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  • कांग्रेस के गढ़ में BJP का बड़ा दांव, जयपुर निगम चुनाव में उतारे 8 मुस्लिम उम्मीदवार, 51 महिलाओं को टिकट

    कांग्रेस के गढ़ में BJP का बड़ा दांव, जयपुर निगम चुनाव में उतारे 8 मुस्लिम उम्मीदवार, 51 महिलाओं को टिकट


    जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने सामाजिक और महिला समीकरण साधते हुए 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है। पार्टी ने 150 वार्डों में 51 सीटों पर महिलाओं को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने टिकट वितरण में संगठन से जुड़े नेताओं और मौजूदा पार्षदों पर भरोसा जताया है। ऐसे में दोनों दलों की रणनीति ने चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया है।

    भाजपा ने 51 महिलाओं को दिया टिकट

    भाजपा की सूची में महिला और सामाजिक समीकरण पर खास फोकस दिखाई दे रहा है। पार्टी ने 33% महिला आरक्षण के सिद्धांत से आगे बढ़ते हुए करीब 35% टिकट महिलाओं को दिए हैं। इनमें महिला मोर्चा से जुड़ी कार्यकर्ताओं के साथ लंबे समय से संगठन में सक्रिय महिला चेहरों को भी मौका दिया गया है।

    वार्ड 47 से दीपा नाथावत, वार्ड 56 से रेखा सैनी, वार्ड 107 से अनुराधा माहेश्वरी और वार्ड 123 से पूनम मेहता को प्रत्याशी बनाया गया है।

    सबसे चर्चित नाम कांग्रेस की पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल का है। भाजपा ने उन्हें वार्ड 110 से मैदान में उतारा है। ज्योति खंडेलवाल जयपुर नगर निगम की महापौर रह चुकी हैं और लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रही हैं। अब भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने से वार्ड 110 का मुकाबला खास हो गया है।

    8 मुस्लिम चेहरों पर भाजपा का भरोसा

    भाजपा ने मुस्लिम बहुल और कांग्रेस के प्रभाव वाले इलाकों में भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं। पार्टी ने कुल 8 मुस्लिम नेताओं को पार्षद का टिकट दिया है।

    वार्ड 19 से शहनवाज अंसारी, वार्ड 109 से जाकिर खान कायमखानी, वार्ड 113 से फरीदुद्दीन ‘जैकी’, वार्ड 117 से शब्बो जहां, वार्ड 128 से माजिद पठान, वार्ड 136 से मिजाना मिर्जा, वार्ड 137 से रहीस मंसूरी और वार्ड 146 से अफसाना को प्रत्याशी बनाया गया है।

    इनमें वार्ड 19 का टिकट सबसे ज्यादा चर्चा में है। सामान्य सीट होने के बावजूद भाजपा ने यहां मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। इसे पार्टी की वार्डवार सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    कांग्रेस ने संगठन के चेहरों पर जताया भरोसा

    कांग्रेस ने टिकट वितरण में अपने संगठन को प्राथमिकता दी है। पार्टी ने 4 ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों, 2 पीसीसी प्रकोष्ठ प्रमुखों और एक पीसीसी सचिव को चुनाव मैदान में उतारा है।

    इसके अलावा कई मौजूदा पार्षदों को भी दोबारा टिकट दिया गया है। पार्टी ने अपने मौजूदा जनप्रतिनिधियों के स्थानीय जनाधार और वार्ड में सक्रियता को टिकट का आधार बनाया है।

    कांग्रेस की रणनीति संगठन के पुराने नेटवर्क और मौजूदा पार्षदों के स्थानीय प्रभाव के सहारे भाजपा को चुनौती देने की है। हालांकि टिकट वितरण के बाद दोनों दलों के सामने बागियों को संभालने की चुनौती भी रहेगी।

    2500 से ज्यादा दावेदारों में से चुने 150 चेहरे

    जयपुर निगम चुनाव के लिए भाजपा में कई दिनों तक टिकट को लेकर मंथन चला। 150 वार्डों के लिए करीब 2500 से ज्यादा दावेदारों ने टिकट की दावेदारी की थी। पार्टी के सामने जिताऊ उम्मीदवार चुनने के साथ पुराने कार्यकर्ताओं, जातीय समीकरण और स्थानीय प्रभाव के बीच संतुलन बनाने की चुनौती थी।

    भाजपा की सूची में महिला, युवा, सामाजिक और संगठन से जुड़े चेहरों का मिश्रण दिखाई दे रहा है। पार्टी ने वार्डवार समीकरण को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है।

    बागियों पर रहेगी दोनों दलों की नजर

    टिकट वितरण के बाद अब भाजपा और कांग्रेस के सामने नाराज दावेदारों को मनाने की चुनौती है। टिकट नहीं मिलने पर कुछ दावेदार निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं या दूसरे दलों का रुख कर सकते हैं। ऐसे में कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने की संभावना है।

    भाजपा का 8 मुस्लिम उम्मीदवारों और 51 महिलाओं को टिकट देने का फैसला तथा कांग्रेस का संगठन के मजबूत चेहरों पर दांव अब चुनावी नतीजों पर कितना असर डालता है, यह चुनाव के दौरान देखने वाली बात होगी।

