Tag: WomenEmpowerment

  • उज्जैन में ई-साइकिल वितरण CM मोहन यादव ने ,PM मोदी के 12 साल पूरे होने पर की तारीफ

    उज्जैन में ई-साइकिल वितरण CM मोहन यादव ने ,PM मोदी के 12 साल पूरे होने पर की तारीफ


    उज्जैन । उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को इलेक्ट्रिक साइकिल की सौगात दी। यह ई-साइकिलें कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व निधि के तहत एक कंपनी की ओर से उपलब्ध कराई गई हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद रहीं।

    मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि यह पहल महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी क्योंकि इससे उनके रोजमर्रा के कामकाज में सुविधा बढ़ेगी और पेट्रोल-डीजल पर होने वाला खर्च भी कम होगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में ई-साइकिल एक बेहतर और पर्यावरण अनुकूल विकल्प बनकर सामने आई है, जो कामकाज को सरल और सुलभ बनाएगी।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विभिन्न जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से आई बहनों को यह ई-साइकिल उनके फील्ड वर्क में काफी मदद करेगी। उन्होंने इस पहल को महिला सशक्तिकरण और आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन वर्षों में देश ने सुशासन और विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं और भारत को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश लगातार प्रगति कर रहा है और आने वाले समय में यह गति और तेज होगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि वे बाबा महाकाल से प्रार्थना करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी तरह देश की सेवा करते रहें और देश को आगे बढ़ाते रहें। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी लाभार्थी महिलाओं को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

  • महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम, भोपाल में CM मोहन यादव का तीखा वार, हजारों बहनों ने निकाली पदयात्रा

    महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम, भोपाल में CM मोहन यादव का तीखा वार, हजारों बहनों ने निकाली पदयात्रा

    भोपाल । भोपाल की सड़कों पर रविवार को महिला आक्रोश और राजनीतिक संदेशों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला जब ‘जन-आक्रोश महिला पदयात्रा’ में हजारों की संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों को कुचलने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और जरूरत पड़ी तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बहनों की इच्छा और अधिकार के खिलाफ जाने वालों को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध करना देश की आधी आबादी के साथ अन्याय है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो नेता महिलाओं के अधिकार की बात करते हैं वही अब उनके हक को कमजोर करने में लगे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने महिलाओं की आकांक्षाओं को दबाने का काम किया है।

    सीएम डॉ. यादव ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारतीय समाज की परंपरा हमेशा से नारी शक्ति के सम्मान पर आधारित रही है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि समाज सुधारकों ने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है और आज भी वही विचारधारा आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिना नारी शक्ति के किसी भी समाज का विकास संभव नहीं है और सरकार हमेशा महिलाओं के साथ खड़ी है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हजारों महिलाओं का अभिवादन किया और कहा कि यह आक्रोश केवल विरोध नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए उठी आवाज है जिसे पूरे देश तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रही हैं और यह देश की शक्ति का प्रतीक है।

    इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि महिलाओं का अधिकार था जिसे जानबूझकर रोका गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका इस मामले में निराशाजनक रही है और यह कदम महिलाओं के सपनों पर चोट के समान है।

    कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने हाथों में स्लोगन लिखे पोस्टर लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कई जगहों पर नारों और गीतों के माध्यम से महिलाओं ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। पूरे आयोजन के दौरान राजधानी की सड़कों पर एक अलग ही माहौल देखने को मिला जहां सामाजिक और राजनीतिक चेतना का संगम नजर आया।

    मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरकार हर स्तर पर महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी इस दिशा में मजबूत कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा और अन्य मंचों पर महिलाओं के अधिकारों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा। पूरा आयोजन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि महिलाओं की शक्ति और उनके अधिकारों की अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया, जिसने भोपाल की सड़कों को जनआंदोलन के रंग में रंग दिया।

