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  • यूपी चुनाव 2027 से पहले ओवैसी का अखिलेश यादव पर हमला, आजमगढ़ से बदायूं तक परिवारवाद को लेकर उठाए सवाल

    यूपी चुनाव 2027 से पहले ओवैसी का अखिलेश यादव पर हमला, आजमगढ़ से बदायूं तक परिवारवाद को लेकर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम बहुल सीटों और विपक्षी दलों के बीच गठबंधन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए परिवारवाद का आरोप लगाया है। कैराना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आजमगढ़, बदायूं और फिरोजाबाद का जिक्र किया और दावा किया कि इन क्षेत्रों में पहले मुस्लिम सांसद चुने जाते थे, लेकिन अब यादव परिवार के सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

    ओवैसी ने अपने भाषण में कहा कि एक समय आजमगढ़ से मुस्लिम सांसद जीतकर संसद पहुंचते थे, जबकि अब वहां से अखिलेश यादव के भाई सांसद हैं। उन्होंने बदायूं और फिरोजाबाद का उल्लेख करते हुए भी समाजवादी पार्टी पर परिवार के सदस्यों को राजनीतिक अवसर देने का आरोप लगाया। उनके बयान का मुख्य मुद्दा मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और समाजवादी पार्टी में परिवार की भूमिका रहा।

    AIMIM प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव को अपनी पार्टी का नाम समाजवादी पार्टी के बजाय समाजवादी यादव परिवार रख लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यादव परिवार की राजनीति में परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता दी जा रही है और मुस्लिम समुदाय से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने राजनीतिक अधिकारों और प्रतिनिधित्व की मांग पीछे रखे।

    उन्होंने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक हिस्सेदारी सीमित की जा रही है। ओवैसी के अनुसार, समाजवादी पार्टी के नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि विभिन्न समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के मामले में उसकी क्या नीति है। उन्होंने परिवारवाद के मुद्दे को उठाते हुए सपा पर मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन का राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया।

    ओवैसी ने मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर भी अखिलेश यादव की आलोचना की। हालांकि, उनके इस बयान के संदर्भ में उपलब्ध जानकारी में सपा की ओर से कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन समाजवादी पार्टी समेत कई दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में ओवैसी के बयान को आगामी चुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    विपक्षी गठबंधन को लेकर ओवैसी ने भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी दलों का उद्देश्य भाजपा को हराना है, तो AIMIM भी उनके साथ आने के लिए तैयार है। ओवैसी ने यह भी कहा कि वह योगी आदित्यनाथ को तीसरी बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनते नहीं देखना चाहते। उनके इस रुख से संकेत मिलता है कि भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की संभावना पर उनकी पार्टी बातचीत के लिए तैयार है, हालांकि गठबंधन की कोई अंतिम रूपरेखा सामने नहीं आई है।

    ओवैसी की राजनीतिक रणनीति को लेकर भी चर्चा हो रही है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में AIMIM अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। खबर में उल्लेख किया गया है कि 15 अक्टूबर को मुस्लिम विद्वान और राजनीतिक विश्लेषक हाजी अब्दुल सलाम ने दावा किया था कि AIMIM राज्य की 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति बना रही है। उनके अनुसार, यदि पार्टी को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन में जगह नहीं मिलती है, तो कुछ सीटों पर चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। यह फिलहाल एक रणनीतिक आकलन है, न कि घोषित उम्मीदवारों की अंतिम सूची।

    मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा और संभल जैसे जिलों में मुस्लिम मतदाताओं का रुझान आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इन क्षेत्रों में विभिन्न दलों की चुनावी रणनीति और गठबंधन की स्थिति राजनीतिक मुकाबले को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि AIMIM कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी और विपक्षी दलों के बीच सीटों के तालमेल को लेकर क्या सहमति बनेगी।

    2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ओवैसी के बयानों ने समाजवादी पार्टी की राजनीति, परिवारवाद और मुस्लिम प्रतिनिधित्व को बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्षी दल गठबंधन को लेकर क्या फैसला करते हैं और मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए कौन-सी रणनीति अपनाते हैं।

  • यूपी में विद्युत सखियों ने जमा कराए 3,720 करोड़ रुपये के बिजली बिल, कमीशन से कमाए 47 करोड़ रुपये

