षीय विनोद सिंह रावत, 30 वर्षीय नवीन सिंह और भाजपा नेता 45 वर्षीय पूरन सिंह रावत ने गले पर चाकू रखकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद तीनों ने रस्सी से बांधकर उसे कमरे में बंद कर दिया। कोतवाल बीएस बिष्ट ने बताया कि मामले की जांच एसआई प्रियंका मौर्या को सौंपी गई है। घटनास्थल पर फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए गए हैं।

    पीड़ित किशोरी का मेडिकल कराकर उसकी काउंसलिंग कराई गई है। पूरन सिंह रावत पूर्व में तल्लादेश से भाजपा का मंडल उपाध्यक्ष और सल्ली गांव का प्रधान रह चुका है। भाजपा के तल्लादेश मंडल अध्यक्ष कैलाश सिंह बोहरा ने बताया कि कुछ समय पूर्व नई कार्यकारिणी के गठन में उसे पद से हटाया गया था।


    चम्पावत को चौथी गैंग रेप की वारदात ने दहलाया

    चम्पावत में हुए गैंगरैप की वारदात ने पहाड़ की शांत वादियों को झकझोर कर रख दिया है। गैंगरेप की घटना से महिला सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 13 साल के भीतर ही यह चौथी शर्मशार करने वाली वारदात है।


    पीड़िता के पिता ने कराया मुकदमा

    चम्पावत में मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने देवभूमि को एक बार फिर से हिला कर रख दिया है। इस घटना ने एक बार फिर से महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता के पिता की दी तहरीर में कहा गया है कि तीन लोगों ने उसके साथ चाकू और धारदार हथियार बसूला को उसके गर्दन पर रख कर गैंग रेप किया। पुलिस पूछताछ में उसने ये भी बताया कि तीनों ने उसे रस्सी से बांध कर कमरे में बंद कर दिया। वैसे जिले में गैंगरेप की ये पहली वारदात नहीं है। इससे पूर्व भी जिले में गैंगरेप के मामले हो चुके हैं।


    पूर्व में गैंगरेप के मामले

    वर्ष 2003 में चम्पावत में सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तीन को हिरासत में लिया गया था। अक्टूबर 2023 में सूखीढांग क्षेत्र में एक महिला के साथ तीन लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। जबकि जुलाई 2024 में तल्लापाल बिलौना क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ तीन युवकों ने दुष्कर्म किया था। तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। बहरहाल जो भी हो गैंगरेप से महिला सुरक्षा पर खतरा है।

    चंपावत एसपी रेखा यादव ने बताया कि चम्पावत के सल्ली गांव में 16 साल की एक नाबालिग बालिका से सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई है। पीड़िता के पिता की तहरीर पर तीनों आरोपियों के खिलाफ चम्पावत कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है। जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    गैंगरेप का एक आरोपी अग्निवीर में भर्ती!
    आरोपी विनोद का चयन अग्निवीर में हुआ था। कुछ समय पूर्व बनबसा में हुई भर्ती के दौरान विनोद ने शारीरिक दक्षता और मेडिकल पास किया था। बताया जाता है कि विनोद का अग्निवीर का कॉल लेटर आना शेष था।


    फॉरेंसिक टीम ने जांच की

    चम्पावत। गैंगरेप की घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है। फारेंसिक टीम ने सल्ली स्थित डेयरी के पास के कमरे में पहुंच कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी के अनुसार फील्ड यूनिट ने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्रित किए।


    पिता के संरक्षण में भेजी नाबालिग बालिका

    बुधवार को जिला अस्पताल में पीड़िता का मेडिकल चेकअप किया गया। जिसके बाद सीडब्ल्यूसी ने पीड़िता की काउंसलिंग की। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष आनंदी अधिकारी ने बताया कि काउंसलिंग में पीड़िता ने बीमार पिता के साथ रहने की इच्छा जताई। उन्होंने बताया कि इसके बाद पीड़िता को पिता के संरक्षण में भेज दिया। साथ ही किसी भी तरह की दिक्कत होने पर कमेटी को जानकारी देने के लिए कहा गया। उन्होंने बताया कि काउंसलिंग के बाद जांच अधिकारी पीड़िता को लेकर 164 के बयान लिए कोर्ट ले गई।

  • देहरादून कैबिनेट बैठक: विकास कार्यों और भर्तियों में बड़ा सुधार, कुंभ 2027 पर विशेष फोकस

    देहरादून कैबिनेट बैठक: विकास कार्यों और भर्तियों में बड़ा सुधार, कुंभ 2027 पर विशेष फोकस


    नई दिल्ली ।
    देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस बैठक में कुंभ 2027 की तैयारियों को लेकर विशेष रूप से तेज़ी लाने पर जोर दिया गया, साथ ही विभिन्न विभागों की नीतियों और भर्ती प्रक्रियाओं में अहम बदलावों को मंजूरी दी गई।

