Tag: World

  • अपनी सेना में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों में भारत दुनिया में 5वें स्थान पर….

    अपनी सेना में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों में भारत दुनिया में 5वें स्थान पर….


    नई दिल्ली।
    साल 2025 में दुनिया भर में अपनी सेनाओं पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों (Countries Spend Most Military) की सूची में भारत (India) पांचवें स्थान पर रहा है। भारत से आगे केवल चार देश हैं। वहीं पाकिस्तान (Pakistan) इस मामले में भारत के आसपास भी नहीं ठहरता है। पिछले साल दुनिया भर में हुए कुल सैन्य खर्च में भारत की हिस्सेदारी 3.2% रही है। आइए इस खबर को विस्तार से समझते हैं।


    भारत का रक्षा खर्च और ‘ऑपरेशन सिंदूर’

    स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) द्वारा सोमवार को जारी की गई एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका (USA), चीन, रूस और जर्मनी इस लिस्ट में सबसे आगे यानी टॉप 4 देश हैं। इसके बाद भारत नंबर 5 पर है। 2025 में भारत का सैन्य खर्च 92.1 अरब डॉलर रहा, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 8.9% अधिक है।

    बढ़ोतरी का कारण: इस वृद्धि का एक बड़ा कारण पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ था। इस सैन्य अभियान के दौरान सेना को युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रखने हेतु सशस्त्र बलों ने आपातकालीन आधार पर हथियारों और साजो-सामान की कई महत्वपूर्ण खरीदारियां कीं।


    पड़ोसी देशों (चीन और पाकिस्तान) की क्या स्थिति है?

    सिपरी के आंकड़े बताते हैं कि भारत के पड़ोसियों ने भी अपनी सेना पर खर्च बढ़ाया है।

    चीन: दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश चीन है। उसने अपने रक्षा बजट में 7.4% की वृद्धि की है, जिससे उसका कुल खर्च 336 अरब डॉलर हो गया है।

    पाकिस्तान: आर्थिक चुनौतियों के बावजूद पाकिस्तान के सैन्य खर्च में 11% की वृद्धि देखी गई है। 11.9 अरब डॉलर के खर्च के साथ पाकिस्तान इस सूची के 40 देशों में 31वें स्थान पर है।


    वैश्विक परिदृश्य: दुनिया भर में रक्षा खर्च रिकॉर्ड स्तर पर

    शीर्ष तीन देश: अमेरिका, चीन और रूस मिलकर वैश्विक सैन्य खर्च का 51% हिस्सा कवर करते हैं। इन तीनों देशों ने कुल मिलाकर 1,480 अरब डॉलर खर्च किए। साल 2025 में पूरी दुनिया का सैन्य खर्च बढ़कर 2,887 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।


    यूरोप में भारी वृद्धि

    वैश्विक स्तर पर खर्च बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यूरोप रहा, जहां सैन्य खर्च में 14% की वृद्धि (कुल 864 अरब डॉलर) हुई। रूस-यूक्रेन युद्ध के चौथे साल में प्रवेश करने और यूरोपीय नाटो देशों द्वारा खुद को फिर से हथियारों से लैस करने की कोशिशों के कारण शीत युद्ध के बाद से मध्य और पश्चिमी यूरोप में यह सबसे तेज वार्षिक वृद्धि है।


    हथियारों के आयात में भारत अभी भी आगे

    मार्च में प्रकाशित सिपरी की एक अन्य रिपोर्ट “ट्रेंड्स इन इंटरनेशनल आर्म्स ट्रांसफर्स” के अनुसार- 2016-20 और 2021-25 की अवधि के बीच भारत के हथियारों के आयात में 4% की गिरावट आई है। गिरावट के बावजूद, भारत अभी भी सैन्य हार्डवेयर का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक (Importer) बना हुआ है, जिसकी वैश्विक हथियारों के आयात में 8.2% हिस्सेदारी है। इसका मुख्य कारण चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा पर चल रहा तनाव है।


    रूस पर निर्भरता कम कर रहा है भारत

    पिछले एक दशक में भारत ने अपने हथियारों की खरीद नीति में बड़ा बदलाव किया है। भारत अब रूस के बजाय पश्चिमी देशों (खासकर फ्रांस, इजरायल और अमेरिका) की ओर रुख कर रहा है। 2011-15 के दौरान भारत के कुल हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी 70% थी, जो 2016-20 में घटकर 51% और 2021-25 में 40% रह गई है। इसके बावजूद, वर्तमान में भारत को सैन्य हार्डवेयर की आपूर्ति करने वाले शीर्ष तीन देश रूस, फ्रांस और इजरायल ही हैं।


    भविष्य की तैयारियां: रक्षा बजट 2026-27

    ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पृष्ठभूमि और मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए, भारत सरकार ने 1 फरवरी को पेश किए गए 2026-27 के केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए भारी-भरकम राशि आवंटित की है: रक्षा बजट में 15% से अधिक की बढ़ोतरी की गई है।

    इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के लिए कुल 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
    इसमें से ₹2.19 लाख करोड़ का ‘पूंजीगत परिव्यय’ रखा गया है। इस फंड का इस्तेमाल सीधे तौर पर सशस्त्र बलों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए किया जाएगा, जिसमें नए लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, पनडुब्बियां, आर्टिलरी गन, स्मार्ट हथियार, मिसाइलें, रॉकेट और कई तरह के मानव रहित (ड्रोन) सिस्टम खरीदना शामिल है।

  • ऊफ ये गर्मी ! दुनिया के सबसे गर्म 100 शहरों में 92 भारत के…. दिल्ली में पारा 44 डिग्री के पार

