Tag: Vishnu Puja

  • नारायण की कृपा पाने का आसान तरीका, भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये चीजें; पूजा में शामिल करते ही मिलेगा शुभ फल

    नारायण की कृपा पाने का आसान तरीका, भगवान विष्णु को प्रिय हैं ये चीजें; पूजा में शामिल करते ही मिलेगा शुभ फल


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान विष्णु को जगत का पालनहार माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की पूजाLord Vishnu, Vishnu Puja, Hindu Religion, Lord Vishnu Bhog, Sanatan Dharma श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए भक्त अलग अलग प्रकार की पूजा सामग्री और भोग अर्पित करते हैं। माना जाता है कि नारायण को कुछ विशेष चीजें बेहद प्रिय हैं और पूजा के दौरान इनका इस्तेमाल करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है। हालांकि पूजा में सबसे महत्वपूर्ण चीज भक्त की श्रद्धा और सच्ची भावना को माना गया है।

    भगवान विष्णु को पीला रंग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। यही वजह है कि उनकी पूजा में पीले फूल पीले वस्त्र और पीले रंग की मिठाई का इस्तेमाल किया जाता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही भक्त भगवान को पीले चंदन का तिलक भी लगा सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पीले रंग का संबंध गुरु और ज्ञान से भी है इसलिए विष्णु पूजा में इसका विशेष महत्व बताया गया है।

    भगवान विष्णु को केले का फल भी प्रिय माना जाता है। पूजा में केले का भोग लगाया जा सकता है। कई स्थानों पर गुरुवार के दिन भगवान विष्णु के साथ केले के पेड़ की भी पूजा करने की परंपरा है। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार में सुख समृद्धि का वातावरण मजबूत होता है।

    नारायण को पंचामृत का भोग भी अर्पित किया जाता है। दूध दही घी शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत को धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। भगवान विष्णु की पूजा में पंचामृत अर्पित करने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा भी कई घरों में है। इसके अलावा तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। विष्णु पूजा में तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। मान्यता है कि तुलसी के बिना विष्णु पूजा को कई भक्त अधूरा मानते हैं।

    भगवान विष्णु को खीर और पीली मिठाइयों का भोग लगाने की भी परंपरा है। बेसन के लड्डू बूंदी के लड्डू या अन्य सात्विक मिठाइयां श्रद्धा के अनुसार अर्पित की जा सकती हैं। पूजा के बाद इस भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटना शुभ माना जाता है।

    भगवान विष्णु की पूजा करते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान को स्वच्छ करें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पीले फूल तुलसी दल फल और भोग अर्पित करें। विष्णु मंत्र का जाप करें और भगवान से परिवार की सुख शांति तथा कल्याण की प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए दिखावे से ज्यादा जरूरी मन की पवित्रता और सच्ची श्रद्धा है।

  • सावन के पावन गुरुवार पर अपनाएं यह विशेष पूजा विधि विष्णु कृपा से चमकेगा भाग्य और घर में आएगी खुशहाली

    सावन के पावन गुरुवार पर अपनाएं यह विशेष पूजा विधि विष्णु कृपा से चमकेगा भाग्य और घर में आएगी खुशहाली


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवताओं के गुरु बृहस्पति देव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह दिन ज्ञान धर्म समृद्धि वैवाहिक सुख संतान सुख और आर्थिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करते हैं उन पर श्रीहरि की विशेष कृपा बनी रहती है और जीवन की अनेक परेशानियां धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं। वहीं जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है उन्हें भी गुरुवार का व्रत और पूजा विशेष लाभ पहुंचाती है।

    गुरुवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर की अच्छी तरह सफाई कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा के दौरान भगवान को पीले फूल हल्दी चंदन केसर पीले फल केले और बेसन या चने की दाल से बने प्रसाद का भोग अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर धूप अर्पित करें और विष्णु सहस्रनाम विष्णु चालीसा या ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। यदि संभव हो तो देवगुरु बृहस्पति के मंत्रों का भी जाप करें जिससे गुरु ग्रह मजबूत होता है और शुभ फल प्राप्त होते हैं।

