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  • वेनेजुएला में अमेरिकी ऐक्शन से घबराया तानाशाह किम जोंग? मिसाइल का किया परीक्षण

    वेनेजुएला में अमेरिकी ऐक्शन से घबराया तानाशाह किम जोंग? मिसाइल का किया परीक्षण

    प्योंगयांग । अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर हमला करने और उस देश को राष्ट्रपति को उठा कर ले आने के बाद उसके विरोधी देशों में एक डर का माहौल है। ईरान, उत्तर कोरिया और लैटिन अमेरिका के कई देश, जो खुले तौर पर अमेरिका का विरोध करते नजर आते हैं, उन्होंने ट्रंप की इस हरकत की कड़ी निंदा की है।
    यूएस के वेनेजुएला पर किए हमले के एक दिन बाद ही उत्तर कोरिया ने एक ताकतवर मिसाइल का परीक्षण किया। कई विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तर कोरिया इसके जरिए यह दिखाना चाहता था कि वह वेनेजुएला नहीं है। इस तरह की स्थिति में वह एक ताकतवर जवाब देने के लिए तैयार है।

    वेनेजुएला पर हुए अमेरिका आक्रमण की निंदा करते हुए किम जोंग उन के प्रशासन ने इसे अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और एक संप्रुभ देश की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया। प्योंगयांग ने कहा कि यह कदम साम्राज्यवादी अमेरिका के बागी और क्रूर स्वाभाव को दर्शाता है।

    प्योंगयांग की तरफ से की गई यह मिसाइल दो लक्ष्यों को साधती हुई नजर आती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समय पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति चीन की यात्रा पर हैं। उनकी यह यात्रा चीन के साथ दक्षिण अमेरिका की बढ़ती दोस्ती और कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति को बढ़ावा देने के लिए मानी जा रही है। हालांकि, मिसाइल के जरिए उत्तर कोरिया ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं।

    दक्षिण कोरिया की इंस्टीट्यूट फॉर फार ईस्टर्न स्टडीज के प्रोफेसर लिम ने कहा कि कोरिया और जापान के बीच समुद्र में किए गए इस मिसाइल टेस्ट के जरिए दक्षिण कोरिया और चीन के बीच होने वाली बैठक के पहले तानाशाह की तरफ से चीन को दिया गया संदेश है।

    दरअसल, दक्षिण कोरिया कि मुख्य मांग कोरियाई प्रायद्वीप पर परमाणु निरस्रीकरण हैं, जिसके लिए उत्तर कोरिया तैयार नहीं है।

    बकौल, लिम ‘उत्तर कोरिया इसके साथ अमेरिका को भी संदेश देना चाहता था कि वह वेनेजुएला नहीं है। यानी अगर अमेरिका, वेनेजुएला जैसा कोई अभियान उत्तर कोरिया के साथ करने की सोचता है, तो ऐसी स्थिति के लिए वह दिखाना चाहता था कि उसकी तरफ से जबरदस्त प्रतिरोध होगा।

    किम जोंग उन का जिक्र करते हुए योंसई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बोंग यांगशिक ने कहा कि इस समय वेनेजुएला में जो कुछ हुआ है, उसे देखकर सबसे ज्यादा डरने वाला व्यक्ति किम जोंग उन ही है। क्योंकि वह भी एक तानाशाह ही है।

    अन्य विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका द्वारा उत्तर कोरिया में ऐसा कोई हमला करने की संभावना कम है। क्योंकि एक तो उत्तर कोरिया सीधे तौर पर अमेरिका से उलझने से बचता आया है। हालांकि वह धमकी देता रहा है। दूसरी तरफ, वेनेजुएला की तुलना में उत्तर कोरिया की तानाशाही ज्यादा मजबूत और सैन्य शक्ति भी मजबूत है।

  • वेनेजुएला टेंशन का ग्लोबल मार्केट पर दिखेगा असर… सोने-चांदी और क्रूड भी होंगे प्रभावित

    वेनेजुएला टेंशन का ग्लोबल मार्केट पर दिखेगा असर… सोने-चांदी और क्रूड भी होंगे प्रभावित


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) द्वारा वेनेजुएला (Venezuela) पर की गई सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक वित्तीय बाजारों (Global financial markets) में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। इससे भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market), सोने, चांदी और कच्चे तेल पर संभावित प्रभावों का आकलन किया जा रहा है। जानें, निवेशकों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

    अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारत पर भी पड़ता नजर आ रहा है। वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश है, इसलिए इस घटनाक्रम ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है और शेयर बाजार से लेकर सोना-चांदी तथा कच्चे तेल तक सभी एसेट क्लास पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है।