    यूपी में विद्युत सखियों ने जमा कराए 3,720 करोड़ रुपये के बिजली बिल, कमीशन से कमाए 47 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में विद्युत सखी योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने अब तक 3,720 करोड़ रुपये से अधिक के बिजली बिल जमा कराए हैं। इसके बदले उन्हें 47 करोड़ रुपये से ज्यादा कमीशन मिला है। इन महिलाओं ने करीब 1.80 करोड़ उपभोक्ताओं के बिजली बिलों के भुगतान में भूमिका निभाई है।

    उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के समन्वय से संचालित इस योजना में अब तक 31 हजार से अधिक महिलाओं का पंजीकरण किया जा चुका है। इनमें 16 हजार से ज्यादा महिलाएं सक्रिय रूप से बिजली बिल जमा कराने का काम कर रही हैं। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आय अर्जित करने का अवसर उपलब्ध कराने के साथ उपभोक्ताओं के लिए बिजली बिल भुगतान की सुविधा बढ़ाना है।

    योजना के माध्यम से महिलाएं अपने गांव और आसपास के इलाकों में रहकर ही काम कर सकती हैं। उन्हें रोजगार के लिए शहरों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं होती। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर मिलने से महिलाएं परिवार की आमदनी में योगदान दे पा रही हैं। यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

    विद्युत सखियों के काम से बिजली उपभोक्ताओं को भी सुविधा मिल रही है। ग्रामीणों को बिल जमा कराने के लिए दूर स्थित बिजली कार्यालयों या भुगतान केंद्रों तक जाने की जरूरत कम होती है। गांव में ही भुगतान की सुविधा मिलने से उनके समय और आने-जाने के खर्च की बचत हो सकती है। इस तरह योजना महिलाओं की आमदनी बढ़ाने के साथ ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए सेवा को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास करती है।

    विद्युत सखियों को काम शुरू करने से पहले प्रशिक्षण दिया जाता है और डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाता है। वे ई-वॉलेट के माध्यम से उपभोक्ताओं के बिजली बिल जमा करती हैं। इस काम के बदले उन्हें निर्धारित दर के अनुसार कमीशन मिलता है। योजना के तहत 2,000 रुपये तक का बिजली बिल जमा कराने पर 20 रुपये तक कमीशन दिया जाता है।

    डिजिटल भुगतान व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन को बढ़ावा देने में भी मदद मिल रही है। विद्युत सखियां उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के बीच एक संपर्क माध्यम के रूप में काम करती हैं। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर बिल भुगतान की सुविधा मिलती है, जबकि बिजली विभाग को राजस्व संग्रह के लिए अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध होता है।

    राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, प्रदेश में 16 हजार से अधिक सक्रिय विद्युत सखियां ग्रामीण उपभोक्ताओं तक बिजली बिल भुगतान की सुविधा पहुंचा रही हैं। इस पहल से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और समाज में उनकी भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

    विद्युत सखी योजना महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण रोजगार और जनसेवा को एक साथ जोड़ती है। अब तक 3,720 करोड़ रुपये से अधिक के बिजली बिल जमा कराने और 47 करोड़ रुपये से ज्यादा कमीशन अर्जित करने के आंकड़े इस योजना के दायरे को दर्शाते हैं। पंजीकृत महिलाओं में से 16 हजार से अधिक के सक्रिय होने के साथ यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में बिल भुगतान की सुविधा और महिलाओं के लिए आय के अवसर उपलब्ध करा रही है।

  • यूपी चुनाव 2027 में ओवैसी की 200 सीटों पर तैयारी, सपा के PDA और कांग्रेस के समीकरण को मिल सकती है चुनौती

    यूपी चुनाव 2027 में ओवैसी की 200 सीटों पर तैयारी, सपा के PDA और कांग्रेस के समीकरण को मिल सकती है चुनौती

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी राजनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की रणनीति के तहत राज्य में मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पार्टी करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत की गुंजाइश भी बनी हुई है। ऐसे में चुनाव से पहले राज्य में विपक्षी दलों के बीच सीटों और मतदाताओं के समीकरण को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।

    AIMIM की रणनीति का पहला हिस्सा उन विधानसभा क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है। पार्टी ऐसे क्षेत्रों में अपना संगठन मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक आधार बढ़ाने की तैयारी में है। इसके लिए उन सीटों की पहचान की जा रही है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। पार्टी की कोशिश है कि इन इलाकों में स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाकर चुनावी मैदान में अपनी उपस्थिति मजबूत की जाए।