    गुरुवार के दिन व्रत रखने का भी विशेष महत्व बताया गया है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं और कई लोग केवल एक समय पीले रंग का भोजन करते हैं। भोजन में चने की दाल बेसन की रोटी केसर युक्त खीर या पीले चावल का सेवन शुभ माना जाता है। इस दिन तामसिक भोजन मांस मदिरा और लहसुन प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार को पीली वस्तुओं का दान करने से भी विशेष पुण्य मिलता है। गरीब और जरूरतमंद लोगों को चने की दाल हल्दी पीले वस्त्र केला या केसर का दान करना शुभ माना जाता है। साथ ही किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और घर में सुख समृद्धि का वास होता है।

    गुरुवार के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन भी करना चाहिए। इस दिन बाल कटवाने नाखून काटने और अनावश्यक क्रोध करने से बचना चाहिए। महिलाओं को इस दिन बाल धोने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है हालांकि इस विषय में अलग अलग परंपराएं प्रचलित हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे दिन सकारात्मक विचार रखें और किसी का अपमान या अनादर न करें।

    मान्यता है कि जो व्यक्ति लगातार श्रद्धा और विश्वास के साथ गुरुवार की पूजा और व्रत करता है उसके जीवन में धन धान्य सुख शांति और वैभव का आगमन होता है। भगवान विष्णु की कृपा से परिवार में प्रेम बना रहता है कार्यों में सफलता मिलती है और जीवन की बाधाएं धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं। इसलिए यदि आप भी अपने जीवन में सुख समृद्धि और सकारात्मक बदलाव चाहते हैं तो गुरुवार के दिन पूरे विधि विधान से भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा अवश्य करें।

  • गुरुवार पूजा का महत्व और संपूर्ण विधि पीले वस्त्र केले का पूजन और विष्णु आराधना से खुलेंगे सुख समृद्धि के द्वार

    गुरुवार पूजा का महत्व और संपूर्ण विधि पीले वस्त्र केले का पूजन और विष्णु आराधना से खुलेंगे सुख समृद्धि के द्वार


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से पूजा अर्चना करने से जीवन में सुख समृद्धि धन वैभव और ज्ञान की प्राप्ति होती है। जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति कमजोर होता है या विवाह शिक्षा संतान और करियर में बाधाएं आती हैं उनके लिए गुरुवार का व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान विष्णु की कृपा से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक परेशानियां धीरे धीरे दूर होने लगती हैं।

    गुरुवार की पूजा प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने से शुरू होती है। स्नान के बाद साफ और विशेष रूप से पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई कर भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा में पीले फूल हल्दी चंदन अक्षत पीले फल चने की दाल और बेसन या बूंदी के लड्डू का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

    पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें और घी का दीपक जलाकर धूप दिखाएं। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम विष्णु चालीसा अथवा श्री हरि के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें। देवगुरु बृहस्पति के मंत्रों का जप भी विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के अंत में आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें। यदि संभव हो तो केले के वृक्ष की भी पूजा करें और जल अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

    गुरुवार के दिन दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन पीले वस्त्र चने की दाल हल्दी केसर पीले फल या मिठाई का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और ब्राह्मणों को भोजन कराना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन क्रोध असत्य वचन और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन बाल कटवाने नाखून काटने और बिना आवश्यकता के नकारात्मक विचार रखने से बचना शुभ माना गया है। घर में शांति और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने का प्रयास करें तथा परिवार के बड़े बुजुर्गों का सम्मान करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है।

    मान्यता है कि जो श्रद्धालु नियमित रूप से गुरुवार का व्रत रखते हैं और पूरे विधि विधान से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं उनके जीवन में धन की कमी नहीं रहती। करियर में सफलता शिक्षा में प्रगति वैवाहिक जीवन में सुख और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। सच्ची श्रद्धा और निष्काम भाव से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनती है और उसे सुख समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

