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  • देहरादून पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 22 SI-ASI के तबादले, नई तैनाती पर तत्काल कार्यभार संभालने के निर्देश

    देहरादून पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 22 SI-ASI के तबादले, नई तैनाती पर तत्काल कार्यभार संभालने के निर्देश

    नई दिल्ली ।उत्तराखंड के देहरादून में पुलिस विभाग में फेरबदल किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर 19 उपनिरीक्षक और दो अपर उपनिरीक्षक नागरिक समेत कुल 22 पुलिस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। तबादला आदेश के तहत अधिकारियों को अलग-अलग थानों, चौकियों, शाखाओं और पुलिस लाइन से नई जगहों पर भेजा गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को नई तैनाती पर तत्काल कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

    तबादला सूची के अनुसार उपनिरीक्षक दुर्गेश कोठियाल को वसंत विहार से कैंट भेजा गया है। उपनिरीक्षक ओमप्रकाश को कैंट से वसंत विहार में नई तैनाती मिली है। उपनिरीक्षक मनोहर सिंह रावत का डोईवाला से नेहरू कॉलोनी तबादला किया गया है। अपर उपनिरीक्षक देवेंद्र नेगी को पुलिस लाइन से पटेल नगर भेजा गया है, जबकि मनमोहन को पुलिस लाइन से क्लेमेंटाउन में तैनाती दी गई है।

    राजीव धारीवाल को सहसपुर से वसंत विहार भेजा गया है। मुकेश थलेड़ी का तबादला आईएसबीटी ऋषिकेश चौकी से पटेल नगर थाना किया गया है। प्रवीण पुंडीर को सहसपुर से पटेल नगर भेजा गया है। प्रमोद शाह को पटेल नगर से कोतवाली नगर में नई जिम्मेदारी दी गई है।

    दिनेश चमोली को पुलिस लाइन से आईएसबीटी ऋषिकेश चौकी भेजा गया है। रवि प्रसाद कवि का तबादला प्रेमनगर से एसआईएस शाखा किया गया है। अमन चड्ढा को कोतवाली नगर से एसआईएस शाखा भेजा गया है।

    सोमवीर को एसआईएस शाखा से रायपुर भेजा गया है। जसपाल गुसाईं को एसआईएस शाखा से सहसपुर में नई तैनाती मिली है। मुकेश नेगी को वसंत विहार से ऋषिकेश थाना भेजा गया है। विनेश कुमार को त्रिवेणीघाट चौकी से एम्स ऋषिकेश चौकी और देवेंद्र पंवार को एम्स ऋषिकेश चौकी से त्रिवेणीघाट चौकी भेजा गया है।

    इसके अलावा सचिन पुंडीर को पुलिस लाइन से डोईवाला भेजा गया है। मुकेश कुमार को प्रेमनगर से रायवाला और जगदंबा प्रसाद को रायवाला से प्रेमनगर में तैनाती दी गई है। चंद्रशेखर नौटियाल को विकासनगर से प्रेमनगर भेजा गया है। इस फेरबदल के तहत कई अधिकारियों के मौजूदा कार्यक्षेत्र बदलकर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    तबादला आदेश में अजय प्रकाश भट्ट से संबंधित पूर्व स्थानांतरण आदेश को भी निरस्त किया गया है। अजय प्रकाश भट्ट का पहले विकासनगर से कैंट तबादला किया गया था, लेकिन अब उस आदेश को रद्द कर दिया गया है।

    सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी नई तैनाती वाले स्थान पर तत्काल प्रभाव से कार्यभार ग्रहण करें। इसके तहत अधिकारियों को संबंधित थानों, चौकियों और शाखाओं में पहुंचकर अपनी नई जिम्मेदारी संभालनी होगी।

    पुलिस विभाग के इस फेरबदल में पुलिस लाइन से कई अधिकारियों को अलग-अलग थानों और चौकियों में भेजा गया है। वहीं कुछ अधिकारियों को एक थाना या शाखा से दूसरी जगह तैनात किया गया है। तबादला आदेश के साथ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियों के अनुसार काम संभालने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    इस फेरबदल में देहरादून शहर के साथ ऋषिकेश और आसपास के पुलिस क्षेत्रों से जुड़े अधिकारियों की तैनाती में भी बदलाव किया गया है। अधिकारियों को तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए जाने के बाद नई तैनाती प्रभावी हो गई है। साथ ही अजय प्रकाश भट्ट के पूर्व विकासनगर से कैंट स्थानांतरण आदेश को निरस्त कर दिया गया है।

  • यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू, फरवरी-मार्च 2027 में मतदान की तैयारी तेज होने के संकेत

    यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू, फरवरी-मार्च 2027 में मतदान की तैयारी तेज होने के संकेत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी और प्रशासनिक तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। मौजूदा परिस्थितियों और प्रशासनिक तैयारियों को देखते हुए इन राज्यों में फरवरी से मार्च के बीच मतदान कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    पांचों राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा चुनावी राज्य है और यहां विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा। इसके बावजूद चुनाव इससे काफी पहले कराए जा सकते हैं। यदि फरवरी या मार्च में मतदान होता है, तो उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से करीब दो महीने पहले ही अपने प्रतिनिधियों के चुनाव का मौका मिल जाएगा।

    मौजूदा समय में पांचों राज्यों के विधानसभा कार्यकाल समाप्त होने की तारीखों पर नजर डालें तो सबसे पहले मणिपुर का कार्यकाल 13 मार्च 2027 को पूरा होगा। इसके अगले दिन यानी 14 मार्च को गोवा विधानसभा का कार्यकाल खत्म होगा। पंजाब विधानसभा का कार्यकाल 16 मार्च और उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल 28 मार्च 2027 को समाप्त होना है। उत्तर प्रदेश में सबसे बाद में 22 मई 2027 को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होगा।

    ऐसे में चुनाव कार्यक्रम इस तरह तैयार किए जाने की संभावना है कि पांचों राज्यों में मतदान की प्रक्रिया 13 मार्च से पहले पूरी हो जाए। निर्वाचन प्रक्रिया पूरी करने और परिणाम घोषित करने के लिए चुनाव आयोग को पर्याप्त समय की जरूरत होगी। इसी वजह से फरवरी से मतदान शुरू होने की संभावना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    चुनाव की तैयारियों में जनगणना और मतदाता सूची से जुड़े काम भी महत्वपूर्ण हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में जनगणना का काम 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच पूरा किए जाने की योजना है। चुनाव और जनगणना दोनों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है। खासतौर पर शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की तैनाती दोनों प्रक्रियाओं में होने के कारण इनके बीच समय का तालमेल बेहद जरूरी होता है।

    जनगणना की तारीखों में बदलाव से चुनावी प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर संभावित टकराव कम होने की उम्मीद है। इससे चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन के लिए चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना आसान हो सकता है।

    मतदाता सूची को लेकर भी पांचों राज्यों में प्रक्रिया चल रही है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या करीब 13.4 करोड़ बताई गई है। गोवा में यह संख्या करीब 10.6 लाख और मणिपुर में करीब 19.3 लाख रह गई है। पंजाब और उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची जारी होने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी।

    आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सीटों के समीकरण, उम्मीदवारों के चयन, गठबंधन की संभावनाओं और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां आने वाले महीनों में और तेज होने की उम्मीद है। खासकर उत्तर प्रदेश में चुनावी मुकाबला राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक असर डाल सकता है।

    हालांकि मतदान की सटीक तारीखों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। अंतिम चुनाव कार्यक्रम निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित किया जाएगा। फिलहाल प्रशासनिक तैयारियों और विधानसभा कार्यकाल की समयसीमा को देखते हुए फरवरी-मार्च 2027 का दौर पांचों राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • देशभर में 11 सितंबर तक भारी बारिश के आसार… उत्तराखंड-हिमाचल में फ्लैश फ्लड की चेतावनी

    देशभर में 11 सितंबर तक भारी बारिश के आसार… उत्तराखंड-हिमाचल में फ्लैश फ्लड की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    देशभर में मौसम प्रणालियों (Weather systems) की सक्रियता के चलते उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्व, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के तमाम हिस्सों में 11 सितंबर तक तेज बारिश (Heavy rain), आंधी-तूफान की संभावना है। कुछ इलाकों में बिजली भी गिर सकती है। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड (Uttarakhand) के आठ और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के एक जिले में अगले 24 घंटे के दौरान अचानक बाढ़ (Flash flood) का खतरा है। बिहार में प्रमुख नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने से बाढ़ का कहर बरकरार है और 16 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की ऊंची चोटियों पर सीजन की पहली बर्फबारी हुई है।


    आईएमडी की बुलेटिन में क्या?

    भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से शनिवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, उत्तराखंड के बागेश्वर, चमोली, चंपावत, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल और उत्तरकाशी जिलों व हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में 6 सितंबर सुबह 11:30 बजे तक अचानक बाढ़ आ सकती है। पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 6 सितंबर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 8 सितंबर तक व्यापक वर्षा के आसार हैं।

    एमपी में बारिश का कहर जारी: आज 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
    मध्यप्रदेश में मानसून अब बाढ़ और उफनती नदियों वाला दौर दिखा रहा है। पूर्वी हिस्से में लगातार बारिश के बाद अब पश्चिम और उत्तरी जिलों में भी मानसून सक्रिय है। नर्मदा समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। भोपाल के भदभदा और कलियासोत के साथ बरगी बांध के गेट भी खोले गए हैं। नदी-नालों के उफान और बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण कई इलाकों में लोगों को सतर्क किया गया है। मौसम केंद्र ने रविवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, पन्ना और सतना में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, उज्जैन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, जबलपुर, मंडला, रीवा, सीधी, सिंगरौली समेत कई जिलों में हल्की से तेज बारिश हो सकती है।