  • महिला शक्ति बनाम राजनीति ,मध्य प्रदेश में टिकट वितरण और भागीदारी, का पूरा लेखा जोखा


    भोपाल । भोपाल मध्य प्रदेश में महिला आरक्षण और राजनीति को लेकर बहस तेज हो गई है। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित न होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे लोकतंत्र के लिए काला अध्याय बताया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष के रवैये से उसकी महिला विरोधी सोच उजागर होती है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात बताया है। इसी मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में सियासत तेज हो गई है।

    लोकसभा 2024 के चुनाव में मध्य प्रदेश की सभी उनतीस सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने कब्जा किया। भाजपा ने इन सीटों पर छह महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया और सभी छह महिलाओं ने जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस ने उनतीस में से केवल एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा जो रीवा से नीलम अभय मिश्रा थीं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

    राज्यसभा में मध्य प्रदेश की ग्यारह सीटों में से आठ पर भारतीय जनता पार्टी और तीन पर कांग्रेस का प्रतिनिधित्व है। भाजपा के आठ राज्यसभा सांसदों में तीन महिलाएं शामिल हैं। कांग्रेस के तीनों राज्यसभा सांसदों में एक भी महिला प्रतिनिधि नहीं है। यह आंकड़ा संसद के उच्च सदन में महिलाओं की भागीदारी की स्थिति को स्पष्ट करता है।

    विधानसभा चुनाव 2023 में मध्य प्रदेश की दो सौ तीस सीटों में भाजपा ने एक सौ तिरसठ सीटें जीतीं और कांग्रेस ने छियासठ सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट अन्य दल के खाते में गई। दोनों प्रमुख दलों ने कुल छप्पन महिला प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा था जिनमें से सत्ताईस महिलाएं विधायक बनीं। भाजपा ने दो सौ तीस सीटों में से केवल सत्ताईस सीटों पर महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया जो लगभग ग्यारह प्रतिशत है। इनमें से इक्कीस महिलाएं जीतकर विधानसभा पहुंचीं। कांग्रेस ने उनतीस महिलाओं को टिकट दिया जो लगभग तेरह प्रतिशत है लेकिन केवल पांच महिलाएं विधायक बन सकीं।

    इसके विपरीत मध्य प्रदेश की पंचायत व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी काफी मजबूत दिखाई देती है। राज्य की कुल पंचायतों में लगभग दो लाख नब्बे हजार से अधिक महिला जनप्रतिनिधि सक्रिय हैं जो कुल प्रतिनिधियों का इक्यावन प्रतिशत से अधिक है। चौबीस जिला पंचायतों में महिलाएं अध्यक्ष के पद पर हैं। चार सौ चवालीस महिलाएं जिला पंचायत सदस्य हैं। एक सौ उनहत्तर महिलाएं जनपद अध्यक्ष हैं और तीन हजार चार सौ पच्चीस महिलाएं जनपद सदस्य के रूप में काम कर रही हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि जमीनी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी मजबूत है लेकिन विधानसभा और संसद स्तर पर उनकी संख्या अभी भी अपेक्षाकृत कम है।

    समग्र रूप से देखा जाए तो मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में पंचायत स्तर पर बेहतर स्थिति है लेकिन विधानसभा लोकसभा और राज्यसभा में राजनीतिक दलों द्वारा महिलाओं को टिकट देने की दर अभी भी सीमित है। यह मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और आने वाले चुनावों में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर दबाव और बढ़ने की संभावना है।

  • हौसलों की उड़ान: गांव की पहली बहू मीनाक्षी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

    हौसलों की उड़ान: गांव की पहली बहू मीनाक्षी बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल


    भोपाल । गुना जिले के बमोरी ब्लॉक से निकलकर एक साधारण ग्रामीण महिला ने आज ऐसी उड़ान भरी है जो पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है श्रीमती मीनाक्षी फराक्टे आज केवल एक नाम नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता और संघर्ष की पहचान बन चुकी हैं राजमाता स्व सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने न सिर्फ अपने जीवन को बदला बल्कि दर्जनों महिलाओं को रोजगार और आत्मविश्वास की राह दिखाई है

