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  • नोएडा: निजी कंपनी में आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दो और आरोपी गिरफ्तार..

    नोएडा: निजी कंपनी में आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में दो और आरोपी गिरफ्तार..


    नोएडा।
    यूपी (UP) के नोएडा (Noida) में प्राइवेट कंपनियों (Private Companies) के कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा में पुलिस का एक्शन जारी है. नोएडा पुलिस (Noida Police) ने हिंसा में शामिल दो और आरोपियों (Two more accused) को गिरफ्तार किया है।

    दोनों आरोपी हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा बिगुल मजदूर दस्ता के एक्टिव सदस्य हैं. हिमांशु लगातार हिंसा के मुख्य आरोपी आदित्य आनंद के संपर्क में था. हिंसा के दिन वह नोएडा में ही मौजूद था. हिमांशु और सत्यम के खिलाफ पुलिस को भड़काऊ गतिविधियों को अंजाम देने के सबूत मिले हैं।

    इससे पहले पुलिस ने नोएडा हिंसा के मुख्य आरोपी और एक लाख रुपये के इनामी आदित्य आनंद उर्फ रस्ती को तमिलनाडु के तिरुचापल्ली रेलवे स्टेशन से अरेस्ट किया था. पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसे रिमांड पर लेकर पूरे नेटवर्क और साजिश के अन्य पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है।


    पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है आदित्य आनंद

    पुलिस जांच में सामने आया है कि पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद ने श्रमिक प्रदर्शन को हिंसा में बदलने की साजिश रची. उसने पूरे घटनाक्रम को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया. थाना फेज-2 में उसके खिलाफ पहले ही गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

    जांच में सामने आया कि बिहार के हाजीपुर का रहने वाला 28 वर्षीय आदित्य आनंद पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है. वह इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड है. आरोपी के खिलाफ 16 अप्रैल को कोर्ट से वारंट जारी हुआ था, जिसके बाद वह फरार होकर चेन्नई और फिर तिरुचिरापल्ली भाग गया था।

    पुलिस का मानना है कि यह मामला केवल स्थानीय हिंसा तक सीमित नहीं, बल्कि बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा है. एसटीएफ अब इस बात की जांच कर रही है कि इस साजिश के लिए फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट कहां से मिल रहा था. आने वाले दिनों में इस केस में कई और बड़े संगठनों के नाम सामने आ सकते हैं।

  • सीधी में अंबेडकर जयंती रैली के दौरान बवाल, बोलेरो हटाने को लेकर हुए विवाद पर घर में घुसकर हमला, 4 घायल

    सीधी में अंबेडकर जयंती रैली के दौरान बवाल, बोलेरो हटाने को लेकर हुए विवाद पर घर में घुसकर हमला, 4 घायल


    सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले के अमिलिया में मंगलवार को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के मौके पर निकाली जा रही रैली के दौरान दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो गई। मामूली विवाद ने अचानक उग्र रूप ले लिया और नकाबपोश लोगों ने एक घर में घुसकर हमला कर दिया। इस घटना में एक ही परिवार के चार लोग घायल हो गए, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं।

    यह है मामला

    जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे भीम आर्मी द्वारा अंबेडकर जयंती रैली निकाली जा रही थी। इसी दौरान रास्ते में एक बोलेरो वाहन खड़ा था, जिसे हटाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। रैली में शामिल कुछ लोगों ने गाड़ी हटाने को कहा, लेकिन बात बढ़ने पर बोलेरो में तोड़फोड़ कर दी गई।

    इसके बाद मनी शुक्ला ने इसका विरोध किया, जिससे दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और गाली-गलौज शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि करीब 50 नकाबपोश लोग पथराव करते हुए मनी शुक्ला के घर में घुस गए और परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की।

    हमले में 4 लोग घायल

    हमले में मनी शुक्ला (22) गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अलावा उनके परिवार के 80 वर्षीय रमाकांत शुक्ला, अर्चना शुक्ला (40) और दिव्यांश शुक्ला (22) को भी चोटें आई हैं। घटना के दौरान इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति संभालने की कोशिश की।

    अतिरिक्त पुलिस बल तैनात

    हमले के विरोध में दूसरे पक्ष के कुछ युवकों को घेरकर मारपीट की गई, जिससे तनाव और बढ़ गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमिलिया, कमर्जी, बहरी थाना और सिहावल चौकी से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। क्षेत्र में 150 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इलाके में तनाव बना हुआ है। लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की गई है। पूरे मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही गई है।

