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  • 17 मई से शुरू अधिक मास: 27 साल बाद खास संयोग, जानें क्या करें और क्या बिल्कुल न करें

    17 मई से शुरू अधिक मास: 27 साल बाद खास संयोग, जानें क्या करें और क्या बिल्कुल न करें

    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार 17 मई से अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की शुरुआत हो रही है, जो 15 जून तक चलेगा। इस बार खास बात यह है कि यह ज्येष्ठ मास में लग रहा है, जिससे पूरा महीना 60 दिनों का हो गया है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान विष्णु को समर्पित इस मास को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, लेकिन इसमें शुभ मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है।

    क्या करें
    अधिक मास को भक्ति और साधना का महीना कहा गया है। इस दौरान

    भगवान विष्णु की रोज पूजा-अर्चना करें

    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें

    विष्णु सहस्त्रनाम, गीता या श्रीमद्भागवत का पाठ करें

    जरूरतमंदों को वस्त्र, फल, जल और अन्न का दान करें

    पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही शुद्ध जल से स्नान कर पुण्य अर्जित करें

    माना जाता है कि इस महीने किए गए जप-तप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।

    क्या न करें 
    इस पूरे मास में कुछ कामों से बचना जरूरी माना गया है

    शादी-विवाह, गृह प्रवेश, सगाई जैसे शुभ कार्य न करें

    नया बिजनेस या बड़ा काम शुरू करने से बचें

    तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज) से दूरी रखें

    झूठ बोलने और किसी का अपमान करने से बचें

    अधिक मास क्यों लगता है?
    हिंदू पंचांग चंद्र गणना पर आधारित है, जो सौर वर्ष से करीब 11 दिन छोटा होता है। यह अंतर हर साल बढ़ता जाता है और करीब 32 महीने बाद एक अतिरिक्त महीना जोड़ना पड़ता है इसी को अधिक मास कहा जाता है। कुल मिलाकर, अधिक मास को आत्मशुद्धि, भक्ति और दान-पुण्य का विशेष समय माना जाता है, जहां सांसारिक कार्यों की बजाय आध्यात्मिक साधना को महत्व दिया जाता है।

  • फाल्गुन पूर्णिमा 2026: इस विधि से रखें व्रत, बरसेगी विष्णु लक्ष्मी की असीम कृपा

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026: इस विधि से रखें व्रत, बरसेगी विष्णु लक्ष्मी की असीम कृपा


    नई दिल्ली । फाल्गुन मास की पूर्णिमा सनातन परंपरा में अत्यंत पावन मानी गई है। इसे वसंत पूर्णिमा और होली पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह हिंदू वर्ष की अंतिम पूर्णिमा होती है और इस दिन भगवान Vishnu माता Lakshmi भगवान Narasimha तथा Radha Krishna की पूजा का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से व्रत और पूजा करने से सुख समृद्धि सौभाग्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026 का शुभ मुहूर्त

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को शाम 5:07 बजे तक रहेगी। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक लगने के कारण पूजा में बाधा रहेगी इसलिए 2 मार्च 2026 को व्रत रखना अधिक शुभ माना गया है।

    फाल्गुन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

    पूर्णिमा व्रत को अत्यंत फलदायी बताया गया है। इस दिन स्नान दान जप और पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे धन धान्य में वृद्धि होती है और कुंडली में चंद्र दोष होने पर मानसिक शांति मिलती है। व्रत करने वालों को अगले दिन स्नान दान अवश्य करना चाहिए तभी व्रत पूर्ण फलदायी माना जाता है।
    फाल्गुन पूर्णिमा व्रत विधि
    प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें। सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें। घर में स्वच्छ स्थान पर लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। तिलक पुष्प और वस्त्र अर्पित करें।  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। भोग लगाकर पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल में कच्चा दूध मिलाकर अर्घ्य दें। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें। अगले दिन दान पुण्य अवश्य करें।

    विशेष मंत्र और महाउपाय

    फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 बार जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही जरूरतमंदों को अन्न वस्त्र या धन का दान करने से लक्ष्मी कृपा स्थायी होती है।यह दिन भक्ति श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। विधि विधान से श्री लक्ष्मीनारायण की आराधना करने पर जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

  • रंगभरी एकादशी 2026 : 27 या 28 फरवरी? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण समय

    रंगभरी एकादशी 2026 : 27 या 28 फरवरी? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण समय


    नई दिल्ली । 2026 में रंगभरी एकादशी जिसे अमलकी एकादशी भी कहा जाता है का व्रत फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मनाया जाएगा। यह पवित्र व्रत होली के उत्सव से कुछ दिनों पहले आता है और विशेष रूप से भगवान विष्णु साथ ही भगवान शिव पार्वती के पूजन के लिए प्रसिद्ध है।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव माता पार्वती के साथ काशी वाराणसी आए थे जहां नगरवासियों ने उनका रंगों और गुलाल से स्वागत किया था। तब से इस दिवस को रंगभरी एकादशी के रूप में मनाया जाता है और काशी में होली उत्सव की शुभ शुरुआत भी इसी दिन मानी जाती है।

    रंगभरी एकादशी 2026 की तिथि  वेदिक पंचांग के अनुसार:

    फाल्गुन शुक्ल एकादशी तिथि 27 फरवरी 2026 की रात 12:33 बजे से प्रारंभ होकर 10:32 बजे तक रहेगी।  उदय तिथि के नियम के अनुसार सुबह के समय पर यह तिथि मौजूद रहने के कारण 27 फरवरी शुक्रवार को ही रंगभरी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

    रंगभरी एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त

    पूजा और उपवास के दौरान शुभ मुहूर्त निम्नलिखित हैं: ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:09 बजे से सुबह 05:59 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 बजे से 12:57 बजे तक  विजय मुहूर्त: दोपहर 02:29 बजे से 03:15 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग: लगभग सुबह 10:48 बजे से रात तक शुभ रहता है

    व्रत पारण कब करें?

    रंगभरी एकादशी का व्रत पारण 28 फरवरी 2026 को सुबह 06:47 बजे से 09:06 बजे के बीच किया जा सकता है जो पारण के लिए विशेष शुभ समय माना जाता है।  इस दिन व्रत में निर्जला उपवास या फलाहारी व्रत रखा जा सकता है जैसा श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार करते हैं।

    पूजा का महत्व और विधि

    रंगभरी एकादशी के दिन श्रद्धालु स्नान के बाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन होकर पूजा करते हैं। मुख्य पूजन में आमलकी आंवला का फल दान निवेद्य के रूप में चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ तुलसी दीप धूप और नारियल का भी प्रयोग किया जाता है।  धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से जीवन में शांति सौहार्द सुख समृद्धि और भक्ति भाव की प्राप्ति होती है। साथ ही इस व्रत से भगवान विष्णु के आशीर्वाद से मानसिक उन्नति भी होती है।

    धार्मिक एवं सांस्कृतिक संदर्भ

    वाराणसी में रंगभरी एकादशी को होली का शुभ शुभारंभ माना जाता है। मंदिरों एवं घाटों पर भक्त रंग गुलाल के साथ पूजा करते हैं और काशी में होली खेल के प्रचलन की शुरुआत इसी दिन से होती है।