  • 25 जून को निर्जला एकादशी का महासंयोग, मेष से कुंभ तक इन राशियों पर बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा

    25 जून को निर्जला एकादशी का महासंयोग, मेष से कुंभ तक इन राशियों पर बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा


    नई दिल्ली ।निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी 25 जून गुरुवार को पड़ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। गुरुवार स्वयं भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का दिन माना जाता है। ऐसे में इस बार का व्रत श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत शुभ माना जा रहा है। द्रिक पंचांग के अनुसार निर्जला एकादशी पर एक साथ कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। सुबह 5 बजकर 25 मिनट से शाम 4 बजकर 29 मिनट तक रवि योग रहेगा, जिसे सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इसके अलावा सुबह 10 बजकर 53 मिनट से सिद्ध योग प्रारंभ होगा, जो देर रात तक प्रभावी रहेगा। सिद्ध योग को सफलता, उन्नति और मनोकामना पूर्ति का कारक माना जाता है। वहीं सिद्ध योग से पहले शिव योग का निर्माण भी होगा, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ परिणाम लेकर आता है। इन विशेष योगों का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन चार राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी माना जा रहा है।

    मेष राशि
    मेष राशि के जातकों के लिए निर्जला एकादशी नई उम्मीदें लेकर आ सकती है। लंबे समय से अटके हुए कार्यों में गति आएगी और आर्थिक मामलों में राहत मिलने की संभावना है। घर, भूमि या संपत्ति से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां धीरे-धीरे कम होने के संकेत हैं। निवेश और भविष्य की योजनाओं में भी सफलता मिलने के योग बन रहे हैं।

    कर्क राशि

    कर्क राशि वालों के लिए यह समय पारिवारिक सुख और शांति लेकर आ सकता है। परिवार के सदस्यों के बीच चल रही गलतफहमियां दूर होंगी और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। लंबे समय से रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। घरेलू वातावरण सकारात्मक रहेगा और परिवार के साथ यादगार समय बिताने का अवसर मिलेगा।

    तुला राशि
    तुला राशि के जातकों के लिए यह शुभ संयोग करियर और आर्थिक क्षेत्र में सफलता दिलाने वाला साबित हो सकता है। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत का फल मिलेगा और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तथा किसी कीमती वस्तु की खरीदारी का योग बन सकता है। स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह समय राहत देने वाला रहेगा, विशेषकर आंखों से जुड़ी समस्याओं में सुधार देखने को मिल सकता है।

    कुंभ राशि
    कुंभ राशि वालों के लिए व्यापार और व्यवसाय में लाभ के संकेत हैं। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। मानसिक तनाव में कमी आएगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा। स्वास्थ्य पहले की तुलना में बेहतर रहेगा, हालांकि खान-पान और दिनचर्या को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। व्यापारिक निर्णयों में सफलता मिलने की संभावना है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य और व्रत करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। इस बार बन रहे शुभ योगों के कारण यह पर्व आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • Adhik Maas 2026: अधिकमास में करें 33 देवों का पूजन, गंगा दशहरा पर मिलेगा महापुण्य

    Adhik Maas 2026: अधिकमास में करें 33 देवों का पूजन, गंगा दशहरा पर मिलेगा महापुण्य



    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में अधिकमास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास का विशेष महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि इसी दौरान गंगा दशहरा का महापर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में पूजा-पाठ, स्नान, दान और भगवान विष्णु के 33 स्वरूपों का स्मरण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    ज्योतिष और धर्म ग्रंथों के अनुसार, गंगा दशहरा का दस दिवसीय पर्व 17 मई 2026 से प्रारंभ होकर 26 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु गंगा स्नान, दान-पुण्य और विशेष पूजन करेंगे। निर्णयसिंधु ग्रंथ में उल्लेख मिलता है कि जब ज्येष्ठ मास में अधिकमास पड़ता है, तब गंगा दशहरा का पर्व उसी अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में मनाना शास्त्र सम्मत माना जाता है।