  • हादसे ने लिया उग्र रूप युवक की मौत के बाद पथराव और आगजनी से हाईवे पर हड़कंप

    हादसे ने लिया उग्र रूप युवक की मौत के बाद पथराव और आगजनी से हाईवे पर हड़कंप


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में एक सड़क हादसा उस समय हिंसक रूप ले बैठा जब एक युवक की मौत के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने जमकर हंगामा कर दिया घटना गरोठ नेशनल हाईवे पर बीती रात की है जहां दिल्ली से उज्जैन महाकाल दर्शन के लिए आ रही एक मिनी बस और ट्रैक्टर के बीच जोरदार टक्कर हो गई इस हादसे में 21 वर्षीय युवक विजय सोलंकी की दर्दनाक मौत हो गई जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मिनी बस तेज रफ्तार में थी और तुलाहेड़ा टोल प्लाजा के पास उसने ट्रैक्टर को पीछे से टक्कर मार दी टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रैक्टर पलट गया और विजय सोलंकी उसके नीचे दब गया बताया जा रहा है कि वह करीब एक घंटे तक ट्रैक्टर के नीचे फंसा रहा और समय पर राहत नहीं मिलने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई इस हादसे में उसका साथी राजेश शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गया वहीं बस चालक शिवकुमार और यात्री बॉबी व धर्मेंद्र कुमार भी घायल हुए हैं गंभीर घायलों को निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है

    हादसे के बाद जैसे ही युवक की मौत की खबर गांव में फैली लोगों में आक्रोश फैल गया बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उन्होंने मिनी बस पर पथराव शुरू कर दिया देखते ही देखते गुस्सा इतना बढ़ गया कि बस में आग लगा दी गई आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी बस और उसमें रखा यात्रियों का सामान जलकर खाक हो गया हालांकि राहत की बात यह रही कि सभी यात्री समय रहते बस से बाहर निकल गए और उनकी जान बच गई बाद में उन्हें अन्य वाहनों के जरिए उज्जैन रवाना किया गया

    घटना के बाद ग्रामीणों ने हाईवे पर चक्काजाम कर दिया और टोल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की उनका आरोप था कि टोल प्लाजा पर मौजूद कर्मचारियों की लापरवाही के कारण राहत कार्य में देरी हुई और यदि समय पर मदद मिल जाती तो विजय सोलंकी की जान बचाई जा सकती थी इस आरोप ने स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में करने की कोशिश की भारी पुलिस बल तैनात किया गया और समझाइश के बाद जाम खुलवाया गया प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है

    यह घटना न केवल एक सड़क हादसे की त्रासदी को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि समय पर राहत और जिम्मेदारी की कमी कैसे हालात को और बिगाड़ सकती है एक तरफ जहां एक युवक की मौत ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया वहीं दूसरी ओर गुस्से की आग ने एक और नुकसान की तस्वीर सामने ला दी अब देखना होगा कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और जिम्मेदारी तय होती है या नहीं

  • जमीन को लेकर खूनी संघर्ष: हरदा में वृद्ध की हत्या, परिजनों में हिंसक झड़प और छह घायल

    जमीन को लेकर खूनी संघर्ष: हरदा में वृद्ध की हत्या, परिजनों में हिंसक झड़प और छह घायल


    हरदा । हरदा जिले के सिराली थाना क्षेत्र के दीपगांव कला में बुधवार सुबह एक पुराना जमीनी विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। जानकारी के अनुसार यह झगड़ा मामा-बुआ के परिवारों के बीच लंबे समय से चला आ रहा था, जो अचानक उग्र रूप ले लिया।

    इस घटना में 65 वर्षीय अमरसिंह कलम की मौके पर ही मौत हो गई। संघर्ष के दौरान दोनों पक्षों ने लाठी-डंडों और पत्थरों का इस्तेमाल किया। इस झड़प में मृतक के भाई सूरत सिंह सहित रामभरोस, आनंद सिंह, हरिसिंह, सतीश राजपूत और दूसरे पक्ष के नारायण राजपूत भी घायल हो गए।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू में किया। घायल लोगों को सिराली के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से तीन गंभीर रूप से घायल लोगों को जिला अस्पताल हरदा रेफर किया गया।

    पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह साफ हो गया है कि जमीनी विवाद इस खूनी झड़प का मुख्य कारण था। स्थानीय लोग और परिवार वाले अब भी इस घटना को लेकर तनाव में हैं और प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है।

  • मेघायल में फिर भड़की हिंसा… पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत, आर्मी तैनात

    मेघायल में फिर भड़की हिंसा… पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत, आर्मी तैनात


    शिलॉन्ग।
    पूर्वोत्तर राज्य मेघालय (North Eastern State Meghalaya) के पश्चिम गारो पर्वतीय जिले में मंगलवार तड़के गारो पर्वतीय स्वायत्त जिला परिषद (GHDC) चुनाव नामांकन प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद और तनाव के बीच हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई। इससे इलाके में और तनाव पसर गया। हालात को देखते हुए न सिर्फ वहां कर्फ्यू लगाया गया है बल्कि सेना को भी तैनात किया गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

    जिले के पुलिस अधीक्षक अब्राहम टी. संगमा (Superintendent of Police Abraham T. Sangma) ने बताया कि यह घटना चिबिनांग इलाके में हुई जहां जनजातीय और गैर-जनजातीय समूहों के बीच झड़प हो गई थी। संगमा ने कहा, “मारे गए दोनों व्यक्ति चिविनांग के निवासी थे। GHDC चुनावों को लेकर जनजातीय और गैर-जनजातीय समूहों के बीच झड़प हुई थी और यह गोलीबारी तब हुई जब हम जमा भीड़ को तितर-बितर कर रहे थे।” उन्होंने कहा कि इलाके में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। तनाव को और बढ़ने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने मंगलवार को पूरे पश्चिम गारो पर्वतीय जिले में दिन भर के लिए कर्फ्यू लगा दिया है।


    वॉयस कॉल और एसएमएस सेवाएं प्रभावित नहीं

    एसपी ने कहा, “हमने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है और वे आ रहे हैं।” यह घटना मेघालय सरकार द्वारा जिले में 10 मार्च से 48 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने के आदेश के कुछ घंटों बाद हुई है। नामांकन प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था को खतरे में डालने वाली भीड़ जुटाने, हमलों और सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं के प्रसार की खबरों के बाद यह कदम उठाया गया। हालांकि, वॉयस कॉल और एसएमएस सेवाएं प्रभावित नहीं हुई हैं।


    सेना से ‘फ्लैग मार्च’ करने का अनुरोध

    जिले के उपायुक्त विभोर अग्रवाल ने मंगलवार को पूर्वी कमान के 101 एरिया के कमांडिंग ऑफिसर को पत्र लिखकर जिले के मैदानी क्षेत्रों के गांवों में सेना से ‘फ्लैग मार्च’ करने का अनुरोध किया है। उपायुक्त ने पत्र में कहा, “सशस्त्र बलों की उपस्थिति से जनता को आश्वस्त करने, किसी भी अन्य अप्रिय घटना को रोकने और निवासियों के बीच विश्वास बहाल करने में बहुत मदद मिलेगी।” जीएचएडीसी चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 16 मार्च तक जारी रहेगी जिसे देखते हुए नामांकन केंद्रों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।


    नामांकन के दौरान हमला

    यह अशांति तब शुरू हुई प्रदर्शनकारियों ने 10 अप्रैल को होने वाले जीएचएडीसी चुनावों के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने सोमवार को तुरा में उपायुक्त कार्यालय पहुंचे फूलबाड़ी के पूर्व विधायक एस्तामुर मोमिन पर हमला कर दिया था। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस चुनाव में गैर-जनजातीय लोग भाग न लें। जीएचएडीसी की कार्यकारी समिति ने 17 फरवरी को एक प्रस्ताव पारित किया था जिसके तहत उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करते समय वैध अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया था।

  • उज्जैन में युवक की पिटाई का VIDEO: महाकाल दर्शन को आया था, नाम सामने आते ही बजरंग दल ने घेरा

    उज्जैन में युवक की पिटाई का VIDEO: महाकाल दर्शन को आया था, नाम सामने आते ही बजरंग दल ने घेरा


    उज्जैन। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने धोती-कुर्ता माथे पर त्रिपुंड और गले में रुद्राक्ष की माला पहने एक युवक की पिटाई कर दी। युवक एक युवती के साथ मोहाली से उज्जैन आया था। घटना नानाखेड़ा क्षेत्र में सोमवार रात की बताई जा रही है जिसका वीडियो मंगलवार को सामने आया।

