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  • जहां इंसानी अदालतें हार मान जाती हैं वहां न्याय करती हैं मां कोटगाड़ी देवी मन्नत पूरी होने पर चढ़ता है लोहे का हथौड़ा

    जहां इंसानी अदालतें हार मान जाती हैं वहां न्याय करती हैं मां कोटगाड़ी देवी मन्नत पूरी होने पर चढ़ता है लोहे का हथौड़ा


    नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ साथ अद्भुत धार्मिक आस्था और चमत्कारी मंदिरों के लिए भी पूरे देश में प्रसिद्ध है। इन्हीं पवित्र स्थलों में कुमाऊं क्षेत्र का मां कोटगाड़ी देवी मंदिर एक ऐसा अनोखा धाम है जहां भक्त फूल माला या नारियल नहीं बल्कि लोहे का हथौड़ा चढ़ाते हैं। यह परंपरा वर्षों पुरानी है और आज भी हजारों श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ इसका पालन करते हैं।

    स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मां कोटगाड़ी देवी का यह दरबार न्याय का अंतिम स्थान है। जब किसी व्यक्ति को अदालत पुलिस या समाज से न्याय नहीं मिलता तब वह पूरी आस्था के साथ माता के दरबार में अपनी फरियाद लेकर पहुंचता है। श्रद्धालु अपनी समस्या को लिखकर माता के चरणों में अर्पित करते हैं और विश्वास रखते हैं कि मां स्वयं उनके साथ हुए अन्याय का समाधान करती हैं।

    इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा लोहे का हथौड़ा चढ़ाने की है। माना जाता है कि हथौड़ा न्याय शक्ति और कठोर निर्णय का प्रतीक है। जिस प्रकार अदालत में न्याय का प्रतीक हथौड़ा माना जाता है उसी तरह यहां भक्त न्याय मिलने के बाद माता का आभार व्यक्त करने के लिए लोहे का हथौड़ा अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार तांबे का त्रिशूल या पीतल की घंटी भी भेंट करते हैं। मंदिर परिसर में लगे हजारों हथौड़े इस अनूठी परंपरा और भक्तों की अटूट आस्था की गवाही देते हैं।

    ग्रामीणों का विश्वास है कि मां कोटगाड़ी देवी के दरबार में झूठ और छल की कोई जगह नहीं है। यदि कोई व्यक्ति झूठी शपथ लेकर किसी निर्दोष को फंसाने का प्रयास करता है तो उसे अपने कर्मों का दंड अवश्य मिलता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में लोग माता के दरबार में असत्य बोलने से भी डरते हैं और न्याय के प्रति गहरी आस्था रखते हैं।

    हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश के अलग अलग हिस्सों से यहां पहुंचते हैं। कोई पारिवारिक विवाद लेकर आता है तो कोई जमीन के मामले में न्याय की उम्मीद करता है। कई लोग वर्षों बाद अपनी मनोकामना पूरी होने पर फिर मंदिर पहुंचकर माता के चरणों में हथौड़ा अर्पित करते हैं और धन्यवाद देते हैं। यही विश्वास इस मंदिर को देश के सबसे अनोखे धार्मिक स्थलों में शामिल करता है।

    चारों ओर फैले शांत पहाड़ और आध्यात्मिक वातावरण इस मंदिर की दिव्यता को और भी विशेष बना देते हैं। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु केवल दर्शन ही नहीं करते बल्कि मानसिक शांति और आत्मविश्वास का भी अनुभव करते हैं। मां कोटगाड़ी देवी का यह पवित्र धाम आज भी आस्था न्याय और विश्वास का अद्भुत संगम बना हुआ है। यदि कभी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की यात्रा करें तो इस अनोखे मंदिर के दर्शन अवश्य करें जहां लोगों का विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा और निष्कलंक मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।

  • उत्तराखंड में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, 32 सड़कें बंद, नदियां उफान पर

    उत्तराखंड में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, 32 सड़कें बंद, नदियां उफान पर


    नई दिल्ली। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में भूस्खलन की घटनाओं के कारण पहाड़ों से चट्टानें और मलबा सड़क पर आ गया है, जिससे आवागमन बाधित हो गया है। वहीं, लगातार बारिश से अलकनंदा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है और वे उफान पर बह रही हैं।

    राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, भूस्खलन और मलबा आने की वजह से प्रदेश में फिलहाल 32 सड़कें बंद हैं। प्रशासन ने बताया कि प्रभावित मार्गों से चट्टानें और मलबा हटाने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जा सके। इसके लिए संबंधित विभागों की टीमें लगातार मौके पर जुटी हुई हैं।

    मंगलवार को राज्य के कई इलाकों में भारी वर्षा दर्ज की गई। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के मुताबिक सबसे अधिक 107 मिमी बारिश पंतनगर में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा चोरगलिया में 79.5 मिमी, रुद्रपुर में 43.5 मिमी, यमकेश्वर में 38 मिमी और किच्छा में 32.5 मिमी वर्षा हुई। खानपुर में 27 मिमी, जबकि देहरादून और लक्सर में 19-19 मिमी बारिश दर्ज की गई। अन्य क्षेत्रों में हाथीबड़कला में 15 मिमी, पिथौरागढ़ में 8.9 मिमी और लोहाघाट में 8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।

    मौसम विज्ञान केंद्र ने बुधवार को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। साथ ही देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों के कुछ इलाकों में भारी बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है।

  • बदरीनाथ चढ़ावा विवाद में नया खुलासा, आरोपी कर्मचारी को मिला प्रमोशन और नोट गिनने की जिम्मेदारी

    बदरीनाथ चढ़ावा विवाद में नया खुलासा, आरोपी कर्मचारी को मिला प्रमोशन और नोट गिनने की जिम्मेदारी


    नई दिल्ली । उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच के बीच सामने आई जानकारी के अनुसार, आरोपों के घेरे में आए कर्मचारी को मंदिर समिति में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती रहीं। यही नहीं, उन्हें पदोन्नति देकर चढ़ावे की गणना जैसे संवेदनशील कार्य में भी लगाया गया था, जिससे पूरे मामले पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के मुताबिक संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति वर्ष 2014 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के रूप में हुई थी। यह ऐसा पद था, जहां पदोन्नति की व्यवस्था नहीं थी। इसके बावजूद वर्ष 2018 में उन्हें व्यक्तिगत सहायक के पद पर समायोजित किया गया। बाद में नियमों में संशोधन कर उनके लिए जनसंपर्क विशेष अधिकारी पद तक पदोन्नति का रास्ता भी तैयार किया गया। इसी दौरान उन्हें मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

    जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार

    मामले की जांच के लिए गठित समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, हालांकि समिति के सभी सदस्य अब तक बदरीनाथ नहीं पहुंचे हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    बीकेटीसी अध्यक्ष ने क्या कहा

    बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर स्वतंत्र या प्रशासनिक जांच भी कराई जा सकती है। उनका कहना है कि संबंधित कर्मचारी मंदिर समिति का स्थायी कर्मचारी है और विभिन्न अध्यक्षों के साथ कार्य कर चुका है। शिकायत मिलने के दिन ही जांच समिति गठित कर संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया था।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे बदले जरूर गए हैं, लेकिन पुराने कैमरों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है। यात्रा सीजन में कर्मचारियों की कमी के कारण कई बार अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी दी जाती हैं।

    संपत्ति की भी होगी जांच

    मंदिर समिति ने संकेत दिए हैं कि संदेह के घेरे में आए कर्मचारियों की संपत्ति की भी जांच की जाएगी। समिति के अनुसार चढ़ावे की राशि प्रतिदिन बैंक में जमा होती है और उसकी गणना बैंक प्रतिनिधि, गणना अधिकारी तथा तीर्थयात्रियों की मौजूदगी में की जाती है। अब तक रिकॉर्ड में किसी तरह की ओवरराइटिंग सामने नहीं आई है।

    कांग्रेस ने उठाए निष्पक्ष जांच पर सवाल

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों पर आरोप हैं, उनसे जुड़े अधिकारियों को ही जांच में शामिल करना उचित नहीं है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच विधानसभा की संयुक्त समिति या उच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के बिना श्रद्धालुओं का विश्वास बहाल नहीं हो सकता। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जाएगा।

  • उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म.. CM धामी ने की राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत

    उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड खत्म.. CM धामी ने की राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में बुधवार से मदरसा बोर्ड खत्म (Madrasa Board Abolished) हो गया। अब इसकी जगह राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (State Minority Education Authority) ने ले ली है। इसके तहत मुस्लिम समेत सभी 5 अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के शिक्षण संस्थान आएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व को अपनी ज्ञानधारा से सिंचित करने वाले उत्तराखंड की यह जिम्मेदारी है कि वह शिक्षा एवं संस्कार के मामले में एक आदर्श स्थापित करे।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने समाज के सभी वर्गों को अच्छी, संस्कार युक्त और आधुनिक शिक्षा देने के लिए पहली जुलाई से उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया गया है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल उत्तराखंड ही नहीं वरन पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी के रूप में ‘वन नेशन वन लॉ’ की तरह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के रूप में ‘वन नेशन वन एजुकेशन’ की शुरुआत भी उतराखंड से हो रही है। उत्तराखंड सरकार का संकल्प है कि राज्य में हर वर्ग, क्षेत्र और समुदाय के बच्चे को अच्छे संस्कार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।


    सपनों को मिलेगी नई उड़ान

    सीएम धामी ने कहा कि जब एक बच्चे को अच्छी शिक्षा मिलती है तो वह न केवल अपने भविष्य को बेहतर बनाता है वरन अपने परिवार, समाज और देश को बेहतर बनाने में अपना अमूल्य योगदान देता है। आज हम मात्र एक संस्था की शुरूआत नहीं कर रहे हैं वरन ऐसे भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं जिसके जरिए राज्य के हर बच्चे के सपनों को एक नई उड़ान मिलेगी।


    आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना है मकसद

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना किसी भी समुदाय की धार्मिक पहचान, परंपरा या अधिकारों को प्रभावित करने के लिए नहीं वरन समाज के सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए की गई है। हमारा मकसद आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाना है। हम चाहते हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय का हर बच्चा अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा रहे और विज्ञान, गणित, कम्प्यूटर, भाषा, और आधुनिक तकनीकों में भी दक्ष बने।


    आएगा सकारात्मक बदलाव

    सीएम धामी ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं वरन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगा। सीएम धामी ने उम्मीद जताई कि प्राधिकरण आने वाले समय में हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यह गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगा।

  • हरिद्वार-देहरादून हाईवे पर बड़ा हादसा, राजस्थान से आए यात्रियों की बस पलटी, कई घायल अस्पताल में भर्ती

    हरिद्वार-देहरादून हाईवे पर बड़ा हादसा, राजस्थान से आए यात्रियों की बस पलटी, कई घायल अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और यातायात मार्गों में शामिल Dehradun–Haridwar Highway पर सोमवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसने पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। यह दुर्घटना Haridwar के नगर कोतवाली क्षेत्र में स्थित शांतिकुंज के पास हुई, जहां राजस्थान से आए श्रद्धालुओं से भरी एक बस डंपर की टक्कर के बाद अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। हादसे में एक महिला की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक यात्री घायल बताए जा रहे हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार बस में सवार सभी यात्री Rajasthan से हरिद्वार दर्शन के लिए आए थे और धार्मिक यात्रा पूरी करने के बाद वापस लौट रहे थे। सुबह के समय बस जब सर्विस लेन से मुख्य हाईवे की ओर मुड़ रही थी, तभी रायवाला की दिशा से तेज गति में आ रहे डंपर ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का संतुलन बिगड़ गया और वह पलटकर सड़क पर जा गिरी।

    हादसे के बाद बस के भीतर मौजूद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और मौके पर भय का माहौल बन गया। कई यात्री बस के अंदर फंस गए, जिन्हें स्थानीय लोगों और पुलिस टीम की मदद से बाहर निकाला गया। घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई यात्रियों का उपचार जारी है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर के बाद डंपर भी अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक ढाबे में जा घुसा, जिससे वहां मौजूद लोगों में भी दहशत फैल गई। हादसे के बाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बस और डंपर को हटाना पड़ा, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात बहाल किया जा सका।

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और हादसे की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को दुर्घटना का मुख्य कारण माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा।

    यह हादसा एक बार फिर हाईवे पर यातायात सुरक्षा व्यवस्था और भारी वाहनों की रफ्तार पर गंभीर सवाल खड़े करता है। धार्मिक यात्राओं के दौरान बढ़ने वाले यातायात दबाव के बीच ऐसे हादसे चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा घायलों के इलाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया गया है।

  • जब पहाड़ों के लोगों ने खुद संभाली जिम्मेदारी, तब फूलों की घाटी ने बर्बादी से खूबसूरती तक का सफर तय किया