  • केरल के इस्लामिक स्कॉलर का विवादित बयान, ‘महिलाओं के मंच पर आने से मचेगी तबाही, घरों में रहें’

    केरल के इस्लामिक स्कॉलर का विवादित बयान, ‘महिलाओं के मंच पर आने से मचेगी तबाही, घरों में रहें’


    नई दिल्ली। केरल में महिलाओं के सार्वजनिक मंचों पर पुरुषों के साथ मौजूद रहने को लेकर जारी विवाद अब और बढ़ गया है। इस बीच इस्लामिक स्कॉलर कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने महिलाओं को घरों तक सीमित रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से ‘बड़ी तबाही’ हो सकती है और इसी वजह से इस्लाम में महिलाओं के लिए पर्दे का प्रावधान किया गया है।

    कंथापुरम ने रविवार को कोच्चि में आयोजित एक इस्लामिक सम्मेलन में यह बयान दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब समस्थ केरल जमीयतुल उलेमा के कंथापुरम गुट के एक सर्कुलर को लेकर पहले ही विवाद चल रहा है।

    महिलाओं के पुरुषों के साथ मंच साझा करने पर रोक
    समस्थ केरल जमीयतुल उलेमा के कंथापुरम गुट ने पिछले सप्ताह धार्मिक समारोहों और कार्यक्रमों को निर्धारित सीमाओं के भीतर आयोजित करने की बात कही थी। संगठन के अध्यक्ष ई. सुलेमान मुसलियार और महासचिव कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार की ओर से जारी निर्देश में कहा गया था कि महिलाएं पुरुषों के साथ मंच साझा न करें और सार्वजनिक स्थानों पर पुरुषों के साथ नजर न आएं। इस निर्देश के बाद विवाद शुरू हो गया था। कई महिला राजनीतिक नेताओं ने भी इसका विरोध किया था।

    ‘महिलाओं को घरों तक सीमित रहना चाहिए’
    रविवार को सम्मेलन में कंथापुरम ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि महिलाओं के सार्वजनिक मंचों पर आने से बड़ी तबाही हो सकती है। उन्होंने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए इस्लाम में महिलाओं के लिए पर्दे का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा, ‘पवित्र कुरान में कहा गया है कि महिलाओं को अपने घरों तक सीमित रहना चाहिए और सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आना चाहिए।’ कंथापुरम ने दावा किया कि इस तरह की शिक्षा पिछले 100 वर्षों से धार्मिक विद्वानों, विशेष रूप से समस्थ के नेताओं की ओर से दी जाती रही है।

    ‘विरोध के बावजूद बोलते रहेंगे’
    कंथापुरम ने कहा कि धार्मिक मामलों का अध्ययन करने वाले विद्वानों की इस विषय पर अपनी बात रखने की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विरोध या सवाल उठाए जाने के बावजूद वे अपने विचार व्यक्त करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर किसी अन्य संगठन या समस्थ के नेता उनके रुख का विरोध करते हैं, तब भी वे अपनी बात कहेंगे। कंथापुरम ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘हम इसे कहेंगे और कहते रहेंगे। कोई हमें रोक नहीं सकता।’ उनके इस बयान के बाद महिलाओं की सार्वजनिक भागीदारी और धार्मिक संगठनों के निर्देशों को लेकर केरल में बहस और तेज होने की संभावना है।

  • Womens Asia Cup : श्रीलंका की बड़ी जीत, UAE को 9 विकेट से हराया… आज भारत का थाइलैंड से मुकाबला

    Womens Asia Cup : श्रीलंका की बड़ी जीत, UAE को 9 विकेट से हराया… आज भारत का थाइलैंड से मुकाबला


    दुबई।
    विमेंस एशिया कप 2026 (Womens Asia Cup 2026) का आगाज हो गया है। इस बार टूर्नामेंट की मेजबानी यूएई (UAE) कर रहा है। अभी तक खेले गए दो मुकाबलों में थाइलैंड (Thailand) और श्रीलंका (Sri Lanka) ने जीत दर्ज की है। थाइलैंड ने अपने पहले मुकाबले में हॉन्ग-कॉन्ग को हराया था, जबकि श्रीलंका ने मेजबान यूएई को 9 विकेट से धूल चटाई। यह श्रीलंका विमेंस टीम (Sri Lanka Women’s Team) की टी20 क्रिकेट में सबसे बड़ी जीत है। यूएई के खिलाफ उन्होंने मुकाबले महज 7.5 ओवर में ही खत्म कर दिया। उन्हें जीत के लिए 80 रनों का मामूली टारगेट मिला था, जिसे कप्तान चमारी अट्टापट्टू की 48 रनों की तूफानी पारी के दम पर उन्होंने आसानी से हासिल कर लिया। आज हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम इंडिया अपने अभियान का आगाज थाइलैंड के खिलाफ करने जा रही है। भारत इस टूर्नामेंट में बतौर फेवरेट उतरेगी।

    बता दें, विमेंस एशिया कप में इस बार कुल 8 टीमें हिस्सा ले रहीं हैं, जिन्हें 4-4 के दो ग्रुप में बांटा गया है।
    ग्रुप-ए- भारत, पाकिस्तान, थाइलैंड और हॉन्ग-कॉन्ग जैसी टीमें हैं।
    ग्रुप-बी- श्रीलंका, बांग्लादेश, यूएई और इंडोशनेशिया है।

