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  • CM के इंतजार में थमी भाजपा की पदयात्रा, नेता सीढ़ियों पर करते रहे प्रतीक्षा; बच्चों को थमाए गए पार्टी के झंडे

    CM के इंतजार में थमी भाजपा की पदयात्रा, नेता सीढ़ियों पर करते रहे प्रतीक्षा; बच्चों को थमाए गए पार्टी के झंडे


    इंदौर । इंदौर में भाजपा की ओर से निकाली गई लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ पदयात्रा के दौरान शुक्रवार को कई ऐसे नजारे देखने को मिले जिन्होंने कार्यक्रम को चर्चा में ला दिया। सुभाष नगर चौराहे से पाटनीपुरा चौराहे तक निकाली गई इस पदयात्रा के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इंतजार में यात्रा कुछ देर तक रुकी रही। मंच से लेकर सीढ़ियों तक केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री के पहुंचने की प्रतीक्षा करते नजर आए। वहीं कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के हाथों में भाजपा के झंडे और गले में पार्टी के गमछे दिखाई दिए। जब बच्चों से पूछा गया कि वे लोकतंत्र बचाने के लिए क्यों आए हैं तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। शिक्षकों ने उन्हें कार्यक्रम में लाया था।

    पदयात्रा की शुरुआत सुभाष नगर चौराहे से हुई थी। यात्रा परदेशीपुरा चौराहे पहुंची तो वहां मंच से नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने माइक संभाला और नारेबाजी करवाकर कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और सांसद शंकर लालवानी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे। नेताओं के भाषण पूरे होने के बाद भी मुख्यमंत्री मोहन यादव कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंचे थे।

    इसके बाद मुख्यमंत्री के आने का इंतजार शुरू हो गया। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से ये देश है वीर जवानों का गीत सुनाया और लोगों से आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री से पदयात्रा शुरू करने की अनुमति ले ली गई है। विजयवर्गीय ने आगे बढ़ने की बात भी कही लेकिन मुख्यमंत्री के आने की सूचना मिलने पर कार्यक्रम में मौजूद नेता रुक गए।

    मंत्री विजयवर्गीय के आग्रह पर जनप्रतिनिधि मंच से उतरकर सीढ़ियों की ओर बढ़े। हालांकि मुख्यमंत्री के कुछ देर में पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री और अन्य नेता वहीं रुककर उनका इंतजार करने लगे। इस दौरान विजयवर्गीय दोबारा मंच से नारे लगवाते रहे। कुछ समय बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव का काफिला परदेशीपुरा चौराहे पहुंचा। उनके आगमन की घोषणा की गई और फिर मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उन्होंने हवा में गुब्बारे छोड़े और इसके बाद पदयात्रा में शामिल हो गए।

    कार्यक्रम के दौरान एक और घटनाक्रम चर्चा में रहा। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा पाटनीपुरा स्थित मंच की ओर जाने के लिए सड़क की दूसरी लेन में पहुंचे। वहां उन्हें दो युवकों के साथ एक दोपहिया वाहन दिखाई दिया। उन्होंने वाहन रुकवाया और पीछे बैठे युवक को उतारकर खुद बैठ गए। उन्होंने चालक से उन्हें तुरंत मंच तक पहुंचाने को कहा। जैसे ही चालक ने वाहन मोड़ा उसका अगला पहिया फिसल गया। इससे सुमित मिश्रा और चालक दोनों गिरते-गिरते बच गए।

    पदयात्रा में स्कूली बच्चों की मौजूदगी ने भी सवाल खड़े किए। कुछ बच्चे हाथों में भाजपा के झंडे और गले में पार्टी के गमछे डालकर पहुंचे थे। ये बच्चे मां कनकेश्वरी देवी स्कूल के बताए गए। जब उनसे पूछा गया कि लोकतंत्र खतरे में क्यों है तो बच्चों ने कहा कि उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि स्कूल के शिक्षक उन्हें कार्यक्रम में लेकर आए थे और पहले से यह नहीं बताया गया था कि उन्हें किस उद्देश्य से यहां लाया जा रहा है।

    इस पदयात्रा को लेकर शहर में यातायात व्यवस्था पर भी सवाल उठे। रिपोर्ट के मुताबिक करीब डेढ़ किलोमीटर की यात्रा के लिए लगभग 50 रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई थी। सुबह आठ बजे से शुरू हुई व्यवस्था के कारण कई इलाकों में यातायात प्रभावित रहा और लोगों को करीब छह घंटे तक जाम तथा रास्तों की परेशानी का सामना करना पड़ा। इस तरह भाजपा की पदयात्रा राजनीतिक संदेश के साथ-साथ मुख्यमंत्री के इंतजार स्कूली बच्चों की मौजूदगी और शहर में हुई यातायात व्यवस्था को लेकर भी चर्चा में आ गई।

  • भोपाल पहुंचे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, आज राज्यसभा के लिए भरेंगे पर्चा, CM मोहन यादव समेत भाजपा के दिग्गज नेता रहेंगे मौजूद