    मीनाक्षी शिवाजी राज सीएलएफ से जुड़ी हैं और उन्नत आजीविका प्रोसेसिंग केंद्र की सेंटर इंचार्ज के रूप में कार्य कर रही हैं उनका काम केवल प्रबंधन तक सीमित नहीं है बल्कि वह ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी निभाती हैं इस यात्रा की शुरुआत आसान नहीं थी लेकिन उन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदल दिया

    प्रोसेसिंग केंद्र में किसान दीदियों से कच्चा माल खरीदा जाता है और उसे प्रोसेस करके तैयार उत्पादों के रूप में बाजार में भेजा जाता है समूह की महिलाएं कभी घर घर जाकर कभी दुकानों में और कभी स्कूलों तथा आंगनवाड़ी के माध्यम से अपने उत्पादों की बिक्री करती हैं यह काम शुरुआत में बेहद कठिन था क्योंकि समाज में महिलाओं की इस भूमिका को लेकर भरोसा नहीं किया जाता था

    जब मीनाक्षी और उनकी साथी महिलाएं पहली बार दुकानों पर सामान लेकर पहुंचीं तो उन्हें कई सवालों का सामना करना पड़ा क्या आप समय पर सामान दे पाएंगी क्या गुणवत्ता बनी रहेगी क्या महिलाएं इस जिम्मेदारी को निभा सकती हैं ऐसे संदेह हर कदम पर उनके सामने खड़े थे कई बार उन्हें एक ही दुकान पर बार बार जाना पड़ा और दुकानदारों को समझाना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी

    धीरे धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी और लोगों का भरोसा बढ़ता गया लगातार प्रयास और गुणवत्ता के दम पर आज यह यूनिट लगभग सत्तर लाख रुपये की बिक्री कर चुकी है जिसमें अकेले मीनाक्षी का योगदान पच्चीस से तीस लाख रुपये तक रहा है उनकी व्यक्तिगत आय जो पहले केवल पांच हजार रुपये थी वह अब बढ़कर पच्चीस हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच चुकी है यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक सोच में भी बड़ा परिवर्तन है

    मीनाक्षी कहती हैं कि मार्केटिंग कोई कठिन काम नहीं है डर सिर्फ शुरुआत न करने से लगता है जब हम पहला कदम बढ़ाते हैं तो रास्ते खुद बनते जाते हैं उनका मानना है कि आत्मविश्वास और मेहनत के साथ कोई भी महिला अपने जीवन को बदल सकती है

    उनकी सफलता की कहानी यहीं खत्म नहीं होती हाल ही में उन्हें दिल्ली में आयोजित एआई समिट में भाग लेने का अवसर मिला जहां वे पहली बार हवाई जहाज में बैठीं यह अनुभव उनके जीवन का ऐतिहासिक पल था वे गर्व से कहती हैं कि वे अपने गांव की पहली बहू हैं जिसने फ्लाइट से यात्रा की है यह उपलब्धि उनके परिवार और पूरे गांव के लिए गर्व का विषय बन गई

    मीनाक्षी अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के समर्थन और योजनाओं को देती हैं उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं और समूह की शक्ति ने उनके जैसे कई जीवन बदल दिए हैं आज उनकी कहानी यह साबित करती है कि यदि हौसले मजबूत हों तो गांव की महिलाएं भी आसमान को छू सकती हैं और अपने सपनों को साकार कर सकती हैं

  • गणगौर पर्व की भव्य परंपरा: महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजीं, रायसेन में निकाली गई भव्य शोभायात्रा

    गणगौर पर्व की भव्य परंपरा: महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजीं, रायसेन में निकाली गई भव्य शोभायात्रा


