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  • दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर रहा पाकिस्तान का लाहौर…. खतरनाक स्तर पर पहुंची वायु गुणवत्ता

    दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर रहा पाकिस्तान का लाहौर…. खतरनाक स्तर पर पहुंची वायु गुणवत्ता


    लाहौर।
    पाकिस्तान (Pakistan) का लाहौर (Lahore) शुक्रवार को दुनिया का सर्वाधिक प्रदूषित शहर (Most Polluted City) रहा। एक वायु गुणवत्ता निगरानी मंच के अनुसार, शहर में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच गई और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लेवल 410 दर्ज किया गया। एक्यूआई वायु प्रदूषण मापने का संख्यात्मक पैमाना है। इसका स्तर जितना अधिक होता है, हवा की गुणवत्ता उतनी ही खराब होती है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं।

    स्विट्जरलैंड के निगरानी मंच आईक्यूएयर के पैमाने के अनुसार, 300 से अधिक एक्यूआई को ‘खतरनाक’ श्रेणी में रखा जाता है। आईक्यूएयर की रिपोर्ट के अनुसार, लाहौर में पीएम2.5 प्रदूषकों की सांद्रता विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वार्षिक दिशानिर्देश मूल्य से 45.2 गुना अधिक थी।

    पीएम2.5 का मतलब 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले बारीक कणों से है। ये कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं। इनके लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

    पंजाब प्रांत की सरकार के अनुसार, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लाहौर और अन्य हिस्सों में हर साल अक्टूबर से फरवरी के बीच धुंध छाने की समस्या रहती है। हाल के वर्षों में वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर इस प्रांत में सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ी चिंता बनकर उभरा है।

  • दुनिया के लिए नजीर बना ताइवान… आरक्षण ने बदली संसद की तस्वीर…. 42% सीटों पर महिलाएं काबिज

    दुनिया के लिए नजीर बना ताइवान… आरक्षण ने बदली संसद की तस्वीर…. 42% सीटों पर महिलाएं काबिज


    ली युआन।
    भारत (India) में संसद से लेकर विधानसभाओं तक महिलाओं के उचित प्रतिनिधित्व के लिए चल रही सियासत के बीच ताइवान (Taiwan) दुनियाभर के लिए नजीर बनकर सामने आया है। जिस ताइवान (Taiwan) को दुनिया अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर चिप (State-art Semiconductor Chip) के सबसे बड़े निर्माता के नजरिये से देखती है, उसी 2.3 करोड़ की आबादी वाले द्वीप ने लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी के लिए और लैंगिक भेदभाव खत्म करने के लिए दुनिया का सबसे लंबा अभियान चलाया है।

    करीब 80 साल पहले शुरू की गई आरक्षण व्यवस्था का नतीजा यह निकला कि आज ताइवान की संसद में 42% सीटों पर महिलाएं काबिज हैं। यह पूरे एशिया में सबसे अधिक है और यूरोपीय देशों के बराबर है। यही नहीं, ताइवान 2016 में त्साइ इंग-वेन के रूप में अपनी पहली महिला राष्ट्रपति चुन चुका है और दो बार महिलाओं को उप-राष्ट्रपति भी बना चुका है। इस उपाय ने ऐसा रास्ता तैयार किया कि आज बड़ी संख्या में महिलाएं सामान्य चुनावी मुकाबलों में भी अपनी जगह बना रही हैं।

    खास बात यह है कि ताइवान ने 2008 में एकल-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों में लैंगिक कोटा समाप्त कर दिया। इसके बाद भी संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ता रहा। ताइवान का यह प्रयोग साबित करता है कि जब महिलाओं को कानूनी सुरक्षा (कोटा) के जरिए शुरुआती मंच दिया जाता है, तो समय के साथ वे अपनी काबिलियत के दम पर उस बैसाखी को बेअसर कर देती हैं और बराबरी के मैदान में अपनी योग्यता का परचम लहराती हैं।


    1946 से बदलाव की नींव, 5-10% आरक्षण से शुरू हुआ सफर

    ताइवान ने महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए आरक्षित सीटों और चुनावी कोटा का इस्तेमाल दूसरे कई देशों से पहले शुरू किया था। जरूरत पड़ने पर समय-समय पर इसमें बदलाव भी करता रहा।

    चीन गणराज्य ने 1946 के संविधान में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की थीं। 1949 में जब नेशनलिस्ट सरकार ताइवान स्थानांतरित हुई, तो तानाशाही दौर के बावजूद स्थानीय चुनावों में 5 से 10% कोटा लागू रखा गया।


    2002 का क्रांतिकारी नियम :

    यदि किसी जिला परिषद सीट से 4 या उससे अधिक सदस्य चुने जाते हैं, तो कम से कम 1 सीट महिला उम्मीदवार को मिलेगी। इससे राजनीतिक दलों में महिला उम्मीदवारों को टिकट देने की होड़ मच गई। ताइवान की 113 सदस्यीय संसद में 47 महिलाएं हैं। वर्ष 1992 के आसपास संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी थी। इसके बाद इसमें लगातार वृद्धि हुई।


