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  • वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

    वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में दिखाई दिए। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से 400 अंकों से अधिक टूटकर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी में भी शुरुआती कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि शुरुआती झटके के बाद बाजार ने कुछ रिकवरी दिखाई, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में ही कारोबार करते रहे। सुबह के सत्र में सेंसेक्स करीब 227 अंक और निफ्टी लगभग 80 अंक की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी, रियल्टी, मेटल और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर दिखाई दिया। प्रमुख आईटी कंपनियों और निजी बैंकों में बिकवाली का माहौल रहा, जबकि कुछ चुनिंदा उपभोक्ता वस्तु, तेल एवं गैस तथा एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सीमित बढ़त दर्ज होने से यह संकेत मिला कि व्यापक बाजार में निवेशकों की रुचि पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

    विश्लेषकों के अनुसार, बाजार की मौजूदा कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली भी भारतीय बाजार पर दबाव बना रही है। विदेशी निवेशक हाल के सत्रों में भारतीय इक्विटी बाजार से पूंजी निकालते दिखाई दिए हैं, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है।

    घरेलू स्तर पर निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों पर टिकी हुई है। शुक्रवार को आने वाले फैसले से ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों को लेकर नई दिशा मिल सकती है। ऐसे में बड़े निवेशक फिलहाल आक्रामक दांव लगाने से बचते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और वैश्विक स्तर पर स्थिरता के संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विदेशी निवेशकों की डेरिवेटिव बाजार में बढ़ती शॉर्ट पोजिशन भी निकट भविष्य में कमजोरी की आशंका को मजबूत करती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार की धारणा तेजी से बदल सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा अस्थिरता के दौर में अल्पकालिक ट्रेडिंग जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश के अवसर भी प्रदान कर सकता है। बैंकिंग, फार्मा, ऑटो और ऑटो एंसिलरी सेक्टर के कई मजबूत शेयर हालिया गिरावट के कारण आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं, जो भविष्य में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।

  • वैश्विक हलचल और घरेलू आंकड़ों के बीच निवेशकों की परीक्षा, बाजार में बढ़ सकती है हलचल

    वैश्विक हलचल और घरेलू आंकड़ों के बीच निवेशकों की परीक्षा, बाजार में बढ़ सकती है हलचल


    नई दिल्ली : भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह कई अहम संकेत लेकर आ रहा है, जहां विभिन्न घरेलू और वैश्विक कारकों का मिला-जुला असर देखने को मिल सकता है। हाल के सत्रों में बाजार ने सीमित दायरे में मजबूती दिखाई है, लेकिन आगे की राह अनिश्चितताओं से भरी हुई नजर आ रही है। निवेशकों की नजर अब उन प्रमुख पहलुओं पर टिकी है, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

    सबसे बड़ा प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों का बना हुआ है, जो लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। वैश्विक तनाव और आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं के चलते तेल महंगा बना हुआ है, जिसका असर सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई को बढ़ावा देती हैं और कंपनियों के खर्च में इजाफा करती हैं, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव बन सकता है। इसका असर बाजार के समग्र रुझान पर पड़ना तय माना जा रहा है।

    इसके साथ ही, कॉर्पोरेट जगत के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। कई बड़ी कंपनियां अपने चौथी तिमाही के प्रदर्शन का खुलासा करने वाली हैं, जिससे निवेशकों को यह अंदाजा लगेगा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में कंपनियों ने किस तरह प्रदर्शन किया है। खास तौर पर मुनाफे, लागत नियंत्रण और भविष्य की योजनाओं पर बाजार की नजर रहेगी। अच्छे नतीजे बाजार को सहारा दे सकते हैं, जबकि निराशाजनक प्रदर्शन निवेशकों की चिंता बढ़ा सकता है।

    आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर से जुड़े पीएमआई डेटा बाजार के लिए अहम संकेत लेकर आएंगे। ये आंकड़े देश की आर्थिक गतिविधियों की गति को दर्शाते हैं और निवेशकों को यह समझने में मदद करते हैं कि अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ रही है। मजबूत आंकड़े सकारात्मक माहौल बना सकते हैं, जबकि कमजोर डेटा से बाजार में दबाव बढ़ सकता है।

