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  • UP Election 2027 से पहले PDA की नई परिभाषा पर मायावती का हमला, अखिलेश यादव की रणनीति पर उठाए सवाल

    UP Election 2027 से पहले PDA की नई परिभाषा पर मायावती का हमला, अखिलेश यादव की रणनीति पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की राजनीति में जातीय समीकरणों को लेकर बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से PDA फॉर्मूले में ‘P’ का अर्थ पंडित बताए जाने के बाद बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा चुनावी परिस्थितियों और राजनीतिक जरूरतों के अनुसार अपने सामाजिक समीकरण की व्याख्या बदलती रहती है। उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में PDA को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले PDA में ‘P’ का अर्थ पिछड़ा बताती थी, जबकि इसके साथ दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़ा जाता था। अब अखिलेश यादव की ओर से ‘P’ को पंडित बताए जाने को उन्होंने चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा है। मायावती का कहना है कि ब्राह्मण समाज के लोगों का बसपा की ओर बढ़ता जुड़ाव देखकर सपा ने अपने राजनीतिक संदेश में बदलाव किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आने पर अलग-अलग सामाजिक वर्गों को साधने के लिए सपा अपनी राजनीतिक भाषा और समीकरण में परिवर्तन करती है।

    उत्तर प्रदेश में लंबे समय से जातीय और सामाजिक गठजोड़ चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक दल अलग-अलग समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला भी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को राजनीतिक रूप से एकजुट करने की रणनीति के तौर पर सामने आया था। अब इसमें पंडित शब्द को शामिल किए जाने से सपा की रणनीति को लेकर विपक्षी दलों को हमला करने का नया मुद्दा मिल गया है।

    मायावती ने इस दौरान बसपा की राजनीतिक विचारधारा को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसी एक जाति, समुदाय या वर्ग के हित तक सीमित नहीं है। बसपा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर काम करने का दावा करती है और उसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना है। मायावती ने अपनी पार्टी की पिछली सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकारों के दौरान भी सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई गई थीं।

    बसपा प्रमुख ने लोगों से जाति आधारित राजनीतिक नारों और चुनावी समीकरणों को लेकर सतर्क रहने की अपील भी की। उनका कहना है कि चुनाव के समय अलग-अलग समुदायों को आकर्षित करने के लिए राजनीतिक दल अपनी भाषा और रणनीति बदल सकते हैं, लेकिन इससे समाज की मूल समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता। मायावती ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी लाभ के लिए राजनीतिक समीकरण बदलने के बजाय सभी वर्गों के व्यापक हित पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका को देखते हुए अखिलेश यादव के बयान और मायावती की प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जातीय संतुलन और सामाजिक गठबंधन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में PDA की परिभाषा और इसके दायरे को लेकर सपा, बसपा तथा अन्य दलों के बीच बयानबाजी और बढ़ सकती है। मायावती का ताजा हमला इसी व्यापक राजनीतिक मुकाबले का हिस्सा माना जा रहा है।

  • जयंत चौधरी के करीबी रामाशीष राय ने छोड़ा आरएलडी प्रदेश अध्यक्ष पद, राजनीति में मूल्यों की कमी पर उठाए सवाल

    जयंत चौधरी के करीबी रामाशीष राय ने छोड़ा आरएलडी प्रदेश अध्यक्ष पद, राजनीति में मूल्यों की कमी पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राष्ट्रीय लोकदल यानी आरएलडी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को भेजा है। राय के इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरएलडी के संगठन और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

    रामाशीष राय को जयंत चौधरी के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए कई जिलों का दौरा किया और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश की। इस्तीफा देते हुए उन्होंने पार्टी के प्रति आभार जताया, लेकिन अपने पत्र में देश की राजनीति और सामाजिक परिस्थितियों को लेकर कई गंभीर चिंताएं भी जाहिर कीं।

    राय ने कहा कि उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाने का प्रयास किया। उन्होंने संगठन के विस्तार और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए लगातार काम किया। हालांकि, अब उन्होंने अपने विचारों और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया है। उनके इस फैसले को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आरएलडी के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

