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  • उत्तराखंड में जंगलों की आग विकराल: मदद न करने वालों पर होगी जेल कार्रवाई, 2 लोगों की मौत

    उत्तराखंड में जंगलों की आग विकराल: मदद न करने वालों पर होगी जेल कार्रवाई, 2 लोगों की मौत


    नई दिल्ली। उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ जंगलों में आग अब भयावह रूप लेती जा रही है। पहाड़ी इलाकों से शुरू हुई वनाग्नि अब मैदानी जिलों तक फैल चुकी है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि राज्य सरकार और वन विभाग को सख्त कदम उठाने पड़े हैं। लगातार फैल रही आग के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि जंगलों की आग बुझाने में सहयोग नहीं करने वालों पर अब कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान रहेगा।

    वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक राज्यभर में 460 से अधिक वनाग्नि की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें लगभग 380 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। गुरुवार को ही प्रदेश में 37 नई घटनाएं दर्ज की गईं। देहरादून जिला अब सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हो गया है। यहां के चार वन प्रभागों में करीब 74 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं, जबकि चमोली जिले में 68 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आया है।

    वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते तापमान, बारिश की कमी, सूखी वनस्पतियों और तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है। कई क्षेत्रों में दुर्गम पहाड़ी रास्तों के चलते आग बुझाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राज्यभर में हाई अलर्ट जारी कर संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त टीमें तैनात कर दी गई हैं।

    सबसे ज्यादा नुकसान देहरादून के कालसी वन प्रभाग में हुआ है, जहां करीब 37 हेक्टेयर जंगल जल गए। वहीं चकराता, मसूरी और दून डिवीजन के जंगल भी आग की चपेट में हैं। दूसरी ओर चमोली जिले के बद्रीनाथ वन प्रभाग और अलकनंदा सॉयल कंजर्वेशन क्षेत्र में भी आग ने भारी तबाही मचाई है। यहां दो लोगों की मौत की भी पुष्टि हुई है।

    वन विभाग अब सख्त रुख अपनाने जा रहा है। बदरीनाथ-केदारनाथ वन प्रभाग के डीएफओ एसके दुबे ने कहा कि जंगलों में आग बुझाने में सहयोग नहीं करने वालों के खिलाफ केस दर्ज किए जाएंगे। इसमें वन उपज लेने वाले, लकड़ी कटान की अनुमति प्राप्त लोग, मवेशी चराने वाले और जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीण भी शामिल हो सकते हैं। संशोधित नियमों के अनुसार दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक की जेल और दो हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

    चकराता के देवघर रेंज क्षेत्र में बुधवार रात लगी आग को गुरुवार दोपहर तक काबू किया गया। इस आग में करीब साढ़े सात हेक्टेयर जंगल जल गए, जबकि वन विभाग ने करीब 428 हेक्टेयर जंगल को बचा लिया। वनकर्मियों ने लगातार 12 घंटे तक मशक्कत कर आग पर नियंत्रण पाया। मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है।

    इधर त्यूणी और उत्तरकाशी के जंगल भी लगातार धधक रहे हैं। कई इलाकों में किसानों के बाग-बगीचों को भारी नुकसान पहुंचा है और सैकड़ों सेब के पेड़ जल गए हैं। देहरादून शहर में भी अलग-अलग जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें जंगल, ट्रांसफॉर्मर और दुकानों तक को नुकसान पहुंचा है।

    वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जंगलों में आग लगने की सूचना तुरंत प्रशासन को दें और आग बुझाने में सहयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते हालात नियंत्रित नहीं हुए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

  • सतना के देवलहा बीट में आग का तांडव वनकर्मी बेहोश सैकड़ों पेड़ पौधे जलकर नष्ट

    सतना के देवलहा बीट में आग का तांडव वनकर्मी बेहोश सैकड़ों पेड़ पौधे जलकर नष्ट

    सतना । सतना जिले के वन मंडल अंतर्गत मझगवां रेंज के रोहनिया गांव के पास स्थित देवलहा बीट में अचानक भड़की भीषण आग ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया आग कक्ष क्रमांक पी 839 और पी 840 के जंगल में अज्ञात कारणों से शुरू हुई और देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया तेज हवाओं और सूखी झाड़ियों के कारण आग ने इतनी तेजी पकड़ी कि लगभग पंद्रह से बीस हेक्टेयर वन क्षेत्र इसकी चपेट में आ गया

    आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लपटें दस से बारह फीट तक ऊंची उठ रही थीं और दूर से ही धुएं का गुबार आसमान में फैलता नजर आ रहा था आसपास के ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल बन गया वहीं वन विभाग को जैसे ही सूचना मिली पूरा अमला तत्काल मौके पर पहुंचा और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया

    प्रभारी रेंजर अभिषेक मिश्रा के अनुसार आग मुख्य रूप से लेंटाना और सूखी झाड़ियों में लगी थी लेकिन हवा की तेज रफ्तार और तुलसा की सूखी वनस्पतियों ने इसे और भड़काने का काम किया जिससे आग पर नियंत्रण पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि आग तेजी से फैलते हुए बड़े हिस्से को अपनी चपेट में लेती चली गई

    आग बुझाने के लिए वन विभाग के करीब पच्चीस सुरक्षा श्रमिकों की टीम को मैदान में उतारा गया जिन्होंने फायर बीटर्स और लीफ ब्लोअर जैसे उपकरणों की मदद से लगातार सात घंटे तक संघर्ष किया यह एक कठिन और जोखिम भरा अभियान था जिसमें हर पल सतर्कता और साहस की जरूरत थी आखिरकार लंबी मशक्कत के बाद रात करीब आठ बजे आग पर काबू पाया जा सका

    इस दौरान आग की भीषण गर्मी और धुएं के कारण दो वनकर्मी रामकृष्ण पांडेय और गोविंद यादव बेहोश हो गए दोनों को तत्काल मझगवां के शासकीय चिकित्सालय ले जाया गया जहां उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत अब स्थिर है और लगभग तीन घंटे बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई

    इस घटना ने एक बार फिर जंगलों में बढ़ते आग के खतरे और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं गर्मी के मौसम में सूखी वनस्पतियां और तेज हवाएं ऐसी घटनाओं को और खतरनाक बना देती हैं वन विभाग के लिए यह एक चेतावनी भी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक सतर्कता और मजबूत इंतजाम किए जाएं

    देवलहा का यह अग्निकांड न केवल वन संपदा के नुकसान की कहानी कहता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए कितनी बड़ी चुनौती सामने खड़ी है समय रहते ठोस कदम उठाना अब बेहद जरूरी हो गया है