    ऊफ ये गर्मी ! दुनिया के सबसे गर्म 100 शहरों में 92 भारत के…. दिल्ली में पारा 44 डिग्री के पार


    नई दिल्ली।
    गर्मी (Heat) शुरुआत में ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। वैश्विक तापमान आंकड़ों के अनुसार दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों (World 100 Hottest cities) में 92 भारत (India) के हैं। इसके अलावा 6 शहर थाईलैंड और दो शहर नेपाल के हैं। अप्रैल की शुरुआत में ही दिल्ली (Delhi), मुंबई, चेन्नई और बंगलूरू जैसे शहरों में पारा 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। दिल्ली में तापमान 44.5 डिग्री दर्ज किया गया। आने वाले दिनों में इसमें और वृदि्ध की आशंका जताई जा रही है।

    देश में शनिवार को सर्वाधिक तापमान 47.4 डिग्री सेल्सियस यूपी के बांदा का रहा। इसके बाद प्रयागराज में 45.5 डिग्री, वाराणसी में 45 डिग्री, झांसी में 44.8 डिग्री रहा। गाजियाबाद में अधिकतम तापमान 43 डिग्री रहा। कई इलाकों में तापमान सामान्य से 5 डिग्री या उससे ऊपर है, जिससे हीट स्ट्रेस की स्थिति बन रही है।

    मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में लू चलने (Scorching Heatwave) की संभावना है। उत्तर भारत में रातें भी गर्म रह सकती हैं। यह स्थिति हीट डोम जैसे हालात की ओर इशारा करती है, जिसमें गर्म हवा एक क्षेत्र में फंस जाती है और तापमान लगातार बढ़ता रहता है।


    गाजियाबाद 43 डिग्री में तपा, सबसे गर्म शहरों में यूपी के 37

    100 सबसे गर्म शहरों में यूपी के 37 शहर हैं। प. बंगाल के 18, पंजाब के सात, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के छह-छह, बिहार और ओडिशा के पांच-पांच, महाराष्ट्र के चार, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश के दो-दो शहर शामिल हैं। ज्यादातर शहरों में तापमान तापमान 42 से 45 डिग्री दर्ज किया गया।


    दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में हीटस्ट्रोक यूनिट बनी

    दिल्ली में शनिवार को पारा 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसके चलते राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल में हीटस्ट्रोक यूनिट बनाई गई है। इसमें कूलिंग टब, 200 किलो बर्फ बनाने की मशीनें और पोर्टेबल आइस पैक भी रखे गए हैं।


    दोपहर में काम नहीं कर सकेंगे मजदूर

    उत्तर प्रदेश : आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी में दोपहर 12 से 4 बजे तक मजदूरों के काम पर रोक।
    ओडिशा : सोमवार से सभी सरकारी स्कूल बंद रहेंगे।
    केरल : लोगों से दिन में 11 से 3 बजे के बीच बाहर न निकलने की सलाह। सेल्फ लॉकडाउन अपनाने के लिए कहा।
    कर्नाटक : सभी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक यूनिट बनाने का आदेश। ये सभी यूनिट 31 जुलाई तक चालू रखी जाएंगी।
    मध्य प्रदेश : नर्मदापुरम जिले में स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है।


    धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने हल्के कपड़े पहनने की सलाह

    मौसम विभाग ने दोपहर में धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और बच्चों, बुजुर्गों व बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। सावधानी बरतने से हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।

    कश्मीर में बारिश और रोहतांग में बर्फबारी
    श्रीनगर समेत कश्मीर घाटी के मैदानी इलाकों में शनिवार को रुक-रुक कर हुई बारिश से गर्मी से राहत मिली है, जबकि जोजिला दर्रे पर हल्की बर्फबारी भी हुई। वहीं, हिमाचल में रोहतांग दर्रा, कुंजम दर्रा सहित ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई।

  • होर्मुज को लेकर अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता ईरान… ट्रंप ने दी चेतावनी

    होर्मुज को लेकर अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता ईरान… ट्रंप ने दी चेतावनी


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर दोबारा प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने ईरान (Iran) को चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता। बता दें, शुक्रवार को लेबनान (Lebanon.) में हुए सीजफायर का स्वागत करते हुए ईरान (Iran) ने होर्मुज पर लगे प्रतिंबध को हटा दिया था। हालांकि, जब ट्रंप होर्मुज के पास लगे अमेरिकी ब्लाकेड को हटाने से इनकार कर दिया, तो शनिवार को ईरान ने फिर से होर्मुज के दरवाजे बंद कर दिए।

    होर्मुज पर बदलते हालात पर ट्रंप ने शनिवार को ओवेल ऑफिस में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, “हम उनसे बात कर रहे हैं। वे स्ट्रेट को फिर से बंद करना चाहते हैं। जैसा कि वे वर्षों से करते आ रहे हैं और वे हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते।”

    इससे पहले ईरानी सेना की कमांड ने एक होर्मुज पर अमेरिकी कमांड को वादाखिलाफी बताया। ईरान की तरफ से कहा गया कि ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ लगाए गए अमेरिकी ब्लाकेड को न हटाकर अमेरिका ने अपना वादा तोड़ा है। बयान में आगे कहा गया, “जब तक अमेरिका ईरान आने वाले सभी जहाजों के लिए आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल नहीं करता, होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सख्त नियंत्रण में रहेगी।”

    शनिवार सुबह होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को अपने देश और दुनिया के सामने रखते हुए ईरानी सरकारी टीवी ने बताया कि होर्मुज पर वापस नियंत्रण हासिल कर लिया गया है। ईरान की तरफ से होर्मुज पर नियंत्रण हासिल करने के प्रयास में ही दो भारतीय तेल टैंकरों के ऊपर गोलीबारी की खबर सामने आई है। इस घटना को लेकर सरकार ने ईरानी राजदूत को भी समन किया है।