    दूसरी प्राथमिकता पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बनाया गया है। इस क्षेत्र की लगभग 65 विधानसभा सीटों पर AIMIM विशेष ध्यान दे रही है। मेरठ समेत कई जिलों में पार्टी अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाने की योजना बना रही है। इस रणनीति के तहत असदुद्दीन ओवैसी की जनसभाएं भी प्रस्तावित हैं। कार्यक्रम के अनुसार, 17 अक्टूबर को रामपुर में जनसभा, 24 अक्टूबर को कैराना में सभा और 14 नवंबर को मेरठ में बड़ी रैली आयोजित करने की योजना है। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अपने समर्थकों तक पहुंचने और संगठन को सक्रिय करने का प्रयास करेगी।

    AIMIM की तीसरी योजना राज्यभर में संगठन का विस्तार करने से जुड़ी है। यदि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ गठबंधन पर सहमति नहीं बनती है, तो पार्टी लगभग 200 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के विकल्प पर काम कर रही है। इस संभावित रणनीति से विपक्षी दलों के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा का स्वरूप प्रभावित हो सकता है। खासकर उन सीटों पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है, जहां समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी पहले से अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश करती रही हैं।

    पूर्वांचल में भी AIMIM ने कई विधानसभा क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। पार्टी की तैयारियों में आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर, मऊ और बलिया जैसे जिले शामिल हैं। आजमगढ़ की मुबारकपुर, गोपालपुर, निजामाबाद और सदर सीटों पर पार्टी की नजर है। जौनपुर की सदर और शाहगंज सीटों के साथ मऊ की सदर तथा घोसी विधानसभा सीटों को भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा बहराइच और श्रावस्ती जैसे क्षेत्रों में भी संगठन विस्तार की योजना है।

    पार्टी की रणनीति में स्थानीय और प्रभावशाली नेताओं को शामिल करना भी अहम बताया जा रहा है। ऐसे नेताओं को प्राथमिकता देने की योजना है, जिन्हें दूसरे राजनीतिक दलों में पर्याप्त अवसर नहीं मिला है। AIMIM को उम्मीद है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत चेहरों के जरिए वह अपने समर्थन का दायरा बढ़ा सकती है। हालांकि, इन प्रयासों का चुनावी परिणाम क्या होगा, यह उम्मीदवारों के चयन, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

    गठबंधन को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। AIMIM की ओर से दूसरे विपक्षी दलों के साथ संभावित समझौते की संभावना खुली रखी गई है। इस महीने के अंत तक बातचीत को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई गई है। यदि गठबंधन नहीं बनता है, तो पार्टी स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी को आगे बढ़ा सकती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजनीति में AIMIM की भूमिका और उसका प्रभाव आगामी चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना रह सकता है।

  • यूपी चुनाव 2027 के लिए बीजेपी की तैयारी तेज, पीएम मोदी की संभावित 12 रैलियों और 133 सीटों पर खास नजर

    यूपी चुनाव 2027 के लिए बीजेपी की तैयारी तेज, पीएम मोदी की संभावित 12 रैलियों और 133 सीटों पर खास नजर

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को गति देने की रणनीति बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित प्रदेश दौरों, विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास तथा संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने की योजना पर काम किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नवंबर 2026 के मध्य से प्रधानमंत्री के उत्तर प्रदेश दौरे शुरू हो सकते हैं। चुनाव की घोषणा से पहले करीब 12 कार्यक्रमों और रैलियों के जरिए जनता तक सरकार के कामकाज और विकास योजनाओं को पहुंचाने की तैयारी है।

    प्रधानमंत्री के संभावित कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रदेश की 18 कमिश्नरियों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। पार्टी की योजना केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की उपलब्धियों को सामने रखने की है। इसके लिए विकास योजनाओं, परिवहन सुविधाओं, धार्मिक पर्यटन और निवेश से जुड़ी परियोजनाओं को प्रमुखता दिए जाने की संभावना है। हालांकि, रैलियों और दौरों का अंतिम कार्यक्रम अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है।

    विकास परियोजनाओं को चुनावी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। संभावित कार्यक्रमों में वाराणसी अर्बन रोपवे, कानपुर मेट्रो के अगले चरण और आगरा मेट्रो के नए भूमिगत स्टेशनों का उद्घाटन शामिल हो सकता है। लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के शिलान्यास की संभावना भी जताई गई है। इन परियोजनाओं के जरिए शहरी परिवहन और कनेक्टिविटी से जुड़े कामों को जनता के सामने रखने की योजना है।

    इसके अलावा अयोध्या में राम मंदिर परिसर की चारदीवारी और संग्रहालय, जेवर में एचसीएल-फॉक्सकॉन की सेमीकंडक्टर इकाई, चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे और वाराणसी के गंजारी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम से जुड़े कार्यक्रमों पर भी विचार किया जा रहा है। नोएडा में एक्वा लाइन मेट्रो के सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक विस्तार, जेवर एयरपोर्ट के कार्गो हब और वृंदावन के बांके बिहारी कॉरिडोर से संबंधित परियोजनाएं भी संभावित एजेंडे में शामिल बताई गई हैं।

    संगठन के स्तर पर बीजेपी की नजर 133 विधानसभा सीटों पर है। वाराणसी में प्रस्तावित बैठक में काशी और गोरक्ष प्रांत की इन सीटों को लेकर रणनीति पर चर्चा हो सकती है। बूथ कार्यकर्ताओं से संपर्क, विभिन्न सामाजिक समूहों के साथ बैठकें और सरकार के कामकाज की जानकारी लोगों तक पहुंचाने पर जोर देने की योजना है।

    पार्टी करीब 12 हजार विस्तारकों की तैनाती की तैयारी भी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रत्येक 15 बूथ पर एक विस्तारक लगाने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ लगभग 80 हजार संगठनात्मक बैठकें आयोजित करने की योजना बताई गई है। कमजोर बूथों और उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां पार्टी को अपनी संगठनात्मक स्थिति मजबूत करने की जरूरत महसूस होती है।

    चुनावी अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका रहने की संभावना है। नितिन गडकरी, स्मृति ईरानी, केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह और हेमा मालिनी सहित अन्य नेताओं को भी प्रचार अभियान में शामिल किया जा सकता है। संगठन से जुड़े नितिन नवीन और विनोद तावड़े समेत अन्य नेताओं की जिम्मेदारियां भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

    दिसंबर 2026 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषंगिक संगठनों के संगठन प्रभारियों के उत्तर प्रदेश में प्रवास की संभावना भी जताई गई है। यह अभियान करीब तीन महीने तक चल सकता है। इस दौरान जनसंपर्क, सामाजिक संपर्क और संगठनात्मक समन्वय पर ध्यान दिए जाने की बात कही गई है।इस तरह बीजेपी की तैयारी में प्रधानमंत्री की संभावित रैलियों, विकास परियोजनाओं, वरिष्ठ नेताओं के प्रचार और बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने जैसे कई पहलू शामिल हैं। हालांकि, प्रस्तावित कार्यक्रमों और परियोजनाओं से जुड़े आयोजनों की अंतिम तारीखों तथा विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

  • 51 शक्तिपीठों में शामिल उत्तर प्रदेश के पांच प्रमुख धाम, कहीं मां विशालाक्षी तो कहीं कात्यायनी रूप में होती हैं पूजा

    51 शक्तिपीठों में शामिल उत्तर प्रदेश के पांच प्रमुख धाम, कहीं मां विशालाक्षी तो कहीं कात्यायनी रूप में होती हैं पूजा

    नई दिल्ली । नवरात्रि का पर्व शुरू होते ही देशभर के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। उत्तर प्रदेश में भी माता रानी के कई प्रसिद्ध मंदिर और शक्तिधाम स्थित हैं, जिनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं भक्तों की आस्था का प्रमुख आधार हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता सती के शरीर के अंग या आभूषण जहां-जहां गिरे, उन स्थानों को शक्तिपीठ कहा जाता है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट, वृंदावन और बलरामपुर में स्थित देवी मंदिरों को इसी परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। नवरात्रि के दौरान इन मंदिरों में विशेष पूजा होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    वाराणसी को भगवान शिव की नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां मणिकर्णिका घाट के पास मां विशालाक्षी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जिसे शक्तिपीठों में विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर माता सती के कुंडल या मणिकर्णिका से संबंधित अंग गिरने की कथा प्रचलित है। मां विशालाक्षी को देवी शक्ति के स्वरूप में पूजा जाता है। श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। नवरात्रि के दिनों में मंदिर में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। काशी की धार्मिक पहचान और मां विशालाक्षी से जुड़ी मान्यताओं के कारण यह मंदिर देवी उपासना के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है।

    प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी शहर में मां ललिता देवी का मंदिर स्थित है, जिसे प्रसिद्ध शक्तिधामों में शामिल माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती की अंगुली गिरी थी। प्रयागराज में मां कल्याणी देवी और अलोपी देवी के मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। इन मंदिरों में नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त देवी के दर्शन करने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए यहां पहुंचते हैं। प्रयागराज के ये तीनों देवी मंदिर शहर की धार्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं और पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है।