    भोपाल पहुंचे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, आज राज्यसभा के लिए भरेंगे पर्चा, CM मोहन यादव समेत भाजपा के दिग्गज नेता रहेंगे मौजूद


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राज्यसभा की खाली हुई सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी शनिवार को भोपाल में राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें मध्य प्रदेश से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। पुरी शुक्रवार देर रात भोपाल पहुंच गए थे। उनके नामांकन को लेकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है।

    भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी के नाम पर मुहर लगाई थी। इसके बाद से ही उनके नामांकन की तैयारियां शुरू हो गई थीं। शनिवार सुबह वे विधानसभा पहुंचकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। पार्टी की ओर से इस दौरान वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत और एकजुटता प्रदर्शित करने की भी तैयारी है। केंद्रीय मंत्री के नामांकन को राज्यसभा उपचुनाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    दरअसल मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य डॉ. एल. मुरुगन ने 13 अक्टूबर को अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था। उनके इस्तीफे के बाद राज्यसभा की यह सीट खाली हो गई और अब इसी सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने इस चुनाव के लिए हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है। पुरी केंद्र सरकार में मंत्री हैं और उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजने के फैसले को पार्टी की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    नामांकन की प्रक्रिया में भाजपा ने अपने स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रदेश सरकार में मंत्री कृष्णा गौर हरदीप सिंह पुरी के नामांकन में प्रस्तावक बनेंगी। उन्होंने शुक्रवार को भाजपा कार्यालय में प्रस्तावक के रूप में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। इससे नामांकन की औपचारिक तैयारियों को आगे बढ़ाया गया। शनिवार को विधानसभा में नामांकन दाखिल होने के साथ ही चुनावी प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा।

    इस उपचुनाव में विधानसभा का संख्या बल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। हालांकि कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। ऐसे में प्रभावी संख्या बल के आधार पर चुनावी गणित का आकलन किया जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए आवश्यक मतों का कोटा निर्धारित नियमों के अनुसार तय होगा। विधायकों की वास्तविक संख्या और मतदान की स्थिति चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकती है।

    बीना से विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति भी इस चुनाव में चर्चा का विषय बनी हुई है। वे खुद को कांग्रेस में बताती हैं लेकिन भाजपा के कार्यक्रमों में भी उनकी मौजूदगी देखी गई है। दलबदल से जुड़े मामले के कारण उनकी स्थिति को लेकर राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में दोनों दलों के लिए विधायकों के समर्थन का सही आकलन करना अहम होगा।

    नामांकन से पहले हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को भोपाल स्थित करुणा धाम आश्रम पहुंचकर पीठाधीश्वर गुरुदेव सुदेश शांडिल्य महाराज से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी और विधायक भगवानदास सबनानी सहित पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अब सभी की निगाहें नामांकन प्रक्रिया और आगे होने वाले राज्यसभा उपचुनाव पर टिकी हैं।

  • ना बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया, सीएम मोहन यादव के बयान ने खींचा ध्यान, शहडोल में लाखों हितग्राहियों को मिली सौगात

    ना बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया, सीएम मोहन यादव के बयान ने खींचा ध्यान, शहडोल में लाखों हितग्राहियों को मिली सौगात

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का शहडोल में दिया गया बयान चर्चा का विषय बन गया है। तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि ना बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया। उनके इस कथन ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। हालांकि मुख्यमंत्री ने इस बात को लोगों को उनका अधिकार और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के संदर्भ में रखा। शहडोल के बाणगंगा मेला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने तेंदूपत्ता संग्राहकों के खातों में करोड़ों रुपये की बोनस राशि अंतरित की। इसके साथ ही क्षेत्र में विकास कार्यों की सौगात और विभिन्न योजनाओं से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की।

    मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के माध्यम से तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े हितग्राहियों के खातों में बोनस की राशि भेजी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार छह वन मंडलों और पांच जिलों के 8.66 लाख से अधिक हितग्राहियों को करीब 22.85 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई। कुछ रिपोर्टों में यह राशि 22.89 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। इस सहायता का उद्देश्य तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े परिवारों को आर्थिक लाभ पहुंचाना है। वन उपज पर निर्भर रहने वाले अनेक परिवारों के लिए तेंदूपत्ता संग्रहण आय का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में बोनस की राशि उनके घरेलू खर्च और आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मददगार हो सकती है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक उसका हक पहुंचे। इसी संदर्भ में उन्होंने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचना चाहिए। उनके संबोधन में जनकल्याण और विकास से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। उन्होंने प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने और जनता के हित में योजनाओं को लागू करने की सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई। बयान का एक हिस्सा राजनीतिक चर्चा का विषय बना लेकिन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य तेंदूपत्ता संग्राहकों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना और क्षेत्र में विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाना था।