    जीत के लिए आरक्षित सीटों की जरूरत खत्म

    नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी की प्रो. चांग-लिंग हुआंग कहती हैं, लोग तर्क देते हैं कि चुनाव का मकसद केवल सबसे बेहतर और सबसे सक्षम व्यक्ति को चुनना होना चाहिए। ताइवान का अनुभव बताता है कि लैंगिक आरक्षण ही वह माध्यम है, जो किसी समाज को वास्तव में सबसे बेहतर और सबसे सक्षम लोगों को चुनने का मौका देता है। 2002 में 31 जिलों में कोटे का इस्तेमाल करना पड़ा था, वहीं 2022 में केवल 4 जिलों में ही इसकी जरूरत पड़ी, यानी महिलाएं आसानी से पुरुषों को हरा रही हैं।

  • असमानता…. दुनिया में 82.6 करोड़ लोग 3 डॉलर से कम पर गुजारा करने को मजबूर… 10% के पास 75% संपत्ति

    असमानता…. दुनिया में 82.6 करोड़ लोग 3 डॉलर से कम पर गुजारा करने को मजबूर… 10% के पास 75% संपत्ति


    नई दिल्ली।
    दुनिया में संपत्ति बढ़ रही है, लेकिन करोड़ों लोगों के जीवन में बुनियादी जरूरतें अब भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। वैश्विक गरीबी (Global Poverty) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 82.6 करोड़ से अधिक लोग प्रतिदिन तीन डॉलर से कम पर गुजारा करने को मजबूर हैं। करीब 280 करोड़ लोगों के पास सुरक्षित, सुलभ और पर्याप्त आवास नहीं है, जबकि लगभग 380 करोड़ बीमारी, बेरोजगारी और वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा के अभाव से जूझ रहे हैं। वर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब (World Inequality Lab) की रिपोर्टों के अनुसार दुनिया के 10% सबसे अमीरों (10 Percent Richest) के 75% संपत्ति (75 Percent Wealth ) है, जबकि आधी आबादी के पास महज 2% संपत्ति है।


    वैश्विक आय में सिर्फ 10% हिस्सा

    रिपोर्ट के मुताबिक, आय का वितरण बेहद असमान है। दुनिया की शीर्ष 10% आबादी को कुल वैश्विक आय का आधे से अधिक हिस्सा मिलता है, जबकि निचली आधी आबादी की हिस्सेदारी 10 फीसदी से भी कम है। सबसे धनी 0.001 फीसदी यानी 60 हजार से भी कम लोग वैश्विक संपत्ति के छह फीसदी से अधिक हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं।


    भारत की तस्वीर भी अच्छी नहीं

    भारत के शीर्ष 1% लोगों के पास राष्ट्रीय संपत्ति का करीब 40% और शीर्ष 10% के पास करीब 65% हिस्सा है। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में संपत्ति की परिभाषा, आकलन पद्धति के कारण तस्वीर एकदम स्पष्ट नहीं कही जा सकती।

    अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 28.4 करोड़ कामगार अत्यंत गरीबी में जी रहे थे। यह रोजगार प्राप्त लोगों का लगभग 7.9 फीसदी था। इससे पता चलता है कि केवल काम मिल जाना गरीबी से बाहर निकलने की गारंटी नहीं है।

  • हूतियों के हमलों से दहला सऊदी… दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी अरामको पर दागी मिसाइल

    हूतियों के हमलों से दहला सऊदी… दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल कंपनी अरामको पर दागी मिसाइल


    नई दिल्ली।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) और यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) के बीच छिड़ा संघर्ष अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. मंगलवार देर रात सऊदी अरब के पूर्वी शहर धहरान (Dharan) में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ (World’s Largest oil company, ‘Saudi Aramco’) के प्रशासनिक परिसर को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया गया. सऊदी सरकारी समाचार एजेंसी एसपीए ने बुधवार को ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले के बाद इमारत में आग लगी, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि मिसाइल हमले में ऑफिस बिल्डिंग की ऊपरी तीन मंजिलों को नुकसान पहुंचा. सूत्र और मामले से परिचित दो अन्य लोगों ने इमारत में आग लगने की जानकारी दी. हालांकि, हमले की जिम्मेदारी को लेकर उपलब्ध रिपोर्ट में स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।

    अरामको का यह परिसर कंपनी के एक प्रमुख संचालन केंद्र के रूप में काम करता है. दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल अरामको सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था का अहम आधार है. इसके संचालन नेटवर्क में तेल के कुएं, पाइपलाइन, रिफाइनरी और निर्यात टर्मिनल शामिल हैं।


    रियाद समेत कई इलाकों में मिसाइल और ड्रोन नष्ट करने का दावा

    सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि धहरान के ऊपर रोकी गई एक मिसाइल के टुकड़े आवासीय इलाके में गिरे. हालांकि, इससे हुए नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई. अधिकारियों ने रियाद और देश के दक्षिणी हिस्से में भी मिसाइलों तथा ड्रोन को रोककर नष्ट करने की जानकारी दी।

    इससे पहले मंगलवार को सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हूतियों को बार-बार हमले करने के गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी.

    रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह से हूती विद्रोही सऊदी अरब के अहम ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं. इनमें राजधानी रियाद का हवाई अड्डा भी शामिल है. शनिवार को रियाद हवाई अड्डे पर हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमले में 13 लोगों की मौत की जानकारी दी गई थी. रिपोर्ट इसे पिछले एक दशक में सऊदी अरब पर हुआ सबसे घातक हमला बताती है. लगातार हमलों के कारण देश में उड़ान सेवाएं भी प्रभावित हुईं. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया, जब सऊदी अरब में एक बड़े ऊर्जा सम्मेलन का आयोजन हो रहा था।


    हूतियों ने पहले ही अरामको को दी थी धमकी

    धहरान पर हमले से पहले हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने यमन की राजधानी सना पर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हमलों के जवाब में ‘कड़ी और दर्दनाक’ कार्रवाई की चेतावनी दी थी. उनके मुताबिक, संभावित निशानों में धहरान स्थित अरामको मुख्यालय और रियाद की एक तेल रिफाइनरी शामिल थे.हूतियों ने सऊदी अरब में तेल क्षेत्र के कर्मचारियों को भी उन ठिकानों से दूर रहने की चेतावनी दी थी, जिन्हें वे संभावित लक्ष्य मानते हैं।


    सना में तेल डिपो पर भी हमला

    हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सऊदी अरब सना पर हमले कर रहा है. दूसरी ओर, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की राजधानी के बाहरी इलाके में स्थित एक तेल डिपो से नागरिकों को दूर रहने की चेतावनी दी. हूती संचालित अल-मसीरा टेलीविजन ने बताया कि गठबंधन ने यमन पेट्रोलियम कंपनी के सबाह केंद्रीय स्टेशन को निशाना बनाया. यह ईंधन डिपो सना के बाहर स्थित है. गठबंधन ने स्टेशन और अन्य ठिकानों पर हमले की पुष्टि की. उसका कहना था कि कार्रवाई का उद्देश्य हूतियों की सऊदी अरब, यमन और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खतरा पहुंचाने की क्षमता को कमजोर करना था।

  • ‘भारत से दुनिया में जाए शांति का संदेश’, ईरानी राष्ट्रपति से भारतीय धर्मगुरुओं ने की मुलाकात

    ‘भारत से दुनिया में जाए शांति का संदेश’, ईरानी राष्ट्रपति से भारतीय धर्मगुरुओं ने की मुलाकात


    नई दिल्ली।
    भारत के विभिन्न धर्मगुरुओं ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। इस दौरान वैश्विक शांति, न्याय, मानवता और संवाद के जरिए विवादों के समाधान पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दीनशीन हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि भारत की धरती से पूरी दुनिया के लिए शांति और भाईचारे का संदेश जाना चाहिए।

    हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत के विभिन्न धर्मगुरु मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सदियों से कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत की धरती से ‘सबके लिए प्यार और किसी से नफरत नहीं’ का संदेश दिया जाता रहा है। आज जब दुनिया के कई बड़े नेता भारत में एकत्र हुए हैं, तब इस संदेश का महत्व और बढ़ जाता है।

    उन्होंने कहा कि संदेश स्पष्ट है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। अगर अन्याय होता है तो उसका जवाब दिया जाना चाहिए। भारत हमेशा न्याय, करुणा, दया और एकता जैसे मूल्यों पर विश्वास करता रहा है। पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हुए सभी को मिलकर मानवता की सेवा करनी चाहिए।

    आचार्य लोकेश मुनि ने ईरान में शांति सम्मेलन का दिया प्रस्ताव

    जैन आध्यात्मिक गुरु आचार्य लोकेश मुनि ने बताया कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को ईरान में शांति सम्मेलन आयोजित करने का न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया की नजर इस समय भारत पर है और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच शांति के लिए पहल करने का यह महत्वपूर्ण अवसर है।

    आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि धर्मगुरुओं का स्पष्ट मानना है कि युद्ध, हिंसा और आतंक किसी भी समस्या का समाधान नहीं हैं। विवादों को बातचीत, संवाद और शांति के प्रयासों के जरिए हल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्रपति ने शांति सम्मेलन के उनके निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है।

