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  • बाजार की अस्थिरता से घबराने की जरूरत नहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा समय बेहतर अवसर: रमेश दमानी

    बाजार की अस्थिरता से घबराने की जरूरत नहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा समय बेहतर अवसर: रमेश दमानी

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच दिग्गज निवेशक रमेश दमानी ने लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य बनाए रखने और बाजार की अल्पकालिक अस्थिरता से प्रभावित न होने की सलाह दी है। उनका मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में बाजार की दैनिक हलचल पर ध्यान देने के बजाय मजबूत कंपनियों में लंबे समय तक निवेश बनाए रखना बेहतर रणनीति साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत हैं और यही निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत है।

    एक कार्यक्रम के दौरान अपने विचार रखते हुए रमेश दमानी ने कहा कि शेयर बाजार स्वभाव से अस्थिर होता है और समय-समय पर इसमें तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। ऐसे दौर में कई निवेशक घबराकर जल्दबाजी में फैसले लेते हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जो निवेशक अनुशासन बनाए रखते हैं और बाजार की अल्पकालिक चाल के बजाय लंबी अवधि के लक्ष्य पर ध्यान देते हैं, उनके लिए संपत्ति निर्माण की संभावनाएं अधिक मजबूत होती हैं।

    उन्होंने कहा कि निवेश के क्षेत्र में धैर्य सबसे महत्वपूर्ण गुणों में से एक है। यदि किसी निवेशक ने मजबूत आधार वाली कंपनियों का चयन किया है, तो उसे बाजार में आने वाली अस्थायी गिरावट से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, समय के साथ गुणवत्तापूर्ण कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करती हैं और निवेशकों को अच्छे प्रतिफल का अवसर देती हैं।

    रमेश दमानी ने भारत की आर्थिक स्थिति पर भी विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि देश की युवा आबादी, बढ़ती खपत, तेज़ी से विकसित होता औद्योगिक ढांचा और सुधारों पर आधारित आर्थिक नीतियां भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत को लगभग आठ प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए रखने के लिए लगातार विदेशी निवेश की आवश्यकता होगी। विदेशी पूंजी से उद्योगों का विस्तार, रोजगार के नए अवसर और आधुनिक तकनीकों का विकास संभव होता है। उनके अनुसार, यदि भारत अपनी विकास गति को बनाए रखना चाहता है, तो विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की निरंतर उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    आधुनिक तकनीकों पर चर्चा करते हुए रमेश दमानी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ऐसे कई उद्योग और व्यवसाय हैं, जिन पर एआई का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा और भविष्य में वही क्षेत्र निवेशकों के लिए नए अवसर लेकर आ सकते हैं। उनका कहना था कि निवेशकों को केवल चर्चित क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय व्यापक दृष्टिकोण अपनाकर संभावनाओं का आकलन करना चाहिए।

    उन्होंने विदेशी निवेश के रुझानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में निवेश लगातार बढ़ रहा है। इससे देश के तकनीकी और औद्योगिक विकास को गति मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक निवेशकों का भरोसा भारत की आर्थिक क्षमता और भविष्य की विकास संभावनाओं को दर्शाता है।

    वैश्विक बाजारों पर टिप्पणी करते हुए रमेश दमानी ने कहा कि अमेरिकी शेयर बाजार अपने उच्च स्तर के करीब दिखाई देता है, जबकि कुछ औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों में चीन अब भी मजबूत स्थिति में है। इसके बावजूद उनका मानना है कि भारत के पास विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने निवेशकों से अपील की कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं, क्योंकि अनुशासित निवेश और धैर्य ही समय के साथ बेहतर संपत्ति निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम साबित होता है।

  • पश्चिम एशिया संकट से शेयर बाजार पर दबाव, लगातार पांचवें दिन टूटा सेंसेक्स-निफ्टी, निवेशकों की चिंता बढ़ी

    पश्चिम एशिया संकट से शेयर बाजार पर दबाव, लगातार पांचवें दिन टूटा सेंसेक्स-निफ्टी, निवेशकों की चिंता बढ़ी


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू बाजार लगातार पांचवें सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। निवेशकों के बीच बढ़ती सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार समाप्त करने पर मजबूर रहे। लगातार पांच दिनों की गिरावट ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है और निवेशकों की चिंता भी बढ़ा दी है।

    कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 331.62 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,059.77 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 102 अंक यानी 0.43 प्रतिशत टूटकर 23,767.45 अंक पर आ गया। कारोबार की शुरुआत से ही बाजार दबाव में रहा और दिन के दौरान दोनों प्रमुख सूचकांक अपने निचले स्तर तक फिसल गए। हालांकि अंतिम घंटे में कुछ खरीदारी देखने को मिली, लेकिन इससे शुरुआती नुकसान की पूरी भरपाई नहीं हो सकी।

    व्यापक बाजार में भी कमजोरी का माहौल बना रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि बिकवाली केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों में नई खरीदारी से दूरी बनाए रखी और सुरक्षित निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दी।

    सेक्टरवार प्रदर्शन मिश्रित रहा। सूचना प्रौद्योगिकी, मीडिया, बैंकिंग और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से जुड़े शेयरों में सीमित मजबूती देखने को मिली, जबकि ऑटो, धातु, ऊर्जा, रियल्टी, ऑयल एंड गैस, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के शेयरों पर दबाव बना रहा। ऑटो सेक्टर में सबसे अधिक कमजोरी दर्ज की गई, जबकि आईटी कंपनियों ने बाजार को कुछ हद तक सहारा देने का प्रयास किया।

    विश्लेषकों का मानना है कि बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रहा। ब्रेंट क्रूड का दाम लगातार छठे कारोबारी सत्र में बढ़ते हुए 101 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। जुलाई महीने में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने उन देशों की चिंता बढ़ा दी है जो ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भर हैं। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई, आयात बिल और कॉरपोरेट लागत बढ़ाने का कारण बन सकता है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार की धारणा पर पड़ता है।

    साप्ताहिक आधार पर भी बाजार का प्रदर्शन कमजोर रहा। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स करीब 2,100 अंक नीचे आया, जबकि निफ्टी में भी दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। लगातार बिकवाली यह संकेत देती है कि वैश्विक घटनाक्रमों के बीच निवेशक फिलहाल सतर्क रणनीति अपना रहे हैं और नए निवेश से पहले स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 23,650 से 23,600 अंक का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जाएगा। यदि यह स्तर टूटता है तो गिरावट और गहरी हो सकती है। वहीं 23,950 से 24,000 अंक का दायरा निकटतम प्रतिरोध रहेगा। यदि बाजार इस स्तर को पार करने में सफल होता है तो निवेशकों का भरोसा लौट सकता है और सीमित अवधि के लिए राहत भरी तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां ही बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

  • शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 600 अंक लुढ़का तो निफ्टी 24,000 के करीब पहुंचा, वैश्विक संकेतों से बढ़ी निवेशकों की चिंता

    शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 600 अंक लुढ़का तो निफ्टी 24,000 के करीब पहुंचा, वैश्विक संकेतों से बढ़ी निवेशकों की चिंता

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही और शुरुआती सत्र में प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 600 अंक तक फिसल गया, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों के करीब पहुंचकर कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया।

    बाजार खुलते ही निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी भी करीब 24 हजार के स्तर के आसपास फिसल गया। लगातार दूसरे दिन आई इस कमजोरी ने बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

    विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस स्थिति का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जो ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई, व्यापार घाटे और कॉरपोरेट लागत पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। यही कारण है कि निवेशकों का रुझान फिलहाल सतर्क बना हुआ है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार की कमजोरी का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तब विदेशी निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसके परिणामस्वरूप उभरते बाजारों से पूंजी निकासी बढ़ सकती है, जिसका प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिलता है। रुपये में कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंताओं को बढ़ाया है।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो शुरुआती कारोबार में एविएशन और फार्मा क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों पर दबाव दिखाई दिया। इसके अलावा विभिन्न सेक्टरों में मुनाफावसूली के कारण भी बिकवाली का माहौल बना रहा। हालांकि कुछ चुनिंदा शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली, लेकिन उसका असर बाजार की समग्र दिशा बदलने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।

    वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी मिश्रित रहे। एशियाई बाजारों में कुछ प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त दर्ज की, जबकि कुछ अन्य बाजारों में कमजोरी बनी रही। निवेशक लगातार अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, ऊर्जा बाजार और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इनका असर आने वाले दिनों में भी बाजार की चाल तय कर सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, रुपये की चाल और आगामी आर्थिक आंकड़े भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करेंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने और संतुलित निवेश रणनीति पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

    फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर घरेलू आर्थिक संकेतकों के साथ-साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी टिकी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन कारकों के आधार पर बाजार की दिशा तय होने की संभावना है।

  • वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय बाजार पर असर, सेंसेक्स 443 अंक टूटा, निफ्टी भी गिरावट के साथ बंद, बैंकिंग शेयर रहे सबसे कमजोर

    वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय बाजार पर असर, सेंसेक्स 443 अंक टूटा, निफ्टी भी गिरावट के साथ बंद, बैंकिंग शेयर रहे सबसे कमजोर


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक स्तर पर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 442.93 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,708.52 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 95.80 अंक यानी 0.39 प्रतिशत फिसलकर 24,238.50 अंक पर आ गया। इसके साथ ही सेंसेक्स एक बार फिर 78 हजार के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव वित्तीय और निजी बैंकिंग शेयरों पर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक में 2.27 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो, सूचना प्रौद्योगिकी, रियल्टी और सर्विसेज क्षेत्र के अधिकांश शेयर भी कमजोर रहे। निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच इन क्षेत्रों में मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे बाजार की चाल प्रभावित हुई।

    हालांकि व्यापक बाजार में तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं रही। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, फार्मा, हेल्थकेयर, ऊर्जा, धातु, मीडिया, कमोडिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि बनी रहने से गिरावट का दायरा कुछ हद तक सीमित रहा और बाजार को आंशिक सहारा मिला।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में ट्रेंट, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, भारती एयरटेल, भारतीय स्टेट बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, एचसीएल टेक, सन फार्मा, आईटीसी, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, टाटा स्टील, एशियन पेंट्स और बजाज फिनसर्व के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। दूसरी ओर एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, इन्फोसिस, टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, बीईएल और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।

    लार्जकैप शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 373.70 अंकों की बढ़त के साथ 62,801.75 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक भी 30.15 अंकों की मजबूती के साथ 19,326.45 के स्तर पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि चुनिंदा क्षेत्रों और मध्यम आकार की कंपनियों में निवेशकों की खरीदारी जारी रही।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बना हुआ है। इस तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। ऊंचे कच्चे तेल के दाम आयात लागत, महंगाई और कॉर्पोरेट मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकते हैं, जिससे निवेशकों का रुझान फिलहाल सतर्क बना हुआ है।

    विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि में निफ्टी के लिए 24,370 से 24,400 अंक का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस दायरे के ऊपर टिकता है तो आगे तेजी की संभावना बन सकती है। वहीं नीचे की ओर 24,130 से 24,100 अंक का क्षेत्र प्रमुख समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • अमेरिका-ईरान तनाव से डगमगाया निवेशकों का भरोसा, तेल कीमतों में उछाल के बीच गिरावट के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी

    अमेरिका-ईरान तनाव से डगमगाया निवेशकों का भरोसा, तेल कीमतों में उछाल के बीच गिरावट के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण घरेलू निवेशकों का रुख सतर्क नजर आया। कारोबार की शुरुआत में ही प्रमुख शेयर सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला और बाजार गिरावट के साथ खुला।

    विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पैदा हुई आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा प्रभाव उन देशों पर पड़ता है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। भारत भी दुनिया के प्रमुख तेल आयातक देशों में शामिल है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में होने वाली हर बड़ी हलचल का असर घरेलू वित्तीय बाजारों पर दिखाई देता है।

    बाजार में शुरुआती कमजोरी के पीछे वैश्विक संकेत भी एक प्रमुख कारण रहे। विदेशी बाजारों में निवेशकों ने बढ़ते तनाव और महंगाई से जुड़ी चिंताओं के बीच जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनाई। इसका प्रभाव एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी पड़ा। निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे इक्विटी बाजारों में दबाव बढ़ गया।

    तेल कीमतों में तेजी ने बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया। ऊर्जा लागत बढ़ने से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर कंपनियों की लागत और उपभोक्ता खर्च दोनों पर पड़ता है। यही वजह है कि तेल कीमतों में उछाल को निवेशक अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट आय के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम के रूप में देखते हैं।

    सेक्टोरल प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऊर्जा और तेल उत्पादन से जुड़ी कंपनियों में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई दी। बढ़ती तेल कीमतों से इन कंपनियों को संभावित लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। दूसरी ओर सूचना प्रौद्योगिकी और कुछ उपभोक्ता आधारित क्षेत्रों के शेयरों में दबाव देखा गया। निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों का भी आकलन कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार की मौजूदा कमजोरी मुख्य रूप से अनिश्चितता से प्रेरित है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। वहीं यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं और हालात सामान्य होते हैं तो बाजारों में स्थिरता लौटने की संभावना भी बनी रहेगी।