    अपने इस्तीफे के दौरान रामाशीष राय ने राजनीति में मूल्यों के कमजोर होने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यवस्था में विचारधारा और सिद्धांतों की जगह धीरे-धीरे दूसरी चीजों का प्रभाव बढ़ रहा है। उनके मुताबिक राजनीति में धन और परिवार का प्रभाव बढ़ना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।

    राय ने सामाजिक परिस्थितियों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जाति और समाज के नाम पर लोगों के बीच दूरी बढ़ रही है। उनका मानना है कि सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए राजनीतिक दलों को गंभीर प्रयास करने की जरूरत है। उनके बयान से साफ है कि इस्तीफे के पीछे केवल संगठनात्मक कारण ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर उनकी अपनी चिंताएं भी हैं।

    उन्होंने किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। राय के अनुसार किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिलने की समस्या बनी हुई है, जबकि बड़ी संख्या में युवा रोजगार को लेकर परेशान हैं। उन्होंने इन मुद्दों को देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए लोकतंत्र को मजबूत करने और लोगों के बीच एकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और सभी राजनीतिक दल अभी से अपने संगठन को मजबूत करने की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे समय में किसी प्रमुख क्षेत्रीय दल के प्रदेश अध्यक्ष का इस्तीफा संगठन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। आरएलडी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रही है और किसान तथा ग्रामीण मुद्दे पार्टी की राजनीति का अहम हिस्सा रहे हैं।

    रामाशीष राय के इस्तीफे के बाद अब पार्टी के सामने प्रदेश संगठन के नेतृत्व को लेकर अगला फैसला करने की चुनौती होगी। यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके स्थान पर किस नेता को जिम्मेदारी दी जाती है और आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए आरएलडी अपनी संगठनात्मक रणनीति में क्या बदलाव करती है।

    जयंत चौधरी के नेतृत्व वाली आरएलडी के लिए यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समीकरण तेजी से आकार ले रहे हैं। राय के इस्तीफे के बाद पार्टी के भीतर और प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर बनी रहेगी। फिलहाल उनके फैसले ने चुनाव से पहले आरएलडी के संगठन और नेतृत्व को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

  • रफ्तार ने छीनी जिंदगी, अतीक अहमद के बेटे अबान की दर्दनाक मौत; आखिरी बार बोला- 'मुझे बचा लो'

    रफ्तार ने छीनी जिंदगी, अतीक अहमद के बेटे अबान की दर्दनाक मौत; आखिरी बार बोला- 'मुझे बचा लो'


    नई दिल्ली। माफिया अतीक अहमद के परिवार पर एक बार फिर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गुरुवार सुबह प्रयागराज से झांसी जा रहे अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे 21 वर्षीय अबान अहमद की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। वह अपने बड़े भाई अली से मिलने झांसी जेल जा रहा था। रास्ते में झांसी से करीब 70 किलोमीटर पहले पूंछ थाना क्षेत्र में उनकी तेज रफ्तार क्रेटा कार डिवाइडर से टकरा गई। हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार पांचों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर ही अबान और उसके साथी सोनू ने दम तोड़ दिया जबकि तीन अन्य घायलों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना के समय कार की रफ्तार काफी तेज थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन कई फीट हवा में उछलकर सड़क पर दूर तक घिसटता चला गया। कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और सभी लोग अंदर फंस गए। आसपास मौजूद लोगों और पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद दरवाजा तोड़कर घायलों को बाहर निकाला।

    घटना के प्रत्यक्षदर्शी दीपक यादव ने बताया कि सबसे पहले वह मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने लोहे की रॉड की मदद से कार का दरवाजा तोड़ा और अंदर फंसे अबान को बाहर निकालने की कोशिश की। उनके अनुसार अबान के मुंह से खून निकल रहा था और उसने धीमी आवाज में कहा मुझे बचा लो। इसके कुछ ही क्षण बाद वह बेहोश हो गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।