    इस बार गंगा दशहरा 26 मई 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत शुभ माना जा रहा है। हस्त नक्षत्र, कन्या राशि का चंद्रमा और वृष राशि में सूर्य का विशेष संयोग इस पर्व को महापुण्यकारी बना रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इसी प्रकार के योग में मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था।

    अधिकमास में 33 देवों की पूजा का महत्व
    अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। प्राचीन ग्रंथों में इस मास में भगवान विष्णु के 33 स्वरूपों के पूजन और नामस्मरण का विशेष महत्व बताया गया है।

    इन 33 देव स्वरूपों में विष्णु, जिष्णु, महाविष्णु, हरि, कृष्ण, केशव, माधव, पुरुषोत्तम, गोविंद, वामन, नारायण, त्रिविक्रम, वासुदेव, शेषशायी, दामोदर और श्रीपति जैसे दिव्य नाम शामिल हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन नामों का श्रद्धा से जप करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

    अधिकमास में करें ये विशेष उपाय
    धर्माचार्यों के अनुसार, अधिकमास में दान और सेवा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस अवधि में 33 पुए कांसे के पात्र में रखकर घी सहित ब्राह्मण को दान करने से 33 प्रकार की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

    इसके अलावा गंगा स्नान, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, दीपदान, अन्नदान और जरूरतमंदों की सहायता करने से भी विशेष पुण्य मिलता है।

    क्यों खास माना जाता है पुरुषोत्तम मास?
    अधिकमास हर तीन वर्ष में एक बार आता है। हिंदू पंचांग में चंद्र और सौर गणना के संतुलन के लिए इसे जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब किसी मास का कोई स्वामी ग्रह नहीं होता, तब भगवान विष्णु उसे अपना नाम देकर पुरुषोत्तम मास का दर्जा देते हैं। इसी कारण यह महीना भक्ति, तप और दान के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।

  • दुर्लभ महीना जो देता है महापुण्य लाभ-लेकिन छोटी सी भूल बढ़ा सकती है पाप

    दुर्लभ महीना जो देता है महापुण्य लाभ-लेकिन छोटी सी भूल बढ़ा सकती है पाप


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार हर कुछ वर्षों में एक विशेष महीना आता है, जिसे Adhik Maas या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यह महीना सामान्य 12 महीनों से अलग होता है और इसे अतिरिक्त (13वां) महीना माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पवित्र महीना 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह का संबंध सीधे भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि जब इस अतिरिक्त महीने को कोई नाम नहीं मिल पाया, तब स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर ‘पुरुषोत्तम मास’ बनाया। इसी कारण यह महीना विष्णु भक्ति, साधना और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

    शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस अवधि में किए गए जप, तप, पूजा-पाठ और दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। इसे “अक्षय पुण्य” प्राप्त करने वाला समय भी कहा जाता है। इसलिए भक्तजन इस महीने में भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने का प्रयास करते हैं।

    हालांकि, जितना यह महीना पुण्यदायी माना गया है, उतना ही इसमें कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कुछ कार्यों से बचना चाहिए, अन्यथा उसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

    इस महीने में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश या किसी नए कार्य की शुरुआत को शुभ नहीं माना जाता। इसी तरह, नए निर्माण कार्य या बड़े निवेश से भी बचने की सलाह दी जाती है।

    इसके अलावा, इस अवधि में शारीरिक और मानसिक पवित्रता का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है। ब्रह्मचर्य का पालन और संयमित जीवनशैली अपनाना इस माह का मुख्य नियम माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन और नशीले पदार्थों का सेवन इस महीने में वर्जित माना गया है। ऐसा करने से आध्यात्मिक पुण्य कम होने की बात कही जाती है।

    इसी तरह झूठ बोलना, धोखा देना, किसी का धन हड़पना या बुरे कर्म करना इस महीने में कई गुना पाप का कारण बन सकता है। इसलिए इस समय को आत्ममंथन और सुधार का अवसर माना जाता है।