    बता दें, 28 फरवरी को अमेरिकी और इजरायली हमले के बाद शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट ने पूरे विश्व को ऊर्जा संकट में धकेल दिया है। हमले के कुछ दिन बाद ही ईरान ने होर्मुज के ऊपर प्रतिबंध लगा दिया, जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। पांच हफ्तों की लड़ाई के बाद अमेरिका और ईरान ने सीजफायर की घोषणा कर दी, लेकिन इजरायल ने लेबनान पर हमला करना जारी रखा। इसकी वजह से ईरान ने होर्मुज को खोलने से इनकार कर दिया। अमेरिकी और ईरान के बीच हुई वार्ता के बाद इजरायल ने भी लेबनान के साथ सीजफायर का ऐलान कर दिया। इसके बाद ईरान ने शुक्रवार को सीजफायर की अवधि तक होर्मुज के रास्ते व्यापारिक जहाजों के लिए खोल दिए। लेकिन फिर ट्रंप के बायन के बाद व्यवस्था बिगड़ गई।

  • 10 मिनट ‘क्लीनिकली डेड’ रही महिला का दावा, 2030 की दुनिया देखकर लौटी; अनुभव ने चौंकाया

    10 मिनट ‘क्लीनिकली डेड’ रही महिला का दावा, 2030 की दुनिया देखकर लौटी; अनुभव ने चौंकाया


    नई दिल्ली। मेक्सिको की एक महिला ने दावा किया है कि 10 मिनट तक ‘क्लीनिकली डेड’ रहने के दौरान वह भविष्य यानी साल 2030 में पहुंच गई थीं। होश में आने के बाद उन्होंने जो अनुभव साझा किया, उसने लोगों के साथ-साथ वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया।

    रिपोर्ट के मुताबिक, 24 वर्षीय मेडिकल स्टूडेंट रूबी रोल्गु को पिछले साल अप्रैल में फेफड़ों में खून के थक्के जमने की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा और डॉक्टरों ने उन्हें लगभग 10 मिनट तक ‘क्लीनिकली डेड’ बताया। परिवार को भी उनकी स्थिति बेहद गंभीर होने की जानकारी दी गई थी।

    2030 की दुनिया देखने का दावा

    होश में आने के बाद रूबी ने बताया कि उन 10 मिनटों में उन्होंने खुद को साल 2030 की दुनिया में पाया। उनके अनुसार, भविष्य की दुनिया आज की तुलना में अधिक शांत और व्यवस्थित थी। उन्होंने दावा किया कि तकनीक और ऑटोमेशन के कारण लोगों का जीवन आसान हो गया था और वे परिवार व समाज के साथ ज्यादा समय बिताते दिखे।

    रूबी ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद को और अपने परिवार को उम्रदराज होते देखा, मानो वह आने वाले वर्षों को दिन-प्रतिदिन जी रही हों। उनके मुताबिक भविष्य में तकनीक और मानवीय संवेदनाओं का संतुलन बेहतर दिखाई दिया।

    ‘वापस आना किसी नरक जैसा लगा’

    रूबी के अनुसार, यह अनुभव इतना सुखद था कि जब उनकी आंखें अस्पताल में खुलीं तो उन्हें वास्तविक दुनिया में लौटना कठिन लगा। उन्होंने बताया कि उन्हें रोशनी से भरी सुरंग दिखाई दी और फिर अचानक वह अपने अस्पताल के बेड पर थीं। होश में आने पर जब उन्होंने अपने भाई को देखा तो वह उन्हें अपनी ‘भविष्य की यादों’ के मुकाबले काफी छोटा लगा।

    रूबी ने कहा कि भविष्य की शांति के बाद वर्तमान की भागदौड़ भरी दुनिया में लौटना उन्हें किसी “नरक” जैसा महसूस हुआ। हालांकि वैज्ञानिक ऐसे दावों को अक्सर मस्तिष्क की जटिल गतिविधियों और ‘नियर-डेथ एक्सपीरियंस’ से जोड़कर देखते हैं, फिर भी यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • हम इकलौते देश, जिसने अपने नाविक खोये…. होर्मुज खुलवाने के लिए जुटे दुनियाभर के देश, भारत की दो टूक

    हम इकलौते देश, जिसने अपने नाविक खोये…. होर्मुज खुलवाने के लिए जुटे दुनियाभर के देश, भारत की दो टूक


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia.) में तनाव की वजह से लंबे समय बंद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने को लेकर गुरुवार को अहम बैठक हुई। ब्रिटेन की अगुवाई में हुई इस बैठक में भारत (India) समेत कई देशों को न्योता दिया गया था। भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी (Foreign Secretary Vikram Misri) वर्चुअल मीटिंग में शामिल हुए। इस दौरान, भारत ने दो टूक कहा कि हम इकलौते देश हैं, जिसने अपने नाविक खोए हैं। भारत ने इस बैठक में होर्मुज को खोलने की वकालत की।

    मिसरी गुरुवार को ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर की अध्यक्षता में हुई बैठक में वर्चुअली शामिल हुए। इस बैठक में फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। अमेरिका को इस बैठक में शामिल नहीं होना था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया, “ब्रिटेन ने होर्मुज पर बातचीत के लिए कई देशों को आमंत्रित किया था, जिसमें भारत भी शामिल है।”