    हादसे की वजह को लेकर दो अलग-अलग बातें सामने आई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हाईवे पर अचानक एक बछड़ा आ गया था। उसे बचाने के प्रयास में चालक ने कार मोड़ी और संतुलन बिगड़ने से वाहन डिवाइडर से टकरा गया। वहीं घायल उमर अहमद का कहना है कि सड़क पर पड़ी ईंट के कारण कार अनियंत्रित हुई और हादसा हुआ। पुलिस दोनों पहलुओं की जांच कर रही है।

    फॉरेंसिक जांच के दौरान कार से सिगरेट के पैकेट जूते और दो अंग्रेजी उपन्यास भी बरामद हुए हैं। माना जा रहा है कि अबान ये सामान अपने बड़े भाई अली के लिए लेकर जा रहा था जो इस समय झांसी जेल में बंद है। दुर्घटना के समय अबान आगे की सीट पर बैठा था जबकि उसका साथी जैद वाहन चला रहा था। हल्की बारिश के कारण सड़क भी फिसलन भरी बताई जा रही है जिससे हादसे की आशंका और बढ़ गई।

    अबान अतीक अहमद का सबसे छोटा बेटा था। परिवार पहले ही कई बड़े झटके झेल चुका है। वर्ष 2023 में उसके भाई असद की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। उसी वर्ष अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा के बीच हत्या कर दी गई थी। फिलहाल परिवार के अन्य सदस्य अलग-अलग कानूनी मामलों में जेल में हैं जबकि अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन अब भी फरार है।

    अबान के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। जानकारी के अनुसार शुक्रवार को प्रयागराज में अतीक अहमद की कब्र के पास ही अबान को सुपुर्द ए खाक किया जाएगा। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार के खतरों को सामने लाने वाला साबित हुआ है।

  • जनता दर्शन में सख्त दिखे सीएम योगी, बोले- जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    जनता दर्शन में सख्त दिखे सीएम योगी, बोले- जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    लखनऊ। सावन के पहले सोमवार को धार्मिक कार्यक्रमों और विधानसभा के मानसून सत्र की व्यस्तताओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में लोगों की समस्याएं सुनीं। विभिन्न जिलों से पहुंचे लोगों से उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनके प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारियों को सौंपे और समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए।

    पुलिस मामलों पर दिखाई सख्ती

    जनता दर्शन के दौरान पुलिस से जुड़ी कई शिकायतें सामने आने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मुकदमों में दबाव बनाने और आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी जैसी शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए शासन स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों से इस तरह की शिकायतें लगातार आ रही हैं, वहां संबंधित पुलिस अधीक्षकों की जवाबदेही तय की जाए।

    पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार के निर्देश

    सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। प्रत्येक पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाए।

    राजस्व और पुलिस मामलों पर विशेष फोकस
    मुख्यमंत्री ने राजस्व और पुलिस से जुड़े मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पारिवारिक विवादों में पहले आपसी संवाद और समझौते का प्रयास किया जाए, उसके बाद आवश्यकता होने पर विधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनसमस्याओं का समाधान पारदर्शिता, संवेदनशीलता और गुणवत्ता के साथ किया जाए, ताकि लोगों को संतोषजनक न्याय और राहत मिल सके।

  • उत्तर प्रदेश की वैश्विक उड़ान तेज, पीयूष गोयल बोले- व्यापार समझौतों से चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

    उत्तर प्रदेश की वैश्विक उड़ान तेज, पीयूष गोयल बोले- व्यापार समझौतों से चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल स्थानीय आर्थिक शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से वैश्विक विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में उद्योग, निर्यात और रोजगार के नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उत्तर प्रदेश के उद्योगों, किसानों, कारीगरों और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को मिल रहा है।

    पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के व्यापार समझौते देश के विभिन्न राज्यों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख उद्योग अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे राज्य के निर्यातकों को नए बाजार मिल रहे हैं और स्थानीय उत्पादों की मांग विदेशों में बढ़ने की संभावना मजबूत हो रही है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कानपुर का प्रसिद्ध चमड़ा उद्योग उत्तर प्रदेश की औद्योगिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अब व्यापार समझौतों और बेहतर वैश्विक पहुंच के कारण इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि चमड़ा उद्योग से जुड़े हजारों कारीगरों और कारोबारियों को इसका सीधा फायदा पहुंच सकता है।

    उन्होंने नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि यह क्षेत्र देश के प्रमुख उत्पादन केंद्रों में तेजी से विकसित हो रहा है। वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलने से नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं और निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और तकनीकी उत्पादों के निर्माण में उत्तर प्रदेश की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

    पीयूष गोयल ने सहारनपुर की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को भी वैश्विक बाजार से जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की विदेशों में मांग बढ़ रही है और व्यापारिक बाधाएं कम होने से छोटे कारीगरों और लघु उद्योगों को नए अवसर मिल सकते हैं। इससे स्थानीय कला और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र का भी जिक्र करते हुए कहा कि किसानों के उत्पादों के लिए वैश्विक बाजारों में संभावनाएं बढ़ रही हैं। बेहतर व्यापार व्यवस्था और निर्यात के नए रास्ते खुलने से कृषि उत्पादकों को अधिक अवसर मिल सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    गोयल ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का काम तेज हुआ है। कानपुर का चमड़ा उद्योग, नोएडा का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र, सहारनपुर का हस्तशिल्प और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। औद्योगिक विकास, निर्यात वृद्धि और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों के चलते आने वाले समय में राज्य देश की अर्थव्यवस्था में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • पेपर लीक विवाद के बीच AAP का राज्यपाल पर सवाल, दीक्षांत समारोह के बहिष्कार की अपील; उच्च शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

    पेपर लीक विवाद के बीच AAP का राज्यपाल पर सवाल, दीक्षांत समारोह के बहिष्कार की अपील; उच्च शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में पेपर लीक विवाद को लेकर सियासी बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी ने राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उच्च शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जब प्रदेश में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और छात्र लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं, तब ऐसे माहौल में विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह आयोजित करना नैतिक रूप से उचित नहीं माना जा सकता। पार्टी ने राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों का समाधान पहले होना चाहिए।

    आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश मुख्य प्रदेश प्रवक्ता और छात्र संघ प्रभारी वंशराज दुबे ने कहा कि सरकार एक ओर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं और छात्राओं के हितों की बात करती है, जबकि दूसरी ओर छात्रों के विरोध और उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उनका आरोप है कि परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है, लेकिन सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय विरोध करने वालों पर ही सवाल उठा रही है।

    पार्टी ने 27 से 29 जुलाई के बीच जौनपुर, वाराणसी और बलिया के विश्वविद्यालयों में प्रस्तावित दीक्षांत समारोहों को लेकर भी आपत्ति जताई है। आम आदमी पार्टी ने विश्वविद्यालयों के मेधावी छात्रों और गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से अपील की है कि वे इन कार्यक्रमों का बहिष्कार कर अपनी असहमति दर्ज कराएं। पार्टी का कहना है कि यह विरोध किसी डिग्री या उपलब्धि के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग के समर्थन में है।

    वंशराज दुबे ने कहा कि विद्यार्थियों की डिग्रियां उनके वर्षों की मेहनत, परिवार के त्याग और संघर्ष का परिणाम होती हैं। इसलिए सरकार को पहले उन परिस्थितियों का समाधान करना चाहिए, जिनके कारण परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि यदि छात्रों की शिकायतों का समाधान नहीं किया जाता और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तो असंतोष और बढ़ सकता है।

    पार्टी ने उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि यदि छात्रों के लोकतांत्रिक विरोध को स्वीकार करने के बजाय उन पर आरोप लगाए जाते हैं, तो इससे शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि जिम्मेदारी तय करना और निष्पक्ष कार्रवाई करना सरकार का दायित्व है, ताकि युवाओं का विश्वास दोबारा स्थापित किया जा सके।