    उन्होंने बताया कि जल्द ही एक मंच पर धर्मगुरुओं और दुनिया में शांति की इच्छा रखने वाली ताकतों को एकत्र किया जाएगा। इस मंच के जरिए बातचीत और संवाद के माध्यम से वैश्विक शांति की दिशा में प्रयास करने की योजना है।

    मीरवाइज उमर फारूक ने युद्ध खत्म करने की अपील की

    मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि बैठक में धर्मगुरुओं, कारोबारी प्रतिनिधियों और विद्वानों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में सबसे बड़ा संदेश शांति का होना चाहिए। नई दिल्ली में ब्रिक्स की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान दुनिया के बड़े नेताओं की मौजूदगी इस संदेश को और प्रभावी बनाती है।

    फारूक ने कहा कि स्थायी शांति तभी संभव है, जब न्याय सुनिश्चित हो। उन्होंने ईरान की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि अमेरिका की ओर से ईरान पर थोपा गया युद्ध गलत है। उन्होंने फलस्तीन और लेबनान के हालात का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं के कारण दुनिया में अराजकता की स्थिति पैदा हो रही है और इसका समाधान जरूरी है।

    उन्होंने बताया कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी मानवता को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। उनके मुताबिक, अगर शांति की दिशा में आगे बढ़ना है तो इंसानियत को सबसे अधिक महत्व देना होगा। आज का समय बातचीत और कूटनीति का है, युद्ध का नहीं।

    ‘अब युद्ध खत्म करने का समय’

    मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि मानव मूल्यों में विश्वास रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को युद्ध के बजाय संवाद और कूटनीति की पैरवी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब युद्ध खत्म करने और बातचीत को मौका देने का समय है। उनके मुताबिक, गंभीर वैश्विक संकट का समाधान निकालने का रास्ता बातचीत और समझौते की प्रक्रिया से ही निकल सकता है।

    भारत और ईरान के संबंधों का उल्लेख करते हुए फारूक ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में जहां भी ज्यादती और जुल्म हो रहा है, उसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने ईरान और फलस्तीन का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया की बड़ी ताकतों को मिलकर मजबूत संदेश देना चाहिए कि युद्ध समाप्त होना चाहिए और बातचीत एवं कूटनीति को अवसर दिया जाना चाहिए।

  • X न्यूज का नंबर-1 सोर्स, एलन मस्क का बड़ा दावा, बोले- दुनिया के सभी अखबारों से ज्यादा है मासिक रीडरशिप

    X न्यूज का नंबर-1 सोर्स, एलन मस्क का बड़ा दावा, बोले- दुनिया के सभी अखबारों से ज्यादा है मासिक रीडरशिप


    नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को लेकर अमेरिकी बिजनेसमैन एलन मस्क ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि X दुनिया में खबरों का नंबर-1 सोर्स बन चुका है। मस्क के मुताबिक, हर महीने X को पढ़ने वाले लोगों की संख्या दुनिया के सभी अखबारों की कुल सर्कुलेशन से भी अधिक है। उन्होंने यह बात X पर एक पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कही।

    मस्क ने अपने पोस्ट में कहा कि X धरती पर खबरों का नंबर-1 सोर्स है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्लेटफॉर्म की मासिक रीडरशिप दुनिया भर के सभी अखबारों की संयुक्त सर्कुलेशन से ज्यादा है। मस्क के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर X की न्यूज भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    यूरोप में भी X की बढ़ती लोकप्रियता का दावा

    मस्क ने जिस पोस्ट को रीपोस्ट किया, उसमें यूरोप में X के बढ़ते प्रभाव का जिक्र किया गया था। पोस्ट के मुताबिक, यूरोप के लगभग सभी देशों में X न्यूज ऐप्स के बीच नंबर-1 स्थान पर है। इसमें दावा किया गया कि यूरोपीय देशों के लोग खबरों और सूचनाओं के लिए अब X का इस्तेमाल पहले से ज्यादा कर रहे हैं।

    रीपोस्ट की गई पोस्ट में यह भी कहा गया कि यूरोप ने कई वर्षों तक X की आलोचना की, लेकिन इसके बावजूद प्लेटफॉर्म अब वहां खबरों के प्रमुख माध्यमों में शामिल हो रहा है। पोस्ट में लोगों के X की तरफ बढ़ते रुझान का भी दावा किया गया।

    फिलहाल मस्क का दावा, आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी

    इन दावों को लेकर यह ध्यान रखना जरूरी है कि संबंधित आंकड़े X पर साझा की गई पोस्ट में दिए गए हैं। मस्क ने इन्हीं दावों को रीपोस्ट करते हुए अपनी टिप्पणी की है। इसलिए फिलहाल इन्हें मस्क और संबंधित पोस्ट में किए गए दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

    एलन मस्क लंबे समय से X को महज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बजाय खबरों, सूचनाओं और विचारों के बड़े मंच के रूप में पेश करते रहे हैं। प्लेटफॉर्म पर दुनिया भर के यूजर सीधे पोस्ट कर सकते हैं और न्यूज रिपोर्ट, वीडियो तथा किसी घटना से जुड़ी जानकारी तेजी से सामने आती है।

