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  • अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात

    अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनावों से पहले नेताओं के घोषणाएं और वादे चर्चा का विषय बन जाते हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिलाओं को सालाना 40,000 रुपये देने का वादा किया है। उन्होंने इसे बीजेपी के बिहार चुनाव में दिए गए 10,000 रुपये के वादे का जवाब बताया। इस घोषणा पर अयोध्या की महिलाओं की क्या राय है, यह जानने के लिए यूपी Tak की टीम ने गांव में जाकर उनकी प्रतिक्रिया ली।

    महिलाओं ने की उम्मीदें जाहिर

    अयोध्या के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने इस योजना पर अपनी राय दी और अपनी उम्मीदों का इज़हार किया। एक स्थानीय महिला सुंदर कली ने कहा, अखिलेश यादव का यह प्रस्ताव अच्छा है, हम लोग मजदूरी करते हैं, इससे अच्छा होगा कि हमें पैसा मिले। अभी सरकार की तरफ से हमें कुछ नहीं मिलता, केवल मजदूरी करते हैं। अगर अखिलेश यादव देंगे तो ठीक है, नहीं तो हम अपना काम करते रहेंगे।

    विकास की उम्मीदें भी बनीं मुद्दा

    वहीं कश्मीरा देवी ने कहा, हम लोग मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं। अगर सरकार कुछ मदद करेगी तो अच्छा रहेगा, लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। सरकार बढ़िया नहीं काम कर रही है, जो विकास करेगा हम उसके साथ रहेंगे। विमला देवी ने भी कहा, समाजवादी सरकार के समय पेंशन मिलती थी और सड़कें बनती थीं। अब कुछ नहीं मिल रहा है। हमें विकास और रोजगार दोनों चाहिए।

    महिलाओं की मांग-पैसा नहीं, विकास और रोजगार भी चाहिए

    ममता नाम की महिला ने कहा, यह अच्छा है कि पैसा मिलेगा, इससे हमारी रोज़ी-रोटी में मदद होगी। गरीब बच्चों को भी फायदा होगा, लेकिन सिर्फ पैसा नहीं, हमें काम भी चाहिए। अगर पैसा मिलेगा तो वोट देंगे, नहीं मिला तो कोई बात नहीं। वहीं अन्य महिलाओं ने भी इस योजना का स्वागत किया, लेकिन साफ किया कि अगर वादा पूरा नहीं हुआ तो वे वोट नहीं देंगी।

    योगी सरकार से तुलना

    महिलाओं ने योगी सरकार की योजनाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें विधवा पेंशन के रूप में 2,000 रुपये मिलते हैं, लेकिन इसके बावजूद गांव में विकास की कमी महसूस हो रही है। रोज़मर्रा की सुविधाओं और रोजगार के मामले में उन्हें अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    समाजवादी पार्टी और बीजेपी का मुकाबला

    अखिलेश यादव का यह वादा महिलाओं के बीच उम्मीद और नाखुशी का मिश्रित असर छोड़ रहा है। हालांकि, उनका कहना है कि वे सिर्फ पैसे के लिए नहीं, बल्कि स्थिरता, रोजगार और विकास के लिए भी वोट देंगे। यह साफ है कि महिलाएं अपनी जिंदगी में सुधार और अपने गांव के विकास को भी उतना ही महत्व देती हैं जितना कि चुनावी वादों को।

  • कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की मुश्किलें बढ़ीं, महिलाओं पर विवादित टिप्पणी को लेकर दूसरा केस दर्ज

    कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की मुश्किलें बढ़ीं, महिलाओं पर विवादित टिप्पणी को लेकर दूसरा केस दर्ज


    नई दिल्ली/ कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की महिलाओं और लड़कियों पर विवादित टिप्पणियों के चलते कानूनी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मथुरा कोर्ट में उनके खिलाफ दूसरा केस दर्ज किया गया है।

    इस नए मामले की शिकायत हिंदूवादी नेता गुंजन शर्मा ने दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि आचार्य की विवादित टिप्पणियाँ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थीं और यह महिलाओं का अपमान करने वाला मामला है। उन्होंने कहा कि पहले प्रशासन और पुलिस से शिकायत की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए अदालत का सहारा लेना पड़ा।

    विवादित टिप्पणी का विषय
    शिकायत के अनुसार, अनिरुद्धाचार्य ने कथित तौर पर कहा था कि 14 साल की बेटियों की शादी कर देनी चाहिए, वरना उनका चरित्र प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी की, जिसमें घरेलू महिलाओं से लेकर बच्चियों तक का ज़िक्र था।

    पहला केस और मीरा राठौड़ की भूमिका
    यह पहला मौका नहीं है जब आचार्य को विवादित बयानों के लिए कानूनी चुनौती मिली है। इससे पहले हिंदूवादी नेता मीरा राठौड़ ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था। मीरा राठौड़ ने आचार्य की टिप्पणियों को महिलाओं के सम्मान का उल्लंघन बताया था और कोर्ट में सुनवाई शुरू होने तक अपनी चोटी न बांधने की प्रतीकात्मक प्रतिज्ञा रखी थी।

    कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया
    मथुरा स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने गुंजन शर्मा की याचिका पर 10 दिसंबर 2025 को आधिकारिक रूप से परिवाद दर्ज किया। अगली सुनवाई 1 जनवरी 2026 तय की गई है, जिसमें वादी के बयान दर्ज होंगे और मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू होगी।

    अनिरुद्धाचार्य का स्पष्टीकरण
    विवाद बढ़ने के बाद अनिरुद्धाचार्य ने वीडियो जारी कर माफी मांगी थी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उनका इरादा कभी भी महिलाओं का अपमान करने का नहीं था। उनका दावा है कि उनकी टिप्पणियाँ केवल कुछ लड़कियों के संदर्भ में थीं, पूरे महिला समाज के लिए नहीं।

    इस नए केस के साथ, कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं, और अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है।