    प्रदेश में हाल के दिनों में पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन को लेकर लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं, जबकि सरकार परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कह रही है। इसी बीच आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के हितों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर उसका विरोध आगे भी जारी रहेगा। शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच अब सभी की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और इस पूरे विवाद के समाधान पर टिकी हुई है।

  • चित्रकूट में NEET छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, तीन युवकों पर केस दर्ज, CCTV के आधार पर जांच तेज

    चित्रकूट में NEET छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, तीन युवकों पर केस दर्ज, CCTV के आधार पर जांच तेज


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में एक छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। घटना देवांगना घाटी क्षेत्र में हुई, जहां पीड़िता अपने परिचित के साथ गई थी। पुलिस के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद तत्काल प्राथमिकी दर्ज की गई और आरोपियों की पहचान व गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आसपास के क्षेत्रों में लगातार तलाशी अभियान चला रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 20 वर्षीय छात्रा राजस्थान के कोटा में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही है और मध्य प्रदेश के सतना जिले की निवासी है। वह घूमने के उद्देश्य से चित्रकूट आई थी। उसके साथ मौजूद किशोर ने पुलिस को बताया कि घटना के दौरान तीन युवकों ने उन्हें रोका और खुद को वन विभाग का कर्मचारी बताते हुए धमकाया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद किशोर को बांध दिया गया और छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

    पुलिस का कहना है कि घटना की सूचना मिलने के बाद मौके का निरीक्षण किया गया और आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। जांच के दौरान कुछ फुटेज में संदिग्ध व्यक्तियों के बाइक से गुजरने की जानकारी मिली है, जिसके आधार पर उनकी पहचान का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

    जांच अधिकारियों के अनुसार, पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया जा रहा है और उसके बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही घटना के समय उसके साथ मौजूद किशोर से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।

    जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमों को सक्रिय किया गया है। आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच के साथ स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावित सुरागों पर काम किया जा रहा है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास जारी है।

    इस घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। समाजवादी पार्टी के विधायक अनिल प्रधान ने कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस स्थान पर यह घटना हुई, वह प्रशासनिक और महत्वपूर्ण संस्थानों से अधिक दूर नहीं है। उन्होंने आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

    यह मामला एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष और तेज जांच की जाएगी तथा उपलब्ध सभी साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस ने लोगों से अफवाहों से बचते हुए केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

  • राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा दावा, विश्वविद्यालय हॉस्टलों में हो रही ड्रग्स की सप्लाई

    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का बड़ा दावा, विश्वविद्यालय हॉस्टलों में हो रही ड्रग्स की सप्लाई


    उत्तर प्रदेश । मेरठ स्थित Chaudhary Charan Singh University के 38वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल Anandiben Patel ने विश्वविद्यालयों में बढ़ती नशे की समस्या को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि कई विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों में बाहर से आने वाले खाने के जरिए ड्रग्स की सप्लाई हो रही है और परिसर के बाहर शराब की बोतलें भी मिली हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह कई कुलपतियों और हॉस्टल प्रबंधन को तस्वीरें भी दिखा चुकी हैं।

    समारोह में राज्यपाल ने 199 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि नशा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह धीरे-धीरे व्यक्ति के सपनों, प्रतिभा, स्वास्थ्य और परिवार की उम्मीदों को खत्म कर देता है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर शिक्षा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

    राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने लगभग 15 विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों का निरीक्षण किया है, जहां कई चिंताजनक स्थितियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि चार पीढ़ियों से उनके परिवार में चाय तक नहीं पी जाती, जबकि आज के कई युवा नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से हॉस्टलों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की अपील की।

    अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं की सामाजिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिना किसी विषय की पूरी जानकारी के केवल भीड़ का हिस्सा बन जाना उचित नहीं है। विद्यार्थियों को देशहित, संविधान और महापुरुषों के विचारों को समझकर आगे बढ़ना चाहिए।