    शहडोल दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों से जुड़ी कई गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने क्षेत्र में 134 विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमिपूजन से संबंधित कार्यक्रम में भाग लिया। इन कार्यों की कुल लागत को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में अंतर है। एक रिपोर्ट में करीब 461.83 करोड़ रुपये के कार्यों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर तैयार करने से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने शहडोल में इस्पात फैक्ट्री स्थापित करने की घोषणा की और कहा कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। प्रस्तावित परियोजना की समयसीमा और अन्य विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद इसकी प्रगति का आकलन किया जा सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने शिक्षा और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए वर्तमान सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया। अपने संबोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को लैपटॉप और स्कूटी उपलब्ध कराने जैसे कदमों का जिक्र किया। राजनीतिक टिप्पणी के साथ उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं को जनता तक पहुंचाने की बात कही। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बोनस वितरण तथा विकास योजनाओं से जुड़े विषय भी चर्चा में रहे।

    शहडोल का यह कार्यक्रम तेंदूपत्ता संग्राहकों को आर्थिक सहायता देने के साथ क्षेत्रीय विकास की योजनाओं को सामने रखने का अवसर बना। मुख्यमंत्री का बयान सुर्खियों में जरूर आया लेकिन हितग्राहियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनके खातों में पहुंची बोनस राशि है। अब इन योजनाओं और घोषित परियोजनाओं का लाभ जमीन पर किस तरह पहुंचता है और प्रस्तावित विकास कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं इस पर लोगों की नजर रहेगी।

  • मोहन कैबिनेट के एजेंडे में 21 प्रस्ताव, गेहूं निपटान से लेकर सिंचाई परियोजनाओं और संविदा नियुक्तियों पर चर्चा

    मोहन कैबिनेट के एजेंडे में 21 प्रस्ताव, गेहूं निपटान से लेकर सिंचाई परियोजनाओं और संविदा नियुक्तियों पर चर्चा


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में चमकविहीन गेहूं के पुराने मामले सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। बैठक के एजेंडे में कुल 21 विषय शामिल हैं। इनमें खाद्य विभाग से जुड़े गेहूं के निराकरण के प्रस्ताव के साथ सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता नए जिलों में शिक्षा अधिकारियों के कार्यालयों के गठन पेंशन और चिकित्सा देयकों से जुड़े मामले भी रखे गए हैं। इसके अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं को जारी रखने और सेवानिवृत्त अधिकारियों को संविदा नियुक्ति देने के प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा।

    छह साल पुराने गेहूं के मामले पर नजर

    कैबिनेट बैठक के प्रमुख विषयों में वर्ष 2020-21 के दौरान खरीदे गए चमकविहीन गेहूं के निराकरण का मामला शामिल है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से 7 लाख मीट्रिक टन चमकविहीन गेहूं के टेंडर के जरिए निराकरण की प्रक्रिया पूरी करने और 5.80 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निराकरण को कार्योत्तर मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रस्ताव पर सरकार विचार करेगी। कार्योत्तर मंजूरी का अर्थ किसी कार्य या प्रक्रिया के पूरा होने के बाद उसके लिए औपचारिक स्वीकृति लेने से है। हालांकि बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलेगी या नहीं इसका फैसला कैबिनेट के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

    सिंचाई परियोजनाओं को जारी रखने पर चर्चा

    जल संसाधन विभाग की तीन प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक में शामिल हैं। इनमें छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स चेटरखेड़ा वृहद सिंचाई परियोजना और पचमनगर सिंचाई कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। इन परियोजनाओं की निरंतरता को लेकर सरकार विचार करेगी। इसके साथ पांच वर्ष की अवधि वाली एक वृहद परियोजना को आगे जारी रखने का प्रस्ताव भी एजेंडे में रखा गया है। इन प्रस्तावों का संबंध सिंचाई व्यवस्था और परियोजनाओं के काम को निरंतर आगे बढ़ाने से है।

    वन विभाग की कैम्पा निधि के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना पर भी चर्चा होगी। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग ने नवगठित जिलों निवाड़ी मऊगंज पांढुर्णा और मैहर में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्थापित करने के लिए नए पदों की स्वीकृति का प्रस्ताव रखा है। इससे इन जिलों में शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।

    पेंशन और चिकित्सा बिलों पर भी विचार

    कैबिनेट के एजेंडे में सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों की पेंशन से जुड़े मामले भी शामिल हैं। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के प्रस्ताव में सेवानिवृत्त सहायक ग्रेड-2 मार्तंड सिंह परिहार की देय पेंशन वापस लेने का विषय रखा गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत पूर्व सहायक यंत्रियों की पेंशन से जुड़े मामलों पर भी विचार होगा। इनमें बड़वानी जिले की जनपद पंचायत निवाली का मामला शामिल है।

    गृह विभाग के अंतर्गत पुलिस अधिकारी नीलकंठ बढ़ार की वेतनवृद्धि से जुड़े पुराने प्रकरण पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा छतरपुर में पदस्थ वैज्ञानिक अधिकारी रितेश चंद्र शुक्ल और दिवंगत आरक्षक 515 अभिषेक सिंह भदौरिया के निजी अस्पतालों में हुए उपचार के चिकित्सा देयकों की स्वीकृति के प्रस्ताव भी रखे गए हैं। जबलपुर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के चिकित्सा देयकों के भुगतान का मामला भी बैठक में शामिल है।