    पिछले सप्ताह बाजार का प्रदर्शन मिश्रित रहा, हालांकि प्रमुख सूचकांक हल्की बढ़त के साथ बंद हुए। सेक्टरवार नजर डालें तो ऊर्जा, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर में मजबूती देखने को मिली, जबकि बैंकिंग और आईटी सेक्टर दबाव में रहे। यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि बाजार में फिलहाल एकरूपता की कमी है और निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मिला-जुला रुझान देखने को मिला, जो बाजार की अनिश्चितता को दर्शाता है। निवेशक अभी बड़े जोखिम लेने से बच रहे हैं और चुनिंदा अवसरों पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

  • निवेशकों की बिकवाली भारी पड़ी, एक हफ्ते में सोना 500 और चांदी 7,000 रुपये से ज्यादा कमजोर

    निवेशकों की बिकवाली भारी पड़ी, एक हफ्ते में सोना 500 और चांदी 7,000 रुपये से ज्यादा कमजोर


    नई दिल्ली।इस सप्ताह कीमती धातुओं के बाजार में कमजोरी का माहौल देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों ही मुनाफावसूली के दबाव में आ गए। शुरुआती मजबूती के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर अपनी होल्डिंग बेचनी शुरू कर दी, जिससे कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि सप्ताह के अंतिम दिन हल्की रिकवरी देखने को मिली, लेकिन पूरे सप्ताह का रुझान गिरावट की ओर ही रहा।

    सोने की कीमतों में साप्ताहिक आधार पर करीब 0.34 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। हफ्ते के अंत में इसमें मामूली सुधार हुआ और कीमत करीब 1,52,799 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गई। दिन के दौरान सोने ने 1,53,164 रुपये का उच्च स्तर और 1,50,750 रुपये का निचला स्तर छुआ, जो बाजार में जारी अस्थिरता को दर्शाता है। पूरे सप्ताह में सोना करीब 523 रुपये सस्ता हो गया, जो यह बताता है कि निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

    चांदी के मामले में गिरावट और ज्यादा गहरी रही। एक हफ्ते के दौरान इसकी कीमत में 7,000 रुपये से अधिक की कमी दर्ज की गई। हालांकि अंतिम कारोबारी दिन इसमें तेजी आई और यह करीब 2,44,321 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। दिनभर के कारोबार में चांदी ने 2,45,555 रुपये का उच्च स्तर और 2,38,291 रुपये का निचला स्तर छुआ, जिससे इसके दामों में तेज उतार-चढ़ाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह मुनाफावसूली रही। जब कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो निवेशक लाभ सुरक्षित करने के लिए बिकवाली करते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर चल रहे घटनाक्रमों ने भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच कूटनीतिक हल निकलने की उम्मीदों ने सुरक्षित निवेश की मांग को थोड़ा कमजोर किया, जिससे सोने और चांदी पर दबाव पड़ा।

    हालांकि बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने सोने को कुछ समर्थन दिया, क्योंकि इससे बिना ब्याज वाली संपत्तियों की आकर्षण क्षमता बढ़ती है। इसके बावजूद बाजार में मजबूत तेजी नहीं आ सकी, क्योंकि निवेशक अभी भी अनिश्चित परिस्थितियों को लेकर सतर्क हैं। निचले स्तरों पर खरीदारी जरूर देखने को मिली, लेकिन यह तेजी को स्थायी रूप नहीं दे सकी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार संतुलन की स्थिति में है, जहां न तो तेज गिरावट की आशंका है और न ही मजबूत तेजी के स्पष्ट संकेत। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, डॉलर की चाल और आर्थिक नीतियां कीमती धातुओं की दिशा तय करेंगी। ऐसे में निवेशकों को सावधानी के साथ रणनीति बनानी होगी, क्योंकि बाजार में अस्थिरता आगे भी जारी रह सकती है।