    चित्रकूट भगवान श्रीराम से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां रामगिरि क्षेत्र में स्थित शक्तिपीठ को लेकर मान्यता है कि माता सती का वक्ष इस स्थान पर गिरा था। यहां देवी को मां शिवानी के रूप में भी पूजा जाता है। नवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु मां शिवानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। चित्रकूट की धार्मिक पहचान भगवान राम से जुड़ी परंपराओं के साथ-साथ देवी उपासना से भी संबंधित है। यहां स्थित देवी धाम भक्तों के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। नवरात्रि के दौरान पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी होती है।

    वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है, लेकिन यहां देवी उपासना की भी महत्वपूर्ण परंपरा है। यहां मां कात्यायनी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जिसे शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर माता सती के केश या चूड़ामणि गिरे थे। नवरात्रि में श्रद्धालु मां कात्यायनी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में स्थित देवीपाटन मंदिर मां पाटेश्वरी को समर्पित है। भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित यह मंदिर प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। मान्यता है कि यहां माता सती का स्कंध यानी कंधा गिरा था। नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा होती है और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन धामों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं उत्तर प्रदेश में देवी उपासना की विविध परंपराओं को दर्शाती हैं।

  • यूपी सरकार ने 455 लेखपालों को पदोन्नति देकर बनाया राजस्व निरीक्षक, ऑनलाइन डीपीसी से पूरी हुई चयन वर्ष 2025-26 की प्रक्रिया

    यूपी सरकार ने 455 लेखपालों को पदोन्नति देकर बनाया राजस्व निरीक्षक, ऑनलाइन डीपीसी से पूरी हुई चयन वर्ष 2025-26 की प्रक्रिया

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश सरकार ने राजस्व प्रशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश के 455 लेखपालों को पदोन्नति देकर राजस्व निरीक्षक यानी कानूनगो बनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड ने चयन वर्ष 2025-26 के तहत ऑनलाइन विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया पूरी की। पदोन्नत कर्मचारियों की तैनाती से संबंधित आदेश जल्द जारी किए जाएंगे। इस निर्णय से राजस्व निरीक्षक संवर्ग में रिक्त पदों को भरने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद बोर्ड के चेयरमैन बीएल मीणा के अनुसार, पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से संपन्न कराई गई। इसके तहत निर्धारित पात्रता मानकों और कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों के आधार पर उनकी पात्रता का परीक्षण किया गया। जांच के बाद कुल 455 लेखपालों को राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाया गया। ऑनलाइन डीपीसी के माध्यम से प्रक्रिया पूरी किए जाने से विभागीय पदोन्नति में पारदर्शिता और समयबद्धता को बढ़ावा मिला है। चयन प्रक्रिया में पात्रता और सेवा अभिलेखों को आधार बनाया गया।

    पदोन्नति के बाद राजस्व निरीक्षक संवर्ग में खाली पदों को भरने में सहायता मिलेगी। इससे तहसील और क्षेत्रीय स्तर पर राजस्व से जुड़े कार्यों की निगरानी और पर्यवेक्षण को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद है। राजस्व निरीक्षक प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। उनकी जिम्मेदारियों में राजस्व कार्यों की निगरानी, अभिलेखों के रखरखाव और भूमि से संबंधित मामलों में विभागीय प्रक्रियाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भूमिका निभाना शामिल है। ऐसे में पदोन्नत कर्मचारियों की तैनाती से क्षेत्रीय स्तर पर राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली को गति मिल सकती है।

    भूमि संबंधी मामलों के निस्तारण, जमीन की पैमाइश और राजस्व अभिलेखों से जुड़े कामों में भी इस पदोन्नति से तेजी आने की उम्मीद जताई गई है। तहसील स्तर पर राजस्व निरीक्षकों की भूमिका विभिन्न राजस्व कार्यों के पर्यवेक्षण और विभागीय प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होती है। पदोन्नति के बाद रिक्त पदों पर नियुक्ति होने से संबंधित कामकाज के संचालन में मदद मिल सकती है। हालांकि, पदोन्नत कर्मचारियों की तैनाती के आदेश अभी जारी होने बाकी हैं। आदेश जारी होने के बाद कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित जानकारी स्पष्ट होगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजस्व मामलों के त्वरित और न्यायसंगत निस्तारण के साथ प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल पर जोर देते रहे हैं। इसी दिशा में ऑनलाइन डीपीसी को कार्मिक प्रबंधन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और तकनीक के प्रभावी उपयोग की पहल के रूप में देखा जा रहा है। विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से पूरा करने का उद्देश्य निर्धारित मानकों के अनुसार कर्मचारियों की पात्रता का परीक्षण करना और प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से संपन्न कराना है।