    जब पहाड़ों के लोगों ने खुद संभाली जिम्मेदारी, तब फूलों की घाटी ने बर्बादी से खूबसूरती तक का सफर तय किया

    नई दिल्ली । उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऊंचे पहाड़ों और मनमोहक घाटियों के लिए पूरी दुनिया में पहचान रखता है, लेकिन इसी खूबसूरत राज्य की एक प्रसिद्ध घाटी कभी पर्यावरणीय संकट के ऐसे दौर से गुजर रही थी, जहां उसकी पहचान और अस्तित्व दोनों खतरे में पड़ने लगे थे। दुनिया भर में अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर फूलों की घाटी एक समय भारी मात्रा में प्लास्टिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे के बोझ तले दब चुकी थी। लगातार बढ़ते पर्यटन और श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण यहां हालात इतने गंभीर हो गए थे कि घाटी का संवेदनशील पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने लगा था। हालांकि इसके बाद जो हुआ उसने केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सामने एक नई मिसाल पेश कर दी।

    कई वर्षों तक इस क्षेत्र में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ती रही, लेकिन कचरे के प्रबंधन की कोई प्रभावी व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी। नतीजा यह हुआ कि वर्षों तक प्लास्टिक और अन्य हानिकारक कचरा घाटी में जमा होता गया। धीरे-धीरे यह स्थिति एक बड़े पर्यावरणीय संकट में बदलने लगी। प्राकृतिक रूप से बेहद संवेदनशील इस हिमालयी क्षेत्र पर बढ़ते दबाव ने चिंता बढ़ा दी थी और लगने लगा था कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो इसकी खूबसूरती हमेशा के लिए प्रभावित हो सकती है।

    इसके बाद स्थानीय लोगों ने बदलाव की जिम्मेदारी खुद अपने हाथों में लेने का फैसला किया। गांवों के लोगों, सामाजिक समूहों और स्थानीय संस्थाओं ने मिलकर एक बड़े सफाई अभियान की शुरुआत की। यह केवल सरकारी प्रयास नहीं था बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई। लोगों ने घर-घर जाकर जागरूकता फैलाई और घाटी को दोबारा स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया। कुछ ही वर्षों में वर्षों से जमा भारी मात्रा में प्लास्टिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा हटाया गया।

    सबसे खास और प्रेरणादायक पहलू यह रहा कि लोगों ने केवल सफाई तक खुद को सीमित नहीं रखा। स्थानीय समुदाय ने अवैध अतिक्रमणों के खिलाफ भी पहल की और बड़ी संख्या में अस्थायी ढांचों और दुकानों को हटाने का फैसला लिया। यह काम आसान नहीं था क्योंकि इसमें आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां भी जुड़ी हुई थीं, लेकिन पर्यावरण को प्राथमिकता देते हुए लोगों ने कठिन फैसले लिए और घाटी को दोबारा संतुलित करने की दिशा में काम किया।

    सफाई अभियान के दौरान कचरे को घाटी से बाहर निकालना भी बड़ी चुनौती था। कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच लोगों ने निरंतर मेहनत की और कचरे को नीचे तक पहुंचाने के लिए पारंपरिक संसाधनों का इस्तेमाल किया। इस सामूहिक प्रयास ने यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर समाज ठान ले तो असंभव दिखने वाले काम भी संभव हो सकते हैं।

    आज जब दुनिया के कई पर्यटन स्थल प्लास्टिक प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट से जूझ रहे हैं, तब उत्तराखंड की यह कहानी एक मजबूत संदेश देती है। यह सिर्फ एक घाटी की सफाई की कहानी नहीं बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी की ऐसी मिसाल है जिसने दुनिया को यह दिखाया कि बदलाव केवल नीतियों से नहीं बल्कि लोगों की इच्छा शक्ति से भी आता है।

  • उत्तराखंड के पहाड़ों तक सफर होगा और आसान, नया बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे दिल्ली और लखनऊ को देगा सीधी रफ्तार

    उत्तराखंड के पहाड़ों तक सफर होगा और आसान, नया बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे दिल्ली और लखनऊ को देगा सीधी रफ्तार

    नई दिल्ली ।उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों तक यात्रा को और तेज, आसान और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाला नया बरेली-हल्द्वानी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे आने वाले समय में यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद न केवल पहाड़ों का सफर आसान होगा बल्कि दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से आने वाले यात्रियों को भी लंबी दूरी और ट्रैफिक जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