    वीडियो में युवक अपना नाम जफर खान बताते हुए खुद को भगवान शिव का भक्त बता रहा है। जानकारी के मुताबिक कार्यकर्ताओं को सूचना मिली थी कि अलग-अलग राज्यों से आए युवक-युवती एक होटल में ठहरे हैं। करीब एक घंटे इंतजार के बाद होटल के बाहर युवक को पकड़कर पूछताछ की गई।

    बताया जा रहा है कि युवक ने पहले हिंदू नाम बताया लेकिन बाद में अपना नाम जफर खान स्वीकार किया। उसने कहा कि वह शिव भक्त है और युवती उसे उज्जैन दर्शन कराने लाई थी। दोनों ने श्री महाकालेश्वर मंदिर हरसिद्धि मंदिर और काल भैरव मंदिर में दर्शन किए थे।

    नाम सामने आते ही मारपीट

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक को घेरकर पहले पूछताछ की गई और असली नाम सामने आने के बाद मारपीट शुरू कर दी गई। वीडियो में युवक के सिर से खून बहता भी दिखाई दे रहा है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को अपने साथ ले गई।

    होटल में ठहरने को लेकर विवाद

    बजरंग दल के जिला संयोजक ऋषभ कुशवाह ने दावा किया कि युवक-युवती को कई होटलों में कमरा नहीं मिला था। बाद में वे नानाखेड़ा के एक होटल में रुके। आरोप है कि युवक ने होटल में हिंदू नाम दर्ज कराया था। पूछताछ के बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

    पुलिस जांच में जुटी

    नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेंद्र यादव के मुताबिक युवक और युवती मोहाली के रहने वाले हैं। युवती की उम्र 32 वर्ष बताई गई है और दोनों अलग-अलग समुदाय से हैं। युवती को युवक के दूसरे धर्म से होने की जानकारी थी और दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे। पुलिस आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। शिकायत मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    मंदिरों में प्रवेश को लेकर नई मांग

    इस घटना के बाद कुछ संगठनों ने श्री महाकालेश्वर मंदिर सहित शहर के प्रमुख मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है।

  • ‘हिंदू कार्ड’ या सियासी पाखंड? बांग्लादेश में चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी की कथित समावेशिता पर सवाल

    ‘हिंदू कार्ड’ या सियासी पाखंड? बांग्लादेश में चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी की कथित समावेशिता पर सवाल


    नई दिल्‍ली । बांग्लादेश की राजनीति इन दिनों एक गंभीर विरोधाभास से गुजर रही है। एक तरफ देश में हिंदू समुदाय पर हमलों, हिंसा और कथित नरसंहार की खबरें सामने आ रही हैं, तो दूसरी ओर कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी खुद को “समावेशी” और “धर्मनिरपेक्ष” दिखाने की कोशिश कर रही है। इस कोशिश का ताजा उदाहरण खुलना-1 संसदीय सीट से हिंदू प्रकोष्ठ के नेता कृष्ण नंदी को उम्मीदवार बनाए जाने के रूप में सामने आया है। हालांकि, कई रिपोर्ट्स और खुद पार्टी के संविधान की धाराएं इस कदम को महज एक सियासी दिखावा और ‘हिंदू कार्ड’ करार दे रही हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि जमात-ए-इस्लामी का यह कदम वास्तविक समावेशिता से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अल्पसंख्यकों को गुमराह करने की रणनीति है। पार्टी के संविधान में निहित प्रावधान यह साफ करते हैं कि कोई भी हिंदू या गैर-मुस्लिम कभी भी जमात-ए-इस्लामी का पूर्ण सदस्य नहीं बन सकता। ऐसे में सवाल उठता है कि जब किसी समुदाय को संगठन के भीतर बराबरी का अधिकार ही नहीं दिया जा सकता, तो उसे चुनावी उम्मीदवार बनाना कितना ईमानदार कदम कहा जा सकता है।