    मस्क के ताजा बयान ने एक बार फिर पारंपरिक मीडिया और सोशल मीडिया के बीच बदलते न्यूज कंजम्पशन पैटर्न पर बहस छेड़ दी है। X पर सूचनाएं तेजी से पहुंचती हैं, लेकिन वहां सामने आने वाली हर जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।

  • दुनिया में बढ़ी भारत की साख…. 35 साल बाद जापान ने रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर A किया

    दुनिया में बढ़ी भारत की साख…. 35 साल बाद जापान ने रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर A किया


    नई दिल्ली।
    जापान (Japan) की साख निर्धारण एजेंसी जेसीआर (Credit rating agency JCR) ने बुधवार को स्थिर परिदृश्य के साथ भारत (India) की रेटिंग एक पायदान बढ़ाकर ‘ए-’ कर दी। एजेंसी ने रेटिंग बढ़ाने के पीछे भारत की ‘मजबूत’ आर्थिक वृद्धि (‘Robust’ Economic Growth) और वित्तीय स्थिति में सुधार को प्रमुख कारण बताया।

    जेसीआर ने कहा कि 140 करोड़ से अधिक की आबादी और मौजूदा मूल्य पर 3.9 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी वाली भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वित्त वर्ष में छह प्रतिशत से अधिक की उच्च वृद्धि दर बनाए रखने की उम्मीद है। निजी खपत और निवेश के मजबूत समर्थन से भारतीय अर्थव्यवस्था हाल के वर्षों में ऊंची वृद्धि दर बनाए हुए है।

    15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एनके सिंह ने कहा 35 से ज्यादा वर्षों बाद भारत को फिर ‘ए’ रेटिंग मिली है। यह भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, संरचनात्मक सुधारों और केंद्र-राज्य साझेदारी की मजबूती की मान्यता है। इससे पहले भारत को ‘ए’ श्रेणी की रेटिंग मूडीज ने 1988 में ए2 दी थी। हालांकि, 1990-91 के भुगतान संतुलन संकट के दौरान यह रेटिंग चली गई थी।


    क्या मिलेगा फायदा

    आम आदमी को सीधे नहीं, बल्कि धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था के जरिए फायदा मिल सकता है। बेहतर रेटिंग से कंपनियों के लिए विदेशों से कर्ज सस्ता होगा। इससे भविष्य में होम लोन, कार लोन और कारोबार के कर्ज की ब्याज दरों पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा। इससे कारखाने, नए कारोबार बढ़ने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।


    बेल्जियम से बढ़ेगा व्यापार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को भारत की यात्रा पर आए बेल्जियम के प्रधानमंत्री बर्ट दे वेवर के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान व्यापार और निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। ऊर्जा, रक्षा, जलवायु परिवर्तन, प्रौद्योगिकी आदि के क्षेत्रों में भी कई समझौते की उम्मीद है। यूरोपीय संघ के देश के रूप में बेल्जियम भारत में निवेश और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा दो दशक के अंतराल के बाद हो रही है। इससे दोनों देशों के बीच संबंधों के एक नए युग की शुरूआत होने की उम्मीद है। बेल्जियम उन यूरोपीय देशों में शामिल है, जिसने भारत के आजाद होने के तुरंत बाद राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने 2016 में बेल्जियम की यात्रा की थी।

    बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ वहां के रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री भी भारत आए हैं। संभावना है कि रक्षा उद्योगों के बीच सह उत्पादन को लेकर कुछ समझौते हो सकते हैं। वहीं, बीते वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में 40 से अधिक समझौते हुए थे।


    18 अरब डॉलर का व्यापार

    भारत और बेल्जियम के बीच मौजूदा व्यापार 13 अरब डॉलर सालाना है। हाल में यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते के बाद इसमें बढ़ोतरी की उम्मीद है। इतना ही नहीं भारत में विदेशी निवेश का भी बेल्जियम एक महत्वपूर्ण स्रोत है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2000-2025 के दौरान बेल्जियम से 4.2 अरब डॉलर का निवेश भारत में आया। अब इसमें बढ़ोतरी की संभावना है।

  • भोपाल की झीलों से निकलेंगे देश-दुनिया के चैंपियन : मंत्री सारंग

    भोपाल की झीलों से निकलेंगे देश-दुनिया के चैंपियन : मंत्री सारंग


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि भोपाल की झीलें अब केवल पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र नहीं हैं, बल्कि देश के भविष्य के चैंपियन तैयार करने की भूमि बन रही हैं। राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा साबित करने और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर रही है।