    भारत जैसे तेजी से बढ़ते आर्थिक ढांचे के लिए ऊर्जा लागत एक महत्वपूर्ण कारक है। तेल कीमतों में लंबे समय तक बढ़ोतरी रहने से आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि निवेशक केवल शेयर बाजार के आंकड़ों पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

    फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों, तेल कीमतों की चाल और निवेशकों के जोखिम लेने के रुझान पर निर्भर करेगी। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतक बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बिकवाली से शेयर बाजार दबाव में, खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के

    कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बिकवाली से शेयर बाजार दबाव में, खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के

    नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में कमजोर शुरुआत देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं, वेस्ट एशिया में गहराते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया। सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आ गए और शुरुआती सत्र में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। वेस्ट एशिया में जारी तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसके चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए तेल कीमतों में वृद्धि आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसका असर महंगाई, व्यापार घाटे और कॉर्पोरेट लागत पर पड़ सकता है।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह सैकड़ों अंकों की कमजोरी के साथ नीचे फिसल गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी भी शुरुआती सत्र में दबाव में दिखाई दिया। बाजार में व्यापक बिकवाली के चलते निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और कई प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में ऑटोमोबाइल, आईटी, एविएशन और वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। निवेशकों की बिकवाली के कारण इन क्षेत्रों में कमजोरी दर्ज की गई। दूसरी ओर कुछ चुनिंदा बैंकिंग और फार्मा शेयरों ने बाजार को सीमित समर्थन देने का प्रयास किया, लेकिन व्यापक गिरावट के सामने यह समर्थन पर्याप्त नहीं रहा।

    भारतीय बाजार पर वैश्विक संकेतों का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी का माहौल बना रहा। जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और हांगकांग के बाजार गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

    अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान आई कमजोरी का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ा। वैश्विक निवेशक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं। यही कारण है कि दुनिया भर के बाजारों में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी पूंजी का सुरक्षित बाजारों की ओर जाना उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ा सकता है।

    आर्थिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक वेस्ट एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव में कमी आती है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन फिलहाल निवेशकों को सतर्कता बरतने और दीर्घकालिक दृष्टिकोण बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

    भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कुछ समय में मजबूत प्रदर्शन किया है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां निवेशकों के लिए नई चुनौतियां लेकर आई हैं। ऐसे में बाजार प्रतिभागियों की नजर अब अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई है, जो आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद फिसला शेयर बाजार, प्रमुख सूचकांक कमजोरी के साथ बंद, कई दिग्गज शेयर टूटे

    दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद फिसला शेयर बाजार, प्रमुख सूचकांक कमजोरी के साथ बंद, कई दिग्गज शेयर टूटे

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के बाद कमजोरी के साथ कारोबार समाप्त किया। शुरुआती घंटों में सकारात्मक रुख के बावजूद दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव बढ़ता गया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बाजार पर सबसे अधिक दबाव मेटल और आईटी सेक्टर के शेयरों से आया, जबकि कुछ रक्षात्मक क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।

    कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंकों की गिरावट के साथ 74,243.34 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 49.85 अंक फिसलकर 23,366.70 पर आ गया। बाजार की शुरुआत हालांकि उत्साहजनक रही थी और दोनों प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त के साथ कारोबार शुरू किया था, लेकिन बाद में निवेशकों की मुनाफावसूली और चुनिंदा सेक्टरों में बिकवाली ने बाजार की दिशा बदल दी।

    दिनभर के कारोबार में मेटल और आईटी कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। वैश्विक संकेतों और सेक्टर आधारित बिकवाली के कारण इन क्षेत्रों में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। निफ्टी मेटल और निफ्टी आईटी सूचकांकों में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। इसके अलावा कमोडिटी, ऑयल एंड गैस, सार्वजनिक उपक्रमों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों में भी दबाव बना रहा।

    इसके विपरीत कुछ सेक्टरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। मीडिया, रियल्टी, हेल्थकेयर, पीएसयू बैंक, फार्मा, प्राइवेट बैंक, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इन क्षेत्रों में खरीदारी ने बाजार को अधिक गिरावट से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निवेशकों का रुझान इस बात का संकेत देता है कि वे फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में एचयूएल, एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, सन फार्मा, एलएंडटी और आईटीसी जैसे शेयरों ने मजबूती दिखाई। दूसरी ओर ट्रेंट, टीसीएस, टाटा स्टील, एनटीपीसी, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशक किसी मजबूत दिशा का इंतजार कर रहे हैं। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 23,200 के आसपास महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र मौजूद है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। वहीं ऊपर की ओर 23,550 का स्तर महत्वपूर्ण बाधा माना जा रहा है। इस स्तर को पार करने पर बाजार में नई तेजी की संभावना बन सकती है।