    योजनाओं की निरंतरता और संविदा नियुक्तियां

    सामान्य प्रशासन विभाग के एजेंडे में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी ईओडब्ल्यू के वेतन भत्ते प्रशासनिक भवन निर्माण और विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव से जुड़ी योजना जारी रखने का प्रस्ताव है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग की योजनाओं को 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि यानी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने पर भी विचार किया जाएगा। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन विभाग की सात योजनाओं के स्वीकृत मदों को इसी अवधि तक जारी रखने का प्रस्ताव भी शामिल है।

    आनंद विभाग में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ओमप्रकाश श्रीवास्तव को राज्य आनंद संस्थान के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव रखा गया है। नर्मदा घाटी विकास विभाग में शिकायत निवारण प्राधिकरण के सदस्य न्यायिक पद पर नियुक्ति और संस्कृति विभाग में सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी सुरेश कुमार पाठक को संविदा नियुक्ति देने के विषय पर भी चर्चा होगी। अब इन सभी प्रस्तावों पर कैबिनेट के फैसले का इंतजार रहेगा।

  • जब सीएम को याद आया पूर्व जन्म, जीतू पटवारी ने बताया भ्रष्टाचार का रेट, नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते

    जब सीएम को याद आया पूर्व जन्म, जीतू पटवारी ने बताया भ्रष्टाचार का रेट, नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते


    कटनी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के अलग अलग अंदाज चर्चा का विषय बने हुए हैं। कहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साधते नजर आए तो कहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व जन्म का जिक्र कर लोगों का ध्यान खींचा। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अपने कार्यकर्ता को खुद जूते पहनाए जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिवासी ग्रामीणों के साथ थिरकते दिखाई दिए। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में जनसंपर्क और नेताओं की सार्वजनिक छवि को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

    जीतू पटवारी ने मंच से दिखाया भ्रष्टाचार का कथित रेट कार्ड

    कटनी जिले के बरही में पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक कार्यक्रम के दौरान सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर हमला बोला। हाल ही में एक अधिकारी का वीडियो सामने आया था जिसमें नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार को लेकर बातें कही गई थीं। इसी मुद्दे को उठाते हुए पटवारी मंच पर डस्टबिन फिनाइल की कैन और बल्ब लेकर पहुंचे। उन्होंने इन वस्तुओं की कीमतों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि एक बाल्टी की कीमत एक लाख रुपये फिनाइल की बोतल की कीमत 36 हजार रुपये और बल्ब की कीमत 11 हजार रुपये बताई जा रही है। इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए। हालांकि इन कीमतों और आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है।

    पटवारी ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी पर रिश्वत लेने के मामले को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। इसी दौरान बरही में उनकी बाइक रैली भी चर्चा में रही। पटवारी खुद बुलेट चलाते नजर आए लेकिन उनके सिर पर हेलमेट नहीं था। रैली में दूसरे कार्यकर्ताओं के भी बिना हेलमेट होने की बात सामने आई। इस घटना को लेकर यातायात नियमों के पालन पर सवाल उठे।

    दिग्विजय सिंह की यात्रा में राम भजन के साथ सियासी नारे

    पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दशहरे पर उज्जैन से राम नाम के साथ सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा लेकर निकले थे। यह यात्रा अयोध्या तक जाने वाली है। शाजापुर पहुंचने पर दिग्विजय सिंह एक राम भजन पर थिरकते नजर आए। लेकिन यात्रा के दौरान राजनीतिक नारे भी सुनाई दिए। रिपोर्ट के मुताबिक वहां भाजपा के खिलाफ चंदा चोरी और वोट चोरी से जुड़े नारे लगाए गए। दिग्विजय सिंह ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली इंडिया गठबंधन की रैली के लिए लोगों को आमंत्रित भी किया। इससे यात्रा के गैरराजनीतिक होने के दावे और उसके दौरान दिखे राजनीतिक संदेशों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते

    दतिया के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने एक कार्यकर्ता को जूते पहनाने के कारण चर्चा में आए। बताया गया कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ता के बूथ पर भाजपा को हार मिली थी। इसके बाद उसने प्रण लिया था कि जब तक वह अपने बूथ पर पार्टी को जीत नहीं दिलाएगा तब तक जूते चप्पल नहीं पहनेगा। हालिया उपचुनाव में उसके बूथ पर भाजपा को अधिक वोट मिलने के बाद जूते पहनने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नरोत्तम मिश्रा ने खुद कार्यकर्ता को जूते पहनाए और उसके लेस बांधे। यह दृश्य पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ नेताओं के जुड़ाव के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

    सीएम मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के अलग अंदाज

    बड़वानी जिले के सेंधवा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मलखंब का प्रदर्शन देखा और प्रभावित होकर एक बच्चे को अपने कंधे पर बैठा लिया। एक कार्यक्रम में बारेली बोली का जिक्र होने पर उन्होंने इसे सीखने की बात कही और अपने पूर्व जन्म में बारेला होने का उल्लेख किया। उनके इस बयान की चर्चा जनसंपर्क के संदर्भ में हुई।

    वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने संसदीय क्षेत्र के नीलगढ़ गांव पहुंचे जहां विस्थापन से जुड़े मुद्दों के बीच वे आदिवासी ग्रामीणों के साथ बैठे और भोजन किया। वे ग्रामीणों के साथ नाचते थिरकते भी दिखाई दिए। उन्होंने वनों और वन्य प्राणियों की रक्षा के लिए गांव छोड़ने के फैसले को त्याग और प्रकृति के प्रति प्रेम का उदाहरण बताया।

    प्रदेश की इन घटनाओं से साफ है कि राजनीतिक गतिविधियों में भाषणों के साथ नेताओं के व्यवहार और सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीरें भी चर्चा का हिस्सा बन रही हैं। कहीं आरोपों के जरिए सरकार को घेरा जा रहा है तो कहीं भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव के जरिए जनता तक पहुंचने की कोशिश दिखाई दे रही है।

  • नशे के खिलाफ शिवपंथ के अभियान की CM ने की सराहना, बोले- सरकार और समाज मिलकर बदल सकते हैं तस्वीर

    नशे के खिलाफ शिवपंथ के अभियान की CM ने की सराहना, बोले- सरकार और समाज मिलकर बदल सकते हैं तस्वीर


    बड़वानी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी जिले के ग्राम अजगरिया में आयोजित शिवपंथी नशामुक्ति कार्यक्रम में नशे के खिलाफ जनजागरण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशा नाश की जड़ है और अपने साथ कई तरह की बुराइयां तथा सामाजिक विकृतियां लेकर आता है। हर व्यक्ति को संकल्प लेना चाहिए कि वह स्वयं नशे से दूर रहेगा और अपने परिवार तथा समाज को भी इस बुराई से बचाने के लिए प्रयास करेगा। मुख्यमंत्री ने शिवपंथ समुदाय की ओर से नशामुक्ति के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक भागीदारी से इस अभियान को जनआंदोलन बनाया जा सकता है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिवपंथ के संस्थापक परम पूज्य गुरुवर्य श्री वनसिंह महाराज को नमन किया। उन्होंने श्री कालूसिंह महाराज और सुमली माताजी के प्रयासों की भी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य जीवन अनमोल है और इसे नशे की प्रवृत्ति में बर्बाद करने के बजाय ऐसे कार्यों में लगाना चाहिए जिनसे जीवन सार्थक बने। आध्यात्मिकता और सत्संग के माध्यम से लोगों को सकारात्मक दिशा देने का शिवपंथ का प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायी है।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नशामुक्त समाज बनाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसमें परिवारों सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2029 तक नशे की बुराई को दूर करने के लक्ष्य की दिशा में सभी को मिलकर काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने शरद पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की धार्मिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आस्था और जनजागरण को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस वर्ष किसान कल्याण वर्ष मना रही है। किसान और ग्रामीण परिवार गौपालन तथा दुग्ध उत्पादन के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकते हैं। सरकार गौशालाओं के संचालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए सहायता देगी। दूध समितियों के माध्यम से दूध बेचने पर ग्रामीणों को आमदनी का अवसर मिलेगा। उन्होंने लोगों से दूध और पौष्टिक आहार अपनाने तथा नशे से दूर रहने की अपील की।

    बड़वानी प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए कई घोषणाएं भी कीं। इनमें ग्राम में खुपजदेव धाम का निर्माण और वहां तक सड़क बनाने की घोषणा शामिल है। ग्राम अजगरिया में बालक और बालिकाओं के लिए 100-100 सीटर छात्रावास बनाए जाने की बात कही गई। ग्राम पांजरिया ध में 50 लाख रुपये की लागत से सर्वसुविधायुक्त शेड बनाने तथा ग्राम धवली में पुलिस चौकी स्थापित करने की घोषणा भी की गई।

    मुख्यमंत्री ने स्थानीय भाषा और जनजातीय समुदाय से जुड़े विषयों पर भी ध्यान देने की बात कही। बारेली भाषा के संरक्षण और विकास के लिए दस्तावेजों के संरक्षण तथा शोध पर काम किया जाएगा। आदिवासी क्षेत्र में सिकल सेल बीमारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं जांच परामर्श और उपचार की व्यवस्था को मजबूत करने की घोषणा की गई। इसके साथ ही वन औषधियों के संरक्षण और शोध को बढ़ावा देने के लिए बड़वानी में वन औषधि शोध संस्थान स्थापित करने की बात कही गई।

    वन अधिकार के तहत जिन जनजातीय परिवारों को अभी पट्टे नहीं मिले हैं उन्हें पट्टे देने और जिन परिवारों को पट्टे मिल चुके हैं उनकी रजिस्ट्री कराने की घोषणा भी की गई। इन घोषणाओं का उद्देश्य क्षेत्र में शिक्षा स्वास्थ्य आजीविका और आदिवासी अधिकारों से जुड़े प्रयासों को गति देना है।

    शिवपंथी सत्संग संगठन लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में नशामुक्ति के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। संगठन की मान्यता है कि आध्यात्मिकता सत्संग और अनुशासित जीवनशैली के माध्यम से व्यक्ति को नशे से दूर रहने की प्रेरणा मिल सकती है। शरद पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं पुरुष बुजुर्ग और बच्चे शामिल हुए। धार्मिक भजनों के साथ दूध प्रसादी और चावल की खिचड़ी का वितरण किया गया। कार्यक्रम में नशामुक्त समाज बनाने और क्षेत्र के विकास के लिए सामूहिक प्रयासों का संदेश दिया गया।

  • आदिवासी अंचल में शिवपंथ के प्रयासों की CM ने की सराहना, सनातन संस्कृति और अच्छे संस्कारों पर दिया जोर

    आदिवासी अंचल में शिवपंथ के प्रयासों की CM ने की सराहना, सनातन संस्कृति और अच्छे संस्कारों पर दिया जोर


    बड़वानी । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वानी के आदिवासी अंचल में शिवपंथ समुदाय और गायत्री परिवार की ओर से किए जा रहे सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों की सराहना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार सनातन संस्कृति के मूल्य और अनुशासन सिखाना बेहद जरूरी है। इससे आने वाली पीढ़ी संस्कारवान चरित्रवान और जिम्मेदार नागरिक बन सकेगी। उन्होंने शिवपंथ समुदाय की ओर से नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को भी समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 26 अक्टूबर को अपने बड़वानी प्रवास के दौरान मीडिया से चर्चा में कहा कि शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आदिवासी अंचल में रात्रि विश्राम करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्हें क्षेत्र में समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले कई प्रयासों को करीब से देखने और समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि शिवपंथ समुदाय के महाराज बंशी और उनके अनुयायी भगवान की भक्ति तथा महादेव की आराधना के साथ नशे के विरुद्ध जनजागरण अभियान चला रहे हैं। आदिवासी समाज में नशे की समस्या को दूर करने के लिए इस तरह के प्रयास सराहनीय हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में स्थायी बदलाव लाने के लिए सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना चाहिए। जब लोगों की भागीदारी से नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता जैसे अभियान चलाए जाते हैं तो उनका प्रभाव व्यापक हो सकता है। उन्होंने कहा कि शिवपंथ समुदाय की ओर से धार्मिक आस्था को सामाजिक सुधार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे अभियान लोगों को बेहतर जीवनशैली अपनाने और परिवार तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

    डॉ. मोहन यादव ने गायत्री परिवार की गतिविधियों की भी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि बीती रात गायत्री परिवार के आश्रम में रुकने का अवसर मिला। यहां बच्चों और युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए संस्कार आधारित कार्यक्रमों और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। आश्रम में सुबह योगाभ्यास सहित विभिन्न गतिविधियों में शामिल होकर उन्हें सुखद अनुभूति हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास में शिक्षा के साथ अनुशासन और नैतिक मूल्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को केवल किताबी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को अपने परिवार समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराना भी जरूरी है। सनातन संस्कृति की परंपराओं और जीवन मूल्यों से परिचित कराकर उनमें अच्छे व्यवहार सेवा भावना और चरित्र निर्माण की नींव मजबूत की जा सकती है। मुख्यमंत्री के अनुसार इस तरह के प्रयास युवाओं को सही दिशा देने के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक होते हैं।

    मुख्यमंत्री ने बड़वानी को निमाड़ का पेरिस बताते हुए कहा कि इस प्रवास के दौरान समाज निर्माण और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े कई प्रेरणादायी कार्य देखने को मिले। उन्होंने कहा कि शरद पूर्णिमा से दीपावली तक का समय सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। ऐसे पर्व समाज में सद्भाव सेवा और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करने का संदेश देते हैं।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार जनकल्याण सामाजिक उत्थान और लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और समाज के साझा प्रयासों से संस्कारवान पीढ़ी तैयार करने नशे से दूर रहने और सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ाने जैसे उद्देश्यों को मजबूती मिलेगी।

  • इंदौर में जुटेगी सेमीकंडक्टर उद्योग की ताकत, CM मोहन यादव के शुभारंभ से निवेश और तकनीक पर टिकी नजरें

    इंदौर में जुटेगी सेमीकंडक्टर उद्योग की ताकत, CM मोहन यादव के शुभारंभ से निवेश और तकनीक पर टिकी नजरें


    इंदौर । मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर उद्योग के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में इंदौर में महत्वपूर्ण पहल की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 अक्टूबर को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट 2026 का शुभारंभ किया। दो दिवसीय इस आयोजन का उद्देश्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देना और देश विदेश की कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करना है। सरकार की कोशिश है कि मध्य प्रदेश को तकनीक आधारित उद्योगों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाए और प्रदेश में नए औद्योगिक अवसरों के साथ रोजगार के रास्ते भी खोले जाएं।