    मंत्री सारंग मंगलवार को भोपाल के बोट क्लब में राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप (रैंकिंग) के तृतीय संस्करण के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में होने वाली प्रत्येक रेस केवल पदक के लिए मुकाबला नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेल करियर की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण अवसर है। प्रतियोगिता से निर्धारित होने वाली राष्ट्रीय रैंकिंग खिलाड़ियों के लिए आगे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

    इससे पहले मंत्री सारंग ने चैंपियनशिप का शुभारंभ किया। रविवार 16 अगस्त तक होने वाली इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेलिंग खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर उनकी राष्ट्रीय रैंकिंग निर्धारित होगी, जो आगे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    भोपाल बन रहा देश का प्रमुख वाटर स्पोर्ट्स केंद्र
    मंत्री सारंग ने कहा कि भोपाल का बड़ा तालाब और यहां की प्राकृतिक परिस्थितियां सेलिंग, रोइंग, कयाकिंग और केनोइंग जैसे खेलों के लिए बेहद अनुकूल हैं। मध्यप्रदेश राज्य जल क्रीड़ा अकादमी की स्थापना वर्ष 2007 में हुई थी और आज यह देश की प्रमुख वाटर स्पोर्ट्स प्रशिक्षण संस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि अकादमी में सेलिंग, रोइंग, कयाकिंग, केनोइंग और स्लालम की सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां प्रशिक्षित खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश तथा देश का नाम रोशन किया है।

    वाटर स्पोर्ट्स में मध्यप्रदेश की शानदार उपलब्धियां
    मंत्री सारंग ने बताया कि मध्य प्रदेश वाटर स्पोर्ट्स अकादमी के खिलाड़ियों ने अब तक 28 अंतर्राष्ट्रीय और 69 राष्ट्रीय पदक अर्जित किए हैं तथा खिलाड़ियों ने 37 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सहभागिता की है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धियां प्रदेश में वाटर स्पोर्ट्स के क्षेत्र में विकसित हो रहे मजबूत खेल इकोसिस्टम का प्रमाण हैं और भोपाल देश में वाटर स्पोर्ट्स की नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    सेलिंग में मध्य प्रदेश का दबदबा
    सारंग ने कहा कि वर्ष 2025 की राजा भोज मल्टीक्लास सेलिंग चैंपियनशिप में मध्यप्रदेश की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 16 पदक- 8 स्वर्ण, 5 रजत और 3 कांस्य हासिल किए थे। प्रतियोगिता की 12 में से 8 कैटेगरी में मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीते थे। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धियां साबित करती हैं कि भोपाल अब केवल प्रतियोगिताओं की मेजबानी करने वाला शहर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के चैंपियन तैयार करने वाला प्रमुख केंद्र बन रहा है।

    हर प्रतिभावान खिलाड़ी को मिलेगा आगे बढ़ने का अवसर
    सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर प्रतिभावान बच्चे को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले। इसी दिशा में प्रदेश की सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में खेल परिसरों के निर्माण की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं तथा प्रत्येक जिले में फीडर सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। मंत्री सारंग ने कहा कि मध्य प्रदेश पहले राष्ट्रीय खेलों में 17वें स्थान पर रहा करता था, लेकिन पिछले तीन वर्षों में प्रदेश लगातार तीसरे स्थान पर आ रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 18 खेलों की 11 अकादमियां संचालित की जा रही हैं।

    भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों का नया मंच तैयार
    मंत्री सारंग ने कहा कि भोपाल में लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर विकसित किया जा रहा है। इसके प्रथम चरण का लोकार्पण जल्द होने वाला है। इससे मध्य प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन को नई गति मिलेगी। मंत्री सारंग ने बताया कि नवंबर माह में अंतरराष्ट्रीय महिला हॉकी एशियन चैंपियनशिप का आयोजन भोपाल के अंतरराष्ट्रीय खेल परिसर में मध्य प्रदेश खेल एवं युवा कल्याण विभाग के माध्यम से किया जाएगा। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय एशियन रोइंग चैंपियनशिप भी भोपाल में होने वाली है।

    16 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे समापन एवं पुरस्कार वितरण
    राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप का आयोजन 11 से 16 अगस्त तक किया जाएगा। प्रतियोगिता का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह 16 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में आयोजित होगा। इस अवसर पर विभिन्न वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरण कर उनका सम्मान किया जाएगा।

    भोपाल की झीलों से निकलेंगे भारत के भविष्य के चैंपियन
    मंत्री सारंग ने देशभर से आए खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए कहा कि वे प्रतियोगिता में जीत और पदक के लिए पूरी ताकत से खेलें, लेकिन अपने मन में भारत के लिए खेलने का सपना भी लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि “भोपाल की इन झीलों में केवल नावें नहीं चल रही हैं, यहां भारत के भविष्य के चैंपियन अपने सपनों को गति दे रहे हैं। राजा भोज की इस धरती से हम संकल्प लें कि मध्य प्रदेश की झीलों से निकलने वाली प्रतिभाएं देश के तिरंगे को दुनिया के हर खेल मंच पर ऊंचा करेंगी।”

    सारंग ने कहा कि मध्य प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को अवसर, आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर खेल अधोसंरचना उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। लक्ष्य है कि मध्य प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का तिरंगा गौरव के साथ फहराएं।

  • कभी एशिया का सबसे आधुनिक इलाका था उत्तर कोरिया, आज क्यों कहलाता है दुनिया का सबसे रहस्यमयी देश?