    यह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे पूरी तरह ग्रीनफील्ड परियोजना के रूप में तैयार किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि पुराने मार्गों का विस्तार करने के बजाय एक बिल्कुल नए मार्ग का निर्माण किया जाएगा। इससे यात्रा अधिक सुगम होगी और स्थानीय ट्रैफिक की बाधाओं से भी बचा जा सकेगा। प्रस्तावित मार्ग को नियंत्रित एक्सेस प्रणाली के तहत विकसित किया जाएगा, जिससे वाहन बिना किसी रुकावट के तेज गति से सफर कर सकेंगे।

    बताया जा रहा है कि यह एक्सप्रेसवे लगभग 100 किलोमीटर लंबा होगा और चार लेन की आधुनिक सड़क सुविधा से लैस रहेगा। इसके निर्माण के बाद बरेली से हल्द्वानी के बीच यात्रा करने वाले लोगों को बड़े शहरों और कस्बों में लगने वाले जाम से छुटकारा मिलेगा। अभी इस मार्ग पर कई ऐसे इलाके पड़ते हैं जहां अक्सर भारी ट्रैफिक देखने को मिलता है, जिसके कारण यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और यात्रा का समय भी बढ़ जाता है।

    नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद बरेली से हल्द्वानी तक पहुंचने का समय कम होने की संभावना जताई जा रही है। यात्रा के दौरान एक से डेढ़ घंटे तक की बचत हो सकती है, जो विशेष रूप से पर्यटन सीजन और छुट्टियों के दौरान बड़ी राहत साबित हो सकती है। हल्द्वानी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है और यहीं से नैनीताल समेत कई प्रसिद्ध पहाड़ी पर्यटन स्थलों की शुरुआत होती है।

    इस परियोजना का लाभ केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों के यात्रियों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा। वर्तमान में इन क्षेत्रों से उत्तराखंड की ओर जाने वाले मार्गों पर अक्सर भारी ट्रैफिक और जाम की स्थिति बनी रहती है। नए एक्सप्रेसवे को बड़े राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है, जिससे यात्रा और अधिक सरल हो सकेगी।

    आधुनिक सड़क परियोजनाएं केवल दूरी कम करने तक सीमित नहीं होतीं बल्कि वे क्षेत्रीय विकास, पर्यटन, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देती हैं। ऐसे में बरेली-हल्द्वानी एक्सप्रेसवे को भविष्य की एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में लाखों लोगों के सफर को नई रफ्तार दे सकती है।

  • देहरादून में दर्दनाक हादसा, पैनेसिया अस्पताल की ICU यूनिट में आग; धुएं से एक की मौत, कई मरीज प्रभावित

    देहरादून में दर्दनाक हादसा, पैनेसिया अस्पताल की ICU यूनिट में आग; धुएं से एक की मौत, कई मरीज प्रभावित

    नई दिल्ली । देहरादून से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक हादसे की खबर सामने आई है, जहां शहर के एक प्रमुख अस्पताल पैनेसिया में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। यह घटना अस्पताल के आईसीयू वार्ड में हुई, जहां अचानक एयर कंडीशनर में विस्फोट होने के बाद आग तेजी से फैल गई और पूरे वार्ड में घना धुआं भर गया। इस हादसे में एक मरीज की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य मरीजों के प्रभावित होने और घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। धुएं की वजह से आईसीयू में भर्ती मरीजों को सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई, जिससे स्थिति और भी अधिक भयावह हो गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।

    हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर या अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया ताकि उनकी देखभाल में किसी तरह की कमी न रहे। प्रशासन ने तुरंत स्थिति को नियंत्रण में लेते हुए पूरे परिसर को खाली करवा लिया और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया।

    इस घटना के बाद गढ़वाल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह आग ICU में लगे एयर कंडीशनर के फटने के कारण लगी, लेकिन वास्तविक कारणों की जांच अभी जारी है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल का संचालन एक निजी ग्रुप द्वारा लीज पर किया जा रहा था, इसलिए फायर सेफ्टी मानकों और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जांच की जाएगी।

    प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं और ऐसी भयावह घटना कैसे हुई। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आपात स्थिति में अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया कितनी प्रभावी थी।

    यह हादसा न केवल अस्पताल प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा करता है। फिलहाल राहत कार्य पूरा कर लिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।