    दान-पुण्य को इस महीने में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है, लेकिन यह भी कहा गया है कि दान का दिखावा नहीं करना चाहिए और न ही अशुद्ध या खराब वस्तुओं का दान करना चाहिए।

    कांसे के बर्तन में भोजन करने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसे भी शास्त्रीय नियमों के विरुद्ध माना गया है।

    कुल मिलाकर Adhik Maas को आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का महीना माना गया है, जिसमें सही आचरण व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।

  • गुरुवार के उपाय: शादी में आ रही रुकावट होगी दूर, धन-संपत्ति से भर जाएगा घर

    गुरुवार के उपाय: शादी में आ रही रुकावट होगी दूर, धन-संपत्ति से भर जाएगा घर


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है, उन्हें विवाह में देरी, आर्थिक परेशानी और पारिवारिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गुरुवार के दिन कुछ विशेष उपाय करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है।
    ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, जिन युवकों और युवतियों की शादी में लगातार बाधाएं आ रही हैं, उन्हें गुरुवार के दिन पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। पूजा में हल्दी, चने की दाल, पीले फूल और बेसन के लड्डू अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने से विवाह योग मजबूत होता है।
    आर्थिक तंगी से परेशान लोगों के लिए भी गुरुवार के उपाय काफी असरदार बताए गए हैं। मान्यता है कि इस दिन केले के पेड़ की पूजा करने और जल में हल्दी मिलाकर अर्पित करने से धन संबंधी समस्याएं दूर होने लगती हैं। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को पीली वस्तुओं जैसे चना दाल, हल्दी, पीले कपड़े या केले का दान करना भी बेहद शुभ माना गया है।
    गुरुवार के दिन घर में सत्यनारायण कथा या विष्णु सहस्रनाम का पाठ कराने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और रुके हुए कार्यों में गति मिलती है। वहीं, जिन लोगों को नौकरी या व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा हो, उन्हें इस दिन नमक का कम इस्तेमाल करने और सात्विक भोजन ग्रहण करने की सलाह दी जाती है।
    ज्योतिष शास्त्र में यह भी कहा गया है कि गुरुवार के दिन बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। ऐसा करने से गुरु ग्रह कमजोर होता है और शुभ फल में कमी आ सकती है। इस दिन पीले रंग का अधिक प्रयोग करना शुभ माना जाता है।
    मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा के साथ किए गए ये उपाय व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। हालांकि किसी भी धार्मिक उपाय को आस्था और विश्वास के साथ करना ही सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।
  • गुरुवार व्रत से चमक सकती है किस्मत, जानिए कब और कैसे करें बृहस्पति देव की पूजा

    गुरुवार व्रत से चमक सकती है किस्मत, जानिए कब और कैसे करें बृहस्पति देव की पूजा


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है, लेकिन गुरुवार का दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति ग्रह को ज्ञान, भाग्य, विवाह, संतान और सुख-समृद्धि का कारक कहा गया है। मान्यता है कि यदि कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर हो या जीवन में लगातार रुकावटें आ रही हों, तो गुरुवार का व्रत बेहद लाभकारी साबित होता है। यह व्रत व्यक्ति के गुडलक को मजबूत करता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार का व्रत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष से शुरू करना सबसे शुभ माना जाता है। यदि इस दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बन जाए तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद सूर्य देव को हल्दी मिले जल से अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।
    पूजा के दौरान भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की प्रतिमा या तस्वीर को साफ स्थान पर स्थापित करें। पूजा में पीले फूल, हल्दी, चने की दाल, केला, बेसन की मिठाई और तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना गया है। केले के पेड़ की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है, क्योंकि उसमें भगवान विष्णु का वास माना जाता है। पूजा के समय “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जाप करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
    गुरुवार व्रत में नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए और केवल एक समय भोजन करना शुभ माना जाता है। तामसिक भोजन, झूठ, क्रोध और अपशब्दों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरुवार को बाल, नाखून काटना और कपड़े धोना भी वर्जित माना गया है।
    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह व्रत विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने में मदद करता है। जिन लोगों की शादी में देरी हो रही हो या रिश्तों में समस्याएं आ रही हों, उन्हें नियमित रूप से गुरुवार का व्रत रखने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा आर्थिक तंगी, करियर में असफलता और मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए भी यह व्रत लाभकारी माना गया है।
    गुरुवार के दिन पीली वस्तुओं का दान विशेष फलदायी माना गया है। चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, केसर और बेसन से बनी मिठाइयों का दान करने से गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति, धन और समृद्धि का वास होता है।
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया गुरुवार का व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है, निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
  • एकादशी व्रत के नियम क्या हैं? जानिए सही पूजा विधि और धार्मिक महत्व