    रायसेन । रायसेन शहर में लोक आस्था के महापर्व गणगौर को धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस पावन अवसर पर महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए कठिन उपवास रखा और शिव-पार्वती स्वरूप ईसर-गणगौर की विशेष पूजा-अर्चना की।

    दोपहर के समय मुखर्जी नगर से भव्य शोभायात्रा की शुरुआत हुई। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजीं, मंगल गीत गा रही थीं और नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुईं। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर मिश्र तालाब तक पहुंची। रास्ते में उपस्थित लोगों ने पुष्प वर्षा करके माता गणगौर का स्वागत किया।

    शोभायात्रा में शामिल महिलाओं और श्रद्धालुओं ने पूरे मार्ग में उत्सव का माहौल बनाए रखा। इस दौरान समाज के सभी वर्गों के लोग उपस्थित थे और उन्होंने अपने-अपने ढंग से महापर्व में भाग लिया।

    अंत में तालाब के घाट पर विधिपूर्वक गणगौर की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु और श्रद्धालु मौजूद रहे। उन्होंने गणगौर पूजन और आरती में भाग लेकर पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया।

    इस आयोजन से न केवल समाज में एकता और भाईचारे की भावना मजबूत हुई, बल्कि लोक संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान भी दिखाई दिया। महिलाएं उत्सव में प्रमुख रूप से शामिल रही और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए पूरे उत्सव को जीवंत और श्रद्धालु माहौल में बदल दिया।

    गणगौर पर्व का यह आयोजन शहर में सामाजिक और धार्मिक जीवन में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि महिलाओं की आस्था, समाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है।

  • ग्वालियर में लाड़ली बहना सम्मेलन, 122 करोड़ के 54 विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण

    ग्वालियर में लाड़ली बहना सम्मेलन, 122 करोड़ के 54 विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण

    ग्वालियर जिले के घाटीगांव में आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लाड़ली बहना सम्मेलन में शामिल होंगे और प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख से अधिक बहनों के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से 1836 करोड़ रुपए से अधिक की राशि अंतरित करेंगे। यह राशि योजना की 34वीं किस्त के रूप में दी जा रही है। वहीं ग्वालियर जिले की 3 लाख 2 हजार 850 महिलाओं के खातों में 44 करोड़ 83 लाख रुपए की राशि अंतरित की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस अवसर पर जिले में लगभग 122 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे 54 विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण भी करेंगे। इसमें 62 करोड़ रुपए के 19 कार्यों का लोकार्पण और 60 करोड़ रुपए के 35 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। इसके अलावा सरकार की विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आर्थिक सहायता भी वितरित की जाएगी।

    लाड़ली बहना सम्मेलन में केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, राज्य सरकार के मंत्री नारायण सिंह कुशवाह और प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाह, विधायक मोहन सिंह राठौर और जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश कुंवर सिंह जाटव सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम के दौरान राजमाता विजयाराजे सिंधिया एयर टर्मिनल, महाराजपुरा पहुंचेगे और वहां से हेलीकॉप्टर द्वारा घाटीगांव के पास देवनारायण मंदिर परिसर में बने हेलीपैड पर उतरेंगे। मुख्यमंत्री देवनारायण मंदिर और शबरी माता मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे और उसके बाद हेलीकॉप्टर से पुनः विमानतल पहुंचकर भोपाल के लिए प्रस्थान करेंगे।

    प्रदेश सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी क्रम में योजना के तहत नवंबर माह से मासिक सहायता में 250 रुपए की वृद्धि की गई है, जिससे अब पात्र हितग्राही महिलाओं को प्रतिमाह 1,500 रुपए की आर्थिक सहायता मिल रही है। जून 2023 से फरवरी 2026 तक योजना की 33 किस्तें जारी की जा चुकी हैं और इस दौरान 54,140 करोड़ रुपए सीधे महिलाओं के खातों में अंतरित किए गए हैं। अब योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि महिलाओं को कौशल उन्नयन, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

