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  • बीएसएफ और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड के बीच तनाव, भारतीय-विदेशी दस्तावेजों के अभाव में प्रवासी फंसे

    बीएसएफ और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड के बीच तनाव, भारतीय-विदेशी दस्तावेजों के अभाव में प्रवासी फंसे

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल से सटी भारत-बांग्लादेश सीमा पर इन दिनों एक असामान्य स्थिति देखने को मिल रही है, जहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग सामने आ रहे हैं जो लंबे समय से भारत में रह रहे थे और अब अपनी पहचान बताकर वापस बांग्लादेश लौटने की इच्छा जता रहे हैं। यह पूरा मामला उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर चेकपोस्ट से सामने आया है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग वेरिफिकेशन के लिए पहुंच रहे हैं।

    सीमा सुरक्षा बल सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अनुसार, इन लोगों की बायोमीट्रिक जांच और दस्तावेजों की पुष्टि की जा रही है, जिसके बाद उन्हें फिलहाल होल्डिंग सेंटरों में भेजा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार है जब स्थिति ऐसी बनी है कि अवैध प्रवासियों को खोजने की जरूरत नहीं पड़ रही, बल्कि लोग स्वयं सामने आकर अपनी पहचान दर्ज करा रहे हैं।

    स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हकीमपुर बॉर्डर पर हर दिन लगभग 200 से 300 लोग वेरिफिकेशन के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से कई लोगों के पास भारतीय दस्तावेज उपलब्ध हैं, लेकिन बांग्लादेश से जुड़े वैध पहचान पत्र नहीं हैं। इसी कारण उनके मामलों की जांच जटिल हो गई है और दोनों देशों के बीच प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया लंबी हो रही है।

    इस बीच बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा एजेंसी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने आरोप लगाया है कि भारतीय सुरक्षा बलों की ओर से कुछ लोगों को सीमा पार धकेलने की कोशिश की गई है, हालांकि BSF ने इन आरोपों को खारिज किया है। बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी तरह की अवैध घुसपैठ या वापसी की कोशिश पर सख्ती से नजर रखी जा रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच कई प्रवासियों की व्यक्तिगत कहानियां भी सामने आई हैं। बांग्लादेश के सातक्षीरा जिले के मो. खालिद गाजी ने बताया कि वे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ सीमा पर पहुंचे, लेकिन उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं। उनका दावा है कि उन्हें दोनों तरफ से अस्वीकार किया गया और उन्हें BSF का जासूस बताकर वापस भेज दिया गया।

    इसी तरह मुंबई में रह रहे मोहम्मद अख्तर शेख ने बताया कि वे करीब 22 साल पहले बांग्लादेश से भारत आए थे और उनके पास भारतीय आधार कार्ड तो है, लेकिन बांग्लादेश का कोई दस्तावेज नहीं है। उन्हें आशंका है कि अब वे किसी भी देश में पूरी तरह स्वीकार नहीं किए जाएंगे, जिससे उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है।

    मुर्शिदाबाद जिले के जलंगी बॉर्डर से जुड़े एक अन्य व्यक्ति इस्लाम सरदार की कहानी भी सामने आई है, जिन्होंने कहा कि वे वर्षों से भारत में रह रहे हैं और अब अपने मूल देश लौटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वहां भी दस्तावेजों की कमी के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अपनी स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर बदलते हालात, प्रशासनिक सख्ती और पहचान सत्यापन की नई प्रक्रिया के चलते यह स्थिति बनी है। पश्चिम बंगाल और सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि लंबे समय से रह रहे कई प्रवासी अब अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता महसूस कर रहे हैं।

    हालांकि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत और सीमा प्रबंधन की कोशिशें जारी हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार, सभी मामलों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, ताकि मानवीय और कानूनी दोनों पहलुओं का संतुलन बना रहे।

  • किसानों के लिए अलर्ट: PM Kisan योजना में सख्ती, 23वीं किस्त पाने से पहले पूरे करने होंगे ये नियम

    किसानों के लिए अलर्ट: PM Kisan योजना में सख्ती, 23वीं किस्त पाने से पहले पूरे करने होंगे ये नियम

    नई दिल्ली । देश के करोड़ों किसानों के लिए राहत देने वाली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एक बार फिर चर्चा में है। 23वीं किस्त जारी होने से पहले किसानों के लिए एक अहम संदेश सामने आया है, जिसमें साफ किया गया है कि यदि जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं की गईं तो आर्थिक सहायता मिलने में बाधा आ सकती है।

    इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल छह हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। हाल ही में 22वीं किस्त जारी होने के बाद अब सभी लाभार्थी अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि 23वीं किस्त गर्मियों के बाद यानी जून के अंत या जुलाई 2026 की शुरुआत में जारी हो सकती है।

    लेकिन इस बार किस्त जारी होने से पहले प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ा दी गई है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां अपात्र लोग भी इस योजना का लाभ ले रहे थे। इसी को देखते हुए अब पात्रता की जांच को और गहराई से किया जा रहा है। अगर किसी लाभार्थी की जानकारी गलत पाई जाती है, तो उसका नाम सूची से हटाया जा सकता है और पहले दी गई राशि की वसूली भी संभव है।

    किसानों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि तीन प्रमुख प्रक्रियाएं पूरी करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। सबसे पहले ई-केवाईसी को अपडेट करना जरूरी है, क्योंकि इसके बिना भुगतान संभव नहीं होगा। इसके अलावा भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन भी अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभार्थी वास्तव में कृषि भूमि का मालिक है। तीसरी महत्वपूर्ण शर्त यह है कि बैंक खाते को आधार से लिंक होना चाहिए और डीबीटी सुविधा सक्रिय होनी चाहिए, तभी राशि सीधे खाते में पहुंच सकेगी।

    कई किसान इन औपचारिकताओं को हल्के में ले रहे हैं, लेकिन इसका सीधा असर उनकी अगली किस्त पर पड़ सकता है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि अब किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा। योजना का उद्देश्य केवल वास्तविक और पात्र किसानों को लाभ पहुंचाना है, इसलिए सभी रिकॉर्ड का मिलान और सत्यापन लगातार किया जा रहा है।

    ग्रामीण इलाकों में इस समय किसान अपने दस्तावेजों की जांच में जुटे हैं ताकि किसी भी तरह की गलती सुधार ली जाए। कई लोग अपने स्टेटस को भी समय-समय पर देख रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका नाम लाभार्थी सूची में बना हुआ है या नहीं।

  • चंदेरी तहसील में बिना जांच बने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जीवाड़े से बढ़े न्यायालयीन विवाद

    चंदेरी तहसील में बिना जांच बने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जीवाड़े से बढ़े न्यायालयीन विवाद


    अशोकनगर।
    मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की चंदेरी तहसील में बिना समुचित जांच के जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर नियमों की अनदेखी कर प्रमाण पत्र बनाए गए, जिससे न्यायालयों में अनावश्यक विवाद और प्रकरण बढ़ रहे हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंदेरी निवासी रविकांत सेषा की शिकायत पर चंदेरी थाने में कमल सिंह लोधी निवासी ग्राम मोहनपुर के खिलाफ अपराध क्रमांक 0193/2026 दर्ज किया गया है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 338 और 336(3) के तहत प्रकरण कायम किया गया है।

    बताया गया है कि कमल सिंह लोधी ने तहसील कार्यालय में जन्म प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0376/ड-154(1)/2024-25 तथा मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0067/ड-154/2024-25 प्रस्तुत किया था। वहीं, भैयालाल लोधी ने कथित रूप से वसीयत तैयार करने के उद्देश्य से मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0077/ड-154/2024-25 के माध्यम से आवेदन किया। आरोप है कि इन सभी प्रकरणों में कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर एक ही दिन में प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए।

    इन प्रमाण पत्रों के जरिए कथित रूप से भूमि के नामांतरण और पूर्व विक्रय पत्रों को शून्य कराने की कोशिश की गई, जो बाद में न्यायालयीन विवाद का कारण बनी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस संबंध में तहसील प्रशासन, एसडीएम और कलेक्टर को शिकायत की गई, लेकिन पांच माह से अधिक समय बीतने के बाद भी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    बाबुओं की भूमिका संदिग्ध, जांच की मांग तेज

    सूत्रों के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। चंदेरी तहसील में वर्षों से पदस्थ कुछ बाबुओं की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, जो कथित रूप से अधिकारियों को गुमराह कर ऑर्डर शीट तैयार कराते हैं और उनके हस्ताक्षर करवा लेते हैं। इसी के आधार पर नियम विरुद्ध तरीके से नामांतरण प्रकरण भी स्वीकृत किए जा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पिछले दो-तीन वर्षों में जारी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और नामांतरण प्रकरणों की निष्पक्ष जांच की जाए, तो कई और अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।

