आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लपटें दस से बारह फीट तक ऊंची उठ रही थीं और दूर से ही धुएं का गुबार आसमान में फैलता नजर आ रहा था आसपास के ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल बन गया वहीं वन विभाग को जैसे ही सूचना मिली पूरा अमला तत्काल मौके पर पहुंचा और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया
प्रभारी रेंजर अभिषेक मिश्रा के अनुसार आग मुख्य रूप से लेंटाना और सूखी झाड़ियों में लगी थी लेकिन हवा की तेज रफ्तार और तुलसा की सूखी वनस्पतियों ने इसे और भड़काने का काम किया जिससे आग पर नियंत्रण पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि आग तेजी से फैलते हुए बड़े हिस्से को अपनी चपेट में लेती चली गई
आग बुझाने के लिए वन विभाग के करीब पच्चीस सुरक्षा श्रमिकों की टीम को मैदान में उतारा गया जिन्होंने फायर बीटर्स और लीफ ब्लोअर जैसे उपकरणों की मदद से लगातार सात घंटे तक संघर्ष किया यह एक कठिन और जोखिम भरा अभियान था जिसमें हर पल सतर्कता और साहस की जरूरत थी आखिरकार लंबी मशक्कत के बाद रात करीब आठ बजे आग पर काबू पाया जा सका
इस दौरान आग की भीषण गर्मी और धुएं के कारण दो वनकर्मी रामकृष्ण पांडेय और गोविंद यादव बेहोश हो गए दोनों को तत्काल मझगवां के शासकीय चिकित्सालय ले जाया गया जहां उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत अब स्थिर है और लगभग तीन घंटे बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई
इस घटना ने एक बार फिर जंगलों में बढ़ते आग के खतरे और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं गर्मी के मौसम में सूखी वनस्पतियां और तेज हवाएं ऐसी घटनाओं को और खतरनाक बना देती हैं वन विभाग के लिए यह एक चेतावनी भी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक सतर्कता और मजबूत इंतजाम किए जाएं
देवलहा का यह अग्निकांड न केवल वन संपदा के नुकसान की कहानी कहता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए कितनी बड़ी चुनौती सामने खड़ी है समय रहते ठोस कदम उठाना अब बेहद जरूरी हो गया है