    लोकार्पित होने वाले प्रमुख कार्यों में करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुलैथ का भवन और 9.11 करोड़ रुपए की लागत से डाडा खिरक–तिघरा मार्ग पर सांक नदी पर बने उच्च स्तरीय पुल शामिल हैं। भूमिपूजन किए जाने वाले प्रमुख कार्यों में आईएसबीटी के समीप 6.17 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला 100 सीटर श्रमिक विश्रामगृह और 12.16 करोड़ रुपए की लागत से अंबेडकर धाम के द्वितीय चरण में बाबा साहब के जीवन पर आधारित संग्रहालय शामिल हैं। इसके अलावा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की नई सड़कों, आयुर्वेदिक महाविद्यालय के एनाटॉमी विभाग के हॉल और छात्रावास तथा भितरवार में नए शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण भी प्रस्तावित है।

  • हेमा मालिनी का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस संदेश: आप ईश्वर की अनमोल रचना हैं

    हेमा मालिनी का अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस संदेश: आप ईश्वर की अनमोल रचना हैं


    नई दिल्ली :8 मार्च का दिन हर महिला के लिए खास होता है क्योंकि इस दिन नारी शक्ति और महिलाओं की उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इस खास मौके पर हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी ने भी महिलाओं को अपना प्रेरक संदेश दिया।

    हेमा मालिनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया जिसमें विभिन्न प्रकार के फूल दिखाई दे रहे थे। यह सिर्फ फूल नहीं बल्कि महिलाओं के गुणों और उनकी विविध क्षमताओं का प्रतीक हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा, सभी महिलाओं के लिए एक संदेश – हर कोई अपने तरीके से असाधारण है, सभी कुशल मल्टीटास्कर हैं, उद्यमी हैं, अनुभवी व्यवसायी हैं जिन्होंने कार्य-जीवन संतुलन की कला में महारत हासिल कर ली है. आप सभी को मेरा हार्दिक संदेश, आप जहां भी हों! याद रखें, आप ईश्वर की एक अनूठी, अनमोल रचना हैं. बस अपने तरीके से जीवन का आनंद लेना सीखें!

    हेमा मालिनी स्वयं सशक्त महिला की मिसाल हैं। 80 के दशक में हिंदी सिनेमा पर राज करने वाली इस अभिनेत्री ने न केवल अपने सपनों को पूरा किया बल्कि अपने परिवार को भी संभाला। उन्होंने अपनी बेटी ईशा को हमेशा यही सलाह दी कि शादी के बाद भी अपने करियर और पहचान को जारी रखें। ईशा ने इंटरव्यू में खुलासा किया कि मां ने हमेशा काम करने की प्रेरणा दी और घर के साथ अपनी पहचान बनाए रखने की सीख दी।

    दो बेटियों की मां होने के बावजूद हेमा मालिनी आज भी राजनीति में सक्रिय हैं और मथुरा की सांसद हैं। भले ही वे फिल्मी पर्दे से दूर हैं, लेकिन उनका नाम आज भी देश की सशक्त महिलाओं में लिया जाता है। पति धर्मेंद्र के निधन के सिर्फ महीने भर बाद उन्होंने फिर से अपने काम में वापसी की थी। 70 से 80 के दशक में हेमा मालिनी का नाम सबसे अधिक फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में भी शामिल था। उन्होंने ‘शोले’ और ‘रजिया सुल्तान’ जैसी फिल्मों में अपने समय की सबसे ऊंची फीस ली थी।

    इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर हेमा मालिनी का संदेश महिलाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक है। उनका कहना है कि हर महिला अपने तरीके से खास है और उसे जीवन का आनंद लेने और अपने सपनों को पूरा करने से कोई रोक नहीं सकता।

  • 8 मार्च की कहानी: कैसे बन गया International Women’s Day महिलाओं के अधिकारों का प्रतीक

    8 मार्च की कहानी: कैसे बन गया International Women’s Day महिलाओं के अधिकारों का प्रतीक