    संविधान की सख्त शर्तें, गैर-मुस्लिमों को बराबरी नहीं

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी के संविधान की धारा 11 स्पष्ट रूप से कहती है कि कोई भी गैर-मुस्लिम केवल “एसोसिएट सदस्य” ही बन सकता है। इसका मतलब यह है कि हिंदू या अन्य गैर-मुस्लिम नेताओं को पार्टी की कोर कमिटी, नीति-निर्माण या अहम फैसलों में कोई भूमिका नहीं मिलेगी। पूर्ण सदस्यता केवल मुसलमानों के लिए आरक्षित है। ऐसे में कृष्ण नंदी जैसे नेताओं को उम्मीदवार बनाना प्रतीकात्मक कदम से ज्यादा कुछ नहीं लगता।

    यही नहीं, पार्टी के संविधान की धारा 7 और 9 में पूर्ण सदस्य बनने के लिए जिन शर्तों का उल्लेख है, वे किसी भी स्वाभिमानी हिंदू या गैर-मुस्लिम के लिए स्वीकार्य नहीं मानी जा सकतीं। इन धाराओं के तहत पार्टी सदस्य को अल्लाह, पैगंबर मोहम्मद और कुरान को एकमात्र आदर्श मानना अनिवार्य है। साथ ही, सदस्य को शरिया कानून के अनुसार जीवन जीने और इस्लामी कर्तव्यों का पालन करने की शपथ लेनी होती है। इसके अलावा, “इस्लाम से भटके हुए लोगों” से दूरी बनाए रखने की शर्त भी संविधान में दर्ज है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी ने वर्ष 2008 में अपने संविधान में कुछ सीमित बदलाव किए थे, लेकिन ये बदलाव भी कथित तौर पर चुनाव आयोग और जनप्रतिनिधित्व आदेश के नियमों से बचने के लिए किए गए थे, ताकि पार्टी का पंजीकरण रद्द न हो। मूल विचारधारा और कट्टर इस्लामी सोच में कोई ठोस बदलाव नहीं किया गया। इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि बिना बुनियादी सुधार के समावेशिता की बात करना महज राजनीतिक अवसरवाद है।

    चुनाव का माहौल और बदली हुई सियासी तस्वीर

    बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव होने हैं। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद यह देश का पहला आम चुनाव है। अब तक बांग्लादेश की राजनीति मुख्य रूप से अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन इस बार हालात बिल्कुल अलग हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे वह चुनाव नहीं लड़ पा रही है।

    इस राजनीतिक खालीपन का फायदा उठाकर जमात-ए-इस्लामी खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि हिंदू उम्मीदवार उतारना इसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पार्टी पर लगने वाले कट्टरपंथी और अल्पसंख्यक विरोधी छवि के आरोपों को कमजोर किया जा सके।

    महिलाओं को लेकर भी कट्टर रुख

    जमात-ए-इस्लामी की कथित समावेशिता की पोल महिलाओं के मुद्दे पर भी खुलती है। पार्टी ने इस चुनाव में एक भी महिला उम्मीदवार नहीं उतारा है। पार्टी प्रमुख शफीकुर रहमान का साफ कहना है कि जमात-ए-इस्लामी की कभी कोई महिला प्रमुख नहीं बन सकती। उनके अनुसार, “अल्लाह ने पुरुष और महिलाओं को अलग-अलग बनाया है” और महिलाएं पार्टी का नेतृत्व नहीं कर सकतीं।

    शफीकुर रहमान का एक और बयान काफी विवादित रहा, जिसमें उन्होंने कामकाजी महिलाओं की तुलना वेश्यावृत्ति से कर दी। इस बयान के बाद ढाका समेत कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए और जमात-ए-इस्लामी की सोच पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। उल्‍लेखनीय है कि बांग्लादेश में जहां एक ओर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं, वहीं जमात-ए-इस्लामी का ‘हिंदू उम्मीदवार’ उतारना वास्तविक बदलाव से ज्यादा राजनीतिक दिखावा प्रतीत होता है। पार्टी का संविधान, उसकी विचारधारा और नेताओं के बयान यह संकेत देते हैं कि बिना ठोस वैचारिक और संरचनात्मक सुधार के यह समावेशिता केवल एक चुनावी रणनीति है, जिसका उद्देश्य सत्ता की दौड़ में अपनी छवि को चमकाना भर है।

  • हरिद्वार: संत रविदास जयंती की शोभायात्रा के बाद भड़की हिंसा, तोड़फोड़ और फायरिंग में दो लोगों की मौत… गांव में तनाव

    हरिद्वार: संत रविदास जयंती की शोभायात्रा के बाद भड़की हिंसा, तोड़फोड़ और फायरिंग में दो लोगों की मौत… गांव में तनाव