    उन्होंने दोहराया कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप, मुक्त और खुले समुद्री सुरक्षा का समर्थन करता है। जायसवाल ने कहा, “हम होर्मुज से सुरक्षित और मुक्त आवागमन सुनिश्चित करने की मांग को प्राथमिकता के तौर पर लगातार उठाते रहे हैं।” ब्रिटेन की अगुवाई में हुई इस बैठक के नतीजों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस टीवी संबोधन के कुछ ही घंटों बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ अपने युद्ध के संदर्भ में कहा था कि इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा करना अन्य देशों की जिम्मेदारी है।

    इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि ब्रिटेन द्वारा बुलाई गई बैठक से तुरंत कोई बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद कम ही है। उन्होंने कहा कि इस स्ट्रेट से भारत के जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता पक्का करना अभी भी एक पेचीदा मामला बना हुआ है, और यह पक्का करने के लिए कि जहाज बारूदी सुरंगों वाले इस जलमार्ग से सुरक्षित रूप से गुजर सकें, ईरान की तरफ से करीबी तालमेल की जरूरत है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “जहां तक भारत की बात है, आप अच्छी तरह जानते हैं कि हम स्वतंत्र और खुले कमर्शियल शिपिंग के पक्ष में हैं, और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार समुद्री सुरक्षा के पक्ष में हैं।” उन्होंने कहा, “हम प्राथमिकता के तौर पर होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और स्वतंत्र आवागमन सुनिश्चित करने की लगातार अपील कर रहे हैं।” ईरान द्वारा होर्मुज को लगभग बंद कर देने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं। यह स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा शिपिंग मार्ग है, जिससे दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) का परिवहन होता है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का एक प्रमुख स्रोत रहा है।

  • ईरान युद्ध के बीच एक और समुद्री रास्ता हो सकता है बंद…. हूतियों की एंट्री ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

    ईरान युद्ध के बीच एक और समुद्री रास्ता हो सकता है बंद…. हूतियों की एंट्री ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन


    तेहरान। ई
    रान और अमेरिका-इजरायल (Iran and America-Israel) के बीच जारी युद्ध में अब तक हूती विद्रोही (Houthi Rebels) शामिल नहीं हुए थे लेकिन शनिवार को पहली बार हूतियों ने भी मिसाइल दागकर साफ कर दिया है कि वे भी युद्ध में कूद पड़े हैं। हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) ने बयान देकर कहा कि उन्होंने इजरायल के संवेदनशील सैन्य इलाकों में हमला किया है। वहीं इजरायल ने कहा कि यमन की ओर से आई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया। बता दें कि चार सप्ताह से चल रहे युद्ध की वजह से दुनियाभर में तेल का संकट खड़ा हो गया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आवागमन को सीमित कर दिया है।


    बाब-अल-मंडेब पर भी खतरा

    इजरायल ईरान के अलावा दक्षिण लेबनान में भी लगातार बमबारी कर रहा है। यहां वह ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों को तबाह करने में लगा है। हूतियों के युद्ध में कूदने से ना केवल इसके गंभीर होने का खतरा बना है बल्कि एक और जलडमरूमध्य का रास्ता बंद होने का भी खतरा मंडरा रहा है। यह है बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य। यह लाल सागर के मुहाने पर स्थित है और यहां से होकर बड़ी संख्या में जहाज गुजरते हैं।


    कौन हैं हूती विद्रोही

    यमन के शिया मुस्लिम जैदियों का का सशस्त्र राजनीतिक समूह हूती के नाम से जाना जाता है। हूती विद्रोहियों को हिजबुल्लाह और हमास की तरह ही ईरान का समर्थन प्राप्त है। 1990 में बदरद्दीन अल हूती ने इसकी स्थापना की थी। इसने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। इसका स्लोगन ही था, ‘अल्लाह महान है, अमेरिका मुर्दाबाद, इजरायल मुर्दाबाद।’ हूती खुद को अंसार यानी अल्लाह का साथी कहते हैं।

    हूती 2004 से 2010 तक सालेह की सेना से छह युद्ध लड़े। 2011 में अरब की क्रांति की वजह से सालेह को सत्ता छोड़नी पड़ गई और अब्दरब्बू मंसूर हादी क राष्ट्रपति बनाया गया। यह सरकार भी ज्यादा दिन नहीं टिकी और 2014 में हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लया। इसके बाद शियाओं का समूह मजबूत होने लगा। यह सऊदी अरब और यूएई के लिए सीधा खतरा बन गया। आज भी हूती विद्रोहियों का यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा है।इसमें राजधानी सना और लाल सागर का तटी इलाका शामिल है।


    बाब अल मंडेब पर क्यों है खतरा

    लाल सागर के उस इलाके पर हूतियों का ही कब्जा है जहां बाब अल मंडेब स्ट्रेट है। हूतियों के पास हथियारों की भी कमी नहीं है। उनके पास क्रूज मिसाइल, एंटी शिप मिसाइल, समुद्री ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हैं। बीते दो सालों में हूतियों ने 100 से ज्यादा व्यापारिक जहाजों पर हमला किया है और इनमें से कई को समंदर में ही डुबो दिया है। लाल सागर के दूसरी ओर स्वेज नहर है जो कि भूमध्य सागर को जोड़ती है। इन दोनों रास्तों से ही यूरोप और उत्तरी अमेरिका को प्राकृतिक गैस और खाड़ी के तेल की सप्लाई होती है। 2013 में स्वेज नहर के रास्ते दुनिया के कुल व्यापारा का 12 से 15 फीसदी व्यापार हुआ था।


    ईरान के साथ कितना मजबूत रिश्ता

    सऊदी अरब और यूएई का कहना है कि ईरान हूती विद्रिहियों को हथियार मुहैया करवाता है। सऊदी अरब और ईरान में जो संघर्ष है उसके बीच यमन एक अलग ही मोर्चा बना हुआ है।