    नई दिल्ली: दुनिया में हर साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है, जो महिलाओं की उपलब्धियों और उनके अधिकारों के लिए चल रहे संघर्ष का सम्मान करने का दिन है। यह दिन सिर्फ उत्सव नहीं बल्कि समाज में महिलाओं की स्थिति और उनके योगदान को पहचानने का अवसर भी है। साल 2026 के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम ‘Give To Gain’ रखी गई है। इसका संदेश यह है कि जब हम महिलाओं को शिक्षा, प्रशिक्षण, मेंटरशिप, न्याय, सुरक्षा और बराबर अवसर देते हैं, तो उसका लाभ पूरे समाज को मिलता है।

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास 20वीं सदी की शुरुआत से जुड़ा हुआ है। 1908 में कामकाजी महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया। उनका उद्देश्य महिलाओं के लिए बेहतर कामकाजी माहौल और समान अधिकार सुनिश्चित करना था। धीरे-धीरे यह दिन दुनिया भर में महिलाओं के अधिकार, मतदान के अधिकार और समानता का प्रतीक बन गया।

    1911 में जर्मनी, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और स्विट्जरलैंड में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया, जिसमें लाखों लोगों ने भाग लिया और महिलाओं के अधिकारों के समर्थन में रैलियां निकाली। ऑस्ट्रेलिया में 25 मार्च 1928 को महिलाओं ने समान काम के लिए समान वेतन, आठ घंटे का कार्यदिवस और बेरोजगारों के लिए बुनियादी वेतन की मांग करते हुए बड़े मार्च किए।

    शुरुआत में महिला दिवस अलग-अलग तारीखों पर मनाया जाता था। 1922 में सोवियत संघ के नेता व्लादिमीर लेनिन ने 8 मार्च को आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित किया। इसके बाद धीरे-धीरे यह दिन दुनिया के कई देशों में मान्यता प्राप्त कर गया। 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने भी इसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी और तभी से 8 मार्च पूरी दुनिया में महिलाओं के अधिकारों और समानता के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन गया।

    इस दिन समाज में महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक योगदान को पहचानने के साथ-साथ लैंगिक भेदभाव, कार्यस्थल पर असमानता, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और शिक्षा और अवसरों की कमी जैसे मुद्दों की ओर भी ध्यान दिलाया जाता है। सरकारें, संस्थाएं और समाज के लोग कार्यक्रम आयोजित करके महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान करते हैं और उन्हें बराबरी का अधिकार दिलाने के लिए जागरूकता फैलाते हैं।

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हमें यह याद दिलाता है कि महिलाओं को समान अवसर देना सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के विकास के लिए जरूरी है। जब महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलता है, तो समाज अधिक मजबूत और विकसित बनता है। 2026 की थीम ‘Give To Gain’ इस बात पर जोर देती है कि महिलाओं को समर्थन और संसाधन देने से पूरे समाज को लाभ होता है और समानता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए जा सकते हैं।
  • प्रधानमंत्री मोदी और बड़े नेताओं ने सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें नमन किया, नारी सशक्तिकरण और शिक्षा में योगदान की सराहना

    प्रधानमंत्री मोदी और बड़े नेताओं ने सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें नमन किया, नारी सशक्तिकरण और शिक्षा में योगदान की सराहना


    नई दिल्ली । देश की पहली महिला शिक्षिका और नारी सशक्तिकरण की प्रतीक सावित्रीबाई फुले की जयंती शनिवार को धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह और कई अन्य नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर हम उस अग्रणी समाज सुधारक को स्मरण करते हैं जिन्होंने सेवा और शिक्षा के जरिए सामाजिक बदलाव के लिए अपना जीवन समर्पित किया। वे समानता न्याय और करुणा के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध थीं। उनका मानना था कि शिक्षा सामाजिक बदलाव का सबसे शक्तिशाली साधन है।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को शिक्षा के मूल अधिकार से जोड़कर नारी सशक्तिकरण को नई दिशा दी। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए देश के पहले बालिका विद्यालय की स्थापना की और समाज सुधार की अलख जगाई। उनका प्रेरणादायी जीवन राष्ट्र निर्माण में सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा।