    एकादशी व्रत के नियम क्या हैं? जानिए सही पूजा विधि और धार्मिक महत्व


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एक-एक एकादशी आती है, यानी सालभर में कुल 24 एकादशी व्रत रखे जाते हैं। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
    किसकी पूजा होती है?
    एकादशी के दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों की आराधना का विशेष महत्व माना गया है। कई भक्त भगवान कृष्ण की पूजा भी करते हैं, क्योंकि उन्हें विष्णु का अवतार माना जाता है। भगवान विष्णु का यह मंत्र अत्यंत शुभ माना जाता है:
    ॐ नमो भगवते वासुदेवायmathrm{ॐ नमो भगवते वासुदेवाय}ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
    एकादशी व्रत के निय
    व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए।
    घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
    इस दिन सात्विक भोजन करें और कई लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं।
    लहसुन, प्याज, चावल और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
    क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
    भगवान विष्णु के मंत्रों और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है।
    जरूरतमंदों को दान करना पुण्यदायी माना गया है।

    एकादशी व्रत की पूजा विधि
    एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करें।
    पूजा के दौरान विष्णु चालीसा या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और मंत्र जाप करें। तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। अंत में भगवान की आरती करें और परिवार में प्रसाद बांटें।

    एकादशी व्रत का महत्व
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत मन और शरीर को शुद्ध करने वाला माना जाता है। यह व्रत आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है। कहा जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया एकादशी व्रत व्यक्ति को मोक्ष और पुण्य फल प्रदान करता है।

  • अपरा एकादशी व्रत का महत्व क्या है? जानिए पूजा के नियम और सही तिथि

    अपरा एकादशी व्रत का महत्व क्या है? जानिए पूजा के नियम और सही तिथि


    नई दिल्ली ।  हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है। इसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
    अपरा एकादशी 2026 की सही तिथि
    वर्ष 2026 में अपरा एकादशी का व्रत 13 मई, बुधवार को रखा जाएगा। उदया तिथि के अनुसार इसी दिन व्रत और पूजा करना शुभ माना गया है। बुधवार को पड़ने के कारण इस बार इस व्रत का महत्व और भी अधिक माना जा रहा है।
    अपरा एकादशी का धार्मिक महत्व
    धार्मिक ग्रंथों में अपरा एकादशी को अत्यंत फलदायी व्रत माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत सुख, शांति, धन, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ और तीर्थ स्नान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। जो लोग आर्थिक परेशानियों, मानसिक तनाव या जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष लाभकारी माना गया है।

    पूजा के नियम

    अपरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और मिठाई अर्पित करें।
    पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से यह मंत्र अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है:
    ॐ नमो भगवते वासुदेवायmathrm{ॐ नमो भगवते वासुदेवाय}ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
    इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और लहसुन, प्याज, चावल तथा तामसिक भोजन से दूरी बनानी चाहिए। कई श्रद्धालु निर्जला व्रत भी रखते हैं। जरूरतमंदों को दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
    इन बातों का रखें ध्यान
    क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
    भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा श्रद्धा से करें
    तुलसी पूजा जरूर करें
    अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करें

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया अपरा एकादशी व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि लेकर आता है।