    बैठक का सबसे प्रमुख फोकस आने वाले कुंभ मेले की तैयारियों पर रहा। सरकार ने निर्माण कार्यों और विकास परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय लिया है, जिससे काम तेजी से आगे बढ़ सके। छोटे और बड़े कार्यों की स्वीकृति के लिए अलग-अलग स्तर तय किए गए हैं, ताकि समय की बचत हो और परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें।

    वन विभाग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। वन दरोगा पद के लिए अब शैक्षणिक योग्यता को बढ़ाकर स्नातक कर दिया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया और अधिक योग्य उम्मीदवारों पर केंद्रित होगी। इसके साथ ही आयु सीमा में भी संशोधन किया गया है। वन आरक्षी पदों के लिए भी नई आयु सीमा लागू की गई है, जिससे भर्ती मानकों को अपडेट किया जा सके।

    परिवहन विभाग में भी कई अहम निर्णय लिए गए हैं। राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई बसों की खरीद को मंजूरी दी गई है। पहले निर्धारित संख्या में बढ़ोतरी करते हुए अब अधिक बसें खरीदने का फैसला लिया गया है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

    शिक्षा क्षेत्र में विशेष शिक्षा शिक्षक भर्ती नियमों में संशोधन किया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके। इसके अलावा संस्कृत शिक्षा सेवा नियमावली को भी औपचारिक रूप दिया गया है, जिससे शिक्षकों की सेवा संरचना और पदोन्नति प्रक्रिया को स्पष्ट किया जा सके।

    खनन क्षेत्र से जुड़े नियमों में भी संशोधन करते हुए रॉयल्टी दरों में बदलाव किया गया है। इससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाते हुए कक्षा स्तर के आधार पर अलग-अलग व्यवस्था लागू की गई है।

    इसके साथ ही मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए मधुमक्खी पालन आधारित नई नीति को भी मंजूरी दी गई है। यह नीति वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए नई आजीविका के अवसर पैदा करेगी।

  • Uttarakhand Board Result 2026 जारी 10वीं में 98% पास 12वीं में लड़कियों का जलवा

    Uttarakhand Board Result 2026 जारी 10वीं में 98% पास 12वीं में लड़कियों का जलवा


    नई दिल्ली । Uttarakhand Board of School Education ने वर्ष 2026 के लिए 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस साल करीब 2.15 लाख से ज्यादा छात्र इन परीक्षाओं में शामिल हुए थे और कुल मिलाकर परिणाम काफी उत्साहजनक रहे हैं।

    10वीं कक्षा का रिजल्ट इस बार बेहद शानदार रहा है। कुल 98.20 प्रतिशत छात्र परीक्षा में सफल हुए हैं जो पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। टॉपर्स की बात करें तो अक्षत गोपाल ने 98.20 प्रतिशत अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं ईशांत कोठारी और भूमिका ने 98 प्रतिशत के साथ दूसरा स्थान हासिल किया जबकि योगेश जोशी 97.80 प्रतिशत अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

    12वीं कक्षा के परिणामों में भी अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला है लेकिन इस बार खास बात यह रही कि लड़कियों ने बाजी मार ली। कुल पास प्रतिशत 85.11 रहा जिसमें लड़कियों का पास प्रतिशत 88.09 और लड़कों का 81.93 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके अलावा गीतिका पंत और सुशीला ने 98 प्रतिशत अंक हासिल कर टॉपर्स की सूची में अपना नाम दर्ज कराया।

    रिजल्ट देखने के लिए छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट ubse uk gov in और uaresults nic in पर जाकर आसानी से अपना परिणाम चेक कर सकते हैं। इसके लिए छात्रों को 10वीं या 12वीं के रिजल्ट लिंक पर क्लिक कर अपना रोल नंबर दर्ज करना होगा जिसके बाद स्क्रीन पर उनका परिणाम दिखाई देगा।

    अगर वेबसाइट पर अधिक ट्रैफिक के कारण दिक्कत आती है तो छात्र SMS के जरिए भी अपना रिजल्ट प्राप्त कर सकते हैं। 10वीं के छात्र UK10 रोल नंबर लिखकर 5676750 पर भेज सकते हैं जबकि 12वीं के छात्र UK12 रोल नंबर लिखकर इसी नंबर पर SMS भेजकर अपना परिणाम जान सकते हैं।

    इसके अलावा DigiLocker के माध्यम से भी छात्र अपनी डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें ऐप या वेबसाइट पर मोबाइल नंबर के जरिए लॉगिन करना होगा।

    इस साल की परीक्षा 21 फरवरी से 20 मार्च 2026 के बीच आयोजित की गई थी जबकि प्रैक्टिकल परीक्षाएं 16 जनवरी से 15 फरवरी तक हुई थीं। कुल मिलाकर इस बार का रिजल्ट छात्रों के लिए काफी सकारात्मक रहा है जहां 10वीं में रिकॉर्ड पास प्रतिशत और 12वीं में लड़कियों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है।

  • उत्तराखंड में अगले चुनाव में पुष्कर सिंह धामी ही होंगे CM का चेहरा- BJP अध्यक्ष ने किया ऐलान