    समिट में मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर हब बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। इस आयोजन में देश और विदेश की कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ निवेशक उद्योग विशेषज्ञ शिक्षाविद और स्टार्टअप से जुड़े लोग भाग ले रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 50 से अधिक कंपनियां इस समिट में शामिल हैं। कंपनियां अपनी तकनीक उत्पाद और समाधान प्रदर्शित कर रही हैं। आयोजन के दौरान निवेश की संभावनाओं के साथ तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विकास को लेकर भी विचार विमर्श किया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस तरह के आयोजन से प्रदेश में नई परियोजनाओं के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा।

    सेमीकंडक्टर आधुनिक तकनीक की रीढ़ माने जाते हैं। मोबाइल फोन कंप्यूटर इलेक्ट्रिक वाहन औद्योगिक मशीनों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े उपकरणों में इनका व्यापक इस्तेमाल होता है। डिजिटल तकनीक के तेजी से विस्तार के कारण दुनिया भर में चिप निर्माण और उससे जुड़ी तकनीकों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इससे विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ तकनीकी सेवाओं और सहायक उद्योगों के विस्तार की संभावनाएं भी बन सकती हैं।

    प्रदेश सरकार ने निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति 2025 को मंजूरी दी है। इस नीति में पात्र निवेशकों के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसमें 25 प्रतिशत सब्सिडी और दस वर्षों तक दो रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देने का प्रावधान शामिल है। सरकार की मंशा है कि ऐसी सुविधाओं के माध्यम से निवेशकों को आकर्षित किया जाए और प्रदेश में सेमीकंडक्टर से जुड़ी परियोजनाओं की स्थापना को गति मिले।

    इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं के बीच पारस सेमीकंडक्टर्स की ओर से सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा स्थापित करने के लिए 6200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश से जुड़ा समझौता भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती है तो इससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि प्रस्तावित निवेश और वास्तविक परियोजना के क्रियान्वयन के बीच अंतर होता है इसलिए इसकी प्रगति पर नजर रखना भी जरूरी होगा।

    समिट में उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा युवाओं को आधुनिक तकनीक के लिए प्रशिक्षित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। चिप डिजाइन निर्माण और टेस्टिंग जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने वाले युवाओं के लिए भविष्य में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। अब इस आयोजन की सफलता इस बात से तय होगी कि कितने निवेश प्रस्ताव वास्तविक परियोजनाओं में बदलते हैं और कितने रोजगार के अवसर तैयार होते हैं। इंदौर में आयोजित यह समिट मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर उद्योग में आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • सीएम के सामने बदले मंच के समीकरण, रावण के 9 सिर पर सवाल और अफसर को मकान नहीं, एमपी के ये किस्से चर्चा में

    सीएम के सामने बदले मंच के समीकरण, रावण के 9 सिर पर सवाल और अफसर को मकान नहीं, एमपी के ये किस्से चर्चा में


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में दशहरे के आयोजनों के दौरान कुछ ऐसे दिलचस्प नजारे सामने आए जिन्होंने राजनीति से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक को चर्चा में ला दिया। कहीं मुख्यमंत्री के सामने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ हुई एक घटना ने सियासी गलियारों में तंज का मौका दिया तो कहीं रावण के पुतले में दस की जगह नौ सिर लगाए जाने पर सवाल उठे। वहीं हरदा में पूर्व मंत्री कमल पटेल का भाषण उस समय चर्चा में आ गया जब बीच कार्यक्रम में उनके पास फोन पहुंच गया। इन घटनाओं के बीच नए जिले में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी को सरकारी आवास नहीं मिलने का मामला भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता नजर आया।

    भोपाल में दशहरे के एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच की ओर जा रहे थे। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री की अगवानी कर रहे थे और उन्हें आगे लेकर बढ़ रहे थे। इसी दौरान मध्य प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा ने मुख्यमंत्री से हाथ मिलाया। लेकिन मुलाकात ज्यादा देर नहीं चल सकी। रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री को आगे बढ़ने का इशारा करते दिखाई दिए और इसी दौरान वीडी शर्मा को धक्का लगने के बाद वह एक तरफ हो गए। इस घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इस पर राजनीतिक अंदाज में टिप्पणियां कीं। हालांकि इस दृश्य से किसी की राजनीतिक हैसियत या इरादे के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा लेकिन घटना चर्चा का विषय जरूर बन गई।

    दूसरा दिलचस्प मामला ग्वालियर जिले के डबरा का है जहां दशहरे पर रावण के पुतले को लेकर चूक सामने आई। रावण को दशानन कहा जाता है और उसके दस सिरों की पहचान धार्मिक कथाओं में खास महत्व रखती है। लेकिन यहां पुतले में दस की जगह नौ सिर ही लगाए गए थे। जब इस गलती पर लोगों का ध्यान गया तो आयोजन से जुड़े लोगों ने दसवां सिर भी लगा दिया। इसके बावजूद मामला पूरी तरह नहीं संभला क्योंकि नए सिर का आकार भी चर्चा का कारण बन गया। इस छोटी सी चूक ने दशहरे के आयोजन को लोगों के बीच हास्य और सवालों का विषय बना दिया।