    ग्रुप स्टेज में टॉप-2 में रहने वाली टीमों को सेमीफाइनल का टिकट मिलेगा। सेमीफाइनल 10 और 11 सितंबर को दुबई में खेले जाएंगे, जबकि खिताबी मुकाबला इसी मैदान पर 13 सितंबर को आयोजित होगा।

    वुमेंस एशिया कप का 10वां एडिशन है। पिछली बार इस टूर्नामेंट को श्रीलंका ने अपने घर पर जीता था। फाइनल में उन्होंने 7 बार की चैंपियन टीम इंडिया को हराया था। भारत इस टूर्नामेंट में जरूरत उनसे बदला लेना चाहेगा।

    ग्रुप-ए का पहला मैच थाइलैंड और हॉन्ग-कॉन्ग के बीच खेला गया था। इस मैच में पहले बैटिंग करते हुए थाइलैंड की टीम ने 120 रन बोर्ड पर लगाए थे, जिसके जवाब में हॉन्ग-कॉन्ग की विमेंस टीम 114 रन बना पाई थी। थाइलैंड ने यह मैच 6 रनों के अंतर से जीता। आज हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम इंडिया थाइलैंड के खिलाफ अपने अभियान का आगाज करेगी। भारत-पाकिस्तान बहुप्रतीक्षित मैच 5 सितंबर को खेला जाएगा।

    श्रीलंका ने यूएई के खिलाफ गेंदों के मामले में अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज करते हुए विमेंस एशिया कप का आगाज किया। श्रीलंका ने अपना पहला मैच 73 गेंदें शेष रहते जीता। यूएई ने पहले बैटिंग करते 79 रन ही बोर्ड पर लगाए, उनकी पूरी टीम 19.5 ओवर में सिमट गई। श्रीलंका ने इस टारगेट को 7.5 ओवर में 1 विकेट के नुकसान पर आसानी से चेज कर लिया। चमीरा अट्टापट्टू ने 48 रनों की तूफानी पारी खेली।

  • महिला टी20 एशिया कप का भव्य आगाज आज दुबई में…. Ind vs Pak मैच 5 सितंबर को

    महिला टी20 एशिया कप का भव्य आगाज आज दुबई में…. Ind vs Pak मैच 5 सितंबर को


    दुबई।
    महिला टी20 एशिया कप 2026 (Women’s T20 Asia Cup 2026) का आगाज आज से यूएई (UAE) के दुबई (Dubai) में होने जा रहा है। इस बार टूर्नामेंट (Tournament) में आठ टीमें हिस्सा ले रही हैं। भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश के अलावा इंडोनेशिया, हांगकांग चीन, थाईलैंड और मेजबान यूएई भी खिताब के लिए मैदान में पूरी ताकत झोंकेंगे। टूर्नामेंट का फाइनल 13 सितंबर को खेला जाएगा। भारत को प्रतियोगिता का प्रबल दावेदार माना जा रहा है, जबकि मौजूदा चैंपियन श्रीलंका की टीम भी शानदार फॉर्म के साथ टूर्नामेंट में पहुंची है। पाकिस्तान और बांग्लादेश उलटफेर करने की क्षमता रखते हैं।


    28 अगस्त से 13 सितंबर तक चलेगा टूर्नामेंट

    महिला टी20 एशिया कप में कुल 15 मुकाबले खेले जाएंगे। इनमें 12 लीग मैच, दो सेमीफाइनल और एक फाइनल शामिल है। ग्रुप चरण के मुकाबले 28 अगस्त से आठ सितंबर तक होंगे और इस दौरान हर दिन एक मैच खेला जाएगा। इसके बाद पहला सेमीफाइनल 10 सितंबर और दूसरा सेमीफाइनल 11 सितंबर को होगा। खिताबी मुकाबला 13 सितंबर को खेला जाएगा। टूर्नामेंट के सभी मुकाबले दुबई में आयोजित किए जाएंगे।


    भारत-पाकिस्तान एक ही ग्रुप में

    आठ टीमों को दो ग्रुप में बांटा गया है।
    ग्रुप ए: भारत, पाकिस्तान, हांगकांग चीन और थाईलैंड
    ग्रुप बी: बांग्लादेश, श्रीलंका, यूएई और इंडोनेशिया

    ग्रुप चरण में प्रत्येक टीम अपने ग्रुप की बाकी तीन टीमों से एक-एक मुकाबला खेलेगी। दोनों ग्रुप की शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। यह दूसरी बार है जब महिला एशिया कप के टी20 प्रारूप में आठ टीमें हिस्सा ले रही हैं। 2022 में टूर्नामेंट में सात टीमें थीं, जबकि 2024 में एक और टीम के जुड़ने के बाद संख्या आठ हुई थी।