    भारतीय शेयर बाजार की बात करें तो फिलहाल किसी बड़ी घबराहट के संकेत नहीं हैं, लेकिन अस्थिरता बढ़ने की संभावना जरूर बनी हुई है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं, जिसका दबाव ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एयरलाइंस और उपभोक्ता आधारित कंपनियों के शेयरों पर पड़ सकता है।

    दूसरी ओर डॉलर के मजबूत होने की स्थिति में आईटी कंपनियों के शेयरों को कुछ समर्थन मिल सकता है। कुल मिलाकर बाजार में बड़ी गिरावट की बजाय सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनती दिख रही है।


    सोने पर इफेक्ट

    भू-राजनीतिक तनाव का सीधा फायदा सोने को मिलता दिख रहा है। अनिश्चित माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं और सोना पारंपरिक रूप से उनका पसंदीदा विकल्प रहा है। वेनेजुएला संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मजबूती देखी जा रही है। यदि तनाव लंबा खिंचता है तो सोना नए रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंच सकता है।


    चांदी में तेज उतार-चढ़ाव बना रहेगा

    चांदी पर इस घटनाक्रम का असर थोड़ा अलग नजर आता है। एक तरफ सुरक्षित निवेश की मांग चांदी को सहारा देती है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता औद्योगिक मांग को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से चांदी की कीमतों में तेजी के साथ तेज उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।


    महंगा हो सकता है कच्चा तेल

    कच्चे तेल के मोर्चे पर फिलहाल स्थिति संतुलित है, क्योंकि वेनेजुएला से वैश्विक बाजार में पहले ही सीमित मात्रा में तेल की आपूर्ति हो रही थी। हालांकि इस सैन्य कार्रवाई से तेल बाजार में ‘रिस्क प्रीमियम’ जुड़ गया है। यदि तनाव बढ़ता है या तेल आपूर्ति से जुड़े अन्य क्षेत्रों में अस्थिरता आती है, तो कच्चा तेल आने वाले समय में महंगा हो सकता है।

    भारत के लिए राहत की बात यह है कि वह फिलहाल वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात नहीं करता और उसकी आपूर्ति रूस तथा पश्चिम एशिया से स्थिर बनी हुई है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भी भारत को इस वैश्विक संकट से निपटने में सहारा दे सकता है।

  • वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका की नजर अब उनके बेटे पर

    वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका की नजर अब उनके बेटे पर


    कराकास।
    वेनेजुएला (Venezuelan) के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (President Nicolás Maduro) और उनकी पत्नी को अमेरिका (America) ने गिरफ्तार किया है। उनके ऊपर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अमेरिका काफी समय से माइग्रेशन और ड्रग तस्करी को लेकर मादुरो के पीछे पड़ा था। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन की निगाहें मादुरो के बेटे पर भी टेढ़ी हैं। आखिर कौन है मादुरो का बेटा और क्या है उसका नाम? इसके अलावा यह भी जानेंगे कि आखिर अमेरिका मादुरो के बेटे से इतना ज्यादा खफा क्यों है…


    पहली पत्नी से जन्म

    निकोलस के बेटे का नाम है निकोलस अर्नेस्टो मादुरो ग्वेरा और उसे प्रिंस के नाम से भी जाना जाता है। प्रिंस का जन्म 1990 में मादुरो की पहली पत्नी, एड्रियाना गुएरा अंगुलो के यहां हुआ था। उसे मादुरो के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में जाना जाता है। अमेरिका ने उसे भी वेनेजुएला के ड्रग ऑपरेशन के आरोपियों की लिस्ट में रखा है। ट्रंप प्रशासन ने मादुरो और उनकी पत्नी के साथ उनके बेटे पर भी ड्रग ट्रैफिकिंग, नार्को-टेररिज्म और हथियारों की तस्करी में आरोप तय किए हैं। अभियोजकों का आरोप है कि तीनों ने अमेरिका में कोकीन की बड़ी मात्रा तस्करी करने की साजिश रची ताकि कोलंबियाई गुरिल्ला समूहों, मैक्सिकन कार्टेल और वेनेजुएला की गैंगों को फायदा मिल सके।


    नार्कोटिक्स नेटवर्क का योजनाकार

    अमेरिका के संघीय अभियोजक उसे एक व्यापक नार्कोटिक्स नेटवर्क का प्रमुख योजनाकार बताते हैं। इस नेटवर्क ने वेनेजुएला से अमेरिका तक कोकीन ले जाने के लिए देश के संसाधनों, सैन्य कर्मियों और राजनीतिक प्रभाव का फायदा उठाया। 2014 और 2015 के बीच, वह कथित तौर पर हर महीने दो बार सरकारी विमान फाल्कन 900 जेट पर मार्गरीटा द्वीप की यात्रा करता था। हर उड़ान से पहले, विमान में कथित तौर पर बड़े, टेप से लिपटे कोकीन के पैकेज लोड किए जाते थे और सैन्य कर्मी उनके अंदर की सामग्री से पूरी तरह परिचित होते थे। एक हलफनामे में दावा किया गया है कि मादुरो ग्वेरा ने दावा किया कि विमान जहां चाहे उड़ सकता है, यहां तक ​​कि अमेरिकी हवाई क्षेत्र में भी।