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया नारी शिक्षा व सशक्तिकरण के लिए जीवनपर्यंत संघर्ष करने वाली महान समाज सुधारिका भारत की प्रथम महिला शिक्षिका श्रद्धेय माता सावित्रीबाई फुले जी की जयंती पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूं। शोषितों-वंचितों और नारी उत्थान के लिए आपने जो अभूतपूर्व कार्य किए हैं वे सदैव समाज के नवनिर्माण के लिए हम सबको प्रेरित करते रहेंगे।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा ‘क्रांतिज्योति’ सावित्रीबाई फुले ने अपने साहस संघर्ष और दूरदर्शिता से समाज में शिक्षा समानता व महिला अधिकारों की अलख जगाई। उनका जीवन सामाजिक परिवर्तन और मानवीय गरिमा का प्रतीक है। नारी सशक्तिकरण के लिए आजीवन संघर्षरत रहीं सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

    सावित्रीबाई फुले का जीवन समाज में शिक्षा के प्रसार और महिलाओं के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष को दर्शाता है। उन्होंने न केवल महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार खोले बल्कि अपने समय में प्रचलित जातिवाद और महिला शोषण के खिलाफ भी आवाज उठाई। उनके योगदान को आज भी समाज सुधारकों और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे लोगों द्वारा याद किया जाता है।

  • सुधा मूर्ति ने राज्यसभा में पेश किया निजी संकल्प, सभी सांसदों ने प्रस्ताव को दिया समर्थन

    सुधा मूर्ति ने राज्यसभा में पेश किया निजी संकल्प, सभी सांसदों ने प्रस्ताव को दिया समर्थन


    नई दिल्‍ली । राज्यसभा(Rajya Sabha) में शुक्रवार को उस समय एक ऐसा दृश्य भी देखने को मिला जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम सांसद(Member of Parliament) एकसाथ खड़े नजर आए। विभिन्न दलों के सदस्यों ने मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति के एक निजी संकल्प की सराहना की, जिसमें उन्होंने तीन से छह साल के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा और पोषण गारंटी का प्रस्ताव दिया था। सुधा मूर्ति ने एक निजी संकल्प पेश करते हुए कहा कि एक शिक्षित माता अर्थव्यवस्था में अपना विशेष योगदान देती है। उन्होंने यह भी कहा कि गर्भवर्ती महिलाओं(Pregnant women) और स्तनपान कराने वाली माताओं को सही पोषण देने से बच्चों का समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है। संकल्प में छोटे बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य सेवाएं और प्री-प्राइमरी(Pre-primary) शिक्षा की पर्याप्त सुविधाएं शामिल किए जाने का भी संकल्प है।

    उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का नाम बदलकर आशा कार्यकर्ता या दीपम् कार्यकर्ता करना चाहिए। प्रस्ताव का समर्थन करते हुए डीएमके के पी. विल्सन ने कहा, 12वीं तक की शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए। आप की स्वाति मालीवाल ने भी इसका समर्थन किया।

    सुधा मूर्ति के निजी संकल्प में प्रावधान किया गया है कि तीन से छह वर्ष के सभी बच्चों के लिए पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं, प्री प्राइमरी शिक्षा सहित निशुल्क एवं अनिवार्य प्रारंभिक बाल्यवस्था एवं प्रारंभिक शिक्षा की गारंटी देने के लिए संविधान में एक नवीन अनुच्छेद अत:स्थापित करने पर विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि तीन से छह वर्ष तक बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास समुचित ढंग से होना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे के अभिभावक इतने शिक्षित और जानकार नहीं होते कि वे इस पक्ष की ओर ध्यान दे पायें।