    हरिद्वार।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) के हरिद्वार जिले (Haridwar district) के भगवानपुर क्षेत्र (Bhagwanpur area) में संत रविदास जयंती (Sant Ravidas Jayanti) के अवसर पर निकाली गई शोभायात्रा के बाद हालात बेकाबू हो गए। एक ही समुदाय के दो गुटों के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि एक पक्ष की ओर से की गई गोलीबारी में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने आरोपी पक्ष के घर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। देर रात गांव में एक और शव मिलने से तनाव और बढ़ गया, जिसके चलते पुलिस ने एहतियातन अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है।

    भगवानपुर थाना क्षेत्र के बिनारसी गांव में रविवार को रविदास जयंती को लेकर आयोजन किया गया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद 27 वर्षीय आनंद, पुत्र लक्ष्मीचंद, अपने परिवार और कुछ परिचितों के साथ घर लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में, घर के सामने रहने वाले धर्मवीर और उसके साथ मौजूद लोगों से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गई।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपित पक्ष ने लाइसेंसी और अवैध हथियारों का इस्तेमाल करते हुए फायरिंग की। इसमें आनंद, उसका भाई विकास, गगनदीप और योगेंद्र गोली लगने से घायल हो गए। आनंद की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। विकास को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि गगनदीप और योगेंद्र को रुड़की के अस्पताल ले जाया गया। गगनदीप के पैर में गोली लगने के कारण उसे हायर सेंटर रेफर किया गया है, वहीं योगेंद्र को छर्रे लगे हैं और उसका इलाज जारी है।


    आरोपियों का घर फूंका

    उधर, गांव में फायरिंग के बाद अफरातफरी मच गई। घटना से गुस्साए आनंद के घरवालों-परिचितों ने आरोपी के घर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। मामले की जानकारी पर पुलिस मौके पर पहुंची पर लोगों ने आनंद का शव नहीं उठने दिया। रात करीब साढ़े आठ बजे पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर शव पोस्टमार्टम को भेजा। इस बीच, पुलिस को सूचना मिली की गांव में धर्मवीर पक्ष का 45 वर्षीय मांगेराम, बेसुध पड़ा है। पुलिस मौके पर पहुंची तो मांगेराम मृत पड़ा था। पुलिस के अनुसार प्रथमदृष्टया मांगेराम की मौत पिटाई से होना लग रही है। पुलिस ने मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिया है।


    पुरानी रंजिश बनीं खून-खराबे की वजह

    बताया जा रहा है कि प्रधान पक्ष धर्मवीर और आनंद पक्ष के बीच पुरानी रंजिश के चलते दो साल से तनातनी बनी हुई थी। हालांकि दोनों ही पक्ष एक दूसरे के पड़ोसी होने के साथ-साथ एक ही समाज से हैं, लेकिन किसी ने भी इस तनातनी को गंभीरता से नहीं किया। रविवार को शाम को दोनों पक्ष फिर से आमने सामने आ गए। जिसके चलते मामूली कहासुनी हिंसक खूनी संघर्ष के रूप में सामने आई। जिसमें हुई फायरिंग में आनंद की मौके पर ही मौत हो गई। और तीन अन्य युवक घायल हो गए। उधर देर रात पुलिस ने बताया कि एक युवक 45 वर्षीय मांगेराम का शव क्षेत्र से ही बरामद किया गया है।


    चंद मिनटों में ही मातम में बदला खुशियां

    गांव में संत शिरोमणि जयंती पर्व को लेकर पिछले कई दिनों से गांव में तैयारियां चल रही थी। पूरे गांव में एक उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा था। रविवार को पर्व के मौके पर सुबह से ही लोग मंदिर में पूजा-अर्चना में परिवार सहित जुटे थे। धूमधाम से शोभायात्रा निकाली गई। भंडारे में बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित पहुंचे। पूरे गांव में उत्साह का माहौल था। लेकिन दिन ढलते ही पूरा माहौल मातम में बदल गया।

  • उज्जैन के तराना में फिर भड़की हिंसा: घरों पर पथराव, बस में आग, 300 पुलिस जवान तैनात

    उज्जैन के तराना में फिर भड़की हिंसा: घरों पर पथराव, बस में आग, 300 पुलिस जवान तैनात