    राजस्थान में मानसून फिर एक्टिव, 20 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

    राजस्थान में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। शनिवार को जयपुर समेत कई जिलों में दिनभर बारिश हुई। आज भी 20 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है। लगातार बारिश के कारण कई नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। सवाई माधोपुर, बारां, बूंदी और कोटा में कई जगह नदी की रपट डूब गईं। बारिश के कारण पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में दिन के तापमान में 6 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई। जयपुर, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, दौसा और सवाई माधोपुर समेत कई जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री से नीचे रहा। इससे दिन में भी मौसम ठंडा हो गया। मौसम विभाग के अनुसार बारिश का दौर 8 सितंबर तक जारी रह सकता है। इसके बाद करीब एक सप्ताह तक प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कम रहने की संभावना है।


    हिमाचल में परियोजना को नुकसान

    हिमाचल प्रदेश में शिमला जिले के काशापाट पंचायत के कंडे में शुक्रवार रात बादल फटने से नोगली खड्ड में बाढ़ आ गई। इससे सेरीपुल स्थित गंगाधारी जलविद्युत परियोजना के भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ का पानी अपने साथ बड़ी मात्रा में मलबा लेकर आया, जो प्रोजेक्ट की संरचनाओं के आसपास जमा हो गया है। प्रदेश में 85 सड़कें, 51 पेयजल योजनाएं और 29 बिजली ट्रांसफार्मर भी बारिश और बाढ़ से प्रभावित हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ऊंचे इलाकों में शनिवार को मौसम की पहली बर्फबारी हुई। गुमरी-जोजिला मार्ग के ऊंचे पहाड़ों, गुलमर्ग के ऊंचे इलाकों और पीर पंजाल रेंज में ऊंचे इलाके बर्फ से चमक उठे। ताटाकूटी पीक की चोटी और ऊपरी ढलानों पर भी हल्की बर्फबारी दर्ज की गई।


    मध्य और पूर्वी भारत में बढ़ा खतरा

    आईएमडी के अनुसार, मध्य भारत में पश्चिमी मध्य प्रदेश में 6-7 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश में 5-8 सितंबर, छत्तीसगढ़ में 8-11 सितंबर और विदर्भ में 11 सितंबर को व्यापक वर्षा का अनुमान है। पूर्वी भारत के अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 11 सितंबर तक व्यापक वर्षा होगी। बिहार में 7 से 11 सितंबर तक भारी बारिश होगी।


    क्यों हो रही है इतनी बारिश?

    मौसम विज्ञानियों के अनुसार, उत्तरी मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र शनिवार सुबह कमजोर होकर उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश व दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर स्थित हो गया है, जिसके अगले दो दिनों में पूर्व-उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही निचले क्षोभमंडल में दक्षिणी हरियाणा से दक्षिणी असम तक और दक्षिणी गुजरात से उत्तरी बांग्लादेश तक दो अलग-अलग निम्न दबाव के क्षेत्र सक्रिय हैं।

  • उत्तराखंड में 13 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील…. नेपाल तबाही के बाद CM ने किया अलर्ट

    उत्तराखंड में 13 ग्लेशियल झीलें संवेदनशील…. नेपाल तबाही के बाद CM ने किया अलर्ट


    देहरादून।
    नेपाल (Nepal) में फ्लैश फ्लड (Flash flood) से भारी तबाही के बाद अब उत्तराखंड (Uttarakhand) में 13 ग्लेशियल झीलों (Glacial lakes) को संवेदनशील माना गया है. इन झीलों से पहाड़ी इलाकों में खतरे की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami) ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने झीलों की नियमित निगरानी करने को कहा है. साथ ही सुरक्षा के इंतजाम मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।

    मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन को जरूरी कदम उठाने को कहा है. उन्होंने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक तरीके से निगरानी करने के निर्देश दिए. इन इलाकों में आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने को कहा गया है. जरूरत के हिसाब से इनकी संख्या भी बढ़ाई जाएगी।

    सीएम धामी ने संवेदनशील ग्लेशियल झीलों का व्यापक सर्वे कराने को कहा है. इन झीलों की स्थिति की नियमित जांच होगी. पानी के स्तर पर भी नजर रखी जाएगी. झीलों के आकार में होने वाले बदलाव को भी रिकॉर्ड किया जाएगा।

    इसके अलावा झीलों के आसपास के पहाड़ी इलाकों की स्थिति की भी जांच होगी. संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी. इससे किसी भी आपदा की स्थिति में समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सकेगा.


    सेंसर और वार्निंग सिस्टम होंगे मजबूत

    मुख्यमंत्री ने संवेदनशील इलाकों में आधुनिक सेंसर लगाने पर जोर दिया है. पानी का स्तर मापने वाले उपकरण भी लगाए जाएंगे. संचार व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा. इन तकनीकी संसाधनों से खतरे की जानकारी समय पर मिल सकेगी.