    हूती क्यों हैं ज्यादा खतरनाक

    हूती ब्रिगेडियर याह्या सरी ने कहा कि शनिवार को उन्होंने इजरायल के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल अटैक किया है। इसका सीधा मतलब है कि युद्ध का स्तर अब और गंभीर हो गया है। शिया ताकतें अमेरिका और इजरायल के खिलाफ इकट्ठी हो रही हैं। ऐसे में युद्ध लंबा खिंचने और बढ़ने का खतरा बना हुआ है। गाजा में हमास आज भी ऐक्टिव है और लेबनान से हिजबुल्लाह इजरायल पर हमले कर रहा है। इजरायल तीन मोर्चों से घिरा हुआ है।

    ईरान ने आगे सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उसने दुबई में उन दो विशिष्ट स्थानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है जहां अमेरिकी सैनिक तैनात थे। बयान के अनुसार, एक स्थान पर 400 से अधिक और दूसरे पर 100 से ज्यादा अमेरिकी कर्मी मौजूद थे। ईरानी प्रवक्ता ने डोनल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यह क्षेत्र ‘अमेरिकी सैनिकों के लिए कब्रगाह’ साबित होगा।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सेना के पास ईरान पर हमला करने और अपना सैन्य अभियान पूरा करने के लिए अभी 3,554 लक्ष्य बाकी हैं। मियामी में एक निवेश सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने नाटो सहयोगियों पर भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में सहायता न देने के लिए सहयोगियों को ‘कागजी शेर’ करार दिया और कहा कि अमेरिका नाटो की सुरक्षा पर सालाना सैकड़ों अरब डॉलर खर्च कर रहा है, लेकिन जरूरत के समय वे गायब हैं।

    तनाव को देखते हुए अमेरिका ने अपनी नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन तेज कर दिया है। विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश को अब केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के कार्यक्षेत्र में तैनात किया जा रहा है। वर्तमान में इस क्षेत्र में पहले से ही यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में दो स्ट्राइक समूह सक्रिय हैं। इसके अलावा गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक यूएसएस रॉस, यूएसएस डोनाल्ड कुक और यूएसएस मेसन को भी युद्धक संचालन में सहयोग के लिए रवाना कर दिया गया है।

    इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ कर दिया है कि यदि ईरान के आर्थिक केंद्रों या बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, तो इसका जवाब बेहद कड़ा होगा। उन्होंने क्षेत्रीय देशों से पुरजोर अपील की है कि वे अपनी धरती का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए न होने दें।

  • क्या है इच्छामृत्यु? भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी, जानिए दुनिया में इसका इतिहास और कानून

    क्या है इच्छामृत्यु? भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी, जानिए दुनिया में इसका इतिहास और कानून


    नई दिल्ली। भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) को मंजूरी देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। यह फैसला Harish Rana vs Union of India मामले में आया, जिसमें 32 वर्षीय हरीश राणा की निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अपील स्वीकार कर ली गई।

    Supreme Court of India की जस्टिस J. B. Pardiwala और जस्टिस K. V. Viswanathan की पीठ ने यह निर्णय सुनाया। गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा एक इमारत से गिरने के बाद पिछले 13 साल से अचेत अवस्था में हैं। बेटे की लगातार बिगड़ती हालत को देखते हुए उनके माता-पिता ने अदालत से जीवन रक्षक उपकरण हटाने की अनुमति मांगी थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

    इस फैसले के बाद इच्छामृत्यु को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।

    आइए जानते हैं कि इच्छामृत्यु क्या है और दुनिया में इसका इतिहास क्या रहा है।

    क्या होती है इच्छामृत्यु

    इच्छामृत्यु (Euthanasia) का अर्थ है किसी ऐसे व्यक्ति के जीवन को जानबूझकर समाप्त करना, जो असाध्य या लाइलाज बीमारी से पीड़ित हो और असहनीय दर्द झेल रहा हो। इसका उद्देश्य उस व्यक्ति को कष्ट से मुक्ति दिलाना होता है।

    इच्छामृत्यु मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है।

    1. सक्रिय इच्छामृत्यु (Active Euthanasia)

    इसमें मरीज की मृत्यु लाने के लिए डॉक्टर या कोई व्यक्ति सक्रिय कदम उठाता है, जैसे घातक दवा या इंजेक्शन देना। उदाहरण के तौर पर मरीज को ऐसा इंजेक्शन देना जिससे वह गहरी नींद में चला जाए और उसकी दर्दरहित मृत्यु हो जाए।

    2. निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia)

    इसमें मरीज को जिंदा रखने वाले इलाज या जीवन रक्षक उपकरण हटा लिए जाते हैं। डॉक्टर सीधे मौत नहीं देते, बल्कि उपचार बंद कर देते हैं, जिससे मरीज प्राकृतिक रूप से मृत्यु को प्राप्त होता है।

    प्राचीन काल में इच्छामृत्यु

    इच्छामृत्यु का विचार बहुत पुराना है। लगभग 8वीं सदी ईसा पूर्व के महाकाव्य Iliad में घायल योद्धाओं के दर्द से मुक्ति के लिए दया मृत्यु का उल्लेख मिलता है।

    भारतीय परंपरा में भी तपस्वियों द्वारा प्रायोपवेश (आमरण अनशन के माध्यम से प्राण त्यागना) की परंपरा रही है, जिसका उल्लेख Mahabharata में मिलता है।

    प्राचीन यूनान में दार्शनिक Plato ने अपनी पुस्तक Republic में असाध्य रोगियों के लिए इच्छामृत्यु का समर्थन किया था।