    उत्तराखंड में अगले चुनाव में पुष्कर सिंह धामी ही होंगे CM का चेहरा- BJP अध्यक्ष ने किया ऐलान


    देहरादून।
    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (BJP National President Nitin Naveen) ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि उत्तराखंड (Uttarakhand) में अगले होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ही पार्टी का चेहरा होंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भाजपा, मौजूदा नेतृत्व के साथ ही विधानसभा चुनाव लड़ेगी।

    भाजपा अध्यक्ष ने दिल्ली में दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पुष्कर सिंह धामी और योगी आदित्यनाथ हमारे मुख्यमंत्री हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। निश्चित रूप से वे ही हमारे चेहरे होंगे। उन्हीं के नेतृत्व में भाजपा आगामी चुनाव में जाएगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस बयान के बाद उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के संबंध में सभी किंतु-परंतु पर विराम लग गया है। हालांकि, बीती 20 मार्च को मंत्रिमंडल विस्तार कर धामी ने नेतृत्व को लेकर लग रही अटकलों का पटाक्षेप कर दिया था, पर अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्पष्ट बयान के बाद तस्वीर बिलकुल साफ हो गई है।


    धामी सरकार की तारीफ

    नवीन ने धामी सरकार के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि चुनौतियों के बावजूद राज्य में विकास कार्यों पर प्रभावी ढंग से काम किया गया है। उन्होंने कहा कि हर राज्य की अपनी परिस्थितियां होती हैं। कई चुनौतियां होती हैं। प्रदेश ट्रैक रिकार्ड देखा जाता है। विकास की समीक्षा की जाती है। आमजन के जीवन में क्या बदलाव हुए, उन्हें भी जांचा परखा जाता है। विकास के लिहाज से गुड गवर्नेंस सरकार की यूएसपी होती है। इनमें धामी सरकार बेहतर रूप में आगे बढ़ी है। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में निश्चित तौर पर और बेहतर परिणाम आएंगे।

    सियासी जानकारों की मानें तो सीएम धामी अपनी कार्यप्रणाली से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का विश्वास जीतने में सफल रहे हैं। हाल में उत्तराखंड के दौरे पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, सभी ने धामी सरकार के कामकाज की सराहना की।

  • Uttarakhand में मदसरों के संचालन पर सख्ती… 11 शर्तों के बाद ही मिलेगी धार्मिक शिक्षा देने की मान्यता

    Uttarakhand में मदसरों के संचालन पर सख्ती… 11 शर्तों के बाद ही मिलेगी धार्मिक शिक्षा देने की मान्यता


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में मदरसों (Madrasas) के संचालन को लेकर नियम सख्त कर दिए गए हैं। अब अल्पसंख्यक प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि धारा-14 के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा किए बिना किसी भी मदरसे को धार्मिक शिक्षा (Religious Education) देने की मान्यता नहीं मिलेगी। इसके साथ ही सभी मदरसों को शिक्षा विभाग से भी नए सिरे से मान्यता लेनी होगी। इस फैसले के बाद प्रदेश भर में मदरसा संचालकों के बीच हलचल तेज हो गई है।

    शनिवार को अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जेएस रावत (JS Rawat) ने मदरसा संचालकों की बैठक बुलाई, जिसमें सभी को तय मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में मौलाना इफ्तिखार, कारी शहजाद और मौलाना रिहान गनी समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। अधिकारियों ने साफ किया कि नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

    इस समय 482 मान्यता प्राप्त मदरसे
    प्रदेश में इस समय 482 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं, जिनमें 50 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। देहरादून में 36 मदरसों को मान्यता मिली हुई है। मदरसा बोर्ड के निदेशक गिरधारी सिंह रावत ने देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने मदरसे नए मानकों पर खरे उतरते हैं।

    धार्मिक शिक्षा के नाम पर बरगलाना बर्दाश्त नहीं
    सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाना है। खासतौर पर वित्तीय लेनदेन, शिक्षकों की योग्यता और संस्थानों के संचालन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा कि धार्मिक शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
    मान्यता के लिए अनिवार्य शर्तें-
    – शैक्षणिक संस्थान अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित और संचालित हो।
    – संस्थान का शिक्षा परिषद से संबद्ध होना जरूरी है।
    – सोसायटी रजिस्ट्रार के पास संस्थान का पंजीकरण होना चाहिए।
    – संस्थान की जमीन सोसायटी के नाम पर दर्ज होनी चाहिए।
    – सभी वित्तीय लेनदेन संस्थान के आधिकारिक खाते से ही किए जाएं।
    – संस्थान की सोसायटी के सभी सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय से हों।
    – छात्रों और शिक्षकों को किसी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
    – केवल डिग्रीधारी शिक्षकों की ही नियुक्ति की जाएगी।
    – शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में परिषद और प्राधिकरण के निर्देश लागू होंगे।
    – संस्थान ऐसा कोई कार्य नहीं करेगा जिससे सांप्रदायिक और सामाजिक सद्भाव प्रभावित हो।