    अधिकारियों को सुरक्षित निकासी के रास्तों की पहचान करने के निर्देश भी दिए गए हैं. स्थानीय स्तर पर चेतावनी व्यवस्था मजबूत की जाएगी. राहत और बचाव की तैयारियों को भी बेहतर किया जाएगा. आपदा की स्थिति में लोगों को जल्द सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।

    नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ के बाद उत्तराखंड में भी आपदा को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है. इसी को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से सभी जिलों के जिलाधिकारियों के साथ बैठक की गई.

    बैठक में आपदा से निपटने की तैयारियों की समीक्षा हुई. जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में संभावित खतरे वाले इलाकों की नियमित निगरानी करने को कहा गया. किसी भी तरह की असामान्य गतिविधि दिखने पर तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी देने के निर्देश दिए गए।


    चार झीलों का सर्वे पूरा

    राज्य आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखंड में कुल 13 ग्लेशियल झीलों को संवेदनशील चिन्हित किया गया है. इनमें से चार झीलों का सर्वे पहले ही पूरा किया जा चुका है।

    बाकी संवेदनशील झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से सर्वे कराया जाएगा. इन झीलों की वैज्ञानिक जांच की जाएगी. चमोली जिले की सरस्वती ताल और उत्तरकाशी जिले की केदारताल के सर्वे के लिए जल्द विशेषज्ञों की टीम भेजी जाएगी।

    संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को संभावित खतरे के बारे में जानकारी दी जाएगी. उन्हें आपदा के समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी बताया जाएगा. लोगों को सुरक्षित स्थान और निकासी के रास्तों की जानकारी दी जाएगी।

    सरकार का जोर आपदा से पहले तैयारी मजबूत करने पर है. नियमित निगरानी और समय पर चेतावनी से बड़े खतरे को कम करने की कोशिश की जा रही है. संवेदनशील ग्लेशियल झीलों पर नजर रखने के साथ राहत और बचाव व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

  • उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी डॉक्टर शाम को अस्पतालों में कर सकेंगे निजी प्रैक्टिस, माननी होंगी तीन शर्तें..

    उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी डॉक्टर शाम को अस्पतालों में कर सकेंगे निजी प्रैक्टिस, माननी होंगी तीन शर्तें..

    नई दिल्ली । उत्तराखंड सरकार राज्य की स्वास्थ सेवाओं को अधिक सुदृढ़ और आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों को शाम के समय अस्पताल परिसर के भीतर ही निजी प्रैक्टिस करने की सशर्त छूट प्रदान की जाएगी। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य मरीजों को किफायती दर पर शाम के वक्त भी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    वर्तमान में राज्य के सरकारी डॉक्टरों के लिए निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू है, जिसके एवज में सरकार उन्हें नियमित वेतन के साथ नॉन प्रैक्टिस अलाउंस का भुगतान करती है। हालांकि, कतिपय व्यावहारिक समस्याओं और मरीजों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने शाम के समय अस्पतालों के बुनियादी ढांचे का उपयोग करते हुए यह सुविधा देने का मॉडल तैयार किया है।

    इस नई व्यवस्था को पूरी तरह से ऐच्छिक रखा जाएगा और इसके संचालन के लिए तीन प्रमुख शर्तें अनिवार्य की गई हैं। पहली शर्त के अनुसार डॉक्टरों को मरीजों से बेहद न्यूनतम परामर्श शुल्क लेने की अनुमति होगी। दूसरी शर्त यह है कि परामर्श के दौरान डॉक्टर बाहर की दवाइयां नहीं लिख सकेंगे, बल्कि अस्पताल में उपलब्ध या जेनेरिक दवाएं ही सुझानी होंगी। तीसरी शर्त के तहत यदि मरीज को किसी प्रकार के ऑपरेशन या गंभीर इलाज की आवश्यकता होती है, तो वह प्रक्रिया केवल सरकारी अस्पताल में ही पूरी की जाएगी।

    स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गई है और जल्द ही इसे औपचारिक स्वीकृति के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से डॉक्टरों को अस्पताल परिसर के बाहर अनधिकृत क्लिनिक चलाने की आवश्यकता नहीं होगी और अस्पताल के संसाधनों का भी अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    विशेष रूप से पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में दोपहर दो बजे के बाद सरकारी अस्पतालों में सेवाएं सीमित हो जाती थीं। नई नीति लागू होने से पर्वतीय जिलों के निवासियों को शाम के समय भी विशेषज्ञ डॉक्टरों का परामर्श अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में ही प्राप्त हो सकेगा। इससे निजी अस्पतालों और महंगे क्लीनिकों पर मरीजों की निर्भरता काफी हद तक कम होगी।