  • उत्तराखंड के चंपावत में 16 साल की किशोरी से गैंगरेप…. भाजपा नेता, एक अग्निवीर समेत 3 पर केस

    उत्तराखंड के चंपावत में 16 साल की किशोरी से गैंगरेप…. भाजपा नेता, एक अग्निवीर समेत 3 पर केस


    चंपावत।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) के चम्पावत (Champawat) में दोस्त संग शादी में गई 16 वर्षीय किशोरी (16-Year-old Teenager) दरिंदगी का शिकार हो गई। उसके दोस्त, भाजपा नेता समेत तीन लोगों ने चाकू नोक पर उसके साथ गैंगरेप किया। पीड़िता एक सुनसान घर में निर्वस्त्र मिली। उसके हाथ-पैर भी बंधे हुए थे। पुलिस ने तीनों आरोपियों पर केस दर्ज कर लिया है। फिलहाल तीनों फरार हैं। आरोपियों में एक अग्निवीर बताया जा रहा है।

    पुलिस के अनुसार, पीड़ित के पिता ने तहरीर देकर बताया कि उनकी बेटी चम्पावत की एक दुकान में काम करती है। पांच मई की शाम को वह घर नहीं लौटी। फोन करने पर उसने बताया कि सल्ली निवासी उसका दोस्त विनोद सिंह रावत उसे एक शादी समारोह में ले गया है। लेकिन, देर रात तक वह घर नहीं लौटी। रात करीब डेढ़ बजे बेटी ने पिता को फोन किया, लेकिन तुरंत कट गया और फिर मोबाइल ऑफ हो गया। पिता ने इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी। बुधवार तड़के चार बजे पुलिस और ग्रामीणों को किशोरी सल्ली गांव में एक बंद कमरे में रस्सी से बंधी मिली।


    चाकू की नोंक पर दरिंदगी

    किशोरी ने बताया कि सल्ली निवासी 20 वर्षीय विनोद सिंह रावत, 30 वर्षीय नवीन सिंह और भाजपा नेता 45 वर्षीय पूरन सिंह रावत ने गले पर चाकू रखकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद तीनों ने रस्सी से बांधकर उसे कमरे में बंद कर दिया। कोतवाल बीएस बिष्ट ने बताया कि मामले की जांच एसआई प्रियंका मौर्या को सौंपी गई है। घटनास्थल पर फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए गए हैं।

    पीड़ित किशोरी का मेडिकल कराकर उसकी काउंसलिंग कराई गई है। पूरन सिंह रावत पूर्व में तल्लादेश से भाजपा का मंडल उपाध्यक्ष और सल्ली गांव का प्रधान रह चुका है। भाजपा के तल्लादेश मंडल अध्यक्ष कैलाश सिंह बोहरा ने बताया कि कुछ समय पूर्व नई कार्यकारिणी के गठन में उसे पद से हटाया गया था।


    चम्पावत को चौथी गैंग रेप की वारदात ने दहलाया

    चम्पावत में हुए गैंगरैप की वारदात ने पहाड़ की शांत वादियों को झकझोर कर रख दिया है। गैंगरेप की घटना से महिला सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 13 साल के भीतर ही यह चौथी शर्मशार करने वाली वारदात है।


    पीड़िता के पिता ने कराया मुकदमा

    चम्पावत में मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने देवभूमि को एक बार फिर से हिला कर रख दिया है। इस घटना ने एक बार फिर से महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता के पिता की दी तहरीर में कहा गया है कि तीन लोगों ने उसके साथ चाकू और धारदार हथियार बसूला को उसके गर्दन पर रख कर गैंग रेप किया। पुलिस पूछताछ में उसने ये भी बताया कि तीनों ने उसे रस्सी से बांध कर कमरे में बंद कर दिया। वैसे जिले में गैंगरेप की ये पहली वारदात नहीं है। इससे पूर्व भी जिले में गैंगरेप के मामले हो चुके हैं।


    पूर्व में गैंगरेप के मामले

    वर्ष 2003 में चम्पावत में सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तीन को हिरासत में लिया गया था। अक्टूबर 2023 में सूखीढांग क्षेत्र में एक महिला के साथ तीन लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। जबकि जुलाई 2024 में तल्लापाल बिलौना क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ तीन युवकों ने दुष्कर्म किया था। तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। बहरहाल जो भी हो गैंगरेप से महिला सुरक्षा पर खतरा है।