    चार एसोसिएट टीमों ने ऐसे बनाई जगह

    इंडोनेशिया, हांगकांग चीन, थाईलैंड और यूएई ने 2026 महिला प्रीमियर कप के जरिए एशिया कप में जगह बनाई है। 18 टीमों वाले प्रीमियर कप में इन चारों टीमों ने अपने-अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया और फिर क्वार्टर फाइनल जीतकर एशिया कप के लिए क्वालिफाई किया। इंडोनेशिया के लिए यह महिला एशिया कप में पहली उपस्थिति होगी। वहीं हांगकांग की टीम 2012 के बाद पहली बार इस टूर्नामेंट में वापसी कर रही है।


    भारत का दबदबा, श्रीलंका मौजूदा चैंपियन

    महिला टी20 एशिया कप में भारत का अब तक दबदबा रहा है। टी20 प्रारूप में खेले गए पांच संस्करणों में भारत ने तीन बार खिताब जीता है। हालांकि, दो मौकों पर उसे फाइनल में हार का सामना करना पड़ा। 2018 में बांग्लादेश ने भारत को हराकर खिताब जीता था, जबकि 2024 में श्रीलंका ने भारत को मात देकर पहली बार ट्रॉफी अपने नाम की थी। अब भारत की नजरें खिताब वापस हासिल करने पर होंगी।


    पांच सितंबर को भारत-पाकिस्तान महामुकाबला

    टूर्नामेंट के सबसे बहुप्रतीक्षित मुकाबलों में भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत शामिल है। दोनों टीमें पांच सितंबर को आमने-सामने होंगी। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का पाकिस्तान पर दबदबा रहा है। दोनों के बीच खेले गए 17 मुकाबलों में भारत ने 14 में जीत दर्ज की है। हालांकि, टी20 क्रिकेट में एक खराब दिन भी समीकरण बदल सकता है।

    भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी टूर्नामेंट से पहले साफ किया कि उनकी टीम किसी एक प्रतिद्वंद्वी पर विशेष ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि टीम का लक्ष्य किसी विशेष टीम को लेकर सोचने के बजाय अच्छा क्रिकेट खेलना है। हरमनप्रीत के मुताबिक पिछले दो-तीन वर्षों में एशियाई टीमों के स्तर में काफी सुधार हुआ है और इस वजह से प्रतियोगिता चुनौतीपूर्ण रहने वाली है।


    श्रीलंका और बांग्लादेश की टक्कर भी अहम

    छह सितंबर को मौजूदा चैंपियन श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच मुकाबला होगा। इस मैच पर भी नजरें रहेंगी। टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में श्रीलंका का बांग्लादेश के खिलाफ रिकॉर्ड मजबूत है। दोनों टीमों के बीच 16 मुकाबलों में श्रीलंका ने 13 मैच जीते हैं। श्रीलंका इस साल शानदार फॉर्म में है। उसने 13 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 10 जीत हासिल की हैं। टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज 2-1 से जीती, बांग्लादेश को 3-0 से हराया और पाकिस्तान के खिलाफ भी 2-1 से सीरीज अपने नाम की।


    भारत पसंदीदा, लेकिन हालिया फॉर्म चिंता का विषय

    भारत को टूर्नामेंट का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है, हालांकि उसकी हालिया टी20 फॉर्म बहुत प्रभावशाली नहीं रही है। भारत ने इस साल खेले 16 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में नौ मैच गंवाए हैं। इसके बावजूद टीम की गहराई और बड़े टूर्नामेंटों का अनुभव उसे बाकी टीमों से आगे रखता है। भारतीय टीम की नजरें खास तौर पर हालिया निराशाजनक टी20 विश्व कप अभियान से सबक लेकर बेहतर प्रदर्शन करने पर होंगी। हरमनप्रीत ने कहा कि पिछली प्रतियोगिताओं में मिले अनुभव टीम के लिए उपयोगी साबित होंगे और खिलाड़ी यहां अपना सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेलने की कोशिश करेंगे।


    बांग्लादेश के प्रदर्शन में निरंतरता की कमी

    बांग्लादेश ने इस साल टी20 क्रिकेट में मिश्रित प्रदर्शन किया है। टीम ने टी20 विश्व कप क्वालिफायर में अपने सभी सात मुकाबले जीते थे, लेकिन उसके बाद खेले गए 12 मैचों में उसे आठ में हार मिली। ऐसे में बांग्लादेश के लिए ग्रुप बी में श्रीलंका के साथ मुकाबला बड़ी चुनौती होगा। टीम को सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए निरंतर प्रदर्शन करना होगा।


    क्या भारत ट्रॉफी वापस हासिल करेगा?

    महिला टी20 एशिया कप 2026 में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत 2024 में गंवाया खिताब वापस हासिल कर पाएगा। कागज पर भारत सबसे मजबूत टीमों में है, लेकिन इस साल उसकी टी20 फॉर्म चिंता पैदा करती है। दूसरी ओर श्रीलंका मौजूदा चैंपियन होने के साथ इस साल बेहतर फॉर्म में है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के पास भी बड़े मुकाबलों में उलटफेर करने की क्षमता है, जबकि चार एसोसिएट टीमों के प्रदर्शन पर भी नजर रहेगी। टूर्नामेंट का प्रारूप ऐसा है कि ग्रुप चरण में एक भी चूक भारी पड़ सकती है। इसलिए 28 अगस्त से शुरू होने वाली इस प्रतियोगिता में सिर्फ बड़े नाम ही नहीं, बल्कि युवा और उभरती हुई प्रतिभाएं भी खिताब की दौड़ का रुख तय कर सकती हैं।