    मध्य प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के स्वास्थ्य विभागों द्वारा भी इस प्रकार के हाइब्रिड हेल्थकेयर मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों की दक्षता को बढ़ाया जा सके। उत्तराखंड में इस निर्णय के लागू होने से न केवल आम मरीजों को कम खर्च में बेहतर इलाज मिलेगा, बल्कि सरकारी डॉक्टरों की कार्यक्षमता का भी राज्य के स्वास्थ्य ढांचे के हित में सही उपयोग हो सकेगा।

  • अपने होम स्टेट में घर बसाना चाहते हैं ऋषभ पंत, तीन साल से जमीन की तलाश के बाद सीएम से लगाई गुहार

    अपने होम स्टेट में घर बसाना चाहते हैं ऋषभ पंत, तीन साल से जमीन की तलाश के बाद सीएम से लगाई गुहार

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत इन दिनों श्रीलंका दौरे पर हैं, लेकिन इस बीच उनका एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गया है। पंत ने उत्तराखंड में जमीन नहीं मिलने को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली से अपने गृह राज्य उत्तराखंड में वापस आकर बसना चाहते हैं और इसके लिए लंबे समय से जमीन तलाश रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक उपयुक्त जमीन नहीं मिल सकी है।

    ऋषभ पंत ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित करते हुए कहा कि वह लंबे समय से उत्तराखंड में जमीन लेने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट होना चाहते हैं और अपने परिवार के साथ अपने राज्य में रहना चाहते हैं। पंत ने बड़ी और अच्छी जमीन की जरूरत बताई, जहां वह अपना घर बना सकें और स्थायी रूप से रह सकें।

    पंत ने अपनी पोस्ट में उत्तराखंड के प्रति अपने लगाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह अपने राज्य से बेहद प्यार करते हैं और पहाड़ के लोगों के बीच रहना चाहते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले को देखने और जमीन उपलब्ध कराने में मदद करने की अपील की। पंत के मुताबिक, इस प्रयास को करीब तीन साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें जमीन नहीं मिल पाई है।

    क्रिकेटर ने यह भी कहा कि उन्हें उत्तराखंड को प्रमोट करने के उद्देश्य से कुछ अन्य जमीन भी मिलनी थी, लेकिन वह प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद पंत ने एक और पोस्ट करते हुए कहा कि अपने राज्य के लिए देश का उच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व करने के बदले अगर राज्य की ओर से घर बनाने के लिए जमीन मिल जाए तो यह उनके लिए खुशी की बात होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर वह सरकार से जमीन खरीदने के लिए तैयार हैं।

    ऋषभ पंत की अपील पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिक्रिया देते हुए मदद का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने पंत को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने खेल और उपलब्धियों से देश-दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। उन्होंने पंत की मातृभूमि के प्रति भावना और उत्तराखंड लौटकर योगदान देने की इच्छा की सराहना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंत द्वारा उठाए गए मामले के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अधिकारी जल्द ही ऋषभ पंत से संपर्क करेंगे और नियमानुसार हरसंभव सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इससे पंत की जमीन से जुड़ी समस्या के समाधान की उम्मीद बढ़ी है।

    हालांकि, ऋषभ पंत उत्तराखंड में पूरी तरह जमीनविहीन नहीं हैं। रुड़की में उनके परिवार का करीब दो से ढाई हजार वर्ग गज में फैला पैतृक मकान है। इसी परिसर में उनके पिता स्वर्गीय राजेंद्र पंत पहले न्यू मॉडर्न पब्लिक स्कूल भी चलाते थे। परिवार का यह आवास आज भी मौजूद है और वहां ऋषभ पंत की मां रहती हैं। मकान पर उनके पिता के साथ ऋषभ पंत के नाम की नेम प्लेट भी लगी हुई है।

    पंत का पैतृक संबंध पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट विकासखंड के गांव पाली से भी है। गांव में उनके परिवार के सदस्य और उनके दो चाचा जगदीश चंद्र पंत और हेम पंत रहते हैं। ऐसे में उत्तराखंड में जमीन और घर को लेकर पंत की इच्छा उनके पुराने पारिवारिक जुड़ाव से भी जुड़ी हुई है। अब मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • उत्तराखंड की रहस्यमयी पाताल भुवनेश्वर गुफा, जहां कलयुग के अंत से जुड़ी है अनोखी मान्यता

    उत्तराखंड की रहस्यमयी पाताल भुवनेश्वर गुफा, जहां कलयुग के अंत से जुड़ी है अनोखी मान्यता


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा अपनी रहस्यमयी संरचना और पौराणिक मान्यताओं के कारण सदियों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही है। स्कंद पुराण में वर्णित इस गुफा को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, यहां मौजूद कुछ प्राकृतिक शिलाएं और आकृतियां कलयुग के अंत और महाप्रलय से भी जुड़ी मानी जाती हैं। हालांकि, इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इन्हें धार्मिक आस्था के रूप में देखा जाता है।