    राज्य सरकार राजस्व प्रशासन को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए विभागीय प्रक्रियाओं को तकनीक से जोड़ने पर जोर दे रही है। 455 लेखपालों की पदोन्नति इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे राजस्व निरीक्षक संवर्ग में रिक्त पदों को भरने के साथ तहसील और क्षेत्रीय स्तर पर प्रशासनिक निगरानी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। अब पदोन्नत कर्मचारियों की तैनाती के आदेश जारी होने का इंतजार है, जिसके बाद वे अपने नए पद के अनुसार जिम्मेदारियां संभालेंगे।

  • यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का तीसरा दांव, 10 सीटों पर मुकाबला रोचक; बीजेपी की आठवीं सीट और क्रॉस वोटिंग पर नजर

    यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का तीसरा दांव, 10 सीटों पर मुकाबला रोचक; बीजेपी की आठवीं सीट और क्रॉस वोटिंग पर नजर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन का मंगलवार को आखिरी दिन है। दोपहर तीन बजे तक उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। इसी वजह से राज्य में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। भारतीय जनता पार्टी ने आठ और समाजवादी पार्टी ने दो प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। सात सीटों पर बीजेपी की जीत संख्या बल के आधार पर लगभग तय मानी जा रही है, जबकि सपा के दो उम्मीदवारों के लिए भी स्थिति मजबूत है। हालांकि बीजेपी के आठवें उम्मीदवार और सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार के कारण चुनाव का गणित दिलचस्प हो गया है।

    सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर पार्टी के भीतर लगातार चर्चा चल रही है। राज्यसभा उम्मीदवार रामगोपाल यादव से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी तीन बजे तक नामांकन का समय है और फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव चाहेंगे तो तीसरा उम्मीदवार उतरेगा, नहीं तो नहीं उतरेगा। अखिलेश यादव मंगलवार को विपक्षी गठबंधन के विरोध मार्च में शामिल हुए। विपक्षी सांसद संसद भवन के मकर द्वार से निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। ऐसे में नामांकन की समयसीमा खत्म होने तक यह स्पष्ट होना था कि सपा तीसरा प्रत्याशी उतारती है या नहीं।

    सपा के तीसरे उम्मीदवार के नामांकन को लेकर यह भी दावा किया गया कि पार्टी ने जरूरी 10 विधायकों के हस्ताक्षर बतौर प्रस्तावक जुटा लिए हैं। तीसरे उम्मीदवार के नामांकन की स्थिति में 16 अक्टूबर को मतदान होना है और मुकाबला अतिरिक्त वोटों पर निर्भर हो सकता है। सपा पहले ही अपने वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और रिलायंस ग्रुप के सीईओ धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। दोनों उम्मीदवार अखिलेश यादव की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं। रामगोपाल यादव छठी बार राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं।

    उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। विधानसभा में विधायकों की प्रभावी संख्या 397 बताई गई है। इस हिसाब से प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 37 मतों की जरूरत होगी। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास करीब 285 से 290 विधायक हैं। इस संख्या के आधार पर बीजेपी के सात उम्मीदवारों की जीत आसान मानी जा रही है, लेकिन आठवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। दूसरी ओर सपा के पास 101 विधायक बताए गए हैं, जिससे उसके दो उम्मीदवारों की जीत संभव है। तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए सपा को अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।

    वोटों के इसी गणित के कारण क्रॉस वोटिंग को लेकर भी चर्चा है। बीजेपी के आठवें उम्मीदवार और सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। कांग्रेस के दो विधायक सपा के खाते में बताए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना जरूरी होगा। ऐसे में दोनों दलों के सामने अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती होगी। अंतिम दिन नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है या नहीं। यदि तीसरा उम्मीदवार उतरता है तो 10 सीटों के लिए उम्मीदवारों की संख्या बढ़ जाएगी और 16 अक्टूबर को मतदान की स्थिति बनेगी।

    राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार को लेकर सपा की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है। पार्टी के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या है, जबकि तीसरे उम्मीदवार के लिए उसे अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए। बीजेपी ने आठ उम्मीदवार उतारकर आठवीं सीट के लिए भी दावा पेश किया है। ऐसे में नामांकन की अंतिम समयसीमा तक दोनों दलों की रणनीति और विधायकों के समर्थन का गणित महत्वपूर्ण बना हुआ है। मतदान की स्थिति बनने पर क्रॉस वोटिंग भी चुनाव के परिणाम को प्रभावित करने वाला अहम पहलू हो सकती है।

  • यूपी चुनाव से पहले दिल्ली पहुंचे योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में चुनाव और राज्य के मुद्दों पर चर्चा

    यूपी चुनाव से पहले दिल्ली पहुंचे योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में चुनाव और राज्य के मुद्दों पर चर्चा

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार, 26 सितंबर को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुई है। मुलाकात के कारण राज्य की राजनीति में चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच इससे पहले भी इस साल मुलाकातें हो चुकी हैं।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे को उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बैठक के दौरान हुई चर्चाओं का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया है। ऐसे में मुलाकात के एजेंडे को लेकर सामने आई अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याओं को तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

    उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के बीच हुई बैठक ने राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर स्वाभाविक रूप से ध्यान आकर्षित किया है। मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे और प्रधानमंत्री से मुलाकात के बीच चुनावी तैयारियों से जुड़े विषयों पर चर्चा की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    मुलाकात से एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ग्रेटर नोएडा में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में शामिल हुए थे। इस दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने रूस, वियतनाम, बेलारूस, जापान और सिंगापुर सहित भागीदार देशों की कंपनियों के साथ बैठक की थी और प्रदेश में रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, विमानन, मेडिकल डिवाइस, कृषि तथा विनिर्माण क्षेत्र में निवेश का आमंत्रण दिया था।

    दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की केंद्रीय नेतृत्व के साथ अन्य बैठकों की भी जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मुलाकात प्रस्तावित थी।

    योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी के बीच उत्तर प्रदेश को लेकर संवाद पहले भी होता रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, मुख्यमंत्री ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। इससे पहले 8 अगस्त 2026 को भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। इन मुलाकातों की आधिकारिक जानकारी में मुख्य रूप से दोनों नेताओं के मिलने की पुष्टि की गई थी।

    वर्तमान दिल्ली दौरा ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। राज्य सरकार और केंद्रीय नेतृत्व के बीच होने वाली बैठकों को इसी व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक संदर्भ में देखा जा रहा है।

    फिलहाल 26 सितंबर की मुलाकात में किन-किन विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई, इसे लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए बैठक को लेकर सामने आ रही चुनावी रणनीति संबंधी चर्चाओं को अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इतना स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और यह मुलाकात उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुई है।

  • अनुप्रिया पटेल ने CEC पर विपक्ष के आरोपों का किया बचाव, बोलीं- संवैधानिक पदों पर व्यक्तिगत हमला आदत

    अनुप्रिया पटेल ने CEC पर विपक्ष के आरोपों का किया बचाव, बोलीं- संवैधानिक पदों पर व्यक्तिगत हमला आदत

    नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री और अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों पर व्यक्तिगत हमला करना विपक्ष की आदत बन गई है। अनुप्रिया पटेल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

    अनुप्रिया पटेल ने विपक्ष के आरोपों को लेकर कहा कि आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विपक्ष को अपनी हार का अंदाजा पहले से ही हो गया है। उनके अनुसार, इसी वजह से विपक्ष चुनाव से पहले ही हार के लिए कारण तलाश रहा है और भविष्य में अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग के सिर पर डालने की तैयारी कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं और उनके पदाधिकारियों पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बनाने के बजाय संस्थागत प्रक्रिया पर चर्चा होनी चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ने एनडीए और विपक्ष के बीच चुनावी मुकाबले का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले चुनावों में एनडीए गठबंधन के सामने विपक्ष को लगातार पराजय का सामना करना पड़ा है। उनका कहना था कि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी विपक्ष की ओर से अभी से अलग-अलग मुद्दे उठाए जा रहे हैं।

    उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दलों ने संगठनात्मक और चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। अनुप्रिया पटेल ने अपनी पार्टी की तैयारियों को लेकर कहा कि अपना दल आगामी चुनाव के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ तैयार है।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन की जीत सुनिश्चित करने में अपना दल ने योगदान दिया था। पार्टी ने दोनों चुनावों में गठबंधन के साथ मिलकर राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी की थी। अनुप्रिया पटेल ने कहा कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में भी उनकी पार्टी पूरी ताकत के साथ गठबंधन के साथ मैदान में उतरेगी।