    हालांकि करीब 400 ईसा पूर्व में ली जाने वाली Hippocratic Oath ने सक्रिय इच्छामृत्यु का विरोध किया और कहा कि डॉक्टर किसी मरीज को घातक दवा नहीं देंगे।

    मध्यकाल में धार्मिक प्रतिबंध

    ईसाई धर्म के प्रसार के बाद इच्छामृत्यु को पाप और हत्या के समान माना गया। धार्मिक विचारक Augustine of Hippo और Thomas Aquinas ने इसे ईश्वर की इच्छा के विरुद्ध बताया।

    इस्लाम और यहूदी धर्म में भी सक्रिय इच्छामृत्यु को प्रतिबंधित किया गया, हालांकि कुछ परिस्थितियों में जीवन रक्षक उपचार रोकने की अनुमति दी गई।

    19वीं और 20वीं सदी में बहस

    19वीं सदी में आधुनिक चिकित्सा के विकास के साथ इच्छामृत्यु पर फिर से बहस शुरू हुई। 1870 में डॉक्टर Samuel D. Williams ने अंतिम अवस्था के मरीजों को क्लोरोफॉर्म देने का सुझाव दिया था।

    20वीं सदी में नाजी जर्मनी के कुख्यात Aktion T4 program के कारण इच्छामृत्यु की अवधारणा विवादित हो गई। 1939-1945 के बीच नाजी शासन ने इस कार्यक्रम के नाम पर हजारों लोगों की हत्या कर दी थी।

    आज किन देशों में मान्य है इच्छामृत्यु

    समय के साथ कई देशों ने सख्त नियमों के तहत इच्छामृत्यु या सहायता प्राप्त मृत्यु को कानूनी मान्यता दी है।

    Netherlands (2001) और Belgium (2002) ने सक्रिय इच्छामृत्यु को वैध बनाया।

    Canada ने 2016 में मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग (MAiD) कार्यक्रम शुरू किया।

    Switzerland में 1942 से सहायता प्राप्त आत्महत्या कानूनी है।

    United States के कुछ राज्यों में “Death with Dignity” कानून लागू है, जिसकी शुरुआत Oregon में 1997 में हुई।

    Spain, Austria, Australia, New Zealand, Colombia और Ecuador में भी विभिन्न रूपों में इसे अनुमति मिली है।

    किन देशों में सख्त प्रतिबंध

    कई इस्लामिक देशों में शरिया कानून के तहत इच्छामृत्यु के किसी भी रूप पर प्रतिबंध है। वहीं France और United Kingdom जैसे देशों में सक्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति नहीं है, बल्कि मरीजों को दर्द से राहत देने के लिए पालीएटिव केयर और सिडेशन पर जोर दिया जाता है।

    भारत में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इच्छामृत्यु के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण कानूनी और नैतिक बहस को नई दिशा देता है। हालांकि यह केवल निष्क्रिय इच्छामृत्यु तक सीमित है, लेकिन इससे भविष्य में चिकित्सा नैतिकता और मरीज के अधिकारों पर व्यापक चर्चा की संभावना बढ़ गई है।

  • Warning: महामंदी की तरफ बढ़ रही दुनिया…. 7 दिन और चला ईरान युद्ध तो हालात होंगे भयावह!

    Warning: महामंदी की तरफ बढ़ रही दुनिया…. 7 दिन और चला ईरान युद्ध तो हालात होंगे भयावह!


    तेहरान।
    स्कॉटलैंड की संस्था (Scottish Organization) वुड मैकेंजी (Wood Mackenzie) ने मध्य-पूर्व जंग से उपजे संकट को लेकर नई चेतावनी दी है। इसमें दावा किया कि अगर ईरान-इजराइल युद्ध (Iran-Israel War) अगले सात दिन तक और चलता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था 1929 की महा मंदी ‘ग्रेट डिप्रेशन’ के दौर में प्रवेश कर सकती है। इसमें यह भी कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में गतिरोध बने रहने से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसके परिणाम 1970 के दशक के तेल संकट से भी बड़े होने की संभावना है।


    क्या है महामंदी

    यह 1929 में अमेरिका से शुरू हुई आधुनिक इतिहास की सबसे भयंकर वैश्विक आर्थिक गिरावट थी, जो 1939-40 तक चली। अक्तूबर, 1929 के वॉल स्ट्रीट शेयर बाजार के पतन से शुरू होकर बैंकों के ठप होने, उत्पादन में भारी कमी और रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी के साथ पूरी दुनिया में फैल गई। सिर्फ अमेरिका में ही 1933 तक 1.5 करोड़ लोग बेरोजगार हो गए थे।

    इसके पीछे 1929 का स्टॉक मार्केट क्रैश, बैंकों का विफल होना, गलत मौद्रिक नीतियां और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कमी जैसे अनेक मिश्रित कारण थे। यह एक दशक तक चलने वाला (1929-1939) आर्थिक संकट था। आर्थिक मंदी द्वितीय विश्व युद्ध (1939) के शुरू होने के साथ समाप्त हुई, जिसने उत्पादन को बढ़ावा दिया और रोजगार के अवसर पैदा किए।


    इस आधार पर आशंका

    वुड मैकेंजी के मुख्य अर्थशास्त्री पीटर मार्टिन के अनुसार, कच्चे तेल के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल के पास हैं। हॉर्मुज से गुजरने वाले 1.2 से 1.4 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति रुकने से कीमतें 125-150 डॉलर प्रति बैरेल तक जा सकती हैं। तेल 200 डॉलर प्रति बैरल को पार करता है तो यह 1970 के दशक जैसा झटका होगा।

    मध्य-पूर्व में जारी युद्ध शनिवार को आठवें दिन में प्रवेश कर गया। 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला कर दिया। पिछले एक हफ्ते से जारी लड़ाई में कुल 16 देश प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित हैं, जिससे लाखों लोगों के जीवन और आजीविका को खतरा पैदा हो गया है। हिंसा मध्य एशिया से लेकर यूरोप के छोर तक फैलती जा रही है। अगर ये जंग बढ़ती है तो हालात और भयावह होंगे।

    रिपोर्ट में गैस संकट को लेकर भी चिंता जताई गई है। दुनिया का 20 फीसदी एलएनजी हॉर्मुज से गुजरता है। इसकी रुकावट 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई गैस कटौती से कहीं अधिक गंभीर होगी। इससे यूरोप और एशिया में गैस की कीमतें 130 फीसदी तक बढ़ सकती हैं।

    वुड मैकेंजी का अनुमान है कि तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहने से वैश्विक जीडीपी विकास दर 2 फीसदी से नीचे गिर जाएगी। मुख्य अर्थशास्त्री पीटर मार्टिन ने कहा कि यह आधिकारिक तौर पर मंदी और फिर डिप्रेशन जैसे हालात को बढ़ावा देगा। उनके मुताबिक, बेरोजगारी और मुद्रास्फीति के कारण 1930 जैसी लंबी मंदी पैदा हो सकती है।


    ईरान युद्ध के बड़े अपडेट्स

    >>ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, एक सप्ताह पहले बमबारी शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान में 1,230 लोग मारे गए हैं, जबकि पांच हजार से अधिक घायल हैं।
    >>लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हमलों में 217 की मौत और 798 के घायल हुए, जबकि एक लाख विस्थापित हुए।
    >>इजरायल में 12 नागरिकों की मौत, 1,600 से अधिक घायल हैं
    >>अमेरिका के 6 सैन्य कर्मियों की मौत की पुष्टि हुई और 20 घायल हैं।
    >>कुवैत में चार, यूएई तीन, बहरीन दो और ओमान में एक मौत हुई
    >>युद्ध के पहले 5 दिनों में वैश्विक शेयर बाजारों से लगभग 3.2 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 265 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान होने का अनुमान है। इसमें डॉव जोन्स और एशियाई बाजारों में 2 मार्च को गिरावट दर्ज की गई।
    >>हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने से वैश्विक मुद्रास्फीति में 1 फीसदी तक की वृद्धि का अनुमान है।
    >>ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें शनिवार को 92 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई। संघर्ष लंबा चलने पर 100-130 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है, जिससे पूरी दुनिया में माल ढुलाई 20 फीसदी महंगी हो जाएगी।
    >>हॉर्मुज के रास्ते 20 फीसदी तेल और एलएनजी की सप्लाई रुकने से चीन, भारत, जापान जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है।
    >>पिछले एक हफ्ते में दुनियाभर में 21,300 से अधिक उड़ानें रद्द की गई
    >>दुनिया भर के हवाई अड्डों पर 6 लाख से अधिक यात्री फंसे हुए।
    >>एयर इंडिया, इंडिगो, एमिरेट्स और कतर एयरवेज ने अपनी सेवाओं को निलंबित कर दिया है या रूट बदल दिए, जिससे प्रति उड़ान लागत 60,000 डॉलर तक बढ़ गई
    >>भारत से यूरोप जाने वाली उड़ानों को अब लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है, जिससे कीमतें बढ़ गई हैं।

  • दुनिया का सबसे सुरक्षित स्थान में UAE के तीन शहर

    दुनिया का सबसे सुरक्षित स्थान में UAE के तीन शहर

    नई दिल्‍ली। मध्य पूर्व में पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। इस संघर्ष का प्रभाव संयुक्त अरब अमीरात के शानदार शहरों अबू धाबी और दुबई तक भी पहुंच रहा है, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित ठिकाने और वैश्विक संघर्षों से अलग-थलग माना जाता रहा है।

    मध्य पूर्व में पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। इस संघर्ष का प्रभाव संयुक्त अरब अमीरात के शानदार शहरों अबू धाबी और दुबई तक भी पहुंच रहा है, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित ठिकाने और वैश्विक संघर्षों से अलग-थलग माना जाता रहा है। दरअसल, अमेरिकी-इजरायली सैन्य अभियानों में ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों और अमेरिकी सेना के ठिकानों सहित पूरे क्षेत्र में जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।

    दुबई तक मिसाइल और ड्रोन हमलों की पहुंच के साथ ही वैश्विक संघर्षों से दुनिया के कई स्थानों के अछूते न रहने की चिंताएं बढ़ गई हैं। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी तनाव के बीच, यहां दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित शहरों की सूची दी गई है। यह सूची Numbeo द्वारा तैयार की गई है (Safety Index 2026 के आधार पर)।
    दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित शहर

    किंगदाओ (किंगडाओ), शेडोंग, चीन
    अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात
    दोहा, कतर
    शारजाह, संयुक्त अरब अमीरात
    दुबई, संयुक्त अरब अमीरात
    ताइपे, ताइवान
    मनामा, बहरीन
    मस्कट, ओमान
    द हेग (डेन हाग), नीदरलैंड्स
    आइंडहोवन, नीदरलैंड्स

    गौरतल है कि Numbeo का डेटा वेबसाइट पर आने वाले आगंतुकों द्वारा दिए गए सर्वेक्षणों के आधार पर तैयार किया जाता है, जो स्थापित वैज्ञानिक और सरकारी सर्वेक्षणों की तरह संरचित होते हैं। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात खुद दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित देशों की सूची में शामिल नहीं है।

    इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) द्वारा जारी ग्लोबल पीस इंडेक्स (2025) के अनुसार, दुनिया के 10 सबसे शांतिपूर्ण (सुरक्षित) देश निम्नलिखित हैं…
    दुनिया के 10 सबसे सुरक्षित देश

    आइसलैंड: ग्लोबल पीस इंडेक्स में सबसे ऊपर, स्कोर 1.10 (लगभग)
    आयरलैंड: स्कोर 1.26
    न्यूजीलैंड: स्कोर 1.28
    ऑस्ट्रिया: स्कोर 1.29
    स्विट्जरलैंड: स्कोर 1.29
    सिंगापुर: स्कोर 1.36
    पुर्तगाल: स्कोर 1.37
    डेनमार्क: स्कोर 1.39
    स्लोवेनिया: स्कोर 1.409 (लगभग)
    फिनलैंड: स्कोर 1.42 (लगभग)

    बता दें कि यह वैश्विक शांति सूचकांक 23 मात्रात्मक और गुणात्मक संकेतकों पर आधारित है, जिन्हें 1-5 के पैमाने पर भारित किया जाता है। स्कोर जितना कम, देश उतना ही अधिक शांतिपूर्ण और सुरक्षित माना जाता है। यह सूचकांक विश्व की 99.7 प्रतिशत आबादी को कवर करता है और उच्च सम्मानित स्रोतों से डेटा लेकर तैयार किया जाता है।

  • West Asia की जंग से दुनिया दो खेमों में विभाजित…. ट्रंप के सैन्य अभियान की घोषणा से गहरी हुई चिंता की लकीरें

    West Asia की जंग से दुनिया दो खेमों में विभाजित…. ट्रंप के सैन्य अभियान की घोषणा से गहरी हुई चिंता की लकीरें


    वॉशिंगटन।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में भड़की भीषण जंग ने पूरी दुनिया को दो स्पष्ट कूटनीतिक ध्रुवों में विभाजित कर दिया है। शनिवार सुबह जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) के मिसाइल उद्योग (Missile Industry) व उसकी नौसेना को नेस्तनाबूद करने के लिए बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की, तो वैश्विक राजनीति की लकीरें और गहरी हो गईं। ईरान में हुए मिसाइल हमलों के बाद वाशिंगटन (Washington) ने इसे ईरानी शासन से खतरों को खत्म करने का मिशन बताया है। इस्त्राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli PM Benjamin Netanyahu) ने भी इसे अस्तित्व की रक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे ईरानी जनता को अपना भाग्य खुद चुनने का अवसर मिलेगा। संघर्ष शुरू होने के बाद भारत के कश्मीर से लेकर जर्मनी व ब्रिटेन तक कहीं इसके विरोध तो कहीं पक्ष में प्रदर्शन हुए हैं।

    ईरान के हमले की कई इस्लामी देशों ने भी आलोचना की है और अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमले का समर्थन किया है। यूक्रेन, कतर, यूएई, बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब आदि देशों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। यूएई ने ईरान के हमले को कायराना हरकत करार देते हुए जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही है, जबकि सऊदी अरब ने इसके गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। यूक्रेन ने भी इस तनाव के लिए सीधे तौर पर ईरान के आंतरिक दमन और हालिया महीनों में प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा को जिम्मेदार ठहराया है।


    शांति की अपील वाले देश

    यूरोपीय संघ, जर्मनी, फ्रांस व ब्रिटेन ने ईरान से अंधाधुंध सैन्य कार्रवाई रोकने व वार्ता दोबारा शुरू करने की अपील की। फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ब्रिटेन के पीएम कीर स्टारमर ने संयुक्त बयान में कहा, हम पश्चिम एशियाई देशों पर ईरानी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। बेल्जियम ने कहा, ईरानी जनता अपनी सरकार के फैसलों की कीमत न चुकाए।


    रूस-चीन ईरान के पक्ष में

    कई ताकतवर देश ईरान के समर्थन में भी उतरे हैं। इनमें रूस, चीन, ओमान, तुर्किये व नॉर्वे शामिल हैं। रूस ने अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वाशिंगटन ने ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता का इस्तेमाल केवल अपने सैन्य हमलों को छिपाने के लिए किया। रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा, शांतिदूत (ट्रंप) ने एक बार फिर अपना चेहरा दिखाया है। चीन ने भी सैन्य कार्रवाई तत्काल रोकने व ईरान की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की मांग की है।

    ब्राजील की सरकार ने ईरान में हमलों की कड़ी निंदा की और क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि ये हमले ऐसे समय में हुए, जब बातचीत की प्रक्रिया चल रही थी, जिसे शांति का एकमात्र व्यवहारिक रास्ता बताया गया। ब्राजील ने स्पष्ट किया कि विवादों के समाधान के लिए संवाद ही वैध और टिकाऊ माध्यम है।


    ईरान आतंक का प्रमुख स्रोत : कार्नी

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पश्चिम एशिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और आतंक का मुख्य स्रोत है। उसे किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने या विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। मुंबई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्नी ने कहा, ईरान का मानवाधिकार रिकॉर्ड दुनिया में सबसे खराब रिकॉर्डों में से एक है।

    कार्नी ने कहा, कनाडा और उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदार लगातार ईरानी शासन से उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की अपील करते रहे हैं। उन्होंने कन्नानास्किस में हुए जी7 शिखर सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंधों की पुनः बहाली का भी उल्लेख किया। कार्नी ने मुंबई में नवाचार प्रदर्शनी में हिस्सा लिया और विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं से मुलाकात की। कार्नी ने शनिवार को मुंबई में भारत-कनाडा टैलेंट एंड इनोवेशन स्ट्रैटेजी की शुरुआत की।