  • महिला समानता दिवस पर सोमी अली ने कहा, सिर्फ चर्चा से नहीं सिस्टम और सोच बदलने से महिलाओं को वास्तविक बराबरी मिलेगी

    महिला समानता दिवस पर सोमी अली ने कहा, सिर्फ चर्चा से नहीं सिस्टम और सोच बदलने से महिलाओं को वास्तविक बराबरी मिलेगी

    नई दिल्ली । महिला समानता दिवस के अवसर पर अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता सोमी अली ने महिलाओं की वास्तविक स्थिति और समानता को लेकर अपने विचार साझा किए। करीब दो दशक से महिलाओं के साथ काम करने के दौरान हिंसा और असुरक्षा झेल रही महिलाओं के अनुभवों को करीब से देखने वाली सोमी अली का कहना है कि केवल बराबरी की बातें करने से बदलाव नहीं आएगा। इसके लिए व्यवस्था, सामाजिक सोच और संस्थागत प्रतिक्रिया में ठोस परिवर्तन जरूरी है।

    सोमी अली के अनुसार महिलाओं के मुद्दों पर पहले की तुलना में अधिक बातचीत हो रही है और यह सकारात्मक बदलाव है। लंबे समय तक महिलाओं का चुप रहना सामान्य माना जाता था, जबकि कई मामलों में यही चुप्पी अत्याचार करने वालों को बचाती रही। हालांकि, उनका मानना है कि आवाज उठाने के बाद वास्तविक बदलाव तभी माना जाएगा जब अदालतों, पुलिस, परिवारों और सामाजिक व्यवस्था की प्रतिक्रिया भी बदले।

    उन्होंने विशेष रूप से उन महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताई जो तत्काल खतरे में होती हैं। उनके मुताबिक ऐसी महिलाओं को सहायता मिलने में अक्सर समय लग जाता है। सुरक्षा आदेश, आश्रय और कानूनी प्रक्रिया जैसी व्यवस्थाओं के बीच महिला को कई बार उसी परिस्थिति में रहना पड़ता है जहां उसकी सुरक्षा को खतरा बना रहता है। सोमी अली का कहना है कि सबसे जरूरी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे गंभीर खतरे में मौजूद महिला को जल्द सुरक्षित स्थान मिल सके।

    महिला सशक्तीकरण के लिए आर्थिक स्वतंत्रता, शिक्षा और कानूनी सहायता को भी उन्होंने महत्वपूर्ण माना। लेकिन उनके मुताबिक इन सुविधाओं के साथ आत्मविश्वास भी जरूरी है। कई महिलाएं संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद डर, सामाजिक दबाव या दूसरों की स्वीकृति की आवश्यकता के कारण अपने फैसले लेने में कठिनाई महसूस करती हैं। इसके विपरीत कुछ महिलाओं ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने लिए सुरक्षित और स्वतंत्र जीवन का रास्ता चुना है।

    सोमी अली ने समानता की बहस में संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना है कि महिला समानता का अर्थ हर परिस्थिति में महिला को सही और पुरुष को गलत मान लेना नहीं है। उनके अनुभव में महिलाओं के साथ गंभीर अत्याचार के मामले वास्तविक हैं, लेकिन किसी भी पक्ष को बिना तथ्य के हमेशा सही मान लेना न्याय की भावना के अनुरूप नहीं है।

    उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं और पुरुषों दोनों को इंसान के रूप में देखा जाना चाहिए, जिनके व्यवहार और परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं। उनके अनुसार वास्तविक समानता का आधार किसी एक पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि तथ्य और सच के आधार पर न्याय सुनिश्चित करना होना चाहिए।

    सोमी अली ने यह भी कहा कि झूठे आरोपों की स्थिति उन महिलाओं के लिए भी नुकसानदेह हो सकती है जो वास्तव में हिंसा का सामना कर रही हैं। इससे वास्तविक पीड़ितों की शिकायतों पर संदेह बढ़ सकता है और न्याय पाने की प्रक्रिया कठिन हो सकती है। इसलिए उनका जोर इस बात पर है कि कमजोर और जरूरतमंद व्यक्ति की सुरक्षा हो, लेकिन गलत को केवल किसी पक्ष के आधार पर सही न ठहराया जाए।

    महिला समानता दिवस पर उनका संदेश महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के साथ जिम्मेदारी तथा निष्पक्षता को जोड़ता है। उनके मुताबिक बदलाव तभी सार्थक होगा जब महिलाओं को अपनी बात कहने का भरोसा मिले, खतरे के समय व्यवस्था तेजी से काम करे और समाज समानता को केवल चर्चा का विषय न रखकर व्यवहार और संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा बनाए।

  • बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल

    बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल


    ढाका।
    बांग्लादेश के रंगपुर में हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या का मामला गंभीर विवाद में बदल गया है। पुलिस ने हत्या के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कुछ अहम साक्ष्य सामने नहीं लाए जा रहे हैं।