    राज्यपाल ने बेटियों की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस दीक्षांत समारोह में लगभग 75 प्रतिशत स्वर्ण पदक छात्राओं ने हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और समाज को उनके प्रति अपनी सोच बदलनी चाहिए।

    उन्होंने शिक्षकों से भी शोध और लेखन पर अधिक ध्यान देने का आग्रह किया। उनका कहना था कि लंबे समय तक अध्यापन करने वाले शिक्षकों को अधिक पुस्तकें और शोध कार्य प्रकाशित करने चाहिए, ताकि नई पीढ़ी को बेहतर शैक्षणिक सामग्री मिल सके।

    राज्यपाल ने अपने हालिया रेल सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रेलवे ट्रैक के आसपास गंदगी और जलभराव की तस्वीरें संबंधित अधिकारियों को भेजने के बाद सफाई कराई गई। साथ ही उन्होंने युवाओं से अंतरिक्ष विज्ञान, नई तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि देश के वैज्ञानिक और इंजीनियर वैश्विक स्तर पर नई उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।

  • बागपत में नम आंखों से अंतिम विदाई, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ अनुराग धनखड़ का अंतिम संस्कार

    बागपत में नम आंखों से अंतिम विदाई, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ अनुराग धनखड़ का अंतिम संस्कार


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में बुधवार को त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सुबह उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। श्मशान घाट पर पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और इसके बाद उनके बेटे अभिषेक ने मुखाग्नि देकर पिता को अंतिम विदाई दी।

    मंगलवार देर रात जब अनुराग धनखड़ का पार्थिव शरीर उनके पैतृक निवास बड़ौत पहुंचा, तो वहां का माहौल बेहद भावुक हो गया। उनकी मां बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर बिलख पड़ीं। उन्होंने गाल सहलाकर आखिरी बार बेटे को दुलार किया और बार-बार “मेरे बच्चे” कहकर रोती रहीं। पत्नी कल्पना भी पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ीं। बेटे अभिषेक ने मां को संभालने की कोशिश की, लेकिन खुद भी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और पिता के शव से लिपटकर रो पड़े।

    अनुराग धनखड़ का पार्थिव शरीर त्रिपुरा से एयर एंबुलेंस के जरिए दिल्ली लाया गया था। वहां से सड़क मार्ग से बागपत के बड़ौत स्थित उनके घर पहुंचाया गया। अंतिम यात्रा में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोग शामिल हुए।

    इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार में स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री असीम अरुण ने भी परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अनुराग धनखड़ एक समर्पित और कुशल पुलिस अधिकारी थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मृत्यु के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

    पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष वेदपाल सहित कई स्थानीय लोगों ने भी इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उनका कहना है कि इतने वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई, इसका निष्पक्ष और विस्तृत खुलासा होना चाहिए।

    गौरतलब है कि अनुराग धनखड़ का शव 20 जुलाई को त्रिपुरा पुलिस मुख्यालय में मिला था। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया है, हालांकि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच अभी जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही उनकी मौत के कारणों पर अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

    लखनऊ में BJP-कांग्रेस आमने-सामने, कांग्रेस कार्यालय घेरने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव उस समय बढ़ गया, जब भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस प्रदेश कार्यालय का घेराव करने के लिए निकले। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कई कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे।

    स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया और काफी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचने से रोक दिया। मौके पर कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा, हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई।

    दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश कार्यालय के बाहर भी सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई थी। कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता लाठी लेकर परिसर में तैनात नजर आईं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता शांतिप्रिय है, लेकिन यदि जरूरत पड़ी तो जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए और उनके पोस्टरों पर जूते-चप्पल भी बरसाए। दोनों दलों के समर्थकों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही।

    यह प्रदर्शन 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन की प्रतिक्रिया के रूप में आयोजित किया गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यालय के घेराव का ऐलान किया गया था। विपक्ष के उस प्रदर्शन में राहुल गांधी, अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने हिस्सा लिया था, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।

    पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी की व्यवस्था की। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।