    आम नागरिक पर कार्रवाई, जिम्मेदार सुरक्षित

    मामले में पुलिस ने कमल सिंह लोधी के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन तहसील स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि लापरवाही या मिलीभगत के बावजूद जिम्मेदारों को क्यों बचाया जा रहा है।

    जांच नहीं हुई तो बढ़ेंगे विवाद

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पूरे प्रकरण की गहन जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में ऐसे कई मामले सामने आएंगे, जिससे न्यायालयों पर बोझ बढ़ेगा और आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

    अब देखना यह होगा कि राजस्व विभाग और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

  • ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का उल्लास, एक हजार से अधिक बहनों ने बंदी भाइयों को किया मंगल तिलक

    ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का उल्लास, एक हजार से अधिक बहनों ने बंदी भाइयों को किया मंगल तिलक



    ग्वालियर। होली की दूज पर ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का विशेष पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर जेल में बंद अपने भाईयों से मिलने के लिए एक हजार से अधिक बहनें जेल पहुंचीं। जेल प्रशासन ने इस आयोजन को सफल और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विशेष तैयारियां की थीं। जेल के बाहर सुबह से ही काउंटर लगाकर बहनों का पूरी तरह से सत्यापन (वैरिफिकेशन) किया गया। केवल सत्यापित बहनों को ही जेल के अंदर प्रवेश की अनुमति दी गई।

    जेल परिसर में बहनों ने परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए रंग, गुलाल, रोली, चावल और चंदन से भाइयों का तिलक किया और मिठाई खिलाकर उनके लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की।जेल परिसर में बहनों ने परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए रंग, गुलाल, रोली, चावल और चंदन से भाइयों का तिलक किया और मिठाई खिलाकर उनके लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की। हालांकि जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि बाहर से कोई भी पूजन सामग्री लाई नहीं जा सकती। इसके चलते बहनों ने जेल परिसर में ही शुल्क देकर लड्डू और अन्य पूजन सामग्री खरीदी। जेल प्रशासन ने सुरक्षा और सुव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की पूरी मॉनीटरिंग की।

    भाईदूज का यह पर्व उन कैदियों के लिए विशेष महत्व रखता है, जो संगीन मामलों में जेल में बंद हैं और लंबे समय से अपने परिवार से मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इस अवसर ने जेल में बंद भाइयों के चेहरे पर मुस्कान और खुशी की लहर दौड़ा दी। जेल अधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन से कैदियों और उनके परिवारों के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है। यह न केवल भाई-बहन के रिश्तों को सशक्त बनाता है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।

    जेल के अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम को व्यवस्थित करने के लिए सुबह से ही विशेष काउंटर लगाए गए थे। बहनों का नाम, पहचान पत्र और संबंध की पुष्टि करने के बाद ही उन्हें प्रवेश दिया गया। जेल प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी अनुचित घटना न हो और कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो। जेल में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने पूरे आयोजन पर नजर रखी और आवश्यकतानुसार बहनों और कैदियों की मदद भी की।

    कार्यक्रम में कई बहनों ने बताया कि यह उनके भाईयों से मिलने का एक दुर्लभ अवसर होता है। लॉकडाउन और अन्य सुरक्षा कारणों से पिछले साल या महीनों में कई बार मिलने का अवसर नहीं मिला। इसलिए आज का दिन उनके लिए बेहद खास और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण था। बहनों ने अपने भाईयों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य की कामना करते हुए उन्हें स्नेहपूर्वक तिलक किया।

    जेल प्रशासन ने बताया कि इस आयोजन में हिस्सा लेने वाली बहनों की संख्या पहली बार इतनी बड़ी रही है। इससे पहले के वर्षों में इस कार्यक्रम में कुछ सौ बहनें ही शामिल होती थीं। इस बार बड़ी संख्या में बहनों की भागीदारी ने भाईदूज के पर्व की गरिमा और उल्लास को और बढ़ा दिया।

    भाईदूज पर जेल में आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम से यह संदेश जाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी परिवार का महत्व और पारंपरिक रीति-रिवाजों की गरिमा कायम रहनी चाहिए। जेल प्रशासन ने भी इस अवसर को शांति और अनुशासन के साथ सफल बनाने का प्रयास किया।

    इस आयोजन ने साबित कर दिया कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, भाई-बहन का स्नेह और त्यौहारों का महत्व कभी कम नहीं होता। जेल में बंद कैदियों के लिए यह एक सुखद और यादगार अनुभव बन गया, जिसने उनके और उनके परिवार के बीच भावनात्मक दूरी को कम किया।