    चंपावत एसपी रेखा यादव ने बताया कि चम्पावत के सल्ली गांव में 16 साल की एक नाबालिग बालिका से सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई है। पीड़िता के पिता की तहरीर पर तीनों आरोपियों के खिलाफ चम्पावत कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है। जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    गैंगरेप का एक आरोपी अग्निवीर में भर्ती!
    आरोपी विनोद का चयन अग्निवीर में हुआ था। कुछ समय पूर्व बनबसा में हुई भर्ती के दौरान विनोद ने शारीरिक दक्षता और मेडिकल पास किया था। बताया जाता है कि विनोद का अग्निवीर का कॉल लेटर आना शेष था।


    फॉरेंसिक टीम ने जांच की

    चम्पावत। गैंगरेप की घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है। फारेंसिक टीम ने सल्ली स्थित डेयरी के पास के कमरे में पहुंच कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी के अनुसार फील्ड यूनिट ने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्रित किए।


    पिता के संरक्षण में भेजी नाबालिग बालिका

    बुधवार को जिला अस्पताल में पीड़िता का मेडिकल चेकअप किया गया। जिसके बाद सीडब्ल्यूसी ने पीड़िता की काउंसलिंग की। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष आनंदी अधिकारी ने बताया कि काउंसलिंग में पीड़िता ने बीमार पिता के साथ रहने की इच्छा जताई। उन्होंने बताया कि इसके बाद पीड़िता को पिता के संरक्षण में भेज दिया। साथ ही किसी भी तरह की दिक्कत होने पर कमेटी को जानकारी देने के लिए कहा गया। उन्होंने बताया कि काउंसलिंग के बाद जांच अधिकारी पीड़िता को लेकर 164 के बयान लिए कोर्ट ले गई।

  • देहरादून कैबिनेट बैठक: विकास कार्यों और भर्तियों में बड़ा सुधार, कुंभ 2027 पर विशेष फोकस

    देहरादून कैबिनेट बैठक: विकास कार्यों और भर्तियों में बड़ा सुधार, कुंभ 2027 पर विशेष फोकस


    नई दिल्ली ।
    देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस बैठक में कुंभ 2027 की तैयारियों को लेकर विशेष रूप से तेज़ी लाने पर जोर दिया गया, साथ ही विभिन्न विभागों की नीतियों और भर्ती प्रक्रियाओं में अहम बदलावों को मंजूरी दी गई।

    बैठक का सबसे प्रमुख फोकस आने वाले कुंभ मेले की तैयारियों पर रहा। सरकार ने निर्माण कार्यों और विकास परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय लिया है, जिससे काम तेजी से आगे बढ़ सके। छोटे और बड़े कार्यों की स्वीकृति के लिए अलग-अलग स्तर तय किए गए हैं, ताकि समय की बचत हो और परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें।

    वन विभाग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। वन दरोगा पद के लिए अब शैक्षणिक योग्यता को बढ़ाकर स्नातक कर दिया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया और अधिक योग्य उम्मीदवारों पर केंद्रित होगी। इसके साथ ही आयु सीमा में भी संशोधन किया गया है। वन आरक्षी पदों के लिए भी नई आयु सीमा लागू की गई है, जिससे भर्ती मानकों को अपडेट किया जा सके।

    परिवहन विभाग में भी कई अहम निर्णय लिए गए हैं। राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई बसों की खरीद को मंजूरी दी गई है। पहले निर्धारित संख्या में बढ़ोतरी करते हुए अब अधिक बसें खरीदने का फैसला लिया गया है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

    शिक्षा क्षेत्र में विशेष शिक्षा शिक्षक भर्ती नियमों में संशोधन किया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके। इसके अलावा संस्कृत शिक्षा सेवा नियमावली को भी औपचारिक रूप दिया गया है, जिससे शिक्षकों की सेवा संरचना और पदोन्नति प्रक्रिया को स्पष्ट किया जा सके।

    खनन क्षेत्र से जुड़े नियमों में भी संशोधन करते हुए रॉयल्टी दरों में बदलाव किया गया है। इससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाते हुए कक्षा स्तर के आधार पर अलग-अलग व्यवस्था लागू की गई है।

    इसके साथ ही मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए मधुमक्खी पालन आधारित नई नीति को भी मंजूरी दी गई है। यह नीति वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए नई आजीविका के अवसर पैदा करेगी।