    कभी एशिया का सबसे आधुनिक इलाका था उत्तर कोरिया, आज क्यों कहलाता है दुनिया का सबसे रहस्यमयी देश?


    नई दिल्ली। आज उत्तर कोरिया का नाम आते ही दुनिया से कटे हुए एक ऐसे देश की तस्वीर सामने आती है, जहां कड़े सरकारी नियंत्रण, परमाणु हथियार, सीमित स्वतंत्रता और बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग-थलग व्यवस्था है। लेकिन करीब आठ-नौ दशक पहले तस्वीर बिल्कुल अलग थी। आज का उत्तर कोरिया कभी पूरे कोरियाई प्रायद्वीप का सबसे विकसित, औद्योगिक और आधुनिक क्षेत्र माना जाता था।

    इतिहास से जुड़े दस्तावेज बताते हैं कि 1948 में उत्तर कोरिया के गठन और किम इल सुंग के सत्ता में आने से पहले यह क्षेत्र एकीकृत कोरिया का हिस्सा था। उस समय राजधानी प्योंगयांग शिक्षा, संस्कृति और ईसाई धर्म का प्रमुख केंद्र थी। बड़ी संख्या में चर्च, मिशनरी स्कूल और आधुनिक शिक्षण संस्थान मौजूद थे। इसी वजह से प्योंगयांग को कभी “पूर्व का यरुशलम” भी कहा जाता था। यहां लोगों को धार्मिक आस्था और सामाजिक जीवन में अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता प्राप्त थी।

    औद्योगिक विकास में था सबसे आगे
    1910 से 1945 के बीच जापान के औपनिवेशिक शासन के दौरान कोरियाई प्रायद्वीप के उत्तरी हिस्से को औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया। यहां खनिज संपदा, कोयला और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण बड़े स्टील प्लांट, जलविद्युत परियोजनाएं, रासायनिक कारखाने और रेलवे नेटवर्क विकसित किए गए। उस समय दक्षिणी क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर था, जबकि उत्तर तकनीकी और औद्योगिक रूप से अधिक मजबूत माना जाता था।

    विभाजन के बाद बदल गई तस्वीर
    द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद 1945 में कोरिया को 38वीं समानांतर रेखा के आधार पर दो हिस्सों में बांट दिया गया। उत्तरी भाग सोवियत संघ के प्रभाव में आया और 1948 में किम इल सुंग के नेतृत्व में उत्तर कोरिया की स्थापना हुई। इसके बाद 1950 से 1953 तक चले कोरियाई युद्ध ने देश के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया। भारी बमबारी में शहर, उद्योग और बुनियादी ढांचा नष्ट हो गया।

    युद्ध के बाद सोवियत संघ और चीन की आर्थिक सहायता से उत्तर कोरिया ने तेज़ी से पुनर्निर्माण किया और 1970 के दशक तक उसकी अर्थव्यवस्था कई मामलों में दक्षिण कोरिया के बराबर या उससे बेहतर मानी जाती थी।

    ‘जुचे’ नीति और अलगाव की शुरुआत
    बाद के वर्षों में किम इल सुंग ने ‘जुचे’ (आत्मनिर्भरता) की नीति अपनाई, जिसके तहत देश ने बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह दूरी बना ली। 1990 के दशक में सोवियत संघ के विघटन के बाद आर्थिक सहायता और सस्ते तेल की आपूर्ति बंद हो गई, जिससे उत्तर कोरिया गंभीर आर्थिक संकट और अकाल की चपेट में आ गया। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, उस दौर में भुखमरी और कुपोषण से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई।

    दक्षिण और उत्तर कोरिया की अलग राह
    जहां दक्षिण कोरिया ने लोकतांत्रिक व्यवस्था और खुली अर्थव्यवस्था को अपनाते हुए तकनीक और उद्योग के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई, वहीं उत्तर कोरिया ने सीमित संसाधनों का बड़ा हिस्सा रक्षा और परमाणु कार्यक्रमों पर केंद्रित किया। समय के साथ दोनों देशों के आर्थिक और सामाजिक विकास में बड़ा अंतर पैदा हो गया।