    करीब 90 फीट गहराई में स्थित इस गुफा तक पहुंचने के लिए संकरी और फिसलन भरी लगभग 80 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं। अल्मोड़ा से शेराघाट होते हुए लगभग 160 किलोमीटर की यात्रा के बाद गंगोलीहाट पहुंचकर इस गुफा के दर्शन किए जा सकते हैं।

    गुफा में दिखती हैं कई पौराणिक आकृतियां
    गुफा के भीतर प्राकृतिक चट्टानों से बनी कई आकृतियां दिखाई देती हैं, जिन्हें श्रद्धालु शेषनाग, विभिन्न देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों के रूप में देखते हैं। प्रवेश द्वार के पास शेषनाग के फन जैसी आकृति भी मौजूद है, जिसके बारे में धार्मिक मान्यता है कि पृथ्वी उसी पर टिकी हुई है।

    कलयुग के स्तंभ से जुड़ी मान्यता
    गुफा में मौजूद छह प्राकृतिक स्तंभों को चारों युगों का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इनमें से एक स्तंभ कलयुग का प्रतिनिधित्व करता है, जो धीरे-धीरे बढ़ रहा है। इसके ठीक ऊपर छत से लटकी एक प्राकृतिक शिला (पिंड) भी समय के साथ बढ़ती मानी जाती है। धार्मिक विश्वास है कि जिस दिन यह शिला कलयुग के स्तंभ से मिल जाएगी, उसी दिन कलयुग का अंत और महाप्रलय होगी। यह एक पौराणिक मान्यता है, जिसका वैज्ञानिक आधार नहीं है।

    पौराणिक कथाओं में विशेष महत्व
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा के दर्शन किए थे। द्वापर युग में पांडव यहां पहुंचे थे, जबकि कलयुग में लगभग 833 ईस्वी में आदि शंकराचार्य ने इस स्थान का पुनः दर्शन कर यहां तांबे का शिवलिंग स्थापित किया था।

    चार धाम के दर्शन का भी है विश्वास
    श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस गुफा में चारों धामों का प्रतीकात्मक दर्शन होता है। यहां भगवान शिव की जटाओं से बहती गंगा जैसी प्राकृतिक आकृति, अमृत कुंड और कई अन्य धार्मिक प्रतीक दिखाई देते हैं। कुछ पौराणिक मान्यताओं में इसे स्वर्ग के मार्ग का प्रवेश द्वार भी माना गया है।

    आज पाताल भुवनेश्वर गुफा अपनी प्राकृतिक बनावट, आध्यात्मिक महत्व और रहस्यमयी वातावरण के कारण देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बनी हुई है।

  • कोटेश्वर महादेव मंदिर में सावन पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़, लेटे शिवलिंग की अनूठी मान्यता बनी आकर्षण

    कोटेश्वर महादेव मंदिर में सावन पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़, लेटे शिवलिंग की अनूठी मान्यता बनी आकर्षण

    नई दिल्ली । देवभूमि उत्तराखंड में स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं, पौराणिक मान्यताओं और अलौकिक वातावरण के कारण देशभर के शिव भक्तों के लिए अगाध श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सावन के पवित्र महीने के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ रहा है। दूर-दूर से पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जल से अभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष अनुष्ठान संपन्न कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की प्रार्थना कर रहे हैं। पूरे सावन मास में यह पावन क्षेत्र भक्तिमय भजनों और धार्मिक उल्लास से पूरी तरह से सराबोर दिखाई दे रहा है।

    इस प्राचीन मंदिर की सबसे मुख्य विशेषता यहां विराजित शिवलिंग का स्वरूप है। प्रचलित पौराणिक कथाओं और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान शिव विश्राम की स्थिति में यानी लेटी हुई मुद्रा में स्थापित हैं। यह दुर्लभ स्वरूप इसे देश के अन्य तमाम पारंपरिक शिव धामों से बिल्कुल अलग और विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। श्रद्धालुओं के बीच यह अटूट विश्वास है कि भगवान आशुतोष का यह लेटा हुआ स्वरूप अत्यंत चमत्कारिक और फलदायी है, जहां केवल दर्शन मात्र से ही भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

    मंदिर से जुड़ी एक और बेहद चर्चित और गहरी मान्यता यह है कि यहां मौजूद शिवलिंग प्रतिवर्ष जौ के एक दाने के बराबर स्वयं बढ़ता जाता है। स्थानीय निवासियों और मंदिर के पुजारियों का मानना है कि यह वृद्धि भगवान शिव की प्रत्यक्ष दिव्य शक्ति का ही एक रूप है। यद्यपि यह पूर्ण रूप से जनआस्था और धार्मिक विश्वास का विषय है, लेकिन इसी कौतूहल और श्रद्धा के कारण सावन के अलावा वर्ष भर यहां श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला अनवरत जारी रहता है।