    ड्रग संगठन में काम करने का आरोप

    इसके अलावा प्रिंस पर कार्टेल दे लॉस सोल्स के भीतर काम करने का आरोप है, जो वेनेजुएला का ड्रग संगठन है। यह संगठन कथित रूप से उच्च-स्तरीय सरकारी अधिकारियों के नेतृत्व में है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि इस कार्टेल ने पीडीवीएसए के विमान, राष्ट्रपति हैंगर और राजनयिक चैनलों का उपयोग कानून प्रवर्तन से खेपों को सुरक्षित रखने और अंतरराष्ट्रीय तस्करी को सुविधाजनक बनाने के लिए किया। अभियोग पत्र के मुताबिक ड्रग्स से हुई कमाई राजनीतिक अभियानों में इस्तेमाल की गई।

  • बेनेजुएला में बड़ा 'ऑपरेशन… घर में घुसकर राष्ट्रपति मादुरो को मिनटों में उठा ले गया अमेरिका

    बेनेजुएला में बड़ा 'ऑपरेशन… घर में घुसकर राष्ट्रपति मादुरो को मिनटों में उठा ले गया अमेरिका


    वाशिंगटन।
    वेनेजुएला (Venezuela) में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में अमेरिकी विशेष बलों (American special forces) ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (President Nicolás Maduro) को एक गुप्त सैन्य अभियान के बाद गिरफ्तार कर लिया है। अमेरिका ने इस मिशन को ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ (‘Operation Absolute Resolve’) नाम दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने इस सफलता की पुष्टि करते हुए कहा कि अब वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन तक अमेरिका देश का नियंत्रण संभालेगा। अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के अनुसार, यह मिशन 2 जनवरी की रात को अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन की बारीकियों ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।

    इस मिशन में F-22, F-35, F-18 लड़ाकू विमानों, B-1 बमवर्षक विमानों और ड्रोन्स समेत 150 से अधिक विमान शामिल थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने रात 10:46 बजे (ईस्टर्न टाइम) मिशन को हरी झंडी दी। ठीक रात 1:01 बजे (कराकस समय अनुसार रात 2:01 बजे) अमेरिकी फोर्स मादुरो के परिसर में उतरी। मादुरो एक किले जैसे सुरक्षित महल में थे। ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी सैनिकों ने इस महल के हूबहू ढांचे पर महीनों तक अभ्यास किया था।


    30 मिनट में मिशन पूरा, भारी धमाकों से गूंजा कराकस

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने मार-ए-लागो से दिए बयान में कहा कि जब यह हमला हुआ तो कराकस की लाइटें बंद थीं। यह डार्क और घातक मिशन था। सैनिकों के पास भारी ‘ब्लोटॉर्च’ थे ताकि वे सुरक्षित कमरों के दरवाजे काटकर अंदर घुस सकें, लेकिन मादुरो को सुरक्षित कमरे तक पहुंचने का मौका ही नहीं मिला। 30 मिनट से भी कम समय में मादुरो को पकड़ लिया गया। इस दौरान कराकस में कम से कम सात बड़े विस्फोट सुनाई दिए।


    वेनेजुएला अब अमेरिका के नियंत्रण में

    राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वेनेजुएला में एक सुरक्षित और उचित सत्ता हस्तांतरण होने तक अमेरिका ही देश को चलाएगा। हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी है। अमेरिकी न्याय विभाग ने पुष्टि की है कि मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोर्स पर ‘नार्को-टेररिज्म’ के गंभीर आरोप हैं, जिसके तहत उन पर अमेरिका में मुकदमा चलेगा।

    जनरल केन ने बताया कि इस मिशन में किसी भी अमेरिकी सैनिक की जान नहीं गई है और न ही कोई सैन्य उपकरण खोया है। वहीं वेनेजुएला के अधिकारियों का दावा है कि इस हमले में उनके कुछ सैनिक और नागरिक मारे गए हैं, हालांकि उन्होंने सटीक संख्या नहीं बताई।


    खुफिया एजेंसियों का महाजाल

    इस मिशन की सफलता के पीछे CIA, NSA और NGA जैसी शीर्ष खुफिया एजेंसियों का हाथ था। जनरल केन ने बताया कि यह ऑपरेशन दशकों के अनुभव और थल सेना, वायु सेना, नौसेना और स्पेस फोर्स के बेजोड़ तालमेल का नतीजा था। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस मिशन में विफलता का कोई विकल्प नहीं था, क्योंकि एक भी चूक पूरे अभियान को खतरे में डाल सकती थी।