    सख्त नियंत्रण वाली व्यवस्था
    उत्तर कोरिया में नागरिकों के जीवन पर सरकारी नियंत्रण बेहद कड़ा माना जाता है। वहां सामाजिक स्थिति का निर्धारण कथित ‘सोंगबुन’ व्यवस्था के आधार पर किया जाता है, जिसमें परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि और शासन के प्रति निष्ठा को महत्व दिया जाता है। शिक्षा व्यवस्था में भी शासन और नेतृत्व से जुड़े विषयों पर विशेष जोर दिया जाता है।

    देश के भीतर आवागमन, सूचना तक पहुंच और इंटरनेट जैसी सुविधाओं पर भी व्यापक नियंत्रण है। बाहरी दुनिया से सीमित संपर्क और बंद व्यवस्था के कारण उत्तर कोरिया आज भी दुनिया के सबसे रहस्यमयी देशों में गिना जाता है।

    कभी औद्योगिक प्रगति, आधुनिक शिक्षा और आर्थिक विकास का केंद्र रहा यह क्षेत्र आज अपनी राजनीतिक व्यवस्था, सीमित खुलापन और वैश्विक अलगाव के कारण पूरी दुनिया में अलग पहचान रखता है।

  • 15 महीने बाद Apple की धमाकेदार वापसी, Nvidia को पछाड़कर बनी दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी

    15 महीने बाद Apple की धमाकेदार वापसी, Nvidia को पछाड़कर बनी दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी


    नई दिल्ली। आईफोन बनाने वाली दिग्गज टेक कंपनी Apple ने करीब 15 महीने बाद एक बार फिर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी का खिताब हासिल कर लिया है। कंपनी ने मार्केट वैल्यूएशन के मामले में AI चिप निर्माता Nvidia को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान पर कब्जा कर लिया।

    Apple की कुल वैल्यूएशन करीब 4.88 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई, जबकि Nvidia की वैल्यूएशन में 3.5 प्रतिशत की गिरावट के बाद यह लगभग 4.86 ट्रिलियन डॉलर रह गई। इस बदलाव के साथ टेक कंपनियों की वैश्विक रैंकिंग में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिला और Apple फिर से नंबर-1 कंपनी बन गई।

    खास बात यह है कि Apple पिछले साल अप्रैल के बाद पहली बार इस मुकाम पर लौटी है। कंपनी की यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब सीईओ टिम कुक का कार्यकाल खत्म होने की चर्चाएं तेज हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुक सितंबर में अपना पद हार्डवेयर विशेषज्ञ जॉन टर्नस को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।

    निवेशकों का भरोसा Apple पर क्यों बढ़ा?
    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों का नजरिया अब बदल रहा है। कुछ समय पहले तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की लहर में Nvidia को सबसे बड़ा फायदा उठाने वाली कंपनी माना जा रहा था, लेकिन अब Apple की मजबूत कमाई, विशाल इकोसिस्टम और सर्विस बिजनेस ने निवेशकों का ध्यान फिर अपनी ओर खींचा है।

    BRI वेल्थ मैनेजमेंट के इन्वेस्टमेंट हेड टोनी मीडोज के अनुसार, Apple को पहले इसलिए पीछे माना जा रहा था क्योंकि कंपनी AI मॉडल बनाने पर भारी खर्च नहीं कर रही थी। लेकिन अब बाजार की सोच बदल रही है।

    उनका कहना है कि Apple पर कैपिटल एक्सपेंडिचर का दबाव कम है और कंपनी अपनी सर्विसेज, मजबूत इकोसिस्टम और हार्डवेयर अपग्रेड के जरिए AI से कमाई करने की बेहतर स्थिति में है। यह बदलाव AI से जुड़े संभावित फायदों के बजाय कंपनी की स्थिर कमाई पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

    Siri में बदलाव से Apple को उम्मीद
    Apple ने हाल ही में अपने वर्चुअल असिस्टेंट Siri में लंबे समय से चल रहे बदलावों को लागू किया है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि नया और बेहतर Siri सिस्टम AI के क्षेत्र में Apple को बड़ी टेक कंपनियों और नए स्टार्टअप्स के करीब लाने में मदद करेगा।

    कुछ विश्लेषकों का मानना है कि Apple के पास हर iPhone में मौजूद यूजर डेटा के रूप में AI के लिए बड़ा आधार है। यह डेटा Siri को अधिक उपयोगी और स्मार्ट बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, कंपनी के सामने चुनौती यह है कि यूजर प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए इस डेटा की क्षमता का सही इस्तेमाल कैसे किया जाए।

    Nvidia की वापसी की संभावना भी बरकरार
    हालांकि बाजार की स्थिति बदलने पर Nvidia फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर सकती है। Nvidia अब भी AI इंफ्रास्ट्रक्चर की सबसे बड़ी लाभार्थी कंपनियों में शामिल है। कंपनी के ग्राफिक्स प्रोसेसर (GPU) दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश जनरेटिव AI मॉडल को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि AI सेक्टर में Nvidia की मजबूत पकड़ अभी भी बनी हुई है।