    मंदिर परंपरा के अनुसार कोटेश्वर शब्द का शाब्दिक अर्थ एक करोड़ देवी-देवताओं के निवास स्थल से जोड़ा जाता है। मंदिर प्रांगण में शिव कुंड, पार्वती कुंड और सूर्य कुंड भी निर्मित हैं, जिन्हें अत्यंत पवित्र माना जाता है। ऐसी लोकमान्यता है कि इन कुंडों के सान्निध्य में सच्चे भाव से रुद्राभिषेक, जलार्पण और रुद्री पाठ करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं। संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए भी यह स्थान विशेष रूप से मंगलकारी माना गया है।

    सावन के दौरान मंदिर में रोजाना विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का भव्य संचालन किया जा रहा है। श्रद्धालु कतारों में लगकर भगवान शिव को प्रिय बेलपत्र, गंगाजल, कच्चा दूध, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री समर्पित कर रहे हैं। तड़के मंगला आरती से लेकर देर शाम तक संपूर्ण परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गुंजायमान रहता है। श्रद्धालुओं की सहूलियत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन तथा मंदिर प्रबंधन समिति ने कड़े और सुचारू इंतजाम किए हैं।

    आध्यात्मिक महत्व के अलावा कोटेश्वर महादेव मंदिर अपने अद्भुत प्राकृतिक परिवेश के लिए भी जाना जाता है। भागीरथी नदी के पावन तट पर स्थित यह धाम प्राकृतिक सुंदरता और आत्मिक शांति का एक दुर्लभ समन्वय प्रस्तुत करता है। सावन के महीने में यहां आने वाले भक्त न केवल धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं, बल्कि आसपास के मनोरम प्राकृतिक वातावरण से भी अभिभूत होते हैं। यही कारण है कि यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन के दृष्टिकोण से भी बेहद खास पहचान रखता है।

  • उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर… लैंडस्लाइड के कारण रोकी केदारनाथ यात्रा, 850 श्रद्धालु फंसे

    उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर… लैंडस्लाइड के कारण रोकी केदारनाथ यात्रा, 850 श्रद्धालु फंसे


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में भारी बारिश (Heavy rain) के कारण पहाड़ से मैदान तक हर ओर बारिश कहर बरपा रही है। लैंडस्लाइड के कारण केदारनाथ यात्रा (Kedarnath Yatra) रोक दी गई है। कम से कम 850 श्रद्धालु फंसे हुए हैं। हरिद्वार (Haridwar) में दो कारें बह गईं। यमुनोत्री हाईवे पर पत्थर गिरने से कई घंटे यात्रा बाधित रही। देहरादून में भारी बारिश के बाद नाले के तेज बहाव में दो सगी बहनें बह गईं। उनके शव बरामद हुए हैं। मौसम विभाग ने आज 8 जिलों में फ्लैश फ्लड (Flash flood) और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। देहरादून, रुद्रप्रयाग और चमोली समेत कुछ जिलों में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

    केदारनाथ हाईवे पर सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच कई स्थानों पर भूस्खलन और पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण गुरुवार को केदारनाथ यात्रा रोक दी गई। भारी बारिश के बीच प्रशासन ने केदारनाथ से वापस आने वाले करीब 600 यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया। केदारनाथ जाने वाले करीब 250 यात्रियों को सोनप्रयाग में रोका गया। बारिश से उत्तराखंड में कुल 91 सड़कें बंद हुईं।


    मुनकटिया में आया मलबा

    केदारनाथ हाईवे सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच मुनकटिया में मलबा आने से बंद है। गौरीकुंड गेट से करीब 200 मीटर पर पहाड़ी से भूस्खलन हो रहा है। केदारनाथ पैदल मार्ग में भी छौड़ी, जंगलचट्टी और चीरबासा के पास कई जगहों पर मलबा बोल्डर गिर रहे हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि मौसम खुलने के साथ ही मार्ग खुलने की स्थिति में यात्रियों की आवाजाही करा दी जाएगी। उधर, कुमाऊं में बारिश के कारण तवाघाट-लिपुलेख हाईवे पर मल्लघाट के पास भूस्खलन हो गया। नौ घंटे बाद इसको खोला जा सका।


    आज 8 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    शुक्रवार को भारी बारिश के पूर्वानुमान के मद्दनेजर आठ जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के डीएम को अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है।


    कई घरों में घुसा मलबा

    लगातार हो रही बारिश के कारण ज्योतिर्मठ के दूरस्थ गांव किमाणा के 7 आवासीय भवन खतरे की जद में आ गए हैं। लगातर पहाड़ी से बह कर आ रही गाद लोगों के घरों में घुसने लगी है। पहाड़ी से बह कर आ रहे मलबे और बोल्डरों से गांव के संपर्क और काश्तकारी मार्ग भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं पेयजल लाईन टूटने से पेयजल संकट भी गहरा गया है।