    सबसे गंभीर सवाल परिवार की महिला सदस्यों से कथित दुष्कर्म को लेकर उठ रहा है। हालांकि, दुष्कर्म के आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की रिपोर्ट में महिलाओं के साथ दुष्कर्म का उल्लेख नहीं किया गया है।

    शवगृह कर्मचारी के दावे से बढ़ा विवाद

    स्थानीय मीडिया के एक स्टिंग ऑपरेशन में शवगृह के एक कर्मचारी ने महिलाओं के शवों से कथित तौर पर वीर्य मिलने का दावा किया। इस दावे के बाद मामले में दुष्कर्म की आशंका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र फॉरेंसिक या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना कि हत्या से पहले निश्चित तौर पर दुष्कर्म हुआ था, फिलहाल जल्दबाजी होगी।

    चारों की गला घोंटकर हत्या

    पुलिस रिपोर्ट के अनुसार स्कूल शिक्षक गणपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी, बेटी और बेटे की गला घोंटकर हत्या की गई। मामले में गणपति के रिश्तेदार मुग्धो दास और सिद्धार्थ दास को गिरफ्तार किया गया है।

    स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों का आरोप है कि हत्या में और लोग भी शामिल हो सकते हैं और पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इन आरोपों की भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    जांच डिटेक्टिव ब्रांच को सौंपी गई

    विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच स्थानीय पुलिस से हटाकर डिटेक्टिव ब्रांच को सौंप दी गई है। जांच एजेंसी हत्या की परिस्थितियों के साथ-साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

    इस बीच हिंदू संगठनों का विरोध जारी है। संगठनों ने मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फॉरेंसिक जांच में दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि होती है और क्या हत्या में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। इन दोनों सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • मुख्यमंत्री विजय के बड़े ऐलान से राहत की उम्मीद, मुफ्त सिलेंडर योजना के साथ महिलाओं के लिए विस्तृत बस यात्रा सुविधा

    मुख्यमंत्री विजय के बड़े ऐलान से राहत की उम्मीद, मुफ्त सिलेंडर योजना के साथ महिलाओं के लिए विस्तृत बस यात्रा सुविधा

    नई दिल्ली ।तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के गरीब परिवारों, महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। सरकार के मुताबिक इन फैसलों का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देने के साथ महिलाओं की सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच आसान बनाना है। इसके तहत गरीब परिवारों को हर साल तीन मुफ्त LPG सिलेंडर देने की योजना शुरू करने का ऐलान किया गया है। साथ ही महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा का दायरा बढ़ाने की बात कही गई है।

    सरकार की ओर से घोषित ‘अन्नपूर्णानी सुपर सिक्स’ योजना पोंगल 2027 से शुरू होने की बात कही गई है। इस योजना के तहत ऐसे परिवारों को लाभ देने का प्रस्ताव है, जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है। पात्र परिवारों को एक साल में तीन LPG सिलेंडर मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार के अनुमान के अनुसार इस योजना से करीब 1.30 करोड़ परिवार लाभान्वित हो सकते हैं।

    इस योजना पर राज्य सरकार के खजाने से हर साल करीब 4 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। लाभार्थियों को पहले LPG सिलेंडर खरीदना होगा और इसके बाद सिलेंडर की कीमत सीधे उनके बैंक खाते में जमा किए जाने की व्यवस्था बताई गई है। इस तरह सरकार ने योजना को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता से जोड़ने की तैयारी की है।

    मुख्यमंत्री विजय ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा को लेकर भी बड़ा ऐलान किया है। प्रस्तावित सुविधा केवल सामान्य बसों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एक्सप्रेस, एलएसएस और डीलक्स बसों में भी महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा देने की बात कही गई है। इसके अलावा अंतर-जिला बस सेवाओं में भी महिलाओं को इस सुविधा का लाभ दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

    महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की यह सुविधा ‘वेट्री पयाना थिट्टम’ के तहत 2 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा की गई है। इसके दायरे में ट्रांसजेंडर यात्रियों को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल अधिक सुगम हो सकता है।

    इन कल्याणकारी घोषणाओं के साथ चेन्नई के प्रस्तावित नए एयरपोर्ट को लेकर भी सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। परंदूर में प्रस्तावित एयरपोर्ट परियोजना का स्थानीय लोगों की ओर से विरोध किए जाने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि सरकार ऐसे वैकल्पिक स्थानों की तलाश कर रही है, जहां एयरपोर्ट निर्माण से परिवार प्रभावित न हों।

    सरकार ने नए एयरपोर्ट के लिए कुछ वैकल्पिक स्थानों की पहचान किए जाने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार परंदूर में एयरपोर्ट बनाने के पक्ष में नहीं है। इसके साथ ही चेन्नई के मौजूदा मीनांबक्कम एयरपोर्ट पर नया टर्मिनल-5 बनाने की योजना का भी ऐलान किया गया है।

    मुख्यमंत्री विजय ने किसानों के हितों को भी प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने किसानों को देश की रीढ़ बताते हुए कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनके हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। ऐसे में सरकार के हालिया फैसलों में एक ओर गरीब परिवारों को घरेलू ईंधन पर राहत देने का प्रयास दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुलभ बनाने पर जोर दिया गया है। इन घोषणाओं के लागू होने के बाद इनके वास्तविक लाभ और वित्तीय प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

