सीएम डॉ. मोहन यादव के बैतूल-कटनी दौरे, भोपाल में गैस कालाबाजारी पर पुलिस कार्रवाई और TET परीक्षा को लेकर शिक्षक आंदोलन का उबाल


भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव आज यानी 14 मार्च को बैतूल और कटनी जिलों के दौरे पर रहेंगे। उनका कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुजालपुर में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में वर्चुअल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शामिल होने से शुरू होगा जिसमें वे नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएं देंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री भोपाल से बैतूल के लिए रवाना होंगे। बैतूल आरंभ वे सबसे पहले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निवास पर जाएंगे।
दोपहर 1:15 बजे सीएम बैतूल से कटनी जिले के बरही क्षेत्र में आयोजित किसान सम्मेलन में शामिल होंगे। इस दौरान वे किसानों को संबोधित करेंगे और उनकी समस्याओं पर चर्चा करेंगे। शाम 5:40 बजे बरही से जबलपुर के लिए रवाना होने के बाद डुमना एयरपोर्ट से 6:30 बजे तक भोपाल पहुंचने का कार्यक्रम है।

इसी बीच राजधानी भोपाल में घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। थाना कोलार रोड पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि घरेलू गैस सिलेंडरों की अवैध बिक्री की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एक पिकअप वाहन को रोककर जांच की जिसमें इंडेन कंपनी के कुल 25 घरेलू गैस सिलेंडर बरामद हुए। यह सिलेंडर घरेलू उपयोग के लिए आरक्षित थे लेकिन इन्हें काले बाजार में बेचने के इरादे से ले जाया जा रहा था। पुलिस ने वाहन और सिलेंडर दोनों जब्त कर पूरे मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है।

इसी समय प्रदेशभर में शिक्षक समाज में TET परीक्षा को लेकर उबाल देखा जा रहा है। शिक्षकों ने कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपे हैं जबकि सुसनेर के पूर्व बीजेपी विधायक मुरलीधर पाटीदार ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को पत्र लिखा लिखकर TET परीक्षा के आदेश तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में लिखा कि 25 साल से अधिक अनुभव रखने वाले संविदा शिक्षकों ने शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

पूर्व विधायक ने चेतावनी दी है कि यदि TET परीक्षा के आदेश निरस्त नहीं किए गए और शिक्षकों के उचित वातावरण और सुरक्षा के लिए कदम नहीं उठाए गए तो शिक्षक समाज उग्र आंदोलन की ओर बढ़ सकता है। उनका कहना है कि शिक्षक समाज का पूरा समर्थन उनके आंदोलन के साथ रहेगा और जरूरत पड़ने पर शिक्षा के अधिकार अधिनियम में संशोधन की भी मांग की जाएगी।

राज्य प्रशासन के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है क्योंकि एक तरफ मुख्यमंत्री के दौरे और कार्यक्रम हैं वहीं दूसरी ओर शिक्षक आंदोलन और गैस कालाबाजारी जैसे मुद्दे समाज में असंतोष बढ़ा रहे हैं। प्रशासन के लिए इन सभी घटनाओं को संतुलित ढंग से संभालना एक बड़ी जिम्मेदारी साबित हो सकती है।