दीपांकर भट्टाचार्य वही नेता है जिसको 3 दिन पहले भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. गिरफ़्तारी के समय भी दीपांकर के पास से 80 लाख रुपये बरामद हुए थे. इस तरह पुलिस ने अभी तक दीपांकर की काली कमाई के 3 करोड़ 4 लाख रुपये ज़ब्त कर लिए हैं. जनसेवा के नाम पर राजनीति में आने वाले दीपांकर भट्टाचार्य ने दोनों हाथों से जनता को लूटा और नोटों की बोरी खेत में दबा दी.
ज़ी न्यूज की टीम ने बदुरिया के उस खेत में जाकर पता लगाया कि पैसे किस तरह छिपाकर रखे गए थे. कैसे पुलिस को बोरियों में छिपाकर रखे गए पैसे का पता चला. आख़िर दीपांकर भट्टाचार्य के पास इतने पैसे कहां से आए. एक समय में जो दीपांकर मज़दूरी का काम करता था, वो करोड़ों का मालिक कैसे बन गया. कहते हैं कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते लेकिन बंगाल में पैसे इन दिनों खेत से निकल रहे हैं और ये पैसे भ्रष्टाचार के हैं.
उत्तर 24 परगना के बदुरिया में जूट का यही वो खेत है जहां नोटों से भरी बोरियां और ट्रॉली बैग मिले थे. कोई सोच भी नहीं सकता था कि लगभग 7 फीट लंबे जूट के पौधों के बीच पैसे से भरी बोरियां और बैग छिपाए गए होंगे.
मजदूर से शुरू करके बना भ्रष्ट नेता
स्थानीय लोगों के मुताबिक, दीपांकर का शुरुआती जीवन बेहद साधारण था. उसके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. शुरुआत में उसने दिहाड़ी मज़दूर का भी काम किया. बाद में परिवार की मदद से एक कार खरीदी. उसी गाड़ी से वो सवारी ढोने का काम करने लगा.
वर्ष 2010 के करीब राजनीति में एंट्री के बाद उसकी ज़िंदगी बदल गई. दीपांकर ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की. लेकिन 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद वो TMC में शामिल हो गया. यहीं से उसकी ज़िंदगी बदल गई. पहले वो पार्षद बना और उसके बाद बदुरिया नगरपालिका का चेयरमैन भी बन गया. आरोप है कि वो सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों से वसूली करता था. इन्हीं पैसों को उसने खेत में छिपा रखा था.
रिपोर्टर अमित भारद्वाज से बातचीत में एक व्यक्ति ने बताया कि लोगों से आवास योजना के नाम पर दीपांकर रिश्वत लेता था. खुद उस व्यक्ति ने 40 हज़ार रुपये दिए.
लेकिन सरकार बदलते ही दीपांकर भट्टाचार्य के बुरे दिन शुरू हो गए. उसके खिलाफ शिकायत की गई कि उसने सरकारी तिरपाल लोगों के बीच बांटने के बदले अपने पास रख लिए. इसी सिलसिले में पुलिस ने उसके गोदाम पर छापा मारा तो 4,000 सरकारी तिरपाल ज़ब्त हुए. बाद में उसके कंप्यूटर सेंटर से 80 लाख रुपये भी मिले. इसी के बाद 25 मई को पुलिस ने दीपांकर भट्टाचार्य को गिरफ़्तार किया. खेत में दबे उसके पैसे का कभी सुराग नहीं मिलता, अगर अनजाने में स्थानीय व्यक्ति की नज़र नहीं गई होती.
नोटों से भरी बोरियां मिलने के बाद बदुरिया में TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य के ख़िलाफ़ जांच का दायरा बढ़ता ही जा रहा है. दीपांकर के जिस आलीशान घर पर दिन में ताला लगा हुआ था, वहां शाम होते-होते पुलिस पहुंच गई. CRPF की टीम के साथ स्थानीय पुलिस ने दीपांकर के घर की जांच की. जिस नेता ने खेत में पैसा छिपा रखा था, उसने घर में भी अपने भ्रष्टाचार का कोई न कोई निशान ज़रूर छोड़ा होगा. घर में तलाशी पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी.