    अनुप्रिया पटेल ने यह भी दावा किया कि आगामी चुनाव में एनडीए गठबंधन रिकॉर्ड जीत दर्ज करेगा। हालांकि, चुनाव अभी दूर है और राजनीतिक दलों की तैयारियां जारी हैं। ऐसे में उनके बयान को आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन की रणनीति और राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच अनुप्रिया पटेल का बयान राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। विपक्ष जहां चुनाव प्रक्रिया और आयोग की भूमिका को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रख रहा है, वहीं अनुप्रिया पटेल ने इन आरोपों का बचाव करते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाया है। उन्होंने संवैधानिक पदों पर व्यक्तिगत हमलों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और आगामी चुनाव में एनडीए की तैयारियों को लेकर विश्वास जताया।

  • ओवैसी ने यूपी में मुस्लिम नेतृत्व का मुद्दा उठाया, AIMIM के संगठन और संभावित गठबंधन पर जल्द तस्वीर साफ होने के संकेत

    ओवैसी ने यूपी में मुस्लिम नेतृत्व का मुद्दा उठाया, AIMIM के संगठन और संभावित गठबंधन पर जल्द तस्वीर साफ होने के संकेत

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक दलों की तैयारियों के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने राज्य में गठबंधन की संभावनाओं को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में लगातार संगठन को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़ने का काम कर रही है। गठबंधन को लेकर उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।

    ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी के संगठन का जिक्र करते हुए कहा कि AIMIM के स्थानीय नेता लगातार लोगों के बीच काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में अलग-अलग बिरादरियों की राजनीतिक नेतृत्व व्यवस्था मौजूद है, लेकिन मुस्लिम समाज के लिए वैसी मजबूत राजनीतिक आवाज नहीं बन पाई है। उन्होंने लोकतंत्र में प्रत्येक समाज को अपनी बात रखने का अवसर मिलने की बात कही।

    समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के सवाल पर ओवैसी ने कहा कि अगले 10 से 12 दिनों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने व्यापक विपक्षी एकजुटता की संभावना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सभी साथ आकर चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा को रोकने में मदद मिल सकती है। इस बयान के बाद यूपी में AIMIM और सपा के बीच संभावित राजनीतिक समीकरण को लेकर चर्चा तेज हुई है।

    ओवैसी ने बिहार के चुनावी अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां उनकी पार्टी ने गठबंधन के तहत छह सीटों की मांग की थी, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक राजनीतिक दल को अपनी रणनीति और संगठन के हिसाब से काम करना चाहिए।

    उत्तर प्रदेश में AIMIM की गतिविधियां भी लगातार बढ़ रही हैं। ओवैसी राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यक्रम कर रहे हैं और पार्टी के संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में मैदान में रहेगी और इसके लिए व्यापक समर्थन की जरूरत होगी।

    मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों पर भी ओवैसी ने अपनी बात रखी। उन्होंने सहारनपुर की मस्जिद और पुराने कब्रिस्तान से संबंधित कार्रवाई का उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने कुछ लोगों को कथित फर्जी मुठभेड़ों में मारे जाने और लखनऊ में परवेज नाम के व्यक्ति के साथ भीड़ द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया। ये दावे ओवैसी की ओर से किए गए हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि एक समुदाय को निशाना बनाए जाने का मुद्दा चुनाव में महत्वपूर्ण रहेगा। वहीं महिला मतदाताओं को लेकर उन्होंने कहा कि AIMIM चुनाव लड़ेगी और पार्टी को सभी वर्गों के समर्थन की आवश्यकता होगी।

    गठबंधन को लेकर ओवैसी ने अभी किसी दल के साथ अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की है। ताजा बयानों में उन्होंने समान सोच रखने वाले दलों के साथ मिलकर काम करने की संभावना खुली रखी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार AIMIM ने उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए गठबंधन से जुड़े फैसले की घोषणा 2 अक्टूबर तक करने का संकेत दिया है।

    इस बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में विभिन्न दल अपने संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में AIMIM का गठबंधन को लेकर रुख आने वाले दिनों में राज्य के राजनीतिक समीकरणों और विपक्षी दलों के बीच बातचीत का एक महत्वपूर्ण विषय बना रहेगा।