    हरदा में दशहरा उत्सव के दौरान पूर्व मंत्री कमल पटेल अपने भाषण को लेकर सुर्खियों में रहे। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच उन्होंने जोशीले अंदाज में अपनी बात रखी। भाषण के दौरान उन्होंने भारत माता का अपमान करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान राम का वंशज तथा अवतारी पुरुष बताया। इसी बीच एक युवक उनके पास फोन लेकर पहुंचा। कमल पटेल ने भाषण रोककर फोन पर बात करना शुरू कर दिया। इस घटनाक्रम पर भी लोगों ने चुटकी ली और सवाल उठाया कि आखिर भाषण के बीच फोन आने की वजह क्या थी। हालांकि फोन आने के कारण का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया।

    इसी बीच प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा एक और मामला सामने आया। बताया गया कि नए जिले में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी को रहने के लिए सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो सका। उन्हें बताया गया कि पहले पदस्थ अधिकारी ने भी करीब दो साल रेस्ट हाउस में रहकर समय बिताया था और परिवार को साथ नहीं रख पाए थे। यह स्थिति नए जिलों में सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों की तैनाती के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की चुनौती को सामने लाती है। कुल मिलाकर दशहरे के इन किस्सों ने प्रदेश में राजनीतिक घटनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी।

  • मोहन यादव ने मुंबई में किया बड़ा ऐलान, बीना से आष्टा तक फैलेगा पेट्रोकेमिकल उद्योग, 2040 तक देश को ट्रिलियन डॉलर इंडस्ट्री बनाने का लक्ष्य

    मोहन यादव ने मुंबई में किया बड़ा ऐलान, बीना से आष्टा तक फैलेगा पेट्रोकेमिकल उद्योग, 2040 तक देश को ट्रिलियन डॉलर इंडस्ट्री बनाने का लक्ष्य


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई में आयोजित इंडिया केम 2026 के उद्घाटन सत्र में बताया कि बीना में 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल परियोजना विकसित की जाएगी। इस परियोजना से हर साल 22 लाख टन से अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार करने का लक्ष्य है। इससे प्लास्टिक पैकेजिंग फार्मा टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को जरूरी कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। साथ ही प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री के मुताबिक ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद मध्यप्रदेश में करीब 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय इंडिया केम 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल भी मौजूद रहे। इस आयोजन में देश और विदेश के रसायन पेट्रोकेमिकल पॉलिमर तथा एग्रोकेमिकल उद्योगों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान रसायन उद्योग से संबंधित रिपोर्ट और शोध सामग्री का विमोचन भी किया गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए बिजली पानी जमीन और औद्योगिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। बीना की परियोजना के साथ विजयपुर में गेल के गैस प्रसंस्करण ढांचे और सीहोर जिले के आष्टा में गेल इंडिया की पेट्रोकेमिकल परियोजना का भी उल्लेख किया गया। इन परियोजनाओं से प्रदेश में पेट्रोकेमिकल और उससे जुड़े उद्योगों के विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। सरकार का प्रयास है कि बड़े उद्योगों के साथ छोटे और मध्यम उद्यमों को भी विकास के अवसर मिलें।

    प्रदेश में प्लास्टिक और पॉलिमर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए रायसेन जिले के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर के बिलोवा में 93 एकड़ क्षेत्र में प्लास्टिक पार्क विकसित किए गए हैं। इन पार्कों के जरिए संबंधित क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों को प्रोत्साहित करने की योजना है। इसके अलावा पीएम मित्रा पार्क के माध्यम से टेक्सटाइल उद्योग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार उद्योगों के लिए सरल और पारदर्शी व्यवस्था बनाने के साथ बिजली पानी और जमीन जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    डॉ. यादव ने देश के रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग की विकास संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में इस क्षेत्र का बाजार करीब 120 अरब डॉलर का था जो अब दोगुने से अधिक हो चुका है। उन्होंने वर्ष 2040 तक भारत के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को एक ट्रिलियन डॉलर का उद्योग बनाने के लक्ष्य में मध्यप्रदेश की भागीदारी की बात कही। वैश्विक तनाव कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के बीच घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने को महत्वपूर्ण बताया गया।

    कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने रसायन उद्योग में सुरक्षा गुणवत्ता और कारोबार सुगमता पर जोर दिया। उन्होंने खतरनाक रसायनों के सुरक्षित संचालन के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने और गुणवत्ता नियंत्रण मानकों को लागू करने से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी। साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों पर इन नियमों के प्रभाव को ध्यान में रखने की जरूरत बताई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। उन्होंने महाराष्ट्र में रसायन उद्योग की भूमिका और नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजनाओं का भी उल्लेख किया।

    बीना की प्रस्तावित परियोजना से मध्यप्रदेश में पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों के लिए नई संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि निवेश प्रस्तावों को वास्तविक उत्पादन और रोजगार में बदलने के लिए परियोजना का क्रियान्वयन जरूरी होगा। आने वाले समय में इसकी प्रगति प्रदेश के औद्योगिक विकास पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।