    नई दिल्ली। उज्जैन जिले के तराना कस्बे में गुरुवार शाम शुरू हुआ विवाद शुक्रवार को हिंसक रूप ले गया। सोहेल ठाकुर पर हमले के बाद उपद्रवियों ने कई घरों पर पत्थरबाजी की और एक बस में आग लगा दी, जिससे इलाके में भय का माहौल बन गया। पुलिस-प्रशासन ने स्थिति को गंभीर मानते हुए पूरे कस्बे को छावनी में तब्दील कर दिया है।

    सोहेल ठाकुर पर हमला, माहौल हुआ तनावपूर्ण
    पुलिस के अनुसार गुरुवार शाम तराना में कुछ युवकों के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान सोहेल ठाकुर नामक युवक पर प्राणघातक हमला किया गया।

    इस घटना के विरोध में शुक्रवार को तनाव बढ़ा और कुछ शरारती तत्वों ने उग्र होकर हिंसा की।

    घरों पर पथराव, बस में आग
    उपद्रवियों ने मोहल्लों में घुसकर कई घरों पर पथराव किया, जिससे कई खिड़कियों के शीशे टूट गए। इसके बाद भीड़ ने एक बस में आग लगा दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    300 से ज्यादा जवान तैनात, ड्रोन और CCTV से निगरानी
    उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने खुद मोर्चा संभाला और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस ने सोहेल की शिकायत पर 6 लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला दर्ज किया है, जिनमें से 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। एक आरोपी की तलाश अभी जारी है।

    शांति बहाल करने के लिए प्रशासन ने तराना में 300 से अधिक पुलिस जवान तैनात किए हैं। साथ ही ड्रोन कैमरा और CCTV फुटेज के जरिए संदिग्धों की पहचान की जा रही है।

    सोहेल की हालत स्थिर, अस्पताल में उपचार
    हमले में घायल सोहेल ठाकुर का इलाज जारी है। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी हालत अब खतरे से बाहर है।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

  • ईरान में उबाल: बढ़ते विरोध के आगे झुकी खामेनेई सरकार, सरकारी टीवी ने मानी हिंसा

    ईरान में उबाल: बढ़ते विरोध के आगे झुकी खामेनेई सरकार, सरकारी टीवी ने मानी हिंसा

    अंतरराष्ट्रीय मध्य पूर्व के देश ईरान में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. बीते करीब 12 दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा खुलकर सड़कों पर नजर आ रहा है.

    गुरुवार रात हालात और बिगड़ गए, जब राजधानी तेहरान समेत 100 से ज्यादा शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए.

    प्रदर्शनों के दौरान कई जगह आगजनी की घटनाएं हुईं. सरकारी इमारतों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की खबरें सामने आईं. इसके साथ ही, कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की भी सूचना मिली है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए. बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती के बावजूद हालात काबू में आते नहीं दिख रहे हैं.

    अमेरिका की चेतावनी और ईरान का जवाब

    इन घटनाओं के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की गई, तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा. इस बयान के बाद ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि ईरान सरकार किसी भी संभावित खतरे को लेकर सतर्क है.

    सरकारी टीवी ने तोड़ी चुप्पी

    लंबे समय तक हालात पर चुप्पी साधे रखने के बाद अब ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पहली बार हिंसा की बात स्वीकार की है. एक कार्यक्रम के दौरान यह माना गया कि प्रदर्शनों के समय हिंसक घटनाएं हुई हैं और कुछ लोगों की जान भी गई है. यह स्वीकारोक्ति बताती है कि हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब उन्हें छिपाना संभव नहीं रहा.

    हालांकि, सरकार ने जनता के गुस्से को इन घटनाओं की वजह मानने से इनकार किया है. सरकारी टीवी का दावा है कि आगजनी और हिंसा के पीछे अमेरिका और इज़रायल से जुड़े ‘आतंकी एजेंट’ हैं. ईरानी शासन का कहना है कि देश में अशांति फैलाने के लिए बाहर से साजिश रची जा रही है. यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने अंदरूनी विरोध को विदेशी हस्तक्षेप बताया हो.

    आर्थिक संकट बना बड़ा कारण

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि देश में चल रहा आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी जनता के गुस्से की बड़ी वजह हैं. आम लोगों का जीवन मुश्किल होता जा रहा है, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा है. ऐसे हालात में सरकार के लिए स्थिति संभालना आसान नहीं रह गया है.