  • सावन में शिव आराधना के साथ खानपान और पूजा विधि का रखें ध्यान, जानिए महिलाओं के लिए बताए गए जरूरी नियम

    सावन में शिव आराधना के साथ खानपान और पूजा विधि का रखें ध्यान, जानिए महिलाओं के लिए बताए गए जरूरी नियम


    नई दिल्ली । 
    हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में की गई शिव उपासना, सोमवार व्रत और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का अलग महत्व होता है। सुहागिन महिलाएं भी पति की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ इस महीने में विभिन्न व्रत और पूजा करती हैं।

    सावन के दौरान महिलाओं के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र धारण करने की परंपरा बताई गई है। इसके बाद भगवान शिव की पूजा और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत या धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है। मान्यता है कि दिन की शुरुआत धार्मिक कार्यों और सकारात्मक विचारों के साथ करने से पूजा के प्रति एकाग्रता बनी रहती है।

    धार्मिक मान्यताओं में सावन के दौरान काले वस्त्रों से परहेज करने की बात कही जाती है। इसके स्थान पर हरे रंग को शुभ माना जाता है। सावन में हरा रंग प्रकृति, हरियाली और सौभाग्य से जोड़ा जाता है। हालांकि इन परंपराओं को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए और अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में इनके पालन का तरीका अलग हो सकता है।

    शिव पूजा से जुड़ी सामग्री को लेकर भी कुछ मान्यताएं प्रचलित हैं। सावन में भगवान शिव को बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित करने की परंपरा है। वहीं तुलसी, हल्दी और केतकी के फूल को शिव पूजा में अर्पित न करने की धार्मिक मान्यता बताई जाती है। पूजा सामग्री का उपयोग करते समय श्रद्धालु अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक विधि का भी ध्यान रखते हैं।

    सावन के व्रत के दौरान सात्विक भोजन करने पर विशेष जोर दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में मांसाहार और मदिरा से दूर रहने की परंपरा है। व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन करती हैं। भोजन को लेकर किसी भी प्रकार का व्रत रखने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    सावन के व्रत और पूजा के दिनों में बैंगन, मूली तथा कुछ पत्तेदार सब्जियों से परहेज करने की परंपरा भी बताई जाती है। इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ मौसम संबंधी पारंपरिक कारण भी बताए जाते हैं। बारिश के मौसम में कुछ सब्जियों में कीड़े लगने की संभावना अधिक मानी जाती थी, इसलिए पुराने समय से इनके सेवन को सीमित करने की परंपरा विकसित हुई।

    मासिक धर्म को लेकर भी कुछ पारंपरिक धार्मिक नियम बताए जाते हैं, जिनमें शिवलिंग को स्पर्श न करने की मान्यता शामिल है। हालांकि यह धार्मिक परंपरा का विषय है और अलग-अलग परिवारों तथा समुदायों में इसके पालन के तरीके भिन्न हो सकते हैं। इस दौरान महिलाओं के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

    सुहागिन महिलाओं के लिए सावन में मंगली गौरी, शिवरात्रि और हरियाली तीज जैसे व्रतों का भी विशेष महत्व बताया जाता है। वहीं अविवाहित लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से सावन के सोमवार का व्रत रखने की धार्मिक परंपरा का पालन करती हैं। सावन का मूल उद्देश्य श्रद्धा, संयम और भगवान शिव की भक्ति से जुड़ा माना जाता है। इसलिए पूजा और व्रत करते समय धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य, स्वच्छता और अपनी क्षमता का ध्यान रखना भी आवश्यक है।

  • रेखा गुप्ता ने रवाना कीं नई ई बसें, दिल्ली करनाल रूट पर पांच एसी इलेक्ट्रिक बसों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

    रेखा गुप्ता ने रवाना कीं नई ई बसें, दिल्ली करनाल रूट पर पांच एसी इलेक्ट्रिक बसों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी

    नई दिल्ली ।दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में 200 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो गई हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली विश्वविद्यालय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से इन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। नई बसों के साथ राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या लगभग 5,000 तक पहुंच गई है। सरकार ने इस अवसर पर महिलाओं और छात्राओं के लिए विशेष बस सेवाओं की भी शुरुआत की है।

    नई व्यवस्था के तहत महिलाओं के लिए 28 अलग अलग रूटों पर 56 डेडिकेटेड लेडीज स्पेशल इलेक्ट्रिक बस सेवाएं शुरू की गई हैं। इनमें दिल्ली परिवहन निगम के अधिक मांग वाले 15 रूटों पर 30 विशेष ट्रिप संचालित होंगी। इन सेवाओं के माध्यम से आवासीय क्षेत्रों को नेहरू प्लेस, एम्स, साउथ एक्सटेंशन, आरके पुरम, कनॉट प्लेस, आईटीओ, दिल्ली सचिवालय, करोल बाग, कश्मीरी गेट और शिवाजी स्टेडियम जैसे प्रमुख इलाकों से जोड़ा जाएगा।

    विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत 13 रूटों पर 26 यूनिवर्सिटी लेडीज स्पेशल ट्रिप संचालित की जाएंगी। इन सेवाओं में दिल्ली के कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इनमें हिंदू कॉलेज, रामजस कॉलेज, दौलत राम कॉलेज, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, लेडी श्रीराम कॉलेज, गार्गी कॉलेज, हंसराज कॉलेज और श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स जैसे संस्थान शामिल हैं।

    नई बसों के बेड़े में अलग अलग क्षमता और आकार की इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इनमें 12 मीटर लंबी 88 इलेक्ट्रिक बसें और 9 मीटर लंबी 112 इलेक्ट्रिक बसें हैं। इनके शामिल होने के बाद दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन बेड़े में बसों की कुल संख्या करीब 6,800 तक पहुंचने की बात कही गई है। इसमें लगभग 4,938 इलेक्ट्रिक बसें और करीब 1,750 सीएनजी बसें शामिल हैं।

    सरकार के अनुसार इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाना और यात्रियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    नई बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और आपात स्थिति में सहायता के लिए पैनिक बटन जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। बसों को लो फ्लोर और वातानुकूलित बनाया गया है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, छात्रों और अन्य यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया गया है।

    दिल्ली और हरियाणा के बीच सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए दिल्ली करनाल अंतरराज्यीय ई बस सेवा भी शुरू की जा रही है। इस मार्ग पर पांच नई वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसें संचालित होंगी। करीब 133 किलोमीटर लंबे इस रूट पर दोनों दिशाओं में प्रतिदिन 10 10 फेरे चलाने की योजना है।

    इस पहल के साथ राजघाट डिपो एक में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन की शुरुआत भी की गई है। इससे इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए आवश्यक चार्जिंग ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी। राजधानी में इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के आधुनिकीकरण के साथ साथ स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    महिलाओं और छात्राओं के लिए निर्धारित विशेष सेवाओं से दिल्ली के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और व्यस्त इलाकों तक आवागमन आसान होने की उम्मीद है। वहीं अंतरराज्यीय ई बस सेवा से दिल्ली और करनाल के बीच यात्रियों को एक अतिरिक्त पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन विकल्प मिलेगा।

  • जेकेआरएलएम की पहल से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार और आय के बढ़े अवसर

    जेकेआरएलएम की पहल से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार और आय के बढ़े अवसर


    नई दिल्ली ।
    जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अवंतीपोरा में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने मिशन के सहयोग से फूड सर्विस एंटरप्राइज स्थापित कर यह साबित किया है कि उचित प्रशिक्षण, संसाधन और संस्थागत सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं। इस पहल के जरिए महिलाओं को सम्मानजनक आय का साधन मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं।

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को जम्मू-कश्मीर में जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन यानी जेकेआरएलएम के नाम से लागू किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना और उनकी आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है। अवंतीपोरा में शुरू किया गया फूड सर्विस उद्यम इसी प्रयास का एक उदाहरण है, जहां महिलाओं ने आजीविका के पारंपरिक साधनों से आगे बढ़कर कारोबार की दिशा में कदम रखा है।

    ग्रामीण विकास विभाग के सचिव एजाज असद ने बताया कि जेकेआरएलएम को ‘उम्मीद’ के नाम से भी जाना जाता है और इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक अवसरों का विस्तार किया है। उन्होंने कहा कि पुलवामा जिले में फूड सर्विस एंटरप्राइज शुरू किया गया है। इसके लिए राष्ट्रीय संसाधन संगठन ‘कुडुम्बश्री’ के साथ समझौता किया गया है। कुडुम्बश्री को फूड सर्विस से जुड़े उद्यमों को स्थापित करने और संचालित करने का अनुभव है।

    अधिकारियों के अनुसार पुलवामा सहित जम्मू-कश्मीर के 12 अन्य जिलों में भी इस तरह के उद्यम शुरू किए जा चुके हैं। योजना का लक्ष्य आने वाले समय में प्रदेश के सभी 20 जिलों तक इस मॉडल का विस्तार करना है। इन उद्यमों की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को दी जाएगी। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल समूह आधारित गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थायी आय और कारोबार के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

    जेकेआरएलएम की महिला अधिकारी शाबरा शर्मा ने बताया कि मिशन का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। अवंतीपोरा में स्थापित फूड सर्विस एंटरप्राइज इसी सोच के तहत विकसित किया गया है। महिलाओं को उद्यम संचालन से जोड़कर उन्हें व्यावसायिक अनुभव हासिल करने और अपनी आय बढ़ाने का अवसर दिया जा रहा है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन की समस्या भी महिलाओं के आर्थिक अवसरों में बाधा बनती है। इसे ध्यान में रखते हुए योजना के तहत जरूरतमंद महिलाओं को वाहनों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में करीब 96 हजार स्वयं सहायता समूह हैं, जिनसे लगभग साढ़े आठ लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के जरिए महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें उद्यमिता की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। अवंतीपोरा का फूड सर्विस उद्यम इसी बदलाव की तस्वीर पेश करता है, जहां ग्रामीण महिलाएं अब केवल आजीविका चलाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने कारोबार को आगे बढ़ाने और दूसरों के लिए रोजगार पैदा करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं।