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  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वाले महादेव मंदिर में मनाई महाशिवरात्रि, शिव बारात में लिया भाग

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वाले महादेव मंदिर में मनाई महाशिवरात्रि, शिव बारात में लिया भाग


    भोपाल। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के प्राचीन बड़वाले महादेव मंदिर में पहुंचकर शिवभक्तों के साथ पूजा-अर्चना की और महापर्व को उत्साहपूर्वक मनाया। मुख्यमंत्री ने उपस्थित नागरिकों को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं दी और सभी के साथ इस पर्व की महत्ता को साझा किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर अभिषेक किया। पूजा के दौरान स्थानीय शिवभक्तों और युवाओं ने पारंपरिक ढंग से डमरू दल की प्रस्तुति दी, जबकि पुलिस बैंड ने भव्य संगीत के माध्यम से कार्यक्रम को और आकर्षक बनाया। मंदिर परिसर भक्तों की उपस्थिति से गुलजार रहा और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण मंत्रमुग्ध कर देने वाला था।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिव बारात का रथ रवाना किया और स्वयं रथ खींचकर बारात की अगुवाई की। स्थानीय नागरिकों ने उत्साह और उमंग के साथ इस बारात में भाग लिया। हर-हर महादेव और जय महाकाल के सामूहिक उद्घोष ने मंदिर परिसर को भक्तिमय माहौल में बदल दिया।

    महाशिवरात्रि कार्यक्रम में अनेक जनप्रतिनिधि और शिव भक्त भी शामिल हुए। इनमें सांसद श्री आलोक शर्मा, भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक श्री भगवानदास सबनानी, श्री रविंद्र यति, श्री राहुल कोठारी सहित महाशिवरात्रि पर्व आयोजन समिति के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद थे। सभी ने मिलकर इस धार्मिक महोत्सव में भाग लिया और भक्तों के साथ त्योहार का आनंद साझा किया।

    कार्यक्रम के दौरान भक्तों ने न केवल भगवान शिव की पूजा अर्चना की, बल्कि पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक उत्सव के महत्व को भी महसूस किया। बड़वाले महादेव मंदिर की भव्य सजावट और आयोजन ने इसे और भी खास बना दिया। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और भागीदारी ने इस पर्व को और भी प्रभावशाली और यादगार बना दिया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह समाज में भाईचारा, भक्ति और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि पर्व का आनंद ले और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इसे मनाएं।

    इस तरह भोपाल के प्राचीन बड़वाले महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उमंग के साथ मनाया गया। शिवभक्तों की भीड़, पारंपरिक बारात और मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी विशेष बना दिया।

  • ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि: ब्रह्म मुहूर्त में साधु-संतों ने किए दर्शन, फूलों से सजा परिसर

    ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि: ब्रह्म मुहूर्त में साधु-संतों ने किए दर्शन, फूलों से सजा परिसर


    खंडवा। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में अद्भुत दृश्य देखने को मिला। रविवार की ब्रह्म मुहूर्त में रात तीन बजे से ही मंदिर परिसर भक्तों और साधु-संतों की उपस्थिति से गुलजार रहा। फूलों से सजे भव्य मंदिर में साधु-संतों ने विशेष दर्शन और पूजा की, जिसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए रात 3:30 बजे मंदिर के पट खुले।भक्तों ने मां नर्मदा में स्नान कर ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पित किया। इस अवसर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पुराने पुल से श्रद्धालुओं को मंदिर की ओर प्रवेश कराया, जबकि नए झूला पुल के माध्यम से बाहर निकाला गया। इस व्यवस्था से श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

    रात के समय मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट खोले गए। बैंड बाजो की ध्वनि और बम भोले की गूंज के साथ सन्यासी और साधु-संतों ने शोभायात्रा निकाली और सबसे पहले भगवान शिव के दर्शन किए। मंदिर में फूलों की भव्य सजावट ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। फूलों से सजा परिसर रात और दिन दोनों समय आकर्षण का केंद्र रहा। मंदिर ट्रस्ट की ओर से दोपहर में भोग आरती का आयोजन भी किया गया। इस दौरान भगवान शिव को 151 किलो मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इसके साथ ही तीर्थ नगरी के आश्रमों और नगर के विभिन्न हिस्सों में खिचड़ी और प्रसादी का वितरण किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में आनंद और धार्मिक उमंग का माहौल बना रहा।

    मंदिर में यह विश्वास है कि भगवान शिव साक्षात् रूप में ओंकारेश्वर में निवास करते हैं। दिनभर सृष्टि का संचालन करने के बाद वे रात में नर्मदा किनारे विश्राम करते हैं। इसलिए आज मंदिर में चौपड़-पांसे और झूला नहीं सजाया गया और रात में आरती का आयोजन नहीं होगा। महाशिवरात्रि के अवसर पर ओंकारेश्वर में मंदिर प्रशासन और सुरक्षा अधिकारियों ने पूरी तत्परता दिखाई। भारी भीड़ के बावजूद सुव्यवस्थित व्यवस्था और श्रद्धालुओं का सहयोग इसे सफल आयोजन बनाने में सहायक रहा।

    भक्तों ने कहा कि ओंकारेश्वर में ब्रह्म मुहूर्त में दर्शन करने का अनुभव अलौकिक और अद्वितीय रहा। फूलों से सजे मंदिर परिसर, भव्य शोभायात्रा, और नर्मदा स्नान के साथ जल अर्पण ने इस महापर्व की महिमा को और बढ़ा दिया। यह महाशिवरात्रि न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव और उमंग का केंद्र भी बनी। मंदिर में पवित्र माहौल, सुरक्षा और सुव्यवस्था ने इसे श्रद्धालुओं के लिए यादगार अवसर बना दिया।

  • देशभर में महाशिवरात्रि पूर्व की धूम…. जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    देशभर में महाशिवरात्रि पूर्व की धूम…. जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि


    नई दिल्ली।
    देश भर में आज रविवार को फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि का पर्व (Mahashivratri festival) धूमधाम से मनाया जा रहा है। महाशिवरात्रि में त्रयोदशी-चतुर्दशी का मेल होता है, त्रयोदशी समाप्त होकर चतुर्दशी शुरू होती है, वही समय महाशिवरात्रि का विशेष पुण्यकाल (Special Auspicious time.) माना जाता है। ज्योतिषचार्यों के अनुसार 15 फरवरी को दिन में त्रयोदशी तिथि रहेगी, लेकिन शाम 5:04 बजे चतुर्दशी तिथि आरंभ हो जाएगी। ऐसे में पूरी रात्रि में चतुर्दशी ही व्याप्त रहेगी। इसलिए महाशिवरात्रि पर्व 15 फरवरी को मनाया जा रहा है।

    इस वर्ष महाशिवरात्रि पर व्यतिपात, वरियान व अमृत नामक महा औदायिक योग व निशीथ काल भी बन रहा है। पं. शरद चंद मिश्र के अनुसार, इस दिन सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 25 मिनट पर होगा। फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी सायं 4 बजकर 23 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होकर रात्रि भर रहेगी। उत्तराषाढ़ नक्षत्र सायं 7 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा। व्यतिपात योग दोपहर 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा, इसके पश्चात वरियान योग लगेगा। साथ ही अमृत सिद्धि योग पूरे दिन-रात्रि विद्यमान रहेगा। निशीथ काल रात्रि 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा, जो भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है। प. नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 6:25 से सायं 7:26 तक रहेगा। व्यतिपात योग साधना और जप-तप के लिए विशेष फलदायी माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर में रहेगा, जिसमें पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है।

    महाशिवरात्रि का महत्त्व : पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि में भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसलिए इसे महाशिवरात्रि या कालरात्रि भी कहा गया है। पौराणिक व्याख्यानों के अनुसार इसे शिव विवाह महोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। महाशिवरात्रि को वर्षभर में पड़ने वाली सिद्ध रात्रियों में से एक माना गया है।

    मुहूर्त
    ● चतुर्दशी तिथि उपस्थित : 15 फरवरी शाम 5:04 से 16 फरवरी शाम 5:34 बजे
    ● शिवरात्रि का विशष पुण्यकाल : 15 की शाम 5:04 से आरम्भ
    ● जलाभिषेक का समय : 15 को प्रातःकाल से आरम्भ
    ● विशेष पुण्यकाल : शाम 5:04 के बाद विशेष पुण्यकाल का अभिषेक होगा

    शिव पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त-
    निशिता काल पूजा समय – 12:37 ए एम से 01:32 ए एम, फरवरी 16
    अवधि – 55 मिनट
    शिवरात्रि पारण समय – 16 फरवरी को 07:57 ए एम से 01:04 पी एम तक।
    रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 06:11 पी एम से 09:38 पी एम
    रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 09:38 पी एम से 01:04 ए एम, फरवरी 16
    रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 01:04 ए एम से 04:31 ए एम, फरवरी 16
    रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 04:31 ए एम से 07:57 ए एम, फरवरी 16

    महाशिवरात्रि की पूजा विधि (घर और मंदिर में कैसे करें पूजा)-
    महाशिवरात्रि की पूजा विधि: घर में कैसे करें पूजा- महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर में पूजा करने से पहले पूजा की जगह अच्छे से साफ कर लें। शिवलिंग को भी पानी से धोकर साफ जगह पर रखें। सबसे पहले शिवलिंग पर साफ जल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, घी और शहद से एक-एक करके अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक करते समय मन में “ॐ नमः शिवाय” का जप करते रहें। अगर सब चीजें उपलब्ध न हों तो सिर्फ जल और दूध से भी पूजा पूरी मानी जाती है। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र जरूर चढ़ाएं। साथ में धतूरा, आक के फूल और सफेद फूल चढ़ा सकते हैं। फूल चढ़ाते समय मन में अपनी इच्छा रखें और शिवजी को याद करें। इसके बाद धूप-दीप जलाएं और थोड़ी देर शांत बैठकर शिव मंत्रों का जप करें। मन की बात भगवान शिव से कहें। शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी कर सकते हैं। जो लोग रात में जागकर पूजा कर पाते हैं, वे घर पर ही सरल तरीके से रुद्राभिषेक कर सकते हैं।

    घर में शिवलिंग रखने की सही बात-
    घर में बहुत बड़ा शिवलिंग रखने की परंपरा नहीं है। आमतौर पर मिट्टी, पत्थर, पीतल या चांदी का छोटा शिवलिंग घर के लिए ठीक माना जाता है। शिवलिंग के साथ गणेश जी, माता पार्वती और नंदी की छोटी मूर्ति रखकर पूजा करना अच्छा माना जाता है।

    महाशिवरात्रि की पूजा विधि: मंदिर में कैसे करें पूजा-
    अगर मंदिर जाकर पूजा कर रहे हैं तो सुबह स्नान करके साफ कपड़ों में मंदिर जाएं। मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। कई जगहों पर दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक की व्यवस्था होती है, वहां श्रद्धा से अभिषेक करें। “ॐ नमः शिवाय” का मन ही मन जप करते रहें।शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद फूल चढ़ाएं। पुजारी जी के बताए नियमों का पालन करें। धूप-दीप दिखाकर भगवान शिव का ध्यान करें। अगर संभव हो तो रात में मंदिर जाकर रुद्राभिषेक या विशेष पूजा में शामिल हों। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात की पूजा का खास फल मिलता है।

    महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जप-
    महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए कुछ आसान और असरदार मंत्रों का जप किया जा सकता है। सबसे पहले “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। यह शिव जी का सबसे सरल और शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। इस पावन दिन महामृत्युंजय मंत्र का जप भी किया जाता है–
    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

    शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या नहीं- महाशिवरात्रि या रोज की पूजा में शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए जल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक किया जाता है और इसके बाद बेलपत्र जरूर अर्पित करें, क्योंकि यह शिवजी को सबसे प्रिय माना जाता है। साथ में सफेद फूल, आक और धतूरा भी चढ़ाए जाते हैं। धूप-दीप जलाकर सादे मन से पूजा करें। वहीं शिवलिंग पर केतकी का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि मान्यता के अनुसार यह शिव पूजा में वर्जित माना गया है। तुलसी के पत्ते भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते, इन्हें विष्णु पूजा के लिए रखा जाता है। लाल रंग के तेज खुशबू वाले फूल, टूटे या मुरझाए फूल, बासी फूल और चढ़ाया हुआ प्रसाद दोबारा शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए।

  • Maha Shivratri पर इस बार बन रहे कई दुर्लभ संयोग… जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और विधि

    Maha Shivratri पर इस बार बन रहे कई दुर्लभ संयोग… जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और विधि


    नई दिल्ली।
    महाशिवरात्रि (Maha Shivratri) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन पर्व (Holy Festival) है, जिसका भक्त पूरे साल इंतजार करते हैं. साल 2026 में महाशिवरात्रि (Maha Shivratri 2026) 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी. इस बार तिथि को लेकर कुछ लोगों के मन में भ्रम था कि व्रत 15 को रखा जाए या 16 फरवरी को, लेकिन शास्त्रों के अनुसार 15 फरवरी को ही पर्व मनाना उचित रहेगा. फाल्गुन मास (Phalguna Month) के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि इस बार 15 फरवरी शाम 5 बजकर 5 मिनट बजे से शुरू होकर 16 फरवरी शाम 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगी. चूंकि, निशीथकाल (मध्य रात्रि) में चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की रात को ही रहेगी, इसलिए इसी दिन महाशिवरात्रि मनाना शास्त्रसम्मत है.


    महाशिवरात्रि पर पूजा का सही समय क्या है?

    अगर आप मंदिर में जलाभिषेक करने जा रहे हैं तो दिन में किसी भी समय जा सकते हैं. लेकिन यदि रुद्राभिषेक करना चाहते हैं तो रात्रि का समय सबसे उत्तम माना गया है।
    प्रथम पहर: शाम 7 बजे से 9 बजे तक
    द्वितीय पहर: रात 10 बजे से 12 बजे तक
    तृतीय पहर: रात 1 बजे से 3 बजे तक
    चतुर्थ पहर: सुबह 4 बजे से 6 बजे तक
    यदि चारों पहर संभव न हो, तो कम से कम एक पहर में रुद्राभिषेक अवश्य करें.


    महाशिवरात्रि 2026 शुभ संयोग (Maha Shivratri 2026 Shubh Sanyog)

    महाशिवरात्रि इस बार बहुत ही विशेष मानी जा रही है. दरअसल इस दिन शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, शोभन योग, साध्य योग, शुक्ल योग, ध्रुव योग, व्यतिपात और वरियान योग का भी प्रभाव बना रहेगा.

    महाशिवरात्रि 2026 जलाभिषेक शुभ मुहूर्त (Maha Shivratri 2026 Jalabhishek Muhurat)
    इस बार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त मिलेंग, जिनमें भक्त पूजा-अर्चना कर सकते हैं. पहला मुहूर्त सुबह 8 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 9 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक का रहेगा.

    तीसरा मुहूर्त अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा, जो सुबह 11 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक का रहेगा, जिसमें जल चढ़ाना अत्यंत फलदायी रहेगा. जो श्रद्धालु शाम को पूजा करना चाहते हैं, वे 6 बजकर 11 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट के बीच अभिषेक कर सकते हैं. इन सभी मुहूर्तों में श्रद्धा और सच्चे मन से शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है.


    रुद्राभिषेक में क्या चढ़ाएं?

    भगवान शिव को जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, शमी पत्र, भस्म, चंदन और मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं. कई लोग पार्थिव शिवलिंग बनाकर भी अभिषेक करते हैं. शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व है. मान्यता है कि जल हमारे भावों को धारण करता है. जब हम सच्चे मन से जल अर्पित करते हैं, तो हमारे मन की सकारात्मक ऊर्जा भी ईश्वर तक पहुंचती है और नकारात्मकता धीरे-धीरे कम होने लगती है.


    महाशिवरात्रि पर जरूर करें ये उपाय

    अगर जीवन में आर्थिक परेशानी है, आय कम है या मेहनत के अनुसार फल नहीं मिल रहा, तो महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखें. सुबह स्नान के बाद शिव मंदिर जाकर गंगाजल से अभिषेक करें. ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए 11 बेलपत्र चढ़ाएं. दिन भर श्रद्धा से व्रत रखें. शाम को रुद्राभिषेक कराएं और कम से कम 11 माला ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें. नियमित रूप से मंत्र जाप जारी रखने से धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है.


    तनाव और डिप्रेशन दूर करने का उपाय

    अगर मन में तनाव, नकारात्मकता या बेचैनी रहती है, तो महाशिवरात्रि पर गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें. 11 बेलपत्र अर्पित करें और प्रतिदिन 108 बार ”ऊं नमः शिवाय” का जाप शुरू करें. नियमित मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक सोच विकसित होती है.

  • शिवनवरात्रि उत्सव: महाकाल का दिव्य श्रृंगार, 15 फरवरी तक अलग-अलग स्वरूपों में होंगे दर्शन

    शिवनवरात्रि उत्सव: महाकाल का दिव्य श्रृंगार, 15 फरवरी तक अलग-अलग स्वरूपों में होंगे दर्शन


    उज्जैन । उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि उत्सव धूमधाम और श्रद्धा-उल्लास के साथ जारी है। शनिवार को शिवनवरात्रि के दूसरे दिन मंदिर प्रांगण में कोटितीर्थ के तट पर सुबह 8 बजे से ही भक्तों का तांता लगा रहा। इस अवसर पर सुबह श्री गणेश पूजन के साथ ही श्री कोटेश्वर महादेव का विशेष पूजन, अभिषेक और आरती संपन्न हुई।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा भगवान महाकाल का अभिषेक एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ के साथ विधिवत रूप से किया गया। अभिषेक में भक्तों की आस्था के अनुसार विशेष विधियों का पालन किया गया और मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान की पवित्रता बनी रही।

    दोपहर तीन बजे के बाद संध्या पूजन के पश्चात भगवान श्री महाकालेश्वर का विशेष श्रृंगार किया गया। इस दौरान भगवान को नवीन वस्त्रों से सजा कर मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंड-माला, छत्र आदि से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही भांग, चंदन और सूखे मेवों से दिव्य श्रृंगार कर भगवान को नारंगी माला और मुंड-माला अर्पित की गई। भगवान महाकाल का यह श्रृंगार भक्तों के लिए अत्यंत आकर्षण का केंद्र बना।

    शिवनवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। हर समय भक्तों का उत्साह देखने लायक है और लोग भगवान के दर्शन के लिए कतार में लगे रहते हैं। मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि भक्तों को बिना किसी असुविधा के दर्शन-पूजन का अवसर मिल सके।

    विशेष रूप से यह बताया गया है कि भगवान श्री महाकालेश्वर 15 फरवरी तक प्रतिदिन सायंकाल अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे। शिवनवरात्रि के इन दिनों में महाकालेश्वर का श्रृंगार और विशेष पूजा-आराधना का क्रम जारी रहेगा, जिससे भक्तों को भक्ति और आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

    शिवनवरात्रि उत्सव का यह दूसरा दिन भक्तों के लिए विशेष रूप से यादगार रहा। मंदिर के पवित्र वातावरण में सुबह से शाम तक चलने वाले अनुष्ठान और श्रृंगार ने भक्तों के मन में एक अलग ही ऊर्जा और श्रद्धा का संचार किया।

  • कुंडली में गुरु को मजबूत बनाने के 6 आसान उपाय: धन-समृद्धि और सुख-शांति के लिए

    कुंडली में गुरु को मजबूत बनाने के 6 आसान उपाय: धन-समृद्धि और सुख-शांति के लिए

    कुंडली में गुरु ग्रह का विशेष महत्व है। यह ग्रह व्यक्ति के सुख, वैभव, प्रेम, विवाह और समृद्धि से जुड़ा होता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु कमजोर हो या उसकी दशा बिगड़ी हो, तो जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे आर्थिक तंगी, वैवाहिक समस्याएं, मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां। इसलिए गुरु को मजबूत बनाना बेहद जरूरी है ताकि जीवन में सुख-समृद्धि और वैभव बना रहे। यहां हम आपको बताएंगे 6 आसान और प्रभावशाली उपाय जिनकी मदद से आप गुरु ग्रह की स्थिति को सुधार सकते हैं।

    1. पीले रंग का पहनावा और दान करें

    गुरुवार का दिन गुरु ग्रह का दिन माना जाता है। इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। पीले रंग का संबंध गुरु ग्रह और ज्ञान से होता है। इसके अलावा, पीली वस्तुएं दान करना जैसे गेहूं, दालें, हल्दी या पीले वस्त्र, गुरु को मजबूत बनाने में सहायक होते हैं। इससे आर्थिक स्थिति में सुधार आता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

    2. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा

    अगर आप अपने घर में दरिद्रता या आर्थिक संकट से छुटकारा पाना चाहते हैं तो हर गुरुवार को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विधिवत रूप से करें। पूजा के समय ध्यान रखें कि मन में शुद्धि और भक्ति भाव हो। इस उपाय से गुरु दोष के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वातावरण बनता है।

    3. विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ

    गुरुवार के दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना बहुत फलदायक माना जाता है। यह मंत्र पढ़ने से जीवन में आर्थिक संकट और व्यक्तिगत समस्याओं का निवारण होता है। गुरु ग्रह मजबूत होने पर व्यक्ति को ज्ञान, वैभव और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है। प्रतिदिन इस मंत्र का पाठ करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।

    4. हल्दी से स्नान

    कुंडली में गुरु दोष होने पर व्यक्ति की आर्थिक और व्यक्तिगत जीवन में परेशानियां बढ़ जाती हैं। इसके लिए गुरुवार के दिन पानी में हल्दी मिलाकर स्नान करना बेहद लाभकारी होता है। इससे शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं और गुरु ग्रह का नकारात्मक प्रभाव कम होता है। हल्दी में मौजूद औषधीय गुण भी शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।

    5. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जाप

    गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन 108 बार ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना चाहिए। यह मंत्र गुरु ग्रह से संबंधित है और जीवन के कष्टों को दूर करने में मदद करता है। मंत्र जाप करने से धन, ज्ञान और वैभव प्राप्त होता है। साथ ही यह मानसिक शांति और स्थिरता भी प्रदान करता है।

    6. केले के पेड़ की पूजा

    गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करना भी गुरु ग्रह को मजबूत करने का प्रभावशाली उपाय है। इस दिन पेड़ की जड़ के सामने घी के पांच दीपक जलाएं और चने व गुड़ का भोग लगाएं। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें। यह उपाय विवाह में रुकावटें, आर्थिक समस्याएं और गुरु दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद करता है।

    गुरु ग्रह जीवन में सौभाग्य, वैभव और सुख-शांति का प्रतीक है। अगर यह कमजोर हो जाए, तो कई समस्याएं जन्म ले सकती हैं। ऊपर बताए गए 6 उपाय -पीले रंग का पहनावा, दान, पूजा, विष्णु सहस्त्रनाम, हल्दी स्नान, मंत्र जाप और केले के पेड़ की पूजा – गुरु ग्रह को मजबूत बनाने के लिए बेहद प्रभावशाली हैं। इन्हें नियमित रूप से अपनाने से जीवन में धन-समृद्धि, मानसिक संतुलन और वैभव बना रहता है।