    बता दें कि किमाणा गांव की सरहद से लगभग 50 मीटर की दूरी पर स्थित पहाड़ी भारी बरसात के कारण बुधवार देर रात से लगातर दरकती रही। पहाडी से टूटकर लगातार बडे़ बडे़ बोल्डर बरसाती नाले में बहकर गाद गांव तक पहुंच रही है। इस मलबे की चपेट में आने से गांव की शीर्ष में स्थित चंडिका मंदिर की भोग मंडी और सभी सुरक्षा दीवारें पूरी तरह से टूट गई है। क्षेत्र पंचायत सदस्य मुकेश सेमवाल ने बताया कि पूरा गांव दहशत में है और गांव के 7 मकानों में लगातार बह कर आ रहा मलबा घुस रहा है। इन घरों के आंगन भी मलबे से भर चुके हैं, जिस कारण से इन परिवारों को भारी परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है।


    हरिद्वार में दो कार बहीं, यमुनोत्री हाईवे पर गिरे पेड़

    हरिद्वार में मूसलाधार बारिश के चलते खड़खड़ी स्थित सूखी नदी उफान पर आ गई। इससे नदी के बीच रपटे पर खड़ी दो कार बह गईं। घटना से मौके पर अफरातफरी मच गई। बहाव कम होने के बाद कारों को नदी से बाहर निकला गया। उधर, स्याना चट्टी और राना चट्टी के बीच भू-धंसाव होने से कई पेड़ यमुनोत्री हाईवे पर गिर गए। पेड़ों के गिरने से कुछ समय के लिए हाईवे पर यातायात बाधित हो गया।


    देहरादून में दो बहनों की दर्दनाक मौत

    इधर, देहरादून के क्लेमनटाउन क्षेत्र की नई बस्ती में बारिश से उफनाई नाली में बहने से दो मासूम बहनों की मौत हो गई। सात वर्षीय लक्ष्मी कुमारी और तीन वर्षीय सोनाक्षी कुमारी के शवों को रैंप के नीचे से निकाला गया। बच्चियों के पिता रुदल सदा और मां रीना कुमारी यहां नई बस्ती में किराये पर रहकर मजदूरी करते हैं। रुदल सदा किसी काम से अपने गांव गए हुए हैं। बच्चियों की मां रीना ने पुलिस को बताया कि दोपहर करीब एक बजे दोनों बहनें खेलने गई थीं।

  • बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: उत्तराखंड में यात्रा पर ब्रेक, छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से पांच की मौत, कई राज्यों में रेड अलर्ट

    बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: उत्तराखंड में यात्रा पर ब्रेक, छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से पांच की मौत, कई राज्यों में रेड अलर्ट


    नई दिल्ली । देशभर में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश आम जनजीवन पर भारी पड़ रही है। उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा को एहतियातन दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। वहीं चंपावत बागेश्वर और टिहरी जिलों में खराब मौसम के चलते कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    राजस्थान में भी तेज बारिश ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। धौलपुर सहित कई शहरों के बाजारों और निचले इलाकों में पानी भर गया जिससे यातायात प्रभावित हुआ और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित रहीं। चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद प्रसिद्ध मेनाल जलप्रपात पूरे वेग से बहने लगा जबकि रणथंभौर क्षेत्र में कई स्थानों पर जलस्तर बढ़ने से रास्तों पर पानी बहता दिखाई दिया।

    छत्तीसगढ़ में बारिश के साथ आकाशीय बिजली ने कहर बरपाया। राज्य के अलग अलग हिस्सों में बिजली गिरने की तीन घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि ग्यारह लोग घायल हो गए। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने की आशंका जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

    गुजरात में भी लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति का असर औद्योगिक गतिविधियों पर देखने को मिला। साणंद स्थित टाटा मोटर्स प्लांट और उसके आसपास स्थित कई सप्लायर इकाइयों का संचालन अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ। वहीं महिसागर जिले का प्रसिद्ध सात कुंड जलप्रपात भी बारिश के बाद पूरे उफान पर पहुंच गया।

    उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित कई शहरों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई जिससे लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिहार के कई जिलों में भी लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और निचले इलाकों में पानी भरने लगा है।

    भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस समय देश के ऊपर दो मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय हैं। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा झारखंड और छत्तीसगढ़ से आगे बढ़ते हुए मध्य एवं उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर रहा है। इसी कारण मध्य भारत उत्तर पश्चिम भारत और पूर्वी राज्यों में अगले चार से पांच दिनों तक सामान्य से अधिक तथा कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।

    दिल्ली में भी मंगलवार को 50 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। राजधानी के कई इलाकों में जलभराव हुआ मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया तथा कई पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग ने लोगों से नदी नालों के पास जाने से बचने सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करने की अपील की है क्योंकि आने वाले दिनों में मानसून का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है।