    विश्लेषकों के अनुसार घरेलू और वैश्विक आर्थिक संकेतकों, ब्याज दरों से जुड़े निर्णयों तथा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक हर नए आर्थिक संकेत पर करीबी नजर रखे हुए हैं।

    शुक्रवार का कारोबार यह संकेत देता है कि निवेशकों का विश्वास पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है, लेकिन वे जोखिम लेने से पहले स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में प्रमुख समर्थन और प्रतिरोध स्तरों पर बाजार की चाल निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाली है।

  • डॉलर में कमजोरी और पश्चिम एशिया तनाव से चमकी कीमती धातुएं, सोना रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा, चांदी में भी उछाल हेडलाइन विकल्प 2:

    डॉलर में कमजोरी और पश्चिम एशिया तनाव से चमकी कीमती धातुएं, सोना रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा, चांदी में भी उछाल हेडलाइन विकल्प 2:

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच गुरुवार को घरेलू कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती देखने को मिली। डॉलर में आई कमजोरी और सुरक्षित निवेश विकल्पों की बढ़ती मांग ने कीमती धातुओं को समर्थन प्रदान किया। निवेशकों ने जोखिम वाले परिसंपत्तियों से दूरी बनाते हुए सोने और चांदी की ओर रुख किया, जिसके चलते दोनों धातुओं के वायदा भाव में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के अगस्त वायदा अनुबंध में कारोबार के दौरान अच्छी तेजी देखी गई। शुरुआती सत्र से ही पीली धातु मजबूत रुख के साथ कारोबार करती रही और दिन के दौरान ऊंचे स्तर तक पहुंच गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता और डॉलर की कमजोरी ने सोने को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जब भी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक आमतौर पर सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में प्राथमिकता देते हैं।

    चांदी की कीमतों में भी दिनभर उतार-चढ़ाव के बीच मजबूती बनी रही। कारोबार के शुरुआती चरण में चांदी ने ऊंचे स्तर को छुआ, हालांकि बाद में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली। इसके बावजूद कुल मिलाकर चांदी के भाव सकारात्मक दायरे में बने रहे। बाजार विश्लेषकों के अनुसार औद्योगिक मांग और सुरक्षित निवेश दोनों कारणों से चांदी को भी समर्थन मिल रहा है।

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। हालिया सैन्य गतिविधियों और अमेरिका तथा ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी संभावित संघर्ष या अस्थिरता का सीधा प्रभाव कमोडिटी बाजारों पर पड़ता है, विशेषकर सोने जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों पर। यही कारण है कि हाल के दिनों में कीमती धातुओं में निवेश बढ़ा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक समाधान से जुड़ी खबरों पर भी नजर बनाए हुए है। यदि तनाव कम करने की दिशा में कोई सकारात्मक प्रगति होती है तो सोने और चांदी की कीमतों में कुछ दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं यदि अनिश्चितता बनी रहती है तो सुरक्षित निवेश की मांग और बढ़ सकती है।

    इस बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। तेल बाजार में नरमी से वैश्विक मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी निवेशकों की प्राथमिक चिंता बने हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में डॉलर की चाल, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और पश्चिम एशिया की स्थिति सोने-चांदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    विश्लेषकों के अनुसार, तकनीकी दृष्टि से भी सोना और चांदी महत्वपूर्ण स्तरों के आसपास कारोबार कर रहे हैं। यदि ये धातुएं अपने प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार कर स्थिर होती हैं तो आगे और तेजी की संभावना बन सकती है। हालांकि निवेशकों को वर्तमान अस्थिर माहौल में सावधानी बरतने और वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • पश्चिम एशिया संकट पर राहत के संकेत, कच्चा तेल 1 प्रतिशत से अधिक फिसला; वैश्विक बाजारों में फिर भी बनी रही अनिश्चितता

    पश्चिम एशिया संकट पर राहत के संकेत, कच्चा तेल 1 प्रतिशत से अधिक फिसला; वैश्विक बाजारों में फिर भी बनी रही अनिश्चितता