    मनोनीत सदस्य ने कहा कि यदि इस आयु में बच्चों को आंगनवाड़ी भेज कर उन्हें समुचित पोषण और शिक्षा दी जाये तो उन्हें आगे चलकर एक अच्छा नागरिक बनाने और साफ-सफाई का ध्यान रखने आदि के अच्छे गुण सिखाये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे केंद्रों पर बच्चा जाता है तो उसके अंदर विभिन्न शारीरिक कमियों जैसे देखने, बोलने की क्षमता में कमी और कुपोषण से होने वाली समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है क्योंकि वहां बच्चों की समय समय पर जांच होती है।

    मूर्ति ने सुझाव दिया कि जिस तरह से सरकार ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढाओ’ का अभियान छेड़ा है ठीक उसी तरह तीन से छह साल तक के बच्चों को आंगनवाड़ी में भेजने के लिए अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि इस काम में निगमित दायित्व कोष (सीएसआर) की भी मदद ली जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का नाम बदलकर आशा कार्यकर्ता या दीपम् कार्यकर्ता करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘यदि हमें अपने देश को विकसित राष्ट्र बनाना है तो हमें अपने बच्चों की तीन से छह वर्ष की आयु में विकास पर ध्यान देना होगा।’’

    उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने जब इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की और जब जमशेदपुर में टाटा की नौकरी का विज्ञापन देखा जिसमें लिखा था कि इसमें महिलाएं आवेदन नहीं करें। उन्होंने जे आर डी टाटा को एक पोस्टकार्ड लिखकर कहा कि उनकी कंपनी देश की आधी आबादी से अवसर क्यों छीन रहीं है क्योंकि देश के विकास में आधी आबादी को भी भूमिका निभाने का अवसर मिलना चाहिए।

    मूर्ति ने कहा कि यह जेआरडी टाटा की महानता थी कि उन्होंने एक अपरिचित लड़की का सुझाव मानते हुए लड़कियों अपने यहां काम करने का अवसर दिया।

    भारतीय जनता पार्टी की मेधा विश्राम कुलकर्णी ने कहा कि वह मूर्ति द्वारा आंगनवाड़ी को सशक्त बनाने के लिए लाये गये इस प्रस्ताव का समर्थन करती हैं।

    उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से वह देश के विभिन्न भागों में आंगनवाड़ी के कामकाज देखने गयी थीं और उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अधिकतर राज्यों में आंगनवाड़ी में बहुत अच्छा कामकाज होता है।

    कुलकर्णी ने कहा कि कोविड के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने जितना काम किया, जितनी चिकित्सकों की सहायता की, घर-घर जाकर रोगियों के बारे में जानकारी ली, वैसा कहीं और देखने को नहीं मिलता है।

    उन्होंने सुझाव दिया कि आंगनवाड़ी की कक्षाएं चलाने के लिए ऐसी कार्यकर्ताओं को अधिक कोष दिया जाना चाहिए।

    चर्चा में भाग लेते हुए द्रमुक के पी विल्सन ने तमिलनाडु में स्कूली शिक्षा के लिए केंद्र द्वारा दिया जाने वाला धन रोके जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने शिक्षा अर्हता परीक्षा को अनिवार्य बनाये जाने के नियम का विरोध करते हुए कहा कि इससे देश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की बड़ी कमी होने की आशंका है।

    आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल् ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि जापान सहित विभिन्न देशों में तीन से छह वर्ष की आयु के बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास पर बहुत ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आज भारत में शिक्षा का विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क है लेकिन इनकी गुणवत्ता में काफी अंतर है।

    उन्होंने कहा कि आज तीन से छह वर्ष के बच्चों के विकास के लिए गली गली में प्ले स्कूल हैं जो केवल अमीर एवं मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए ही खुले हैं। उन्होंने कहा कि गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी केंद्र होते है किंतु उनकी कार्यकर्ताओं पर इतना बोझ होता है कि वे बच्चों के विकास पर समुचित ध्यान नहीं दे पातीं।