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  • Venezuela: भूकंप में मृतकों की संख्या 2200 के पार, अब भी रेस्क्यू जारी, मेक्सिको से आई मशहूर बचाव टीम

    Venezuela: भूकंप में मृतकों की संख्या 2200 के पार, अब भी रेस्क्यू जारी, मेक्सिको से आई मशहूर बचाव टीम


    मेक्सिको सिटी।
    वेनेजुएला (Venezuela) में आए विनाशकारी भूकंप (Earthquakes) ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में मृतकों की संख्या 2,200 के पार पहुंच गई है, जबकि 11,000 से ज्यादा लोग घायल हैं। इस मुश्किल घड़ी में मेक्सिको (Mexico) की मशहूर बचाव टीम ‘टोपोस’ (Topos Azteca) मदद के लिए वेनेजुएला पहुंच रही है। यह टीम मलबे में दबे लोगों को निकालने में माहिर मानी जाती है।


    तबाही का मंजर और बढ़ती चुनौतियां

    भूकंप के करीब एक हफ्ते बाद भी वेनेजुएला में हालात बेहद खराब हैं। सबसे ज्यादा असर ला गुआरा राज्य में हुआ है, जहां कई बहुमंजिला इमारतें और घर जमींदोज हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बचाव टीमें दिन-रात मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रही हैं। हालांकि, समय बीतने के साथ अब जीवित बचे लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। मेक्सिको से रवाना हुए 39 वर्षीय स्वयंसेवक जर्मन बेलो अपने साथ बचाव उपकरणों के अलावा बड़ी संख्या में ‘बॉडी बैग’ भी ले जा रहे हैं, ताकि मृतकों के शवों को सम्मान के साथ निकाला जा सके।


    कौन हैं ये ‘टोपोस’ और कैसे करते हैं काम?

    ‘टोपोस’ मेक्सिको का एक नागरिक बचाव संगठन है। इसकी शुरुआत 1985 में मेक्सिको सिटी में आए भीषण भूकंप के बाद हुई थी। स्पेनिश भाषा में ‘टोपोस’ का मतलब ‘छछूंदर’ (Moles) होता है। इस टीम को यह नाम इसलिए मिला क्योंकि इसके सदस्य मलबे के बीच बनी बेहद संकरी जगहों और छेदों में रेंगकर घुस जाते हैं। ये लोग थर्मल कैमरे और संवेदनशील माइक्रोफोन जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं ताकि मलबे के नीचे दबी हल्की सी आहट या शरीर की गर्मी को पहचाना जा सके।


    खामोशी का संकेत और बचाव का तरीका

    बचाव कार्य के दौरान यह टीम एक खास तकनीक अपनाती है। जब कोई बचावकर्मी हवा में मुट्ठी बंद करके हाथ उठाता है, तो इसका मतलब होता है ‘बिल्कुल खामोश हो जाएं’। यह संकेत मिलते ही वहां मौजूद अन्य लोग चुप हो जाते हैं। इस सन्नाटे में बचावकर्मी मलबे के नीचे कान लगाकर सुनते हैं कि कहीं से कोई आवाज या खटखटाहट तो नहीं आ रही। इसके बाद फावड़े और हथौड़ों की मदद से धीरे-धीरे मलबा हटाया जाता है ताकि मलबे के और ज्यादा गिरने का खतरा न रहे।


    उम्मीद की एक आखिरी किरण

    मेक्सिको सिटी के एयरपोर्ट पर एक भावुक पल देखने को मिला। जब वेनेजुएला के एक इंजीनियर डिएगो बेजरानो को पता चला कि जर्मन बेलो और उनकी टीम उनके देश जा रही है, तो वह रो पड़े। डिएगो का परिवार अभी भी वेनेजुएला की राजधानी कराकस में है। बेलो ने उन्हें गले लगाकर तसल्ली दी। बेलो पेशे से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं और अपनी छोटी सी वर्कशॉप चलाते हैं, लेकिन आपदा के समय वह सब छोड़कर लोगों की जान बचाने निकल पड़ते हैं। उनका कहना है कि किसी दुखी इंसान को उम्मीद देना ही उनका सबसे बड़ा इनाम है।

  • डॉक्टर्स डे पर पीएम मोदी का चिकित्सा समुदाय को सलाम, वेनेजुएला में सेवा दे रहे भारतीय डॉक्टरों की समर्पण भावना को बताया देश का गौरव

    डॉक्टर्स डे पर पीएम मोदी का चिकित्सा समुदाय को सलाम, वेनेजुएला में सेवा दे रहे भारतीय डॉक्टरों की समर्पण भावना को बताया देश का गौरव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के डॉक्टरों और चिकित्सा समुदाय को शुभकामनाएं देते हुए उनके समर्पण, सेवा भावना और मानवीय योगदान की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से वेनेजुएला में राहत एवं चिकित्सा सेवाएं दे रहे भारतीय चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के कार्यों को देश के लिए गर्व का विषय बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय डॉक्टर मानवता की सेवा के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय चिकित्सा समुदाय ने हर चुनौतीपूर्ण दौर में अपनी जिम्मेदारी का उत्कृष्ट निर्वहन किया है। उनका मानना है कि डॉक्टर केवल मरीजों का उपचार ही नहीं करते, बल्कि समाज में विश्वास, सुरक्षा और आशा का वातावरण भी तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में चिकित्सकों का समर्पण भारत की सेवा संस्कृति और मानवीय मूल्यों का सशक्त उदाहरण है।

    उन्होंने वेनेजुएला में संचालित राहत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कार्यरत भारतीय चिकित्सा दल चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रभावित लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। यह मिशन न केवल मानवीय सहायता का उदाहरण है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका को भी मजबूत करता है। उनके अनुसार, भारतीय डॉक्टरों की विशेषज्ञता और सेवा भावना विश्व समुदाय में भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई प्रदान कर रही है।

    प्रधानमंत्री ने चिकित्सकों के योगदान को भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की मेहनत, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा के कारण करोड़ों नागरिकों का स्वास्थ्य तंत्र पर विश्वास लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने सभी चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका योगदान स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए विस्तार का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के अनुसार देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और मेडिकल शिक्षा के लिए स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर पर सीटों का व्यापक विस्तार किया गया है। इससे भविष्य के लिए अधिक प्रशिक्षित चिकित्सक तैयार हो रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच देश के दूरदराज क्षेत्रों तक बढ़ाने में सहायता मिल रही है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में चिकित्सा समुदाय की भूमिका लगातार बढ़ेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डॉक्टर निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने, चिकित्सा अनुसंधान को गति देने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे। उनके अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार और मानव संसाधन का विस्तार देश की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

    वेनेजुएला में चल रहे मानवीय राहत अभियान के तहत भारत ने चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम, पोर्टेबल अस्पताल और बड़ी मात्रा में दवाइयों तथा राहत सामग्री की आपूर्ति की है। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे मानवीय प्रयास भारत की वैश्विक जिम्मेदारी और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करते हैं।

    राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री का संदेश चिकित्सा समुदाय के प्रति सम्मान और विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है। उन्होंने सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को समाज की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सेवा भावना के लिए शुभकामनाएं दीं।

  • वेनेजुएला भूकंप संकट में भारत की बड़ी मानवीय पहल, ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत राहत और चिकित्सा सहायता से हजारों जिंदगियों को संबल

    वेनेजुएला भूकंप संकट में भारत की बड़ी मानवीय पहल, ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत राहत और चिकित्सा सहायता से हजारों जिंदगियों को संबल

    नई दिल्ली । उत्तरी वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद उत्पन्न गंभीर मानवीय संकट के बीच भारत ने तेजी से राहत अभियान शुरू करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की मिसाल पेश की है। 7.5 तीव्रता के इस भूकंप से व्यापक तबाही हुई है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत और लापता होने की स्थिति ने संकट को और गहरा दिया है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत आपात राहत और चिकित्सा सहायता भेजी है।

    भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमान राहत सामग्री लेकर वेनेजुएला पहुंचे हैं। यह सामग्री कोटे डी आइवर के अबिदजान के रास्ते प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाई गई है। इस अभियान का उद्देश्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत पहुंचाकर जीवन बचाने और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करना है।

    इस राहत मिशन में विदेश मंत्रालय द्वारा लगभग 6 टन आवश्यक दवाइयां और आपातकालीन मेडिकल सामग्री भेजी गई है। इसके साथ ही एक विशेष भारतीय फील्ड अस्पताल टीम भी तैनात की गई है, जिसमें कुल 41 सदस्य शामिल हैं। इस टीम में मेडिकल अफसर, पैरामेडिकल स्टाफ और विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं, जो गंभीर रूप से घायल लोगों के उपचार, ट्रॉमा केयर और आपात सर्जरी जैसी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

    भारत की इस मानवीय पहल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अत्याधुनिक ‘भीष्म क्यूब’ तकनीक है, जिसे आपदा क्षेत्रों में तेजी से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है। इस मिशन के तहत दो भीष्म क्यूब वेनेजुएला भेजे गए हैं, जो एक कॉम्पैक्ट और मोबाइल अस्पताल प्रणाली के रूप में कार्य करते हैं। यह तकनीक कम समय में स्थापित होकर बड़े पैमाने पर मरीजों को उपचार सुविधा देने में सक्षम है।

    भीष्म क्यूब की क्षमता के अनुसार यह एक साथ बड़ी संख्या में मरीजों को ट्रॉमा केयर, इमरजेंसी सर्जरी और आईसीयू स्तर की चिकित्सा सुविधा प्रदान कर सकता है। इसमें पोर्टेबल वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम और आधुनिक डायग्नोस्टिक उपकरण शामिल हैं, जिससे आपदा के समय तुरंत चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा सकती है।

    वेनेजुएला में भूकंप के बाद स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। कई शहरों और कस्बों में इमारतें ढह गई हैं और राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। मलबे के नीचे फंसे लोगों को निकालने के लिए स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां संयुक्त रूप से प्रयास कर रही हैं।

    इस आपदा में भारी जनहानि और व्यापक विस्थापन की स्थिति ने मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है। ऐसे समय में भारत की त्वरित सहायता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो आपदा प्रबंधन और वैश्विक सहयोग की दिशा में एक मजबूत संदेश देता है।

    भारत का यह राहत अभियान न केवल चिकित्सा सहायता तक सीमित है, बल्कि यह आपदा प्रभावित लोगों के जीवन को बचाने और पुनर्वास प्रयासों को गति देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के माध्यम से भारत ने एक बार फिर वैश्विक मानवीय सहयोग में अपनी सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया है।

  • भूकंप के झटकों से उबर नहीं पा रहा बेनेजुएला… आज भी आया 5.6 तीव्रता का भूकंप, अब तक 1430 मौतें

    भूकंप के झटकों से उबर नहीं पा रहा बेनेजुएला… आज भी आया 5.6 तीव्रता का भूकंप, अब तक 1430 मौतें


    कराकस।
    वेनेजुएला (Venezuela) भूकंप (Earthquake) के झटकों से उबरता नहीं दिख रहा. बीते बुधवार को आए दो विनाशकारी भूकंप (Two devastating Earthquakes) के झटकों के बाद अब भी वेनेजुएला में भूकंप के झटके आ रहे हैं. शनिवार के बाद अब आज रविवार को भी वेनेजुएला में भूकंप के झटके महसूस किए गए. इससे लोग दहशत में आ गए. इधर बुधवार को आए दो विनाशकारी भूंकप के कारण वेनेजुएला में हजारों लोगों की मौत होने की बात कही जा रही है. आधिकारिक रूप से अभी तक 1430 लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है. हजारों लोग घायल है. हजारों लापता बताए जा रहे हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।

    नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिग्ज ने शनिवार को बताया कि बुधवार को आए भूकंप से अभी तक 1,430 लोग मारे गए और 3,238 लोग घायल हुए>


    आज वेनेजुएला में 5.6 तीव्रता का भूकंप आया

    रविवार सुबह वेनेजुएला में 5.6 की तीव्रता का भूकंप आया. शुरुआती जानकारी के अनुसार 5.6 तीव्रता का यह भूकंप वेनेजुएला के एल लिमोन से लगभग 30 किमी दूर उत्तर पूर्व में आया. स्थानीय समय 3 बजकर 20 मिनट पर भूंकप आया है. इससे पहले शनिवार सुबह वेनेजुएला में 4.1 तीव्रता का भूकंप आया था।

    वेनेजुएला की भूकंप अनुसंधान संस्था (फनविसिस) ने बताया कि देश के मध्य हिस्से में 4.1 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया. यह भूकंप ऐसे समय आया है जब लोग इस हफ्ते की शुरुआत में आए दो बड़े और विनाशकारी भूकंपों के बाद पहले से ही डरे हुए हैं।

    बुधवार को आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद इस शहर को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया था, क्योंकि यहां काफी नुकसान हुआ था. अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को आया भूकंप जमीन से सिर्फ पांच किलोमीटर नीचे था. इतनी कम गहराई वाले भूकंप अक्सर ज्यादा तेज महसूस होते हैं और इमारतों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

    काराकस और आसपास के इलाकों के लोगों ने भी झटके महसूस किए. कई लोग डर के कारण इमारतों से बाहर निकल आए, क्योंकि उन्हें और नुकसान होने या इमारतें गिरने का डर था. यह भूकंप बुधवार को आए दो बड़े भूकंपों के कुछ ही दिन बाद आया, जिनसे कई जगह भारी तबाही हुई थी. कई इमारतें गिर गईं, भूस्खलन हुआ और लोगों की मौत भी हुई.

  • जब धरती ने दिखाई अपनी सबसे भयावह ताकत, दुनिया के महाविनाशकारी भूकंपों ने लाखों जिंदगियां निगलीं और बदल दिया इतिहास

    जब धरती ने दिखाई अपनी सबसे भयावह ताकत, दुनिया के महाविनाशकारी भूकंपों ने लाखों जिंदगियां निगलीं और बदल दिया इतिहास

    नई दिल्ली । वेनेजुएला में हाल ही में आए शक्तिशाली भूकंपों ने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान प्राकृतिक आपदाओं की भयावहता की ओर आकर्षित किया है। 7.2 और 7.5 तीव्रता के झटकों ने यह याद दिलाया कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रगति के बावजूद प्रकृति की शक्ति के सामने मानव सभ्यता अब भी सीमित है। हालांकि वेनेजुएला में आए ये भूकंप गंभीर माने जा रहे हैं, लेकिन विश्व इतिहास में दर्ज सबसे शक्तिशाली भूकंपों की सूची इससे कहीं अधिक विनाशकारी घटनाओं से भरी हुई है।

    दुनिया के इतिहास में अब तक दर्ज सबसे शक्तिशाली भूकंप वर्ष 1960 में दक्षिण अमेरिकी देश चिली में आया था। बायोबियो क्षेत्र में दर्ज इस भूकंप की तीव्रता 9.5 मापी गई थी। इसे ग्रेट चिली अर्थक्वेक के नाम से जाना जाता है। इस आपदा ने हजारों इमारतों को क्षतिग्रस्त कर दिया और व्यापक तबाही मचाई। बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए तथा कई क्षेत्रों में सामान्य जीवन लंबे समय तक प्रभावित रहा।

    इसके बाद वर्ष 1964 में अमेरिका के अलास्का क्षेत्र में 9.2 तीव्रता का भूकंप आया। यह भूकंप कई मिनट तक महसूस किया गया और इसके प्रभाव ने विशाल भूभाग को प्रभावित किया। भूकंप के साथ भूस्खलन और समुद्री उथल-पुथल ने भी नुकसान को बढ़ा दिया। इसे उत्तरी अमेरिका के इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है।

    वर्ष 2004 में इंडोनेशिया के सुमात्रा तट के निकट समुद्र के भीतर आया 9.1 तीव्रता का भूकंप आधुनिक इतिहास की सबसे घातक प्राकृतिक त्रासदियों में शामिल है। इस भूकंप के बाद उत्पन्न सुनामी ने हिंद महासागर से जुड़े अनेक देशों को अपनी चपेट में ले लिया। भारत, श्रीलंका, थाईलैंड और इंडोनेशिया समेत कई देशों के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही हुई। लाखों लोग प्रभावित हुए और दो लाख से अधिक लोगों की जान चली गई। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर सुनामी चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

    वर्ष 2011 में जापान के तोहोकू क्षेत्र में आए 9.1 तीव्रता के भूकंप ने दुनिया को एक और बड़ा झटका दिया। अत्याधुनिक तकनीक और मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था होने के बावजूद जापान को भारी नुकसान झेलना पड़ा। भूकंप के बाद आई विशाल सुनामी ने कई शहरों को प्रभावित किया और हजारों लोगों की मौत हुई। इस आपदा का असर ऊर्जा और परमाणु सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों तक भी पहुंचा।

    रूस का कामचटका क्षेत्र भी दुनिया के सबसे शक्तिशाली भूकंपों का साक्षी रहा है। वर्ष 1952 में यहां 9.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसने व्यापक विनाश फैलाया। वहीं हाल के वर्षों में इसी क्षेत्र में एक और शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया, जिसने वैज्ञानिकों का ध्यान पृथ्वी की सक्रिय विवर्तनिक गतिविधियों की ओर आकर्षित किया।

    भारत भी इस सूची से अछूता नहीं रहा है। वर्ष 1950 में पूर्वोत्तर क्षेत्र, विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश और आसपास के इलाकों में आए 8.6 तीव्रता के भूकंप ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया था। यह स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है। इसके अतिरिक्त इक्वाडोर, चिली और अलास्का जैसे क्षेत्रों में भी समय-समय पर आए शक्तिशाली भूकंपों ने हजारों लोगों की जान ली और भूगर्भीय इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंपों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन वैज्ञानिक निगरानी, मजबूत निर्माण मानकों और प्रभावी आपदा प्रबंधन के माध्यम से इनके नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वेनेजुएला की हालिया घटना एक बार फिर यही संदेश देती है कि प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्कता और तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव है।

  • ट्रंप, ईरान और चीन को लेकर ब्रह्मा चेलानी का बड़ा दावा: क्या बदल रही है वैश्विक राजनीति?

    ट्रंप, ईरान और चीन को लेकर ब्रह्मा चेलानी का बड़ा दावा: क्या बदल रही है वैश्विक राजनीति?




    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ Brahma Chellaney ने हाल में एक श्रृंखला में ऐसे दावे किए हैं, जिनमें अमेरिका, ईरान, चीन और कैरेबियन क्षेत्र की भू-राजनीति को लेकर गंभीर टिप्पणियां शामिल हैं।इन दावों के अनुसार वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और अमेरिका की विदेश नीति नई दिशा में जा रही है।

    ट्रंप और वैश्विक रणनीति पर दावा
    दावों में कहा गया है कि Donald Trump कथित तौर पर ईरान संकट के बीच नई रणनीतिक दिशा अपना रहे हैं। इसमें:

    मध्य पूर्व और कैरेबियन क्षेत्र में अमेरिका की सक्रियता बढ़ना

    क्यूबा और वेनेजुएला जैसी सरकारों पर दबाव की नीति

    सत्ता परिवर्तन (regime change) जैसी पुरानी रणनीतियों की वापसी का संकेत

    हालांकि ये सभी दावे विश्लेषण और टिप्पणी पर आधारित हैं, किसी आधिकारिक अमेरिकी नीति दस्तावेज से इनकी पुष्टि नहीं हुई है।

    क्यूबा और कैरेबियन तनाव का संदर्भ
    चेलानी के अनुसार कैरेबियन क्षेत्र में तनाव के पीछे ये कारक बताए गए हैं:

    क्यूबा के खिलाफ आर्थिक और ऊर्जा प्रतिबंधों का विस्तार

    समुद्री नाकेबंदी और तेल आपूर्ति पर रोक के आरोप

    सैन्य गतिविधियों और निगरानी में वृद्धि

    इन घटनाओं को क्षेत्रीय संकट और मानवीय दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन इन दावों पर अलग-अलग पक्षों की राय भिन्न है।

    चीन पर रणनीतिक टिप्पणी
    अपने एक अन्य विश्लेषण में चेलानी ने कहा कि:

    अमेरिका अब चीन को केवल प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि “समकक्ष महाशक्ति” के रूप में देख रहा है

    वैश्विक शक्ति संतुलन बहुध्रुवीय (multipolar) बनता जा रहा है

    एशिया में खासकर जापान और अन्य देशों के लिए चीन-अमेरिका संबंध महत्वपूर्ण तनाव कारक बन रहे हैं

    इस संदर्भ में China को लेकर वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा की चर्चा और तेज हो गई है।

    कितना तथ्य, कितना विश्लेषण?
    यह समझना जरूरी है कि:

    ये दावे मुख्यतः विश्लेषणात्मक टिप्पणियों और भू-राजनीतिक व्याख्या पर आधारित हैं

    इनमें कई बातें “प्रोजेक्शन” या “जियोपॉलिटिकल थ्योरी” के रूप में प्रस्तुत की गई हैं

    आधिकारिक अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इन सभी बिंदुओं की पुष्टि नहीं की है

  • वेनेजुएला के बाद अब ट्रंप की क्यूबा को धमकी, कहा-समझौता कर ले नहीं तो परिणआम भुगतने तैयार

    वेनेजुएला के बाद अब ट्रंप की क्यूबा को धमकी, कहा-समझौता कर ले नहीं तो परिणआम भुगतने तैयार

    वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के करीबी सहयोगी क्यूबा को रविवार को एक और चेतावनी जारी की। वेनेजुएला में अमेरिका के हवाई हमलों और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपदस्थ किए जाने के बाद क्यूबा में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन भड़कने की आशंका है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि या तो क्यूबा अमेरिका के साथ समझौता कर ले नहीं तो उसे परिणआम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा, क्यूबा समय रहते फैसला कर ले, कहीं ऐसा ना हो कि देर हो जाए।

    वेनेजुएला के तेल का प्रमुख खरीदार रहा क्यूबा अब इसकी खेप से वंचित हो गया है, क्योंकि अमेरिकी सेना वेनेजुएला के तेल उत्पादों के उत्पादन, शोधन और वैश्विक वितरण को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत टैंकर को जब्त करना जारी रखे हुए है। ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘क्यूबा लंबे समय से वेनेजुएला के तेल और धन का इस्तेमाल कर रहा था और बदले में उसे सुरक्षा प्रदान कर रहा था, लेकिन अब और नहीं! क्यूबा को अब न तो तेल मिलेगा और न ही धन।’

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा, ‘मैं उन्हें कड़ी सलाह देता हूं कि वे बहुत देर होने से पहले समझौता कर लें।’ हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किस तरह के समझौते की बात कर रहे हैं। क्यूबा सरकार ने कहा है कि पिछले वीकेंड मादुरो को पकड़ने के लिए चलाए गए अमेरिकी अभियान में उसके 32 सैन्यकर्मी मारे गए। क्यूबा की दो मुख्य सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े ये कर्मी क्यूबा और वेनेजुएला के बीच हुए समझौते के तहत वेनेजुएला की राजधानी काराकास में तैनात थे।

    ट्रंप ने कहा, ‘वेनेजुएला को अब उन गुंडों और जबरन वसूली करने वालों से सुरक्षा की जरूरत नहीं है, जिन्होंने उन्हें इतने वर्षों तक बंधक बनाकर रखा था। अब वेनेजुएला के पास अमेरिका है, जो (निस्संदेह!) दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है। हम उनकी रक्षा जरूर करेंगे।’
    वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद कैसे बदले समीकरण

    क्यूबा की अर्थव्यवस्था वेनेजुएला पर निर्भर है। वेनेजुएला से ही क्यूबा को पैसा और ईंधन मिलता है। बदले में क्यूब वेनेजुएला को मेडिकल फैसिलिटी और एक्सपर्ट देता है। ट्रंप दबाव डाल रहे हैं कि वेनेजुएला अमेरिका को तेल सप्लाई करे और ऐसे में क्यूबा बदहाल हो जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप की नजर अब क्यूबा पर भी है।
    क्यूबा पर कई बार कब्जे की कोशिश कर चुका है अमेरिका

    पहली बार नहीं जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की नजर क्यूबा पर है.। क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रों और अमेरिका की दुश्मनी काफी लंबी चली। क्यूबा के ही खुफिया विभाग ने कहा था कि अमेरिका ने सैकड़ों बार क्यूबा की सरकार गिराने और कब्जा करने का प्रयास किया। कई बार फिदेल कास्त्रो को मारने का प्लान भी बनाया गया।

    अमेरिका ने क्यूबा से निर्वासित लोगों की फौज तैयार कर दी थी और ऑपरेशन चलाया था लेकिन यह ऑपरेशन तीन दिन में ही फेल हो गया।
    1961-62 का ऑपरेशन मॉन्गूज

    राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के कार्यकाल में क्यूबा में ऑपरेशन मॉन्गूज चलाया गया था। वहीं फिदेल कास्त्रो को मारने के लिए कई तरह के प्लान बनाए गए। इसमें उनकी सिगार में विस्फोट करवाने का प्लान भी शामिल था। इसके अलावा फिदेल कास्त्रो के मिल्कशेक में जहर मिलवाने का प्रयास किया गया। उनके डाइविंग सूट में जानलेवा केमिकल लगाए गए।
    पूर्व प्रेमिका से हत्या का प्लान

    अमेरिका ने फिदेल कास्त्रो की पूर्व प्रेमिका को भी उनकी हत्या करने के लिए राजी कर लिया था। उससे कास्त्रो को जहर देने को कहा गया था। हालांकि इस बात का पता कास्त्रो को चल गया और उन्होंने खुद ही पूर्व प्रेमिका को पिस्तौल दे दी और कहा कि मुझे शूट कर दो। उनकी प्रेमिका ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। 1975 की चर्च कमेटी ने बताया था कि 1960 से 65 के बीच अमेरिका ने कम से कम 8 बार फिदेल कास्त्रो को मरवाने का प्लान बनाया था।

    क्यूबा के एक पूर्व अधिकारी फैबियान एस्कलांते के मुताबिक अमेरिका ने फिदेल कास्त्रो को मरवाने के 638 प्रयास किए. इनमें से 184 बार निक्सन के कार्यकाल में उनपर हमला करवाने का प्रयास किया गया।

  • वेनेजुएला अब अमेरिका में बने उत्पाद ही खरीद सकता है … ट्रंप ने जारी किया नया फरमान

    वेनेजुएला अब अमेरिका में बने उत्पाद ही खरीद सकता है … ट्रंप ने जारी किया नया फरमान


    वॉशिंग्टन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बुधवार को बड़ी घोषणा करते हुए वेनेजुएला (Venezuela) के लिए नया फरमान जारी कर दिया है। ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला अब नए तेल सौदे से मिलने वाले पैसे से सिर्फ अमेरिकी-निर्मित उत्पाद (American-Made Products) ही खरीदेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने देश के राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं देश की उपराष्ट्रपति ने फिलहाल यह जिम्मेदारी संभालते हुए अमेरिका के साथ सहयोग की बात कही है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, “मुझे अभी-अभी बताया गया है कि वेनेजुएला हमारे साथ हुए नए तेल सौदे से मिलने वाले पैसे से सिर्फ अमेरिकी-निर्मित उत्पाद खरीदने जा रहा है। इनमें अमेरिकी कृषि उत्पाद, अमेरिका में बनीं दवाएं, मेडिकल उपकरण, और वेनेजुएला के इलेक्ट्रिक ग्रिड और ऊर्जा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए उपकरण शामिल होंगे।”

    ट्रंप ने आगे कहा, “दूसरे शब्दों में वेनेजुएला अमेरिका को अपना मुख्य भागीदार बनाकर व्यापार करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह एक समझदारी भरा फैसला है और वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों के लिए बहुत अच्छी बात। इस मामले पर आपके ध्यान के लिए धन्यवाद!”


    अमेरिका ही लेगा फैसले

    वहीं बुधवार को वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट ने एक ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला के अंतरिम नेताओं के साथ संपर्क में है। लेविट ने बताया, “ट्रंप सरकार वेनेजुएला में अंतरिम अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। अभी वेनेजुएला में अंतरिम अधिकारियों पर हमारा सबसे ज्यादा कंट्रोल है… उनके फैसले अमेरिका ही लेगा।”


    5 करोड़ बैरल तेल खरीदेगा अमेरिका

    इससे पहले मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को बाजार मूल्य पर तीन से पांच करोड़ बैरल ‘उच्च गुणवत्ता’ वाला तेल उपलब्ध कराएगा। ट्रंप ने लिखा था कि तेल जहाजों द्वारा सीधे अमेरिका पहुंचाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि राष्ट्रपति के रूप में इस पैसे पर उनका नियंत्रण होगा लेकिन इसका उपयोग वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों की भलाई के लिए किया जाएगा।

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    भारत के खास दोस्त समेत इन 4 देशों से तोड़ दो नाता… US का वेनेजुएला एक और फरमान

    काराकास। निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका (America) और वेनेजुएला के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। इस बीच अमेरिका ने वेनेजुएला के लिए एक और फरमान जारी किया है। अमेरिका ने कहा है कि वेनेजुएला को चार दशों के साथ अपने संबंध कम करने चाहिए। इन देशों में एक भारत का करीबी दोस्त रूस भी शामिल है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के प्रशासन ने वेनेजुएला की अंतरिम नेता डेल्सी रोड्रिगेज को सख्त निर्देश दिए हैं कि उनका देश तेल उत्पादन में केवल अमेरिका के साथ विशेष साझेदारी करे और भारी कच्चे तेल की बिक्री में अमेरिका को प्राथमिकता दे। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका यह भी मांग कर रहा है कि वेनेजुएला चीन, रूस, ईरान और क्यूबा के साथ अपने संबंधों को कम करे और इन देशों को बाहर निकालकर आर्थिक संबंध पूरी तरह तोड़ दे।

    रिपोर्ट में तीन अज्ञात सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि वेनेजुएला को अधिक तेल उत्पादन की अनुमति तभी मिलेगी जब वह इन शर्तों को माने। वाइट हाउस ने इस रिपोर्ट पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है। यह मांगें ऐसे समय में आई हैं जब निकोलस मादुरो को अमेरिकी विशेष बलों द्वारा गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया है और डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति घोषित किया गया है।

    वेनेजुएला लंबे समय से चीन, रूस, ईरान और क्यूबा पर आर्थिक और सुरक्षा सहायता के लिए निर्भर रहा है, खासकर ह्यूगो शावेज और मादुरो के शासनकाल में। इन संबंधों को पूरी तरह तोड़ना वेनेजुएला की विदेश नीति में बड़ा उलटफेर होगा।

    ट्रंप ने मंगलवार शाम कहा कि वेनेजुएला अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल तेल भेजेगा, जिसकी कीमत वर्तमान बाजार मूल्य पर करीब 2.8 अरब डॉलर तक हो सकती है। उन्होंने घोषणा की कि यह तेल बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा और आय दोनों देशों के लाभ के लिए उपयोग की जाएगी। ट्रंप ने यह भी कहा कि प्रशासन अगले सप्ताह अमेरिकी तेल कंपनियों से वेनेजुएला में निवेश पर चर्चा करेगा।

    वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका वेनेजुएला पर कब्जा नहीं करना चाहता, लेकिन ट्रंप ने बार-बार कहा है कि वह देश के भविष्य को निर्देशित करने में प्रमुख भूमिका निभाएंगे, मुख्य रूप से तेल राजस्व से वित्तपोषित। यह घटनाक्रम वैश्विक तेल बाजार और भू-राजनीतिक संबंधों पर गहरा असर डाल सकता है, क्योंकि वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों वाला देश है।

  • Venezuela: काराकास में फिर गूंजी धमाकों की आवाज… राष्ट्रपति भवन पर दोबारा हुआ हमला

    Venezuela: काराकास में फिर गूंजी धमाकों की आवाज… राष्ट्रपति भवन पर दोबारा हुआ हमला


    काराकास।
    वेनेजुएला (Venezuela) पर अमेरिकी अटैक (American Attack) के महज कुछ ही घंटों बाद राजधानी काराकास (Capital Caracas) एक बार फिर धमाकों की आवाजों से गूंज रहा है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सोमवार देर रात (स्थानीय समय) वेनेजुएला के काराकास में राष्ट्रपति भवन पर हमला हुआ है। सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें राष्ट्रपति भवन के पास भारी गोलीबारी देखी जा सकती है।

    सूत्रों के मुताबिक काराकास में मिराफ्लोरेस पैलेस के ऊपर अज्ञात ड्रोन देखे गए हैं। सुरक्षा बलों ने रात 8 बजे के आसपास जवाबी गोलीबारी भी की। बीते शनिवार को काराकास में अमेरिकी हमलों और राष्ट्रपति मादुरो को कैदी बनाए जाने के महज कुछ ही घंटों बाद अब देश में इस तरह कर हमलों के बाद लोगों में अफरा तफरी मची हुई है। हालांकि सरकार के करीबी एक सूत्र ने एएफपी को बताया है फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

    सोशल मीडिया पर सामने आए विडियोज में बताया गया है कि काराकास की सड़कें सुरक्षा बलों से भरी हुई हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए विडियोज में बताया गया है कि काराकास की सड़कें सुरक्षा बलों से भरी हुई हैं। एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया गया, “वेनेजुएला की राजधानी काराकास का डाउनटाउन इलाका सशस्त्र झड़पों से भरा हुआ है, कई सुरक्षा बल भारी गोलीबारी कर रहे हैं। काराकास की सड़कें अलर्ट पर हैं।”