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की संभावनाओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को राहत दी है। इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम लागू करने पर सहमति बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच यह घटनाक्रम निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आया है और इससे व्यापक कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट दोनों प्रमुख तेल बेंचमार्क में गिरावट देखी गई। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और संभावित आपूर्ति बाधाओं की आशंका के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। हालांकि युद्धविराम की दिशा में बढ़ते कदमों ने बाजार की चिंताओं को कुछ हद तक कम कर दिया है, जिससे कीमतों पर दबाव देखने को मिला।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार तेल की कीमतें केवल मांग और आपूर्ति के आधार पर नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से भी गहराई से प्रभावित होती हैं। पश्चिम एशिया विश्व ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष या अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजारों में तुरंत असर डालती है। हालिया गिरावट इसी धारणा को दर्शाती है कि निवेशक अब स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान की संभावना को महत्व दे रहे हैं।

    इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक संपर्कों पर भी वैश्विक बाजारों की नजर बनी हुई है। अमेरिकी नेतृत्व की ओर से बातचीत में प्रगति के संकेत दिए गए हैं, जबकि ईरान की तरफ से भी संवाद पूरी तरह समाप्त न होने की बात कही गई है। हालांकि दोनों पक्षों ने अभी तक किसी ठोस समझौते की पुष्टि नहीं की है, लेकिन बातचीत जारी रहने को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    इसके विपरीत खाड़ी क्षेत्र में कुछ घटनाओं ने अनिश्चितता को पूरी तरह समाप्त नहीं होने दिया है। हालिया सैन्य गतिविधियों और हमलों के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव फिर से बढ़ता है तो तेल बाजार में उतार-चढ़ाव दोबारा तेज हो सकता है। इसलिए निवेशक फिलहाल हर कूटनीतिक और सैन्य घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

    तेल बाजार की नरमी का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी देखने को मिला। एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजार दबाव में रहे और निवेशकों ने जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनाए रखी। जापान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे वैश्विक निवेश भावना पर असर पड़ा।

    घरेलू बाजार भी इस वैश्विक माहौल से अछूते नहीं रहे। भारतीय शेयर बाजारों में कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। निवेशकों का ध्यान अब पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक कूटनीतिक प्रयासों और ऊर्जा बाजार की आगामी दिशा पर केंद्रित है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्धविराम स्थायी रूप लेता है और क्षेत्रीय तनाव में और कमी आती है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता देखने को मिल सकती है। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में बाजार अभी भी सतर्क है और किसी भी नए घटनाक्रम का प्रभाव तेल तथा वैश्विक वित्तीय बाजारों पर तुरंत दिखाई दे सकता है।

  • वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

    वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में दिखाई दिए। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से 400 अंकों से अधिक टूटकर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी में भी शुरुआती कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि शुरुआती झटके के बाद बाजार ने कुछ रिकवरी दिखाई, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में ही कारोबार करते रहे। सुबह के सत्र में सेंसेक्स करीब 227 अंक और निफ्टी लगभग 80 अंक की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी, रियल्टी, मेटल और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर दिखाई दिया। प्रमुख आईटी कंपनियों और निजी बैंकों में बिकवाली का माहौल रहा, जबकि कुछ चुनिंदा उपभोक्ता वस्तु, तेल एवं गैस तथा एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सीमित बढ़त दर्ज होने से यह संकेत मिला कि व्यापक बाजार में निवेशकों की रुचि पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

    विश्लेषकों के अनुसार, बाजार की मौजूदा कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली भी भारतीय बाजार पर दबाव बना रही है। विदेशी निवेशक हाल के सत्रों में भारतीय इक्विटी बाजार से पूंजी निकालते दिखाई दिए हैं, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है।

    घरेलू स्तर पर निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों पर टिकी हुई है। शुक्रवार को आने वाले फैसले से ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों को लेकर नई दिशा मिल सकती है। ऐसे में बड़े निवेशक फिलहाल आक्रामक दांव लगाने से बचते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और वैश्विक स्तर पर स्थिरता के संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विदेशी निवेशकों की डेरिवेटिव बाजार में बढ़ती शॉर्ट पोजिशन भी निकट भविष्य में कमजोरी की आशंका को मजबूत करती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार की धारणा तेजी से बदल सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा अस्थिरता के दौर में अल्पकालिक ट्रेडिंग जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश के अवसर भी प्रदान कर सकता है। बैंकिंग, फार्मा, ऑटो और ऑटो एंसिलरी सेक्टर के कई मजबूत शेयर हालिया गिरावट के कारण आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं, जो भविष्य में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।